बुधवार, 7 दिसंबर 2016

मोबाइल फोन बैंक बन गया है : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



तकनीक ने हमारे जीवन को सरल बनाया है 

और मोबाइल फोन बैंक बन गया है : प्रधानमंत्री

November 27, 2016

१ - एनडीए सरकार गरीबों, किसानों और वंचितों की सेवा के प्रति तत्पर है: नरेंद्र मोदी                                   
२ - केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने किसानों को कम ब्याज पर ज्यादा बीमा मुहैया कराया:  नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री                                                                                                                             
३ -भ्रष्टाचार और कालेधन जैसी बुराईयों ने देश को बर्बाद कर दिया है। भारत को अब इन सभी बुराईयों से मुक्ति मिलनी चाहिए: प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी                                                                                                   
४ - तकनीक ने हमारे जीवन को सरल बना दिया है, मोबाइल फोन आज हमारे बैंक बन गये हैं:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत माता की... जय
भारत माता की.. जय
        महात्मा बुद्ध की महा परिनिर्माण स्थली कुशीनगर की ई पवित्र भूमि के प्रणाम करत बानी... सब काम-धाम, खेती-बारी, जोतनी-बोवनी छोड़ के रौव्वा लोगन-लोग इतनी बड़ी संख्या में यहां आईल बीड़ी... ई देखके हमार मन गदगद हो गईल बा। आप लोगन के भी प्रधान सेवक के नमस्कार..ई भगवान बुद्ध का धरती है, भगवान महावीर का ई धरती है...भारत सहित पूरी दुनिया के इहे धरती शांति, अहिंसा के उपदेश दीहलस। अस्तेर अउर क्रांति, एवं योग के ऊ नायक शिवा अवतारी महायोगी गोरखनाथ... यहि क्षेत्र के तपस्या के लिए चुनल, महान संत कबीर इहे क्षेत्र में चीरशांति पउलस, इहे भूमि पर दुनिया में सबसे पहले लोकतंत्र के जन्म भईल... गणराज्यन के ई पवित्र भूमि से प्रदेश में परिवर्तन के हुंकार फुकलें के अब समय आ गईला बा। रौव्वा लोग अब प्रदेश के विकास की खातिर भी गौठी बांधी तैयार हो जाई...
       मंच पर विराजमान श्रीमान ओम जी, प्रदेश के उत्साही..लोकप्रिय नौजवान अध्यक्ष श्री केशव प्रसाद मोर्य जी, आदरणीय कलराज मिश्र जी, श्री मनोज सिन्हा जी, अनुप्रिया पटेल जी, सांसद श्रीमान आदित्यनाथ जी, रीता बहुगणा जी, श्रीमान रमापति जी, रामेश्वर जी, सूर्यप्रताप जी, उपेंद्र शुक्ला जी, स्वामी प्रसाद मौर्य जी, हमारे यहां के सांसद श्रीमान राजेश पांडे जी, श्रीमान कामेश्वर सिंह जी, श्री राम चौहान जी, संतोषी जी, जन्मेजय सिंह जी, दारासिंह जी, विजय दुबे जी, स्वतंत्र देवसिंह जी, जयप्रकाश जी, श्री प्रताप शुक्ला जी, जयप्रकाश निषाद जी, भाई पंकज सिंह जी, महेंद्र यादव जी, श्री गंगा सिंह कुशवाहा जी, रविंद्र कुशवाहा जी और विशाल संख्या में पधारे हुए...मेरे प्यारे भाईयो और बहनों....
        मुझे एक बार फिर आप सब के बीच आने का सौभाग्य मिला है। 2014 के चुनाव में मैं उत्तर प्रदेश के काशी क्षेत्र से चुनाव लड़ रहा था। उत्तर प्रदेश के कई स्थानों में जाने का सौभाग्य मिला था, लेकिन मेरे भाईयों-बहनों... उस समय मैं खुद चुनाव लड़ रहा था... यहां कुशीनगर में भी आया था, लेकिन उस समय सभा में इससे आधे लोग भी नहीं आते थे... और माताएं-बहनें तो कभी नहीं आती थीं। आज इतनी बड़ी तादाद में माताएं-बहनें मुझे आशीर्वाद देने आए हैं... इतनी बड़ी विशाल जनसभा... मुझे आशीर्वाद देने आई है। माताएं-बहनें, भाईयों-बहनों मैं आप सब को सर झुका कर नमन करता हूं, आप का अभिनंदन करता हूं और आपने मुझ पर जो यह विश्वास जताया है, आपके आशीर्वाद से... आपके विश्वास को कभी... मैं चोट नहीं पहुंचने दूंगा, आंच नहीं आने दूंगा। भाईयों-बहनों हम सालों से सुनकर के आए हैं... कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है।
        अगर भारत में गांव, गरीब, किसान उसके जीवन में अगर हमने बदलाव लाया होता तो हिंदुस्तान को आज जो मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं... ये मुसीबतें कभी झेलनी नहीं पड़ती... ये हमारा गांव ताकतवर होता... हमारा किसान ताकतवर होता तो वो हिंदुस्तान की समस्याओं को दूर करने के लिए सबसे पहले खड़ा हुआ होता और इसलिए भाईयों-बहनों आज जो दिल्ली में सरकार बैठी है, ये सरकार पूरी तरह गरीबों को समर्पित है, ये सरकार गांव को समर्पित है, ये सरकार किसानों को समर्पित है, ये सरकार दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित... इन सभी हमारे समाज के लोगों को समर्पित है, उनका कल्याण करना चाहती है। भाईयों-बहनों यहां गन्ना का किसान कैसी-कैसी परेशानियों से गुजरा है ये कौन नहीं जानता है?
       चीनी मिलें यहां के जीवन के लिए चुनौती बन गई और राजेश जी कह रहे थे कि अगर देने वाला मजबूत है तो मांगने की ज़रुरत क्या है? भाईयों-बहनों... मैं भी आप ही के जैसा हूं, ये जमाना चला गया... जब सरकार में बैठे हुए लोग ये मानते थे कि वो देने वाले बन गए हैं हम तो सेवक हैं..सेवक, आपकी सेवा करने के लिए आए हैं आपका कष्ट...आपका कष्ट हमारा कष्ट है, आपकी कठिनाईयों को दूर करना ही हमारी जिम्मेवारी है, सेवा भाव से करना हमारी जिम्मेवारी है... भाईयों-बहनों, अगर देने वाला कोई है तो देशवासी हैं भाईयों-बहनों भाईयों-बहनों...जनता जनार्दन देने वाली होती है और आपने मुझे इतना दिया है इतना दिया है मैं तो कर्ज चुकाने आया हूं भाईयों-बहनों... कर्ज चुकाने आया हूं।
       2014-15 में गन्ना किसानों का बकाया 22 हजार करोड़ रुपया था भाईयों-बहनों 22 हजार करोड़ और लोगों को ऐसी आदत हो गई थी... भई इसके बिना ठीक है आया तो आया... नहीं आया तो नहीं आया इसी से गुजारा कर लो। लोग नाराज़गी भी व्यक्त नहीं करते थे, सिर्फ हाथ जोड़कर विनती करते रहते थे, चीनी मालिकों को कह रहे थे कि जरा भुगतान कर दो। लखनऊ में सरकार को परवाह नहीं होती थी, उसको तो लगता थी कि चुनाव आएंगे... कुछ इधर-उधर का बांट देंगे तो चल जाएगा। लोग सहने के आदि हो गए थे। जब दिल्ली में सरकार बनी उत्तर प्रदेश के लोगों ने मुझे इतना बड़ा सेवा का अवसर दिया... हमने तय किया कि गन्ना किसानों की चिंता करेंगे। भाईयों-बहनों 2014-15 के 22 हजार करोड़ बकाया था अब शायद मुश्किल से अंगुली से गिन सकेंगे इतना सा बचा होगा बाकी सारी बातें किसान के घर तक पहुंचा दी।
        मेरे पास चीनी वाले आए थे वो कह रहे थे साहेब... दाम कम हो गया है चीनी का कारखाना चलाना मुश्किल हो गया है, हमें पैकेज दे दो। मैंने कहा पैकेज लेने की आपकी आदत पुरानी है, लेकिन मोदी नया है... मुझे ये पुरानी आदत आती नहीं है, तो पहली मीटिंग में मैंने कहा जो मांगोगे देने को तैयार हूं तो बड़े खुश होकर के गए... फिर मैंने धीरे से अफसरों को भेजा और मैंने कहा जरा मुझे सूची दो कौन-कौन गन्ने किसान का कितना पैसा बकाया है... उसकी ज़रा सूची दो तो चीनी मिल के लोग ज़रा कांपने लग गए, फिर दोबारा मिलने आए। मैंने कहा पैकेज मिलेगा लेकिन कारखानें के मालिक को नहीं मिलेगा। हमें सूची दे दो... गन्ना किसान को जो बकाया है सीधा-सीधा उसके बैंक अकाउंट में जमा करेंगे, आपको बीच में नहीं आने देंगे। वो कहने लगे नहीं..नहीं साहेब पैकेज नहीं चाहिए, यहां तक कहने लग पैकेज नहीं चाहिए। भाईयों-बहनों सरकार ने फैसला किया कि गन्ना किसानों का बकाया है उसका पैकेज चीनी मालिकों को नहीं दिया जाएगा, गन्ना किसानों के खाते में जमा होगा और जिन-जिन लोगों ने बैंक का खाता खुलवाया, उसका तुरन्त फायदा उनको मिल गया, उनके खाते में सीधा पैसा जमा हो गया कोई बिचौलिया बीच में नहीं आया।
      भाईयों-बहनों चीनी मिलें... चलें... गन्ना किसानों को उनकी मेहनत का पैसा मिले, इसके लिए हमारी भरपूर कोशिश है। लेकिन इसके लिए... एक के बाद एक कदम उठाने पड़ते हैं, हमने कदम उठाया कि जब चीनी का दाम कम हो जाता है दुनिया में... तो चीनी मिलें बंद हो जाती है, चीनी मिलें बंद हो जाए तो गन्ना किसान का गन्ना कोई खरीदता नहीं है और खरीदता है तो तीन महीने, चार महीने के बाद खरीदता है और तब उसका वजन कम हो जाता है, वजन कम हो जाता है तो किसान तो घाटे में ही चला जाता है... ये खेल चलता रहता है और बेचारा किसान चुपचाप सहन करता रहता है।
     हमने तय किया कि अगर दुनिया में चीनी का दाम इधर-उधर हो गया तो हम हिंदुस्तान के चीनी के कारखानें में चीनी नहीं बनाएंगे तो इथेनॉल बनाएंगे और इथेनॉल बनाकर के पेट्रोल, डीजल, की जगह पर उसको उपयोग करेंगे... गाड़ी चलाने के लिए उसको जलाएंगे, लेकिन किसान का गन्ना नहीं जलने देंगे और चीनी मिलों को इथेनॉल बनाने के लिए मज़बूर किया, जिनके पास प्लांट नहीं थे उनको कहा है प्लांट लगाओ, चीनी का दाम गिर जाता है तो चीनी मत बनाओ इथेनॉल बनाओ और पेट्रोल की जगह पर इथेनॉल यूज करो, डीजल की जगह पर इथेनॉल यूज करो लेकिन गन्ने के किसान को मरने नहीं दिया जाएगा... ये काम हमने कर के दिखाया भाईयों-बहनों।
     सौ करोड़ लीटर... आज तक का हिंदुस्तान का रिकॉर्ड है कि भारत ने सौ करोड़ लीटर इथेनॉल बनाकर के गाड़ियों में उसका उपयोग किया। उसके कारण जो विदेशों से... तेल लाना पड़ता है उसमें हम कुछ बचत कर पाए, इधर गन्ना के किसान का भुगतान कर पाए। भाईयों-बहनों समस्याएं आती हैं लेकिन समस्याओं के रास्ते भी खोजे जा सकते हैं। ये सरकार ऐसी है कि समस्याओं को भी सामना करने के लिए हर पल तैयार रहती है... जनता-जनार्दन के साथ खड़े होकर चलती है।
       भाईयों-बहनों मैं हमेशा कहता हूं कि उत्तर प्रदेश का भला तब तक नहीं होगा जब तक उत्तर प्रदेश का पूर्वी... उत्तर प्रदेश का विकास नहीं होगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश का विकास होना चाहिए और विकास करने के लिए रेल का काम हो... रोड का काम हो... इसके लिए भारत सरकार अरबों-खरबों रुपये लगा रही है। हमारे मनोज सिन्हा जी रेल मंत्री... दिन-रात लगे हुए हैं कि रेल में विकास उत्तर प्रदेश में कैसे हो? उत्तर प्रदेश के लोगों को कैसे लाभ मिले?  पूर्वी उत्तर प्रदेश में कोई बीमार हो जाए तो कहां जाए... कब पहुंचे... अच्छी अस्पताल नहीं, भारत सरकार ने निर्णय किया... गोरखपुर के अंदर एम्स का अस्पताल लगा देंगे और उस पूरे इलाके के भाग्य को बदलने के लिए, उनको आरोग्य की सुरक्षा देने के लिए हम काम करेंगे।
      फर्टीलाइजर का कारखाना... उसको चालू करने का हमने निर्णय किया। एक जमाना था, भईया... बहुत-बहुत... आपका प्यार सर-आंखों पर भैया, आपका प्यार सरांखों पर... अब जगह है नहीं कोई आगे आ नहीं आ पाओगे भैया। ये जन-सैलाब उमड़ पड़ा है।
          भाईयों-बहनों... हमने देखा है जब हमारे किसान को यूरिया चाहिए... यूरिया, किसान को रात-रात यूरिया लेने के लिए कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। हड्डियां पिघल जाएं ऐसी ठंड में रात-रात भर खड़ा रहना पड़ता था, लेकिन देश में कभी किसी को इसकी पीड़ा नहीं होती थी, और जब यूरिया लेने जाता था, पुलिस आकर के लाठी चार्ज करती थी, किसान को यूरिया नहीं मिलता था। मेरे भाईयों-बहनों एक साल हो गया... आपने देखा होगा कहीं पर ग्राहक को यूरिया के लिए कतार नहीं लगानी पड़ती, कहीं पर यूरिया के लिए पुलिस को लाठी नहीं चलानी पड़ती, ये कैसे हुआ? ये जादू कैसे आया?
       भाईयों-बहनों रातों-रात, रातों-रात... कोई यूरिया का कारखाना तो नहीं लग गया था, लेकिन क्यों नहीं मिलता था युरिया...? यूरिया की पैदावर नहीं थी क्या...? यूरिया की पैदावर थी... यूरिया के कारखाने चलते थे... किसान को सब्सिडी भी मिलती थी लेकिन यूरिया किसान के खेत में नहीं जाता था... कैमिकल के कारखाने में चोर रास्ते से चला जाता था... और कैमिकल वालों को सस्ते में यूरिया मिल जाता था। उसमें से वो अपनी और चीजें बनाकर के बाजार में बेचते थे।
        फर्टीलाइजर... फसल के लिए हुआ करता था, फर्टीलाइजर यूरिया उद्योगपतियों की भलाई के उपयोग में आता था। हमने आकर के उसकी दवाई की, बड़ा अच्छा ऊपाय ढूंढ करके निकाला। हमने कहा कि हम यूरिया का नीमकोटिंग कर देंगे, जो नीम का पेड़ होता है नीम की जो फली होती है, उसका तेल यूरिया पर लगा देंगे, उससे... जो धरती माता है, उसको भी अच्छा खुराक मिल जाएगा, और एक बार अगर यूरिया पर नीमकोटिंग हो गया... तो किसी भी कैमिकल के लिए वो यूरिया बेकार हो गया, और इसलिए अब 100 ग्राम यूरिया भी कैमिकल के कारखाने में नहीं जाता है। जितना यूरिया पैदा होता है किसान के खेत में जाता है, बताइए भाईयों-बहनों... चोरी बंद हुई कि नहीं हुई? बेईमानी बंद हुई कि नहीं हुई? काला बाजारी बंद हुई कि नहीं हुई? किसान को यूरिया मिला कि नहीं मिला? भाईयों-बहनों...क्या इसका ज्ञान पहले नहीं था क्या? पहले की सरकारों को भी इसका ज्ञान था, कागज पर सब लिखा हुआ है, लेकिन किसान से ज्यादा... उनको कारखानें वालों की चिंता थी। और इसलिए कभी भी उन्होंने यूरिया की इस प्रकार चिंता नहीं की, हमने शत प्रतिशत यूरिया नीमकोटिंग कर दिया। उसके कारण आज किसान को यूरिया मिल रहा है।
       भाईयों-बहनों... हमने किसान के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड बनाया। आज आप देखते होंगे... जब हम बीमार हो जाते हैं, बीमार हो जाते हैं तो हम लोग ब्लड टेस्ट कराते हैं, पेशाब की जांच करवाने के लिए डॉक्टर कहता है, उसका जब तक रिपोर्ट नहीं आता है डॉक्टर दवाई नहीं देता है। वो कहता है पहले पैथोलॉजिकल जांच करवा के लाइए, बल्ड टेस्ट का रिपोर्ट लाइए, युरीन टेस्ट का रिपोर्ट लाइए उसके बाद वो दवाई करता है। भाईयों-बहनों जैसा शरीर का स्वभाव है, वैसा ही हमारी धरती माता का भी है, धरती माता में भी बीमारियां होती हैं, धरती माता में भी ताकत होती हैं, अच्छाईयां होती हैं और इसलिए जैसे हमारे शरीर में ब्लड की जांच हो सकती है, हमारे खून की जांच हो सकती है, हमारे पेशाब की जांच हो सकती है, वैसे ये धरती मां के अंदर क्या..क्या अच्छाईयां हैं... कमियां हैं..., उसकी जांच हो सकती है।
         और इसलिए हमने ये धरती मां की जांच करने की लेबोरेटरी बनाना, अपनी ज़मीन, खेत की ज़मीन का टेस्टिंग कराना और फिर रिपोर्ट आती है कि आपके जमीन में ये दवाई डालनी चाहिए... ये नहीं डालनी चाहिए... ये खाद डालनी चाहिए... ये नहीं डालनी चाहिए... ये फसल उगानी चाहिए... ये फसल नहीं उगानी चाहिए और उसके कारण किसान के जो पैसे बर्बाद होते थे, वरना किसान क्या करता था? अगर पड़ोसी ने लाल डिब्बे वाली दवाई डाल दी तो ये भी लाल डिब्बे वाली दवाई डाल देता था। पड़ोसी ने काले डिब्बे वाला पाउडर डाल दिया तो ये भी काले डिब्बे वाला पाउडर डाल देता था। और उसके कारण किसान को बहुत नुकसान होता था। भाईयों-बहनों... हमने सॉइल हेल्थ कार्ड लगाकर के... किसान को उसकी धरती माता की रक्षा कैसै हो?, उस धरती माता में से ज्यादा से ज्याद उपज कैसे मिले? उसके लिए रास्ता खोल दिया औऱ जो आने वाले दिनों में किसान का भला करने वाला है।
      भाईयों-बहनों... हमारा किसान कितनी ही मेहनत करे लेकिन, हमारा किसान कितनी ही मेहनत करे लेकिन, लेकिन जब प्राकृतिक आपदा आ जाए तो उसकी सारी मेहनत मिट्टी में मिल जाती है, पानी में बह जाती है, किसान बर्बाद हो जाता है। अधिक बारिश आ जाए तो भी किसान दुखी, कम बारिश आ जाए तो भी किसान दुखी, नदियों में ज्यादा पानी आ जाए तो भी किसान दुखी, ज्यादा फसल हो जाए तो भी किसान दुखी, कम फसल हो जाए तो भी किसान दुखी, इस किसान की रक्षा कैसे करेंगे?
         भाईयों-बहनों और इसलिए हम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हम लाए हैं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और उसमें किसान को बहुत कम पैसा देना है, बहुत कम देना है, भारत सरकार पैसे देगी और आपके फसल को कोई भी प्राकृतिक नुकसान होगा तो उस किसान को बीमा योजना से पूरा का पूरा पैसा मिलेगा... भाईयों-बहनों। इतना ही नहीं आपने तय किया हो कि जून महीने में बुवाई करनी है, लेकिन बारिश नहीं आई, आपने सोचा जुलाई में करेंगे फिर भी बारिश नहीं आई, आपने सोचा अगस्त में करेंगे फिर भी बारिश नहीं आई। पानी ही नहीं आया तो बुवाई कहां करोगे?  और बुवाई नहीं की तो फसल कहां होगी?, और फसल नहीं होगी तो फसल बर्बाद भी कैसे होगी? तो ऐसी स्थिति में किसान क्या करेगा? जिसकी बुवाई नहीं हुई तो उसको तो फसल नहीं आनी है तो फसल बीमा लगना नहीं है। पहली बार इस देश में दिल्ली में ऐसी सरकार बैठी है, इसमें ऐसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाए है कि प्राकृतिक आपदा के कारण अगर बुवाई नहीं हुई तो भी उसका हिसाब लगाकर उसको मिनिमम बीमा का पैसा दिया जाएगा।

भाईयों-बहनों कभी हमारा किसान... अच्छी फसल हो... खुशी मना रहा हो... खेत में फसल काट कर खलिहान में बड़ा ढेर किया है.... अपनी किसानी पैदावर का, अब वो इंतजार कर रहा है कि कोई ट्रैक्टर मिल जाए और ट्रैक्टर में समान रखकर बाजार में मंडी में जाकर के बेच कर के आ जाऊंगा। अब उसको ट्रैक्टर आने में देर हो गई दो-चार दिन, पांच दिन, ट्रक आने में देर हो गई, मंडी सामान पहुंचाने में मुश्किल हो गया और अचानक... अचानक बारिश आ गई, सारी फसल तैयार है खेत में ढेर पड़ा है, फसल का बीमा कहां से मिलेगा क्योंकि सब पूरा हो गया था। ये दिल्ली में ऐसी सरकार है, जो किसानों की चिंता करने वाली सरकार है। हमने प्रधानमंत्री फसल बीमा में योजना बनाईं कि फसल की कटाई के बाद जो फसल का ढेर है, अगर 15 दिन के भीतर-भीतर कोई प्राकृतिक आपदा आ गई और किसान का नुकसान हो गया तो उसका बीमा भी मिलेगा भाईयों-बहनों।
        आप मुझे बताईए भाईयों कि बुवाई से लेकर कटाई तक हर परिस्थिति में बीमा देने की ताकत ये दिल्ली में बैठी सरकार लेकर आई है, लेकिन मैं दिल्ली की सरकार को कहना चाहता हूं कि अगर अब झगड़े शांत हो गये हो, आपके पास समय हो, यहां के गरीबों की चिंता करने की फुर्सत हो, किसानों की चिंता करने की फुर्सत हो तो ये उत्तर प्रदेश सरकार ये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना उत्तर प्रदेश में लागू करवाए। यहां के किसानों को जरा लाभ मिले, खर्चा दिल्ली सरकार करने को तैयार है, काम करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार कुछ करे। मुझे नहीं लगता है कर पाएंगे। उनको इसमें इंटरेस्ट ही नहीं है भाईयों, समस्याओं का समाधान करने में इंटरेस्ट नहीं है।
          भाईयों-बहनों आप बताइए कि यहां हमारी गंडक नहर... कितनी लंबी गंडक नहर है, लेकिन उसकी तलहटी में सारी मिट्टी भरी पड़ी है और उसके कारण पानी की संग्रह क्षमता कम हो गई है और केनाल के आखरी में पानी पहुंचता ही नहीं है। पानी दिखता है फिर भी किसान का खेत सूखा है। भाईयों-बहनों हम कह-कह कर थक गए इन सरकारों को... उत्तर प्रदेश सरकार को कह-कह कर थक गए कि मनरेगा के पैसे हम दे रहे हैं आप मनरेगा से इस गंडक की नहर जो है... उसको जरा मिट्टी निकलवाइए ताकि पानी मेरे किसानों को पहुंचे, उनको ये करने की भी फुर्सत नहीं है।
     आप मुझे बताईए भाईयों क्या ये कूड़ा-कचरा निकालना कोई राजनीति है क्या? राजनीति है क्या? ये कूड़ा-कचरा निकालोगे तो किसानों का भला होगा कि नहीं होगा? अगर नहर साफ होगी तो किसानों का भला होगा कि नहीं होगा? लेकिन भाईयों-बहनों ये ऐसे राजनीतिक प्रकृति के लोग हैं कि उनको कूड़ा-कचरा निकालना ही नहीं है। उनको सब जगह पर कूड़े-कचरे में ही मजा आता है।
     अभी पिछले दिनों हमने एक निर्णय किया भ्रष्टाचार के खिलाफ... काले धन के खिलाफ... 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए। आप मुझे बताइए मेरे भाईयों-बहनों... ये भ्रष्टाचार ने देश को बर्बाद किया है कि नहीं किया है? ये काले धन ने बर्बादी लाई है कि नहीं लाई है? ये देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना चाहिए कि नहीं कराना चाहिए? इस देश को काले धन से मुक्त कराना चाहिए कि नहीं कराना चाहिए? किसी ने तो कदम उठाना चाहिए कि नहीं उठाना चाहिए? भाईयों-बहनों बीमारी के कारण, जब बीमारी दूर करने के लिए दवाईयां देते हैं तो थोड़ी तकलीफ तो होती है कि नहीं होती है?
     आज मैं देश का आभार व्यक्त करने आया हूं। भगवान बुद्ध की इस धरती से मैं देशवासियों का आभार व्यक्त करता हूं, क्योंकि यही तो महापुरुष थे, जिन्होंने हमें संयम का मार्ग सिखाया है, यही तो महापुरुष हैं, यही तो महात्मा गांधी की धरती है जिसने हमें ट्रस्टिसशिप का सिद्धांत सिखाया है। भाईयों-बहनों दूसरों का लूट कर के जमा करने वाले लोग... क्या कभी किसी का भला करेंगे?  हक का पैसा हरेक को मिलना चाहिए लेकिन लूट का पैसा मिलना चाहिए क्या? ये सरकारी खजाने में जमा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? और इसलिए भाईयों-बहनों सरकार ने 8 तारीख को निर्णय किया है और मैंने देश से 50 दिन मांगे हैं 50 दिन... पहले दिन से मैंने कहा है कि तकलीफ होगी... जो बड़े-बड़े हैं उनको बड़ी-बड़ी तकलीफ होगी लेकिन छोटे लोगों को छोटी-छोटी तकलीफ तो होगी।
    मेरे भाईयों-बहनों ये देश की जनता को मैं नमन करता हूं, ये लोकतंत्र की ताकत देखिए, कल चीन के अखबारों में लिखा है कि लोकतंत्र में कोई ऐसा फैसला लेने की हिम्मत नहीं कर सकता है, अरे उन्हें मालूम नहीं है कि भारत की जनता की रग-रग में ऐसा लोकतंत्र है, जो औरों की भलाई सोचता है, अपनी भलाई बाद में सोचता है। और इसलिए जनता-जनार्दन के आशीर्वाद के कारण ऐसा कठोर फैसला करने का साहस होता है।
     मैं इस बात से सहमत हूं। मैंने पहले ही दिन से कहा है कि ये निर्णय सरल नहीं है, उसको लागू करना भी सरल नहीं है। 8 तारीख को हीं मैंने कहा था कि 50 दिन तकलीफ रहने वाली है अभी तो मेरे प्यारे भाईयों-बहनों 20 दिन ही हुआ है, अभी 30 दिन बाकी है। सरकार पूरी तरह आपकी समस्याओं का समाधान करने के लिए लगी हुई है और देशवासियों ने तकलीफ झेल करके भी मेरा साथ दिया है, इसके लिए मैं देशवासियों का जितना आभार व्यक्त करुं, उतना कम है। भाईयों-बहनों ये बात सही है लोग ऐसा समझाते हैं कि हमारे पास नोटें नहीं है तो हम क्या करें...
     भाईयों-बहनों आप लोग अपना मोबाइल फोन रिचार्ज कराना जानते हैं कि नहीं जानते हैं, क्या किसी स्कूल में पढ़ने के लिए गए थे? नहीं गए थे न...? आ गया कि नहीं आ गया? आपको मोबाईल फोन रिचार्ज कैसे करना है? आ गया कि नहीं आ गया? कितने पैसे भरना? कैसे भरना? कहां भरना? सब आया कि नहीं आया...? कोई सिखाने आया था...? नहीं आया था।
      भाईयों-बहनों आप whatsApp  करते हैं whatsApp.... यूं-यूं करते हैं चला जाता है कोई सिखाने आया था...? कोई पढ़ाने आया था? किसी स्कूल में सीखने गए थे? आपको आया कि नहीं आया? आज भाईयों-बहनो टैक्नोलॉजी इतनी सरल है कि यहां आप लोग फोटो निकालते हैं और यहीं से अपने दोस्तो को फोटो भेज रहे हैं... भेज रहे हो न... मैं देख रहा हूं सब लोग फोटो निकाल रहे हैं... भेज रहे हो न, जितनी आसानी से आप अपने मोबाइल फोन से फोटो भेज सकते हो, whatsApp भेज सकते हो, अपने मोबाइल फोन का एकाउंट रिचार्ज करा सकते हो, उतनी ही आसानी से... बैंक में अगर आपका खाता है, बैंक में अगर आपका पैसा है तो आप मोबाईल फोन से जो भी खरीदना हो... खरीद सकते हो, जो भी लेना हो... ले सकते हो। आज आपका मोबाइल फोन... ये आपका मोबाइल फोन यही आपके बैंक की ब्रांच बन गया है। आपकी हथेली में आपकी अपनी बैंक बन गई है। पहले जेब में बटुवा रखना पड़ता था, और बटुए में पैसे रखने पड़ते थे।
      अब जमाना चला गया है। अब बटुए की जरुरत नहीं.. अब मोबाईल फोन में ही पैसे होते हैं। दुकानदार के पास जाइए और उसको बताइए कि भई... बताइए मेरे पास ये बैंक का एप है। मैं आपके यहां से 20 रु का सामान लेना चाहता हूं, मैं मोबाइल फोन से पैसे दूंगा वो कहेगा हां-हां दे दीजिए... तुरन्त उसके मोबाइल में एक सेकेंड में पैसा चला जाएगा, आपको 20 रु का माल मिलेगा।
      भाईयों-बहनों... आज हमारे देश में आधे से अधिक लोग जो रेलवे में जाते हैं वो खुद जाकर के पैसे देकर टिकट नहीं लेते ऑनलाइन टिकट लेते हैं, उनके पैसे वापिस आते हैं तो ऑनलाइन आ जाते हैं। भाईयों-बहनों आज आपने अखबार में एक इश्तेहार देखा होगा, एक एडवर्टाइज़मेंट आज आपने अखबार में देखा होगा। मेरा आप सब से आग्रह है कि इस एडवर्टाइज़मेंट को पूरी तरह पढ़ें और इसका कटिंग करके हर दुकान पर लगा दें... अखबार से निकाल करके सब लोग इतना काम ज़रुर करें और इसमें किस प्रकार से मोबाइल में खाता खोला जाता है, उसकी सारी विधि बताई गई है। आप के पैसे आप के हैं, बिना नोट के भी आप इसका खर्च कर सकते हो।

भाईयों-बहनों ये नोटों का उपयोग काले धन वाले संग्रह करना चाहते हैं। हम काले धन वालों को सफल होने नहीं देना चाहते हैं, हम भ्रष्टाचारियों को सफल होने देना नहीं चाहते हैं। और इसलिए भाईयों-बहनों मुझे आगे के भी उनके रास्ते बंद करने हैं। आज के अंग्रेजी अखबारों में भी इसका एडवर्टाइज़मेंट छपा हुआ है, आज के हिंदी अखबारों में भी ये इश्तेहार छपा हुआ है।
       मेरा आप सब से आग्रह है, और यहां जो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं वो अखबार से कटिंग निकाल करके हर दुकान के बाहर एक बोर्ड पर लगा दें और ऐसे इश्तेहार रोज आते जाएंगे। स्टेट बैक ऑफ इंडिया की एप है, सरकार की एप है, आपको सिर्फ अपने मोबाईल फोन पर उस एप को डाउनलोड करना है, आपके गांव के मोहल्ले के व्यापारी को डाउनलोड करना है, सीधा आपका पैसा बैंक से चला जाएगा जो सामान खरीद चाहते हैं, खरीद सकते हैं। एक रुपया के बिना कोई काम अटकने वाला नहीं है...ये व्यवस्था मौजूद है भाईयों। और इसलिए.. इसलिए मुझे आपसे मदद चाहिए। मेरी विशेष पढ़े-लिखे नौजवानों से आग्रह है, सरकारी मुलाजिमों से आग्रह है कि आप भी अपने अड़ोस-पड़ोस में... जिसके पास भी माबाइल फोन है, उसको ज़रा सिखाइए कि किस प्रकार से मोबाइल फोन से कारोबार किया जा सकता है।
       आप देखिए ये जो सारी चर्चाएं हैं आप खुद उसको एक मिनट में बंद करवा सकते हैं। और देशवासियों ने सहयोग दिया है, हमारे पास रास्ते भी हैं उस रास्तों पर चलिए देश में कभी भ्रष्टाचार दोबारा आने की हिम्मत नहीं करेगा भाईयों, देश में दोबारा काला धन पैदा होने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी। देश में नोटें छाप-छाप कर के ढेर करने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी, और नोटों के बंडल किसी को बिस्तर के नीचे छुपाने की नौबत नहीं आएगी।
          भाईयों-बहनों एक तरफ में भ्रष्टाचार का... भाईयों-बहनों एक तरफ सरकार... एक तरफ हम सब भ्रष्टाचार के सारे रास्ते बंद करने में लगे हैं, काले धन के सारे रास्ते बंद करने में लगे हैं, और दूसरी तरफ.... भारत बंद करने में लगे हैं। आप मुझे बताइए... भ्रष्टाचार का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? पूरी ताकत से बताइए कि भ्रष्टाचार का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? भ्रष्टाचार का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? काला धन का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? काले धन का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? काले धन का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? भाईयों-बहनों सिर्फ और सिर्फ गरीब के लिए मैंने ये फैसला लिया है। 70 साल तक जो लूटा है उसको निकालना है... और गरीब का घर बनाना है, 70 साल तक लूटा है, किसान के खेत में पानी पहुंचाना है, 70 साल तक लूटा है उन पैसों को निकाल कर के गरीब की झोपड़ी में बिजली का तार पहुंचाना है, 70 साल तक लूटा है उन पैसों से गरीब बच्चों की पढ़ाई करवानी है। 70 साल तक जो लूटा है उन पैसों को निकाल कर के गरीब बुजूर्गों को दवाई दिलवानी है।
       भाईयों-बहनों ये जो कुछ भी निकलेगा ये सारा का सारा गरीबों की भलाई के काम आने वाला है और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों अब हम लुटने नहीं देंगे देश को... और मुझे विश्वास है भाईयों, जिस देश में सवा सौ करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद हों वहां पर काला धन का खात्मा संभव है, भ्रष्टाचार का खात्मा संभव है, भाईयों-बहनों देश अच्छी दिशा में जाने के लिए तैयार बैठा है और मुझे विश्वास है ये देश इस महायज्ञ में, ईमानदारी के महायज्ञ में, देशवासियों को कष्ट झेलकर केभी आहूति देते मैं देख रहा हूं... और इसलिए भाईयों-बहनों आने वाले दिनों में देश इस बात को स्वीकार करेगा कि फैसला कठोर था, लेकिन भविष्य उज्जवल है, और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों मैं आपसे अनुरोध करने आया हूं कि आप गांव के हर दुकानदार को इन अखबार के माध्यम से कैसे मोबाइल पर उनकी बिजनेस लगाया जा सकता है... सिखाइए।
      आप स्वंय कम से कम दस परिवार, पंद्रह परिवार उनको सिखाइए... बिना पैसे सारा कारोबार चलाने की दिशा में सारी दुनिया चल पड़ी है। हम पीछे रह गए भाईयों, हम पीछे रह गए भाईयों अब हिंदुस्तान पीछे नहीं रह सकता। आप मुझे बताइए, आप मेरी मदद करेंगे...? दोनों हाथ ऊपर कर के मुझे आशीर्वाद दीजिए... आप मेरी मदद करेंगे...? आपके आशीर्वाद रहेंगे....? ये परिवर्तन आकर रहेगा... भ्रष्टाचार जाके रहेगा... काला धन जाएगा... भाईयों-बहनों आपका भविष्य बन जाएगा।
आपके आशीर्वाद के लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।
धन्यवाद.....!

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

जीवट की जयललिता

जीवट की जयललिता 
- अरविन्द सिसोदिया, जिला महामंत्री भाजपा कोटा राजस्थान 9414180151 
जयललिता जीवट का नाम है, अपराजेय संघर्ष का नाम है,सम्पूर्ण समपर्ण का नाम है , जिसे कदम कदम पर स्वार्थी तत्वों ने छलनी किया मगर वह हारी नहीं उस शख्सियत का नाम है।  और सबसे महत्वपूर्ण यह कि उन्होने भूखों के लिये, गरीवों के लिये, बंचितों के लिये, पिछडों के लिये, वह सब कुछ किया जो आने वाली कई सदियों तक मिशाल रहेगा । में उन्हे शत शत नमन करता हूं।  ओर कबीर के इस दोहे को उन्हे समर्पित करता हूं -                      
]                                 कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोये | 
ऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये ||



जयललिता
J. Jayalalithaa Biography in Hindi

http://hindi.culturalindia.net/j-jayalalitha.html

जन्म: 24 फरवरी 1948, मैसूर, भारत

कार्य क्षेत्र: पूर्व अभिनेत्री, राजनेता

जयललिता जयराम ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) की महासचिव तथा तमिलनाडु राज्य की मुख्यमंत्री हैं। वे उन कुछ ख़ास भूतपूर्व प्रतिष्ठित सुपरस्टार्स में से हैं जिन्होंने न सिर्फ सिनेमा के क्षेत्र में प्रतिष्ठा अर्जित किया बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में भी महत्वपूर्ण रहे हैं। राजनीति में प्रवेश से पहले वे एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं और उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ फिल्मों के साथ-साथ एक हिंदी और एक अंग्रेजी फिल्म में भी काम किया है।

सन 1989 में तमिल नाडु विधानसभा में विपक्ष की नेता बनने वाली वे प्रथम महिला थीं। वर्तमान समय में तमिलनाडु की मौजूदा राजनीती में जयललिता का ठोस नियंत्रण है। सन 1991 में वे पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। सन 2011 में जनता ने तीसरी बार जयललिता को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री चुना। उन्होंने राज्य में कई कल्याणकारी परियोजनाए शुरू की। अपने शुरूआती कार्यकाल में जयललिता ने जल संग्रहण परियोजना और औद्योगिक क्षेत्र के विकास की योजनाओं जैसे विकास के कार्य किए।

अपने फ़िल्मी कैरियर में उन्होंने सन 1965 से सन 1972 के दौर में ज्यादातर फिल्में एम.जी. रामचंद्रन के साथ की और सन 1982 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भी एम॰जी॰ रामचंद्रन के साथ की। सन 1984 में उन्हें तमिलनाडु से राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। सन 1987 में रामचंद्रन के निधन के बाद जयललिता ने खुद को एम.जी. रामचंद्रन का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

अपने राजनैतिक जीवन में जयललिता भ्रष्टाचार के मामलों में विवादों में भी रहीं। भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें कोर्ट से सजा भी हो चुकी है।

प्रारंभिक जीवन
कोमलवल्ली, जिन्हें हम जयललिता के नाम से भी जानते है, का जन्म 24 फरवरी 1948 को मैसूर में वेदावल्ली और जयराम के घर हुआ था। उनके परिवार का सम्बन्ध मैसूर के राजसी  खानदान से रहा है। उनके दादाजी मैसूर दरबार में शाही चिकित्सक थे और उन्होंने अपने परिवारजनो के नाम के प्रारंभ में ‘जय’ शब्द लगाना प्रचलित किया ताकि लोगों को यह ज्ञात हो कि उनका सामाजिक सम्बन्ध मैसूर के राजा जयचमारराजेंद्र वोडेयार से है। जयललिता जब मात्र दो वर्ष की थीं तब उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद वे अपनी माता और नाना-नानी के साथ रहने बंगलुरु आ गयीं। बंगलुरु में जयललिता ने कुछ साल तक बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल में पढाई की और फिर उनकी माता जी फिल्मो में नसीब आजमाने चेन्नई चली गयीं। चेन्नई आने के बाद उन्होंने चर्च पार्क प्रेजेंटेशन कान्वेंट और स्टेला मारिस कोलेज के शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही जयललिता तेजस्वी विद्यार्थी थी और वे कानून की पढाई करना चाहती थी लेकिन नसीब में कुछ और ही लिखा था। परिवार की आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी माताजी ने उन्हें फिल्मो में काम करने का सुझाव दिया। महज 15 साल की आयु में जयललिता ने अपने आप को प्रमुख अभिनेत्री के रूप में स्थापित कर लिया।


फ़िल्मी कैरियर
जयललिता ने अपने अभिनय की शुरुआत शंकर वी गिरी की अंग्रेजी फिल्म “अपिस्टल” से की थी पर इस फिल्म से उन्हें कोई पहचान नहीं मिली। सन 1964 में जयललिता की पहली कन्नड़ फिल्म ‘चिन्नाडा गोम्बे’ प्रदर्शित हुई। इस फिल्म की विवेचको ने काफी सराहना की और जनता ने भी इसे बेहद पसंद किया। एक साल के बाद उन्होंने तमिल फिल्म ‘वेंनिरा अडाई’ में काम किया और उसके तुरंत बाद उन्होंने तेलुगु सिनेमा में भी प्रवेश किया। अगले कुछ सालों में तमिल फिल्मो में अपने प्रभावशाली अभिनय के कारण वे एक प्रतिष्ठित कलाकार बन गयीं। सिनेमा के परदे पर एम.जी. रामचंद्रन के साथ उनकी जोड़ी काफी सफल रही और दर्शको ने भी इस जोड़ी को बेहद पसंद किया। उनके फ़िल्मी सफ़र के आखिरी वर्षो में उन्होंने जयशंकर, रविचंद्रन और शिवाजी गणेशन जैसे नामी अभिनेताओ के साथ भी काम किया। सन 1968 में उन्होंने हिंदी फिल्म ‘इज्ज़त’ में काम किया जिसमें धर्मेन्द्र मुख्य अभिनेता थे। 1980 के दशक में उनका फ़िल्मी करिअर थोड़ा धीमा हो गया। उनकी आखिरी फिल्म थी ‘नाधियाई ठेडी वन्धा कदल’ जिसके बाद उन्होंने राजनीति से जुड़ने का फैसला किया।


राजनैतिक जीवन
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (ए.आई.ए.डी.एम.के.) के संस्थापक एम्. जी. रामचंद्रन ने उन्हें प्रचार सचिव नियुक्त किया और चार वर्ष बाद सन 1984 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया। कुछ ही समय में वे ए.आई.ए.डी.एम.के. की एक सक्रिय सदस्य बन गयीं। उन्हें एम.जी.आर. का राजनैतिक साथी माना जाने लगा और प्रसार माध्यमो में भी उन्हें ए.आई.ए.डी.एम.के. के उत्तराधिकारी के रूप में दिखाया गया। जब एम.जी. रामचंद्रन मुख्यमंत्री बने तो जयललिता को पार्टी के महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी। उनकी मृत्यु के बाद कुछ सदस्यों ने जानकी रामचंद्रन को ए.आई.ए.डी.एम.के. का उत्तराधिकारी बनाना चाहा और इस कारण से ए.आई.ए.डी.एम.के. दो हिस्सों में बट गया। एक गुट जयललिता को समर्थन दे रहा था और दूसरा गुट जानकी रामचंद्रन को। सन 1988 में पार्टी को भारतीय संविधान की धारा 356 के तहत निष्काषित कर दिया गया। सन 1989 में ए.आई.ए.डी.एम.के. फिर से संगठित हो गया और जयललिता को पार्टी का प्रमुख बनाया गया। उसके पश्चात भ्रष्टाचार के कई आरोपों और विवादों के बावजूद जयललिता ने 1991, 2002 और 2011 में विधानसभा चुनाव जीते।

राजनैतिक जीवन के दौरान जयललिता पर सरकारी पूंजी के गबन, गैर कानूनी ढंग से भूमि अधिग्रहण और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं। उन्हें ‘आय से अधिक संपत्ति’ के एक मामले में 27 सितम्बर 2014 को सजा भी हुई और मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा पर कर्णाटक उच्च न्यायालय ने 11 मई 2015 को बरी कर दिया जिसके बाद वे पुनः तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गयीं।

पुरुस्कार

फिल्म  ‘पत्तिकादा पत्तानमा’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तामिल अभिनेत्री का पुरस्कार
फिल्म ‘श्री कृष्णा सत्या’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तेलुगु अभिनेत्री का पुरस्कार
फिल्म ‘सुर्यकंथी’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तामिल अभिनेत्री का पुरस्कार
तमिल नाडू  सरकार की ओर से कलैममानी पुरस्कार
मद्रास विश्व विद्यालय की तरफ से साहित्य में मानद डॉक्टरेट की उपाधि
डॉ एमजीआर मेडिकल विश्व विद्यालय, तमिल नाडू ने विज्ञान में मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की
तमिल नाडू कृषि विश्व विद्यालय ने विज्ञान में मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की
भार्थिदासन विश्व विद्यालय ने साहित्य में डॉक्टर की उपाधि दी
डॉ आंबेडकर कानून विश्व विद्यालय ने कानून में मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी

टाइम लाइन (जीवन घटनाक्रम)

 1948: मैसूर में २४ फरवरी को जयललिता का जन्म

1961: एपिस्टल फिल्म से फ़िल्मी करियर की शुरुआत

1964: पहली बार कन्नड़ फिल्म में पदार्पण

1965: जयललिता ने अपने तमिल फिल्म करिएर की शुरुआत की

1972: फिल्म ‘पत्तिकादा पत्तानमा’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार

1980: एमजीआर के द्वारा प्रचार सचिव चुनी गई

1984: राज्यसभा में नामांकन

1989: विधानसभा चुनाव में जीत

1991: पहली बार मुख्यमंत्री बनी

2002: जयललिता दूसरी बार विधान सभा चुनाव जीती

2011: विधान सभा चुनाव जीतकर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं

2016 : निधन
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जयललिता  से सिमी ग्रेवाल का  इंटरव्यू


नई दिल्ली:
अपने राजनीतिक करियर के दौरान जयललिता बहुत कम बार किसी के सवालों से मुखातिब हुईं थी. हालांकि, सिमी ग्रेवाल उनसे ये मौका चुरा पाने में कामयाब रहीं. साल 1999 में सिमी ग्रेवाल के मशहूर टॉक शो में जयललिता ने अपनी जिंदगी उन पलों, घटनाओं और यादों को समेटा और लोगों के सामने रखा.

आइए जानें उस इंटरव्यू से मिली जयललिता की ज़िंदगी की वो यादें जो आज भी हर कोई जानना चाहेगा

सिमी: आपके चेहरे पर डर, गुस्सा और किसी भी तरह के इमोशन नजर क्यों नहीं आते? एक इंसान के चेहरे पर ऐसा ऐसा होना लाजमी है!जयललिता: जी हां बिलकुल, मैं सब की तरह एक इंसान ही हूं. मैंने भी अपनी जिंदगी में इन तमाम तहर के भावनाओं का अनुभव किया है, मगर जब आप एक लीडर होते हैं तब आपको उन इमोशन्स को कंट्रोल करना सीखना चाहिए. आपको सीखना चाहिए कि आप कैसे अपने इमोशन को लोगों के सामने जाहिर नहीं करें.सिमी: आपको क्या लगता है पॉलीटिक्स ने आपको एक ऐसा इंसान बनने पर मजबूर कर दिया?जयललिता: जी बिलकुल, मैं बिलकुल भी ऐसी नहीं थी. शुरुआती दौर में मैं बहुत शर्मीली थी. अजनबी लोगों से मिलने से डरती थी. मैं उन लोगों में खुद को शुमार करती थी जो लाइमलाइट से नफरत करते हैं.सिमी: आपका पहला क्रश कौन था?जयललिता: मैं जब छोटी थी तब क्रिकेट का टेस्ट मैच देखने जाया करती थी. उस वक्त मैं नारी कॉन्ट्रैक्टर (क्रिकेट खिलाड़ी) को पसंद करती थी. इसके बाद मुझे शम्मी कपूर पर भी बहुत ज्यादा क्रश था. मगर हमारी कभी मुलाकात नहीं हुई.सिमी: आपके पसंदीदा गाने और फिल्म कौन हैं?जयललिता: मेरी पसंदीदा फिल्म्स में शम्मी कपूर की फिल्म ‘जंगली’ है. उस फिल्म का ‘याहू…’ सॉन्ग मुझे काफी अच्छा लगता है. इसके अलावा फिल्म ‘दो आखें बारह हाथ’ का सॉन्ग ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘आ जा सनम मधुर चांदनी से हम’ भी काफी पसंद है.सिमी: आपने अपनी जिंदगी में 125 से भी ज्यादा फिल्में की हैं. आज के दौर में आप उस वक्त को कैसे देखती हैं?जयललिता: मैं अपने वक्त में साउथ की नंबर 1 स्टार थी और काफी सक्सेसफुल भी थी. मगर मैंने किसी भी चीज को करने का निर्णय लिया है, फिर चाहे मैं उसे पसंद करूं या नहीं, मैं खुद को उस के लिए पूरी तरह से लगा देती हूं. इसके बावजूद भी मैं अपने फिल्मी करियर को नापंसद करती थी जिस वक्त मैं बुलंदियों पर थी.सिमी: आपकी जिंदगी तब बदल गई जब एमजीआर आपकी जिंदगी में आए. आपने उनके साथ 28 फिल्में कीं. फिर आप पॉलीटिक्स में आईं. क्या आपको उनसे प्यार हो गया था?जयललिता: मैं सोचती हूं कि उन (एमजीआर) से मिलने के बाद हर कोई प्यार करने लगेगा. वो काफी केयरिंग थे. मेरी मां के मरने के बाद उन्होंने मेरी मां की तरह मुझे संभाला. इसलिए वो मेरे लिए सबकुछ थे. मेरे मां-पिता, दोस्त, फिलॉसफर, गाइड सब कुछ थे.सिमी: आपने शादी क्यों नहीं की?जयललिता: मैं शादी करना चहती थी. लेकिन ऐसा जरूरी भी तो नहीं कि सब को हर कुछ मिल जाए. मैंने अपनी जिंदगी में बहुत से टूटते रिश्ते देखे. इसके बावजूद मुझे ऐसा कोई मिला नहीं जिस से मैं शादी कर सकूं. शादी नहीं करने का फैसला में मेरी जिंदगी का एक अहम फैसला था.


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साड़ी से लेकर नगीना तक हरे रंग का ही पहनती थीं जयललिता!


भाषा First published: December 6, 2016,

चेन्नई। उनकी आत्मा ने भले ही उनकी देह छोड़ दी, लेकिन अपने प्रिय हरे रंग से उनका नाता तब भी नहीं टूटा क्योंकि अंतिम सफर के समय भी जयललिता अपने पसंदीदा हरे रंग की साड़ी में थीं। जयललिता को हरा रंग बहुत पसंद था और वह हर महत्वपूर्ण मौके पर इस रंग का लिबास तो पहनती ही थीं, उनके आसपास की हर चीज में हरा रंग शामिल होता था।
उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए आज तड़के जब उनके निवास पोएस गार्डन से उनका पार्थिव शरीर राजाजी हॉल ले जाया गया तो वह एक बार फिर अपनी ट्रेडमार्क हरी साड़ी में थीं, जिसका बोर्डर लाल था। विधानसभा चुनाव में विजयी होने के बाद जब जयललिता ने छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो भी उन्होंने हरी साड़ी पहनी थी।
इसी तरह जब उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय से आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में बरी होने के उपरांत पिछले साल 23 मई को पांचवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तब भी वह हरे रंग की साड़ी पहने थीं। अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं के अनुसार हरा रंग जयललिता के लिए भाग्यशाली था और उन्हें बेहद पसंद था।

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पद से हटने के बाद जब वह सत्ता में लौटी थीं तब वह करीब आठ महीने में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आने के दौरान भी वह अपने इसी पसंदीदा रंग की साड़ी पहने हुए थीं।

जब उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय के सेंटेनरी ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब मंच के पीछे चमकीले हरे रंग की पृष्ठभूमि थी। राज्यपाल के रोसैया ने उन्हें जो गुलदस्ता भेंट किया उसमें भी बाहरी आवरण हरे रंग का था। पिछले साल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने हरे रंग की कलम से दस्तखत किए थे और उनकी अंगूठी में हरे रंग का नगीना जड़ा था।

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MGR की समाधि के पास 'अम्मा' का अंतिम संस्कार, 

मरीना बीच पर लाखों लोग उमड़े



News18India.com
First published: December 6, 2016,

चेन्नई। 74 दिन तक अस्पताल में रहने के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का चेन्नई में निधन हो गया। सोमवार रात 11:30 बजे जयललिता ने आखिरी सांस ली। जयललिता के निधन की खबर मिलते ही उनके समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। जयललिता के पार्थिव शरीर को चेन्नई के राजाजी हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।
शाम 6 बजे मरीना बीच पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अपने करिश्माई नेता की आखिरी झलक पाने के लिए लाखों की तादाद में लोग उमड़ पड़े हैं। सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। आज पीएम नरेंद्र मोदी भी जयललिता को श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचे।

- शाम छह बजे धार्मिक संस्कार पूरे होने के बाद जयललिता के पार्थिव शरीर वाले चंदन की लकड़ी से निर्मित ताबूत को पारंपरिक बंदूकों की सलामी के बीच उनके अंतिम प्रवास के स्थान में नीचे उतारा गया। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोग ‘अम्मा वझगा’ (अम्मा अमर रहें) के नारे लगा रहे थे।
-तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की अंतिम यात्रा के लिए आर्मी ट्रक एवं गन कैरिज वाहन पर 40 श्रमिकों ने 10 घंटे की मेहनत के बाद दो टन से अधिक फूल लगाकर इसे जनाजे के लिए तैयार किया। फूल दो तरह के थे। पहला सजावटी फूल जैसे शतावरी और गुलबहार और दूसरा, गुलाब एवं सफेद गेंदा जैसे पारंपरिक फूल।

-जयललिता की पुरानी विश्वासपात्र शशिकला नटराजन एवं अन्नाद्रमुक प्रमुख के भतीजे दीपक ने एम जी रामचंद्रन के स्मारक स्थल पर जयललिता का अंतिम संस्कार किया। इसमें फूलों की पंखुड़ियां छिड़कना और चंदन की लकड़ियां डालना शामिल था। इसके बाद ताबूत को नीचे किया गया। यह अंतिम संस्कार के आखिरी रस्मों के समापन का प्रतीक था।
-जयललिता का अंतिम संस्कार एमजीआर की समाधि के पास किया गया। शशिकला के पूरी की अंतिम संस्कार की रस्म।

-जयललिता का अंतिम संस्कार किया गया। शोक में डूबे अम्मा समर्थक। -जयललिता की करीबी शशिकला कर रहीं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया।

-राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने चेन्नई में जयललिता को दी श्रद्धांजलि। -मरीना बीच पहुंचा जयललिता का पार्थिव शरीर। MGR की समाधि के पास राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार। -'अम्मा' को अंतिम विदाई देने के लिए चेन्नई की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब।

 तकनीकी दिक्कतों के चलते राष्ट्रपति को चेन्नई ले जा रहा इंडियन एयरफोर्स का विमान रास्ते से लौटा।  अब वह दोबारा विमान से चेन्नई रवाना हो रहे हैं। # पीएम नरेंद्र मोदी भी जयललिता को श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचे। राजाजी हॉल में रखा गया है जयललिता का पार्थिव शरीर। कई और नेताओं के भी आने का कार्यक्रम। # सुपरस्टार रजनीकांत ने भी राजाजी हॉल पहुंचकर जयललिता को दी श्रद्धांजलि। #  संसद में जयललिता को श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही उनके सम्मान में दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। दोनों ही सदनों में सदस्यों ने कुल पल मौन रखकर जयललिता को श्रद्धांजलि दी। उसके बाद उनके सम्मान में बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने जयललिता के निधन की जानकारी दी। अध्यक्ष ने कहा कि सेल्वी जे जयललिता का निधन कल पांच दिसंबर 2016 को चेन्नई में 68 वर्ष की आयु में हो गया। जयललिता छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं और तमिलनाडु विधानसभा की सात बार विधायक रहीं। वह तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की पहली महिला नेता थीं।

# सुमित्रा महाजन ने कहा- उन्होंने तमिलनाडु के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने वहां की महिलाओँ के लिए बहुत काम किया है। वो एक ऐसी नेता रही हैं जो लोगों के दिलों में रही हैं ऐसा नेता मिलना दुर्लभ है। मैं उनको अपनी तरह से श्रद्धांजलि देती हूं।# चेन्नई- एमजीआर मेमोरियल मरीना बीच पर जयललिता के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। सुरक्षा के भारी बंदोबस्त।   #जयललिता के पार्थिव शरीर को आज सुबह उनके आवास पोएस गार्डन से राजाजी हॉल ले जाया गया, जहां हजारों समर्थक अपनी ‘पुराची थलैवी अम्मा’ (क्रांतिकारी नेता अम्मा) को अंतिम विदाई देने के लिए कतार में खड़े हैं। जयललिता का पार्थिव शरीर उनकी पसंदीदा हरे रंग की साड़ी में लिपटा हुआ है। छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता का पार्थिव शरीर शीशे के बक्से में रखा गया है। यह बक्सा राजाजी हॉल की सीढ़ियों पर रखा गया है और सेना के चार जवानों ने उसे राष्ट्रीय ध्वज से ढक दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और उनके सहयोगी मंत्रिमंडलीय सहयोगियों, सांसदों, विधायकों और राज्य के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने दिवंगत मुख्यमंत्री को सबसे पहले श्रद्धांजलि दी। #जयललिता के निधन पर तमिलनाडु में 7 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। वहीं केंद्र सरकार ने भी 1 दन का शोक घोषित किया है। उत्तराखंड, कर्नाटक और बिहार सरकार ने भी एक दिन का शोक घोषित किया है। पीएम समेत तमाम दलों के नेता ने जयललिता के निधन को भारतीय राजनीति की अपूरणीय क्षति बताया। # तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद चेन्नई में जनजीवन की रफ्तार धीमी है। सुबह से शहर की सड़कें वीरान रहीं और भोजनालयों सहित दुकानें भी बंद रहीं। ऑटोरिक्शा सहित सार्वजनिक परिवहन सेवा सड़कों से नदारद रहीं, जबकि कुछ निजी वाहनों को शहर के विभिन्न हिस्सों में चलते देखा गया। पुलिसकर्मी महत्वपूर्ण स्थलों पर कड़ी निगरानी बरत रहे हैं। बीती शाम से शहर में और राज्य के अन्य कई हिस्सों में करीब करीब पूर्णत: बंद जैसी स्थिति है। शहर में हर सुबह आमतौर पर यहां चाय की दुकानों पर गहमागहमी बनी रहती है और बेहतर कारोबार होता है। आज चाय की दुकानें भी बंद हैं। कुछ जगहों पर चाय बेचने वालों को घूम घूमकर चाय बेचते देखा गया। होटल भी बंद रहे।

#आज पीएम मोदी भी जयललिता को श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचेंगे। वह दोपहर 12 बजे जयललिता को श्रद्धांजलि देंगे।  इसके अलावा दूसरे दलों के नेता भी चेन्नई पहुंचेंगे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी चेन्नई पहुंचेंगे। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री वेंंकैया नायडू पहले से ही चेन्नई में हैं। 22 सितंबर से थीं भर्ती -- बता दें कि 22 सितंबर को बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायत के बाद उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 4 दिसंबर को दिल का दौरा पड़ने के बाद से उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार वो जिंदगी से जंग हार गईं।

2 दिन पहले जयललिता को दिल का दौरा पड़ने के बाद से हजारों समर्थक अपोलो अस्पताल के बाहर खड़े थे। क्या महिलाएं, क्या बुजुर्ग सभी भगवान से दुआ कर रहे थे कि अम्मा हमेशा की तरह हाथ जोड़े और मुस्कराते हुए अस्पताल से बाहर निकलें, लेकिन शायद होनी को ये मंजूर नहीं था। अम्मा के निधन की खबर मिलते ही अस्पताल के बाहर नेताओं सहित हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोग नम आंखों से अम्मा की आखिरी झलक पाने चाहते थे, जिसके चलते अस्पताल से बाहर निकलती हर गाड़ी के अंदर झांकने की कोशिश भी कर रहे थे। इस दौरान मजबूरन सुरक्षाकर्मियों को भीड़ को काबू करने के लिए लाठियां भी भांजनी पड़ी। हर सियासी दल अम्मा जैसे करिश्माई नेता को खोने के दुख से अछूता नहीं दिखा। भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जयललिता के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट किया। जयललिता के निधन पर हार्दिक संवेदनाएं,  वो भारत की लोकप्रिय नेताओं में से एक थीं।

जयललिता के निधन से आहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर कहा कि जयललिता के निधन पर बहुत दुखी हूं।
उनके बाद भारतीय राजनीति में आए खालीपन को भरना आसान नहीं होगा।

जयललिता के निधन के बाद पूरे राज्य में शौक की लहर है। जिसके बाद तमिलनाडु में 7 दिन का राजकीय शौक का ऐलान किया गया। इसके अलावा राज्य में स्कूल-कॉलेजों में भी 3 दिन की छुट्टी घोषित की गई। यहीं नहीं बिहार और उत्तराखंड सरकार ने भी 1-1 दिन का शौक घोषित किया है।




सोमवार, 5 दिसंबर 2016

टाइम पर्सन ऑफ द ईयर के ऑनलाइन पोल में पीएम मोदी पुनः विजयी


दूसरी बार  विजेता बने

टाइम पर्सन ऑफ द ईयर-2016 के लिए पाठकों के ऑनलाइन मतदान में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजयी रहे हैं। इससे पूर्व भी वे 2014 में भी पाठकों के ऑनलाइन मतदान में विजयी रहे थे ! किन्तु 2014 में टाइम के संपादक मंडल ने उन्हें ईयर पर्सन नहीं बनाया था । ऑनलाइन पोल के फैसले को ही आखिरी निर्णय नहीं माना  जाता । इस लिए फैसले का इंतजार करना होगा । तथा यह भी गर्व की बात हे कि मोदी 50 लाख पाठकों के मतदान में दूसरी बार  विजेता बने हैं ।    



टाइम पर्सन ऑफ द ईयर के ऑनलाइन मतदान में मोदी अव्वल

Published: Mon, 05 Dec 2016
http://naidunia.jagran.com

न्यूयॉर्क। टाइम पर्सन ऑफ द ईयर-2016 के लिए पाठकों के ऑनलाइन मतदान में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजयी रहे हैं।

इस ऑनलाइन चुनाव में मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग जैसे विश्व नेताओं को पछाड़ा है। इसकी आधिकारिक घोषणा सात दिसंबर को की जाएगी।

रविवार रात को मतदान खत्म होने तक मोदी को 18 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। इस तरह उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वियों बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप और विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे से अच्छी खासी बढ़त हासिल कर ली थी।

इन सभी को सात प्रतिशत मत हासिल हुए हैं। जबकि फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को दो प्रतिशत और अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेट प्रत्याशी रहीं हिलेरी क्लिंटन को चार प्रतिशत मत हासिल हुए हैं।

इनके अलावा एफबीआइ प्रमुख जेम्स कोमे, एप्पल के सीईओ टिम कुक, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे भी इस खिताब की दौड़ में थे। टाइम का कहना है कि पाठकों का मतदान यह बताता है कि उनकी राय में साल 2016 को आकार देने में किस हस्ती का योगदान सबसे अहम रहा है।

बता दें कि यह अमेरिकी पत्रिका हर साल एक ऐसी हस्ती को यह सम्मान प्रदान करती है जिसने "अच्छी" या "खराब" वजहों से खबरों और दुनिया को प्रभावित किया हो।

यह दूसरी बार है जब नरेंद्र मोदी ने पाठकों के ऑनलाइन मतदान के जरिये चुने जाने वाले टाइम पर्सन ऑफ द ईयर खिताब को जीता है। 2014 में उन्हें कुल 50 लाख में से 16 प्रतिशत से ज्यादा मत हासिल हुए थे।

यही नहीं, मोदी लगातार चौथी बार इस खिताब के दावेदारों में शामिल हुए हैं। पिछले साल जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल को टाइम पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया था।

टाइम का कहना है कि 500 और 1,000 रुपये के नोट बंद करने की वजह से इन दिनों मोदी सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं।

मतदान कराने वाले एपस्टर के विश्लेषण से पता चला है कि अमेरिका और दुनियाभर में लोगों की प्राथमिकताएं अलग-अलग रहीं। मोदी का प्रदर्शन भारतीयों के बीच अच्छा रहा, साथ ही कैलीफोर्निया और न्यू जर्सी से भी उन्हें अच्छे मत प्राप्त हुए हैं।
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टाइम के ऑनलाइन रीडर पोल में 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुने गए पीएम मोदी

टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 05 Dec 2016

नोटबंदी के बड़े फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी बेशक विपक्षियों के निशाने पर आ गए हों लेकिन इससे उनकी ख्याति पर कोई असर नहीं पड़ा है। बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका सम्मान और बढ़ा है, प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम द्वारा ऑनलाइन करवाए गए रीडर पोल में प्रधानमंत्री मोदी को पर्सन ऑफ द ईयर 2016 चुना गया है।

हालांकि अंतिम घोषणा 7 दिसंबर को होगी जिसके बाद ही पता चल सकेगा कि टाइम पर्सन ऑफ द ईयर का प्रतिष्ठित अवार्ड किसे मिलेगा। इस रेस में प्रधानमंत्री मोदी अभी काफी आगे चल रहे हैं, लेकिन अंतिम विजेता की घोषणा एडिटर्स पैनल के चयन के बाद ही होती है।


खास बात ये है कि इस रेस में भारतीय प्रधानमंत्री ने हाल ही में अमेरिका के राष्‍ट्रपति निर्वाचित होकर दुनियाभर की सुर्खियां बटोरने वाले डोनाल्ड ट्रंप को भी पीछे छोड़ दिया है।

इसके अलावा वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा और विकिलीक्स के संपादक जूलियन असांजे भी इस रेस में मोदी से पिछड़ गए। अब सबकी निगाहें सात मार्च को होने वाले अंतिम चयन पर टिकी हैं जिसके बाद ही पता चल सकेगा इस साल टाइम पर्सन ऑफ द ईयर कौन होगा। पिछले साल यह पुरस्कार जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल को चुना गया ‌था।

बता दें कि अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन हर साल दुनियाभर में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले और प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में 'टाइम पर्सन ऑफ द ईयर' का चुनाव करती है। इसके लिए पत्रिका की ओर से पहले पाठकों के लिए ऑनलाइन पोल करवाया जाता है, इसी ऑनलाइन पोल में प्रधानमंत्री मोदी बीते दो सप्ताह से पहले नंबर पर जमे हुए थे।

रविवार रात 12 बजे खत्म हुई ऑनलाइन वोटिंग में वह सबसे अधिक 18 फीसदी से ज्यादा वोट लेकर पहले स्‍थान पर रहे। जबकि उनके पीछे डोनाल्ड ट्रंप, बराक ओबामा और जूलियन अंसाजे जैसे प्रतिष्ठित लोग रहे। खास बात ये है कि इन तीनों को मात्र 7 फीसदी के आसपास वोट मिले हैं।

इसके अलावा पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन 4 और फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जुकरबर्ग मात्र 2 फीसदी वोट पाकर उनसे भी पीछे रहे। खास बात ये है कि ब्रिटिश की प्रधानमंत्री और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मोदी के मुकाबले इस रेस में कहीं नहीं ठहर पाए। बता दें कि यह लगातार चौथी बार है जब नरेन्द्र मोदी टाइम की इस रेस में जगह बनाने में सफल हुए हैं। ऑनलाइन पोल में विजेता बनने के बाद अब सबकी निगाहें एडिटर्स के फैसले पर टिकी हुई है, कि वो इस बार मोदी को चुनते हैं या नहीं।


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क्यों अभी पीएम नरेंद्र मोदी को 'TIME पर्सन ऑफ द ईयर' कहना गलत है...

कल्पना द्वारा लिखित, अंतिम अपडेट: सोमवार दिसम्बर 5, 2016

खास बातें
*टाइम पर्सन ऑफ द ईयर के ऑनलाइन पोल में पीएम मोदी सबसे आगे
*जरूरी नहीं कि ऑनलाइन पोल से मेल खाए पत्रिका का फैसला
*पीएम मोदी 2014 में भी इस पोल में विजयी हुए थे



हर साल की तरह इस बार भी अमेरिका की ही नहीं दुनिया की चर्चित पत्रिका 'टाइम' ने 'पर्सन ऑफ द ईयर' के लिए रीडर्स पोल (ऑनलाइन वोटिंग) करवाई जिसमें लोगों से पूछा गया कि उनके मुताबिक कौन है 'पर्सन ऑफ द ईयर'. इस वोटिंग में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सबसे ऊपर रहा और उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप, हिलेरी क्लिंटन, बराक ओबामा, जुलयिन असांज और मार्क ज़ुकरबर्ग जैसी हस्तियों को पछाड़ कर 18 प्रतिशत वोट हासिल किए.

ट्विटर पर इस नतीजे की घोषणा के बाद पीएम मोदी के लिए कई बधाई संदेश आने लगे लेकिन इन ट्वीट्स में से कुछ ऐसे थे जो शायद मामले को पूरा नहीं समझ पाए. ट्विटर पर लिखा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी को 'टाइम पर्सन ऑफ द ईयर' चुन लिया गया है जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है.

बता दें कि यह एक ऑनलाइन पोल है जो कि टाइम मैगज़ीन करवाती है यह जानने के लिए कि दुनिया इन हस्तियों को किस नज़रिए से देखती है और किसे बेहतर मानती है. अच्छी बात यह है कि मोदी को जहां इस पोल में 18 प्रतिशत वोट मिले हैं, वहीं इस पोल में पुतिन, ओबामा और ट्रंप जैसे नामों को 7 प्रतिशत वोटों से संतुष्टि करनी पड़ी. टाइम पत्रिका ने अपने ऑनलाइन संस्करण में लिखा है कि मोदी को सबसे ज्यादा वोट भारत से मिले, साथ ही कैलिफोर्निया और न्यू जर्सी से भी उनके लिए काफी वोट किए गए. लेकिन पाठकों का यह फैसला अंतिम फैसला नहीं माना जाता.

यहां गौर करने वाली बात यह है कि टाइम 1998 से यह ऑनलाइन पोल करवा रहा है जिसमें वह पाठकों से जानना चाहता है कि 'उनके हिसाब' से पर्सन ऑफ द ईयर कौन है. लेकिन साथ ही मैगज़ीन यह भी साफ करती है कि जरूरी नहीं कि पाठक जिसे इस टाइटल के लिए चुनें, उसे मैगज़ीन द्वारा भी 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुना जाए. अगर हम पहले के फैसलों को देखें तो पाएंगे कि टाइम पत्रिका के संपादकों ने बार बार पाठकों की पसंद को दरकिनार करते हुए अंतिम फैसला कुछ और ही लिया है. 1998 में जब पहली बार यह ऑनलाइन पोल हुआ था, तब पहलवान मिक फोली को पाठकों ने 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट दिया था लेकिन पत्रिका ने उस साल बिल क्लिंटन और केन स्टार को पर्सन ऑफ द ईयर चुना. फोली के प्रशंसक इस फैसले से नाराज़ हो गए क्योंकि वह गलती से ऑनलाइन पोल के फैसले को ही आखिरी निर्णय मान बैठे थे.


यहां दिलचस्प यह जानना भी होगा कि इस मैगज़ीन के हिसाब से 'पर्सन ऑफ द ईयर' के मायने क्या हैं. कई लोग इस शीर्षक को 'महानता' के साथ जोड़ते हुए देखते हैं लेकिन पत्रिका के मुताबिक इस टाइटल का अर्थ उस व्यक्ति, घटना या वस्तु से है जिसने उस पूरे साल की गतिविधियों पर बहुत ज्यादा असर डाला हो. यह असर अच्छा या बुरा दोनों हो सकता है, शायद इसलिए एडोल्फ हिटलर, जोसेफ स्टैलिन और अयातुल्लाह ख़ोमेनी जैसे विवादित नाम भी पर्सन ऑफ द ईयर बने हैं. हालांकि बाद में मैगज़ीन विवादित नामों से ज़रा बचने लगी. यही वजह थी कि 9/11 हमले के बाद टाइम ने पर्सन ऑफ द ईयर के लिए न्यूयॉर्क सिटी के मेयर रुडॉल्फ जुलायिनी को चुना गया. हालांकि चर्चा इस बात की भी चली थी कि पत्रिका ने अपने संपादकीय में इस बात की तरफ इशारा किया है कि दरअसल ओसामा बिन लादेन को 'पर्सन ऑफ द ईयर' हैं क्योंकि अल क़ायदा के 9/11 हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था.

चलते चलते एक बात और, जरूर नहीं कि टाइम द्वारा 'पर्सन ऑफ द ईयर' के रूप में हमेशा किसी व्यक्ति को ही नहीं चुना जाए. जैसा कि टाइम कहता है कि वह फैसला लेते वक्त यह देखता है कि इस 'पर्सन' ने इस साल दुनिया भर में कितना प्रभाव डाला है, इसलिए 1966 में इसने 'inheritor' यानि 25 साल से कम उम्र के अमरिकी युवाओं की पीढ़ी को चुना, तो 1968 में अपोलो 8 के अंतरिक्ष यात्रियों को चुना. 1982 में कम्प्यूटर को और 2006 में 'You' यानि हम सबको चुना गया जिसका प्रतिनिधित्व इंटरनेट कर रहा है.

जहां तक पीएम मोदी की बात है तो यह दूसरी बार है जब उन्होंने इस मैगज़ीन के ऑनलाइन पोल को जीता है. 2014 में भी उन्होंने यह पोल जीता था जब उन्हें 16 प्रतिशत वोट मिले थे. यह लगातार चौथा साल है जब इस पोल में पत्रिका ने पीएम मोदी को उन लोगों में से एक माना है जिसने 'खबरों और दुनिया को अच्छे या बुरे किसी भी लहज़े में प्रभावित किया है.'


शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

भाजपा - राहुल गांधी कांग्रेस हार के अवसाद से ग्रस्त है




नकारात्मक राजनीति का उदाहरण बन गये राहुल
हार की बौखलाहट से प्रधानमंत्री के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं : भाजपा

Updated: Dec 2, 2016,

नयी दिल्ली, दो दिसंबर :भाषा: नोटबंदी के फैसले समेत विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राहुल गांधी के प्रहार पर पलटवार करते हुए भाजपा ने आज कहा कि 12 लाख करोड़ रुपये का घोटाला करने वाली कांग्रेस और 5000 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी के मामले में जमानत पर चल रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी देश में नॉन-सीरियस और नकारात्मक राजनीति का सबसे बड़ा उदाहरण बन गए है।

भाजपा ने कहा कि कांग्रेस हार के अवसाद से ग्रस्त है और राहुल गांधी हर मोर्चे पर लगातार मिल रही असफलताओं से बौखलाहट में आकर सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ दुष्प्रचार करने की घृणित राजनीति में व्यस्त है।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपनी छवि में कैद होने का आरोप लगाया है जबकि वास्तविकता यह है कि कांग्रेस ने इस देश को कालेधन, भ्रष्टाचार, नीतिगत पंगुता, महंगाई और सामाजिक असुरक्षा के बंधन में कैद कर रखा था, हमने तो महंगाई और भ्रष्टाचार को खत्म करने का प्रयास करके और देश की आम जनता को सामाजिक सुरक्षा कवच देकर देश को कांग्रेस की कैद से मुक्त करने का काम किया है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद गुरूर और अक्षमता के शिकार हैं। अगर राहुल अक्षम नही होते तो संप्रग के शासनकाल में देश में नीतिगत पंगुता की स्थिति नहीं होती, 12 लाख करोड़ रूपये के घपले-घोटाले नहीं हुए होते, दुनिया के अंदर भारत की छवि धूमिल नहीं हो रही होती, महंगाई काबू के बाहर नहीं होती, मुद्रास्फीति अपने रिकॉर्ड स्तर पर न होती ।

शर्मा ने कहा कि हमने तो थोक एवं खुदरा महंगाई दर को चार प्रतिशत के नीचे रखने में सफलता प्राप्त की है। राहुल गांधी के गुरूर और अहंकार की पराकाष्ठा तो यह थी कि उन्होंने अपने ही सरकार के अध्यादेश को सरेआम फाड़ दिया था और उसे नॉनसेंस करार दिया था।

भाजपा नेता ने कहा कि जहा तक टीआरपी की बात है तो राहुल गांधी खुद फोटो-खिंचवाने की राजनीति के चैंपियन हैं । राहुल गांधी टीआरपी की जंग में अरविन्द केजरीवाल के साथ लड़ रहे हैं । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने के बाद दुनियाभर में भारत की टीआरपी में भारी उछाल आया है, जहां हम पहले सॉफ्ट स्टेट के रूप में जाने जाते थे वहीं आज भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में जाना जाता है।

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राहुल गांधी पर भाजपा का पलटवार, 
कहा- हार के अवसाद से ग्रस्त राहुल


नई दिल्ली: नोटबंदी के फैसले समेत विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राहुल गांधी के प्रहार पर पलटवार करते हुए भाजपा ने आज कहा कि 12 लाख करोड़ रुपए का घोटाला करने वाली कांग्रेस और 5000 करोड़ रुपए के कथित धोखाधड़ी के मामले में जमानत पर चल रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी देश में नॉन-सीरियस और नकारात्मक राजनीति का सबसे बड़ा उदाहरण बन गए है।

हार के अवसाद से ग्रस्त राहुल
भाजपा ने कहा कि कांग्रेस हार के अवसाद से ग्रस्त है और राहुल गांधी हर मोर्चे पर लगातार मिल रही असफलताआें से बौखलाहट में आकर सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ दुष्प्रचार करने की घृणित राजनीति में व्यस्त है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपनी छवि में कैद होने का आरोप लगाया है जबकि वास्तविकता यह है कि कांग्रेस ने इस देश को कालेधन, भ्रष्टाचार, नीतिगत पंगुता, महंगाई और सामाजिक असुरक्षा के बंधन में कैद कर रखा था, हमने तो महंगाई और भ्रष्टाचार को खत्म करने का प्रयास करके और देश की आम जनता को सामाजिक सुरक्षा कवच देकर देश को कांग्रेस की कैद से मुक्त करने का काम किया है।

राहुल गांधी काे है खुद पर गुरूर
कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद गुरूर और अक्षमता के शिकार हैं। अगर राहुल अक्षम नही होते तो संप्रग के शासनकाल में देश में नीतिगत पंगुता की स्थिति नहीं होती, 12 लाख करोड़ रुपए के घपले-घोटाले नहीं हुए होते, दुनिया के अंदर भारत की छवि धूमिल नहीं हो रही होती, महंगाई काबू के बाहर नहीं होती, मुद्रास्फीति अपने रिकॉर्ड स्तर पर न होती।

फोटो-खिंचवाने की राजनीति के चैंपियन
शर्मा ने कहा कि हमने तो थोक एवं खुदरा महंगाई दर को चार प्रतिशत के नीचे रखने में सफलता प्राप्त की है। राहुल गांधी के गुरूर और अहंकार की पराकाष्ठा तो यह थी कि उन्होंने अपने ही सरकार के अध्यादेश को सरेआम फाड़ दिया था और उसे ‘नॉनसेंस’ करार दिया था। भाजपा नेता ने कहा कि जहां तक टीआरपी की बात है तो राहुल गांधी खुद फोटो-खिंचवाने की राजनीति के चैंपियन हैं। राहुल गांधी टीआरपी की जंग में अरविन्द केजरीवाल के साथ लड़ रहे हैं । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने के बाद दुनियाभर में भारत की टीआरपी में भारी उछाल आया है, जहां हम पहले सॉफ्ट स्टेट के रूप में जाने जाते थे वहीं आज भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में जाना जाता है।

नकदी की बड़ी मात्रा में उपलब्धता भ्रष्टाचार का बड़ा स्रोत - पीएम नरेंद्र मोदी




नकदी की बड़ी मात्रा में उपलब्धता भ्रष्टाचार का बड़ा स्रोत 

: पीएम नरेंद्र मोदी

भाषा की रिपोर्ट, अंतिम अपडेट: शुक्रवार दिसम्बर 2, 2016

खास बातें
01 - भ्रष्टाचार विकास की गति धीमी करता है
02 - नकदीरहित लेनदेन की ओर बदलाव करें
03 - प्रौद्योगिकी हमारे जीवन में गति और सुविधा ले कर आई

नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था में नकदी की बहुतायत को भ्रष्टाचार और काले धन का बड़ा स्रोत बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोगों से ‘‘नकदी रहित लेनदेन’’ (कैशलेस ट्रांजेक्शन) की ओर बदलाव की राह पकड़ने की अपील की ताकि ऐसे मजबूत भारत की नींव रखी जा सके जहां इस तरह की समस्या के लिए कोई जगह नहीं रहे.

प्रधानमंत्री ने लिंक्डइन डॉट कॉम पर पोस्ट किए गए एक लेख में लिखा है ‘‘21वीं सदी के भारत में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है. भ्रष्टाचार विकास की गति धीमी करता है और गरीबों, नव-मध्यम वर्ग तथा मध्यम वर्ग के सपनों को तोड़ देता है.’’ भ्रष्टाचार और काले धन के खात्मे के उद्देश्य से 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट अमान्य करने के अपने आठ नवंबर के ‘‘ऐतिहासिक’’ फैसले का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा ‘‘अर्थव्यवस्था में बहुतायत में नकदी की उपलब्धता भ्रष्टाचार और काले धन का एक बड़ा स्रोत है.’’ इसके साथ ही मोदी ने एक बार फिर नकदीरहित लेनदेन पर जोर दिया.

प्रधानमंत्री ने कहा ‘‘मैं आप सबसे, खास कर अपने युवा मित्रों से नकदीरहित लेनदेन की ओर बदलाव करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का अनुरोध करता हूं. इससे एक ऐसे भारत की मजबूत नींव तैयार होगी जहां भ्रष्टाचार और काले धन के लिए कोई जगह नहीं होगी.’’

प्रधानमंत्री मोदी ने लेख में आगे कहा है ‘‘आज हम मोबाइल बैंकिंग और मोबाइल वालेट के दौर में रह रहे हैं। खाने का ऑर्डर देना हो, फर्नीचर खरीदना और बेचना हो, टैक्सी के लिए ऑर्डर देना हो .. यह सब कुछ तथा और भी बहुत कुछ आपके मोबाइल के माध्यम से संभव है। प्रौद्योगिकी हमारे जीवन में गति और सुविधा ले कर आई है।’’ अपने लेख के साथ मोदी ने क्रेडिट कार्ड जैसे नकदीविहीन विकल्पों के चित्र भी पोस्ट किए हैं।


उन्होंने कहा ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि आपमें से ज्यादातर लोग कार्ड और ई वालेट का नियमित उपयोग कर रहे हैं और मुझे लगता है कि आपके साथ उन तरीकों को साझा करना चाहिए जिनसे नकदीविहीन लेनदेन में यथासंभव वृद्धि हुई है.’’ मोदी ने कहा कि आठ नवंबर को किए गए फैसले ने भारत के आर्थिक बदलाव में केंद्रीय भूमिका रखने वाले छोटे व्यापारियों को एक ‘‘दुर्लभ अवसर’’ दिया है.

उन्होंने कहा ‘‘आज, हमारे व्यापारी समुदाय के पास खुद को अद्यतन करने तथा और अधिक प्रौद्योगिकी अपनाने का ऐतिहासिक अवसर है जो उनके लिए अधिक समृद्धि लाएगा.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने नोटबंदी की घोषणा की, तब वह जानते थे कि भारतवासियों को असुविधा होगी लेकिन ‘‘मैंने भारतवासियों से अनुरोध किया कि दीर्घकालिक फायदे के लिए वह कुछ समय की तकलीफ को बर्दाश्त करें. मैं यह देख कर खुश हूं कि देशवासी दीर्घकालिक फायदे के लिए वह कुछ समय की तकलीफ को बर्दाश्त कर रहे हैं.’’ मोदी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उन्हें उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गोवा और पंजाब के ग्रामीण तथा शहरी इलाकों का दौरा करने का अवसर मिला. ‘‘मैं जहां भी गया, मैंने लोगों से पूछा .. क्या भ्रष्टाचार और काले धन को खत्म किया जाना चाहिए? क्या गरीबों, नव-मध्यम वर्ग तथा मध्यम वर्ग को उनका हक मिलना चाहिए? हर जगह मुझे एक ही जवाब मिला और वह जवाब था ‘हां.’

गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

कालाधन : स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ विचार-विमर्श शुरू किया




कालाधन : स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ सूचना के स्वत: 
आदान-प्रदान के लिये विचार-विमर्श शुरू किया
पीटीआई-भाषा संवाददाता
01 Dec 2016

बर्न : नयी दिल्ली, एक दिसंबर :भाषा: स्विट्जरलैंड ने भारत और कुछ अन्य देशों के साथ एक जनवरी 2018 से सूचना के स्वत: आदान प्रदान :एईओआई: व्यवस्था को अमल में लाने के लिये सांविधिक विचार-विमर्श प्रक्रिया शुरू की है।

स्विस फेडरल डिपार्टमेंट आफ फाइनेंस : एफडीएफ :  ने एक बयान में कहा कि प्रक्रिया 15 मार्च 2017 तक जारी रहेगी।

बयान के मुताबिक, ‘‘इन देशों के साथ एईओआई एक जनवरी 2018 से अमल में आना चाहिए ताकि 2019 में आंकड़ा का अदान-प्रदान शुरू हो सकता है।’’ इससे पहले, भारत और स्विट्जरलैंड ने एईओआई के क्रियान्वयन के लिये 22 नवंबर को संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये। इसके तहत दोनों देश 2018 में वैश्विक मानकों के अनुरूप आंकड़ा का संग्रह शुरू करेंगे और इसका आदान-प्रदान 2019 से करेंगे।

स्विट्जरलैंड ने आज एडोरा, अर्जेन्टीना, बारबाडोस, बरमुडा, ब्राजील, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड, केमैन आईलैंड, चिली, फरोए आईलैंड, ग्रीनलैंड, इस्राइल, मारीशस, मेक्सिको, मोनको, न्यूजीलैंड, सैन मैरिनो, सेशल्स, दक्षिण अफ्रीका, उरूग्वे और अन्य देशों के साथ विचार-विमर्श शुरू किया।

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कालेधन के मुद्दे पर स्विटजरलैंड का भारत के साथ गहरे सहयोग का वादा

By Prabhat Khabar | Updated Date: Jun 6 2016


जिनीवा : स्विटजरलैंड ने कालेधन के मुद्दे पर भारत को आगे बढ़कर सहयोग देने का आश्वासन दिया है. इस बारे में विस्तृत बातचीत के लिये उसने अपने एक शीर्ष अधिकारी को भारत भेजने पर सहमति जताई है. स्विटजरलैंड के बैंकों में रखे भारतीयों के कालेधन का पता लगाने के लिये भारत लगातार प्रयास करता रहा है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्विस राष्ट्रपति जोहान श्नाइडर-अम्मान के साथ अपनी बातचीत में भारतीयों द्वारा कर चोरी और कालेधन के मुद्दे को उठाया जिसके बाद स्विस राष्ट्रपति ने भारत के साथ इस मामले में सहयोग का स्तर बढ़ाने की पेशकश की. श्नाइडर-अम्मान ने कहा कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मामलों पर बातचीत को लेकर अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को भारत भेजेगी जो कि इस मामले में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का पता लगायेगा.

भारत और स्विटजरलैंड के बीच यह अहम पहल होगी क्योंकि विदेशों से कालेधन को वापस लाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख चुनावी वादों में रहा है. वर्ष 2014 में हुये लोकसभा चुनावों के दौरान विदेशों से कालेधन को वापस लाना का भाजपा ने बढ़ चढ़कर वादा किया था. मोदी ने श्नाइडर-अम्मान के साथ एक संयुक्त मीडिया सम्मेलन में कहा, ‘‘कालेधन और कर चोरी की समस्या का मुकाबला करना हमारी साझा प्राथमिकता है.

हमने कर चोरी के दोषियों को न्याय के दायरे में लाने के लिये त्वरित सूचना आदान प्रदान की जरुरत पर भी विचार विमर्श किया.'' उन्होंने कहा, ‘‘सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान के समझौते पर बातचीत जल्द शुरू करने का मामला इस संबंध में काफी महत्वपूर्ण होगा.'' मोदी आज सुबह ही यहां की संक्षिप्त यात्रा पर पहुंचे.

विवाहित महिला के 500, अविवाहित महिला 250, पुरुष 100 ग्राम सोना रख सकेंगे



पैतृक आभूषणों, घोषित आय से खरीदे सोने पर कर नहीं

पीटीआई-भाषा संवाददाता
01 Dec 2016

नयी दिल्ली, एक दिसंबर :भाषा: सरकार ने आज कहा कि संशोधित कर कानून के तहत पैतृक आभूषण और स्वर्ण पर कोई कर नहीं लगेगा। इसके साथ ही घोषित आय या कृषि आय से खरीदे गये सोने पर भी कोई कर नहीं लगाया जाएगा।

लोकसभा ने इस सप्ताह की शुरआत में कराधान कानून :दूसरा संशोधन: विधेयक को पारित कर दिया। इसमें कर अधिकारियों द्वारा तलाशी और जब्ती के दौरान खोजी गयी अघोषित संपत्ति पर 85 प्रतिशत कर और जुर्माने का प्रावधान है।

संशोधित कानून के दायरे में आभूषणों को भी शामिल किये जाने संबंधी अफवाहों को दूर करते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड :सीबीडीटी: ने कहा कि सरकार ने आभूषण पर कर लगाने के संदर्भ में कोई नया प्रावधान नहीं जोड़ा है।

सीबीडीटी ने कहा, ‘‘घोषित आय या कृषि आय जैसी छूट प्राप्त आय अथवा उपयुक्त घरेलू बचत अथवा विरासत में मिले आभूषण या सोना जिसके बारे में आय स्रोत की जानकारी है, की खरीद पर न तो मौजूदा प्रावधान और न ही प्रस्तावित संशोधित प्रावधानों के तहत कर लगाया जाएगा।’’ विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आयकर विभाग द्वारा तलाशी अभियान के दौरान अगर विवाहित महिला के पास 500 ग्राम, प्रत्येक अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम तथा परिवार के प्रत्येक पुरूष के पास यदि 100 ग्राम सोना और गहने पाये जाते हैं तो उसकी जब्ती नहीं होगी। सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि ‘‘किसी भी सीमा तक कानूनी रूप से वैध आभूषणों को रखने पर कोई कर नहीं लगेगा और यह पूरी तरह सुरक्षित है।’’


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गृहणी के 500 ग्राम सोने तक छूट

BY: नया इंडिया न्यूज/एजेंसी [EDITED BY : नया इंडिया टीम ]  
PUBLISH DATE: DECEMBER 1ST, 2016

नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को कहा कि संशोधित कर कानून के तहत पैतृक गहने और सोने पर कोई कर नहीं लगेगा। इसके साथ ही घोषित आय या कृषि आय से खरीदे गए सोने पर भी कोई कर नहीं लगाया जाएगा।
लोकसभा ने इस सप्ताह की शुरुआत में कराधान कानून (दूसरा संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया। इसमें कर अधिकारियों की ओर से तलाशी और जब्ती के दौरान खोजी गई अघोषित संपत्ति पर 85 फीसद कर और जुर्माने का प्रावधान है।

संशोधित कानून के दायरे में गहनों को भी शामिल किए जाने संबंधी अफवाहों को दूर करते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा कि सरकार ने गहनों पर कर लगाने के बारे में कोई नया प्रावधान नहीं जोड़ा है। सीबीडीटी ने कहा, ‘घोषित आय या कृषि आय जैसी छूट प्राप्त आय या उपयुक्त घरेलू बचत या विरासत में मिले आभूषण या सोना जिसके बारे में आय स्रोत की जानकारी है, की खरीद पर न तो मौजूदा प्रावधान और न ही प्रस्तावित संशोधित प्रावधानों के तहत कर लगाया जाएगा।’

विभाग ने यह भी साफ किया है कि आयकर विभाग की ओर से तलाशी अभियान के दौरान अगर विवाहित महिला के पास 500 ग्राम, हरेक अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम और परिवार के हरेक पुरुष के पास यदि 100 ग्राम सोना और गहने पाए जाते हैं तो उसकी जब्ती नहीं होगी।

सीबीडीटी ने साफ किया है कि ‘किसी भी सीमा तक कानूनी रूप से वैध आभूषणों को रखने पर कोई कर नहीं लगेगा और यह पूरी तरह सुरक्षित है।’ विधेयक फिलहाल राज्यसभा में विचाराधीन है। इसमें आयकर कानून की धारा 115 बीबीई में संशोधन का प्रस्ताव किया है जिसके तहत कालाधन रखने वालों पर 60 प्रतिशत की उंची दर से कर और उस पर 25 फीसद अधिभार (कुल 75 प्रतिशत) लगेगा।

इसमें एक और प्रावधान शामिल किया गया है जिसके तहत आयकर अधिकारी को अगल लगता है कि अघोषित आय कालाधन है, वह 10 प्रतिशत अतिरिक्त जुर्माना लगा सकता है। इस प्रकार, कुल शुल्क 85 प्रतिशत होगा।

सीबीडीटी ने कहा, ‘धारा 115 बीबीई के तहत कर की दर अघोषित आय पर ही बढ़ाने का प्रस्ताव है क्योंकि ऐसी रिपोर्ट है कि कर चूककर्ता अपनी अघोषित आय को व्यापार आय के रूप में आय रिटर्न या अन्य स्रोत से आय दिखाने की कोशिश में लगे हैं।’

उसने कहा, ‘धारा 115बीबीई के प्रावधान मुख्य रूप से उन मामलों में लागू होंगे जहां संपत्ति या नकद आदि को अघोषित नकद या संपत्ति घोषित की जाती है या इसे अप्रमाणिक व्यापार आय के रूप में छिपा कर रखा जाता है और आयकर अधिकारी इसका पता लगाता है।




बुधवार, 30 नवंबर 2016

गौरवशाली इतिहास को नयी पीढी को बताना राष्ट्रीय कर्तव्य - परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय भागवत जी



समाज को अपना सत्व पहचानने का आग्रह  - मोहनराव जी भागवत 



‘राष्ट्रीय तीर्थ-प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर’ का लोकार्पण







गौरवशाली इतिहास को सहेज कर नयी पीढी को बताना यह राष्ट्रीय कर्तव्य - परम पूजनीय सरसंघचालक




             उदयपुर : 28 नवम्बर महाराणा प्रताप के जीवन को समर्पित मेवाड एवं भारत के गौरवशाली इतिहास को जीवन्त करने वाले ‘राष्ट्रीय तीर्थ-प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर’ का लोकार्पण आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव जी भागवत एवं राजस्थान की मुख्यमंत्री माननीया वसुंधराराजे जी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में  केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री भारत सरकार श्री महेश गिरि जी  एवं राजस्थान सरकार के गृहमन्त्री एवं स्थानीय विधायक श्री गुलाबचन्द जी कटारिया  भी मंच पर उपस्थित थे।

         कार्यक्रम में परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव जी भागवत ने स्वामी विवेकानन्द के बताये दृष्टांत से अपना उद्बोधन प्रारम्भ करते हुए समाज को अपना सत्व पहचानने का आग्रह किया। उन्होने कहा किसी भी देश को आगे बढने के लिए अपना अतीत जानना आवश्यक है, गौरवशाली अतीत ही नयी पीढी को आगे बढने की प्रेरणा देता है। किसी भी समाज के लिए अपने गौरवशाली इतिहास को सहेज कर नयी पीढी को बताना यह राष्ट्रीय कर्तव्य है।  प्रताप गौरव केन्द्र का निर्माण  इस उद्देश्य पूर्ति का अंश मात्र है ।

            इस प्रकार के प्रयासों  से ही देश का स्वाभिमान जाग्रत होकर समाज की उन्नति सम्भव है । सत्व के बल पर ही श्री राम एवं लक्ष्मण ने त्रिलोकजयी रावण को परास्त कर दिया महाराणा प्रताप का जीवन भी सत्व के बल पर संघर्ष की प्रेरणा देने वाला जीवन है, महाराणा प्रताप ने अकबर को न केवल युद्ध में परास्त किया अपितु शान्तिकाल में 12 वर्षों तक चावण्ड़ को राजधानी बनाकर सुशासन स्थापित कर स्वराज्य एवं सुराज्य भी चलाया। उनके शासनकाल पर शोध कर सीख लेने की आवश्यकता है।

                     कार्यक्रम के प्रारम्भ मे प्रताप गौरव केन्द्र न्यास के सदस्य श्री ओमप्रकाश जी ने अब तक हुए निर्माण की जानकारी देते हुए बताया की अब तक लगभग 40 करोड़ की लागत से हुए निर्माण कार्यों के क्रम में 57 फिट ऊंचाई की महाराणा प्रताप की प्रतिमा, लाईट एण्ड साउण्ड के साथ अखण्ड भारत के दर्शन, मेवाड के इतिहास की घटनाओं को लाईव मेकेनिकल मॉडल दीर्घाओं के माध्यम से दर्शाना, दो फिल्म थियेटर, भारत माता मन्दिर एवं ध्यान कक्ष के निर्माण की जानकारी देते हुए शेष बचे 60 फीसदी कार्यां में तन-मन-धन से सहयोगी होने का आग्रह किया।


        मुख्यमंत्री ने प्रताप गौरव केन्द्र के विकास एवं विस्तार के कार्यों में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में बेहतर योगदान देंगे। आने वाला समय में यह एक ऐसा राष्ट्रीय तीर्थ बन जाएगा और लेकसिटी की अन्तर्राष्ट्रीय पहचान में ऐतिहासिक तीर्थ होने का एक और गौरव जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि मन्दिरों, लोक देवताओं आदि आस्था स्थलों, इतिहास और परम्पराओं की जानकारी न हो तो समाज अधूरा रह जाता है। मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप के बारे में वर्ल्ड क्लास राष्ट्रीय तीर्थ निर्माण को अचंभा बताते हुए इसके निर्माण में जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और कहा कि शांति के साथ इतना भव्य काम करने वाली पूरी टीम की मेहनत अकल्पनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा काम हुआ है कि जिससे आने वाली पीढ़ियां याद करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रताप सभी के लिए हैं और जरूरत है कि हम सभी प्रताप के जीवन और गाथाओं से प्रेरणा पाएं और उन्हें आचरण में लाएं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केन्द्रिय पर्यटन एवं सस्कृति मन्त्री श्री महेश गिरि ने 120 करोड़ रुपये की लागत से हेरिटेज सर्किट निर्माण की घोषणा मंच से की।

     कार्यक्रम को श्री गुलाबचन्द जी कटारिया ने भी सम्बोधित किया, संचालन गोरव केन्द्र के महामन्त्री श्री मदनमोहन टाक ने एवं आभार प्रकटीकरण केन्द्र के अध्यक्ष डॉ के.एस. गुप्ता ने किया, काव्यगीत श्री रवि बोहरा ने गाया।




मंगलवार, 29 नवंबर 2016

जम्मू और कश्मीर हिंदुत्व की ही बपौती




पिछले दिनों , जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नैशनल कॉन्फ्रेंस चीफ फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान अध‍िकृत कश्मीर (पीओके) पर भारत के दावे को लेकर विवादित बयान दिया है। अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके भारत की बपौती नहीं है जिसे वह हासिल कर ले। इसके साथ ही उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार को चुनौती दी कि वह पाकिस्तान के कब्जे से पीओके को लेकर दिखाए।

      फारूक अब्दुल्ला का यह  बयान  मात्र पाकिस्तान को खुश करने वाला था , वे स्वयं जानते हैं की कश्मीर और उनके भी  पूर्वज  हिन्दू थे ! समस्त जम्बू दीप यानि कि एशिया महादीप सनातन संस्कृति था ! अफगानिस्थान से लेकर सुदूर म्यमांर मलेशिया इंडोनेशिया तक जो बड़ी बड़ी बोद्ध प्रतिमाएं है या नष्ट की हैं वे चीख चीख कर कह रहीं हैं की यह सारा का सारा प्रायदीप सनातन सभ्यता का  हैं ! इसलिये  फारूक अब्दुल्ला ये समझलें कि मानव सभ्यता के जन्म से कश्मीर हिंदुत्व की बपौती है !
- अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान 9414180151 / 9509559131  

मानव सभ्यता के जन्म से , जम्मू और कश्मीर हिंदुत्व की ही बपौती 


जम्मू और कश्मीर के लिए राजतरंगिणी तथा नीलम पुराण नामक दो प्रामाणिक ग्रंथों में यह आख्‍यान मिलता है कि कश्मीर की घाटी कभी बहुत बड़ी झील हुआ करती थी। इस कथा के अनुसार कश्यप ऋषि ने यहाँ से पानी निकाल लिया और इसे मनोरम प्राकृतिक स्थल में बदल दिया, किंतु भूगर्भशास्त्रियों का कहना है कि भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण खदियानयार, बारामुला में पहाड़ों के धंसने से झील का पानी बहकर निकल गया और इस तरह 'पृथ्वी पर स्वर्ग' कहलाने वाली कश्मीर की घाटी अस्तित्‍व में आई।

ऐतिहासिक उल्लेख
ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने कश्मीर में बौद्ध धर्म का प्रसार किया। बाद में कनिष्क ने इसकी जड़ें और गहरी कीं। छठी शताब्दी के आरंभ में कश्मीर पर हूणों का अधिकार हो गया। यद्यपि सन् 530 में घाटी फिर स्वतंत्र हो गई लेकिन इसके तुरंत बाद इस पर उज्जैन साम्राज्य का नियंत्रण हो गया। विक्रमादित्य राजवंश के पतन के पश्‍चात कश्‍मीर पर स्‍थानीय शासक राज करने लगे। वहां हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का मिश्रित रूप विकसित हुआ। कश्मीर के हिन्दू राजाओं में ललितादित्य (सन 697 से सन् 738) सबसे प्रसिद्ध राजा हुए जिनका राज्य पूर्व में बंगाल तक, दक्षिण में कोंकण, उत्तर-पश्चिम में तुर्किस्तान, और उ‍त्तर-पूर्व में तिब्बत तक फैला था। ललितादित्य ने अनेक भव्‍य भवनों का निर्माण किया।

इस्‍लाम का आगमन

कश्मीर में इस्लाम का आगमन 13 वीं और 14वीं शताब्दी में हुआ। मुस्लिम शासको में जैन-उल-आबदीन (1420-70) सबसे प्रसिद्ध शासक हुए, जो कश्‍मीर में उस समय सत्ता में आए, जब तातरों के हमले के बाद हिन्दू राजा सिंहदेव भाग गए। बाद में चक शासकों ने जैन-उल-आवदीन के पुत्र हैदरशाह की सेना को खदेड़ दिया और सन् 1586 तक कश्मीर पर राज किया। सन् 1586 में अकबर ने कश्मीर को जीत लिया। सन् 1752 में कश्मीर तत्कालीन कमज़ोर मुग़ल शासक के हाथ से निकलकर अफ़ग़ानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली के हाथों में चला गया। 67 साल तक पठानों ने कश्मीर घाटी पर शासन किया।

अन्य उल्लेख

जम्मू का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। हाल में अखनूर से प्राप्‍त हड़प्‍पा कालीन अवशेषों तथा मौर्य, कुषाण और गुप्त काल की कलाकृतियों से जम्मू के प्राचीन स्‍वरूप पर नया प्रकाश पड़ा है। जम्मू 22 पहाड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। डोगरा शासक राजा मालदेव ने कई क्षेत्रों को जीतकर अपने विशाल राज्य की स्थापना की। सन् 1733 से 1782 तक राजा रंजीत देव ने जम्मू पर शासन किया किंतु उनके उत्तराधिकारी दुर्बल थे, इसलिए महाराजा रणजीत सिंह ने जम्मू को पंजाब में मिला लिया। बाद में उन्‍होंने डोगरा शाही ख़ानदान के वंशज राजा गुलाब सिंह को जम्मू राज्य सौंप दिया। 1819 में यह पंजाब के सिक्ख शासन के अंतर्गत आया और 1846 में डोगरा राजवंश के अधीन हो गया। गुलाब सिं‍ह रणजीत सिंह के गवर्नरों में सबसे शक्तिशाली बन गए और लगभग समूचे जम्मू क्षेत्र को उन्होंने अपने राज्य में मिला लिया।

वर्तमान स्वरूप
अपने वर्तमान स्वरूप में जम्मू - कश्मीर का अंचल, 1846 में रूपायित हुआ। जब प्रथम सिक्ख युद्ध के अंत में लाहौर और अमृतसर की संधियों के द्वारा जम्मू के डोगरा शासक राजा गुलाब सिंह एक विस्तृत, लेकिन अनिश्चित से हिमालय क्षेत्रीय राज्य, जिसे 'सिंधु नदी के पूर्व की ओर रावी नदी के पश्चिम की ओर' शब्दावली द्वारा परिभाषित किया गया था, के महाराजा बन गए।

अंग्रेज़ों के लिए इस संरक्षित देशी रियासत की रचना ने उनके साम्राज्य के उत्तरी भाग को सुरक्षित बना दिया था, जिससे वे 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध के दौरान सिंधु नदी तक और उसके आगे बढ़ सकें। इस प्रकार यह राज्य एक जटिल राजनीतिक मध्यवर्ती क्षेत्र का भाग बन गया जिसे अंग्रेज़ों ने उत्तर में अपने भारतीय साम्राज्य और रूसी व चीनी साम्राज्य के बीच स्थापित कर दिया था। गुलाब सिंह का इस पर्वतीय अंचल पर शासनाधिकार मिल जाने से लगभग एक - चौथाई सदी से पंजाब के सिक्ख साम्राज्य की उत्तरी सीमा रेखा के पास की छोटी - छोटी रियासतों के बीच चल रही मुहिम और कूटनीतिक चर्चा का अंत हो गया।
19वीं सदी के इस अंचल की सीमा - निर्धारण के कुछ प्रयास किए गए, लेकिन सुस्पष्ट परिभाषा करने के प्रयत्न अक्सर इस भूभाग की प्रकृति और ऐसे विशाल क्षेत्रों के कारण, जो स्थायी बस्तियों से रहित थे, सफल नहीं हो पाए। उदाहरणार्थ - सुदूर उत्तर में महाराजा की सत्ता कराकोरम पर्वत श्रेणी तक फैली हुई थी। लेकिन उसके आगे तुर्किस्तान और मध्य एशिया के सिक्यांग क्षेत्रों की सीमा रेखा पर एक विवादास्पद क्षेत्र बना रहा और सीमा रेखा कभी निश्चित नहीं हो पाई। इसी प्रकार की शंकाएँ उस सीमा क्षेत्र के बारे में रही, जो उत्तर में अक्साई चिन को आस पास से घेरे हुए है और आगे जाकर तिब्बत की सुस्पष्ट सीमा रेखा से मिलता है और जो सदियों से लद्दाख क्षेत्र की पूर्वी सीमा पर बना हुआ था। पश्चिमोत्तर में सीमाओं का स्वरूप 19वीं शताब्दी के आख़िरी दशक में अधिक स्पष्ट हुआ। जब ब्रिटेन ने पामीर क्षेत्र में सीमा निर्धारण सम्बन्धी समझौते अफ़ग़ानिस्तान और रूस के साथ सम्पन्न किए। इस समय गिलगित, जो हमेशा कश्मीर का भाग समझा जाता था, रणनीतिक कारणों से 1889 में एक ब्रिटिश एजेंट के तहत एक विशेष एजेंसी के रूप में गठित किया गया। सन् 1947 में जम्मू पर डोगरा शासकों का शासन रहा। इसके बाद महाराज हरि सिंह ने 26 अक्‍तूबर, 1947 को भारतीय संघ में विलय के समझौते पर हस्‍ताक्षर कर दिये।

अनुच्छेद 370

ब्रिटिश हुकूमत की समाप्ति के साथ ही जम्मू और कश्मीर भी आज़ाद हुआ। शुरू में इसके शासक महाराज हरीसिंह ने फैसला किया कि वह भारत या पाकिस्तान में सम्मिलित न होकर स्वतंत्र रहेंगे, लेकिन 20 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तान समर्थक आज़ाद कश्मीर सेना ने राज्य पर आक्रमण कर दिया, जिससे महाराज हरीसिंह ने राज्य को भारत में मिलाने का फैसला लिया। उस विलय पत्र पर 26 अक्टूबर, 1947 को पण्डित जवाहरलाल नेहरू और महाराज हरीसिंह ने हस्ताक्षर किये। इस विलय पत्र के अनुसार- "राज्य केवल तीन विषयों- रक्षा, विदेशी मामले और संचार -पर अपना अधिकार नहीं रखेगा, बाकी सभी पर उसका नियंत्रण होगा। उस समय भारत सरकार ने आश्वासन दिया कि इस राज्य के लोग अपने स्वयं के संविधान द्वारा राज्य पर भारतीय संघ के अधिकार क्षेत्र को निर्धारित करेंगे। जब तक राज्य विधान सभा द्वारा भारत सरकार के फैसले पर मुहर नहीं लगाया जायेगा, तब तक भारत का संविधान राज्य के सम्बंध में केवल अंतरिम व्यवस्था कर सकता है। इसी क्रम में भारतीय संविधान में 'अनुच्छेद 370' जोड़ा गया, जिसमें बताया गया कि जम्मू-कश्मीर से सम्बंधित राज्य उपबंध केवल अस्थायी है, स्थायी नहीं।

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*** अवन्तीपुर (कश्मीर) : कश्मीर की पूर्व  राजधानी


पहलगाम  जाते हुए अवन्तीपुर जो श्रीनगर से लगभग ३० किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है.  बहुत पहले यहीं कश्मीर की कभी राजधानी हुआ करती थी.





१२ वीं सदी कश्मीर के एक महान संस्कृत कवि एवं विद्वान् “कल्‍हण”  की रचना राजतरंगिनी (राज वंशों का इतिहास) में उल्लेख है कि उत्पल राजवंश के राजाअवन्तिवर्मन के द्वारा विश्वैकसरा नामके स्थल पर अवन्तीपुर नामके नगर की स्थापना की गयी थी.  संभवतः यहाँ मृत्यु पश्चात आत्माओं के स्वर्गारोहण के लिए विशेष कर्मकांड किये जाते थे. इससे अनुमान लगता है कि अवन्तीपुर की स्थापना/नामकरण के पूर्व ही से यह कोई धार्मिक स्थल रहा है. नजदीक ही झेलम (प्राचीन नाम वितस्ता) नदी की उपस्थिति  भी अनुकूल है.  अवन्तिवर्मन मृत्यु पर्यंत एक परम वैष्णव बना रहा. ९ वीं सदी में उसी ने इस नगर में एक विष्णु का भव्य मंदिर बनवाया और गर्भगृह में  विष्णु महाराज अवन्तिस्वमिन के नाम से प्रतिष्ठित हुए. राजा का मंत्री “सुरा” शिव का आराधक था इसलिए लगभग एक किलोमीटर दूरी पर एक और भव्य मंदिर, जिसेअवन्तीश्वर कहा जाता है,  शिवजी के लिए भी बनवाया गया. अब दोनों ही अपनी अतीत की याद में आंसू बहा रहे हैं. शिव मंदिर के भग्नावशेष इतने करीब होंगे, नहीं मालूम था. अन्यथा उसे भी देख आते.
अपने आध्यात्मिक गुरु मीर सैय्यद  अली हमादानी की प्रेरणा एवं उन्हें खुश करने के लिए कश्मीर के १४ वीं सदी के शासक सुल्तान सिकंदर बुतशिकन ने पूरे कश्मीर में क्रूरता की सभी हदें पार कर दीं.  बुतशिकन का शाब्दिक अर्थ ही होता है मूर्ति भंजक. आजकल के तालिबान भी उसके सामने फीके पड़ जायेंगे.  बड़े व्यापक रूप से धर्मांतरण हुए और साथ ही कत्ले आम भी. नृत्य, संगीत, मदिरा पान पूरी तरह प्रतिबंधित थे. चुन चुन के सभी मंदिरों को धराशायी कर दिया. अवन्तिपुर का विष्णु मंदिर भी इसी कारण अन्य मंदिरों की तरह  वर्तमान अवस्था में है. लेकिन मंदिर इतना मजबूत था कि उसे तोड़ने में एक साल लग गया था. किन्तु संयोग से सिकंदर का द्वितीय पुत्र जैन-उल-अबिदीन  (१४२३ -१४७४) जो अपने बड़े भाई के मक्का रवानगी के बाद सुलतान बना था, अपने पिता के स्वभाव के विपरीत  अत्यधिक सहिष्णु था.  परन्तु उसके आते तक तो सभी हिन्दू धर्मस्थल जमींदोज़ हो चुके थे.



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हिंदू हैं शेख अबदुल्ला के पूर्वज, 

परदादा का नाम था बालमुकुंद कौल

BHASKAR NEWS | Nov 27, 2014
(शेख अब्दुल्ला)
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में इस बार किसके सिर पर होगा ताज और किसको मिलेगा राजनीतिक वनवास। क्या यहां भी चलेगा मोदी का जादू या फिर पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस या कांग्रेस की बनेगी सरकार। आखिर कश्मीर की राजनीति में क्या है खास। dainikbhaskar.com आपको बता रहा है यहां के चुनाव से जुड़ी हर वो बात जो जानना चाहते हैं आप। इसी कड़ी में आज हम आपको बता रहे हैं शेख अब्दुल्ला के बारे में।

श्रीनगर। मुस्लिम कॉन्फ्रेंस (नेशनल कॉन्फ्रेंस) के संस्थापक शेख अब्दुल्ला कश्मीर को भारत में विलय से पहले एक मुस्लिम देश बनाना चाहते थे। शेख अब्दुल्ला के पूर्वज हिंदू (कश्मीरी पंडित) थे। शेख अब्दुल्ला ने अपनी आत्मकथा को जो किताबी रूप दिया है उसमें उन्होंने इस बारे विस्तार से बताया है। आजाद कश्मीर का सपना देखने वाले शेख अब्दुल्ला ने स्वयं अपनी आत्मकथा ‘आतिशे चीनार’ में स्वीकार किया है कि कश्मीरी मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे। उनके पूर्वज कश्मीरी पंडित थे और परदादा का नाम बालमुकुंद कौल था। किताब में लिखा है कि श्रीनगर के निकट सूरह नामक बस्ती में शेख़़ मुहम्मद अब्दुल्लाह का जन्म हुआ था। उनके पूर्वज मूलतः सप्रू गोत्र के कश्मीरी ब्राह्मण थे। अफग़ानों के शासनकाल में उनके एक पूर्वज रघूराम ने एक सूफी के हाथों इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। परिवार पश्मीने का व्यापार करता था और अपने छोटे से निजी कारख़ाने में शाल और दुशाले तैयार कराके बाज़ार में बेचता था।
इनके पिता शेख़़ मुहम्मद इब्राहीम ने आरंभ में एक छोटे पैमाने पर काम शुरू किया किन्तु मेहनत और लगन के कारण शीघ्र मझोले दर्जे के कारख़ानेदार की हैसियत तक पहुँच गए। शेख़़ साहब के परिवार की स्थिति एक औसत दर्जे के घराने की थी। इसके बावजूद भारत के प्रति शेख अब्दुल्ला का रवैया भारत विरोधी कैसे हो गया यह बात समझ से परे है। शेख अब्दुल्ला के पुत्र डा. फारुख अब्दुल्ला स्वयं कई बार कश्मीर के बाहर दिए गए साक्षात्कार और भाषणों में अपने पूर्वजों के हिंदू होने का जिक्र कर चुके हैं। उन्हें कई बार मंदिरों में पूजा करते हुए भी देखा गया है।

काशी के बाद कश्मीर
नीलमत पुराण में कश्मीर किस तरह बसा, उसका उल्लेख है। कश्यप मुनि को इस भूमि का निर्माता माना जाता है। उनके पुत्र नील इस प्रदेश के पहले राजा थे। चौदहवीं सदी तक बौद्ध और शैव मत यहां पर बढ़ते गए। काशी के बाद कश्मीर को ज्ञान की नगरी के नाम से जाना जाता था। जब अरबों की सिंध पर विजय हुई तो सिंध के राजा दाहिर के पुत्र राजकुमार जयसिंह ने कश्मीर में शरण ली थी। राजकुमार के साथ सीरिया निवासी उसका मित्र हमीम भी था। कश्मीर की धरती पर पांव रखने वाला पहला मुस्लिम यही था। अंतिम हिंदू शासिका कोटारानी के आत्म बलिदान के बाद पर्शिया से आए मुस्लिम मत प्रचारक शाहमीर ने राजकाज संभाला और यहीं से दारूल हरब को दारूल इस्लाम में तब्दील करने का सिलसिला चल पड़ा।


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कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ :
हाँ भई हाँ फारुख अब्दुल्ला जी!
कश्मीर हमारे बाप दादाओं का ही है
By मेकिंग इंडिया ऑनलाइन डेस्क - 26th November 2016

http://makingindiaonline.in
सिन्धु भुलाया दाहिर का
गांधारी का गंधार
कैसे मैं कश्मीर भूलाऊँ
भू का स्वर्गागार
वह कल्हण कश्मीरी था
राज तरंगिनी लिखने वाला
वो विल्हण भी कश्मीरी था
चौर पंचाशिका रचने वाला
शैवागम दर्शन जग वन्दित
जिसका आनंदवाद प्रतिपाद्य
कश्मीरी पंडित जन की देन
शिव पार्वती जिनके आराध्य
अकलुष जीवन दृष्टि की
जहाँ से निःसृत पावन धार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गागार


यहीं अवस्थित तक्षशिला थी
विश्व विश्रुत था विद्यालय
थे आचार्य प्रवर कौटिल्य
साक्षी देखो खड़ा हिमालय
विविधांचल से सकल विश्व के
विद्या व्यसनी आते थे
निखिल वांग्मय की शिक्षा से
जीवन सफल बनाते थे
जहाँ गुरु को शीश झुकाने आता था संसार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गागार


आतंकवाद के सहगामी हैं
आज महर्षि पाणिनि की संताने
आज खड़ी निर्ममता से
संगीने भारत माँ पर ताने
कश्यप के पुनीत वंशधर
धर्मान्तरित हो छल से बल से
इंगित करते हमें सदा ही
हारा मानव काल प्रबल से
जहाँ वर्ष हजारों से होती
धर्म सनातन की जयकार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्ग गार



शास्त्र विहित इक्यावन पीठों में
वैष्णो देवी का पावन पीठ
श्रद्धालु जनों का श्रद्धा स्थल
जिस पर लगी शत्रु की दीठ
जहाँ छड़ी मुबारक होती है
हम जाते अमरनाथ के धाम
शैव पंथ का पावन स्थल
भक्त जन करते जिन्हें प्रणाम
भारत के कोने कोने से भक्तो का जहाँ उमड़ता ज्वार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गागार

तुम लूट रहे सदियों से
हम फुटपरस्ती में सोये
चीर दिया भारत की छाती
हम फुट फुट कर रोये
स्कार्दू चित्रा गिलगित रोया
रोया डेरा बाबा नानक
ढाका और कराची रोया
गाँधी अखिल राष्ट्र का नायक
संगठन का दृढ मंत्र महा
गूंजे जय भारत का महोच्चार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गगार

कल रूसो बलख हमारा था
इरानो अरब हमारा था
भूतपूर्व ऐ बुतपरस्तों
कल सारा चमन हमारा था
पाते सुकून तुम चूम जिन्हें
वो मक्केश्वर शिवलिंग हमारा था
स्वत्व न छीना कभी किसी का
जग फिर भी हमसे हारा था
अरब भुलाया ईरान भुलाया
कैसे भूलूं अपना आँगन द्वार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्ग गार
‘उत्सर्ग’ कविता संग्रह से द्वारा डॉ श्रीराम पाण्डेय, जगदेव नगर, आरा (बिहार)