मंगलवार, 23 मई 2017

बर्बरता का बदला: पाक चौकी को उड़ाया




बर्बरता का बदला: पाक चौकी को उड़ाया, 

लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली 23 मई, 2017

पाकिस्तान की घुसपैठ के खिलाफ भारतीय सेना ने कार्रवाई करते हुए तोप से पाकिस्तान की चौकी तबाह कर दिया है। मेजर जनरल अशोक नरूला ने मंगलवार को बताया कि इस चौकी को आतंकवादियों की घुसपैठ मे मदद करने पर ये कार्रवाई की गई है। 6 मई को पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों के साथ मिलकर एलओसी पार करके गश्त कर रहे भारतीय जवानों पर हमला किया था और इस हमले में दो जवान शहीद हुए थे। इसके बाद शहीद जवानों के शव के साथ बर्बरता की थी। इसका बदला लेते हुए भारतीय सेना ने नौ मई पाकिस्तान के नौशेरा में पाक की चौकी को तबाह कर दिया था। सेना ने 9 मई को किए गए इस ऑपरेशन में रॉकेट लॉन्चर्स, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल, ऑटोमेटेड ग्रैनेड लॉन्चर्स का इस्तेमाल किया गया।

वहीं भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने नियंत्रण रेखा के नजदीक नौशेरा सेक्टर के पास स्थित पाकिस्तानी सेना के पोस्ट को तबाह करने के भारतीय सेना के दावे को खारिज कर दिया है। बासित ने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि पाकिस्तान सरकार की ओर से इस बारे में कोई रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। इसलिए शेखी बघारने की जरूरत नहीं है। दोनों देशों को चाहिए कि वह शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दे को हल करे।

एक्सपर्ट का कहना है कि भारतीय सेना के इस हमले में पाकिस्तान के 20 से 25 सैनिकों के मारे जाने की संभावना है, क्योंकि अमूमन एक पोस्ट में एक वक्त में तकरीबन इतने ही सैनिक रहते हैं।

अशोक नरूला ने बताया कि एलओसी पर हमारा कब्जा है और नौशेरा में हुई कार्रवाई का 24 सेंकेड का वीडियो जारी कर दिया है। सेना का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से 100 किलोमीटर दूर नौशेरा में सेना ने पाकिस्तानी चौकियों के खिलाफ कार्रवाई की है। पाकिस्तान की ओर से बर्फ पिघलने से और दर्रें पिघलने से घुसपैठ की आशंका है।

सर्जिकल स्ट्राइक: भारतीय सेना ने PoK में 3KM घुसकर 38 आतंकियों को किया ढेर

सेना ने इस मामले में 24 सेकंड का वीडियो जारी किया है। जिसमें यह दिखाई दे रहा है कि किस प्रकार सेना ने पाकिस्तानी पोस्ट को ध्वस्त कर दिया हैं। इस दौरान करीब 21 ब्लास्ट हुए और पाकिस्तान की पोस्ट पूरी तरह बर्बाद हो गई।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी की तरफ से हो रही गोलाबारी से भारत के गांवों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश की सीमा पर घुसपैठ रोके। नरूला ने बताया कि हमने हाल में नौशेरा में जो कार्रवाई की है वह घुसपैठियों के खिलाफ ही थी। यह कार्रवाई हमारी आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा है।

सेना का कहना है कि हम कश्मीर में अमन और शांति चाहते हैं। हम इसके लिए सीमा पर घुसपैठ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आतंकियों की संख्या कम से कम हो और राज्य के युवा गलत राह पर न चलें। हम आतंकियों को रोकने के लिए सीमा पर इस तरह की कार्रवाई करते रहते हैं।

गौरतलब है कि 6 मई की सुबह पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों के साथ मिलकर एलओसी पार करके गश्त कर रहे भारतीय जवानों पर हमला किया था और इस हमले में दो जवान शहीद हुए थे। भारतीय शहीदों के शवों के साथ पाकिस्तान ने बर्बरता की थी। उस वक्त सेना ने साफ किया था कि इस हमले का माकूल जवाब जरूर दिया जाएगा।

- कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पाक की चौकियों को तबाह करने के लिए मैं भारतीय सेना के साहस को सल्यूट करता हूं।

- शिवसेना नेता अरविंद सावंत ने कहा, देर आए दुरुस्त आए, अब नहीं रुकना है। अब सोचो लाहौर जाकर तिरंगा लहराना है।

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24 सेकेंड में भारतीय सैनिकों ने दागे 16 गोले, और बर्बाद हो गया LoC से सटा पाकिस्तानी पोस्ट

Tuesday, May 23, 2017

नई दिल्ली: सेना ने मंगलवार (23 मई) को दावा किया कि सीमा पार से हमला रोकने के लिए आतंकवाद-रोधी रणनीति के तहत हालिया कार्रवाई में जम्मू एवं कश्मीर में नियंत्रण रेखा से सटी पाकिस्तानी सेना की कई चौकियों को नष्ट कर दिया गया. मेजर जनरल अशोक नरूला ने संवाददाताओं से कहा, "पाकिस्तानी सेना सशस्त्र घुसपैठियों की सहायता करती है.. नौशेरा (राजौरी जिले का सीमा सेक्टर) में हालिया कार्रवाई में हमने पाकिस्तानी सेना की कई चौकियों को तबाह कर दिया."

यह पूछे जाने पर इन हमलों को कब अंजाम दिया गया, नरूला ने कहा कि यह 'हाल का, बेहद हाल का' अभियान है. उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन एक वीडियो क्लिप साझा किया, जिसमें एक जंगल क्षेत्र में बमबारी और विस्फोट के बाद धुआं उठता दिख रहा है.

भारतीय सेना के एडीजीपीआई मेजर जनल अशोक नरुला ने कहा कि आतंकियों को रोकने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. भारतीय सेना ने नौशेरा सेक्टर से सटे पाकिस्तानी सेना की पोस्ट की तबाही का वीडियो जारी करते हुए कहा कि जिन पोस्ट को तबाह किया वहां से घुसपैठ होती थी.

मेजर जनरल नरूला ने कहा, "नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों में कार्रवाई की गई. यह हमारे आतंकवाद रोधी रणनीति का हिस्सा है, ताकि (राज्य में) आतंकवादियों की संख्या में कमी लाई जा सके और कश्मीरी युवा गलत राह न पकड़ें." उन्होंने कहा कि भारतीय सेना इस बात से अवगत है कि बर्फ पिघलने के साथ ही घुसपैठ के प्रयास में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा, "भारतीय सेना नियंत्रण रेखा पर पूरी सक्रियता से तैनात है. हम जम्मू एवं कश्मीर में शांति चाहते हैं."

इससे पहले पाकिस्तान रेंजर्स ने बुधवार (17 मई) को जम्मू-कश्मीर के बालाकोट सेक्टर में नियंत्रण रेखा की अग्रिम चौकियों पर गोलीबारी कर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था. रक्षा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पाकिस्तानी सेना ने बालाकोट सेक्टर में नियंत्रण रेखा की अग्रिम चौकियों पर आधी रात को 12 बजकर 50 मिनट पर गोलीबारी करना शुरू की थी.’’ प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा पर कल रात अग्रिम चौकियों एवं असैन्य इलाकों में भी गोलीबारी की. यह गोलीबारी देर रात डेढ़ बजे तक लगातार चली.

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान सेना ने नौशेरा सेक्टर में मंगलवार (16 मई) शाम साढ़े छह बजे अंधाधुंध छोटे हथियारों, स्वचालित हथियारों से गोलीबारी की और 82 एमएम और 120 एमएम के मोर्टार दागे. यह हमला मंगलवार रात नौ बजे तक जारी रहा.

पाकिस्तान रेंजर्स ने 15 और 16 मई की दरमियानी रात को भी राजौरी जिले के तीन क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा पर अग्रिम चौकियों एवं असैन्य इलाकों में गोले दागे थे. नौशेरा सेक्टर में 13 मई को नियंत्रण रेखा के पास असैन्य इलाके में मोर्टार दागे जाने की घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी और तीन अन्य लोग घायल हो गए थे.

सीमा-पार से हो रही गोलीबारी एवं गोलेबारी में करबी 10,000 लोग प्रभावित हुए हैं. पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में नियंत्रण रेखा पर प्रभावित कस्बों से करीब 1700 लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है.

डीसी ने बताया कि सीमा पार से लगातार हो रही गोलाबारी में 2,694 परिवारों के करीब 10,042 लोग प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने मृतकों के निकटतम रिश्तेदार को तत्काल एक-एक लाख रुपए राहत राशि देने और घायलों को भी आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.

चौधरी ने बताया कि प्रशासन और अधिक राहत शिविर बनाने को तैयार है और इसके लिए 25 इमारतों को भी निर्धारित किया गया है. उन्होंने बताया कि शिक्षा प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करने के लिए स्कूल की कक्षाएं भी इस सप्ताह से बहाल की जाएगीं.

गृह मंत्रालय के एक आरटीआई को दिए जवाब के अनुसार पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा वर्ष 2015 में 405 की तुलना में वर्ष 2016 में 449 संघर्ष विराम का उल्लंघन किया और दो साल में 23 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई है.

तीन साल बाद भी देश में मोदी लहर : अरविन्द सिसौदिया


26 मई को प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के तीन साल पूरे हो जायेंगे और चौथा साल लग जायेगा। देश के तमाम बडे अखवारों एवं मीडिया हाउसेज ने अपने अपने तरीके से जनता के मन को टटोला हे। और घोषण की हैं कि जनता इस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ हे। यह सब यूं ही हो रहा है ऐसा नहीं है। बल्कि प्रधानमंत्री मोदी जी 18 - 18 घंटेे काम कर तेजी से कामों को निंबटा रहे है। परिणाम देने के लिये परिश्रम कर रहे है। इसलिये यह सर्वे आ रहे हैं। आओ हम सभी पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक इस महान अवसर को अपने - अपने परिश्रम से और  महान तथा यशस्वि बनानें में जुट जायें। 
- अरविन्द सिसौदिया, जिला महामंत्री भाजपा 
जिला कोटा राजस्थान   9509559131



तीन साल बाद भी देश में मोदी लहर, अभी चुनाव हुए तो NDA को मिल सकता है पूर्ण बहुमत : सर्वे
By Digital Live News Desk | Updated Date: May 23 2017
http://www.prabhatkhabar.com

नयी दिल्ली : नरेंद्र मोदी की अगुआई में केंद्र में NDA सरकार ने अपना तीन साल पूरा कर लिया है. तीन साल पूर्ण करने के बाद मोदी सरकार लोगों के सामने अपनी तीन साल की उपलब्धियों को गिना रही है वहीं दूसरी ओर विपक्ष मोदी सरकार की नाकामियों को उजागर करने में लगी है. विपक्ष का दावा है कि मोदी सरकार ने तीन साल में कुछ भी विकास का काम नहीं किया है

इधर मोदी सरकार के तीन साल पूरा होने के मौके पर एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति ने सर्वे कराया है और केंद्र सरकार को लेकर लोगों का मूड जानने का प्रयास किया है. सर्वे के अनुसार तीन साल बाद भी लोगों ने नरेंद्र मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार का समर्थन किया है. सर्वे के अनुसार अभी अगर लोकसभा के चुनाव होते हैं तो फिर से केंद्र में मोदी सरकार की संभावना है.

एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे के अनुसार अभी चुनाव हुए तो एनडीए को 331 सीटें मिल सकती है. हालांकि 2014 की तुलना में एनडीए को 4 सीट का नुकसान होने की संभावना है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी की अगुआई में एनडीए को 335 सीटें मिली थीं. सर्वे के अनुसार राहुल गांधी की अगुआई में यूपीए के लिए भी राहत की खबर है. सर्वे के अनुसार अभी चुनाव हुए तो यूपीए को 104 सीटें मिल सकती है.

एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति की सर्वे के मुताबिक बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में एनडीए को 2014 से भी ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है.

* बिहार-झारखंड में NDA को हो सकता है नुकसान
एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे के मुताबिक पूर्वी भारत में भले ही एनडीए को फायदे मिलने का अनुमान है लेकिन बिहार और झारखंड में उसे कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है. सर्वे के मुताबिक लालू यादव को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचेगा. ओडिशा, बंगाल और असम में एनडीए को फायदा हो सकता है.

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'नमो' का जलवा कायम, आज चुनाव हुए तो फिर मोदी सरकार का अनुमान: सर्वे

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: May 22, 2017
http://navbharattimes
नई दिल्ली
करीब 3 साल पहले 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की सरकार केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई। इस समय जहां केंद्र सरकार 3 साल में अब तक किए गए काम का प्रचार करने में लगी है, वहीं विपक्ष सरकार की नाकामियों को उजागर करने का दावा कर रहा है। इस बीच एक सर्वे के मुताबिक 2014 की तरह मोदी लहर चल सकता है। अगर आज चुनाव हुए तो मोदी सरकार फिर से सत्ता में आ सकती है।

आज हुए चुनाव तो NDA फिर 300 के पार
एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे के मुताबिक अगर आज चुनाव हुए तो एनडीए को 331 सीटें मिल सकती हैं जबकि 2014 में इसे 335 सीटें मिली थीं। यूपीए को 104 सीटों का अनुमान लगाया गया है जो 2014 से 44 ज्यादा है। अन्य के खाते में 108 सीटें आ सकती हैं जो 2014 के मुकाबले 40 कम है। एनडीए के वोट शेयर में 7 फीसदी का इजाफा हो सकता है।

पूर्वी भारत में NDA को पहले से ज्यादा सीटों का अनुमान

एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति की सर्वे के मुताबिक बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में एनडीए को 2014 से भी ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है। इन राज्यों में लोकसभा की कुल 142 सीटें हैं। सर्वे में एनडीए को 71 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जो 2014 के मुकाबले 16 ज्यादा है। यूपीए को थोड़ा नुकसान हो सकता है और उसे 25 सीटें मिल सकती हैं। 2014 में यूपीए को 28 सीटें मिली थीं। अगर आज चुनाव हुए तो पूर्वी भारत में अन्य के खाते में 46 सीटें आ सकती हैं जो 2014 से 19 कम है। पूर्वी भारत में एनडीए के वोट शेयर में करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।

बिहार और झारखंड में NDA को हो सकता है नुकसान
सर्वे के मुताबिक पूर्वी भारत में भले ही एनडीए को फायदे मिलने का अनुमान है लेकिन बिहार और झारखंड में उसे कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है। सर्वे के मुताबिक भ्रष्टाचार के आरोपों से लालू यादव को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचेगा। ओडिशा, बंगाल और असम में एनडीए को फायदा हो सकता है।

उत्तर भारत में फीका पड़ सकता है मोदी का जादू
सर्वे के मुताबिक यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब जैसे उत्तर भारत के राज्यों में कुल मिलाकर एनडीए को कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है। उत्तर भारत की कुल 151 सीटों में एनडीए को 116 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले 15 कम है। यूपीए को 15 सीटें मिल सकती हैं जो पहले से 9 ज्यादा है। सर्वे में अन्य के खाते में 20 सीटों का अनुमान किया गया है जो 2014 के मुकाबले 6 ज्यादा है। सर्वे के मुताबिक हरियाणा और पंजाब में एनडीए को नुकसान हो सकता है। सर्वे के मुताबिक उत्तर भारत में एनडीए को 50 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं जबकि यूपीए को 18 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है।

पश्चिम-मध्य भारत में NDA को मामूली नुकसान
गुजरात, एमपी, जैसे पश्चिम-मध्य भारत के राज्यों में एनडीए को मामूली घाटा हो सकता है। पश्चिम-मध्य भारत में कुल 118 सीटें हैं जहां एनडीए को 105 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि 2014 में उसे यहां 109 सीटें मिली थीं। इस तरह एनडीए को 4 सीटों का घाटा हो सकता है। इस क्षेत्र में यूपीए को 12 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले 3 ज्यादा है। अन्य के खाते में भी 1 सीट आ सकती है। 2014 में यहां अन्य के खाते में एक भी सीट नहीं गई थी। पश्चिम मध्य भारत में एनडीए का वोट शेयर बढ़ सकता है। सर्वे में इस क्षेत्र में एनडीए को 56 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है जो 2014 के मुकाबले 3 प्रतिशत ज्यादा है।

दक्षिण भारत में UPA को फायदा
सर्वे के मुताबिक दक्षिण भारत की कुल 132 सीटों में एनडीए को 39 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले सिर्फ एक कम है। एनडीए को आंध्र प्रदेश और केरल में फायदा हो सकता है। दक्षिण भारत में यूपीए को जबरदस्त फायदा मिल सकता है। यहां उसे 52 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले 29 ज्यादा है।

कैसे हुआ सर्वे
एबीपी न्यूज के मुताबिक सर्वे 1 मई से 15 मई के बीच किया गया। इसके लिए 19 राज्यों की 146 विधानसभा सीटों की 584 पोलिंग के 11373 लोगों से बातचीत की गई है।
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सर्वे:अभी हुए चुनाव तो बनेगी मोदी की NDA सरकार, वोट बैंक में भी इजाफा
लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली
http://www.livehindustan.com

केन्द्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को 26 मई को तीन साल पूरे हो जाएंगे। इन तीन सालों में मोदी सरकार की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। लोकनीति-CSDS-एबीपी न्यूज के सर्वे के मुताबिक, अगर आज चुनाव हुए तो एनडीए को 331 सीटें मिलेगी। 2014 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले एनडीए को सिर्फ 4 सीटों का नुकसान हो रहा है।

वहीं यूपीए को 104 सीटें मिलने का अनुमान है और उसे 44 सीटों का फायदा हो रहा है। वहीं अन्य को 108 सीटें मिलेंगी और उन्हें 40 सीटों का नुकसान हो रहा है।

बीजेपी के वोट बैंक में इजाफा
2014 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले बीजेपी के वोट बैंक में पिछले तीन सालों में आठ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 31 फीसदी वोट मिले थे जो सर्वे के मुताबिक, 2017 में 39 फीसदी हो गया है। वहीं बीजेपी सहयोगियों के वोट प्रतिशत में सिर्फ एक फीसदी का इजाफा हुआ है।

सर्वे के मुताबिक, कांग्रेस के वोट बैंक में भी दो फीसदी का इजाफा हुआ है। 2014 में कांग्रेस को 19 फीसदी वोट मिला था जबकि सर्वे के मुताबिक अभी चुनाव हुए तो कांग्रेस को 21 फीसदी फोटो मिलेंगे। यूपीए के वोट बैंक में एक फीसदी का इजाफा हुआ है।


अन्य राजनीतिक दलों का हाल

पार्टी        2014 लोकसभा चुनाव       सर्वे 2017
बसपा                4                           3
लेफ्ट पार्टी          5                           3
अन्य दल           27                          22


सर्वे के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'अच्छे दिन' को पांच में से तीन लोगों अच्छा बताया है।

नरेंद्र मोदी प्रतिशत
अच्छे दिन सफल 63
अच्छे दिन फेल 27
कुछ भी कहने से मना किया 10



पीएम मोदी के अच्छे दिन को लेकर हिन्दुओं में जहां आज भी विश्वास कायम है। 66 फीसदी हिन्दू मानते है कि अच्छे दिन आए है। वहीं मुस्लिम समुदाय में मिली जुली प्रक्रिया देखने को मिली। 43 फीसदी मुसलमानों का मानना है कि अच्छे दिन आए हैं तो 45 फीसदी मुसलमानों का मानना है कि अच्छे दिन नहीं आए हैं।



  मोदी अच्छे दिन लाए मोदी अच्छे दिन लाने में विफल   कोई प्रतिक्रिया नहीं
हिन्दू        66 24 10
मुस्लिम 43 45 12
क्रिश्चन 51 37 12
सिख 54   38 8


सर्वे में हिस्सा लेने वाले 25 फीसदी लोगों का मानना है कि इस वक्त देश के सामने सबसे बड़ी समय बेरोजगारी है। वहीं कालाधन सबसे अब कोई मुद्दा नहीं है। सिर्फ दो प्रतिशत लोगों ने इसको देश की समस्या बताया।

देश के सामने समस्या प्रतिशत
बेरोजगारी 25
गरीबी          16
कीमत बढ़ना   8
विकास की कमी, बुनियादी सुविधाएं 8
काला धन           2
अन्य मामले 16
कोई प्रतिक्रिया नहीं 12


सर्वे के मुताबिक, पिछले तीन सालों में पीएम मोदी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। कोई दूसरा नेता उनके आसपास भी नहीं ठहराता है। उनको छोड़कर किसी भी नेता की लोकप्रियता दहाई का आकंडा नहीं छू पाती है। लोकप्रियता के मामले में राहुल गांधी नौ फीसदी के साथ दूसरे पायदान पर हैं।

नेता प्रतिशत
नरेंद्र मोदी 44
राहुल गांधी 9
सोनिया गांधी 3
मायावती         3
नीतिश कुमार 2
मनमोहन सिंह 2
अखिलेश यादव 2
ममता बनर्जी 1

सोमवार, 22 मई 2017

योग से आयुर्वेद तक, विरासत पर गर्व है: प्रधानमंत्री मोदी



योग से आयुर्वेद तक हम भारतीयों को अपनी विरासत पर गर्व है: प्रधानमंत्री मोदी

May 03, 2017

हमें हमारे पूर्वजों के इनोवेशन, नई-नई खोज करना और समय के अनुकूल उसे ढालते रहने आदि भाव को कभी भूलना नहीं चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी
Quoteयोग को लेकर विश्व भर के लोगो में जिज्ञासा बढ़ रही है: प्रधानमंत्री मोदी
Quoteअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हमें जितने संभव हो सके उतने लोगों को एकजुट करने का प्रयास करना चाहिए: पीएम मोदी Quoteसरकार की नई स्वास्थ्य नीति स्वास्थ्य और कल्याण के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है: पीएम मोदी Quoteस्वच्छता आरोग्य एवं प्रिवेंटिव हेल्थ केयर का सबसे महत्तवपूर्ण पहलू है: पीएम मोदी

विशाल संख्या में पधारे प्यारे भाईयो और बहनों,

आज, ये मेरा सौभाग्‍य था कि केदारनाथ जा करके बाबा के दर्शन करने का मुझे सौभाग्‍य मिला, और वहां से आप सबके बीच आने का और आप सबके आशीर्वाद पाने का सौभाग्‍य मिला। मुझे पता नहीं था, बाबा ने surprise दे दिया। बड़ी भावुकता के साथ मुझे विशेष सम्‍मान से आभूषित किया, अलंकृत किया। मैं स्‍वामी जी का, इस पतंजलि पूरे परिवार का अंत:करणपूर्वक आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

लेकिन, जिन लोगों के बीच में मेरा लालन-पालन हुआ है, जिन लोगों ने मुझे संस्‍कारित किया है, मुझे शिक्षा-दीक्षा दी है, उससे मैं इस बात को भली-भांति समझता हूं कि जब आपको सम्‍मान मिलता है, तो उसका मतलब ये होता है कि आपसे ये, ये, ये प्रकार की अपेक्षाएं हैं, जरा भी आगे-पीछे मत हो; इसको पूरा करो। तो एक प्रकार से मेरे सामने मुझे क्‍या करना चाहिए, कैसे जीना चाहिए, इसका एक do's and don'ts का बड़ा दस्‍तावेज गुरूजी ने रख दिया है।

लेकिन सम्‍मान के साथ-साथ आप सबके आशीर्वाद, सवा सौ करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर मेरा पूरा भरोसा है। मेरा अपने पर उतना भरोसा नहीं है, मुझ पर इतना भरोसा नहीं है, जितना की मुझे आपके और देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर भरोसा है। और इसलिए वो आशीर्वाद ऊर्जा का स्रोत है, संस्‍कार उसकी मर्यादाओं में बांध करके रखते हैं, और राष्‍ट्र के लिए समर्पित जीवन जीने के लिए नित्‍य नई प्रेरणा मिलती रहती है।

मैं आज जब आपके बीच में आया हूं, तो आप भी भली-भांति अनुभव करते होंगे कि आप ही के परिवार का कोई सदस्‍य आपके बीच में आया है। और मैं यहां पर पहली बार नहीं आया हूं, आप लोगों बीच बार-बार आने का मुझे सौभाग्‍य मिला है, एक परिवार के सदस्‍य के नाते आने का सौभाग्‍य मिला है। और ये भी मेरा सौभाग्‍य रहा है कि मैंने स्‍वामी रामदेव जी को, किस प्रकार से वो दुनिया के सामने उभर करके आते गए; बहुत निकट से मुझे देखने का सौभाग्‍य मिला है। उनका संकल्‍प और संकल्‍प के प्रति समर्पण, यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी जड़ी-बूटी है। और ये जड़ी-बूटी बालकृष्‍ण आचार्य जी की खोजी हुई जड़ी-बूटी नहीं है; ये स्‍वामी जी ने खुद ने खोजी हुई जड़ी-बूटी है। बालकृष्‍ण जी की जड़ी-बूटी शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए काम आती हैं, लेकिन स्‍वामी रामदेव जी वाली जड़ी-बूटी हर संकटों को पार कर-करके नैया को आगे बढ़ाने की ताकत देने वाली होती है।

आज मुझे Research Centre के उद्घाटन का सौभाग्‍य मिला। हमारे देश का, अगर भूतकाल की तरफ थोड़ी नजर करें; तो एक बात साफ ध्‍यान में आती है, हम इतने छाये हुए थे, इतने पहुंचे हुए थे, इतनी ऊंचाइयों को प्राप्‍त किए हुए थे, कि जब दुनिया ने इसे देखा तो उनके लिए तो वहां तक पहुंचना शायद संभव नहीं लगता था और इसलिए उन्‍होंने मार्ग अपनाया था, जो हमारा श्रेष्‍ठ है उसे ध्‍वस्‍त करने का, उसको नेस्‍तनाबूद करने का। और गुलामी का पूरा कालखंड, हमारी पूरी शक्ति, हमारे ऋषि, मुनि, संत, आचार्य, किसान, वैज्ञानिक, हर किसी को; जो श्रेष्‍ठ था उसको बचाए रखने के लिए 1000, 1200 साल के गुलामी कालखंड में उनकी शक्ति खत्‍म कर दी।

आजादी के बाद जो बचा था उसे पनपाते, उसे पुरष्‍कत करते, समयानुकूल परिवर्तन करते, नए रंग-रूप के साथ सज्‍जा करते, और आजाद भारत की सांस के बीच उसे विश्‍व के सामने हम प्रस्‍तुत करते; लेकिन वो नहीं हुआ। गुलामी के कालखंड में नष्‍ट करने का प्रयास हुआ, आजादी का एक लम्‍बा कालखंड ऐसा गया जिसमें इन श्रेष्‍ठताओं को भुलाने का प्रयास हुआ। दुश्‍मनों ने नष्‍ट करने की कोशिश की, उससे तो हम लड़ पाये, निकल पाये, बचा पाये, लेकिन अपनों ने जब भुलाने का प्रयास किया तो हमारी तीन-तीन पीढि़यां दुविधा के कालखंड में जिंदगी गुजारती रहीं।

मैं आज बड़े गर्व के साथ कहता हूं, बड़े संतोष के साथ कहता हूं कि अब भुलाने का वक्‍त नहीं है, जो श्रेष्‍ठ है उसका गौरव करने का वक्‍त है, और यही वक्‍त है जो विश्‍व में भारत की आन-बान-शान का परिचय करवाता है। लेकिन हम इस बात को न भूलें कि भारत दुनिया में इस ऊंचाई पर कैसे था। वो इसलिए था कि हजारों वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने लगातार innovation में अपनी जिंदगी खपाई थी। नई-नई खोज करना, नई-नई चीजों को प्राप्‍त करना, और मानव-जाति के कल्‍याण के लिए उसको प्रस्‍तुत करना समय, अनुकूल ढालते रहना। जब से innovation की, research की उदासीनता हमारे भीतर घर कर गई हम दुनिया के सामने प्रभाव पैदा करने में असमर्थ होने लगे।

कई वर्षों के बाद जब IT Revaluation आया, जब हमारे देश के 18, 20, 22 साल के बच्‍चे mouse के साथ खेलते-खेलते दुनिया को अचरज करने लगे, तब फिर से दुनिया का ध्‍यान हमारी तरफ गया। IT ने दुनिया को प्रभावित किया। हमारे देश के 18, 20 साल की उम्र के नौजवानों ने विश्‍व को प्रभावित कर दिया। Research, Innovation, इसकी क्‍या ताकत होती है, हमने अपनी आंखों के सामने देखा है। आज पूरा विश्‍व Holistic Health Care, इसके विषय में बड़ा संवेदनशील है, सजग है। लेकिन रास्‍ता नहीं मिल रहा है। भारत के ऋषि-मुनियों की महान परम्‍परा, योग, उस पर विश्‍व का आकर्षण पैदा हुआ है, वे शांति की तलाश में हैं। वो बाहर की दुनिया से तंग आ करके भीतर की दुनिया को जानना, परखने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

ऐसे समय हम लोगों का कर्तव्‍य बन जाता है कि आधुनिक स्‍वरूप में Research & Analysis के साथ योग एक ऐसा विज्ञान है; तन और मन की तंदुरूस्‍ती के लिए, आत्‍मा की चेतना के लिए, ये शास्‍त्र कितना सहज उपलब्‍ध हो सकता है। मैं बाबा रामदेव जी को अभिनंदन करता हूं, उन्‍हें योग एक आंदोलन बना दिया। सामान्‍य मानवी में विश्‍वास पैदा कर दिया कि योग के लिए हिमालय की गुफाओं में जाने की जरूरत नहीं है, अपने घर में kitchen के बगल में बैठ करके भी योग कर सकते हो, फुटपाथ पर भी कर सकते हो, मैदान में भी कर सकते हो, बगीचे में भी कर सकते हो, मंदिर के परिसर में भी कर सकते हो।

ये बहुत बड़ा बदलाव आया है। और आज उसका परिणाम है कि 21 जून को जब विश्‍व अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मनाता है, दुनिया के हर देश में योग का उत्‍सव मनाया जाता है, अधिकतम लोग उसमें जुड़ें, उसके लिए प्रयास होता है। मुझे विश्‍व के जितने लोगों से मिलना होता है, मेरा अनुभव है कि देश की बात करेंगे, विकास की बात करेंगे, Investment की चर्चा करेंगे, राजनीतिक परिदृश्‍य की चर्चा करेंगे, लेकिन एक बात अवश्‍य करते हैं, मेरे साथ योग के संबंध में तो एक-दो सवाल जरूर पूछते हैं। ये जिज्ञासा पैदा हुई है।

हमारे आयुर्वेद की ता‍कत, थोड़ा-बहुत तो हमने ही उसे नुकसान पहुंचा दिया। आधुनिक विज्ञाण का जो medical science है उनको लगा कि आपकी सारे बातें कोई शास्‍त्र आधारित नहीं हैं; आयुर्वेद वालों को लगा कि आपकी दवाइयों में दम नहीं है, अब आप लोगों को ठीक कर देते हो लेकिन ठीक होते नहीं हैं। तुम बड़े कि हम बड़े, इसी लड़ाई में सारा समय बीतता गया। अच्‍छा होता कि हमारी सभी ज्ञान, आधुनिक से आधुनिक ज्ञान भी, उसको भी हमारी इन परम्‍पराओं के साथ जोड़ करके आगे बढ़ाया होता तो शायद मानवता की बहुत बड़ी सेवा हुई होती।

मुझे खुशी है पतंजलि योग विद्यापीठ के माध्‍यम से बाबा रामदेव जी ने जो अभियान चलाया, आंदोलन चलाया है, उसमें आयुर्वेद का महिमा-मंडन, वहां अपने-आपको सीमित नहीं रखा है। दुनिया जो भाषा में समझती है, research के जिन आधारों पर समझती है, medical science में प्रस्‍थापित व्‍यवस्‍थाओ के तहत समझती है; बाबा रामदेव ने बीड़ा उठाया है, उसी भाषा में भारत के आयुर्वेद को वो ले करके आएंगे और दुनिया को प्रेरित करेंगे। एक प्रकार से ये हिन्‍दुस्‍तान की सेवा कर रहे हैं। हजारों साल से हमारे ऋषियों-मुनियों ने तपस्‍या की है, जो प्राप्‍त किया है वो दुनिया को बांटने के लिए निकले हैं, वैज्ञानिक अधिष्‍ठान पर निकले हुए हैं, और मुझे विश्‍वास है और आज मैंने जो Research Centre देखा, कोई भी आधुनिक Research Centre देखिए; बिल्‍कुल उसकी बराबरी में खड़ा हुआ है, मां गंगा के किनारे पर ये काम।

और इसलिए मैं बाबा को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। भारत सरकार, जब अटल जी की सरकार थी देश में, तब हमारे देश में एक Health Policy आई थी। इतने सालों के बाद जब हमारी सरकार बनी, तो‍ फिर से हम देश के लिए एक Health Policy ले करके आए हैं। Holistic Health Care का view ले करके आए हैं। और अब दुनिया सिर्फ Healthy रहना चाहती है ऐसा नहीं है, बीमारी न हो वहां तक अटकना नहीं चाहती है; अब लोगों को Wellness चाहिए, और इसलिए solution भी holistic देने पड़ेंगे। Preventive Health Care पर बल देना पड़ेगा, और Preventive Health Care का उत्‍तम से उत्‍तम रास्‍ता जो है, और सस्‍ते से सस्‍ता रास्‍ता है, वो है स्‍वच्‍छता। और स्‍वच्‍छता में कौन क्‍या करता है, वो बाद पे छोड़े हम। हम तय करें, सवा सौ करोड़ देशवासी तय करें‍ कि मैं गंदगी नहीं करूंगा। कोई बड़ा संकल्‍प लेने की जरूरत नहीं, इसमें जेल जाने की जरूरत नहीं है, फांसी पर लटकने की जरूरत नहीं है, देश के लिए सीमा पर जा करके जवानों की तरह मरने-मिटने की जरूरत नहीं है; छोटा सा काम- मैं गंदगी नहीं करूंगा।

आपको कल्‍पना है एक डॉक्‍टर जितनी जिंदगी बचा लेता है, उससे ज्‍यादा बच्‍चों की जिंदगी आप गंदगी न करके बचा सकते हैं। आप एक गरीब को दान-पुण्‍य दे करके जितना पुण्‍य कमाते हो, गंदगी न करके एक गरीब जब स्‍वस्‍थ रहता है, तो आपका दान रुपयों में देते हैं, उससे भी ज्‍यादा मूल्‍यवान हो जाता है। और मुझे खुशी है कि देश की जो नई पीढ़ी है, आने वाली पीढ़ी; छोटे-छोटे बालक, हर घर में वो झगड़ा करते हैं। अगर परिवार के वृद्ध व्‍यक्ति ने, बुजुर्ग ने कोई एक अगर छोटी सी चीज फेंक दी, कार में जा रहे हैं अगर पानी का bottle बाहर फेंक दिया तो बेटा कार रुकवाता है, छोटा पोता- पांच साल का, कार रुकवाता है, ठहरो, मोदी दादा ने मना किया है ये bottle वापिस ले आओ; ये माहौल बन रहा है। छोटे-छोटे बालक भी मेरे इस स्‍वच्‍छता आंदोलन के सिपाही बन गए हैं। और इसलिए Preventive Health Care, इसको हम जितना बल देंगे, हम हमारे देश के गरीबों की सबसे ज्‍यादा सेवा करेंगे।

गंदगी कोई नहीं करता है, गंदगी हम करते हैं। और हमीं फिर गंदगी पर भाषण देते हैं। अगर एक बार हम देशवासी गंदगी न करने का फैसला कर लें, इस देश से बीमारी को निकालने में, तदुरूस्‍ती को लाने के लिए हमें कोई सफलता पाने में रुकावटें नहीं आएंगी।


हमारी उदासीनता इतनी है कि हम इतना बड़ा हिमालय, हिमालय की जड़ी-बूटी, भगवान रामचंद्र जी और लक्ष्‍मण जी की घटना से परिचित, हनुमान जी जड़ी-बूटी के लिए क्‍या-क्‍या नहीं करते थे, वो सारी बातें परिचित, और हम इतने सहज हो गए थे कि दुनिया के देश, जिनको जड़ी-बूटी क्‍या होती है, ये मालूम नहीं था; लेकिन जब उनको पता कि इसका बड़ा commercial value है, दुनिया के और देशों ने patent करवा दिया। हल्‍दी का patent भी कोई और देश करवा देता है, इमली का patent भी कोई और देश करवा देता है। हमारी ये उदासीनता, अपनी शक्ति को भुला देने की आदतें, इसने हमारा बहुत नुकसान किया है।

आज विश्‍व में Herbal Medicine, उसका एक बहुत बड़ा मार्केट खड़ा हुआ है। लेकिन जितनी मात्रा में दुनिया में इस Herbal Medicine को पहुंचाने में भारत को जो ताकत दिखानी चाहिए, अभी बहुत कुछ करने की बाकी है।

इस पतंजलि संस्‍थान के द्वारा ये जो Research और Innovation हो रहे हैं, ये दुनिया के लोगों को Holistic और Wellness के लिए जो structure है, उनको ये दवाइयां आने वाले दिनों में काम आएंगी। हमारे देश में बहुत वर्षों पहले भारत सरकार ने आयुर्वेद का प्रचार कैसे हो, उसके लिए एक हाथी कमीशन बिठाया था, जयसुखलाल हाथी करके, उनका एक कमीशन बिठाया था। उस कमीशन ने जो रिपोर्ट दी थी, वो रिपोर्ट बड़ी interesting थी। उस रिपोर्ट के प्रारंभ में लिखा है कि हमारे आयुर्वेद इसलिए लोगों तक नहीं पहुंचता है क्‍योंकि उसकी जो पद्धति है, वो आज के युग के अनुकूल नहीं है। वो इतनी सारी थैला-भर जड़ी-बूटी देंगे और फिर कहेंगे इसको उबालना, इतने पानी में उबालना, फिर इतना रस रहेगा, एक चम्‍मच में लेना, फिर इसमें फलाना जोड़ना, ढिकना जोड़ना; और फिर लेना। तो जो सामान्‍य व्‍यक्ति होता है उसको लगता है कि भई ये कौन कूड़ा-कचरा करेगा, उसके बजाय चलो भाई medicine ले लें, दवाई की गोली खा लें, अपनी गाड़ी चल जाएगी। और इसलिए उन्‍होंने कहा था कि सबसे पहली आवश्‍यकता है, बहुत साल पहले का report है ये। सबसे पहली आवश्‍यकता है आयुर्वेदी दवाओं का packaging. अगर उसका packaging, modern दवाइयों की तरह कर देंगे, तो लोग ये Holistic Health Care की तरफ मुड़ जाएंगे। और आज हम देख रहे हैं कि हमें वो उबालने वाली जड़ी-बूटियां कहीं लेने के लिए जानी नहीं पड़ती है, हर चीज ready-made मिलती है।

मैं समझता हूं कि आचार्य जी ने अपने-आपको इसमें खपाया हुआ है। और आज जिस किताब का लोकापर्ण करने का मुझे अवसर मिला, मुझे विश्‍वास है कि दुनिया का इस किताब पर ध्‍यान जाएगा। Medical Science से जुड़े हुए लोगों का ध्‍यान जाएगा। प्रकृतिदत्‍त व्‍यवस्‍था कितनी सामर्थ्‍यवान है, उस सामर्थ्‍य को अगर हम समझते हैं तो जीवन कितना उज्‍ज्‍वल हो सकता है, ये अगर व्‍यक्ति को एक खिड़की खोल करके दे देता है, आगे बढ़ने के लिए बहुत बड़ा अवसर दे देता है।

मुझे विश्‍वास है कि बालकृष्‍ण जी की ये साधना, बाबा रामदेव का mission mode में स‍मर्पित ये काम और भारत की महान उज्‍ज्‍वल परम्‍परा, उसको आधुनिक रूप-रंग के साथ, वैज्ञानिक अधिष्‍ठान के साथ आगे बढ़ाने का जो प्रयास है, वो भारत के लिए विश्‍व में अपनी एक जगह बनाने का आधार बन सकता है। दुनिया का बहुत बड़ा वर्ग है जो योग से जुड़ा है, आयुर्वेद से भी जुड़ना चाहता है, हम उस दिशा में प्रयास करेंगे।

मैं फिर एक बार आप सबके बीच आने का मुझे सौभाग्‍य मिला, विशेष रूप से मुझे सम्‍मानित किया, मैं सिर झुका करके बाबा को प्रणाम करता हूं, आप सबका अभिनंदन करता हूं, और मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। धन्‍यवाद।

रविवार, 21 मई 2017

किसानों और गरीबों की भलाई हमारा लक्ष्य - नरेंद्र मोदी






किसानों और गरीबों की भलाई हमारा लक्ष्य - नरेंद्र मोदी
February 15, 2017

सरकार की पहली प्राथमिकता गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के उत्थान के लिए काम करना होता है: प्रधानमंत्री
Quoteउत्तर प्रदेश की सपा सरकार गरीबों के सशक्तिकरण के खिलाफ है: प्रधानमंत्री मोदी
Quoteउत्तर प्रदेश के विकास के लिए भाजपा एकमात्र उम्मीद की किरण है: प्रधानमंत्री
Quoteउत्तर प्रदेश में ‘अप’ का मतलब अपराध, नौकरियों के लिए युवाओं का विस्थापन, भ्रष्टाचार, दंगे, मृत्यु दर और गरीबी है: प्रधानमंत्री मोदी

भारत माता की जय। भारत माता की जय।

मंच पर विराजमान केंद्र में मेरे साथी श्रीमान नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा के प्रदेश महासचिव श्रीमान विजय बहादुर पाठक जी, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के अध्यक्ष श्रीमान मानवेंद्र सिंह चौहान, भाजपा की प्रदेश सचिव व हमारी समर्पित कार्यकर्ता बहन गीता शाक्य जी, राज्य सरकार में पूर्व मंत्री श्रीमान हरिद्वार दूबे जी, संसद में मेरे साथी श्री मुकेश राजपूत जी, युवा मोर्चा के हमारे जुझारू नेता श्री सुब्रत पाठक जी, कन्नौज जिला के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह राजपूत, औरैया जिला के प्रभारी श्री राजेंद्र सिंह चौहान, कन्नौज जिला प्रभारी श्री दिनेश राय, फर्रुखाबाद के अध्यक्ष श्रीमान सत्यपाल सिंह जी, फर्रुखाबाद के प्रभारी श्री श्रीकांत पाठक जी, कानपुर के प्रभारी डॉ. राम शरण कटियार जी और इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार कायमगंज से श्रीमान अमर सिंह जी खटीक, फर्रुखाबाद से श्रीमान सुनील दत्त द्विवेदी जी, बिधुना से श्रीमान विजय शाक्य जी, अमृतपुर से श्रीमान सुशील शाक्य जी, डिबियापुर से श्रीमान लखन सिंह जी, भोजपुर से श्रीमान नागेंद्र सिंह जी, तीरवा से श्रीमान कैलाश सिंह ही, कन्नौज से श्रीमान बनवारी लाल दोहरे जी, औरैया से श्रीमान रमेश दिवाकर जी, छिबरामऊ से श्रीमती अर्चना पांडेय जी, बिल्लोर से श्रीमान भगवती प्रसाद सागर जी। आप सब हाथ ऊपर करके मेरे साथ बोलिये। भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

भाइयों-बहनों।

इतनी विशाल संख्या में, मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूं भाइयों-बहनों। मैं सबसे पहले कन्नौजवासियों की क्षमा मांगता हूं। क्षमा इसलिए मांग रहा हूं कि इस जनसभा में इतना बड़ा मैदान तय किया। उसके बावजूद मैदान के बाहर छत पर हजारों लोगों को मैं देख रहा हूं। इस तरफ इस बड़े बिल्डिंग के पीछे कुछ लोग मुझे और दूर-दूर कर माथे नजर आ रहे हैं।

भाइयों-बहनों।

शायद उनको सुनाई भी नहीं देता होगा। आप लोगों के लिए मैदान छोटा पड़ गया, उसके कारण जो तकलीफ हुई है। मैं इसके लिए भारतीय जनता पार्टी की तरफ से आपसे क्षमा मांगता हूं,  लेकिन भाइयों-बहनों आप इतनी बड़ी मात्रा में आशीर्वाद देने के लिए आए। हमारे सभी उम्मीदवारों को आशीर्वाद देने के लिए आए, मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

भाइयों-बहनों।

चुनाव की बात तो करूंगा, चुनाव सभा के लिए आया हूं लेकिन एक शिकायत भी करना चाहता हूं भाइयों-बहनों। मुझे ये तो बताओ कि आप इतना प्यार दे रहे हो, इतने आशीर्वाद दे रहे हो अगर 2014 में भी दे दिया होता तो मुझे कितना अच्छा लगता। पूरा उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को विजय बनाया लेकिन कुछ सीटें जहां दो कुनबे के लोग लड़ रहे थे। आपने आंख की शर्म के कारण उन पर कृपा कर दी और वो दो कुनबे ही इस बार इकट्ठे होकर के आपके सपनों को कुचल-कुचल करके सत्ता हथियाने के लिए मैदान में आए हैं। और मैं देख रहा हूं, इस बार में कन्नौज की धरती पर देख रहा हूं कि जो 2014 में रह गया वो कसर पूरी करने का कन्नौजवासियों ने तय कर लिया है, और मेरे कन्नौज के भाइयों-बहनों मैं भी आपको वादा करता हूं। मैं भी आपको वादा करता हूं, आज जो मुझे प्यार दे रहे हैं। मैं ब्याज समेत विकास करके लौटाऊंगा, आपको ये वादा करता हूं भाइयों।


भाइयों-बहनों।

आज में सबसे पहले इस कन्नौज की धरती से जो इत्र की धरती है, जो हिंदुस्तान के हर कोने में सुगंध फैलाने वाला कन्नौज, उस कन्नौज की धरती से मैं देशवासियों के साथ अपनी खुशी बांटना चाहता हूं। कन्नौजवासियों से सवा सौ करोड़ देशवासियों की खुशी बांटना चाहता हूं। आप सबको पता चल गया होगा स्पेस में, आकाश में भारत बार-बार नये विकास के सीमा चिन्ह करता चला जा रहा है। आज सुबह करीब साढ़े नौ बजे हमारे देश के वैज्ञानिकों ने स्पेस प्रोग्राम में एक ऐसा काम किया, ऐसा काम किया। विश्व के स्पेस के कार्यक्रमों में आज हमारे वैज्ञानिकों की सिद्धी स्वर्णिम अक्षरों से लिखी जाएगी। आज भारत के वैज्ञानिकों ने एक साथ ये दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है, एक साथ 104 सैलेटाइट लॉन्च किये। अरे आज मेरे देश के वैज्ञानिकों ने आज आकाश में भी सेंचुरी पार कर दी भाइयों। और उसमें तीन हमारे देश के हैं लेकिन 101 हमारे वैज्ञानिकों ने जो सैटेलाइट लॉन्च किये, वो दुनिया के और देशों के सैटलाइट थे जो हमारे वैज्ञानिकों नें हिंदुस्तान में से लॉन्च किया भाइयों-बहनों।

भाइयों-बहनों।

मैदान छोटा पड़ गया है। मेरी आपसे प्रार्थना है आप थोड़ी शांति रखिये। आगे आने की कोशिश मत कीजिए। इस सज्जन को क्या तकलीफ है भाई? क्या तकलीफ है इनको? मैदान छोटा पड़ गया है। आप लोग कृपा करके आगे आने की कोशिश मत कीजिए। जहां हो वहीं से भाजपा को जीताना यही हमारा संकल्प है।

भाइयों-बहनों।

आज जो 104 सैटेलाइट छोड़े गये। उसमें 3 हिंदुस्तान के हैं। 101 दुनिया के और देशों के हैं और वो भी अमेरिका का सैटेलाइट, आज हिंदुस्तान की धरती से हमारे वैज्ञानिकों ने छोड़े, इजराइल के, स्विट्जरलैंड के, नीदरलैंड के, यूएई के आप कल्पना कर सकते हो। भारत के वैज्ञानिकों ने भारत का नाम इतना ऊंचा किया है भाइयों। एक साथ भारत के वैज्ञानिकों के नाम मेरे साथ नारा बोलिये भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय। ये मेरे वैज्ञानिकों के नाम है। मेरे देश के स्पेस के वैज्ञानिकों के नाम पर है, जिन्होंने इतना बड़ा करतब करके दिखाया है।

भाइयों-बहनों।

मैं आज कन्नौज की धरती से उड़ीसा प्रांत के नागरिकों का भी धन्यवाद करना चाहता हूं। नौजवानों का उत्साह इतना जोरदार है। मैं भाषण आगे बढ़ाऊं? मैं बोलना शुरू करूं? जरा इधर वाले बताइये मैं बोलना शुरू करूं? आप शांति रखोगे? मैं इन वालों को खास करता हूं शांति रखोगे? आपका प्यार मेरे सर-आंखों पर भाई।


भाइयों-बहनों।

मैं आज इस कन्नौज की धरती से, उत्तर प्रदेश की धरती से, एक गंगा-यमुना की धरती से उड़ीसा के नागरिकों का विशेष रूप से धन्यवाद करना चाहता हूं। उनका अभिनंदन करना चाहता हूं। मेरे उत्तर प्रदेश के भाइयों-बहनों सुन लीजिए। ये हमारे विरोधी न जाने कैसे-कैसे झूठ फैलाते हैं, लेकिन वो समझ नहीं पा रहे हैं कि हिंदुस्तान का मतदाता इतना समझदार हो गया है कि अब तुम्हारी झूठी बातें चलने वाली नहीं हैं। उड़ीसा ने दिखा दिया, उड़ीसा में पंचायतों के चुनाव थे, गांव के चुनाव थे। गांव के गरीब लोग मतदान करते हैं।

भाइयों-बहनों।

उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी बहुत कम ताकत वाली थी। हम पार्लियामेंट में भी बहुत कम लोग जीते थे लेकिन कल जब उड़ीसा में चुनाव के नतीजे आए भारतीय जनता पार्टी को अभूतपूर्व समर्थन उड़ीसा ने दिया है, मैं उड़ीसा का हृदय से धन्यवाद करता हूं।

भाइयों-बहनों।

कुछ लोग कहते थे कि मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक ये तो चुनावी खेल है, नोटबंदी राजनीति है, न जाने कैसे-कैसे आरोप लगाए थे। तीन-तीन महीने तक चुप नहीं रहे। जितने खेल-खेल सकते थे, खेलते रहे लेकिन हिंदुस्तान के गरीब से गरीब मतदाता ने उनको धूल चाटने को मजबूर कर दिया भाइयों। अभी उत्तर प्रदेश में क्या हुआ ...? एमएलसी का चुनाव हुआ, एमएलसी का चुनाव हुआ तीन सीटें भारतीय जनता पार्टी भारी बहुमत से उत्तर प्रदेश में जीत गई। क्या हुआ? लोगों को ये साथ पसंद क्यों नहीं आया ...? एमएलसी के चुनाव में आपके सुपड़े-साफ क्यों हो गए ...?

भाइयों-बहनों।

ये बोलते साथ हैं लेकिन कारोबार स्वार्थ का है। ये जनता भली भांति जान गई है। भाइयों-बहनों पिछले दिनों नवंबर, दिसंबर महीने, जनवरी महीने में चंड़ीगढ़ कॉरपोरेशन का चुनाव हुआ, जहां भारतीय जनता पार्टी 20 साल से जीत नहीं पाई थी, चंड़ीगढ़ कॉरपरेशन में भारतीय जनता पार्टी दो-तिहाई बहुमत से चुनाव जीत गई भाइयों। महाराष्ट्र में नगर पालिकाओं के, पंचायतों के चुनाव हुए सारी विरोधियों की शक्ति को महाराष्ट्र की जनता ने साफ कर दिया। भारतीय जनता पार्टी को विजयी बनाया। 8 नवंबर नोटबंदी के बाद उड़ीसा में विजय, चंड़ीगढ़ में विजय, महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय में विजय, गुजरात में स्थानीय निकाय में विजय, राजस्थान के उपचुनावों में विजय जहां-जहां, मध्यप्रदेश में चुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी विजयी हुई। ये बात हवा का रूख बताता है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ इस देश का गरीब से गरीब इंसान जुड़ गया है।

भाइयों-बहनों।

ये समाजवाद की बातें करने वाले, इंदिरा गांधी के जमाने से गरीबी हटाओ के माला जपने वाले लोग कितने खोखले थे, कितने झूठ बोलते थे। भाइयों-बहनों सरकार गरीबों के लिए कैसे काम करती है। आप मुझे बताइये भाइयों-बहनों। आखिर सरकार किसके लिए होती है ...? क्या सरकार अमीरों के लिए होती है ...? जरा जवाब दीजिए क्या सरकार अमीरों के लिए होती है ...? क्या सरकार धन्ना सेठों के लिए होती है ...? क्या सरकार बड़े-बड़े लोगों के लिए होती है ...? क्या सरकार कुछ गिने-चुने कुनबों के लिए होती है ...?

भाइयों-बहनों।

सरकार गरीबों के लिए होती है। सरकार की पहली जिम्मेवारी गांव, गरीब, किसान, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, महिला, युवा उनके लिए सरकार समर्पित होनी चाहिए। लेकिन भाइयों-बहनों ये चुनाव आते गरीब, गरीब, गरीब, गरीब करते रहते थे लेकिन कभी गरीबों के लिए न सोचा न कुछ किया। आपको जानकर के हैरानी होगी ये उत्तर प्रदेश में गरीब की थाली में जब गरीब खाता है, अगर 3 रुपया वह अपनी जेब से देता है तो 27 रुपया भारत सरकार उसमें लगाती है, तब गरीब का पेट भरता है। भारत सरकार हर गरीब को हर दिन अगर गरीब 3 रुपये का खाता है तो 27 रुपया भारत सरकार उसमें डालकर के उसका पेट भरती है भाइयों-बहनों। गरीब को भूखा नहीं रहने दिया जाता लेकिन ये उत्तर प्रदेश की सरकार कैसी गरीब विरोधी है। भारत सरकार ने अन्न सुरक्षा के तहत उत्तर प्रदेश सरकार को कहा कि हम आपको इतने पैसे देंगे, आपके यहां इतने गरीब परिवार हैं, इनको खाना खिलाने के लिए पैसे लगाइये, उनकी सूची बनाइये। आज मुझे कन्नौज की धरती पर बड़ी पीड़ा के साथ कहना पड़ता है जहां कभी मुलायम जी, कभी अखिलेश जी कभी उनकी श्रीमती जी यहां का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग, मैं उनसे पूछना चाहता हूं। क्या कारण है कि गरीबों को खिलाने के लिए भारत सरकार पैसे दे रही है, अभी तक आप कौन गरीब है, किसको सस्ते में खाना मिलना चाहिए, उसकी सूची भी नहीं दे पाए, सूची भी। अभी भी 50 पचास हजार और लोगों को खिलाने के लिए साढ़े सात सौ करोड़ रुपया दिल्ली में हमने निकाल के रखा हुआ है लेकिन ये उत्तर प्रदेश की सरकार उसको लेने में ही इनट्रेस्टेड नहीं है। गरीबों का नाम लिखने में इनको रूचि नहीं है। क्यों? क्योंकि उनको तो वही गरीब गरीब लगते हैं जो उनके कुनबे के साथ जुड़े हुए हों, उनकी पसंद की किसी जाति के साथ जुड़े हुए हों। अगर उस जाति में वह नहीं हैं तो रुपया आएगा तो भी उसको देंगे नहीं, वह गरीब होगा तो भी भूखा मरने देंगे। दिल्ली सरकार पैसे देती है लेकिन उन गरीबों को देने का इनका इरादा नहीं है।

भाइयों-बहनों।

ये गरीबों के दुश्मन हैं कि नहीं हैं ...? ये गरीबों के दुश्मन हैं कि नहीं हैं ...? ये गरीबों के साथ अन्याय है कि नहीं है ...? ये गरीबों के साथ अन्याय है कि नहीं है ...?

भाइयों-बहनों।

उत्तर प्रदेश में, मैं हैरान हूं कुछ सामाजिक संस्थाएं जहां सरकारी सामाजिक संस्थानों में जो लोग रहते हैं, मजबूरन घर छोड़कर आना पड़ा है, उनको खिलाने के लिए भारत सरकार पैसे देती है। आप हैरान होंगे। ये उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे सोई पड़ी है कि उन संस्थाओं में आकर के रह रहे अनाथ आश्रम जैसी जगह पर उन गरीबों को खाना खिलाने के लिए, दिल्ली में भारत सरकार पैसे लेकर के बैठी है लेकिन ये उन लोगों को पैसे नहीं देते। खर्च नहीं करते क्योंकि उनको चाहिए वैसे बिचौलिये नहीं मिल रहे, बिचौलिये।

इसलिए भाइयों-बहनों।

अनाथ आश्रम में भी गरीबों को खाना खिलाने में ये कोताही बरतते हैं। आप मुझे बताइये ये गरीबों की सरकार है क्या ...?  क्या से समाजवाद है क्या ...? अरे भाइयों-बहनों आप मेरा, मेरे खाते में एक कार नहीं हैं, एक गाड़ी नहीं है, मेरे पास कोई गाड़ी नहीं। अभी तो प्रधानमंत्री हूं तो सरकार की गाड़ी में बैठकर गुजारा कर लेता हूं और ये समाजवादी लोग उनके घर में 200 से ज्यादा तो गाड़ियां रखते होंगे। ये कौन सा समाजवाद ...? ये लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाले लोग हैं भाइयों-बहनों। ...और इसलिए मैं आज आपके साथ ये कहने आया हूं।

भाइयों-बहनों।

आज मैं आपके खबर देना चाहता हूं। हमारे देश में हृदय की बीमारी सिर्फ अमीर को होती है ऐसा नहीं, गरीब को भी होती है। गरीब को हृदय की बीमारी हो जाए तो वो कहां जाएगा भाई? उसकी सेवा कौन करेगा? सरकार नहीं करेगी तो इसकी जिन्दगी कौन बचाएगी? आप मुझे बताइये। कोई अमीर बीमार हो जाए तो उसको किसी अस्पताल में जाने के लिए सरकारी अस्पताल का इंतजार करेगा ...? सरकारी डॉक्टर का इंतजार करेगा क्या ...? वो तो हवाई जहाज लाकरके अच्छे से अच्छे अस्पताल जाएगा कि नहीं जाएगा ...? अमीर के बेटे को पढ़ना है तो उसको सरकारी स्कूल की जरूरत पड़ती है ...? वो तो अच्छे से अच्छे स्कूल में बच्चों को बढ़ाएगा, विदेशों में पढ़ाएगा और ट्यूशन के लिए लोग घर आएंगे, अगर स्कूल के लिए जरूरत पड़ती है तो गरीब के बच्चे के लिए पड़ती है वो गरीब के बच्चे के लिए स्कूल अच्छी चलनी चाहिए कि नहीं चलनी चाहिए ...? आधी स्कूलें ऐसी हैं, आधी स्कूलें 50 प्रतिशत से कम शिक्षक उसमें काम कर रहे हैं, 50 प्रतिशत अगर शिक्षक नहीं हैं तो बच्चों का भविष्य क्या होगा? क्या ये गरीबों के लिए काम करते हो आप ...?

भाइयों-बहनों।

कल मेरी सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया। मैं सोच रहा था आज हमारे देश के अखबार इन खबरों से भरे हुए होंगे लेकिन मैं ढूंढ रहा था, मुझे नजर नहीं आया। हो सकता है जिन अखबारों में हो वो अखबार में देख न पाया हूं। आपको खुशी होगी जानकर के हमारे देश में हृदय रोग की बीमारी बढ़ती चली जा रही है। जब एनजीओ प्रयास करते हैं, पेसेंट को बचाना होता है तो डॉक्टर उसके हृदय की नली में एक स्टेंट लगा देते हैं जिसके कारण रक्त का प्रवाह ठीक चले, हृदय रोग की बीमारी न हो, हार्ट अटैक न हो और इंसान की जिंदगी बच जाए लेकिन भाइयों-बहनों सामान्य प्रकार का जो स्टेंट होता था। अगर गरीब को भी वो स्टेंट लगाना हो, 45 हजार रुपया लगता था, 45 हजार और विशिष्ट प्रकार का एक स्टेंट आता है जिसमें रक्त के साथ दवाईयां भी पहुंचाई जा सकती है, अगर वो लगाना है तो सवा लाख रुपया लगता था सवा लाख। अब मुझे बताइये और कितने ही सालों से यही होता था। ये गरीबों के नाम पर सरकार चलाने वाले, ये 10-10 साल दिल्ली में कांग्रेस की सरकार चलाने वाले लोग। मैं जरा आपको पूछना चाहता हूं कि क्या कारण था कि स्टेंट की कीमत पर सोचा नहीं गया।

भाइयों-बहनों।

मैंने एक कमेटी बिठाई, अध्यन किया। आखिरकर कानून बदला और कल हमने नियम बदलकरके ये स्टेंट को भी सरकार का जो ड्रग कन्ट्रोलर अथॉरिटी है। उसके अंदर डाल दिया और उसका परिणाम क्या हुआ मालूम है ...? ये गरीब को, सामान्य मानवी को, मध्यम वर्ग के मानवी को जिसके परिवार में किसी को हृदय रोग हो जाए तो उसको सीधा-सीधा लाभ मिलेगा और कितना मिलेगा जिस स्टेंट की कीमत 45 हजार रुपया थी। वो अब सिर्फ 8 हजार रुपये में बेचना पड़ेगा ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी मदद मिल सके। जिसकी कीमत सवा लाख थी उन सवा लाख के स्टेंट को अब सिर्फ 30 हजार रुपये में बेचना पड़ेगा, मध्यम वर्ग के व्यक्ति को बीमारी की स्थिति में कैसे मदद मिल सकती है? इसका ये उदाहरण है।

भाइयों-बहनों।

ये हमारा कन्नौज इत्र से भी जाना जाता है, आलू से भी जाना जाता है। हमारा किसान आलू की खेती करता है। भाइयों-बहनों आप मुझे बताइये मेरे किसान भाइयों-बहनों पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी की बहु ने आलू की फूड प्रोसेसिंग के लिए, आलू के चिप्स बनाने के लिए कारखाना लगाने के लिए वादा किया था कि नहीं किया था ...? जरा जोर से बोलिये वादा किया था ...? कारखाना लगा ...? आपके आलू खरीदे ...? चिप्स बनी ...? बाजार में बिकी ...? किसी के पेट में गई ...? लेकिन वो तो चुनाव जीत गए अब उनसे हिसाब मांगोगे कि नहीं मांगोगे ...? हिसाब चुकता करोगे कि नहीं करोगे ...? ऐसे वादे करने वालों को सजा दोगे कि नहीं दोगे ...?

भाइयों-बहनों।

मैं भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश को बधाई देता हूं कि उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने इस बार अपने घोषणा पत्र में एक महत्वपूर्ण वादा किया है और वो वादा किया है आलू, प्याज, लहसुन सरकार के मिनिमम सपोर्ट प्राइस एमएसपी से खरीदा जाएगा। आलू के किसान को मरने नहीं दिया जाएगा।

भाइयों-बहनों-

अगर किसान को बचाना है तो किसान जो पैदावार करता है उसकी मूल्य वृद्धि होनी चाहिए, वैल्यू एडिशन होना चाहिए और जब तक एग्रो प्रोडक्ट का प्रोसेसिंग नहीं होता है। हमारे किसान को पानी के मोल अपनी फसल बेच देनी पड़ती है। ...और इसलिए भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है कि जो कृषि पैदावार है, इस पर कोई प्रोसेस करने के लिए कारखाना लगाता है तो सौ प्रतिशत Foreign Direct Investment के लिए भारत सरकार ने आमंत्रित किया है। दुनिया के लोग यहां आएं, आलू से चिप्स बनाने के कारखाने लगाएं और आलू का किसान सफलतापूर्वक अपनी जिंदगी का गुजारा करें, लेकिन भाइयों-बहनों कांग्रेस पार्टी में एक ऐसा नेता है जो आपके पास वोट मांगने आए हैं, उनको इतना ज्ञान नहीं है कि आलू खेत में होता है कि आलू फैक्ट्री में होता है। वो उत्तर प्रदेश में किसानों की यात्रा निकाली और किसानों की यात्रा निकाल करके भाषण किया और किसानों के सामने। अब उन बेचारों को रोना है कि हंसना है, कुछ समझ ही नहीं आ रहा था और ये बोलते जा रहे थे। आलू की फैक्ट्री लगाने की बात बोलते थे। आप मुझे बताओ भाई आलू खेत में होता है कि फैक्ट्री में ...? आलू खेत में होता है कि फैक्ट्री में ...? आपको बराबर समझ है ना ...? आपको है ना समझ ...? उनको नहीं है। कैसे लोग किसानों के नाम पर बातें करते हैं, उनके मुंह से शोभा नहीं देती, शोभा नहीं देती।

भाइयों-बहनों।

कोई टमाटर की खेती करें लेकिन टमाटर सस्ते में बनता है लेकिन अगर टमाटर का कैचअप बनाएं, बढ़िया सी बोटल में पैकिंग करें तो दुनिया भर में अच्छे दाम से वो माल बिकता है। कोई दूध बेचे कम पैसा मिलता है लेकिन दूध से मिठाई बनाकर के बेचे तो ज्यादा पैसा मिलता है। कोई आम बेचे तो कम पैसा मिलता है लेकिन आम का अचार बनाकर के पैक करके बेचे तो ज्यादा कमाई होती है। किसान जो पैदा करता है, उसको अगर प्रोसेस किया जाए, उसमें से एक नई बनावट बनाई जाए तो किसान को कभी घाटा नहीं होता है। ...और इसलिए भाइयों-बहनों हमने किसान की भलाई के लिए अहम कदम भारत सरकार ने उठाए हैं लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार सिर्फ कुनबे के लिए चलती है इसलिए गरीबों की चिंता नहीं करती है। भारत की योजनाएं लागू नहीं करती है।

भाइयों-बहनों।

मैं उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को इस बात के लिए भी अभिनंदन करना चाहता हूं कि उन्होंने एक बहुत महत्वपूर्ण फैसला किया है। मेरे किसान भाई जरा गौर से सुनिये, भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश की ईकाई ने इस चुनाव घोषणा पत्र में एक महत्वपूर्ण वादा किया है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार बनेगी सबसे पहला काम छोटे किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। कर्ज माफ कर दिया जाएगा और मेरे किसान भाइयों-बहनों। आपने मुझे उत्तर प्रदेश में से सांसद बनाया एमपी बनाया। उत्तर प्रदेश के भारी समर्थन से आपने मुझे पीएम बनने का अवसर दिया। मैं एक सांसद के नाते, यहां के उत्तर प्रदेश के जनप्रतिनिधि के नाते, किसानों की तरफ से आपको मैं वादा करता हूं ये जिम्मेवारी मेरी होगी। सुन लिया ...? ये जिम्मेवारी मेरी होगी कि उत्तर प्रदेश की सरकार बनते ही उनकी पहली मीटिंग में ही किसानों के कर्ज माफ करने का निर्णय में करा दूंगा।  

भाइयों-बहनों।

हमारे हिंदुस्तान की फिल्म आप देखते हैं, अलग-अलग प्रकार की मूवी आती हैं, सिनेमा देखते हैं आप लोग। हमारी फिल्मों की एक विशेषता होती है आपने देखा होगा कि इंटरवल तक दो जानी दुश्मन बराबर एक-दूसरे से भिड़ते हैं। भांति-भांति के खेल करते हैं, षड्यंत्र करते हैं और इंटरवल के बाद अचानक दोनों मिल जाते हैं, देखा है ना ...? ये उत्तर प्रदेश में भी राजनीति के मंच पर एक नई फिल्म चल रही है। इंटरवल के पहले दोनों लड़ रहे थे। 27 साल यूपी बेहाल नारे लगा रहे थे, यात्रा निकाल रहे थे, अखिलेश जी का कच्चा चिट्ठा खोल देते थे। जितने आरोप लगा सकते थे, लगाते थे लेकिन इंटरवल के बाद दोनों। ये कौन सी फिल्म है भाई?

भाइयों-बहनों।

ये चुनाव बड़ा कमाल का है। मैं हैरान हूं मीडिया के लोगों का इस बात पर ध्यान क्यों नहीं गया ...? क्योंकि हमारे देश का मीडिया बड़ा चतुर है, चीज को पकड़ लेता है। जब पहली पत्रकार परिषद हुई तो अखिलेश जी ने तो मायावती जी के खिलाफ बयान दिया लेकिन जब कांग्रेस पार्टी को पूछा गया कि आपको मायावती के खिलाफ क्या कहना है तो कांग्रेस ने ऑफिशियल कह दिया कि हमें उनके खिलाफ कुछ नहीं कहना है लेकिन मैं हैरान हूं कि इसके बाद कभी कांग्रेस को किसी ने प्रश्न ही नहीं पूछा कि आपका मायावती जी के लिए क्या कहना है। बीएसपी के लिए क्या कहना है, क्यों चुप हो भाई? ये इसलिए चुप हैं कि अखिलेश जी अभी अनुभव कम है, ये कांग्रेस वाले कितने चतुर हैं। ये उनको समझ नहीं आता है। मुलायम सिंह जी को तो आता है, इनको नहीं आता है। ये चुनाव में दो लोग साथ-साथ हैं, ऐसा नहीं है, इस चुनाव में त्रीपगी दौड़ चल रही है, त्रीपगी दौड़, तीन पैर वाली दौड़ चल रही है। एक सपा का पैर है, दूसरा सपा का पैर कांग्रेस के पैर के साथ बंधा हुआ है और कांग्रेस का दूसरा पैर बसपा के पैर के साथ बंधा हुआ है। ये कांग्रेस का कमाल है, एक पैर सपा के साथ, एक पैर बसपा के साथ और ये त्रीपगी दौड़ दौड़ रहे हैं लेकिन सपा, बसपा और कांग्रेस समझ लीजिए दो पैरे से दौड़ने वाले को तीन पगी दौड़ वाला कभी हरा नहीं सकता है, गिरा नहीं सकता है। अखिलेशजी चेत जाओ, चेत जाओ। मुलायम सिंह जी की बात तो तुम सुनने को तैयार नहीं हैं लेकिन लिख के रखो कांग्रेस ने एक पैर बीएसपी के साथ बांध कर के रखा हुआ है और एक पैर आपके साथ बांधकर के आपकी मदद ले रहे हैं। ये नया खेल हिंदुस्तान की राजनीति में पहली बार त्रीपगी दौड़ वाला खेल चल रहा है, उसे समझना पड़ेगा भाइयों।

भाइयों-बहनों।

इस उत्तर प्रदेश में आपने देखा। पांच साल मायावती जी की जब सरकार थी तो अखिलेश उनके भ्रष्टाचार के गीत गाते थे, जब अखिलेश जी की सरकार आई तो कांग्रेस और मायावती जी दोनों उनके भ्रष्टाचार के गीत गाते थे। दिल्ली में 10 साल कांग्रेस के राज में सारे देश ने भ्रष्टाचार देखा है। सुना है उसकी बदबू आज भी आ रही है। अब देखिये 5 साल उनका भ्रष्टाचार, 5 साल बसपा का, 5 साल सपा का और 10 साल का कांग्रेस का भ्रष्टाचार कैसे अनुभवी-अनुभवी लोग इकट्ठे हुए हैं। इतने बड़े खिलाड़ी भ्रष्टाचार के इकट्ठे आएंगे तो अब उत्तर प्रदेश में कुछ बचेगा क्या ...?  कुछ बचेगा क्या ...?  इसलिए भाइयों-बहनों उत्तर प्रदेश को बचाने के लिए, उत्तर प्रदेश को बनाने के लिए, उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी एक मात्र आशा बची है भाइयों, एक मात्र आशा बची है।

भाइयों-बहनों।

मैं आज कन्नौज की धरती पर आया हूं तो इतिहास के कुछ पन्ने खोलना चाहता हूं। भाइयों-बहनों ये बात याद रखिये और पूरे इलाके में घर-घर पहुंचाइये। मैं इतिहास का एक पन्ना याद कराना चाहता हूं और अगर आपको फुर्सत हो तो पुराने अखबार निकालकर के देख लेना 4 मार्च 1984। 4 मार्च 1984 जब मुलायम जी लोहिया के विचारों को लेकर के कांग्रेस के खिलाफ बड़ी कड़ी लड़ाई लड़ते थे, कांग्रेस की गभीर आलोचना करते थे। एमएलसी के नाते वे विपक्ष के नेता थे और कांग्रेस के नाक में दम ला दिया था और इस कारण कांग्रेस मुलायम सिंह जी से परेशान थी।

भाइयों-बहनों।

कांग्रेस इतनी तंग आ चुकी थी कि एक दिन  4 मार्च 1984 मुलायम सिंह पर गोलियां चलीं। उनकी हत्या करने का गंभीर प्रयास हुआ, वे बच गए। उसके बाद मुलायम सिंह के समर्थन में एक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा मैदान में आया।  मुलायम सिंह जी के हत्या करने के षड्यंत्र के खिलाफ  चौधरी चरण सिंह जी, अटल बिहारी वाजपेयी जी उन्होंने एक बहुत बड़ा आंदोलन किया, मुलायम सिंह जी  की रक्षा के लिए आंदोलन किया। मुलायम सिंह जी पर गोलियां चलाने वालों को सजा दिलवाने के लिए आंदोलन चलाया। भाइयों-बहनों और वो आंदोलन कांग्रेस की सरकार के खिलाफ चला था, कांग्रेस पार्टी के खिलाफ चला था।

भाइयों-बहनों।

मैं जरा अखिलेश जी से पूछना चाहता हूं। ये कांग्रेस की गोद में बैठने से पहले जरा 4 मार्च, 1984 उन दिनों को याद कर लीजिए। जब आपके पिता जी पर कांग्रेस ने इतना गंभीर हमला करवाया था। 28 मार्च को बहुत बड़ी रैली हुई थी। क्या आपने कभी सुना है, कुर्सी के मोह में कोई ऐसा भी बेटा होता है जो अपने बाप की जिंदगी के साथ खेल-खेलने वाले लोग, मौत के घाट उतारने के लिए गोलियां चलाने वाले लोग और उनके पीछे जो लोग थे, उनकी गोद में बैठकर के राजनीति करना, इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है? ये गंभीर बात में आज कह रहा हूं भाइयों-बहनों। क्या कभी हो सकता है …? आप मुझे बताइये, आपके पिता जी पर किसी ने हत्या का प्रयास किया हो आप कभी उससे दोस्ती करेंगे …? करेंगे दोस्ती …? कोई बेटा करेगा दोस्ती …? क्या राजनीति इतनी गिर गई है, इतनी    नीचे गई है कि कुर्सी के मोह में इस प्रकार के कांड किये जाएं। भाइयों-बहनों, ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं किया जा सकता।

भाइयों-बहनों।

जब उत्तर प्रदेश की चर्चा आती है तो यूपी लिखते हैं, अंग्रेजी में UP, UP U और P लेकिन वैसे यूपी को देखो अप होता है उपर जाना, अप। यूपी का मतलब होता है अप लेकिन भाइयों-बहनों। आज में अगर यूपी का खाका खोलूं तो कहीं अप नजर नहीं आता है, सब कुछ डाउन नजर आता है, डाउन नजर आता है। आज यूपी में जनता का भरोसा डाउन है। विकास का ग्राफ डाउन है। कानून व्यवस्था डाउन है। माताओं-बहनों की बेटियों की सुरक्षा का मसला डाउन है। किसानों की खुशहाली डाउन है। युवाओं का रोजगार डाउन है। व्यापारियों का कारोबार डाउन है। बिजली का उजाला डाउन है। सड़क का हाल डाउन है। स्वास्थ्य और शिक्षा डाउन है। सपा-बसपा-कांग्रेस की राजनीति के वादे डाउन ही डाउन है लेकिन कहने को अप है और अप क्या है? यूपी का अप कारोबार डाउन और अगर अप क्या है? अपराध अप है, भ्रष्टाचार अप है, असुरक्षा अप है, दंगा अप है, मां-बहनों पर अत्याचार अप है, बेरोजगारी अप है, गरीबी अप है, बीमारी अप है, शिशु मृत्यु अप है, माता मृत्यु अप है, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या अप है, पलायन करने वालों की संख्या अप है और फिर भी कहते हैं, काम बोलता है। ये काम बोलता है या कारनामे बोलते हैं।





भाइयों-बहनों।

काम कैसे बोलेगा? आप मुझे कहिए भाइयों-बहनों। यहां पुलिस की भर्ती में जातिवाद होता है कि नहीं होता है ...? पुलिस की भर्ती में जातिवाद होता है कि नहीं होता है ...? ईमानदार नौजवान को रोजगार मिलता है क्या ...? जाति के नाम पर उसको नकार दिया जाता है कि नहीं जाता है ...? यहां के पुलिस थाने सपा के कार्यालय बन गए हैं कि नहीं बन गए हैं ...? सपा कार्यकर्ता चाहे उसको सजा करवाता है कि नहीं करवाता है ...? पुलिस से डंडा मरवाता है कि नहीं मरवाता है ...? यहां पर जमीनों पर कब्जा सपा के लोग करते हैं कि नहीं करते हैं ...? निर्दोष लोगों की जमीन पर कब्जा सपा वाले करते हैं कि नहीं करते हैं ...? उनकी कोई सुनवाई होती है क्या ...? पुलिस मदद करती है क्या ...? अफसर मदद करते हैं क्या ...? सरकार मदद करती है क्या ...? क्या ये चलने देना है क्या ...? ये खत्म होना चाहिए कि नहीं ...?  ईमानदारों को उसका हक मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए ...? गरीब को उसका हक मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए ...? नौजवान को उसका अधिकार मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए ...?

भाइयों-बहनों।

आपको वादा करने आया हूं, भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी। जहां-जहां बेईमानी हुई है, उसका कच्चा चिट्ठा खोल दिया जाएगा। मेरे नौजवानों क्या मैरिट के आधार पर नौकरी मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए ...? आपकी ताकत के हिसाब से आपको काम मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए ...?  अगर आप होनहार है तो नौकरी का हक है कि नहीं है ...? लेकिन रोका कैसे जाता है, जब आप परीक्षाएं पास करते हैं, अच्छे मार्क्स लाते हैं, फिर नौकरी के लिए एक्जाम देते हैं, उसमें भी अच्छे मार्क्स लाते हैं, टॉपर होते हैं लेकिन बाद में इंटरव्यू की चिट्ठी आती है, इंटरव्यू आता है। आता है ना इंटरव्यू और जब इंटरव्यू आता है तो बेटा खुशी से समाता नहीं है। मां को कहता है, मां इंटरव्यू आ गया। मैंने परीक्षा पास कर ली अब नौकरी लगेगी, मां अनुभवी है, कहती है बेटा देखो किसी की पहचान है क्या …? कोई जानने वाला मिल जाए तो देखो। देखो कोई नेता मिल जाए तो देखो। वो बेचारा इंटरव्यू के पहले कोई पहचान वाले को तलाशता है, सिफारिश करने के लिए तलाशता है तो कोई बिचौलिया आ जाता है, कहता है नौकरी चाहिए तो दो लाख दीजिए, नौकरी चाहिए तो पांच लाख दीजिए। वो गरीब मां कहती है बेटा, ये तेरे बाप ने मेरे लिए जमीन छोड़ी है> ये जमीन गिरवी रख दो लेकिन पैसे देकर के एक बार नौकरी ले लो बेटा और इंटरव्यू में कैसा चल रहा है भाइयों। तीन बाबू बैठे हैं, एक दरवाजे से नौजवान अंदर आता है, 30 सेकेंड। ज्यादा नहीं 30 सेकेंड वो तीन लोग उसको देखते हैं वो तीन लोगों को देखता है, वो उससे पूछ लेते हैं नाम क्या, कहां से आए हो और दूसरे दरवाजे से निकल जाता है ये है इंटरव्यू। मुझे बताइये भाई दुनिया में ऐसा को विज्ञान निकलता है क्या कि 30 सेकेंड में पता चल जाए कि ये भाई कैसा है, कैसा नहीं है पता चल जाए ऐसा कोई विज्ञान है क्या ...? ये बेईमानी है कि नहीं है ...? ये इंटरव्यू नाम का झूठ चल रहा है कि नहीं चल रहा है ...? ये लोगों को उनके हक को छीनने का षड़यंत्र है कि नहीं है ...?

भाइयों बहनों।

हमने निर्णय किया। दिल्ली में आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया हमने निर्णय किया कि वर्ग 3 और 4 सरकार में सबसे ज्यादा नौकरी करने वाले लोग वर्ग 3 और 4 के होते हैं। हमने निर्णय किया अब वर्ग 3 और 4 में कोई इंटरव्यू नहीं लिया जाएगा। हर किसी के मार्क्स कम्प्यूटर में डाल दिये जाएंगे और कम्प्यूटर ही तय करेंगा कि पहले 100 कौन हैं, पहले 200 कौन हैं, पहले 500 कौन हैं और कम्प्यूटर से ही उसके घर ऑर्डर चला जाएगा, कौई बिचौलिया नहीं रहेगा, कोई जाति नहीं रहेगी, कोई बेईमानी नहीं रहेगी, कोई भ्रष्टाचार नहीं रहेगा।

भाइयों-बहनों।

ईमानदारी की सरकार है, ईमानदारों के लिए ये सरकार है भाइयों और इसलिए भाइयों-बहनों। अभी रेलवे में 1 लाख लोगों का भर्ती हुआ। कोई इंटरव्यू नहीं किया। कम्प्यूटर ने बता दिया। उनके घर ऑर्डर चला गया। एक नये पैसे के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा।

भाइयों-बहनों।

मेरे नौजवानों। नई सरकार भाजपा की उत्तर प्रदेश में बनेगी और आप देखना सीआईएसएफ में 35 हजार पलिसों की भर्ती करनी है। बीएसएफ में सीआरपीएफ में 25 हजार हेड कांस्टेबल की भर्ती करनी है। कोई भाई-भतीजा जातिवाद नहीं होगा। ईमानदार नौजवानों को नौकरी मिलेगी, देख लेना भाइयों। और इसलिए भाइयों-बहनों। मैं आपसे यही कहने आया हूं कि हम ये सरकार दिल्ली में ऐसी है जो गरीबों के लिए है, ये सरकार मध्यमवर्ग के मेहनतकश लोगों के लिए है, ये सरकार ईमानदार लोगों के लिए है और ईमानदारी की रक्षा करने के लिए आज दिल्ली में हम बैठे हैं। आप देखिये 8 नवंबर, रात को 8 बजे टीवी पर मोदी ने कहा मेरे प्यारे देशवासियों। तूफान खड़ा हो गया तूफान। 70, 70 साल तक नोटों के बंडल दबा-दबाकर के बैठे थे, सब कुछ निकल गया, सब कुछ। निकला कि नहीं निकला ...? बैंकों में जमा करना पड़ा कि नहीं पड़ा …? अब हिसाब देना पड़ रहा है तो रात को नींद नहीं आ रही है। और मोदी हिसाब मांग रहा है।

आप मुझे बताइये भाइयों-बहनों।

गरीब का जिन्होंने लूटा है, वो गरीब को लौटाना चाहिए कि नहीं चाहिए ...? जिसने गरीब का लूटा है उसका गरीब को लौटाना चाहिए कि नहीं लौटाना चाहिए ...? देश को लूटा है देश को वापस मिलना चाहिए कि नहीं चाहिए ...? और इसलिए भाइयों-बहनों। मैंने भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक बहुत बड़ी लड़ाई छेड़ी है और मैं जानता हूं ये लड़ाई सामान्य नहीं है। बड़े-बड़े शातिर दिमाग वालों से मुझे लड़ना है। बड़ी-बड़ी हस्तियों से लड़ना है। देश का माल खा-खाकर ताकतवर बने ऐसे लोगों से मैं भिड़ रहा हूं लेकिन लड़ पा रहा हूं, क्योंकि सवा सौ करोड़ ईमानदार लोगों का मुझे आशीर्वाद है और ईमानदार लोगों का आशीर्वाद है। इसी के कारण बेईमान लोग आज कांप रहे हैं।

भाइयों-बहनों।

आप मुझे बताइये। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई चलनी चाहिए कि नहीं चलनी चाहिए ...? भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए ...? भ्रष्टाचार जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए ...? काला धन खत्म होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए ...? इसके लिए कठोर कदम उठाने चाहिए कि नहीं उठाने चाहिए ...? आपके आशीर्वाद है मुझे ...? दोनों हाथ उपर करके पूरी ताकत बताइये आपके आशीर्वाद है ...? आपके आशीर्वाद है ...? आपके आशीर्वाद है ...?

भाइयों-बहनों।

ये लड़ाई मैं छोड़ूंगा नहीं, गरीबों के लिए मैंने लड़ाई छेड़ी है। मैं छोड़ने वाला नहीं हूं। मुझे आपके आशीर्वाद चाहिए। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाइये। 19 तारीख को कमल के निशान पर बटन दबाइये, भारत को गौरव दिलाने का प्रयास करने वाली भारतीय जनता पार्टी को विजयी बनाइये। मेरे साथ, दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए भारत माता की जय। पूरी ताकत से बोलिये। भारत माता की जय। भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद।

Letter 'X' on palm.



Letter 'X' on palm.
रहस्य क्रॉस
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Only 3% of the world population carry the same marking or letter 'X' on their palms.
Those people having letter 'X' on their palms might be:
Effective and highly efficient, smartest of all, great leadership qualities and great knowledge. They are intuitive and they easily forgive but yes they do not forget anything.
They are found to be powerful and lucky.
It is said that, they easily adapt themselves to the situations around them.
The popular individuals who have or had this letter include:
Greek emperor Alexander The Great and President Abraham Lincoln, Russian President
Vladimir Putin.
And
You ?????

भैरोंसिंह शेखावत : राजनीति का चलता फिरता विद्यालय थे










राजनीति का चलता फिरता विद्यालय थे स्व. भैरोंसिंह शेखावत
15 मई, 2017

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत राजनीति का चलता फिरता विद्यालय थे, जिन्होंने अपनी नीतियों और योजनाओं के जरिये आम गरीब व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया। स्व. शेखावत ने जन सेवा के लिए राजनीति को एक माध्यम के रूप में चुना।

श्रीमती राजे सोमवार को जयपुर के बिड़ला सभागार में आयोजित प्रथम स्व. भैरोंसिंह शेखावत स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनका आशीर्वाद मिला और मैंने उनसे राजनीति में बहुत कुछ सीखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. भैरोंसिंह ऐसे राजनेता थे जो शत्रु नहीं बनाते थे और उनके मित्र सभी राजनीतिक दलों में थे। उन्होंने हमेशा कतार में सबसे आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति को गणेश माना। वे कहते थे कि सबसे दूर बैठा व्यक्ति हमारी नजर में सबसे पहला व्यक्ति होना चाहिए।

श्रीमती राजे ने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में स्व. शेखावत ने ’अंत्योदय योजना’ तथा ’काम के बदले अनाज योजना’ लागू की, जो प्रदेश के गरीब और वंचितों के प्रति समर्पित थीं। उन्होंने पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए काम किया। हमारी सरकार ने भी उनके अंत्योदय के सपने को पूरा करने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का प्रदेश में आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि विराट व्यक्तित्व के धनी श्री मुखर्जी देश के पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने प्रतिभाओं के लिए राष्ट्रपति भवन के दरवाजे खोले हैं।

श्रीमती राजे ने सिक्किम के मुख्यमंत्री श्री पवन कुमार चामलिंग को प्रथम श्री भैरोंसिंह शेखावत लाइफटाइम अचीवमेंट ऑनर इन पब्लिक सर्विस पुरस्कार पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

गुरुवार, 18 मई 2017

मोदी सरकार के बेमिसाल तीन साल - अरविन्द सिसौदिया


मोदी सरकार के तीन साल बेमिसाल:अरविन्द सिसौदिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र जी मोदी की केन्द्र सरकार के तीन साल 26 मई 2017 को होनें जा रहे है। मीडिया के क्षैत्र में अलग - अलग तरीकों से जांच पड़ताल हो रही है , आलेख लिखे जा रहे हैं , रायसुमारियां हो रहीं हैं, कि मोदी सरकार के तीन साल कैसे रहे। “स्वच्छ भारत से स्वच्छ धन” तक की मोदी सरकार की यात्रा के तीन साल भारत में प्रौ़द्योगिकी के उपयोग, आंतरिक विकास एवं बदलाव के लिये बेमिसाल रहे हैं। जीवन को उन्नत करनें और मानवता को अधिकतम लोगों तक ले जानें के महान प्रयास में मोदी सरकार को युगों - युगों तक स्मरण किया जाता रहेगा। सम्पूर्ण भारत के जन - जन की अभिलाषा है कि मोदी जी लगातार इसी तेजश्विता से , ऊर्जा से भारत को नेतृत्व प्रदान करते रहें । हम सफलतम तीन वर्ष  के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का अभिनंदन करते है। उन्हे बधाई प्रेषित करते है।
आपका
अरविन्द सिसौदिया ,
जिला महामंत्री भाजपा, कोटा, राजस्थान
 9414180151 / 9509559131



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https://khabar.ndtv.com
-16 मई को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव जीती बीजेपी
-26 मई को पीएम के तौर पर नरेंद्र मोदी ने ली थी शपथ
-उनके कार्यकाल के कई काम काफी सराहे गए.

नई दिल्ली: गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी को तीन साल पहले जनता ने गुजरात छोड़कर दिल्ली में आने को मजबूर कर दिया. खुद बीजेपी ने नहीं सोचा था कि पार्टी को इस प्रकार का बहुमत मिलेगा जो ऐतिहासिक होकर भारतीय राजनीति के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो जाएगा. यह पहली बार हुआ कि एक वर्तमान मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री पद का उत्तराधिकारी बना.

कारण साफ था गुजरात के बाहर मोदी की कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता, कुछ नया करने की इच्छाशक्ति और भविष्य को ध्यान में रखकर तकनीक का प्रयोग आदि की खबरें जो आई उसने लोगों के दिलोदिमाग पर एक ही छाप छोड़ी, अबकी बार मोदी सरकार. लोगों ने यह नारे नहीं लगाए, अबकी बार बीजेपी सरकार.

पहले लोग गुजरात के बाहर मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के जानते थे. अब लोग एक पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी को जानते और समझने लगे हैं. पिछले तीन सालों में पीएम मोदी के प्रति लोगों का लगाव कुछ ऐसा बढ़ा है कि उनकी लोकप्रियता का ग्राफ नीचे आने का नाम ही नहीं ले रहा है. विपक्ष इसी बात से परेशान है. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के तीन साल में पीएम को लोगों को जानने और समझने का मौका मिला. इन तीन सालों में पीएम मोदी के कुछ ऐसे काम रहे जो तमाम लोगों की नजर बेहतर पाए हैं. इनमें से 15 का जिक्र अब बनता है.

नरेंद्र मोदी का स्वच्छता का प्रति झुकाव 
शायद ही इससे पहले किसी प्रधानमंत्री का स्वच्छता के प्रति इतना झुकाव देश ने देखा होगा. स्वच्छता को एक अभियान बनाना. अभियान का हिस्सा बनना. खुद झाड़ू लेकर मैदान में उतरना और लाखों लोगों को इसके लिए प्रेरित करना. आसान काम नहीं है. लेकिन पीएम मोदी ने बखूबी कर दिया. परिणाम कितना मिला इस बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता, लेकिन देश में लोग इस बारे में प्राथमिकता से विचार करने लगे, यह इस अभियान की सफलता के पयमाने में एक जरूर है.

पीएम नरेंद्र मोदी का समय का पालन करना
पीएम नरेंद्र मोदी काफी मेहनती है. कहा जाता है कि दिन में 18 घंटे वह काम करते हैं. समय की पाबंदी पसंद करते हैं. जब से सत्ता में आए इन्होंने सरकारी कर्मचारियों में इसे लागू करवाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी. कई मंत्रालयों में जहां कर्मचारी 11 बजे के बाद दिखाई देते थे और 3 बजे तक कुर्सियां खाली होना शुरू हो जाती वहां की परिस्थिति बिल्कुल बदल गई है. पीएम मोदी ने आदेश देकर लगभग सभी  केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन लगाने के आदेश दे दिए.

सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान और विपक्ष का मुंह बंद 
नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर के हिस्से में सर्जिकल स्ट्राइक की मंजूरी दी और भारतीय सेना ने पहली यह कारनामा कर पूरी दुनिया को अचरज में डाल दिया. यह अलग बाद है कि कांग्रेस की ओर से कहा गया कि उनके कार्यकाल के दौरान में ऐसा हुआ लेकिन उन्होंने ढिंढोरा नहीं पीटा. वर्तमान डीजीएमओ ने इसे अपनी तरह का पहला  आपरेशन बताया तो कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर अकसर इस तरह की कार्रवाई होती है.

पीएम के मन की बात
सत्ता में आने के बाद किसी प्रधानमंत्री ने जनता से जुड़ने का अनोखा माध्यम निकाला मन की बात. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महीने के अंतिम रविवार को लगातार मन की बात कार्यक्रम के जरिए लोगों को संबोधित करते हैं. इस कार्यक्रम के लिए लोगों से सुझाव मंगाते और कई मुद्दों पर लोगों से बात करते हैं. पीएम की इस पहल की लोगों ने काफी सराहना की है.

भ्रष्टाचार पर अंकुश की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही यह प्रयास आरंभ किए कि भ्रष्टाचार पर हर प्रकार का अंकुश लगे. इसके लिए सरकार सभी सरकारी भुगतान ऑनलाइन करने का निर्णय लिया. टेंडरिंग को पूरी तरह ऑनलाइन करने का आदेश दिया. इस प्रकार के कई आदेश सरकार दिए और इसकी उपलब्धि कितनी है इस बारे में ठोस नहीं कहा जा सकता है. कहा जा सकता है तो सिर्फ इतना कि पिछले तीन साल में अभी  तक सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है. जबकि पिछली सरकार में मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक पर आरोप लगते रहे हैं.

नोटबंदी का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर को तत्कालीन 500 और 1000 के नोट को बंद करने का ऐलान किया. देश की पूरी अर्थव्यवस्था जैसे रुक गई. पीएम ने लोगों ने दो महीने का समय मांगा और लोगों ने दिया. लोगों को काफी कष्ट झेलने पड़े. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाने का प्रयास किया. नोटबंदी को गलत कदम करार दिया. चुनाव में भुनाने का प्रयास भी लेकिन यह लोगों का मोदी से विश्वास कम नहीं हुआ.

स्वस्थता के प्रति सजगता
पीएम मोदी स्वास्थ्य के प्रति काफी सजग हैं. वह सुबह उठकर योग करते हैं. उन्होंने पूरी दुनिया में योग दिवस मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से संपर्क किया और भारत के नाम एक अंतरराष्ट्रीय सफलता लगी. इतना ही नहीं वह लगातार लोगों से यह अपील कर रहे हैं कि वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें. योग को अपनाएं और स्वस्थ जीवन शैली.

तकनीक के प्रति रुझान
प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे. वहां से वह लगातार सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुड़े रहे हैं. मोबाइल तकनीक और तकनीक का प्रयोग कामकाज में करने ताकि पारदर्शिता बने और काम सहज हो. यह प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की देश को एक देन है. भारत में राष्ट्रपति का एक ट्विटर हैंडल  बना. पीएमओ का ट्वीटर हैंडल, पीएम का, सभी मंत्रालयों और मंत्री को ट्वटीर से लोगों से जुड़ने का आदेश दिया गया और सभी को सक्रियता से इससे जुड़ने की बात कही गई. परिणाम साफ है कि विदेश मंत्रालय से लेकर रेल, और कई मंत्रालयों में लोगों ने ट्विटर के जरिए अपनी समस्याओं का समाधान किया. कई बार तो बड़ी समस्याओं का समाधान एक ट्वीट से हो गया. उससे से बड़ी बात समय पर लोगों को सुविधा मिली और लोगों ने पीएम की इस मुहिम का लाभ उठाया और दिया धन्यवाद.

डिजिटल भारत की मुहिम
डिजिटल भारत के सपने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी आगे बढ़ रहे हैं. उनके पिछले तीन साल के कार्यक्रम में वह लगातार इस ओर बढ़ते जा रहे हैं. लोगों ने इस दिशा में काम करने का आग्रह कर रहे हैं. सरकार के सभी विभागों को डिजिटलाइजेशन के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे पर्यावरण से लेकर धन की हानि दोनों को बचाया जा सकता है. कई सरकारी काम अब इस माध्यम से होने लगे हैं. इतना ही नहीं कई ऐसे फॉर्म को सरल किया जिसके चलते लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता था.

कैशलेश भारत की मुहिम
पीएम ने न्यू इंडिया की संकल्पना की है. उन्होंने इसके लिए कैशलेस भारत की बात कही है. वह चाहते हैं कि देश में नकदी का चलन न हो. यह सबसे बड़ा माध्यम है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का. पीएम को कितनी कामयाबी मिली, या मिलेगी यह तो साफ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन लोगों ने माना कि पीएम भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत किलेबंदी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

रोज एक कानून किया खत्म
आजादी के पहले अंग्रेजों ने भारत के लिए कई कानून बनाए. आजादी के बाद भी हजारों की संख्या में इस प्रकार के कानून भारत में चलते रहे. कई ऐसे कानून भी हैं जिनकी अब आवश्यकता भी नहीं रही. आजादी के 70 से भी ज्यादा हो गए कई सरकारें आईं कई लेकिन किसी ने भी इस ओर विचार नहीं किया. नरेंद्र मोदी सरकार ने कई ऐसे कानून रद्द कर दिए जिनकी अब कोई जरूरत नहीं है. एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि जब से वह सरकार में आए हैं तब से लेकर अब तक उन्होंने 1000 से ज्यादा कानून रद्द कर दिये हैं. वे अपनी इस मुहिम में रोज  आगे बढ़ रहे हैं. उनका मानना है कि कई गैरजरूरी कानून लोगों के लिए दिक्कत पैदा करते हैं.

नीति आयोग का गठन
योजना आयोग अब इतिहास हो गया है. इसके स्थान पर पीएम मोदी ने नीति आयोग का गठन किया है. जब मोदी गुजरात के सीएम थे तब योजना आयोग, उसकी कार्यशैली और राज्यों से व्यवहार उन्हें उचित नहीं लगा. राज्यों से केंद्र के बेहतर समन्वय के लिए उन्होंने नीति आयोग का गठन किया.

पाकिस्तान को अलग थलग करना 
अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद को नीति के रूप में प्रयोग कर रहे पाकिस्तान को भारत ने अलग थलग कर दिया. आज पाकिस्तान पर अमेरिका से लेकर कई देशों ने दबाव बनाया है कि वह आतंकवाद को प्रशय देना बंद करे. इस काम में मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है.

चीन की आंखों में आंखों डालना
पिछले काफी समय से चीन भारत के बड़े भाई की भूमिका में आने के प्रयास में रहा. एक तरफ जहां वह पाकिस्तान की मदद कर रहा है वहीं भारत के कई हिस्से पर अपना दावा करता रहा है. एलएसी को वह स्वीकार नहीं कर रहा है. लेकिन कई दशकों बाद भारत ने लेह के आगे अपने 100 टैंक भेजे और युद्धाभ्यास किया. वहीं अरुणाचल प्रदेश के विकास और सीमा पर सड़क निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया गया.

शनिवार, 6 मई 2017

बद्रीनाथ धाम




6 मई 2017 को सुबह 4:15 पर बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे। नरेंद्रनगर में राजा मनुजयेंद्र शाह ने राजदरबार से तिथि की घोषणा की। पूजा अर्चना और मंत्रोचार के बाद पूरे विधि विधान से बाबा केदार के कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई।

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इतिहास के पन्नो से.....बद्रीनाथ धाम
पौराणिक कथाओं और यहाँ की लोक कथाओं के अनुसार यहाँ नीलकंठ पर्वत के समीप भगवान विष्णु ने बाल रूप में अवतरण किया। यह स्थान पहले शिव भूमि (केदार भूमि) के रूप में व्यवस्थित था। भगवान विष्णुजी अपने ध्यानयोग हेतु स्थान खोज रहे थे और उन्हें अलकनंदा नदी के समीप यह स्थान बहुत भा गया। उन्होंने वर्तमान चरणपादुका स्थल पर (नीलकंठ पर्वत के समीप) ऋषि गंगा और अलकनंदा नदी के संगम के समीप बाल रूप में अवतरण किया और क्रंदन करने लगे। उनका रुदन सुन कर माता पार्वती का हृदय द्रवित हो उठा। फिर माता पार्वती और शिवजी स्वयं उस बालक के समीप उपस्थित हो गए। माता ने पूछा कि बालक तुम्हें क्या चहिये? तो बालक ने ध्यानयोग करने हेतु वह स्थान मांग लिया। इस तरह से रूप बदल कर भगवान विष्णु ने शिव-पार्वती से यह स्थान अपने ध्यानयोग हेतु प्राप्त कर लिया। यही पवित्र स्थान आज बदरीविशाल के नाम से सर्वविदित है।
जब भगवान विष्णु योगध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत अधिक हिमपात होने लगा। भगवान विष्णु हिम में पूरी तरह डूब चुके थे। उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर (बदरी) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगीं। माता लक्ष्मीजी भगवान विष्णु को धूप, वर्षा और हिम से बचाने की कठोर तपस्या में जुट गयीं । कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देख कर कहा कि हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा।
जहाँ भगवान बदरीनाथ ने तप किया था, वही पवित्र-स्थल आज तप्त-कुण्ड के नाम से विश्व-विख्यात है और उनके तप के रूप में आज भी उस कुण्ड में हर मौसम में गर्म पानी उपलब्ध रहता है।
पावन बद्रीनाथ धाम नर-नारायण पर्वत के मध्य में हिमालय की कोख में बसा है. यह धाम भगवान विष्णु को प्रिय होने के कारण नारद जैसे श्रेष्ठ मुनियों द्वारा अनवरत सेवित एवं साधना स्थली के रूप में विख्यात है. . बद्रीनाथ के संदर्भ में मान्यता है कि सतयुग के प्रारंभ में ही जगत के कल्याण की कामना धारण करके स्वयं नारायण ने मूर्तिमान होकर इस धाम में एक तपस्वी की तरह तप किया. सतयुग में भगवान श्रीनारायण के प्रत्यक्ष दर्शन होने के कारण यह धाम मुक्तिप्रदा के नाम से विख्यात हुआ. त्रेता युग में योगाभ्यासरत रहकर कुछ काल तक भगवान श्रीराम के दर्शन का लाभ मानव को मिलने के कारण इसे योगिसिद्धदा के नाम से जाना गया. द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्यक्ष दर्शन की आशा में बहुजन संकुल होने के नाते विषाला के नाम से जाना गया. प्रकृति के वैभव से आच्छादित, नर-नारायण को लुभाने वाला यह कलयुग में बद्रिकाश्रम बदरीनाथ धाम के नाम से विख्यात है.
बौद्ध धर्म के नयन-महायान समुदायों के आपसी संघर्ष ने बद्रिकाश्रम को भी प्रभावित किया. आक्रमण एवं विनाश की आशंका से ग्रस्त एवं खुद रक्षा करने में असमर्थ इस धाम के पुजारी भगवान की मूर्ति को नारद कुंड में डालकर यहां से पलायन कर गए. जब भगवान की प्रतिमा के दर्शन नहीं हुए तो नर-देवता संयुक्त रूप से देवाधिदेव भगवान शिव की शरण में जाते हैं, जो उस समय कैलाश में समाधि लिए हुए थे. आराधना से प्रकट होकर भगवान कैलाशपति ने कहा कि नारायणश्री की मूर्ति कहीं गई नहीं है. वहीं समीप के नारद कुंड में ही है, परंतु तुम लोग वर्तमान में शक्तिहीन हो. भगवान नारायणश्री मेरे भी आराध्य हैं. अतएव मैं स्वयं अवतार धारण करके मूर्ति का उद्धार कर जगत का कल्याण करूंगा. कालांतर में भगवान आशुतोष शिव ही दक्षिण भारत के कलाड़ी नामक स्थान में ब्राह्मण भेरवदत्त उ़र्फ शिव गुरु के घर माता आर्यम्बा की कोख से जन्म लेकर आदिगुरु शंकराचार्य के नाम से विख्यात हुए.
जगतगुरु शंकराचार्य द्वारा संपूर्ण भारत में अव्यवस्थित तीर्थों का सुदृढ़ीकरण, बौद्ध मतों का खंडन एवे सनातन वैदिक मत का मंडन सर्वविदित है. शिव रूप आदिगुरु शंकराचार्य ने ठीक ग्यारह वर्ष की अवस्था में दक्षिण भारत से बद्रिकाश्रम पहुंच कर नारद कुंड से भगवानश्री की दिव्य मूर्ति का विधिवत उद्धार करके उसे पुन: प्राण प्रतिष्ठित किया. बद्रीनाथ धाम में आज भी उन्हीं के द्वारा शुरू परंपरा के अनुसार उन्हीं के वंशज नांबूदरीपाद ब्राह्मण ही भगवान नारायण रूप बद्रीनाथ जी की पूजा-अर्चना वैदिक परंपरा के अनुसार करते हैं. अति हिमपात के कारण इस धाम के कपाट वर्ष में छह माह बंद रहते हैं. मंदिर के कपाट पूजन के लिए अप्रैल के अंत अथवा मई के प्रथम पखवारे में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाते हैं. कुंभ 2010 के अवसर पर इस बार भी कपाट 19 मई को खोले गए. मंदिर खुलने के दिन अखंड ज्योति दर्शन का विशेष महत्व है. छह माह बाद मंदिर के पट बंद होने का दिन लगभग नवंबर मास के दूसरे सप्ताह में आता है, जो प्रत्येक वर्ष दशहरे के दिन निश्चित किया जाता है. भगवान बद्रीनाथ जी की मूर्ति का स्वरूप एवं भगवानश्री की दिव्य मूर्ति की प्रतिष्ठा का इतिहास लगभग द्वापर युग के श्रीकृष्णावतार के समय का माना जाता है. भगवान बद्रीनाथ की इस तीसरी प्रतिष्ठा का इतिहास कुछ इस प्रकार है, जब विधर्मियों-पाखंडियों का प्रभाव बढ़ा तो उन्होंने भगवानश्री की प्रतिमा को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया. बचाव में पुजारियों ने भगवानश्री की प्रतिमा पास के नारद कुंड में डाल दी, जिसकी प्राण प्रतिष्ठा स्वयं शिवावतार आदि शंकराचार्य ने की. भगवानश्री की दिव्य मूर्ति हरित वर्ण की पाषाण शिला में निर्मित है, जिसकी ऊंचाई लगभग डेढ़ फुट आंकी जाती है. भगवानश्री नारायण यहां पद्मासन में विराजमान हैं, पद्मासन भी योग मुद्रा में है. पद्मासन पर भगवानश्री के गंभीर बुर्तलाकार नाभिहृदय के दर्शन होते हैं. यही ध्यान साधक को साधना में गंभीरता प्रदान करता है, जिससे साधक के मन की चपलता स्वयं समाप्त हो जाती है. नाभि के ऊपर भगवानश्री के विशाल वक्षस्थल के दर्शन होते हैं. बाएं भाग में भृगुलता का चिन्ह एवं दाएं भाग में श्रीवत्स चिन्ह स्पष्ट दिखता है. भृगुलता भगवानश्री की सहिष्णुता एवं क्षमाशीलता का परिचायक है. श्रीवत्स दर्शन शरणागत दायक और भक्त वत्सलता का प्रतीक है. पुराण इसका स्वयं साक्षी है कि त्रिदेवों में महान कौन है के परीक्षण के क्रम में भृगुऋृषि ने भगवान विष्णु जी के वक्षस्थल पर पैर से प्रहार किया तो भगवान ने क्षमादान के साथ अपने श्रेष्ठ गुणों का भी प्रदर्शन किया. श्रीवत्स चिन्ह में बाणासुर की रक्षा के लिए भगवान शिव द्वारा फेंके गए त्रिशूल के घाव एवं श्रीकृष्ण के वक्षस्थल स्पष्ट रूप से दिखते हैं. सुवर्ण रेखा के रूप में लक्ष्मी प्रदाता प्रतीक बने हैं. यह चिन्ह दाएं भाग में स्थित हैं. इस पर भगवानश्री के दिव्य कंबुग्रीवा के दर्शन होते हैं, जो महापुरुषों के लक्षणों का परिचायक है. इसके ऊपर भगवान बद्रीनाथ जी की विशाल जटाओं से सुख भाग के दर्शन होते हैं.
भगवानश्री का दर्शन मानव को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति प्रदान करने वाला है. नारद जी-भगवान बद्रीनाथ जी के दरबार के बाएं भाग में ताम्रवर्ण की छोटी सी मूर्ति मुनिवर नारद जी की है. परंपरानुसार शीतकाल में देव पूजा के क्रम में नारद जी द्वारा ही भगवानश्री एवं
देवतागण सुपूजित होते हैं. उद्धव जी-नारद जी के पृष्ठ भाग में चांदी की दिव्य मूर्ति उद्धव जी की है. द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण के सखा रहे उद्धव जी उन्हीं के आदेश से यहां पधारे थे. यह भगवानश्री के उत्सव मूर्ति के रूप में सुपूजित होती है. शीतकाल में देव पूजा के समय उद्धव जी की ही पूजा पांडुकेश्वर के योगध्यानी मंदिर में संपन्न होती है. नरपूजा में ग्रीष्मकाल में उद्धव जी पुन: भगवानश्री की पंचायत बद्रीनाथ के वामपार्श्व में विराजते हैं. भगवान नारायण उद्धव एवं नारद जी के बाएं भाग में शंख, चक्र एवं गदा धारण किए हुए पद्मासन में स्थित हैं. स्कंध भाग में लीलादेवी, बाएं उरुभाग में उर्वशी, बाएं मुखारबिंद के पास श्रीदेवी एवं कटि भाग के पास भूदेवी भगवानश्री की सेवा में विराजमान हैं. स्वयं भगवान नारायण योग मुद्रा में तपस्या में लीन हैं.
बद्रीनाथ धाम में सनातन धर्म के सर्वश्रेष्ठ आराध्य देव श्री बदरीनारायण भगवान के पांच स्वरूपों की पूजा अर्चना होती है। विष्णु के इन पांच रूपों को ‘पंच बद्री’ के नाम से जाना जाता है। बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा अन्य चार बद्रियों के मंदिर भी यहां स्थापित है।
श्री विशाल बद्री
श्री विशाल बद्री (श्री बद्रीनाथ में) विशाल बद्री के नाम से प्रसिद्घ मुख्य बद्रीनाथ मन्दिर, पंच बद्रियों में से एक है। इसकी देव स्तुति का पुराणों में विशेष वर्णन किया जाता है। ब्रह्मा, धर्मराज तथा त्रिमूर्ति के दोनों पुत्रों नर तथा नारायण ने बद्री नामक वन में तपस्या की, जिससे इन्द्र का घमण्ड चकनाचूर हो गया। बाद में यही नर नारायण द्वापर युग में कृष्ण और अर्जुन के रूप में अवतरित हुए तत्पश्चात बद्रीनारायण नारद शिला के नीचे एक मूर्ति के रूप प्राप्त हुए। जिन्हें हम विशाल बद्री के नाम से जानते हैं।
श्री योगध्यान बद्री
श्री योगध्यान बद्री (पाण्डुकेश्वर में) 1500 वर्षो से भी प्राचीन योगध्यान बद्री का मन्दिर जोशीमठ तथा पीपलकोठी पर स्थित है। महाभारत काल के अंत में कौरवों पर विजय प्राप्त करने के, कलियुग के� प्रभाव से बचने हेतु पाण्डव हिमालय की ओर आए और यही पर उन्होंने स्वर्गारोहण के पूर्व घोर तपस्या की थी।
श्री भविष्य बद्री
श्री भविष्य बद्री (जोशीमठ के पास) जोशीमठ के पूर्व में 17 कि.मी. की दूरी पर और तपोवल के सुबैन के पास भविष्य बद्री का मंदिर स्थित है। आदि ग्रंथों के अनुसार यही वह स्थान है जहां बद्रीनाथ का मार्ग बन्द हो जाने के पश्चात धर्मावलम्बी यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
श्री वृद्घ बद्री
श्री वृद्घ बद्री (अणिमठ पैनीचट्टी के पास) यह जोशीमठ से 8 कि.मी. दूर 1380 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसी मान्यता है कि जब कलियुग का आगमन हुआ तो भगवान विष्णु मंदिर में चले गये। यह मंदिर वर्ष भर खुला रहता है। वृद्घ बद्री को आदि शंकराचार्य जी की मुख्य गद्दी माना जाता है।
श्री आदि बद्री
कर्ण प्रयाग-रानी खेत मार्ग पर कर्ण प्रयाग से 18 कि.मी. दूर स्थित है। आदि बद्री को अन्य चार बद्रियों का पिता कहा जाता है। यहां 16 छोटे मंदिरों का समूह है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि इन मंदिरों के निर्माण की स्वीकृति गुप्तकाल में आदि शंकराचार्य ने दी थी जो कि हिन्दू आदर्शो के प्रचार-प्रसार को देश के कोने-कोने में करने के लिए उद्दत थे।

शुक्रवार, 5 मई 2017

हिन्दुत्व : सर्वे भवन्तु सुखिनः





नरेंद्र मोदी का न्यूयॉर्क में संस्कृत में मंत्रोच्चार
Last Updated: रविवार, 28 सितम्बर 2014
-शोभना जैन
न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने अमेरिकी दौरे के दूसरे दिन न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक सेंट्रल पार्क में युवाओं की मौजूदगी में ओम शान्ति, ओम शान्ति का मंत्रोच्चार किया और एक संस्कृत श्लोक के जरिए उन्हें सबका मंगल, सबके कल्याण की कामना की भारतीय संस्कृति समझाई और साथ ही अंग्रेजी में उनकी खैरियत पूछते हुए कहा- 'हाऊ आर यू डूइंग न्यूयॉर्क नमस्ते'। प्रधानमंत्री आज यहां पॉप सिंगरों की मौजूदगी में ग्लोबल सिटीजन फेस्टिवल को संबोधित कर रहे थे। सफेद रंग का कुर्ता-पायजामा और नीले रंग की जैकेट पहने प्रधानमंत्री ने उपनिषद के मंत्र का मंत्रोच्चार किया

'ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत। ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः

अर्थ - "सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मङ्गलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।"

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JANUARY 11, 2017
Sarve Bhavantu Sukhinah
YOGA ARTICLES GENERAL

by Gaurav Rastogi

Sanskrit, Transliteration, Translation

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Om Sarve Bhavantu Sukhinah, Sarve Santu Nir-Aamayaah |
Sarve Bhadraanni Pashyantu, Maa Kashcid-Duhkha-Bhaag-Bhavet |
Om Shaantih Shaantih Shaantih ||

may every one be happy, may every one be free from all diseases
may every one see goodness and auspiciousness in every thing, may none be unhappy or distressed
Om peace, peace, peace!

Observations

We are stardust. Recycled elements from new and old stars, some matter as old as the universe itself, and some from stars that lived and died billions of years ago. We are made of this universe, and each of us is a story 13.82 Billion years in the making.

We feel a separation from the world. When we look out from our eyes, we look at the world being "outside" us in some way. We're not sure where this separation begins, but we sure "feel" removed from the world. Does a bag of skin separate us from the world? Is it our thoughts, our name and story, or our spirit whatever it may be? We're not sure what separates us from the world, but we just know that we are separate, and this knowing makes us feel that we need to look out for ourselves. To protect and shield ourselves. And so we suffer.

This English translation above doesn't do justice. We're not praying just for everyone. We are praying for "all", every-thing-person-animal-atom-energy-quanta that exists. We are praying for the the welfare of the entire Universe, with no exception for "us" or another.

When we pray for all, we pray for ourselves too, and we begin to heal and become well. This prayer is really a reminder of our universal self. To know that we are no different from the Universe, even though our way of seeing the world doesn't usually feel that way. We pray so we may be joined in with the whole again.

Our heart is a mirror; we humans come preloaded with empathy. You would have noticed that when you see someone crying, you feel sadness yourself. When you hear the laugh-track on the TV comedy, you want to laugh along too. When you see happy little children, you feel the same happiness. Our hearts have evolved with this empathy, reflecting emotions from the world we see around.

pashyantu, to see. The mirror reflects everything. For our heart to experience true joy, there must be joy in the world all around. In a selfish way, we are wishing that there's happiness, health, auspicious signs and good fortune all around, because that's what we want in our hearts.

Sukha is more than happiness. Su-kha literally means good space. When a wheel is moving around it's center, the cart moves smoothly and quickly. When the wheel is not moving around it's center (it's eccentric), the cart moves in a jerky manner, causing vibration and damage. That's why we take our cars to the wheel alignment shops. To restore good space in the center.

Su-kha means that the wheel is in full alignment. When we have alignment, things move smoothly just as it's naturally supposed to. That makes us happy, but it's more than that. We feel a sense of order, oneness, and comfort in knowing that all is well with the world.

When our outside world is out of alignment with our nature, we live lives out of balance. This is what we call "stress". We are unhappy, of course, but we are also unhealthy, unstable and unable to meet our full potential. This is "dukha", and we don't want any of it. We pray for this return to alignment- positively as a prayer for "sukha" in the first line, and as the negation of "dukha" in the last line.

We close with the three Shanti (peace). We pray for peace in the Universe, peace in our hearts, and peace between.

Om Shanti Shanti Shanti

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

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Be Happy. Be Healthy. See the good. - सर्वे भवन्तु सुखिनः

- shashikant joshi । शशिकांत जोशी


सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥

sarvé bhavantu sukhinaḥ , sarvé santu nirāmayāḥ |
sarvé bhadrāṇi pashyantu , mā kashchid_duḥkha-bhāg-bhavét || [IAST]

sarve bhavantu sukhinaH , sarve santu nirAmayAH |
sarve bhadrANi pashyantu , mA kashchid_duHkha-bhAg-bhavet || [ITRANS]

All should/must be happy, be healthy, see good;
may no one have a share in sorrow.


The mantra, or shloka has 4 parts or phrases. The first three have the same format - "All a-must/should-verb an-adjective"

Notice the bhavantu, santu, pashyantu? They are all 'must/should' form of the verb.
'sarve' means all. So this is about all. 'bhavantu sukhinaH' means all should/must be happy. 'sukhi' means comfortable, without sorrow, happy. And 'bhavantu means 'they should/must be [happy]'.

Similarly for santu (must be) and pashyantu (must see).

With all these three, the idea is you should.must be happy, itis something under your control, you have to act on these.

But the last one 'bhavet' is a wishful dictate - 'May you'. This is what should happen (ideal, imperative) and may this happen.

Why so? Read on.

Be Happy.
You choose to be happy. It is a reaction to a situation, but you can make it a state of mind as well. You can be sad, depressed, angry, jealous or just be yourself - happy. The basic states of the divine and all of us are -' sat-chit-Ananda', that is, to be, to be aware and to be happy/blissful. That is our normal state. Children are usually happy, sometimes even for no reason. All they need is food and sleep and they are happy. Unless they meet a grumpy grown up! But if you are not happy now, just remember your childhood. Most of us have happy memories of our childhood.

No one else can make you happy. Even when 'bad' events happen, it is our attachment, our ignorance of the big play of Time, that we choose to be not happy. Don't say "So and so made me unhappy, or angry." Say, "I chose to be unhappy or angry in reaction to this or that situation." If you watch the nature documentaries about the animal kingdom, you find that the same basic tragedies happen to the animals as to us. We have compounded them by adding abstract pains and worries as well. Birth, death, meeting and separating keeps happening. That is what Krishna (kRiShNa, कृष्ण) says in Gita (gItA, गीता) - "Ups and downs come and go, bear them O Arjun."

Be Healthy.
Our natural state is of health. You may point out birth defects, and yes that is an exception. But rarely you find a life form unhealthy, unless they have just fought with an opponent. Bulls gore each other during the mating season, and that is the only injuries to an animal not yet hunted. Otherwise, they are all healthy.

We on the other hand, have made bad choices in our life style and started to fall ill. Too much sugar in our diet, which was never in abundance in nature. Too much food as such for the 'haves', and no food for the 'have-nots', causing illness in both groups. The obesity epidemic in US is just one example of what we can do to ourselves by bad choices.

The Sanskrit word for healthy is 'svastha' स्वस्थ - sva-stha - self-positioned, that is, one who is centered in Self, the natural state. That is everyone who survived the first few years of life is destined to be healthy. Even in modern medicine, when we think the doctor is helping with the medicine, the medicine mostly only controls the symptoms to ease our discomfort and helps the body heal itself. The body knows. It is us who don't listen to the signals due to our weakness of determination and make bad choices.

See the good.
As the saying goes - It is all in the attitude. If you want to see the bad, there is plenty. If you want to see the good, there is plenty too. It does not mean to turn a blind eye on evil, or where you can really improve. But don't just focus on the negative. See the positive also.

If you see only the negative in others and make their life miserable by constant nagging - what do you achieve with that? It doesn't help the person improve. And if your goal is not to help improve the other person then why even bother. And, sometimes things are beyond control. In which case you have to let go of the negative. A handicap person will not become able if you don't see beyond the handicap and focus on the positives, on what can-be, rather on what is-not.

All the above are under your control, they are within your will power. You choose the above.

Hence the dictate, the order is - "You must [choose to] be happy, you must [choose to] be healthy, you must [choose to] see the good."


May no one have sorrow.
There are three ways that 'duHkha' can come. The words are not exactly translatable without losing some other shades of the meaning. 'tApa' (ताप) or heat (tApa-mAna = temperature) also means that which scorches you, that which you endure. It also means sorrow, which scorches the heart. There are three sources of this sorrow/calamity/bad-state - self-inflicted (AdhyAtmika, आध्यात्मिक), inflicted by others (Adhi-bhautika, आधि-भौतिक) and caused by (super-)natural forces (Adhi-daivika, आधि-दैविक).

The "shAntiH, shAntiH, shAntiH" (शान्तिः शान्तिः शान्तिः ) at the end of a shAntiH pATha is not for 'three is a charm' but for these three types of sorrows to be calmed.

Since there is the 'other' factor here, there is the blessing that may no one have a share in sorrow. duHkha-bhAg is one who has a share in sorrow. So the blessing/wish goes - "May no one be a one-who-gets-a-share-in-sorrow."



So, unlike popularly understood, it is not 'May you be happy, healthy...'. No, you are hereby ordered (you should/must) to be happy, healthy ...

You have no choice now!

You are 'it' - the happy, healthy, nice person! You have been tagged!

Here is a very old mantra that is not only hip for today's times, it is actually the stark reality facing us. Not many of us realize the truth of this dictate-cum-blessing from the ancient seers.

Happiness, health and attitude are in our own hands.

(c) shashikant joshi । शशिकांत जोशी । ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः ।