शनिवार, 14 अप्रैल 2018

अपनी भाषा :अपने स्वत्व की अभिव्यक्ति भी है – परम पूज्य भागवत जी


    अपनी भाषा का प्रयोग व्यवहारिक सुविधा ही नहीं, अपने स्वत्व की अभिव्यक्ति भी  है – परम पूज्य डॉ. मोहन भागवत जी

April 07, 2018

नई दिल्ली (इंविसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि अपनी भाषा का प्रयोग केवल व्यवहारिक सुविधा नहीं है, अपितु अपने स्वत्व की अभिव्यक्ति भी है. स्व की अभिव्यक्ति मातृभाषा में ही संभव है. भाव विदेशी भाषा में व्यक्त नहीं होते. लोकव्यवहार में बोली जाने वाली भाषाओं का अनुवाद भाषा के भाव के अनुरूप नहीं हो पाता. सरसंघचालक जी “जनता को जनता की भाषा में न्याय” विषय पर संबोधित कर रहे थे.

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा केदारनाथ साहनी सभागार में आयोजित सम्मलेन में मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में बिरसा मुंडा की जेल में संदेहास्पद स्थिति में मृत्यु हो गयी थी, उनके साथ पकड़े गये 241 मुन्डावी बोली बोलने वाले क्रांतिकारियों के साथ उनकी भाषा के भाषांतर करने वाले ना होने के कारण उनके साथ अन्याय हुआ, अंग्रेजों द्वारा चलाए जा रहे न्यायालय में उम्रकैद की सजा हो गई थी. लेकिन वो ब्रिटिशर्स का राज था, अब तो अपना राज है. न्यायालयों सहित सब जगह अपनी बात स्वतंत्र रूप से अपनी भाषा में रखनी चाहिए. देश में प्राचीन काल से इतनी भाषाएँ होते हुए भी यहाँ लोगों को अन्य प्रान्तों से संपर्क में कोई कठिनाई नहीं आई. सुदूर दक्षिण के केरल से मलयाली भाषी लोग हिमालय की तीर्थ यात्राएं करते रहे हैं, काशी के हिन्दी भाषी लोग रामेश्वरम में कावड़ अर्पित करने जाते रहे हैं, संपर्क के लिए भाषा को लेकर यहाँ कोई मतभेद इतिहास में नहीं दिखता.

उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने से बच्चों पर अनावश्यक बोझ पड़ने के कारण उनका बौद्धिक विकास रुक जाता है. वह ज्ञान विज्ञान का मौलिक चिंतन नहीं कर पाते. उन्होंने आह्वान किया कि हम अपने से शुरुआत करें कि परिवार में तथा स्वभाषी लोगों से मातृभाषा में ही बात करेंगे.

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक अतुल कोठारी जी ने विषय प्रस्तुतिकरण करते हुए कहा कि 2012 में सर्वप्रथम भारतीय भाषा आन्दोलन का विषय उठाया गया. कानून में प्रावधान है कि जिला, सत्र न्यायालय क्षेत्रीय भाषा में काम करें. लोगों को लोगों की भाषा में न्याय नहीं मिलने के कारण कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है. धारा 348 – 2 में प्रावधान है – न्यायालयों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी न्यायिक फैसले की प्रति उपलब्ध करवाई जाए. लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश एवं राजस्थान इन चार राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में इसका पालन नहीं हो रहा. जब संसद में भाषा को यंत्र के माध्यम से अपनी भाषा में परिवर्तन की व्यवस्था की जा सकती है तो सभी उच्च न्यायालयों में भी लोगों के लिए यह हो सकती है. 20-25 करोड़ रुपये कोई ज्यादा राशि नहीं है इस काम के लिए, किन्तु सवाल इच्छा शक्ति का है, करना चाहते हैं या नहीं. न्याय 130 करोड़ जनता के लिए है या 200 – 300 न्यायाधीशों के लिए, यह सोचने का विषय है. इस समय इसके लिए अनुकूल वातावरण है, हमारे उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति ने इस दिशा में पहल की है.

पांच राज्यों में न्यायाधीश रह चुके न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली जी ने कहा कि यदि आईएएस स्थानीय भाषा सीख सकते हैं तो न्यायाधीश भी सीख सकते हैं. भाषा को समझे बिना वहां के कल्चर को समझना कठिन है. न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए स्थानीय भाषा में भी नियम और कानून बना कर, स्थानीय लोगों को उनकी भाषा में न्याय उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है.

इस अवसर पर सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी, अ.भा. संपर्क प्रमुख अनिरुद्ध देशपांडे जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में हरिहरन नय्यर जी, दीनानाथ बत्रा जी, अधिवक्ता परिषद् के अध्यक्ष जॉयदीप रॉय जी, सहित न्यायविद, शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी उपस्थित थे.

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

कैंसर का घरेलु इलाज, जो लास्ट स्टेज में भी करता है काम




कैंसर का ऐसा घरेलु इलाज, जो लास्ट स्टेज में भी करता है काम

http://rajivdixitji.com/cancer-treatment

http://videominecraft.ru/watch/

कैंसर हमारे देश मे बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हाथ-पैर डाल चुके है । राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … ” कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment उसे दिया जाता है उससे death सबसे अधिक होती है ” । माने कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का treatment है ।

Treatment कैसा है ? ?आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया । इसमें क्या होता है के शरीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance power ! वो बिलकुल ख़तम हो जाती है । जब Chemotherapy दिए जाते है तो डाक्टर ये बोलते है की हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है लेकिन होता क्या है अच्छे सेल भी उसी के साथ मर जाते है ।

डॉक्टर आपको भूल-भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो मर ही जाता है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसी को कैंसर हो जाये तो ज्यादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते । उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है? इतना कष्ट क्यों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो,

और आप अपनी आस पड़ोस की बाते ज्यादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसी को गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आ के कहते है ‘ अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा …. अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते ” । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पढ़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।

हल्दी में एक तत्व पाया जाता हैं जिसको करक्यूमिन कहा जाता हैं जो कैंसर को रोकने में रामबाण हैं। अगर आपको कैंसर का डर हैं या इस की शुरुवात भी हो गयी हैं तो आप घबराइये नहीं आप निरंतर हल्दी का सेवन अपने भोजन में करे। 90 % मरीज कैंसर से नहीं मरते बल्कि उसके इलाज से मर जाते हैं ये एक आश्चर्यजनक तथ्य हैं। अगर किसी मरीज ने अपना कीमो करवाना शुरू कर दिया हैं तो फिर उसका नार्मल होना बहुत मुश्किल हो जाता हैं। और उस पर फिर ये प्रयोग ना करे। राजीव दीक्षित भाई ने ऐसे कई मरीज सही किये थे जिनको कैंसर था। और उन्होंने जो देसी इलाज अपनाया वह था भारतीय गौ मूत्र, हल्दी और पुनर्नवा । अगर आप या किसी अन्य को ऐसी कोई शिकायत हैं तो आप भी इस घरेलु नुस्खे से स्वस्थ्य पा सकते हैं।

देसी गाय ये आपको अपने आस पड़ोस में या गौशाला में मिल जाएगी, इसमें भी विशेष हैं काली गाय और ये ध्यान रखे के गाय गर्भवती ना हो, बेहतर होगा आप वो गाय का मूत्र लीजिये जो अभी छोटी बछड़ी हैं। अब इस एक गिलास गौ मूत्र में 1 चम्मच हल्दी डाल कर इसको धीमी आंच तक 10 मिनट तक उबाले, उबलने के बाद आप इसको रूम टेम्परेचर पर ठंडा कर ले, बस दवा तैयार। इसको छान कर आप किसी कांच की बोतल में डाल कर रख ले। अब हर रोज़ सुबह खली पेट और रात को सोते समय बिलकुल आखिर में और दिन में कम से कम 3 बार 10-10 मिली ले। और निरंतर अपना चेक अप करवा ले आप देखेंगे के आपकी कैंसर की बीमारी चमत्कारिक रूप से सही हो रही हैं।

संपर्क – Shri Navgrah Ashram, Moti Bor Kheara Near Raila (Bhilwara)-Rajasthan 311026
COMPILERS- Hansraj choudha

बुधवार, 28 मार्च 2018

गुलाबचन्द कटारिया : जन विश्वास का नेता




- अरविन्द सिसौदिया
जिला महामंत्री भाजपा कोटा !!! 
9414180151 / 9509559131

माननीय गुलाबचन्द्र कटारिया जी को कभी सत्ता सुख ने छुआ तक नहीं हे। कांग्रेस को खुश करने के लिये कोई कुछ भी कह सकता है - लिख सकता हे। समस्या,समाधान, अनुसंधान और विकास निरंतर चलनेवाली प्रतिक्रिया है। जनता के बीच जिनकी जमानत भी नहीं बचती वे लिखनें में कुछ भी लिख सकते हे। मगर कोई भी आरोप लगाने वाला श्री गुलाबचन्द कटारिया जैसा जन विश्वास का नेता बन कर दिखायें तो जानें।

विधानसभा की सदस्यता
1977 - 1955 सदस्य, 6वीं राजस्थान विधान सभा
1980 - 1985 सदस्य, 7वीं राजस्थान विधान सभा
1989 - 1991 सदस्य, 9वीं लोक सभा
1993 - 1998 सदस्य, 10वीं राजस्थान विधान सभा
1998 - 2003 सदस्य, 11वीं राजस्थान विधान सभा
2003 - 2008 सदस्य, 12वीं राजस्थान विधान सभा
2008 - 2013 सदस्य, 13वीं राजस्थान विधान सभा
2013 - cont. सदस्य, 14वीँ राजस्थान विधान सभा
पार्टी पदों पर कार्य
1977 - 1980 उपाध्यक्ष एवं महासचिव, जनता युवा मोर्चा
1980 - 1985 सचिव, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राजस्थान
1986 - 1993 महासचिव, भाजपा, राजस्थान
27/05/1999 - 19/06/2000 भाजपा अध्यक्ष, राजस्थान
सरकार में पदों पर कार्य
1980 - 1981 सदस्य, प्राक्कलन समिति, राजस्थान विधान सभा।
1981 - 1985 सदस्य, प्राक्कलन समिति (अ), राजस्थान विधान सभा।
19/01/1990 Member, Committee on Papers Laid on the Table, Lok Sabha
1990 सदस्य, कृषि संबंधी समिति, लोक सभा।
13/12/1993 - 30/11/1998 मंत्री, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, भाषा, सरकार. राजस्थान की।
13/12/1993 - 05/07/1998 मंत्री, संस्कृत शिक्षा, भाषी अल्पसंख्यक, भाषा विभाग (भाषा विभाग), देवस्थान, राजस्थान सरकार।
1999 - 2000 अध्यक्ष, लोक लेखा समिति, राजस्थान विधान सभा।
1999 - 2000 सदस्य, सदन समिति, राजस्थान विधान सभा।
24/08/2002 से 04/12/2003 विपक्ष के नेता, राजस्थान विधान सभा।
08/01/2004 से 31/05/2004 लोक निर्माण विभाग और गृह मंत्री, राजस्थान सरकार।
31/05/2004 से 31/12/08 गृह मंत्री, राजस्थान सरकार।

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** देश के बढ़ते मान सम्मान को आगे ले जानें के लिये निरंतर भाजपा को जितायें - आगे बढ़ायें - गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया 

कोटा 27 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर पूरे देश को विश्वास है, उन्ही के नेतृत्व में भाजपा विभिन्न प्रदेशों सहित पूरे देश में छा गई और भारत पूरे विश्व में छा गया है। देश को आगे बढ़ानें के लिये भारतमाता को परम वैभव पर पहुंचानें के लिये, अमीर गरीब की खाई खत्म करने के लिये, आतंकवाद परास्त करने के लिये और पाकिस्तान को घर में घुस कर ठोकनें के लिये लगातार भाजपा को विजयी बनाना होगा ताकि शक्तिशाली देश का वास्तविक निर्माण हो सके,नया भारत बने सके। यह उदगार भाजपा शहर जिला कोटा की जिला बैठक में गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया ने कहे।
उन्होने कहा कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुये कहा “ व्यक्तिगत लाभ हॉनी के कारण देश हित में बाधा नहीं आनी चाहिये , देश का नव निर्माण होगा, देश मजबूत बनेगा, देश आत्म निर्भर बनेगा तो पीढ़ियों का सुख और वैभव बढ़ेगा।” कटारिया ने भावुक होते हुये कहा “ भष्टाचार की भट्टी में जल कर राख हो चुकी कांग्रेस भाजपा के विजय रथ को नहीं रोक सकती, राई जैसी किसी सफलता से भाजपा को नहीं रोका जा सकता, सारा विपक्ष मोदी के विरूद्ध एक जुट हो रहा है। हमें चुनौती समझना चाहिये और भाजपा कार्यकर्ताओं को संकल्प लेना चाहिये कि किसी भी तरह की चुनौती हो हम भाजपा के विजयी रथ को आगे बढ़ायेंगे।”
उन्होने कहा “ भाजपा की वर्तमान सत्ता को देख कर किसी भी नेता को अभिमान करने की जरूरत नहीं है, यह स्थिती 93 साल से संघ के चल रहे अथक परिश्रम की परिलब्धि है, शाखा की मिट्टी में खेलो लोगों की सिद्धि है, 70 साल से राजनैतिक क्षैत्र में आहूती बन कर स्वाहा हो गये लाखों - लाखों कार्यकर्ता के परिश्रम और तपस्या का फल है। इसे हमें संजो कर और आगे तक ले जाना है, भारत माता को परमवैभव के सिंहासन पर आरूढ़ करना है। चरैवेती चरैवैती की तरह निरंतर विजयी के साथ राष्ट्रनिर्माण के सारथी बनना है।”
कटारिया ने कहा कांग्रेस किसी भी मंच पर आकर विकास कार्यो पर मुझसे बहस कर सकती है, उन्होने 50 साल के शासन में जो किया उससे कई गुना हमनें अपने शासन करके दिखाया है।

अरविन्द सिसौदिया
जिला महामंत्री भाजपा कोटा
9414180151

गुरुवार, 22 मार्च 2018

एक है हिन्दुत्व : परम पूज्य भागवत जी



एक है हिन्दुत्व – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी का साक्षात्कार


रा.स्व.संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा यानी संघ से जुड़ा वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन. समाज में संघ कार्य की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है. विविध क्षेत्रों में संघ के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्कंठा है. 2018 के अवसर पर रेशिम बाग, नागपुर में सरसंघचालक परम पूज्य श्री मोहन भागवत जी ने देश के वर्तमान राजनीतिक – सामाजिक परिदृश्य तथा संघ के बढ़ते व्याप के संदर्भ में पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर तथा आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर से विस्तृत बातचीत की. प्रस्तुत हैं विशेष साक्षात्कार के संपादित अंश –

आज संघ कार्य के लिए जो अनुकूलता दिखती है, इसे आप कैसे देखते हैं?
संघ के स्वयंसेवक सर्वदूर समाज में जाते हैं. अन्यान्य क्षेत्रों में काम भी करते हैं. संघ की शाखा में भी जाते हैं. समाज में, विभिन्न संगठनों में काम करते हैं. कई ऐसे हैं जो ऐसा कुछ नहीं करते, अपनी घर-गृहस्थी के लिए ही काम करते हैं. इन सबके व्यवहार और आचरण से वह सब झलकता है. जो काम उन्होंने किया है, वह घर-गृहस्थी चलाने का काम हो या किसी संगठन को चलाने का काम हो या समाज में किसी समस्या को सुलझाने का हो. उस समय में उनकी दृष्टि, समझदारी, सबको साथ लेकर चलने का स्वभाव रहा है और स्वयं की पारदर्शिता, सरलता, नि:स्वार्थ बुद्धि, इन सबका दिव्य परिणाम होता है, समाज पर संघ का विश्वास बढ़ाता है. संघ के जो प्रसिद्ध लोग हैं, आज उनको तो समाज दूर से देखता है. पर उसके घर के आस-पास रहने वाले संघ कार्यकर्ताओं को देखकर समाज को संघ पर विश्वास होता है. संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के बोलने और व्यवहार को देखकर लोग एक बात का बड़ी मात्रा में अनुभव करते हैं कि ये वे लोग हैं जो जैसा बोलते हैं, वैसा करते हैं. जो बोलते हैं, वह करते हैं. छुपाते कुछ नहीं. और विश्वास के लिए यह आवश्यक होता है. संघ के स्वयंसेवक विश्वासपात्र हैं और ये अच्छा करेंगे, मंगल करेंगे, इनके साथ रहने से अपना भी अच्छा होगा, ऐसा समाज को लगने लगा है. इसलिए समाज विश्वास करता है. अब उनके विश्वास पर खरा उतरने के लिए और कुछ नहीं करना केवल स्वयंसेवकों को और अच्छा स्वयंसेवक बनना पड़ेगा. समाज को साथ लेकर चलने से ही समाज की अपेक्षा धीरे-धीरे पूरी होगी.

 अगले एक-डेढ़ वर्ष में समाज और राजनीति की क्या दिशा होगी? क्या ऐसा लगता है कि हम बड़े बदलावों से गुजर रहे हैं?

बदलाव तो होते रहते हैं. वातावरण बदला है. भारत की स्थिति बदली है. देश पहले से अधिक बलवान एवं अधिक प्रतिष्ठित हो गया है. ऐसे में स्वाभाविक है कि देश के अंदर और बाहर परिस्थिति को संभालने का उसका तरीका थोड़ा बदल जाएगा. अधिक ताकत से संभालेगा. अधिक प्रतिष्ठा है तो उसका अधिक प्रभाव रहेगा. इसलिए बदलाव आता है. समाज के आचरण में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है. विशेषकर तरुण पीढ़ी में अनुभव होता है कि स्वतंत्रता के पूर्व की तरुण पीढ़ी में जो उत्साह का वातावरण था कि देश के लिए जीना और देश के लिए मरना, यह एक अंतर्प्रवाह बह रहा था, जिसके चलते स्वार्थ गौण हो गये थे. आज फिर से वैसा वातावरण तरुण पीढ़ी में दिख रहा है. वह जो चाहता है प्रामाणिकता से चाहता है, उसको किसी प्रकार का दंभ, नाटक पसंद नहीं. जहां उसको सही बात मिलेगी, सादगी मिलेगी, दंभ नहीं मिलेगा, पारदर्शिता मिलेगी, वहां वह जुड़ जाएगा. स्वतंत्रता के बाद इतने वर्षों का अनुभव लेकर समाज की समझदारी भी बढ़ी है. एक स्वाभाविक प्रक्रिया चल रही है. उसके भी परिणाम अच्छाई की ओर ले जाएंगे. समाज के नाते एक स्वस्थ समाज बनने की दिशा में जाएगा. उथल-पुथल बहुत है. लेकिन यह उथल-पुथल अंत में नवनीत निकालने वाली है. उथल-पुथल में चौदह रत्न निकलते हैं. समुद्र मंथन में हलाहल भी थोड़ा बहुत निकलता ही है. उसे पीने वाले शिव हैं तो फिर उससे डरने की आवश्यकता नहीं है. संघ के स्वयंसेवक ऐसी ही भूमिका अदा करेंगे, ऐसा दिखता है.

 बाहर बहुत कयासबाजी हो रही थी कि नागपुर में प्रतिनिधि सभा है तो इस बार कुछ बड़ा होगा. मगर उस सारी चीज को धत्ता बताते हुए और जो बाहर कयास हो रहे थे, उनको चौंकाने वाली उद्घोषणा हुई. संघ इतना सरल है, फिर इतना चौंकाता क्यों है?
सरलता वस्तु में होने से नहीं चलता. सरलता देखने वाले में चाहिए. अन्यान्य कारणों से वह सरल चीज को भी कठिन महसूस करता है. सामान्य गणित, जो आज एक मिनट में ठीक कर देते हैं, वह जब हम उस आयु में थे, तब हमको बड़ा कठिन लगता था क्योंकि हमारा ध्यान वैसा नहीं था, आज है इसलिए वह हम कर सकते हैं. यह पहली बात है.

दूसरी बात है कि दृष्टि ऐसी हो कि देखने की सरलता में भी लोग अर्थ खोजते हैं.

अगर अनुभव ऐसा सीधा आता होगा कि बार-बार सरलता मानकर गए और कुटिलता दिखी. तो वह पहले किसी भी सरलता की परीक्षा लेकर परखेगा, फिर कहेगा कि ये सरल है. ये तीसरे प्रकार के लोग बहुत थोड़े हैं. ऐसे लोग आते हैं, देखते हैं तो उनकी बातें ठीक हो जाती हैं.

संघ तो सरल है. लेकिन बाहर ऐसा कहीं होता नहीं, इसलिए कयास लगाते हैं लोग. कुछ बड़ा होगा. बड़ा हमारे यहां कुछ रहता ही नहीं. हां, दायित्व का परिवर्तन कोई बड़ी बात नहीं है. यह तो हमारे यहां दायित्वों की जो श्रृंखला है, वह एक व्यवस्था है कार्य चलाने के लिए. सब लोग स्वयंसेवक हैं. समाज में काम करना है तो एक औपचारिकता रखनी ही पड़ती है, उसके लिए व्यवस्था बनानी पड़ती है. उसमें दायित्व भिन्न प्रकार के मिलते हैं. लेकिन सरसंघचालक जितने बड़े, उतने सरकार्यवाह बड़े, उतना ही स्वयंसेवक भी बड़ा है. संघ सबका है, सब संघ के ही स्वयंसेवक हैं. एक समय यह चर्चा चलती थी कि हू आफ्टर नेहरू? तो गुरुजी से उस समय भी किसी ने एक बार पूछ लिया – हू आफ्टर यू? तब गुरुजी ने तपाक से कहा – वाइ नॉट यू? यह काम मेरे भरोसे थोड़े चल रहा है. सब लोग हैं. बालासाहब ने कहा कि डॉ. हेडगेवार जैसी मूलगामी प्रतिभा या गुरुजी के व्यक्तित्व जैसा उच्चस्तर मेरे पास नहीं है. जो संघ कार्य हुआ, इन महापुरुषों के कारण हुआ. लेकिन यह देवदुर्लभ कार्यकर्ताओं का संच है. तो इतने लोग मिलकर संघ चलाते हैं, उसमें एक व्यक्ति का इधर से उधर होना, किसी का दायित्व बदलना होता रहता ही है. इसमें ऊंचा-नीचा कुछ नहीं है. तो यह कोई बड़ी बात नहीं, संघ में ये सहज बातें हैं. बाहर से लोगों को लगता है कि यह प्लेस ऑफ पावर है.

एग्जिक्यूटिव अथॉरिटी. ऐसा कुछ है ही नहीं यहां. यह सारे स्वयंसेवकों की सहमति से होता है. उसमें उनका प्रस्ताव आता है. उसके आधार पर चुनाव घोषणा आदि होते हैं.

इसका आधार क्या है और प्रक्रिया क्या है?
प्रक्रिया तो संविधान के अनुसार है कि शाखा के क्रियाशील स्वयंसेवक प्रतिनिधि चुनते हैं. प्रांतों में जो प्रतिनिधि चुने जाते हैं एक विशिष्ट संख्या में, अखिल भारतीय प्रतिनिधि, प्रांत के संघचालक, विभाग प्रचारक और ऊपर के अधिकारी मिलकर सब मतदाता होते हैं. वे चुनाव करते हैं, लेकिन चुनाव एक प्रक्रिया से ही होता है. सबके मन की बात जानकर प्रस्ताव आता है, उसे समझने के बाद उसका अनुमोदन होता है. मैं सरकार्यवाह बना तो अचानक ही बना. मेरे से वरिष्ठ बहुत लोग थे. बदलने का बहुत ज्यादा कारण नहीं था. लेकिन शेषाद्रि जी ने कहा कि मैं इस दायित्व पर लगातार चार बार रहा हूं, अब बदल दो. एक व्यक्ति ही ज्यादा वक्त दायित्व निभाए, ऐसा नहीं है. विभिन्न व्यक्ति आने चाहिए. नई-नई बातें आती रहती हैं. कल्पना आती रहती है. तो इसलिए बदलना पड़ता है. संघ में व्यक्तिवाद नहीं है, इस बात को लोग नहीं जानते. व्यक्ति का महत्व है. प्रत्येक व्यक्ति की चिंता हम करते ही हैं, ख्याल रखते हैं, रखना भी चाहिए, लेकिन संगठन व्यक्तिवादी नहीं बनता.

संघ की प्रेरणा से अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे कार्यों का फलक बहुत बड़ा है. क्या यह फलक और विस्तृत होगा?

हो सकता है. संघ की प्रेरणा स्वयंसेवक में रहती है. स्वयंसेवक ही ऐसा करते हैं. संघ योजना नहीं बनाता. कार्य अच्छा चल रहा है तो प्रोत्साहन देते हैं. सहायता की आवश्यकता होती है तो सहायता करते हैं. विद्यार्थी परिषद गठित करने की संघ की कोई योजना नहीं थी. उस समय की परिस्थति में तरुणों ने सोचा और काम शुरू हो गया. एक ही समय में दो संगठन उत्तर में जम्मू-कश्मीर, पंजाब में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन बनी तो उसी समय इधर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में विद्याथी परिषद. बाद में दोनों ने सोचा, हम दोनों स्वयंसेवकों के बनाए संगठन हैं और एक ही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं फिर दो क्यों रहें? तब वे दोनों मिल गए. ऐसे विद्यार्थी परिषद शुरू हुई 1949 में. लेकिन उसमें पहला प्रचारक जो संघ ने दिया वह 1960 में. संघ केवल शाखा चलाएगा, बाकी काम स्वयंसेवक कर रहे हैं. स्वयंसेवकों को और कुछ काम करने लायक दिखेगा तो वे उसे शुरू करेंगे, ऐसे विस्तार होता जाएगा.

 इतनी संस्थाओं के संवर्द्धन में ये सब काम कैसे करता है?

यह करना नहीं पड़ता, यह होता है. स्वयंसेवक का संस्कार, समवैचारिक व्यवहार, लक्ष्य-स्वयंसेवकत्व ये तीन बातें समान रही हैं. संघ केवल स्वयंसेवक, स्वयंसेवक रहे इसकी चिंता करता है. बाकी सब अपने आप होता है और कोई प्रत्यक्ष संघ के स्वयंसेवक नहीं हैं, लेकिन ये तीन बातें जिनमें हैं तो संघ उनके साथ समायोजित हो जाता है.

इस बार भारतीय भाषाओं को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ है. मातृभाषा को लेकर पूर्व में भी एक प्रस्ताव पारित हुआ है. दोनों में क्या मूलभूत अंतर है और क्या साम्य है?

दोनों प्रस्ताव भाषा को लेकर हैं, भारतीय भाषाओं को लेकर हैं. लेकिन पहला प्रस्ताव मातृभाषा में शिक्षा से संबंधित है इसलिए शासकीय तंत्र से उसका अधिक संबंध है. यह प्रस्ताव भारत की भाषाओं, बोलियों और नीति तीनों से संबंधित हैं. यह ज्यादा समाज के व्यवहार से संबंधित है. नीति का कुछ हिस्सा तो आता है, उसका उल्लेख उसमें है, लेकिन हम लोग अपनी भाषाओं का मान रखकर सब भाषाओं को मातृभाषा जैसे ही अपना मानें. अपनी भाषाओं में परस्पर व्यवहार करें. अपनी भाषाओं के ग्रंथों के पठन-पाठन की परंपरा से संबंधित सुझाव इसमें है. यह केवल सरकार के संदर्भ में नहीं है. मीडिया को भी हमने कहा है कि शुद्ध भाषा का उपयोग करो, भाषा का उपयोग शुद्धता से करो.

 आज का संघ मैदान और शाखा के साथ ही दुनिया के संदर्भ में भी अपनी भूमिका देखता है. आपने दोनों दौर देखे हैं, कैसा अनुभव करते हैं?

यह तो होता ही है. हम तो साधन सुविधा के मामले में समाज से दस कदम पीछे रहते हुए भी साथ चलते हैं. समाज के प्रवाह में समाज के साथ चलते हैं. लेकिन जान-बूझकर उससे थोड़ा पीछे रहते हैं. साधन-सुविधा उपयोगी है. लेकिन इसका कुछ दुष्परिणाम भी है. इसलिए इसको एक मर्यादा में उपयोग करना चाहिए. ऐसा ही हम करते हैं. कार्य के लिए जो उपयुक्त है वह हम लेते हैं. यह होता रहा है पहले से. पहले संघ की स्थिति ऐसी थी कि हम पैदल घूमते थे, फिर वाहन दिया गया. हमने वह जमाना देखा है जब पूरे नागपुर में संघ के पास केवल एक ही गाड़ी थी जो कि गुरुजी के लिए उपयोग होती थी. बाकी उस गाड़ी में कोई जाता नहीं था. संघ के कार्यकर्ताओं में तीन-चार लोग थे, जिनके पास अपनी कार थी, वही पुरानी एंबेसडर या फियेट. तीन-चार गाड़ियां थीं. बुलेट मोटरसाइकिल वाले तीन चार स्वयंसेवक थे. वेस्पा स्कूटर उस समय आने लगा था, तो महाराष्ट्र सरकार के कोटे से दो स्कूटर हमको मिले थे, जिसमें एक कार्यकर्ता के पास और एक कार्यालय में रहता था. बाकी सब लोग साइकिल वाले थे. उस समय वाहन इतना प्रचलित भी नहीं था. समाज की स्थिति बदली तो स्वयंसेवकों के पास भी साधन आए. उनका उपयोग होने लगा. यह बिल्कुल स्वाभाविक है. हम इतनी चिंता जरूर करते हैं कि इसकी आदत न हो जाए, और इसके जो दुष्परिणाम हैं, वे न आ जाएं.

तकनीकी साधनों, सुविधाओं एप्स, सोशल मीडिया वगैरह को आप कैसे देखते हैं?

साधन है, उपयोगी है, उपयोग करना चाहिए, किंतु मर्यादा में रहकर. संगठन के स्तर पर सुविधा के लिए एक सीमा तक तकनीकी साधनों का उपयोग किया जा सकता है. इन्हें प्रयोग करते हुए इनकी सीमाओं और नकारात्मक दुष्प्रभावों को समझना जरूरी है. यह आपको आत्मकेंद्रित और अहंकारी बना सकते हैं. सोशल मीडिया का स्वरूप कुछ ऐसा हो गया है कि बस ‘मैं और मेरा’! यानी ‘मैं’ हर बात पर मत व्यक्त करता हूं. ‘मैं’ एक समूह का एक अंग हूं, किंतु समूह के लिए रुकने की भी आवश्यकता नहीं है! फट से ‘मैं’ सोशल मीडिया में पोस्ट भेज देता हूं. कभी-कभी उसके कारण कई बार हटाना पड़ता है. ऐसा सबके साथ होता होगा. फेसबुक तो बिल्कुल है ही ‘फेस’ और यह उसका दुष्परिणाम है. यह आत्मकेंद्रितता को बढ़ाने वाला भाग है. संघ का फेसबुक पेज है, मेरा नहीं है. संघ का ट्विटर हैंडल है, मेरा नहीं है.. और न कभी होगा. वह राजनीतिक क्षेत्र में काम करने वालों के पास होता है, क्योंकि वहां उनकी अधिक उपयोगिता होती है. लेकिन उनको भी उपयोग करते समय सावधानी बरतनी पड़ती है. इसका उपयोग करें पर इसके आदी न बनें. मर्यादा में रहते हुए उसके साथ चलें.

संघ पहले शाखा, संगठन और सांगठनिक बिंदुओं पर ज्यादा केंद्रित दिखता था, अब शाखाओं में सामाजिक प्रश्नों को विस्तार से लिया जाता है. क्या संघ अब बदल रहा है?

यह परिवर्तन नहीं है, यह अभिव्यक्ति है. जिसको ठेंगड़ी जी ‘प्रोग्रेसिव अनफोल्डमेंट’ कहते थे.

विजेत्री च न: संहता कार्यशक्तिर्, विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्.
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं, समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥
यह काम संघ का है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इतना ही काम करता है. लेकिन स्वयंसेवक समूह के रूप में एक है और व्यक्तिगत रूप में संघ का घटक बनकर कार्य करता है. प्रामाणिकता से, बुद्धि से, तन-मन-धन से, इसलिए अपने पवित्र मन से ये सब करता है. पहले भी करता था. लेकिन पहले हम बहुत थोड़े थे. हम जो करते थे उस पर ध्यान नहीं जाता था. पहले भी राष्ट्रीय विपदाओं के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने काम किया है. डॉ. साहब के समय रामटेक की यात्रा की अव्यवस्था को सुधारने का काम 1926 में स्वयंसेवकों ने किया, तब से यह चल रहा है. तब ध्यान नहीं जाता था. आज संघ बड़ा हो गया है तो संघ के स्वयंसेवक क्या कर रहे हैं, उस पर ध्यान जाता है. शाखाओं में हम बताते हैं. अब अपनी ताकत ऐसी है कि एक शाखा गांव या शहर में लगती है. उस गांव या शहर के लोग शाखा को अपना मानते हैं. अच्छा मानते हैं. अपेक्षा करते हैं कि संघ उन्हें पूरा करे. अब ताकत है इसलिए कर सकते हैं. क्योंकि संघ की बीजरूप में कल्पना उसी रूप में है.

सज्जन व्यक्ति क्या है, उसका उदाहरण डॉ. हेडगेवार देते थे कि जो घर से ऑफिस के लिए निकलता है सिर झुकाकर और शाम को पांच बजे ठीक से वापस आ जाता है. अपने घर के बाहर किसी के चक्कर में नहीं पड़ता, उसे समाज सज्जन मानता है. पर वास्तव में, सज्जन तो वह होता है जो समाज की चिंता करता है. अपने घर के बाहर क्या होता है, उसका ध्यान रखता है. यह डॉ. हेडगेवार का स्वयं का उदाहरण है. लेकिन इस सब को करने की स्थिति उस समय नहीं थी. आज हम इसको करने की स्थिति में हैं, इसलिए कर रहे हैं.

इस बार प्रतिनिधि सभा में एक बहुत बड़ा बदलाव हुआ है. चार के स्थान पर छह सह सरकार्यवाह! यह काफी बड़ा बदलाव है.
यह संघ कार्य विस्तार का परिणाम है. शाखा और संघ की रचना बहुत विस्तृत हो गयी है. संघ कार्य मिलने पर आधारित है. मिलने-जुलने के लिए एक व्यक्ति के पास पहले समय काफी रहता था. संघ बढ़ने लगा तो शारीरिक प्रमुख, बौद्धिक प्रमुख आदि हुए. बढ़ते कार्य के आयाम भी बढ़ते हैं. उसके लिए लोग देने पड़ते हैं और मिलने-जुलने की एक संख्या रखनी पड़ती है. जिसके साठ लाख तक स्वयंसेवक हों और प्रदेशों के प्रत्येक खंड में लगभग पहुंच गया है, अब मंडल तक जाने की बात कर रहा हो, ऐसे संगठन को संभालने के लिए ऊपर कितने लोग चाहिए, ये तो तय करना ही पड़ेगा. बाकी संगठन अपना क्रियाकलाप स्वतंत्र रूप से स्वयं चलाते हैं, लेकिन उनसे संपर्क करने के लिए मिलना-जुलना रहता है, इस सब कार्य के लिए ज्यादा लोग चाहिए. इसलिए सहसरकार्यवाहों की संख्या बढ़ी है. सरसंघचालक की संख्या नहीं बढ़ सकती, सरकार्यवाह की संख्या नहीं बढ़ सकती. हां, सह सरकार्यवाहों की संख्या बढ़ सकती है. कल और कोई आवश्यकता पड़ी तो भिन्न प्रकार की रचना करेंगे. पर अभी तो वही चल रही है. तो हमने सहसरकार्यवाहों की संख्या बढ़ाई, जिनके गौर करने के अलग अलग बिंदु होंगे.

गौर करने के इन्हीं बिंदुओं में त्रिपुरा भी जुड़ा है. त्रिपुरा को अलग प्रांत के तौर पर चिन्हित करने का कोई विशेष कारण है?
कोई विशेष कारण नहीं है. सरकार जैसे भौगोलिक क्षेत्र और प्रशासकीय सुविधा की दृष्टि से देखती है, हमारे कार्य के संदर्भ में देखा जाता है कि लोगों का जाना-आना कहां ज्यादा है. लोगों की परस्पर प्रकृति कितनी किससे मिलती है. इसी दृष्टि से हमारे प्रांत बनते हैं. जैसे अरुणाचल है. अरुणाचल का सारा जन व्यापार अरुणाचल में केंद्रित है. तो त्रिपुरा एक अलग प्रांत है ही, प्रकृति से, तो अलग कर ही दिया उसे हमने. चुनाव तो अभी हुए, इसे अलग प्रांत बनाने के बारे में हम दो साल पहले से विचार कर रहे थे. गोवा अलग राज्य है और संघ दृष्टि से वह कोंकण प्रांत में है. विदर्भ अलग राज्य नहीं है, पर वह हमारी रचना में अलग प्रांत है. इसी तरह त्रिपुरा हमारी दृष्टि से एक अलग प्रांत बन गया है. हमारे कार्य की वह स्थिति वहां आ गयी. अब वहां एक टीम हो सकती है जो वहां की बातों को संभाल सके.

भारत विश्व का सबसे युवा देश है और सबसे ज्यादा युवा अगर किसी संगठन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं तो वह है संघ. इतना बड़ा मानव संसाधन संघ की ओर आकर्षित हो रहा है. इस बारे में आप क्या कहेंगे?
युवा संघ की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तो हम उनको साथ लाएंगे और उनको तैयार करेंगे. उनकी रुचि-क्षमता के अनुसार उनको देशहित में लगाएंगे. संघ को अन्यान्य कामों के लिए नई पीढ़ी की आवश्यकता तो रहती है. वे संघ में आएंगे, संघ से परिचित होंगे, संघ से अनुभव लेंगे. अनुभव लेने के बाद उनको लगेगा कि यह ठीक है. साथ-साथ उनकी सक्रियता का भी ध्यान रखकर उनको तैयार करेंगे. यह होने वाला है.

आज के परिदृश्य में राजनीति दो प्रकार से हिन्दुत्व का चित्रण कर रही है, एक है आक्रामक हिन्दुत्व और दूसरा जो वास्तव में हिन्दुत्व है. राजनीतिक परिदृश्य में इन दोनों में अंतर को कैसे देखते हैं?
हम एक ही हिन्दुत्व को मानते हैं. और जिसे मानते हैं उसे मैंने मेरठ में राष्ट्रोदय समागम के भाषण में स्पष्ट किया है. हिन्दुत्व यानी हम उसमें श्रद्धा रखकर चलते हैं. सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, तप, शौच, स्वाध्याय, संतोष और जो ईश्वर को मानते हैं उनके लिए ‘ईश्वर प्रणिधान’. जो ईश्वर को नहीं मानते हैं उनके लिए ‘सत्य प्रणिधान’.

महात्मा गांधी कहते थे, सत्य का नाम हिन्दुत्व है. वही जो हिन्दुत्व के बारे में गांधीजी ने कहा है, जो विवेकानंद जी ने कहा है, जो सुभाष बाबू ने कहा है, जो कविवर रविन्द्रनाथ ने कहा है, जो डॉ. आंबेडकर ने कहा है, हिन्दू समाज के बारे में नहीं, हिन्दुत्व के बारे में. वही हिन्दुत्व है. लेकिन उसकी अभिव्यक्ति कब और कैसे होगी, यह तो व्यक्ति और परिस्थिति पर निर्भर करता है. मर्यादा पुरुषोत्तम राम के समय हिन्दू शब्द नहीं था लेकिन जो हिन्दुत्व है, वही है. वह चलता आ रहा है, उसी का नाम हिन्दुत्व पड़ा. वे हिन्दू थे. सब मर्यादाएं तोड़ने वाले कृष्ण उसी हिन्दुत्व के आधार पर जी रहे थे. परशुराम – कितना बड़ा संहार करने वाले और करुणावतार, दोनों में उनकी जो परिस्थति थी और उनको जो अभिव्यक्ति मिली थी, उनको जो समाज में देना था वह उन्होंने दिया. शिवाजी महाराज ने मिर्जा राजा का सम्मान रखा. वे भी हिन्दुत्व का आचरण कर रहे थे.

इसलिए हिन्दुत्व एक ही है. किसी के देखने के नजरिए से हिन्दुत्व का प्रकार अलग नहीं कर सकते. मैं सत्य को मानता हूं और अहिंसा को भी मानता हूं और मुझे ही खत्म करने के लिए कोई आए और मेरे मरने से वह सत्य भी मरने वाला है और अहिंसा भी मरने वाली है, उसका नाम लेने वाला कोई बचेगा नहीं तो उसको बचाने के लिए मुझे लड़ना पड़ेगा. लड़ना या नहीं लड़ना, यह हिन्दुत्व नहीं है. सत्य, अहिंसा के लिए जीना या मरना. सत्य, अहिंसा के लिए लड़ना अथवा सहन करना, यह हिन्दुत्व है. कब सहन करना, कब नहीं करना किसी व्यक्ति का निर्णय हो सकता है. वह सही भी हो सकता है, गलत भी हो सकता है. लेकिन गलत निर्णय करके वह लड़े तो उसके लड़ने को हिन्दुत्व नहीं कह सकते. गलत निर्णय करके वह चुप रहे तो उसके चुप रहने को आप हिन्दुत्व नहीं कह सकते. लेकिन जिन मूल्यों के आधार पर उसने निर्णय लिया वह मूल्य, वह तत्व, हिन्दुत्व है. ये जो बातें चलती हैं कि स्वामी विवेकानंद का हिन्दुत्व और संघ वालों का हिन्दुत्व, कट्टर हिन्दुत्व और सरल हिन्दुत्व. तत्व का नहीं, स्वभाव आदमी का होता है. कट्टर आदमी होता है. सरल आदमी होता है. ये भ्रम पैदा करने के लिए की जाने वाली तोड़-मरोड़ है, क्योंकि हिन्दुत्व की ओर आकर्षण बढ़ रहा है. दुनिया में बढ़ रहा और अपने देश में भी बढ़ रहा है. उसका लाभ हिन्दुत्व के गौरवान्वित होने से अपने आप हो रहा है. वह न हो इसलिए लोग उसमें मतभेद उत्पन्न करना चाहते हैं. हम हिन्दू के नाते किसी को अपना दुश्मन नहीं मानते. किसी को पराया नहीं मानते. लेकिन उस हिन्दुत्व की रक्षा के लिए हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति, हिन्दू समाज का संरक्षण हमको करना ही पड़ेगा. अब संरक्षण करने में समझाना भी पड़ता है. लड़ना पड़ेगा तो लड़ेंगे भी. हमारा लड़ना हिन्दुत्व नहीं है. हमारा समझाना हिन्दुत्व नहीं है. जिन बातों को लेकर हम चल रहे हैं उसके आधार पर अनुमान करके निर्णय करते हैं. वह मूल ही होता है. एक ही है, सर्वत्र एक ही है. और इसलिए मैंने मेरठ में कहा कि हिन्दू अब कट्टर बनेगा. इसका मतलब है हिन्दू अधिक उदार बनेगा. हिन्दू कट्टर बनेगा का मतलब ऐसे है कि महात्मा गांधी कट्टर हिन्दू थे और उन्होंने हरिजन में कहा भी है – मैं कट्टर सनातनी हिन्दू हूं. उन्होंने उसी अर्थ में कहा कि आप मुझे क्या कह रहे हो, मैं तो हिन्दुत्व का पूरा पालन कर रहा हूं. अब हिन्दुत्व में हिन्दुत्व का कैसा पालन करना, वह तो व्यक्तिगत निर्णय है. हिन्दुत्व में फर्क नहीं होता. आप यह कह सकते हैं कि फलां हिन्दुत्व को गलत समझ रहे हैं. आप कहेंगे कि मैं सही हूं, वह गलत है. इनका हिन्दुत्व, उनका हिन्दुत्व, यह सब कहने का कोई मतलब नहीं है. इसका निर्णय समाज करेगा और कर रहा है. समाज को मालूम है, हिन्दुत्व क्या है.

जब भी अनुकूलता की बात आती है तो उसके साथ कुछ चुनौती भी आ जाती है. आज संघ के बढ़ते हुए परिदृश्य में इस चुनौती को आप कैसे देखते हैं? इस संदर्भ में स्वयंसेवकों को संदेश के रूप में आप क्या कहेंगे?

अनुकूलता में असावधानी बढ़ती है. मनुष्य पर इसका स्वाभाविक परिणाम होता है. इस स्वाभाविकता से ऊपर उठकर अनुकूलता में भी सावधान रहना है. हम जो हैं वह बने रहें. आठवीं कक्षा में अंग्रेजी की पाठ्य पुस्तक में एक कहानी थी – अयाज नाम का एक दीवान था जो बहुत कर्तृत्व संपन्न विश्वासपात्र था. राजा का उस पर भरोसा था. जैसे आज होता है – वैसे उस वक्त भी दरबार में जलने वाले लोग थे. षड्यंत्र भी करते थे. किसी ने राजा के कान में भर दिया कि ये रात को उठकर बाहर नगर के जंगल में जाता है. वहां क्या करता है, पता नहीं, पर रोज जाता है. राजा को विश्वास नहीं हो रहा था, पर रोज-रोज बात सामने आ रही थी. राजा ने सोचा – जरा मैं भी देख लूं, यह क्या है. वेष बदलकर राजा उसके घर के पास रुका रहा. दीवान रात को बारह बजे निकला तो राजा ने उसका पीछा किया. वह जंगल में गया चोर दरवाजे से. एक खंडहरनुमा घर था जंगल में. सुनसान, अकेला. उसमें वह अंदर गया. उस घर की दीवारें वगैरह गिरी हुई थीं. छत नहीं थी. दीवान एक कमरे में गया और दो मिनट के बाद बाहर आया. तब राजा ने उसे पकड़ा और पूछा – बताओ, तुम यहां क्या करते हो. मुझे इतना विश्वास है तुम पर. यहां तुम क्या करने आते हो? मैंने झूठा विश्वास नहीं किया, अपनी आंखों से देखा है. उसने कहा – महाराज, मैं जो करता हूं आप भी चलकर देखिए उस कमरे में. दीवान के हाथ में मशाल थी. राजा बोला, ठीक है. उस खंडहरनुमा कमरे में एक छोटा – सा संदूक था. उसने उसको खोला, और राजा की तरफ देखकर बोला – महाराज आप भी देखिए. संदूक में फटा पुराना एक कोट था. उसने ढक्कन बंद किया और कहा – महाराज, मैं यहां रोज आता हूं और इसको देखता हूं. फिर वापस चला जाता हूं. राजा ने कहा – यह क्या? यह तो तुम्हारा फटा – पुराना कोट है. उसमें हीरे – मोती कुछ भी नहीं हैं. दीवान बोला – महाराज, मैं जब इस नगरी में पहली बार आया था तो मेरे पास संपत्ति के नाम पर यह ही था. आपका कुछ गुण – ग्राह्य स्वभाव और कुछ मेरा अपना कुछ, उसके आधार पर मैं यहां पहुंचा हूं. अब ऐसे कोट मैं देखता भी नहीं. इतने सुंदर वस्त्र मैं पहनता हूं. मेरा मान बढ़ा है. ऐसे में मुझे विस्मरण न हो कि एक दिन मैं ऐसा था. वहां से यहां तक मैं अपने गुणों के भरोसे आया हूं. उन गुणों का मुझे विस्मरण न हो, इसलिए उस स्थिति का स्मरण करा देने वाले इस कोट को मैं रोज देखने आता हूं. अनुकूलता में इसका ध्यान रखना पड़ता है. अनुकूलता अपेक्षा बढ़ाती है. अपना स्तर, अपना कर्तृत्व, समझदारी अपना सब कुछ बढ़ाना पड़ता है. अपने मन को भी उतना विशाल करना पड़ता है. अनुकूलता के चलते अपने स्तर को बढ़ाना पड़ता है और अनुकूलता के चलते ही अपने स्तर को कायम भी रखना पड़ता है. याद करना पड़ता है कि किन गुणों के कारण यहां तक आए हैं. उन सब गुणों को कायम रखकर चलना पड़ता है. बस, यही संदेश है.

साभार – पाञ्चजन्य

सोमवार, 19 मार्च 2018

कांग्रेस मुक्त भारत की आवश्यकता क्यों : अरविन्द सिसौदिया



कांग्रेस मुक्त भारत की आवश्यकता क्यों !!

- अरविन्द सिसौदिया,
जिला महामंत्री भाजपा कोटा !!! 9414180151 / 9509559131

*मुस्लिमों को पाकिस्तान मिला वह मुस्लिम देश हो गया !वहां का 24 प्रतिशत हिन्दू आज महज 1 या 2 प्रतिशत ही हिन्दू रह पाया है।मगर भारत हिन्दुओं को मिला था, उसे नेहरूजी ने हिन्दू राष्ट्र घोषित नहीं होने दिया ।
*राम मंदिर 1950 - 52 में ही बन सकता था,उसमें अंडगा लगाने वाली कांग्रेस ही थी।
*कश्मीर समस्या को उतपन्न करने वाली कांगेस,
*आपातकाल लगा कर लोकतंत्र का अपहरण करने वाली कांग्रेस
*सिख नरसंहार की दोशी कांग्रेस,
*भारत तेरे टुकडों होंगे वालों के साथ खडी कांगेस ही थी।
*गौमाता को सड़कों पर काट कर पका कर खानें वाली कांग्रेस ही है !
*महज वोट के लिये हिन्दू मंदिरों में जानें वाली कांग्रेस ही हे।
*हिन्दूओं को भगवा आतंकवाद कह कर अपमानित करने वाली कांग्रेस ही है।
*श्रीराम सेतू का अस्तित्व नकारने वाले अपने आपको पाण्डव कह कर हिन्दूओं का उपहास उडा रहे हें।
*श्रीलंका में शांती सेना भेज कर हिन्दू रक्त बहानें वाले कैसे हिन्दू हित चिन्तक हो सकते हें।
*छदम हिन्दू नाम रख कर वोट ठगना और हिन्दुओं का अहित करना ही इस पार्टी का मूल मकसद है।
*चीन को भारतीय भूभाग हारने वाले,पाकिस्तान के पास अपना भूभाग सौंपनें वाले !
*1971 में भातीय सेना ने पाकिस्तान के 95 हजार सैनिक बंदी बना लिये थे,पाकिस्तान का जीता हिस्सा वापस करने वाली और पाकिस्तान से अपनो दवा हुआ कश्मीर का हिस्सा मुक्त नहीं करवा पानें वाली कांग्रेस अपने आपको देश भक्त कैसे कह सकती हे।
*बंगला देशियों को भारत में भरने वाली कांग्रेस अपने आपको भारत का हित चिन्तक कैसे कह सकती है।
* भारत के अपराधी एंडरसन और क्रवात्रोची को भारत से भगा कर बचानें वाली कांग्रेस कैसे अपने आपको जनहित चिन्तक कह सकती है।

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

भाई साहब रघुवीरसिंह कौशल: विकास पुरूष

जयन्ति अवसर पर : 24 फरवरी 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल के चरण  स्पर्श किये थे 
बांरा को जिला बनाने वाले - अंता में एनटीपीसी खुलवाने वाले
मिनी सचिवालय और कालीसिंध पुल को लाने वाले
प्रखर राजनेता, मानव सेवा तथा रक्तदान के प्रेरक 

भाई साहब रघुवीरसिंह कौशल: विकास पुरूष 

- अरविन्द सिसोदिया , जिला महामंत्री भाजपा , जिला कोटा 
55 वर्ष के लगभग राजनैतिक जीवन में बेदाग छवि के व्यक्ति, राजस्थान विधानसभा में कुशाग्र वक्ता एवं दबंग किसान नेता के रूप में ख्याती प्राप्त विधायक रहे। स्पष्टतावादिता के लिए विख्यात रघुवीरसिंह कौशल ने नैतिकता के मुद्दों पर अपनी पार्टी को भी अनेकों अवसरों पर नहीं बख्शा। निर्विवाद छवि हेतु सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं के लिए एक आदर्श आपने प्रस्तुत किया ।

कौशल राजस्थान में लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के जनक, सहकार राजनीती के संस्थापक, जी.एस.एसों का जाल बिछानें वाले तथा रक्तदान , वृक्षारोपण, मरीजों की सेवा और शिक्षा हेतु सहयोग के प्रेरक हैं।

उन्होने राजनीति को मानव सेवा का माध्यम बना कर अनूठी मिसाल पेश की , अनेकों बार उनके भाषणों में होता था  ” वास्तविक गरीवों के बीपीएल का कार्ड बनवाया कि नहीं, मरीजों को देखने अस्पताल जाते हो कि नहीं , जरूरतमंद के इलाज को दान देते हो या नहीं , होली दिवाली गरीबों के घर राम राम करने जाते हो कि नहीं। “ उनका कहना रहता था कि ‘‘हम अपने स्टेटस से, व्यक्तित्व से, क्षमता से जरूरतमंद की सेवा अवश्य करें, उनके काम अवश्य आयें।’’

उनके पास अक्सर इलाज और स्कूल की फीस के लिये लोग पहुंचते रहते थे और वे अक्सर सामने बैठे किसी भी कार्यकर्ता से पैसा मांग कर उसका काम करवा देते थे। प्रधानमंत्री सहायता कोष ओर मुख्यमंत्री सहायता कोष से लोगों के इलाज करवाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। वे राजस्थान के एक मात्र इस प्रकार के सांसद थे कि जो प्रधानमंत्री कार्यालय में इलाज के लिये स्पेशल केस स्विकृत करवाने जाते थे। उनके कार्यकाल में जयपुर और दिल्ली के निवासों पर अक्सर दो चार मरीज इलाज के लिये ठहरे हुये मिलते ही थे। वे उनकी चाय पानी भोजन से लेकर अस्पताल तक जाने आने की चिंता करते थे।

उन्होने अपना जन्मदिन हमेशा ही तीर्थ स्थलों पर मनाया और वे अपनी मित्र मण्डली के साथ तिर्थ यात्रायें करते थे। 75 वां जन्मदिन धूमधाम से मनायें जानें का तय हुआ तो उन्होंने आयोजन का स्पष्टता से मना करते हुए समाज को प्रेरणा देने के लिये , जन्मदिन पर, विवाह की सालगिरह पर , परिजनों की तेरहवीं पर, रक्तदान शिविरों के आयोजन की परम्परा डाली। वे कहता थे जोडे से रक्तदान करने पर ग्यारह गुणा पुण्य मिलता हे। इस प्रकार महिलाओं में भी रक्तदान की जागरूकता के वे प्रेरक रहे। रक्तदान जो कि आज कोटा में फैशन के रूप में प्रचलित है उनकी ही देन है।

किसानों के हित में कार्यों में वे हमेशा ही अग्रणी रहे, राजनैतिक जीवन में सामाजिक कार्यों के प्रति वे हमेशा ही सजग एवं प्रयत्नशील रहे बीमारों का इलाज करवाने में हमेशा ही अग्रणी भूमिका निभाई । उन्होंने अपने 75वें जन्म दिवस पर रक्तदान शिविरों की श्रृंखला आयोजित करवाई जिसमें 1500 यूनिट से अधिक रक्त एकत्र हुआ था। इसके बाद प्रत्येक जन्म दिवस पर रक्तदान शिविर करवाया जो कोटा में एक प्रेरणा के रूप में स्थापित हो कर सम्पूर्ण हाडौती में फैल गया । एम.बी.एस. स्थित ब्लड बैंक को एम्बुलैंस एवं उन्नयन हेतु राशीयां दी। आई.एम.ए. हॉल के उन्नयन के लिये राशियां दी। बर्न वार्ड और यूरोलोजी के लिये सांसद कोष से राशियां दी। कैंसर विभाग के उन्नयन के लिये केन्द्र सरकार से राशि दिलवाई और उसके उन्नयन के सतत प्रयत्न किये।
सांसद काल में सांसद कोष की राशी से बांयी मुख्य नहर की सफाई करवा कर टेल पर पानी पहुंचवाने का वर्षों से लंम्बित अत्यंत आवश्यक कार्य करवाया । गांव-गांव हेण्डपम्प और ट्यूब वेल लगवाकर पेयजल समस्याओं का निदान करवाया । पेयजल की टंकियों के निर्माण और कस्बों में एम्बूलेंसों के लिये सांसद कोष से राशीयां दीं।

ऊर्जा मंत्री रहते हुए जी.एस.एसों का जाल बिछाया तो वन मंत्री के रूप में सघन वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया । शिक्षा के क्षैत्र में भामाशाहों को आगे लाने की परम्परा भी आपने प्रांरम्भ की स्वयं के गांव में विद्यालय की स्थापना हेतु भूमि दान की । आज वहां उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थापित है।

आध्यात्म में गहरी रूची वाले कौशल हनुमानजी के परम भक्त हैं वे नित्य सुन्दरकाण्ड का पाठ करते हैं। उन्हे सुन्दरकाण्ड पूरा याद है। धर्मिक कार्यों एवं विचारों की उनके समक्ष सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

1960 में ग्राम भोज्याखेडी के सरपंच से राजनैतिक यात्रा प्रारम्भ कर विधायक, मंत्री और सांसद तक की यात्रा निर्विघ्न जारी रही, राजनीति में व्यवहारिकता का उदाहरण बनें , यही कारण है कि बच्चे से लेकर बूढे़ तक उन्हें भाई साहब के नाम से पुकारते हैं । 82 वर्ष की आयु में भी वे सामाजिक एवं अन्य विविध कार्यक्रमों में भाग लेते रहे। 2009 से सक्रीय राजनैतिक जीवन से सन्यास के पश्चात भी वे लगातार पार्टी के मार्ग दर्शक बनें।
उनकी राजनैतिक सूझ-बूझ को पार्टी में बहुत ही महत्वपूर्ण रूप से लिया जाता था। आपने राजाखेडा तथा झुंन्झुनू के विधानसभा उपचुनावों में पार्टी को पहली बार विजयी दिलाई थी। आप लगातार संगठन एवं जनप्रतिनिधि चुनावों के प्रभारी रहे हैं।

1951 में भारतीय जन संघ की स्थापना हुई तथा 1952 में राजस्थान में जन संघ को स्थापित करने का कार्य प्रारंभ हुआ इस कार्य में अधिकांशतः राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवकों एवं पदाधिकारियों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कठिन परिश्रम किया। हाड़ौती में इस कार्य के नैतृत्वकर्ता कौशल रहे। अप्रत्यक्ष रूप् से जनसंघ के लिये प्रत्याशी तैयार करना पार्टी पदाधिकारी तैयार करना कार्य का विस्तार करना आदि में भी वो निरन्तर सन्निहित रहे। ज्ञातव्य रहे कि केाटा के जिला प्रचारक लालकृष्ण आडवाणी जब जन संघ के पदाधिकारी बने तो उनकी पहली आम सभा कौशल की अगुवाई में अन्ता में सम्पन्न हुई।जन संघ के तत्कालिन राष्ट्रीय महामंत्री पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी की हाड़ौती में प्रथम आमसभा कौशल की अगुवाई में अन्ता में सम्पन्न हुई।उन्हें प्रखर राजनेता के कारण ही आपात काल के दौरान मीसा लगाकर 18 महिने के लिये कांग्रेस सरकार ने जैल यात्रा करवाई। जनता पार्टी और बाद में भारतीय जनता पार्टी में वे उच्च स्तरिय राजनिती में सक्रिय रहे।
भारतीय जनता पार्टी के कोटा जिलाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष पदों पर पदासीन रहे । सांसद चुने जानें पर आप को राजस्थान सांसद सेल के अध्यक्ष के रूप में सुशोभित किया।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के स्वंयसेवक: दामोदर प्रसाद शांडिल्य के अनुसारः-
श्री कौशल विद्यार्थी काल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड गये थे। आप न्याय मंदिर शाखा , रामतलाई मैदान एवं शक्ति शाखा अफीम गोदाम के स्वंयसेवक रहे। जिला एवं विभाग कार्यवाह रहे। संघ की विभाग, प्रांत एवं क्षैत्र स्तरीय समन्वय शाखाओं के सदस्य भी रहे। आपने ओटीसी इन्दौर से की तथा तृतीय वर्ष शिक्षण किया। कोटा में जब लालकृष्ण आडवाणी जी संघ के प्रचारक थे तब कौशलजी ने उनके साथ भी कार्य किया।
आपका जुडाव बचपन से ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से रहा। आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं भारतीय किसान संघ के राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष रहे।

आपने पं. दीनदयाल जी उपाध्याय, श्री अटल बिहारी वाजपेयी , श्री लालकृष्ण आडवाणी, राजमाता श्रीमती विजया राजे सिंधीया, श्री मुरलीमनोहर जोशी, श्री कुशाभाऊ ठाकरे, श्री हरीदत्त पाठक सहित विभिन्न विभूतियों से मार्गदर्शन लेकर पूर्ण निष्ठा से कर्त्तव्य परायणता का परिचय दिया।

जीवन परिचय
रघुवीर सिंह कौशल का जन्म 24 फरवरी 1933 में, अंता के पास स्थित किसान परिवार में, ग्राम भोज्याखेड़ी में हुआ। उनके पिताजी का नाम श्री कन्हैयालाल जी कौशल एवं माताजी का नाम श्रीमति सोमवती देवी था। आप दो भाई एवं सात बहिनें थीं। आपका विवाह 10 फरवरी 1954 में कोटा नयापुरा की श्रीमति शकुन्तला देवी से हुआ । आपके दो पुत्र अरविन्द कौशल एवं अतुल कौशल  तथा एक पुत्री अंजना कौशल  है।
आपकी प्रारंम्भिक शिक्षा अंता कस्बे में तथा उच्च शिक्षा कोटा में हुई, आपने बी.ए., एल.एल.बी. किया है। आप एक सफल कृषक रहे हैं,  आप ने निरंतर आधुनिक कृषि को अपनाने पर जोर दिया तथा इस हेतू व्यक्तिगत स्तर पर भी व्यापक प्रचार-प्रसार किये। गन्ना उत्पादन के लिये सरकार द्वारा आपको कृषि पंडित की उपाधी से नवाजा गया।
आप हाडौती के पहले सहकार नेता हैं जिन्होने सहकारी संस्थाओं को प्राथमिक स्तर तक ले जानें का महती कार्य किया, सेन्ट्रल बैंक के अध्यक्ष, जिला सहकार संघ के अध्यक्ष, मार्केटिंग समिती, अंता और कृषि उपज मण्डी, अंता के अनेकों बार अध्यक्ष रहे हैं।
आप आपातकाल के दौरान 18 महीनें तक मीसा बंदी रहे हें। श्रीराम मंदिर मुक्ती आंदोलन में आप राजस्थान के इन्चार्ज रहे हैं। कश्मीर आंदोलन, गौ रक्षा आंदोलन सहित संघ विचारधारा के लगभग सभी आंदोलनों एवं कार्यक्रमों की आपने अगुवाई की है।

जनप्रतिनिधि क्षैत्र में 16 वर्षाें तक निरंतर सरपंच रहते हुए राजनैतिक यात्रा प्रारम्भ कर चार बार विधायक, दो बार सांसद एवं राजस्थान सरकार में मंत्री रहे। सांसद रहते हुऐ राजस्थान सांसद दल (एमपी सैल बीकानेर हाऊस, नई दिल्ली) के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान अनेको कमेटियों के सदस्य के रूप में भी आपने कार्य किया। ईजराईल, ब्रिटेन , अमरीका एवं वेस्टइंडीज की विदेश यात्रायें की!

राजनैतिक रूप से आपने श्री अटलबिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवानी, राजमाता श्रीमती विजयराजे सिंधिया, श्री कुशाभाऊ ठाकरे, श्री जसवंत सिंह, श्री भैरोंसिंह शेखावत, श्री सुन्दरसिंह भण्डारी, श्री राजनाथ सिंह, श्रीमती सुषमा स्वराज, श्री ललितकिशोर चतुर्वेदी, श्री हरीशंकर भाभडा, श्री भंवरलाल शर्मा एवं श्रीमति वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ कार्य किया है।


ऐतिहासिक क्षण 24 नवम्बर 2013 अंताः-
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल के साथ संगठन के महासचिव रहते हुए, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए अनेकों कार्यक्रम साझा किये। ऐतिहासिक क्षण 24 नवम्बर 2013 अंता में तब आया जब  भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी ने अंता में हुई जन सभा में मंच पर पूर्व सांसद रघुवीरसिंह कौशल के आदर सहित चरण  स्पर्श कर आशिर्वाद मांगा।

बांरा जिले में:-
1. बांरा को जिला बनाया
2. बांरा में मिनि सचिवालय भवन का निर्माण करवाया।
3. अंता में एनटीपीसी की स्थापना।
4. कालीसिंध नदी पर बडा पुल बनवाया।
5. बांरा में रेल्वे ओवर ब्रिज की प्रक्रिया कौशल ने ही प्रारम्भ करवाई थी।
6. बांरा में जिला बनने से पूर्व अतिरक्त जिला अधिकारी स्तर के अनेकानेक कार्यालयों की स्थापना करवाई।
7. बांरा के जिला बनने पर जिला स्तरीय कार्यालय स्थापित करवाये।
8. लिफ्ट योजनायें चालू करवाईं।
9. पूर्व - पश्चिम कोरीडोर कोे बांरा कोटा बूंदी के रास्ते निकलवाया , जिससे फोर लेन सड़क बन गई और कोटा में हैंगिग ब्रिज चम्बल पर बन रहा है।
10. कोटा बीना रेल लाईन का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण कौशल की ही देन है।

कोटा जिले में:-
1. आई एल को बचाया।
2. पूर्व - पश्चिम कोरीडोर को बांरा कोटा बूंदी के रास्ते निकलवाया , जिससे फोर लेन सड़क बनी और आज कोटा में हैंगिग ब्रिज चम्बल पर बन रहा है यह उसी का परिणाम है।
3. कोटा बीना रेल लाईन का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण कौशल की ही देन है।
4. ग्वालियर-श्योपुर नेरोगेज रेल लाईन को ब्रॉडगेज में बदलने और कोटा से जोडने में कौशल ने निरंतर प्रयास किये जिसका ही परिणाम होगा कि निकट भविष्य में यह रेल लाईन इटावा दीगोद होते हुऐ कोटा आयेगी।
5. अजमेर के नसीराबाद से बूंदी तक नया रेल मार्ग बनाये जाने के प्रयासों से ही सर्वे संभव हुआ , आगे यह लाईन भी बनेगी।
6. कोटा स्टेशन एवं डकनिया पर रेल आरक्षण कार्यालय भी आपकी ही देन है।
7. कोटा में नया हवाई अड्डा हेतु आपने प्रयास किये और मण्डाना के पास इस हेतू जमीन का सर्वे भी करवाया लेकिन राजनैतिक कारणों के चलते प्रयास पूर्ण नहीं हो सका।
8. कोटा बूंदी बांरा में एनीकटों का जाल बिछाये।

बूंदी जिले में:-
1. बांयी मुख्य नहर की साफ सफाई करवा कर, टेल तक पानी पहुंचवाया ।
2. चाकन बांध इन्द्रगढ़ को स्विकृत करवाया एवं बनवाया
विशेष:- कोटा में कर्फयू लगने पर जनता एवं कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करना

आंदोलनः-
1. कश्मीर मुक्ति आंदोलन।
2. गौहत्या विरोधी आंदोलन
3. खुशहाली टैक्स को हटवानें का आंदोलन।
4. श्रीराम मंदिर आंदोलन ।
5. आपातकाल में 18 महीने जेल यात्रा।
6. कोटा में रेल रोको आंदोलन में गिरफ्तारों को मुक्त करवाने का आंदोलन।

अंता -संघर्ष का मुख्य केन्द्र:-
1. नहरों के साथ ही सिंचित भूमि पर खुशहाली टैक्स मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिया ने लगाया, जिसके विरूद्ध किसान संघर्ष समिति बना कर रघुवीर सिंह कौशल ने 10 हजार किसानों के साथ प्रदर्शन कर माफ करवाया ।
2. सरपंच काल में डाबरी नक्कीजी गांव में नदी पर छोटा सा पम्प हाउस बनाकर सिंचाई प्रारम्भ करवाई जो कि आगे जा कर लिफ्ट इरिगेशन की जनक बनीं । यही पम्प हाऊस बाद में परवन सिंचाई परियोजना के रूप में स्थापित है।
3. प्रथम विधायक काल ( 1977 - 80  ) में प्रथम बार दांयीं मुख्य नहर पर लिफ्ट योजनायें स्विकृत करवाईं जो कि ऊँचाई वाले असिंचित क्षैत्र के लिये वरदान साबित हुईं। अपने आप में तब अनूठी पहल थी।  इसमें देहल्याहेड़ी, चक शाहबाद, पचेल खुर्द  आदि में स्थापित हैं।
4. 1977 में अंता को नगर पालिका बनवाया ।
5. अंता में एनटीपीसी की स्थापना ।
6. अंता में दांयी मुख्य नहर के एक्सईएन द्वितीय का कार्यालय खुलवाया।
7. अंता में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खुलवाया ।
8. पलायथा ब्रांच पर सड़क बनवाई ।
9. अंता मार्केटिंग के अध्यक्ष रहते हुऐ मार्केटिंग भवन बनवाया ।
10. अंता को नायब तहसील और बाद में तहसील बनवाया ।
11. अंता  पुलिस का डीएसपी कार्यालय ।
12. अंता एसीएम कार्यालय खुलवाया ।
13. अंता न्यायालय खुलवाया ।
14. अंता में कृषि विज्ञान केन्द्र खुलवाया ।
15. अंता में औद्यौगिक प्रशिक्षण संस्थान खुलवाया ।
16. अंता में सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम का निर्माण ।
17. अंता सार्वजनिक निर्माण विभाग का सहायक अभियंता कार्यालय खुलवाया ।
18. अंता बिजली विभाग का सहायक अभियंता कार्यालय खुलवाया ।
19. प्राथमिक विद्यालय एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बडवा, पलायथा, पचेलकलां,मिर्जापुर आदि को बनवाया। आयुर्वेदिक औषधालय बनवाये।
20. पर्यटन स्थल नागदा एवं सोरसन का विकास करवाया।

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

भाजपा : नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय




सोमवार, 19 फरवरी 2018

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा नई दिल्ली में पार्टी के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर आयोजित सभा में दिये गये उद्बोधन के मुख्य बिंदु



पार्टी का यह नवीन केन्द्रीय कार्यालय करोड़ों कार्यकर्ताओं के समायोजन से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के न्यू इंडिया की परिकल्पना को साकार करने में सफल होगा, ऐसा मुझे भरोसा है

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पार्टी का नया केंद्रीय कार्यालय हमारी आशाओं और देश की जनता की अपेक्षाओं व आकांक्षाओं की पूर्ति का वाहक बने, भारतीय जनता पार्टी की विजय यात्रा को आगे बढ़ाने वाला बने और पार्टी को सभी क्षेत्रों में और उंचाइयां प्रदान करने वाला बने, यही मेरी ईश्वर से कामना है

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इस देश में हजारों राजनीतिक दल हैं लेकिन मैं गर्व के साथ भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता के नाते यह कह सकता हूँ कि संगठन के आधार पर और लोकतांत्रिक तरीके से चलने वाली एकमात्र पार्टी भारतीय जनता पार्टी है

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राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने और सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति में होंगी लेकिन भारतीय जनता पार्टी केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि एक नए भारत के निर्माण के लिए राजनीति में है

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आज नए केन्द्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर पार्टी की विकास यात्रा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी के 11 करोड़ कार्यकर्ताओं की ओर से विनम्रता के साथ मैं अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, यह उन्हीं के पुण्य का फल है कि पार्टी यहाँ तक पहुँची है।

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आज का दिन भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत शुभ और महत्वपूर्ण है क्योंकि जन संघ की स्थापना से लेकर आज आज तक के पार्टी कार्यकर्ताओं का अपने कार्यालय का स्वप्न आज साकार हो रहा है

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भाजपा के नए केंद्रीय कार्यालय भवन का भूमिपूजन 2016 में रक्षाबंधन के दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर-कमलों द्वारा हुआ था और आज उन्हीं के कर कमलों द्वारा कार्यालय का उद्घाटन भी हो रहा है, यह मेरे लिए काफी हर्ष की बात है

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अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 1,70,000 स्क्वायर फीट में फैला भाजपा का यह केन्द्रीय कार्यालय दुनिया की सभी राजनीतिक पार्टियों के कार्यालय में सबसे बड़ा है

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2014 में देश की जनता ने भाजपा और श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी पर भरोसा रखते हुए हमें पूर्ण बहुमत देते हुए सरकार चलाने का अधिकार दिया था, उसके बाद जिस प्रकार से सरकार चली है और सरकार के कामकाज की सुगंध देश की आम जनता तक पहुँची है, इससे पार्टी और संगठन काफी मजबूत हुआ है

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जन-मानस में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता ने पार्टी को स्थायित्व देने का काम किया है और कार्यकर्ताओं ने इसके लिए अथक परिश्रम किया है, इसी का परिणाम है कि आज केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार के साथ ही देश के 19 राज्यों में हमारी सरकारें है

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 11 करोड़ सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी का संगठन न्यू इंडिया के स्वप्न को साकार करने के लिए निरंतर काम कर रहा है

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जन संघ की स्थापना से लेकर आज तक जितने भी पार्टी के अध्यक्ष रहे हैं, उनकी गरिमामय उपस्थिति आज यहाँ पर है, सबने पार्टी की विकास यात्रा को यहाँ तक पहुंचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है, मैं उन सभी का अभिनंदन करता हूँ

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली स्थित भाजपा के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय (6A, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग) का उद्घाटन किया और कार्यकर्ताओं को पार्टी की ताकत बताते हुए कहा कि पार्टी का यह नवीन केन्द्रीय कार्यालय करोड़ों कार्यकर्ताओं के समायोजन से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के न्यू इंडिया की परिकल्पना को साकार करने में सफल होगा, ऐसा मुझे भरोसा है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज का दिन भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत शुभ और महत्वपूर्ण है क्योंकि जन संघ की स्थापना से लेकर आज आज तक के पार्टी कार्यकर्ताओं का अपने कार्यालय का स्वप्न आज साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नए केंद्रीय कार्यालय भवन का भूमिपूजन 2016 में रक्षाबंधन के दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर-कमलों द्वारा हुआ था और आज उन्हीं के कर कमलों द्वारा कार्यालय का उद्घाटन भी हो रहा है, यह मेरे लिए काफी हर्ष की बात है। उन्होंने कहा कि अनेकों कार्यकर्ताओं ने इसके लिए अथक परिश्रम किया है, मैं उन सभी को हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूँ।

श्री शाह ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 1,70,000 स्क्वायर फीट में फैला भाजपा का यह केन्द्रीय कार्यालय दुनिया की सभी राजनीतिक पार्टियों के कार्यालय में सबसे बड़ा है। उन्होंने कहा कि यहाँ से पार्टी के प्रदेश कार्यालय और जिला कार्यालाओं के साथ सीधे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संपर्क साधा जा सकता है, प्रधानमंत्री जी प्रदेश कार्यकारिणी को यहीं से संबोधित कर सकते हैं, इस प्रकार की व्यवस्था यहाँ पर बनाई गई है। उन्होंने कहा कि इस कार्यालय में आधुनिक आईटी सेल, सोशल मीडिया सेल और मीडिया के लिए सभी सविधाओं के साथ बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि प्रेस के लिये भी लाइव करने की सारी सुविधाएं यहाँ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि कार्यालय के पास ही तीन सुंदर बागीचों का निर्माण दिल्ली नगर निगम और केंद्र सरकार मिल कर रही है। उन्होंने कहा कि राशि वन, नक्षत्र वन, सप्तर्षि वन, तीर्थंकर वन के नाम से भव्य उपवन बनाए गए हैं जो देखने लायक है और आप सभी से आग्रह है कि समय निकालकर परिवार के साथ इन बागीचों में एक बार भ्रमण अवश्य करें। उन्होंने कहा कि जब श्री नरेन्द्र भाई मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने वन महोत्सव को एक नया स्वरूप दिया था, राशियों, नक्षत्रों, ऋषि-मुनियों और तीर्थंकरों के वन बनाए थे, उस के कंसेप्ट को इन पार्कों में समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के लिए नए केन्द्रीय कार्यालय का निर्माण एक भावनात्मक विषय भी है क्योंकि कार्यालय का निर्माण पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष में ही संपन्न हुआ है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इस कार्यालय में 19 विभाग और 11 प्रकल्प होंगे जो पार्टी को जनता के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि ये सभी विभाग और प्रकल्प आज लगभग सभी जिलों में बन चुके हैं और इसका काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस देश में हजारों राजनीतिक दल हैं लेकिन मैं गर्व के साथ भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता के नाते यह कह सकता हूँ कि संगठन के आधार पर और लोकतांत्रिक तरीके से चलने वाली एकमात्र पार्टी भारतीय जनता पार्टी है। उन्होंने कहा कि संगठन के आधार पर चलने वाली पार्टी के लिए कार्यालय का बहुत बड़ा महत्त्व होता है। उन्होंने कहा कि 11 प्रकल्पों में से दो प्रकल्प कार्यालय निर्माण एवं कार्यालय आधुनिकीकरण के लिए रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि 2015 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हमने यह तय किया था कि 694 जिलों में से 635 में हम पार्टी कार्यालय का निर्माण करेंगे। उन्होने कहा कि आज मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि इन 635 में से 318 कार्यालयों के लिए भूमि खरीद का काम पूरा हो गया है, 125 और कार्यालयों के लिए भूमि खरीद कार्य प्रगति पर है, 192 कार्यालयों का निर्माण पूरा हो चुका है, 100 कार्यलयों का निर्माण प्रगति पर है और एक साल में हम सभी कार्यालयों का निर्माण पूरा हो जाएगा, ऐसा मुझे भरोसा है।

श्री शाह ने कहा कि 2014 में देश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी और श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी पर भरोसा रखते हुए हमें पूर्ण बहुमत का जनादेश देकर सरकार चलाने का अधिकार दिया था, उसके बाद जिस प्रकार से सरकार चली है और सरकार के कामकाज की सुगंध देश की आम जनता तक पहुँची है, इससे पार्टी और पार्टी संगठन काफी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि जन-मानस में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता ने पार्टी को स्थायित्व देने का काम किया है और कार्यकर्ताओं ने इसके लिए अथक परिश्रम किया है, इसी का परिणाम है कि आज देश के 19 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और भाजपा एवं सहयोगियों की सरकारें हैं, साथ ही केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने और सत्ता हासिल करने के लिए चुनाव मैदान में उतरती होंगी लेकिन भारतीय जनता पार्टी केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि एक नए भारत के निर्माण के लिए राजनीति में है।

श्री शाह ने कहा कि 1950 से शुरू हुई हमारी यात्रा कई उतार-चढ़ाव, जय-पराजय व अनेक संघर्षों को पार कर यहाँ तक पहुँची है और मुझे यह कहते हुए आनंद की अनुभूति हो रही है कि 10 सदस्यों से शुरू हुई पार्टी आज 11 करोड़ सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, 19 राज्यों में हमारी सरकारें हैं, 1000 से अधिक विधायक हैं, लगभग 330 सांसद हैं और केंद्र में पूर्ण बहुमत की हमारी सरकार है। उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कई कार्यकर्ताओं ने अपना सर्वस्व पार्टी के लिए समर्पित कर दिया है, कई कार्यकर्ताओं ने अपने त्याग व बलिदान से पार्टी को सींचा है, केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में हमारे कई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई फिर भी हिम्मत हारे बिना हमारे कार्यकर्ताओं ने पार्टी की यात्रा को आगे बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज नए केन्द्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर पार्टी की विकास यात्रा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी के 11 करोड़ कार्यकर्ताओं की ओर से विनम्रता के साथ मैं अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, यह उन्हीं के पुण्य का फल है कि पार्टी यहाँ तक पहुँची है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 11 करोड़ सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी का संगठन न्यू इंडिया के स्वप्न को साकार करने के लिए निरंतर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी का नया केंद्रीय कार्यालय हमारी आशाओं और हमारे देश की जनता की अपेक्षाओं व आकांक्षाओं की पूर्ति का वाहक बने, भारतीय जनता पार्टी की विजय यात्रा को आगे बढ़ाने वाला बने और पार्टी को सभी क्षेत्रों में और उंचाइयां प्रदान करने वाला बने, यही मेरी ईश्वर से कामना है। उन्होंने कहा कि जन संघ की स्थापना से लेकर आज तक जितने भी पार्टी के अध्यक्ष रहे हैं, उनकी गरिमामय उपस्थिति आज यहाँ पर है, सबने पार्टी की विकास यात्रा को यहाँ तक पहुंचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है, मैं उन सभी का अभिनंदन करता हूँ।

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

राजस्थान के बजट 2018-19 के प्रमुख बिन्दु


राजस्थान के बजट 2018-19 के प्रमुख बिन्दु

प्रसारित - अरविन्द सिसौदिया , जिला महामंत्री भाजपा कोटा
9414180151 / 9509559131
कृषि, कृषक एवं पशुपालक कल्याण:
राज्य सरकार पर लगभग 8 हजार करोड़ के वित्तीय भार से लघु एवं सीमांत कृषकों के सहकारी बैंकों में 30 सितंबर 2017 को overdue अल्पकालीन फसली ऋण में समस्त शास्तियों एवं ब्याज माफी और outstanding अल्पकालीन फसली ऋण में से 50 हजार तक के कर्ज़े की एकबारीय माफी का निर्णय
‘राजस्थान राज्य कृषक ऋण राहत आयोग‘ के गठन की घोषणा
वर्ष 2018-19 में किसानों को अल्पकालीन ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरण हेतु 384 करोड़ ब्याज अनुदान एवं 160 करोड़ क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान
राजफैड को मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत सरसों और चने की उपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने हेतु 500 करोड़ का ब्याजमुक्त ऋण और खरीद पर राजफैड को खरीद अवधि के दौरान देय मंडी शुल्क में छूट
राजस्थान राज्य भंडार व्यवस्था निगम द्वारा 350 करोड़ की लागत से 5 लाख मैट्रिक टन भंडारण क्षमता के गोदामों का निर्माण
समस्त श्रेणी के कृषकों को Farm Pond निर्माण पर पूर्व में देय लागत के 50 प्रतिशत अनुदान को बढ़ाकर 60 प्रतिशत किये जाने पर देय 10 प्रतिशत top-up अनुदान हेतु 14 करोड़ का प्रावधान
जल हौज निर्माण पर वर्तमान में देय 50 प्रतिशत अनुदान पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत top-up अनुदान देते हुए अधिकतम अनुदान की सीमा को 75 हजार से बढ़ाकर 90 हजार करते हुए, 5 करोड़ 40 लाख का प्रावधान
नहरी क्षेत्रा में डिग्गी निर्माण पर 25 प्रतिशत top-up अनुदान देते हुए अधिकतम 3 लाख तक अनुदान हेतु 90 करोड़ का प्रावधान
2 हजार वर्ग मीटर तक के ग्रीन हाऊस व शेडनेट की स्थापना पर लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 10 लाख प्रति इकाई अनुदान हेतु 32 करोड़ का प्रावधान
सौर ऊर्जा पंप संयंत्रों पर राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में देय अनुदान को बढ़ाकर 3 HP के लिए 35 एवं 5 HP के लिए 40 प्रतिशत अर्थात दोनों ही श्रेणियों में कुल अनुदान को 60 प्रतिशत करते हुए 165 करोड़ का प्रावधान
1 लाख 75 हजार मैट्रिक टन यूरिया तथा 50 हजार मैट्रिक टन DAP के अग्रिम भंडारण की व्यवस्था हेतु 40 करोड़ का प्रावधान
प्रत्येक जिले में एक नंदी गौशाला को गौसरंक्षण एवं संवर्धन निधि से 50 लाख तक का अनुदान
गौशालाओं को चारा पशुआहार के लिए वर्तमान में 90 दिन (तीन माह) की सहायता को बढ़ाकर 180 दिन (6 माह)
पंजीकृत गौशालाओं में आधारभूत संरचना के विकास हेतु गौसंरक्षण एवं संवर्धन निधि से 50 करोड़
25 गौशालाओं में Bio Gas Plant लगाने के लिए प्रति गौशाला लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 40 लाख तक का अनुदान
ऊँटनी के दूध का प्रसंस्करण एवं विपणन करने के लिए RCDF के माध्यम से जयपुर में एक mini plant हेतु 5 करोड़ का प्रावधान
राज्य में ऐसे जिले जहां वर्तमान में कृषि कॉलेज प्रावधित नहीं हैं, वहां निजी क्षेत्रा द्वारा कृषि कॉलेज की स्थापना हेतु निवेश को प्रोत्साहित करना
कृषि आधारित उद्योगों एवं सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ब्याज अनुदान की सीमा को पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष से बढ़ाकर सात लाख पचास हजार रुपये प्रतिवर्ष की जाती है। इसके अतिरिक्त महिलाओं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, निर्याग्य एवं 40 वर्ष तक की आयु के राजस्थान के मूल निवासी उद्यमियों हेतु ब्याज अनुदान की सीमा को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है।
TSP Area के मूल निवासियों को स्वरोजगार प्रोत्साहन हेतु Agro Processing and Agri Marketing Sector की RIPS-2014 में अधिसूचित manufacturing and processing गतिविधियों के लिये वर्तमान में उपलब्ध incentives के साथ 20 लाख तक के बैंक ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जायेगा ।
कृषि जिन्सों की गुणवत्ता में सुधार हेतु खेत से फसलों का सीधा जुड़ाव करने एवं प्राथमिक उत्पादक को रिप्स का लाभ देने के उद्देश्य से क्लीनिंग, ट्रिमिंग तथा ग्रीडिंग इत्यादि गतिविधियों के लिये सप्लाई चैन के सभी स्तरों पर रिप्स-2014 के अन्तर्गत प्रोत्साहन प्राप्त होंगे।
राज्य में किसानों हेतु भण्डारण की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भण्डारगृहों को 5 हजार मैट्रिक टन क्षमता एवं 2.5 करोड़ रुपये के निवेश पर वर्तमान में रिप्स-2014 के अन्तर्गत उपलब्ध प्रोत्साहन लाभ अब 3 हजार मैट्रिक टन क्षमता एवं निवेश 1.5 करोड़ रुपये के निवेश पर भी प्राप्त हो सकेंगे।
शीघ्र खराब होने वाली वस्तुऐं यथा टमाटर, प्याज, आलू इत्यादि हेतु ‘ऑपरेशन ग्रीन’ प्रोग्राम के समर्थन में रिप्स-2014 का लाभ रीफर वैन (कोल्ड चैन) में निवेश पर भी दिया जायेगा।
अति पिछड़े क्षेत्रों में 50 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश करने वाली कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि विपणन, जैव प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रा की स्थापित होने वाली प्रत्येक क्षेत्रा की प्रथम इकाई हेतु पांच करोड तक इन्फ्रास्ट्रक्चर सहायता अनुदान उपलब्ध होगा।
खातेदारी भूमि में 4 हेक्टर क्षेत्राफल तक के अप्रधान खनिज की खनिज रियायतें राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम राशि तय कर सम्बन्धित खातेदार को आवंटित की जायेंगी।
उपनिवेश क्षेत्रों के सभी श्रेणी के आवंटियों को कृषि भूमि आवंटन के पेटे बकाया किश्तों की राशि एकमुश्त जमा कराने पर ब्याज में वर्तमान में दी जा रही छूट दिनांक 31.12.2018 तक बढ़ाई जाती है।
काश्तकारों को राहत प्रदान करने के लिये खरीफ सम्वत 2075 वर्ष 2018-19 से भूमि पर लगने वाले लगान (भू-राजस्व) को माफ किया जाता है। इससे लगभग 40 से 50 लाख किसान लाभन्वित होंगे।
स्टाम्प ड्यूटी तथा पंजीयन शुल्क में राहत :-
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानो द्वारा कृषि भूमि की खरीद-बेचान में राहत प्रदान करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 वर्गमीटर तक की कृषि भूमि का मूल्यांकन आवासीय के स्थान पर कृषि भूमि की दर से किया जायेगा।
10 लाख रूपये मूल्य तक की अचल सम्पत्ति के हकत्याग के दस्तावेजों पर स्टाम्प ड्यूटी अधिकतम 2000 रूपये से घटाकर 500 रूपये की जायेगी।
पैतृक सम्पत्ति के हकत्याग के दस्तावेजों पर स्टाम्प डयूटी में रियायत का लाभ मामा तथा भांजा/भांजी द्वारा निष्पादित हकत्याग दस्तावेजों पर भी दिया जायेगा।

उद्योग
भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्रा में भूमिगत pipeline सहित Common Effluent Treatment Plant (CETP) के upgradation के कार्य-ृ146 करोड़ की लागत।
दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर परियोजना के अंतर्गत भूमि का मुआवजा देने के लिए 400 करोड़ का प्रावधान।
व्यवहारियों की समस्याओं के त्वरित समाधान, सामाजिक सुरक्षा, बीमा आवश्यकताओं एवं अधिनियमों/ नियमों से संबंधित सुझावों हेतु व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन किया जायेगा दस करोड़ रुपये की प्रारम्भिक राशि से व्यापारी कल्याण निधि की स्थापना की जायेगी।
दिनांक 1 जुलाई, 2017 से जी.एस.टी. क्रियान्यन के पश्चात् वैट एवं सी.एस.टी. आधारित अनुदान अब एस.जी.एस.टी. के आधार पर दिये जायेंगे। और यह अनुदान सीधे ही उद्यमियों के बैंक खातों में सीधे अंतरित किये जायेंगे।
वैट व्यवस्था के अन्तर्गत मनोरंजन एवं पर्यटन इकाईयों को रिप्स के अन्तर्गत मनोरंजन कर एवं विलासिता कर से छूट उपलब्ध थी। इस सेक्टर्स को भी एस.जी.एस.टी. आधारित अनुदान प्राप्त होगा।
राजस्थान के मूल निवासियों को रोजगार में बढ़ावा देने के उद्देश्य से रोजगार अनुदान की राशि प्रत्येक श्रेणी के लिये 5000 रुपये बढ़ाई गई है। इस क्रम में अति पिछड़े एवं पिछड़े क्षेत्रों हेतु रोजगार अनुदान की राशि श्रेणीवार 40 हजार रुपये एवं 35 हजार रुपये से बढ़ाकर क्रमशः 45 हजार रुपये एवं 40 हजार रुपये किया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी, मनोरंजन एवं पर्यटन क्षेत्रा की इकाई की स्थापना हेतु बहुमंजिला व्यवसायिक भवनों में तल/स्थान के खरीद/लीज पर लिये जाने पर स्टाम्प ड्यूटी में 50 प्रतिशत छूट देय होगी।

सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्षेत्रा :
सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एस. जी.एस.टी. से सम्बन्धित निवेश अनुदान को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया गया है।
सूक्ष्म एवं लघु क्षेत्रा की बीमार इकाईयों को राहत प्रदान करने हेतु एस.जी.एस.टी. की बकाया को 24 किश्तों में जमा कराने की सुविधा दी गई है।
सूक्ष्म एवं लघु क्षेत्रा की बीमार इकाईयों को पुनर्वास पैकेज की दिनांक से विद्युत शुल्क की 100 प्रतिशत छूट उपलब्ध होगी।
सूक्ष्म एवं लघु क्षेत्रा की इकाईयों को सूक्ष्म एवं लघु इकाईयों हेतु साख, गारन्टी ट्रस्ट के अन्तर्गत गारन्टी फीस का पुनर्भरण किया जायेगा जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपये होगी।
राष्ट्रीय स्तर के मान्यता प्राप्त संस्थानों से तकनीक ग्रहण की फीस का 50 प्रतिशत पुनर्भरण किया जायेगा जिसकी अधिकतम सीमा दस लाख रुपये होगी।
भारत सरकार की ‘‘ज़ीरो डिफेक्ट एण्ड ज़ीरो इफेक्ट’’ (जेड.ई.डी.) योजना के अन्तर्गत कम से कम रजत श्रेणी प्राप्त करने के लिये अपेक्षित मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद मूल्य के 50 प्रतिशत का पुनर्भरण किया जायेगा जिसकी अधिकतम सीमा पांच लाख रुपये होगी।
ऊर्जा अंकेक्षण/जल अंकेक्षण/सुरक्षा अंकेक्षण पर व्यय की जाने वाली राशि का 75 प्रतिशत पुनर्भरण किया जायेगा जिसकी अधिकतम सीमा प्रत्येक के लिये 1 लाख रुपये होगी।
सूक्ष्म एवं लघु उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की परफॉरमेंस एवं केडिट रेटिंग योजना के अन्तर्गत केडिट रेटिंग के संदर्भ में किये गये व्यय का 25 प्रतिशत पुनर्भरण किया जायेगा जिसकी अधिकतम सीमा दस हजार रुपये होगी।
सड़क एवं परिवहन
766 करोड़ की लागत से ग्रामीण गौरव पथ योजना एवं मिसिंग लिंक योजना से शेष रहे ग्राम पंचायत मुख्यालयों को जोड़ना
राज्य की सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में 15 किलोमीटर प्रति विधानसभा क्षेत्रा नवीन सड़कों का निर्माण
2 हजार 452 करोड़ की लागत से ADB Tranche-I में 980 किलोमीटर सड़क निर्माण
2 हजार 274 करोड़ की लागत से ADB एवं विश्व बैंक ऋण पोषित योजना से जोधपुर, नागौर और पाली में 882 किलोमीटर सड़क निर्माण
1 हजार 622 करोड़ की लागत से ‘प्रधानमंत्रा ग्राम सड़क योजना‘ के द्वितीय चरण में 3 हजार 464 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के upgradation और maintenance कार्य
परिवहन कार्यालयों की लाईसेंस एवं वाहन संबंधी सेवाओं के front office counters को निजी क्षेत्रा के माध्यम से संचालित करना एवं driving licence एवं vehicle registration संबंधी समस्त आवेदन प्रक्रिया को paper-less करना
अजमेर को छोड़कर शेष 6 संभागीय मुख्यालयों एवं सात अन्य जिलों पाली, दौसा, सीकर, चित्तौड़गढ़, अलवर, झालावाड़ एवं डीडवाना-नागौर के अलावा बाकी रहे जिला परिवहन कार्यालयों में fully automated driving tracks का निर्माण कार्य
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में 80 वर्ष से अधिक की आयु के वृद्धजनों को मुफ्त यात्रा सुविधा के साथ ही उनके एक ंattendant को 50 प्रतिशत की रियायती दर पर यात्रा सुविधा
राज्य के पर्यटक ऑपरेटर जो कि Indian Association of Tour Operators (IATO)/ Rajasthan Association of Tour Operators (RATO) से पंजीकृत है के पर्यटक वाहनों पर देय विशेष पथकर में 12500 रूपये से अधिक राशि की छूट की अवधि दिनांक 30.04.2018 से दिनांक 30.06.2020 तक बढाई जाना।
राजस्थान में हवाई अड्डों के अन्दर के क्षेत्रा में संचालित यात्रा वाहनों को, वाहन की कीमत के 6 प्रतिशत अथवा चैसिस की कीमत के 10 प्रतिशत के अनुसार एकमुश्त कर की वैकल्पिक सुविधा देना।
इसके साथ ही मोटर वाहनों पर दिनांक 31.03.2016 तक के बकाया कर को दिनांक 30.09.2018 तक जमा कराने पर इस पर देय ब्याज एवं penalty को माफ किया जायेगा।
राज्य के public passenger transport vehicles जो एल.पी.जी./सी.एन.जी./सौर ऊर्जा से संचालित हैं पर देय एकमुश्त कर की राशि में 25 प्रतिशत की छूट।
जल संसाधन एवं सिंचित क्षेत्र
52 हजार करोड़ लागत की निम्न परियोजनाओं को आवश्यक clearances प्राप्त करने के पश्चात प्रारंभ किया जायेगाः-
प्रदेश के 13 जिलों में पेयजल एवं सिंचाई की दीर्घकालीन आवश्यकता को पूरा करने के लिए 37 हजार करोड़ की लागत वाली ERCP परियोजना
बीसलपुर बांध में पानी की आवक बढ़ाने के लिए 6 हजार करोड़ की लागत वाली ब्राह्मणी-बनास परियोजना
बांसवाड़ा जिले में अनास बांध निर्माण योजना में 1 हजार करोड़ की लागत से सिंचाई एवं पेयजल सुविधा का विस्तार
2 हजार करोड़ की लागत से माही बांध से अपर हाईलेवल केनाल निकालकर बांसवाड़ा के 26 हजार हैक्टेयर क्षेत्रा में सिंचाई सुविधा का सृजन
साबरमती बेसिन के अतिरिक्त जल से जवाई बांध के पुनर्भरण हेतु 6 हजार करोड़ लागत की परियोजना
20 हजार करोड़ की लागत से ताजेवाला हैड पर आवंटित 577 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी के उपयोग हेतु परियोजना
2 हजार 200 करोड़ लागत से माही बांध के दांयी ओर से 265 किलोमीटर लंबी हाईलेवल केनाल से जाखम बांध के 28 हजार हैक्टेयर क्षेत्रा को सिंचाई सुविधा सृजन परियोजना
3 हजार करोड की लागत से उदयपुर एवं राजसमंद में जाखम तथा देवास III एवं IV से पानी लाने के लिए परियोजना
1 हजार करोड़ एवं 150 करोड़ का प्रावधान कर परवन एवं धौलपुर लिफ्ट परियोजनाओं का कार्य शुरू तकली बांध परियोजना के भूमि अधिग्रहण हेतु प्रावधान
नगरीय क्षेत्रों में मुख्यमंत्रा जलस्वावलंबन अभियान के द्वितीय चरण में राज्य के समस्त 191 शहर शामिल कर 1 हजार 766 कार्यों पर 120 करोड़ का प्रावधान एवं ग्रामीण क्षेत्रा में अभियान के तृतीय चरण में 4 हजार 240 गाँवों में 1 लाख 40 हजार कार्य प्रस्तावित
राज्य के किसानों को राहत प्रदान करने के लिये 31.01.2018 तक की बकाया सिंचाई कर की राशि 31.12.2018 तक एकमुश्त जमा कराये जाने पर ब्याज में शत्-प्रतिशत छूट दी जायेगी।

पेयजल 
Regional Water Grid बनाकर, राज्य में पेयजल की उपलब्धता एवं आपूर्ति का दूरगामी समाधान करने के लिए राजसमंद, चित्तौड़गढ़ एवं उदयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल के लिए 450 करोड लागत से Mahi High Level Canal to Jaisamand Drinking Water Project एवं बीसलपुर-जयपुर पेयजल परियोजना फेज़ द्वितीय में 1 हजार करोड़ की लागत से सूरजपुरा WTP में अतिरिक्त जलशोधन क्षमता विकसित कर बालावाला तक 97 किलोमीटर लंबी दूसरी मुख्य पाइपलाइन बिछाना
पेयजल समस्या के समाधान हेतु प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रा में आवश्यकतानुसार अधिकतम 100 हैंडपंप स्वीकृत
2 हजार करोड़ की प्रस्तावित ‘परवन-अकावद पेयजल परियोजना‘ से खानपुर, मनोहरथाना, लाडपुरा, पीपल्दा, सांगोद, अंता, बारां-अटरू, छबड़ा एवं किशनगढ़ क्षेत्रा के 1 हजार 821 गाँवों को कवर करना
365 करोड की लागत वाली डूंगरपुर, आसपुर एवं दोवड़ा वृहद पेयजल परियोजना से डूंगरपुर शहर सहित आसपुर एवं दोवड़ा क्षेत्रा के 151 गाँव एवं 244 ढाणियों में रहने वाले लगभग 5 लाख 32 हजार लोगों को लाभ
182 करोड़ 86 लाख की लागत से बूँदी जिले में गरड़दा वृहद पेयजल परियोजना से जिले के 111 गाँवों एवं 91 ढाणियों में रहने वाले लगभग 2 लाख 90 हजार की आबादी लाभान्वित
109 करोड़ 29 लाख की लागत से बूँदी जिले में झालीजी का बराना वृहद पेयजल परियोजना से केशवरायपाटन क्षेत्रा के 72 गाँवों के 1 लाख लोग लाभान्वित
55 करोड़ 47 लाख की लागत से बारां जिले में कछावन पेयजल परियोजना से छबड़ा क्षेत्रा के 16 गाँवों एवं 3 ढाणियों के लगभग 20 हजार लोग लाभान्वित
घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की दिनांक 30.11.2017 तक की जल प्रभार शुल्क के पेटे बकाया राशि दिनांक 31.12.2018 तक एकमुश्त जमा कराये जाने पर ब्याज एवं शास्ति राशि में शत्-प्रतिशत छूट दी जायेगी।

ऊर्जा :
प्रसारण एवं वितरण तंत्रा के विकास हेतु आगामी वित्तीय वर्ष में 400 केवी का एक, 132 केवी के 15 तथा 33 केवी के 200 नये सब-स्टेशन का लोकार्पण
ग्रामीण क्षेत्रों में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना तथा शहरी क्षेत्रों में Integrated Power Development Scheme के अंतर्गत 7 लाख नये घरेलू विद्युत कनेक्शन
विद्युत वितरण कंपनियों के संगठनात्मक ढांचे में सुधार हेतु विद्युत उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए 24 नये खण्ड एवं 93 उपखण्ड कार्यालय खोलना
जनवरी 2012 तक लंबित 2 लाख कृषि कनेक्शन वर्ष 2018-19 में दिया जाना

महिला एवं बाल विकास :
महिला मानदेयकर्मियों का मानदेय बढ़ाते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 6 हजार, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 4 हजार 500, सहायिका को 3 हजार 500, साथिन को 3 हजार 300 एवं आशा सहयोगिनी को 2 हजार 500 प्रतिमाह देने से 1 लाख 84 हजार महिला मानदेयकर्मी लाभान्वित
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा मानदेयककर्मियों द्वारा देय अंशदान को समाप्त करते हुए, बीमा योजना के प्रीमियम की शत-प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन और लाभान्वितों में साथिन सहित 1 लाख 84 हजार महिला मानदेयकर्मी लाभान्वित
15 से 45 आयुवर्ग की ग्रामीण बालिकाओं एवं महिलाओं में Menstrual Hygiene Scheme में stake holder sensitization के साथ sanitary pads का वितरण पर 76 करोड़ का प्रावधान
बाल विकास परियोजनाओं में नियोजित करने के लिए 1 हजार Nursing Training Teachers की भर्ती
पंजीकृत महिला दुग्ध समितियों को 2 हजार लीटर क्षमता के 750 Bulk Milk Cooler एवं 1 हजार लीटर क्षमता के 250 Bulk Milk Cooler की खरीद पर लागत राशि का 50 प्रतिशत अनुदान
चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा :
अग्नि संबंधी दुर्घटनाओं से बचाव के लिए प्रदेश के 27 जिला चिकित्सालयों में आधुनिक Fire Fighting एवं Fire Detection System पर 7 करोड़ 29 लाख व्यय
प्रदेश के 27 जिला चिकित्सालयों में roof top solar विद्युत संयंत्रों की स्थापना
धौलपुर में नवीन मेडिकल कॉलेज की स्थापना
120 करोड़ की लागत से 28 नवीन PHC तथा 16 PHC को CHC में क्रमोन्नत करना
4 हजार 514 नर्स ग्रेड-प्प् तथा 5 हजार 558 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता की भर्ती
1 करोड़ 50 लाख की लागत से जयपुरिया अस्पताल में स्वाईन फ्लू व VDRL Lab
SMS Hospital मेडिकल कॉलेज बीकानेर और अजमेर में नवीन कैथ लैब हेतु 6 करोड़ और 7 करोड़ 90 लाख की लागत से दो नये examination hall
अजमेर में 1 करोड़ 15 लाख की लागत से Angiojet Thrombectomy System की स्थापना और 1 करोड़ 20 लाख की लागत से 8 ventilators की स्थापना
जोधपुर मेडिकल कॉलेज में ambulance and equipments के लिए 1 करोड़ 50 लाख का प्रावधान
1 करोड़ 10 लाख की लागत से मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में Anesthesia विभाग हेतु स्वाईन फ्लू के रोगियों के लिए ICU Ventilator एवं Nephrology Department में 4 नवीन Dialysis Machines की स्थापना
1 करोड़ 96 लाख की लागत से मेडिकल कॉलेज, झालावाड़ के ENT उपकरणों की खरीद करने एवं 7 नये Pediatric and Neonatal Ventilators की स्थापना
3 करोड़ 72 लाख की लागत से मेडिकल कॉलेज, कोटा में Dual Imaging System, Blood Component Separation Unit, C-arm Machine
शिक्षा :
आदर्श विद्यालयों हेतु 1 हजार 163 आदर्श विद्यालयों में 3 हजार 379 class rooms एवं toilets हेतु 360 करोड़ का प्रावधान
विभिन्न श्रेणी के 1 हजार 832 विद्यालय क्रमोन्नत
Mid-day Meal योजना में राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को सप्ताह में तीन बार दूध पोषाहार हेतु 250 करोड़ का प्रावधान
54 हजार तृतीय श्रेणी अध्यापक सहित विभिन्न पदों पर कुल 77 हजार 100 रिक्त पदों पर भर्ती प्रस्तावित
17 उपखंड मुख्यालयों में नये राजकीय महाविद्यालय
कोटा मुख्यालय पर नवीन कृषि महाविद्यालय तथा अलवर जिले के नौगांवा कृषि अनुसंधान केन्द्र के परिसर में कृषि महाविद्यालय
राजकीय कन्या महाविद्यालय चित्तौड़गढ़, रतनगढ़-चूरू, गुढ़ा गौड़जी (उदयपुरवाटी) झुंझुनू, औसियां-जोधपुर एवं शिवगंज- सिरोही के महाविद्यालयों को PG महाविद्यालयों में क्रमोन्नत
राजकीय महाविद्यालयों में self financing scheme के तहत संचालित UG एवं PG के 64 विषयों के पाठ्यक्रमों को ेstate financing में परिवर्तित करने हेतु 11 करोड़ 41 लाख का प्रावधान
50 राजकीय महाविद्यालयों में उद्यमिता एवं कौशल विकास के पाठ्यक्रम प्रारंभ कर 3 करोड़ का प्रावधान से प्रतिवर्ष 12 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित
राजकीय महाविद्यालय निम्बाहेड़ा-चित्तौड़गढ़ में विज्ञान विषय, तारानगर-चूरू में इतिहास व समाज शास्त्रा विषय एवं टोडारायसिंह-टोंक में कला संकाय के नये विषय खोलना
जोधपुर, बीकानेर और झालावाड़ में कुल 6 करोड़ रुपये की लागत से 3 फेबलैब की स्थापना
UPSC, RPSC एवं Rajasthan Subordinate and Ministerial Services Selection Board द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार में उपस्थिति हेतु प्रत्याशियों को RSRTC की बस में निःशुल्क यात्रा सुविधा
समस्त राजकीय महाविद्यालयों में निःशुल्क wi-fi सुविधा
आदर्श मदरसा योजना के तहत पंजीकृत ‘ए‘ श्रेणी के 500 मदरसों का चयन कर मदरसों के आधुनिकीकरण पर 25 करोड़ 18 लाख का प्रावधान
कौशल, रोजगार एवं युवा :
‘कौशल प्रशिक्षण योजना‘ के तहत Entrepreneurship Development के उद्देश्य से 15 करोड़ का प्रावधान
29 जिलों के रोजगार कार्यालयों को Model Career Centre के लिए 45 करोड़ का प्रावधान
24 राजकीय ITI में महिला विंग खोलकर 12 व्यवसायों में तकनीकी प्रशिक्षण हेतु 23 करोड़ का प्रावधान
राजकीय ITI में संचालित Self Financing Units को नियमित प्रशिक्षण योजना में परिवर्तित करने पर 28 करोड़ का प्रावधान
प्रदेश में 8 नयी ITIs
22 करोड़ की लागत से सभी जिला मुख्यालयों पर स्थित राजकीय ITI, आयुक्तालय जयपुर एवं निदेशालय जोधपुर में ैSmart Class Room
राजकीय ITI में परंपरागत परीक्षा प्रणाली के स्थान पर online परीक्षा आयोजित करवाना
युवा तेज गेंदबाज श्री कमलेश नागरकोटी को 25 लाख दिये जाने एवं प्रतिभावान युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु Youth Icon Scheme
31 करोड की लागत से झुंझुनू में राज्य क्रीडा संस्थान में समस्त outdoor व indoor आधारभूत खेल सुविधाओं का विकास
जगतपुरा, जयपुर स्थित शूटिंग रेंज के लिए electronic targets क्रय हेतु 5 करोड़ का प्रावधान
SMS जयपुर के निर्माणाधीन खेल-भवन की साज-सज्जा (furnishing) हेतु 3 करोड़, indoor stadium के upgradation के लिए 2 करोड़ और Swimming Pool लिए 1 करोड़ 50 लाख का प्रावधान

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक पिछड़ा वर्ग कल्याण :
‘राजस्थान अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम‘ द्वारा `2 लाख तक के बकाया ऋण एवं ब्याज को माफ किये जाने की घोषणा-`114 करोड़ का भार ।
प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्रा में एक-एक अंबेडकर भवन बनाये जाने की घोषणा-80 करोड़ की लागत से।
छोटे कामगारों-केश कलाकार, कुम्हार, मोची, बढ़ई, रिक्शावाला और plumbers आदि को `2 लाख के ब्याजमुक्त ऋण की घोषणा।
‘भैरोंसिंह शेखावत अंत्योदय स्वरोजगार योजना‘ की घोषणा, इस योजना मे 50 हजार परिवारों को `50 हजार तक का ऋण 4 प्रतिशत ब्याज पर बिना रहन उपलब्ध करवाया जायेगा।
जनजाति उपयोजना क्षेत्रा के 1 लाख 70 हजार 660 किसानों को सोलर लैंप दिये जाने की घोषणा ।
जनजाति उपयोजना क्षेत्रा में सहरिया एवं कथोड़ी जाति के परिवारों को उपलब्ध सुविधायें अब खैरवा जाति के परिवारों को भी उपलब्ध करवाये जाने की घोषणा।
जनजाति उपयोजना क्षेत्रा के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही तथा बारां जिले की किशनगंज एवं शाहबाद तहसीलों के जनजाति, गैर-जनजाति बीपीएल एवं अन्त्योदय परिवार के किसानों को 8 लाख बीज मिनिकिट्स का निःशुल्क वितरण- `14 करोड़ का व्यय।
1 हजार नवीन माँ-बाड़ी केन्द्र मय गैस कनेक्शन प्रारंभ करने की घोषणा- प्रतिवर्ष `36 करोड़ व्यय कर 30 हजार बच्चों को लाभान्वित किया जायेगा।
देवनारायण योजना में 10 नवीन आवासीय विद्यालयों तथा एक छात्रावास का निर्माण करवाये जाने की घोषणा
राज्य में आर्थिक पिछड़ा वर्ग के कल्याण हेतु निम्न घोषणायेंः-
‘सुन्दर सिंह भण्डारी EBC स्वरोजगार योजना‘ में 50 हजार परिवारों को `50 हजार तक का ऋण 4 प्रतिशत ब्याज पर बिना रहन उपलब्ध करवाया जायेगा।
दसवीं बोर्ड की परीक्षा मे 85 प्रतिशत से अधिक लाने वाली कुल 200 छात्राओं को और 12वीं की विज्ञान, कला, वाणिज्य परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाली प्रत्येक संवर्ग की 200-200 छात्राओं (कुल 600) को स्कूटी।
अनुप्रति योजना के अंतर्गत अंतिम परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर लाभ
प्री-मैट्रिक एवं उत्तर-मैट्रिक छात्रावृत्ति योजना का लाभ – 273 करोड़ 50 लाख का व्यय
सामाजिक सुरक्षा :
भामाशाह कार्डधारक NFSA परिवारों के सदस्यों का `1 लाख तक का दुर्घटना बीमा करते हुए भामाशाह सुरक्षा कवच प्रदान करने की घोषणा-4 करोड़ 50 लाख लोग लाभान्वित।
दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु ‘दिव्यांग कोष‘ के गठन-`1 करोड़ का प्रावधान।
प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्राओं के लिए डूंगरपुर, प्रतापगढ़ एवं बांसवाड़ा में बहुद्देश्यीय छात्रावास की स्थापना पर `12 करोड़ का व्यय ।
गोबिन्द गुरू जनजाति विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा में दो छात्रावासों का निर्माण-`8 करोड़ का व्यय ।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले :
उचित मूल्य दुकानों पर 1 हजार नवीन अन्नपूर्णा भंडार की स्थापना
राशन डीलर्स को देय dealers commission को 70 रूपये से बढ़ाकर, POS मशीन पर प्रति क्विंटल देय 17 रूपये सहित 125 रूपये प्रति क्विंटल
NFSA की समावेशन सूची में पात्रा होने पर सात नई श्रेणियां खाद्य सुरक्षा कवर में शामिल
कर्मचारी कल्याण :
महिला कर्मचारियों हेतु अधिकतम 2 वर्ष की child care leave का प्रावधान।
1 अप्रेल 2018 से सातवें वेतन आयोग की ंarrear की राशि का भुगतान प्रारंभ।
शिक्षा विभाग में 77 हजार 100, गृह विभाग में 5 हजार 718, प्रशासनिक सुधार विभाग में 11 हजार 930 एवं स्वास्थ्य विभाग में 6 हजार 571 पदों सहित कुल 1 लाख 8 हजार पदों के लिए भर्तियां की जायेंगी।
75 हजार पदों के लिए नयी विज्ञप्तियां जारी की जायेंगी।
बतौर पारिवारिक पेंशनर विधवा महिला की नियुक्ति पर उसे पारिवारिक पेंशन पर महंगाई राहत (Dearness Relief) देय ।
खनन :
आगामी वर्षों में `12 हजार 500 करोड़ के निवेश से खनिज तेल का उत्पादन 2 लाख बैरल प्रतिदिन किये जाने की योजना।
जैसलमेर बेसिन में गैस की अतिरिक्त उपलब्धता के समुचित उपयोग हेतु आगामी वर्षों में 150 कुएँ खोदे जाने की योजना।
खनन प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधायें प्रदान करने के लिए District Mineral Foundation Trust द्वारा `1 हजार करोड़ का व्यय ।
खातेदारी भूमि में 4 हेक्टर क्षेत्राफल तक के अप्रधान खनिज की खनिज रियायतें राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम राशि तय कर सम्बन्धित खातेदार को आवंटित की जायेंगी।
बजरी खनन हेतु बड़े आकार के स्थान पर छोटे आकार के खनन पट्टे नीलामी द्वारा दिये जायेगें जिससे आमजन को सस्ती दरों पर सुगमता से बजरी उपलब्ध हो सकेगी।
प्रदेश में जीरो वेस्ट खनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खनिजों के मलबे/ओवरबर्डन पर लगने वाले 10 रूपये प्रतिटन के विशेष परमिट शुल्क को समाप्त किया जायेगा।
मकराना के बोरावड़ क्षेत्रा के कुमारी पत्थर के मार्बल खण्डे जिनका उपयोग चुनाई पत्थर के रूप में होता है, पर लगने वाली रॉयल्टी को समाप्त किया जायेगा।
शहरी विकास :
समस्त नगरपालिका क्षेत्रों में सड़कों-नालियों की maintenance एवं renewal सहित अंबेडकर भवनों के निर्माण, बरसाती पानी के निकास की व्यवस्थाए श्मशान एवं कब्रिस्तान के विकास तथा सार्वजनिक शौचालयों के लिए `1 हजार करोड़ के प्रावधान की घोषणा
‘अन्नपूर्णा रसोई योजना‘ हेतु `340 करोड़ का प्रावधान, 500 अंदे मार्च 2018 तक क्रियाशील हो जायेंगी।
अन्नपूर्णा रसोई योजना का विस्तार करते हुए प्रत्येक जिला कलक्टर कार्यालय परिसर में ऐसी सुविधा उपलब्ध करवाये जाने की घोषणा, चाय एवं शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध करवाया जायेगा।
जयपुर में 40 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाये जाने की घोषणा-`72 करोड़ की लागत।
द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट में स्मार्ट कोरिडोर को विकसित करने की घोषणाँ- `50 करोड़ का व्यय ।
कोटा शहर में aerodrome circle पर flyover के निर्माण पर-`150 करोड़ का व्यय ।
बीकानेर में 2 हजार 500 EWS एवं LIG के फ्लेट्स उपलब्ध करवाया जाना-`110 करोड़ की लागत।
राजस्थान आवासन मंडल द्वारा जनसहभागिता के माध्यम से 16 हजार आवासों का निर्माण ।
अजमेर पुष्कर के बीच वैकल्पिक tunnel का निर्माण-`55 करोड़ की लागत।
‘‘सबको आवास’’ का सपना पूरा करने के लिये मुख्यमंत्रा जन आवास योजना के तहत कमजोर आय वर्ग तथा अल्प आय वर्ग श्रेणी के व्यक्तियों के पक्ष में आवंटित आवासीय यूनिटों के दस्तावेजों पर स्टाम्प ड्यूटी क्रमशः 2 प्रतिशत तथा 3.5 प्रतिशत को घटाकर 1 प्रतिशत और 2 प्रतिशत की जायेगी। इस योजना के तहत निष्पादित विक्रय इकरानामों के दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क 0.25 प्रतिशत एवं अधिकतम 10 हजार रूपये से घटाकर एक हजार रूपये किया जायेगा।
गरीब परिवारों की सहायता के उद्देश्य से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के व्यक्तियों के पक्ष में स्थानीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों द्वारा निःशुल्क या टोकन मनी के बदले जारी पट्टों पर स्टाम्प ड्यूटी में रियायत दी जायेगी।
नगरीय निकाय/प्राधिकरणों/नगर सुधार न्यासों एवं आवासन मण्डल के लीज होल्डर्स द्वारा पूर्व की समस्त बकाया वार्षिक लीज राशि दिनांक 31.12.2018 तक एक मुश्त जमा कराये जाने पर बकाया लीज राशि के ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दी जायेगी।
विकास प्राधिकरणों/नगर विकास न्यासों/राजस्थान आवासन मण्डल द्वारा दिनांक 01.01.2001 से आवंटित ई.डब्लू.एस./एस.आई.जी. आवासों की बकाया किश्तों की राशि आवंटियों द्वारा दिनांक 31 दिसम्बर, 2018 तक एक मुश्त जमा करने पर ब्याज तथा शास्ति में शत्-प्रतिशत की छूट दी जायेगी।
नगरीय निकायों की तरफ बकाया नगरीय विकास कर की राशि एकमुश्त जमा कराये जाने पर बकाया नगरीय विकास कर की शास्ति व ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दी जायेगी। यह छूट दिनांक 01.04.2018 से 31 दिसम्बर, 2018 तक प्रभावी रहेगी।
राजस्व एवं सैनिक कल्याण :
2 हजार पटवारियों की भर्ती करने की घोषणा ।
अर्थूना-बांसवाड़ा, कानोड़-उदयपुर तथा रायपुर-झालावाड़ में नये तहसील कार्यालय खोलने, उपतहसील डग-झालावाड़ तथा पावटा-जयपुर को तहसील में क्रमोन्नत करने तथा कुड़ी भक्तासनी-जोधपुर एवं खेजरोली-जयपुर में नयी उपतहसील खोलने की घोषणा
शहीद सैनिकों के आश्रितों को नकद राशि `20 लाख से बढ़ाकर, मैं `25 लाख करने की घोषणा
राज्य में शहीद स्मारक नहीं बने हुए हैं उन सभी जिला मुख्यालयों पर शहीद स्मारक बनाने की घोषणा -`20 लाख की लागत
गृहः
पुलिसकर्मियों का मासिक मैस भत्ता बढ़ाते हुए कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल का `1 हजार 600 से बढ़ाकर `2 हजार प्रतिमाह तथा सहायक उपनिरीक्षक, उपनिरीक्षक, निरीक्षक का `1 हजार 750 से बढ़ाकर `2 हजार करने की घोषणा
पुलिस फोर्स को 210 नये वाहनों की खरीद के लिए `7 करोड़ 10 लाख
नयी मेवाड़ भील कोर बटालियन के लिए 1 हजार 161 कांस्टेबल्स की भर्ती एवं स्थापना पर `110 करोड़ 73 लाख का व्यय
जयपुर में ‘The Sardar Patel Global Centre for Security, Counter Terrorism and Anti-insurgency’ की स्थापना-`91 करोड़ 66 लाख का व्यय
विधि एवं न्याय :
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर में `10 करोड़ 81 लाख की लागत से Alternate Dispute Resolution (ADR) सेंटर का नवीन भवन बनाया जायेगा।
वर्ष 2018-19 में 35 नवीन न्यायालय खोले जायेंगे।
पर्यटन, कला एवं संस्कृति :
कोटा, भीलवाड़ा, अजमेर, झालावाड़, बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर, चूरू, बीकानेर, बारां, उदयपुर एवं भरतपुर में 19 स्मारकों के संरक्षण एवं पुनरूद्धार कार्य -`33 करोड़ 25 लाख का व्यय
आमेर, जयपुर को Iconic Tourism Destination बनाने हेतु `20 करोड़ का व्यय
माही बांध परिक्षेत्रा में `10 करोड़ की लागत से 100 islands क्षेत्रा का विकास
राज्य में स्थित राष्ट्रीय राजमार्गों पर `3 करोड़ की लागत से पर्यटकों की सुविधार्थ अंतरराष्ट्रीय मानकों के शौचालय बनाये जायेंगे।
पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का विकास करने के लिए `2 करोड़ का प्रावधान
विजवा माता मंदिर, डूंगरपुर, लोहार्गल तीर्थ, झुंझुनू और मुरली मनोहर मंदिर तथा रघुनाथ मंदिर रतनगढ़, चूरू के विकास हेतु `10 करोड़ का प्रावधान
नये 6 पैनोरमा-अलवर में राजा भर्तृहरि, भीलवाड़ा के मालासेरी में भगवान देवनारायण, राजसमंद में महाराणा कुंभा माल्यावास मदारिया, सीकर में भक्त शिरोमणी करमेती बाई खण्डेला, अजमेर में श्री सैन महाराज, पुष्कर एवं चित्तौड़गढ़ में भगवान श्री परशुराम, मातृकुण्डिया की घोषणा-`10 करोड़ का प्रावधान
जनजाति स्वतंत्राता संग्राम संग्रहालय, मानगढ़धाम के लिए इस वर्ष `7 करोड़ की स्वीकृति
मंदिर माफी से जुड़े हुए विभिन्न विषयों एवं समस्याओं के समाधान हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किये जाने की घोषणा
वन एवं पर्यावरण :
जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण हेतु Project for Development of Water Catchment through Greening of Rajasthan की घोषणा-`151 करोड़ की लागत
कोटड़ा, सलूंबर एवं गोगुन्दा में वन उपज मंडी यार्ड खोलने की घोषणा
Forester के 500 एवं Forest Guard के 2 हजार रिक्त पदों के विरूद्ध भर्ती किये जाने की घोषणा
औद्योगिक क्षेत्रों में effluent की समस्या पर प्रभावी नियंत्राण के लिए ‘Pollution Control and Management System’ को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जायेगा।
विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में CETPs के upgradation एवं भविष्य में स्थापित होने वाले CETPs के लिए `100 करोड़ का एक corpus fund बनाया जायेगा।
26 जिलों में `60 करोड़ की लागत से Continuous Ambient Air Quality Monitoring Stations की स्थापना की घोषणा
पत्राकार कल्याणः
फोटो जर्नलिस्ट एंव न्यूज कैमरामैन के निजी उपकरणों के लिए बीमा योजना लागू की जायेगी।
ऐसे पत्राकार जिनके पास पूर्व में अपने अथवा परिवार के नाम पर सरकारी योजना में भूखंड अथवा आवास आवंटित नहीं हैं उन्हें मकान बनाने के लिए अधिकतम `25 लाख तक के ऋण पर ब्याज अनुदान
असाध्य रोग से ग्रसित होने पर पत्राकारों एवं साहित्यकारों के आश्रितों को भी पत्राकार एवं साहित्यकार कल्याण कोष से `1 लाख तक की आर्थिक सहायता

सूचना प्रौद्योगिकी :
ग्रामीण क्षेत्रों में 1 हजार और Bhamashah ATM स्थापित की जायेगी।
शहरी क्षेत्रों के लिए 2 हजार 500 ई-मित्रा प्लस स्थापित किये जायेंगे।
building plan proposal को 3D Building Infrastructure Model (BIM) based किया जाकर 4 Smart Cities -जयपुर, उदयपुर, अजमेर तथा कोटा में लागू किया जायेगा।
आम जनता को घर बैठे ही ऑनलाईन पंजीयन हेतु दस्तावेज प्रस्तुतीकरण की व्यवस्था को 518 उप-पंजीयक कार्यालयों में चरणबद्ध रूप से लागू किया जायेगा।
100 तहसीलों में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के ई-पंजीयन सॉफ्टवेयर का राजस्व विभाग के ई-धरती सोफ्टवेयर से इन्टीग्रेशन कर पंजीकृत दस्तावेज के ऑनलाईन भिजवाने की व्यवस्था की जायेगी ताकि राजस्व प्राधिकारी द्वारा शीध्र नामान्तरण की कार्यवाही की जा सकेगी।
लीज आदि के दस्तावेजों में नाम हस्तान्तरण की कार्यवाही शीध्र करने के लिये पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के ई-पंजीयन सोफ्टवेयर को स्वायत्त शासन विभाग एवं नगरीय विकास विभाग के स्मार्ट-राज सोफ्टवेयर से जोड़ा जायेगा।
आम जनता को पंजीकृत दस्तावेजों की प्रति ऑनलाईन प्राप्त करने में सहायता के क्रम में सितम्बर, 2012 से अगस्त, 2015 तक के दस्तावेजों की स्केनिंग एवं इन्डेक्सिंग का कार्य किया जायेगा। हम वर्ष 2017-18 में सितम्बर, 2015 से अगस्त, 2017 तक के दस्तावेजों की स्केनिंग एवं इन्डेक्सिंग का कार्य पूर्ण करने की प्रक्रिया में है।
कलक्टर (मुदं्राक) द्वारा पारित निर्णयों की प्रतियां ऑनलाईन उपलब्ध करायी जायेगी।
राज्य में शेष बचे 34 उप पंजीयक कार्यालयों को भी ई-स्टाम्प से जोड़ा जायेगा।
सरलीकरण एवं सुविधाऐं :
कम्पनी अधिनियम 1956 के वर्तमान प्रावधानों के स्थान पर कम्पनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार अमलगमेशन /डीमर्जर के आदेशों के संबंध में कन्वेंस की परिभाषा में तद्नुसार संशोधन किया जायेगा।
रियायती करार तथा भागीदारी से संबंधित दस्तावेजों की परिभाषाओं को सरलीकृत कर स्टाम्प ड्यूटी की दरों को तर्कसंगत किया जायेगा।
जिन जिलों में उपमहानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक के कार्यालय स्थापित है उन जिलों में पंजीयन से संबंधित मामलों को सुनने की जिला पंजीयक की शक्तियां उपमहानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक को दी जायेगी ताकि लम्बित मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके।
अपंजीकृत दस्तावेजों पर मुद्रांक शुल्क संग्रहण हेतु विभागों, स्थानीय निकायों, राजकीय उपक्रमों एवं बैकिंग एवं नान-बैंकिग संस्थानों को अधिकार दिये जायेगे।
वैट सम्बन्धी मुद्दे :
व्यवाहारियों की कठिनाईयों को देखते हुये वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 के रिटर्न फॉर्म वैट-10, वैट-11 एवं वैट-10ए को प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31.03.2018 तक बढ़ाई गई है।
वैट व्यवस्था के शेष रहे आगत कर मिसमैच के प्रकरणों के त्वरित निष्पादन हेतु सरलीकृत सत्यापन मापदण्डों के अनुसार कैम्प आयोजित किये जायेंगे।
वर्ष 2015 से 2017 तक वैट, प्रवेश कर, मनोरंजन कर, विलासिता कर एवं मोटरयानों पर प्रवेश कर से सम्बन्धित मांग राशियों के निष्पादन हेतु विभिन्न एमनेस्टी योजनाओं में लगभग दो लाख प्रकरणों का निष्पादन किया गया है।
जीएसटी लागू होने पर निरसित अधिनियमों से संबंधित बकाया मांग के प्रकरणों के निस्तारण के लिये संबंधित अधिनियमों में अपेक्षित संशोधन होने पर एमनेस्टी योजना लायी जायेगी।
जी.एस.टी. के अन्तर्गत कर दरों में कमी
राज्य सरकार द्वारा जी.एस.टी. काउन्सिल में किये गये प्रयासों के परिणाम स्वरूप राज्य के कुछ महत्वपूर्ण व्यापार क्षेत्रा जैसे कि मार्बल तथा ग्रेनाईट, जैम्स तथा ज्वैलरी, हैण्डीक्राफ्ट, टैक्सटाईल, होटल/ पर्यटन, कृषि इत्यादि से संबंधित वस्तुओं पर कर दरों में कमी की गयी है। उदाहरण स्वरूप मार्बल एवं ग्रेनाईट के स्लेब तथा टाइल्स पर कर दर में 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत, Precious Stones (worked) पर कर दर में 3 प्रतिशत से 0.25 प्रतिशत, उपचारित मूंगा (worked coral) पर कर दर में 28 प्रतिशत से 5 प्रतिशत, सिन्थेटिक यार्न पर कर दर में 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत, स्प्रिंक्लर एवं बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति तथा इससे सम्बन्धित नोजल पर कर दर में 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत, टै्रक्टर पार्ट्स पर कर दर में 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत, रासायनिक खाद पर कर दर में 12 प्रतिशत से 5 प्रतिशत, 5000 रुपये से 7500 रूपये तक के किराये वाले होटल कमरों की कर दर में 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत, हेण्डीक्राफ्ट तथा टैक्सटाईल से संबंधित जॉब वर्क पर कर दर में 18 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक कमी की गयी है।
राज्य सरकार के प्रयासों पर जी.एस.टी. काउन्सिल द्वारा कुछ वस्तुएं जैसे कि ‘‘कोन में मेंहदी पेस्ट’’ की कर दर को स्पष्ट करते हुये 5 प्रतिशत जी.एस.टी. कर दर अधिसूचित की गयी है।
इसी प्रकार मुख्यमंत्रा जन आवास योजना जैसी अफॉर्डेबल आवासीय योजनाओं के मामलों में भूमि के मूल्य के संबंध में अस्पष्टता थी। जी.एस.टी. काउन्सिल द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की सभी योजनाओं के लिये, उपयोग में आने वाली भूमि के मूल्य हेतु 1/3 छूट प्रदान करते हुए, प्रभावी कर दर को 8 प्रतिशत माना गया है।
राज्य सरकार द्वारा कोटा स्टोन टाईल्स तथा मार्बल से बनी देवी-देवताओं की मूर्तियों पर ळैज् कर दर में कमी हेतु प्रयास किये जा रहे हैं।
जी.एस.टी. कानून तथा नियमों में संशोधन
कम्पोजिशन का विकल्प लेने वाले करदाताओं के लिए टर्नओवर सीमा को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है तथा जी.एस.टी. काउन्सिल द्वारा, विधि में संशोधन पश्चात् यह टर्नओवर सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करने का निर्णय किया गया है। इससे राज्य के सूक्ष्म एवं लघु क्षेत्रा को अत्यधिक लाभ होगा।
रूपये 1.5 करोड़ से कम टर्नओवर वाले करदाताओं के लिये रिटर्न को त्रौमासिक आधार पर प्रस्तुत करने की सुविधा प्रदान की गई है जिससे छोटे व्यवहारियों को रिटर्न फाईलिंग में आसानी होगी।
रिटर्न प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ाई गयी है तथा प्रारम्भिक दौर में जी.एस.टी. की नयी प्रणाली को देखते हुये विलम्ब से रिटर्न प्रस्तुत करने पर आरोपणिय विलम्ब शुल्क तथा शास्ति में छूट प्रदान की गयी है।
व्यवहारियों को जीएसटीएन पर रिटर्न फाईलिंग, पंजीयन, परामर्श इत्यादि सुविधाऐं नाममात्रा दरों पर उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार ने तहसील स्तर तक 500 से अधिक जीएसटी-मित्रा केन्द्र स्थापित करके एक अभिनव प्रयास किया है। इन केन्द्रों के माध्यम से जीएसटी संबंधी उपरोक्त सेवाऐं 1 अप्रेल, 2018 से प्रदान की जायेगी।
कर प्रस्तावों में लगभग 650 करोड़ रुपये से अधिक की राहत दी गई है तथा कोई भी नया कर नहीं लगया गया है।