रविवार, 19 फ़रवरी 2017

उत्तर प्रदेश में भाजपा भव्य सरकार बनायेगी : नरेन्द्र मोदी


उत्तर प्रदेश में भाजपा भव्य सरकार बनायेगी  : नरेन्द्र मोदी
लखनऊ :  पीएम नरेंद्र मोदी ने आज फतेहपुर की विजय शंखनाद रैली में सूबे की सपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकारी खजाने से धन लुटाकर, टीवी अखबारों में छाने का प्रयास कर यूपी की सपा सरकार ने सोचा था कि लोगों की आंख में धूल झोंकेंगे. लेकिन जनता सब कुछ जानती है. पीएम मोदी ने अखिलेश यादव सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार की मंशा जनता को समझ में आती है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को पुरखों के नाम का सहारा लेना पड़ रहा है. राहुल गांधी और कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने 27 साल यूपी बेहाल का नारा दिया. उन्‍होंने गांव-गांव जाकर पाया कि कुछ हो नहीं पा रहा है. भारी प्रचार करने वालों को भी लगा पांच साल बीत गए जनता का विश्वास टूट गया. ऐसे में दोनों ने एक दूसरे का हाथ थामा ताकि डूबने से बच जाएं.

पहले ही दिन रथ पर जब दोनों निकले तो रास्तों पर तार मिले. तारों के बीच में कांग्रेस उपाध्यक्ष डर रहे थे. वो झुक रहे थे. लेकिन अखिलेश जी नहीं डर रहे थे क्योंकि उन्हें पता था कि तार है बिजली नहीं है. पीएम मोदी ने कहा कि सपा पहले कहती थी कि किसी से समझौता नहीं होगा. 2/3 बहुमत से जीतेंगे. फिर दोनों लोग मिल गए और फिर कहने लगे कि बहुमत मिल जाएगा. लेकिन आज मतदान के बाद अखिलेश यादव का चेहरा लटका हुआ था. आवाज में दम नहीं था. डरे हुए थे, शब्द खोज रहे थे. लगा जैसे बाजी हार चुके हैं. आज कहने लगे हमारी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी.

पीएम मोदी ने कहा कि अभी तो तीसरा चरण पूरा नहीं हुआ और हौसले पस्त हो गए. पीएम मोदी ने कहा कि जनता से धोखा देश बर्दाश्त नहीं करता है.

पीएम मोदी ने कहा कि मैंने कहा था कि सपा के राज में यूपी में थाने सपा का कार्यालय बन गए थे. क्योंकि पुलिस को मजबूर किया गया. पीएम मोदी ने कहा कि इस देश के सुप्रीम कोर्ट को यूपी को डांटना पड़ा कि गायत्री प्रजापति के खिलाफ एफआईआर लिखो. इस राज्य में थाने का यह हाल था, बलात्कार करने वालों को खुली छूट होगी. न्याय पाने के लिए बहु बेटी को सुप्रीम कोर्ट पहुंचना पड़े. क्या यही काम है. क्या ऐसे काम करने के लिए सपा सरकार बनाई गई थी. ये काम है कि कारनामा....

पीएम मोदी ने कहा कि अखिलेश यादव ने गायत्री प्रजापति के चुनाव प्रचार से प्रचार आरंभ किया. यूपी में आज सबसे ज्यादा अपराध और दंगे हो रहे हैं. यूपी में कानून व्यवस्था प्राथमिकता नहीं रह गई है.

पीएम मोदी ने कहा कि कानून व्यवस्था नहीं है तो ईमानदार, आम आदमी कैसे रहेगा. कैसे नौकरियां आएंगी, कैसे निवेश होगा. कैसे विकास होगा. लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाना ही पड़ेगा. सरकार गरीब के लिए होती है, दलित के लिए होती है, पीड़ित के लिए होती है, वंचित के लिए होती है. पीएम मोदी ने कहा कि हर आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी होती है सरकार.

पीएम मोदी ने कहा कि यहां पर मकान और जमीन पर गैरकानूनी कब्जा हो रहा है. गरीबों के जमीन मकान सुरक्षित नहीं हैं. लोगों के सपनों को लौटाना चाहते हैं. पीएम मोदी ने अपील की कि यूपी बीजेपी की सरकार को भारी बहुमत से विजयी बनाएं.

इसके साथ ही कहा कि गांव में अगर कब्रिस्तान बनता है तो शमशान भी बनना चाहिए. रमजान में बिजली मिलती है तो दिवाली पर भी बिजली मिलनी चाहिए. होली पर बिजली मिलती है तो ईद पर भी बिजली मिलनी चाहिए. जाति धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. ऊंच नीच नहीं होना चाहिए.

सरकार का काम है भेदभाव मुक्त शासन चलाना. धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. अन्याय की जड़ों में भेदभाव है. दलित से पूछो तो वो बोलते हैं कि पूरा फायदा ओबीसी ले ले रहा है, ओबीसी से पूछो तो वो कहते हैं कि यह फायदा यादव ले रहे हैं. बाकी सब मुसलमानों को चला जा रहा है.

इससे पहले उन्‍होंने भाषण देने से पहले मंच पर जिले के सभी प्रत्याशियों को एक कतार में खड़ा कर लोगों से उनका परिचय कराया. उन्‍होंने कहा कि रैली में उपस्थित भारी भीड़ को देखते हुए उन्‍होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि ये एक जिले की नहीं एक राज्य की रैली लग रही है. पीएम मोदी ने रैली में भीड़ देखकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी और अपना दल को विजय मिलेगी. पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव के दो चरण पूरे हो गए हैं. तीसरा चरण चल रहा है. मतदाताओं में काफी उत्साह है. नई उम्मीद दिखाई दे रहे हैं. पहले दो चरण के संकेत बताते हैं कि बीजेपी भारी बहुमत से उत्तर प्रदेश में विकास की गंगा बहाएगी.

बता दें कि फतेहपुर जिले में छह विधानसभा सीटें हैं. इनमें फतेहपुर सदर, हुसेनगंज, अयाह शाह, खागा (सुरक्षित), बिंदकी तथा जहानाबाद शामिल हैं. 2012 के चुनावों में फतेहपुर सदर विधानसभा सीट पर सपा के सईद कासिम हसन, हुसेनगंज सीट पर बसपा के मो. आसिफ, अयाह शाह विधानसभा सीट पर बसपा के अयाध्योध्या पाल, बिंदकी  सीट पर बसपा विधायक सुखदेव प्रसाद वर्मा, जहानाबाद पर सपा के मदनगोपाल तथा खागा सुरक्षित विधानसभा सीट पर भाजपा की कृष्णा पासवान ने जीत दर्ज की थी.


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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में आयोजित विजय शंखनाद रैली में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
आगामी 11 मार्च को उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की भव्य सरकार बनेगी और भाजपा यूपी में विकास की गंगा बहाएगी: नरेन्द्र मोदी
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उत्तर प्रदेश पूरे चौदह सालों से विकास का वनवास भुगत रहा है, अब हमें यह वनवास खत्म करना है: नरेन्द्र मोदी
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मेरा एक ही मंत्र है - किसी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और मैं ‘सबका साथ, सबका विकास' के इसी मंत्र के साथ काम कर रहा हूँ: नरेन्द्र मोदी
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पहले अखिलेश दावा कर रहे थे कि अकेले बहुमत हासिल कर लेंगें, फिर कहने लगे कि कांग्रेस के साथ गठबंधन से 300 सीटें जीतेंगे, आज कह रहे हैं कि हमारी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी, अभी तो तीसरे चरण का मतदान भी पूरा नहीं हुआ है लेकिन हौसले कैसे पस्त हो गए: नरेन्द्र मोदी
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अखिलेश सरकार में बलात्कार पीड़िता नाबालिग बच्ची और उसकी माँ को न्याय पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, ये अखिलेश का काम या कारनामा? न्याय के लिए यदि सुप्रीम कोर्ट को बीच में आना पड़े तो आपने कौन सा काम किया अखिलेश जी: नरेन्द्र मोदी
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सपा और कांग्रेस का गठबंधन डूबता जहाज़ है, दोनों डूबते दलों ने डूबने से बचने के लिए एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया है: नरेन्द्र मोदी
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डॉ राम मनोहर लोहिया जिंदगी भर सिद्धांतों से समझौता न करते हुए कांग्रेस का विरोध करते रहे, आज अखिलेश जी ने उन्हीं लोहिया जी और जयप्रकाश नारायण जी के सिद्धांतों को तिलांजलि देकर कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है: नरेन्द्र मोदी
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उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर पहली ही कैबिनेट मीटिंग में राज्य के सभी लघु एवं सीमान्त किसानों के ऋण माफ़ कर दिए जायेगें और किसानों का ऋण माफ़ करने की ये जिम्मेवारी मेरी है: नरेन्द्र मोदी
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आज शिवाजी महाराज की जयंती है, शिवाजी सदियों से देश के प्रेरणा स्रोत रहे हैं, हम शिवाजी बनें न बनें पर सेवाजी ज़रूर बनें, शिवाजी के सपने को सेवा के माध्यम से पूरा किया जा सकता है: नरेन्द्र मोदी
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में आयोजित विशाल विजय शंखनाद रैली को संबोधित किया और राज्य की जनता से यूपी के विकास के लिए भारतीय जनता पार्टी की दो-तिहाई बहुमत से लोक-कल्याणकारी सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पूरे चौदह सालों से विकास का वनवास भुगत रहा है, अब हमें यह वनवास खत्म करना है। उन्होंने कहा कि आज शिवाजी महाराज की जयंती है, शिवाजी सदियों से देश के प्रेरणा स्रोत रहे हैं, हम शिवाजी बनें न बनें पर सेवाजी ज़रूर बनें, शिवाजी के सपने को सेवा के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले दो चरणों में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं और मतदाताओं में विकास की नई आशाओं का संचार हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सपा सरकार ने सोचा कि सरकारी खजाने से धन लुटाकर प्रचार में पैसा खर्च करके टीवी-अखबारों में छाये रहने से यूपी के लोगों की आँखों में ऐसी धूल झोंकेंगें कि लोग कुछ और देख ही नहीं पायेंगे लेकिन ये जनता है, सब कुछ जानती है, जनता बड़ी आसानी से दूध का दूध और पानी का पानी कर देती है। उन्होंने कहा कि देश गलतियों को तो माफ कर देता है, लेकिन प्रजा के साथ धोखा, ये कभी माफ नहीं करता है। उन्होंने कहा कि आज मतदान करने के बाद अखिलेश की आवाज में वो दम नहीं था, उनके चेहरे लटके हुए थे, बड़ी मुश्किल से आवाज निकली। उन्होंने कहा कि चुनाव के शुरू होने से पहले अखिलेश दावा कर रहे थे कि अकेले बहुमत हासिल कर लेंगें, फिर कहने लगे कि कांग्रेस से समझौता किया, अब 300 सीटें जीतेंगे, और आज कह रहे हैं कि हमारी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी, क्या हुआ, हौसले कैसे पस्त हो गए, अभी उत्तर प्रदेश के चुनाव का तीसरा चरण भी पूरा नहीं हुआ है लेकिन अखिलेश के हौसले पस्त हो गए हैं।



अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए श्री मोदी ने कहा कि अखिलेश सरकार में बलात्कार पीड़िता नाबालिग बच्ची और उसकी माँ को न्याय पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, ये अखिलेश का काम या कारनामा? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगानी पड़ी अखिलेश के मंत्री गायत्री प्रजापति पर एफआईआर दर्ज करने के लिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट को बीच में आना पड़ता हो, उस प्रदेश में कौन सा काम किया अखिलेश जी, आपने। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने गायत्री प्रजापति के क्षेत्र से चुनाव प्रचार शुरू किया, मैं अखिलेश जी से पूछना चाहता हूँ कि क्या सपा-कांग्रेस गठबंधन गायत्री प्रजापति जितना ही पवित्र गठबंधन है? उन्होंने कहा कि सपा के कार्यकाल में पुलिस थाने सपा के कार्यालय में बदल गए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन्होंने तेज धूप नहीं देखी, रात में गांव कैसा होता है नहीं देखा, सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए थे जो लोग, वे ‘27 साल यूपी बदहाल’ का नारा लेकर गाँव-गाँव गए लेकिन जनता ने नकार दिया तब सपा और कांग्रेस ने सोचा कि डूब तो दोनों रहे हैं तो क्यों न हाथ पकड़ लें, शायद बच जाएँ। उन्होंने कहा कि जब दोनों ने हाथ पकड़े तो पहले दिन ही उन्हें यह पता चल गया कि रास्ता बड़ा कठिन है, पहले दिन रथ पर निकले तो तार लटके हुए थे रास्ते में, तो अखिलेश जी के दूसरे साथी डर रहे थे कि कहीं करंट न लग जाए लेकिन अखिलेश जी नहीं डर रहे थे क्योंकि उन्हें पता था कि तार तो है पर बिजली कहाँ है! उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस का गठबंधन डूबता जहाज़ है, दोनों डूबते दलों ने डूबने से बचने के लिए एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया है। उन्होंने कहा कि डॉ राम मनोहर लोहिया जिंदगी भर सिद्धांतों से समझौता न करते हुए कांग्रेस का विरोध करते रहे, आज अखिलेश जी ने उन्हीं लोहिया जी और जयप्रकाश नारायण जी के सिद्धांतों को तिलांजलि देकर हार की डर से कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है। उन्होंने कहा कि यूपी की जनता कभी इस गठबंधन को माफ़ नहीं करेगी क्योंकि अखिलेश ने लोहिया जी का अपमान किया है।

श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर पहली ही कैबिनेट मीटिंग में राज्य के सभी लघु एवं सीमान्त किसानों के ऋण माफ़ कर दिए जायेगें और किसानों का ऋण माफ़ करने की ये जिम्मेवारी मेरी है। उन्होंने कहा कि यदि यूपी में भाजपा की सरकार बनती है तो जिस-जिस की जमीन छीनी गई है, उसे उसकी जमीन लौटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार बनने पर वर्ग तीन और वर्ग चार की नौकरियों में से इंटरव्यू को ख़त्म कर दिया जाएगा और मेरिट के आधार पर नौकरी दी जायेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार गरीबों की सरकार होगी। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के लिए होती हैं लेकिन आज दलित, शोषित, पीड़ित और गरीब सबसे ज्यादा जुल्म का शिकार हो रहे हैं, और सपा की अखिलेश सरकार इसकी कोई सुध नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि यूपी में न तो नौजवानों को रोजगार मिल रहे हैं न ही उद्योग और कल-कारखाने लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैंने गरीबी को जिया है, इसलिए मैं गरीबी के दर्द को समझता हूँ, मुझे पता है कि गरीब माताओं को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में कितना कष्ट होता था। उन्होंने कहा कि हमने ढ़ाई साल में ही लगभग दो करोड़ गरीब माताओं के घरों में गैस सिलिंडर को पहुंचाने का प्रबंध किया है, पांच सालों में मैंने पांच करोड़ गरीब माँओं के घरों तक गैस कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, काम ऐसे बोलता है। उन्होंने कहा कि हमने कम दाम पर LED बल्ब उपलब्ध कराने का काम किया, जिससे गरीब परिवारों का बिजली बिल बचा। उन्होंने कहा कि पहले देश में यूरिया का दाम कम नहीं होता था,लेकिन चौधरी चरण जी की सरकार के बाद पहली बार हमने यूरिया सहित कई उर्वरकों के दाम कम किये, इतना ही नहीं, यूरिया की नीम कोटिंग की जिससे इसकी कालाबाजारी बंद हुई और किसानों को आसानी से कम दाम पर यूरिया मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने महंगी दवाइयों के दाम को कम करने का काम किया। उन्होंने कहा कि मेरा एक ही मंत्र है कि किसी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और मैं ‘सबका साथ, सबका विकास' के इसी मंत्र के साथ आपसे आशीर्वाद लेने आया हूँ। उन्होंने कहा कि आगामी 11 मार्च को यूपी में भाजपा की भव्य सरकार बनेगी और भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में विकास की गंगा बहाएगी।

(महेंद्र पांडेय)
कार्यालय सचिव

देश का हित सर्वोपरि है : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी








एनडीए सरकार के लिए देश का हित सर्वोपरि है: प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी

February 07, 2017

Quote हमारा संघर्ष गरीबों के लिए है, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि गरीबों को उनका हक मिले: प्रधानमंत्री मोदी
Quote एनडीए सरकार के लिए राष्ट्र हित सर्वोपरि है: प्रधानमंत्री मोदी
Quote विमुद्रीकरण देश को काला धन और भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए है: प्रधानमंत्री
Quote योजनाओं की खामियों को दूर करने के लिए सरकार ने आवश्यक कदम उठाए हैं: प्रधानमंत्री
Quote सरकार ने लिकेज पर रोक लगाकर बिचौलियों से सालाना 49,500 करोड़ रुपये बचाए: प्रधानमंत्री
Quote डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए मनरेगा भुगतान की खामियों को दूर कर 7,633 करोड़ बचाए गए: प्रधानमंत्री
Quote कमल 1857 की पहली स्वाधिनता संग्राम का प्रतीक था और वो आज भी खिला हुआ है: प्रधानमंत्री

माननीय अध्‍यक्षा जी, राष्‍ट्रपति जी ने संसद के दोनों सत्रों को 2017 के प्रारंभ में ही सम्‍बोधित किया। भारत किस तेजी से बदल रहा है, देश की जनशक्ति का सामर्थ्‍य क्‍या है, गांव, गरीब किसान की जिंदगी किस प्रकार से बदल रही है, उसका एक विसतार से खाका सदन में रखा था। मैं राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्‍यवाद देने के लिए आपके सामने उपसिथत हुआ और मैं उनका हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

इस चर्चा में आदरणीय श्री मल्लिकार्जुन जी, तारिक अनवर जी, श्री जयप्रकाश नारायण जी, श्री तथागत जी, सतपति जी, कल्‍याण बनर्जी, ज्योतिर्दित्य सिंधिया और कई वरिष्‍ठ महानुभावों ने चर्चा को प्राणवान बनाया। कई पहलुओं को उजागर करने का प्रयास किया है। और मैं इसके लिए चर्चा में सरीक होने वाले सभी आदरणीय सदस्‍यों का आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रो में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति अपनी भावना व्‍यक्‍त करता हूं और केंद्र सरकार राज्‍य के पूरे संपर्क में है। स्थिति में कोई आवश्‍यकता है तो टीमें वहां पहुंच भी गई हैं। लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया! मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे? क्‍योंकि धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी।

आदरणीय अध्यक्षा जी, मैं सोच रहा था कि भूकंप आया क्‍यो, जब कोई Scam में भी सेवा का भाव देखता है, Scam में भी नम्रता का भव देखता है तो सिर्फ मां नहीं, धरती मां भी दुखी हो जाती है और तब जा करके भूकंप आता है।

और इसलिए राष्‍ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में जनशक्ति का ब्‍योरा दिया है। हम यह जानते है कोई भी व्‍यवस्‍था लोकतांत्रिक हो या अलोकतांत्रिक हो, जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। कल हमारे मल्लिकार्जुन जी कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है और आप प्रधानमंत्री बन पाए। वाह! क्‍या शेयर सुनाया है। बहुत बड़ी कृपा की आपने इस देश पर, लोकतंत्र बचाया! कितने महान लोग है आप, लेकिन अध्‍यक्षा जी, उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भलीभांति जानता है। पूरा लोकतंत्र एक परिवार को आहूत कर दिया गया है। और 75 का कालखंड माननीय अध्‍यक्षा जी 75 का कालखंड, जब देश पर आपताकल थोप दिया गया था, हिंदुस्‍तान को जेलखाना बना दिया गया था, देश के गणमान्‍य वरिष्‍ठ नेता जयप्रकाश बाबू समेत लाखों लोगों को जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया था। अखबारों पर ताले लगा दिए गए थे। और उन्‍हें अंदाजा नहीं था कि जनशक्ति क्‍या होती है, लोकतंत्र को कुचलने के बाद ढेर सारे प्रयासों के बावजूद भी इस देश की जनशक्ति का सामर्थ्‍य था कि लोकतंत्र पुन: स्‍थापित हुआ और उस जनशक्ति की ताकत है कि गरीब मां का बेटा भी इस देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। और इसलिए राष्‍ट्रपति जी ने जनशक्ति का उललेख करते हुए जो कहा है – चम्‍पारण सत्‍याग्रह शाताब्‍दी का वर्ष है। इतिहास सिर्फ किताबो की अटारी में पड़ा रहे, तो समाज जीवन को प्रेरणा नहीं देता है। हर युग में इतिहास को जानने का, इतिहास को जीने का प्रयास आवश्‍यक होता है। उसमें हम थे या नहीं थे, हमारे कुत्‍ते भी थे या नहीं थे, औरों के कुत्‍ते हो सकते हैं। हम कुत्‍तों वाली परंपरा से पले-बढ़े नहीं हैं। लेकिन देश के कोटि-कोटि लोग थे, जब कांग्रेस पार्टी का जन्‍म भी नहीं हुआ था। 1857 का स्‍वतंत्रता संग्राम इस देश के लोगों ने जान की बाजी लड़ा करके लड़ा था और सबने मिल करके लड़ा था। साम्‍प्रदाय की कोई भेद रेखा नहीं थी, और तब भी कमल था, आज भी कमल है।

यहां बहुत ऐसे लोग हैं जो मेरी तरह आजादी के बाद पैदा हुए हैं, और इसलिए हम में से बहुत लोग हैं जिनको आजादी की लड़ाई में सौभाग्‍य नहीं मिला, लेकिन देश के लिए जीने का तो सौभाग्‍य मिला है। और हम जीने की कोशिश कर रहे हैं।

माननीय अध्‍यक्षा जी, और इसलिए आपार जनशक्ति देश ने दर्शन किए हैं। लाल बहादुर शस्‍त्री जी उनकी अपनी एक गर‍िमा थी। युद्ध के दिन थे, हर हिन्‍दुस्‍तानी के दिल में भारत विजय के भाव से भरा हुआ माहौल था। और उस समय जब लाल बहादुर शस्‍त्री जी ने कहा था देश ने अन्‍न त्‍याग के लिए पहल की थी।

सरकार बनने के बाद आज के रानजीतिक वातावरण को हम जानते हैं। ज्‍यादातर राज व्‍यवस्‍था उन राजनेताओं ने, राज सरकारों ने, केंद्र सरकारों ने जन सामर्थ्‍य को करीब-करीब पहचानना छोड़ दिया है। और लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय भी रहता है। मुझ जैसे सामान्‍य वयक्ति ने बातों-बातों में कह दिया था कि जो afford कर सकते हैं, वो गेस की subsidy छोड़ दे। जब हम जनता से कट जाते हैं, जन-मन से कट जाते हैं, 2014 में हम चुनाव लड़ रहे थे, तो एक दल इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा था कि नौ सिलेंडर देंगे या 12 सिलेंडर देंगे। हमने आ करके 9 और 12 की चर्चा को कहां ले गए, हमने कहा कि जो afford कर सकते हैं, वो subsidy छोड़ सकते हैं क्‍या? सिर्फ कहा था। इस देश के 1 करोड़ 20 लाख से ज्‍यादा लोग गेस subsidy छोड़ने के लिए आगे आए।

इस सरकार और वहां बैठे हुए लोगों के गर्व का विषय सीमित नहीं है यह। यह सवा सौ करोड़ देशवासियों की शक्ति का परिचायक है। और मैं इस सदन को प्रार्थना करता हूं। राष्‍ट्रपति जी के उद्बोधन से प्रार्थना करता हूं, राष्‍ट्रपति जी के उद्बोाधन के माध्‍यम से प्रार्थना करना चाहता हूं और देश के राजनीतिक जीवन में निर्णायक की अवस्‍था में बैठे हुए निर्णय प्रक्रिया के भागीदारी सबको आह्वाहन करता हूं कि हम हमारे देश जनशक्ति को पहचाने, उस सामर्थ्‍य को पहचाने, हम भारत को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए जन-आंदोलन की अवधारणा लेते हुए एक सकारात्‍मक माहौल बना करके, देश को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। देखिए पहले नहीं मिले उससे ज्‍यादा परिणाम मिलेंगे।

और उसके कारण अनेक गुना ताकत बढ़ जाएगी। देश की बढ़ने वाली है। इसमें से कोई ऐसा नहीं है कि जो आने वाला कल बुरा देखना चाहता था। इसमें से कोई ऐसा नहीं है जो हिन्‍दुस्‍तान का बुरा चाहता था, हर कोई चाहता है गरीब का भला हो। हर कोई चाहता है, गांव-गरीब किसान को कुछ मिले। पहले भी किसी ने प्रयास नहीं किया था ऐसा कहने वालों में से मैं नहीं हूं। मैं इस सदन में बार-बार कह चुका हूं। मैं लालकिले पर से बोल चुका हूं कि अब तब जितनी सरकारें आईं, जितने प्रधानमंत्री आएं, हर किसी का अपना-अपना योगदान है।

उस तरफ बैठे हुए लोगों से कभी सुनने को मिला नहीं है कि इस देश में कोई चापेकर बंधू भी हुआ करते थे, जिनकी शहादत थी आजादी में। इनके मुंह से सुनने को नहीं मिला है, कभी सावकर जी भी थे, जो कालापानी की सजा भुगत रहे थे, तब देश आजाद हुआ है। उनके मुंह से कभी सुनने को नहीं मिल रहा है, जो भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद भी थे कि जिन्‍होंने देश के लिए बलि चढ़ा दी। उनके तो लगता है कि आजादी सिर्फ एक परिवार ने दिलवाई है। समस्‍या की जड़ वहां है।

हम देश को उसकी पूर्णता में स्‍वीकार करें और इसलिए जनशक्ति को जोड़ करके। हमारे यहां शास्‍त्रों में कहा गया है –

अमंत्रम अक्षरम् नास्ति। नास्ति मूलम् अनौषिधम्, अयोग्‍य पुरूषोनास्ति योजक: तत्र दुर्लभ:।

कोई अक्षर ऐसा नहीं होता है, जिसको मंत्र में जगह पाने का potential न हो। कोर्ठ ऐसा मूल नहीं होता है, जिसकी औषध में जगह पाने का potential न हो। कोई इंसान ऐसा न होता है कि जो कुछ करके समाज और देश को दे न सके। जरूरत होती है योजक: तत्र दुर्लभ। योजक की जरूरत है। और इस संसार ने हर शक्ति को संवार करके जोड़ने का एक प्रयास किया है। और जनशक्ति के भरोसे उसके आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

स्‍वच्‍छता का अभियान, मैं हैरान हूं क्‍या इस बात के लिए हमें सोचना नहीं चाहिए कि आजादी के इतने साल हो गए हैं। महात्‍मा गांधी का नाम हम लेते हैं, गांधी के दो प्रिय चिन्‍ह् थे। गांधी कहते थे कि आजादी से पहले भी अगर मुझे कुछ पाना है, तो मुझे स्‍वच्‍छता पानी है। हम स्‍वच्‍छता की गांधी जी की बात को लेकर आपके सामने आए। देश के सामने आए। इतनी सरकारें आई, इतने संसद चले सत्र। क्‍या कभी संसद में स्‍वच्‍छता विषय पर चर्चा हुई है। और इसलिए पहली बार, यह सरकार आने के बाद, और इसलिए क्‍या स्‍वच्‍छता को भी हम राजनीकि के एजेंडा का हिस्‍सा बनाएंगे। आप में से कौन है जो गंदगी में जीना चहाता है? आपके इलाके में कौन है जो गंदगी चाहता है? आप भी नहीं चाहते हैं, यहां वाले भी नहीं चाहते हैं, यहां वाले भी नहीं चाहते हैं। कोई नहीं चाहता हैं। लेकिन क्‍या हम मिल करके एक स्‍वर में समाज को इस पवित्र कार्य में जोड़ने को, गांधी जी के सपने को पूरा करने के लिए आगे नहीं बढ़ सकते। कौन रोकता है?

और इसलिए माननीय अध्‍यक्षा जी, इस आपार जनशक्ति को आगे लेते हुए इस बार एक चर्चा अब यह तो सही है कि जब राष्‍ट्रपति जी के उद्बोधन पर चर्चा होती है और बजट भी आया होता है तो बजट की बातें भी आ जाती हैं और राष्‍ट्रपति जी के उद्बोधन की बातें भी आ जाती हैं। बजट पर जब चर्चा होगी तो वित्‍तमंत्री जी इसको विस्‍तार से कहेंगे, लेकिन एक चर्चा आई है, बजट जल्‍दी क्‍यों किया? भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित हैं। और ज्‍यादातर कृषि की स्थिति दिवाली तक पता चल जाती हैं। हमारे देश की एक कठिनाई है कि हम अंग्रेज जो विरासत छोड़ करके आए, उसको ले करके चल रहे हैं।

हम मई में करीब-करीब बजट की प्रक्रिया पार निकलते हैं। और एक जून के बाद हिन्‍दुस्‍तान में बारिश आना शुरू हो जाता है। तीन महीने तक बजट का उपयोग होना असंभव हो जाता है। एक प्रकार से हमारे पास कार्य करने का समय बहुत कम बच जाता है। और जब समय होता है, तब आखिरी दिनों की जो पूर्ति करने के लिए हम जानते हैं, सरकार जानती है कि दिसंबर से मार्च तक किस प्रकार से बिल कटते हैं और किस प्रकार से रुपये खर्च किए दिखाए जाते हैं। अब यह हमने सोचना चाहिए कि अब मैं किसी की आलोचना नहीं करता। अभी भी किसी को समझ में आता है कि क्‍या कारण था कि आजादी के कई वर्षों तक बजट शाम को पांच बजे आता था। किसी ने सोचा नहीं बस पांच बजे चल रहा है, चल रहा है। क्‍यों चल रहा है भई। पांच बजे इसलिए बजट चलता था कि UK की पार्लियामेंट के हिसाब से हिन्‍दुस्‍तान में अंग्रेजों के जमाने से शाम को पांच बजे बजट आया। अब हमने उसको ही चालू रखा। और बहुत कम लोगों को मालूम होगा। हम घड़ी ऐसे पकड़ते हैं, तो Indian Time है, लेकिन घड़ी ऐसे पकड़ते हैं तो London Time है। आपके पास घड़ी है तो देख लीजिए।

उसी प्रकार से… अब अटल जी की सरकार आई, तब समय बदला गया। हमारा भी प्रयास है और जब आपकी सरकार थी, तब आप लोगों ने भी बजट के समय के संबंध में एक कमिटी बनाई थी। उसका विस्‍तृत रिपोर्ट है। और आप भी चाहते थे कि अब यह समय बदलना चाहिए। और उन्‍होंने जो proposal दी है, हमने उसी को पकड़ा है, लेकिन आप लोग नहीं कर पाए। क्‍योंकि आपकी priority अलग है। आप चाहते नहीं थे, ऐसा नहीं है। लेकिन उस priority में नंबर कब लगेगा। तो इसलिए जो बातें आपके समय हुई हैं, उन बातों को यह बड़े गर्व से कहना चाहिए आपको, फायदा उठाइये न, यह तो हमारे समय हुआ था। अब यह भी आप भूल जाते हैं, चलों मैंने याद दिला दिया, आप इसका भी लाभ दीजिए।

रेलवे के संबंध में भी विस्‍तार से चर्चा जब बजट की होगी, लेकिन एक बात समझिये कि 90 साल पहले जब रेल बजट आता थाा, तब transportation का एक प्रमुख mode सिर्फ रेलवे था। आज transportation एक बहुत बड़ी अनिवार्यता बनी है और इकलौता रेलवे नहीं है कई प्रकार के transportation के mode है। जब तक हम comprehensively transport इस विषय को जोड़ करके नहीं चलेंगे, तो हम समस्‍याओ से जूझते रहेंगे। और इसलिए मुख्‍य धारा में रेवले व्‍यवस्‍था भी रहेगी। उसमें कोई privatization को कोई तकलीफ नहीं, उसके स्‍वतंत्रता को कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन सोचने के लिए सरकार एक साथ comprehensive, हर प्रकार के mode of transport को देखना शुरू करे, यह आवश्‍यक है। और हमने, जबसे आए हैं, हमने रेलवे में, बजट में बदलाव किया है।

आप जानते हैं कि पहले बजट में हमारे गौड़ा जी ने बताया था कि करीब 1500 घोषणाएं हुई थी और कौन मजबूत है, कौन हाऊस में ज्‍यादा परेशान करता है, उसको ध्‍यान में रख करके, उसको खुश रख करके, एक-आध चीज बोल ही दी जाती थी। वो भी ताली बजा देता था, अपने इलाके में जा करके बता देता था, यह काम हो गया है। हमने देखा, 1500 ऐसी चीजें हुई थी, जिनका कागज़ पर भी मोक्ष हो गया था, तो यह ऐसा हम क्‍यों करते हैं। मैं जानता हूं, इससे राजनीकि दृष्टि से हमें नुकसान होता है। लेकिन किसी ने तो जिम्‍मा लेना पड़ेगा, देश में जो गलत चीजें develop हो चुकी हैं, उसको हम रोके। और Bureaucracy को suit करता है यह। ऐसी चीजें उनको suit करती है कि राजनेता ताली बजा दे, उनकी गाड़ी चला दे। मुझे नहीं चलानी है जी।

देश के सामान्‍य मानव की आशाओं-आकांक्षाओं के लिए फैसले लेने है, अच्‍छे फैसले लेने का प्रयास है। अच्‍छी तरह करने का प्रयास है। और इसलिए हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, हम इस काम को कर रहे हैं।

एक विषय नोटबंदी का आया है। पहले दिन से यह सरकार कह रही है हम नोटबंदी पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन आप लोगों को लगता था कि टीवी पर कतार देखते हैं, तो कल कभी न कभी कुछ हो जाएगा, फिर देखेंगे। आपको लग रहा था कि इस समय चर्चा करने से शायद मोदी फायदा उठा जाएगा। और इसलिए चर्चा की बजाय, आपको TV bite देने में interest था। इसलिए चर्चा नहीं हुई। अच्‍छा है कि इस बार आपने थोड़ा बहुत सपर्श किया है और कितना बड़ा बदलाव आया है। और मुझे विश्‍वास है जो बारीकी से चीजों का अध्‍ययन करते हैं, अब तक उनका ध्‍यान नहीं गया है तो मैं चाहूंगा कि उनका ध्‍यान जाए। 2014 के पहले का वक्‍त देख लीजिए। 2014 मई के पहले का। वहां से आवाज़ उठती थी कि कोयले में कितना खाया? 2G में कितना गया, जल करप्‍शन में कितना गया, वायु करप्‍शन में कितना गया। आसमान के करप्‍शन में कितना गया। कितने लाख गए, यही वहां से आवाज़ आती थी। यह मेरे लिए खुशी की खबर है कि जब वहां से आवाज़ आती थी, मोदी जी कितना लाए, कितना लाए, कितना लाए। तब आवाज़ उठती थी कि कितना गया। अब आवाज़ उठ रही है कितना लाए, इससे बड़ा जीवन का संतोष क्‍या हो सकता है। यही तो सही कदम है।

दूसरा हमारे खड़गे जी ने कहा कि कालाधन हीरे-जवाहरात में है, सोने में है, चांदी में है, property में है। मैं आपकी बात से सहमत है लेकिन यह सदन जानना चाहता है, यह ज्ञान आपको कब हुआ। क्‍योंकि इस बात का कोई इंकार नहीं कर सकता है कि भ्रष्‍टाचार का प्रारंभ नकद से होता है। उसकी शुरूआत नकद से होती है। परिणाम में Property होती है, परिणाम में Jewelry होती है, परिणाम में Gold होता है। शुरूआत नकद से होती है। दूसरा आपको मालूम है कि यही बुराईयों के केंद्र में है। बेनामी Property है, जवाहरात है, Gold है, चांदी है, जरा आप लोग बताइये 1988 में जब श्रीमान राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे, पंडित नेहरू से भी ज्‍यादा बहुमत इस सदन में आपके पास था, दोनों सदन में आपके पास था। पंचायत से पार्लियामेंट तक सब कुछ आपके कब्‍जे में था। आप ही आप थे, कोई नहीं था।

1988 में आपने बेनामी संपत्ति का कानून बनाया। आपको जो ज्ञान आज हुआ है, क्‍या कारण था कि 26 साल तक उस कानून को notify नहीं किया गया? क्‍या कारण था, उसको दबोचकर रखने का। अगर उस समय notify किया होता, तो जो ज्ञान आज आपको हुआ है। 26 साल पहले की स्थिति थोड़ी ठीक थी। देश के बहुत जल्‍दी साफ-सुथरा होने की दिशा में, एक काम कम हो जाता। वो कौन लोग थे, जिनको कानून बनने के बाद ज्ञान हुआ कि अब कानून दबाने में फायदा है। वो किस परिवार.. आप इससे बच नहीं सकते, आप किसी का नाम दे करके आप बच नहीं सकते। आपको जवाब देना पड़ेगा देश को। जो ज्ञान आज हुआ है और यह सरकार है, जिसने नोटबंदी से पहले, पहला कदम उनके खिलाफ उठाया। और मैं आज इस सदन के माध्‍यम से भी देशवासियों को कहना चाहता हूं, आप कितने ही बड़े क्‍यों न हों, गरीब के हक का आपको लौटना पड़ेगा। और मैं इस रास्‍ते से पीछे लौटने वाला नहीं हूं। मैं गरीबों के लिए लड़ाई लड़ रहा हूं, और गरीबों के लिए लड़ाई लड़ता रहूंगा। इस देश के गरीबी के मूल में, इस देश में गरीबी के मूल में, देश की पाथ-पाथ प्राकृतिक सम्‍पदा की कमी नहीं थी, देश के पास मानव संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन देश में एक ऐसा वर्ग पनपा, जिन्‍होंने लोगों के हक लूटते रहे, उसी का नतीजा है कि देश जिस ऊंचाई पर पहुंचना चाहिए था, नहीं पहुंच पाया।

एक बात मैं कहना चाहूंगा, हम यह जानते हैं कि अर्थव्‍यवस्‍था को इस बात को कोई इंकार नहीं कर सकता है, एक सामान्‍तर अर्थव्‍यवस्‍था develop हुई थी। और ऐसा नहीं है ये काम भी आपके संज्ञान में पहले भी आया था। ये विषय आप ही की सरकार की, आप की कमेटियों ने भी आपको सुझाया था। जब इंदिरा जी राज करती थी तब यसवंतराव जी चौहान यह विषय ले करके उनके पास गए थे। और तब जा करके उन्‍होंने कहा था कि क्‍यों भाई कांग्रेस को चुनाव नहीं लड़ने का। आपको निर्णय गलत नहीं था, चुनाव का डर था। हमें चुनाव की चिंता नहीं है, देश की चिंता है, इसलिए हम निर्णय लिए। इसलिए हम निर्णय लिए। और यह बात निश्चित है कोई इंकार नहीं कर सकता है, कि कोई भी व्‍यवस्‍था में ‘कैश कितना, cheque को ना’, यह कारोबार develop हो चुका है। और एक प्रकार से जीवन का हिस्‍सा बना है, जब तक आप उसको गहरी चोट नहीं लगाओगे तब तक स्थिति से बाहर नहीं आओगे और इसलिए हमने जो फैसले किए हैं।

आपने किस प्रकार से देश चलाया है, ऐसा लगता है कि कुछ दलों के दिलों-दिमाग में चार्वाक का मंत्र उनके जिंदगी में बहुत काम आ गया है। उन्‍होंने चार्वाक के ही मंत्र को लेकर ही शायद और तभी जा करके कोई देश अंग्रेजी कवि के उल्‍लेख करते हुए यह भी कह देते थे बड़े-बड़े व्‍यक्ति कि मरने के बाद क्‍या है! क्‍या देखा है! अभी तो चार्वाक का तत्व-ज्ञान है। मैं उस सदन में जाऊंगा तब इसका उल्‍लेख detail में करूंगा, लेकिन चार्वाक कहते थे:

यवज्‍जीवेत्, सुखम् जीवेत्।

ऋणम् ऋित्‍वा, घ्रितम् पिबेत्।।

भस्मिभूतस्‍य देहस्‍य।

पुनार्गमनम् कुत:?

जब तक जियो मौज करो। जियो, जब तक जियो मौज करो। चिंता किस बात की कर्ज करो, और घी उस जमाने में यह संस्कार थे इसलिए घी कहा, भाई भगवंत मान नहीं तो और कुछ पीनो को कहते। लेकिन उस समय ऋषियों ने, महा-संस्‍कार थे, उन्‍होंने घी कि शायद आज का जमाना होता तो कुछ और पीने की चर्चा करनी पड़ती। लेकिन इस प्रकार की philosophy से कुछ लोगों को लगता है कि जब अर्थव्‍यवस्‍था अच्‍छी चल रही थी तो आपने ऐसे समय, ऐसा निर्णय क्‍यों‍ किया? यह बात सही है। आप जानते हैं अगर आपको कोई बीमारी हो और डॉक्‍टर कहता है कि operation करना है, operation बहुत जरूरी है फिर भी वह कहता है, पहले भाई आपको शरीर ठीक करना पड़ेगा। Diabetes control करना पड़ेगा, ठिगना control करना पड़ेगा, सात-आठ-बीस और मशवरा, फिर बाद में operation करेगा। जब तक वह स्‍वस्‍थ नहीं होता है, operation करना पसंद नहीं करता है डॉक्‍टर, कितनी भी गंभीर स्थिति हो। Demonetisation के लिए यह समय इतना पर्याप्‍त था कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था तंदुरुस्‍त थी। अगर दुर्बल होती, हम यह कतई सफलतापूर्वक नहीं कर पाते। यह तब सफल होता है, ताकि अर्थव्‍यवस्‍था मजबूत थी और इसी समय।

दूसरा इसका समय, ऐसा मत सोचिए कि हड़बड़ी में होता है। इसके लिए मोदी का अध्‍ययन करना पड़ेगा आपको। और आप देखिए हमारे देश में साल भर में जितना व्‍यापार होता है, करीब-करीब उतना ही व्‍यपार दीवाली के दिनों में हो जाता है। यानी 50% दीवाली के दिनों में, 50% साल भर में। एक प्रकार से पूरा उद्योग व्‍यापार, किसानी सब काम दिवाली के पास उसकी Peek पर पहुंच जाता है। उसके बाद natural lull period हमारे देश में हमेशा होता है। दीवाली के बाद दुकानदार भी 15-15 दिन बंद रख करके बाहर चले जाते हैं, लोग भी अपने आप घूमने जाते हैं। यह proper time था कि जबकि सामान्‍य कारोबार ऊंचाई पर पहुंच गया है उसके बाद अगर 15-20 दिन दिक्‍कत होती है और फिर 50 दिन में ठीक-ठाक हो जाएगा और मैं देख रहा हूं जो मैंने हिसाब-किताब कहा था, उसी प्रकार से गाड़ी चल रही है।

और इसलिए आप यह भी जानते हैं, आप यह जानते हैं, एक जमाना था, Income Tax Department की मन-मर्जी पर..एक समय था जब देश में Income Tax अधिकारी मन-मर्जी पड़े वहां जा करके धमकते थे और बाकी क्‍या होता था पुराना इतिहास कुछ भी दोहराने की जरूरत नहीं है।

नोटबंदी के बाद सारी चीजें record पर है। कहां से आया, किसने लाया, कहां रखा। अब उसमें से top नामों को technology के द्वारा, data-mining के द्वारा निकाल दिए गए हैं। अब Income Tax Office को जाना नहीं है सिर्फ SMS करके पूछना है भाई कि जरा बताई कि detail क्‍या है? आप देखिए किसी भी प्रकार का अफसर-शाही के बिना जिसको भी मुख्‍य धारा में आना है, उसके लिए एक अवसर प्राप्‍त हो चुका है। और में मानता हूं इससे बहुत Clean India, जैसे ‘स्‍वच्‍छ भारत’ का मेरा अभियान चल रहा है, वैसा ही आर्थिक जीवन में ‘स्‍वच्‍छ भारत अभियान’ भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

और बेनामी संपत्ति का कानून पास हो चुका है, notify हो चुका है। और जैसा खड्गे जी ने कहा वहीं पर सबकुछ है। अच्‍छा सुझाव आपने दिया है। हम भी कुछ करके दिखाएंगे। और जो भी सुन रहे हैं वो भी समझें और उसके प्रावधान बढ़ लें कि कितना बड़ा कठोर कानून है, जिसके पास भी बेनामी संपत्ति है उनसे मेरा आग्रह है अपने Charted Accountant से जरा पूछ लें कि आखिर के प्रावधान क्‍या है? और इसलिए मेरा सबसे आग्रह है कि मुख्‍यधारा में आईये देश के गरीबों का भला करने के लिए आप भी कुछ contribute कीजिए।

जहां-जहां कभी-कभी लगता है कि यह निर्णय अचानक हुआ क्‍या। मैं जरा जानकारी देना चाहता हूं, जिस दिन हमारी सरकार बनी, सबसे पहला काम किया कैबिनेट में, SIT बनाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था लंबे अरसे तक लटका पड़ा था कि विदेश के कालेधन के लिए SIT बनाओ। हमने बनाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था उस प्रकार बनाई। और सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या कहा था: 26 March, 2014, Since 1947 for 65 Years nobody thought of bringing the money stays away in the Foreign Banks to the country. The Government has failed in its role for 65 Years. This Court feels that you have failed in your duty. So is the given order for the appointment of committee headed by the former judges of this Court. Three years have passed, but you have not done anything to implement the order. What have you done? Except for filing one report you have done nothing.

यह 24 मार्च, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने उस सरकार को कहा है। वहीं तो मैं कह रहा था वो जमाना तब आवाज उठती थी कि कितना गया। अब आवाज उठ रही है कि कितना आया और आते रहेगा। आप देखिए एक के बाद एक, एक बाद एक देखिए विदेश में जमा कालेधन के खिलाफ नया कठोर कानून बनाया। प्रोपर्टी जब्‍त करने की बात कही। इस बार भी बजट में एक नया कानून कही गई है। सजा भी 7 साल से 10 साल कर दी। Tax Havens जो थे मॉरीशस, सिंगापुर वगैरा उस पुराने जो नियम आप बना करके गये थे, उसको हमने बातचीत की। उनको समझाया, हमारी परिस्थितियां समझायी। उसको हम ले आये। हमने स्विटजरलैंड से समझौता किया। वो real-time information देंगे। कोई भी हिन्‍दुस्‍तानी नागरिक पैसा रखेगा तो उसका पता चल जाएगा। हमने अमेरिका सहित कई देशों के साथ इस प्रकार के समझौते किए हैं, जहां पर हमारा कोई भी भारतीय नागरिक, भारतीय मूल का व्‍यक्ति पैसे रखेगा, तो उसकी जानकारी भारत को मिलेगी।

उसी प्रकार से प्रोपर्टी बिक्री, 20 हजार से ज्‍यादा नकद नहीं, इसके चलते हमने नियम किया। Real-Estate Bill को पास किया। ज्‍वैलरी के मार्केट में भी 1% Excise डाली ताकि चीजों को streamline करना था। किसी को परेशान नहीं करना था।

और आप ही लोग हैं। इस देश सदन में इधर हो या उधर हो। मुझे चिट्ठियां आई हैं, जब हमने कहा कि दो लाख से ज्‍यादा कोई अगर Jewelry purchase करता है, तो उसके PAN Number देना होगा। मैं हैरान हूं, कालेधन और भ्रष्‍टाचार के खिलाफ भाषण देने वाले लोग मुझे चिट्ठियां लिखते थे कि PAN Number मांगने का नियम रद्द कर दीजिए, ताकि लोग cash money से सोना लेते रहें, गहने लेते रहें और काला बाजार चलता रहे। हम टिके रहे, उसको करके दिखाया, एक-एक कदम उठाया। मैं जानता हूं राजनीतिक फायदे के लिए कोई काम ऐसा नहीं कर सकता, वरना तो आप पहले कर लेते। यह कठिनाई है, लेकिन देश का भला करने के लिए निणर्य करने दे और गरीबों का भला करना था, इसलिए निर्णय किया।

दो लाख से ज्‍यादा किसी सामान पर, दस लाख से ज्‍यादा महंगी गाड़ी पर 1% अतिरिक्‍त टैक्‍स लगा दिया। हमने Income Text declaration scheme भी लाई। और अब तक इस scheme में सबसे ज्‍यादा पैसा लोगों ने declare किया। 1100 से ज्‍यादा पुराने काननू हमने खत्‍म किये। और यहां बताया गया कि आपने नोटबंदी के संबंध में कोई कहता है 150 बार, कोई कहता है 130 बार, वह सब अलग-अलग आंकड़े बोल रहे हैं, इतने नियम बदले। बहुत अच्‍छा याद रखते हैं।

अब मैं आपको बताना चाहता हूं यह तो ऐसा काम था, जिसमें हम जनता की कोई तकलीफ तुरंत समझने के बाद रास्‍ता खोजने का प्रयास करते थे। दूसरा, जिन लोगों को सालों से लूटने की आदत लगी है, वो रास्‍ता खोजते थे, तो हमें बंद करने के लिए कुछ न कुछ करना पड़ता था। लड़ाई का मौसम था। एक तरफ देश को लूटने वाले थे, और एक तरफ देश को ईमानदारी की तरफ ले जाने की तरफ ले जाने का मोर्चा लगा हुआ था। लड़ाई पल-पल चल रही थी। वो एक तू डाल-डाल मैं पात-पात इस प्रकार से लड़ाई चल रही थी। लेकिन जो आप लोगों का बड़ा प्रिय कार्यक्रम है, जिसको ले करके आप बड़ी पीठ थपथपा रहे हैं। वैसे उसके लिए आपको हक नहीं हैं, क्‍योंकि जब इस देश पर राजा-रजवाड़ों का शासन था, तब भी गरीबों के लिए राहत नाम से योजनाएं चलती थीं। उसके बाद भी हिन्‍दुस्‍तान में Food for work के नाम से कई योजनाएं। देश आजाद होने के बाद नौ प्रकार से अलग-अलग नामों से चली हुई योजना चलते-चलते-चलते उसने एक नाम लिया, जिसको MGNREGA कहते हैं। कई यात्रा करके आया हूं और हर राज्‍य में जहां कम्‍युनिस्‍टों की सरकार थी उन्‍होंने भी पश्चिम बंगाल में किया था, जहां शरद पवार की सरकार थी, महाराष्‍ट्र में किया था। गुजरात में भी जो कांग्रेस की सरकार थी.. हर देश में किसी न किसी ने आजादी के बाद इस प्रकार के काम किए ही किए थे। हर किसी ने किए थे, तो वो कोई नई चीज नहीं थी, लेकिन नाम नया था। लेकिन देश को और आपको खुद को भी जान करके आशचर्य होगा कि शांत रूप से इतने सालों से चली हुई योजना के बाद भी MGNREGA में 1035 बार परिवर्तन किए हैं। 1035 बार, नियम बदले गए। आप कभी अपने तो आइने में झांक करके तो देखिए। और उसमें तो लड़ाई नहीं थी। इतने बड़े दबाव में काम करना नहीं था। क्‍या कारण था कि MGNREGA जैसा एक, जो लम्‍बे अर्से से चल रहा था। उसको भी आपको आने के बाद 1035 बार परिवर्तन करना पड़ा। और इसलिए नियमों में परिवर्तन किया। Act एक बार हो गया। Act 1035 बार परिवर्तित नहीं हुआ है।

और इसलिए मैं कहना चाहूंगा, आज मुझे आपको काका हाथरसी की कविता के शब्‍द सुनाता हूं और मैं काका हाथरसी को याद करता हूं, तो कोई उत्‍तर प्रदेश के चुनाव के साथ न जोड़े। क्‍योंकि उनके हर चुनाव में काका हाथरसी की बातें चलती रहती थी। काका हाथरसी ने कहा था –

अंतर पट्ट में खोजिये, छिपा हुआ है खोट और काका हाथरसी ने आगे कहा है ‘मिल जायेगी आपको, बिल्‍कुल सत्‍य रिपोर्ट।’

आदरणीय अध्‍यक्षा जी, मैं एक बात की ओर भी ध्‍यान देना चाहता हूं, सरकार नियमों से चलती है, संविधानिक जिम्‍मेदारियों के साथ चलती है। जो नियम आपके लिए थे, वो नियम हमारे लिए भी हैं। लेकिन फर्क कार्य संस्‍कृति का होता है। नीतियों की ताकत भी नियत से जुड़ी हुई होती है। अगर नियत में खोट है तो नीतियों की ताकत माइनस में चली जाती है, जीरो छोड़ो, माइनस में चली जाती है और इसलिए हमारे देश में उस कार्य संस्‍कृति को भी समझने की जरूरत है। जब भी हम कुछ बोलते हैं यहां से यह तो हमारे समय था, यह तो हमारे समय था। तो मुझे लग रहा है मैं ही उसी पर खेलूं थोड़ा। आपके मैदान में खेलने आना पसंद करूंगा मैं। और इसलिए ऐसा क्‍यों हुआ। ऐसा तो नहीं है कि आपको ज्ञान नहीं था। आपको ज्ञान कल ही हुआ ऐसा थोड़ा हुआ। आपको जानकारी थी, लेकिन महाभारत में कहा इस प्रकार से–

‘जानामि धर्मम् न च मे प्रवृति: ‘जानामि अधर्मम् न च मे निवृत्ति: ।

धर्म क्‍या है? यह तो आप जानते हैं, लेकिन वो आपकी प्रवृत्ति नहीं थी। अधर्म क्‍या है वो भी जानते थे, लेकिन उसे छोड़ने का आपको सामर्थ्‍य नहीं था। मैं बताता हूं जी, अब मुझे कहिए – National Optical Fiber Network अगर मैं उसके लिए कुछ भी कहूंगा, तो वहां से आवाज़ उठ आई यह तो हमने शुरू किया था। मैं हमने शुरू किया था, उसी से शुरू करना चाहता हूं। अब देखिए National Optical Fiber Network, 2011 से 14 तीन साल सिर्फ 59 गांव में यह Optical Fiber Network लगा और उसमें भी last mile connectivity का प्रावधान नहीं था। Procurement भी पूरी तरह centralized था, वो तो क्‍या कारण है सब जानते हैं। अब आप देखिए, हमने ..पूरी कार्य संस्‍कृति कैसे बदलती हैं, approach कैसे बदलता है। सबसे सब राज्‍यों को पहले साथ लिया। Last mile connectivity मतलब स्‍कूल में Optical Fiber Network मिलना चाहिए, अस्‍पताल में मिलना चाहिए, पंचायत घर में मिलना चाहिए। इन प्राथमिकताओं को तय किया। Procurement क्‍या था, वो भारत सरकार के हाथ से रख करके हमने उसको decentralized कर दिया। और परिणाम यह आया कि इतने कम समय में अब तक 76000 गांवो में Optical Fiber Network, last mile connectivity के साथ पूरा हो गया।

दूसरा, अभी यहां बताया जा रहा था कल कि आप less-cash society या cash-less society के लिए बोल रहे हैं। लोगों के पास क्‍या हैं? मोबाइल.. मैं हैरान हूं, मैं तो 2007 के बाद से जितनी चुनाव सभाएं सुनी हैं आपके नेता गांव-गावं जा करके कहते हैं कि राजीव गांधी computer revolution लाएं, राजीव गांधी mobile phone लाए, राजीव गांधी ने गांव-गांव connectivity कर दी। आप ही का भाषण है और जब मैं आज कह रहा हूं कि उस मोबाइल का उपयोग bank में भी convert किया जा सकता है, तो कह रहे हैं कि mobile phone ही कहां हैं। यह समझ नहीं आ रहा है भई। आप कह रहे हैं कि हमने इतना कर दिया और जब मैं उसमें कुछ अच्‍छा जोड़ रहा हूं, तो कह रहे हैं कि वो तो है ही नहीं भई। तो यह क्‍या समझा रहे थे आपको जी। क्‍यों ऐसा कर रहे हो ? दूसरी बात है कि आप भी मानते हैं, मैं भी मानता हूं कि पूरे देश के पास सब नहीं हैं। लेकिन मान लो कि अगर 40% के पास है, तो क्‍या उन 40% लोगों को इस आधुनिक व्‍यवस्‍था से जोड़ने की दिशा हम सबका सामूहिक प्रयत्‍न रहना चाहिए कि नहीं रहना चाहिए? 60% का चलो बाद में देखेंगे। कहीं तो शुरू करें और इसका लाभ है digital currency को हम कम न आंके। आज हमारा एक-एक ATM, उसका संभालने के लिए average पांच पुलिस वाले लगते हैं। Currency को एक से दूसरे जगह ले जाने के लिए सब्‍जी और दूध के mobilization के लिए जितना खर्चा होता है, उससे ज्‍यादा उसके mobilization से खर्चा होता है। अगर हम इस बातों को समझें तो, जो कर सकते हैं, सब नहीं कर पाएंगे, हम समझ सकते हैं, लेकिन जो कर सकते हैं, उनको करने के लिए प्रोत्‍साहित करना यह नेतृत्‍व का काम होता है, किसी भी दल का हो, उससे लोगों का भला होने वाला है। अभी मुझे कोई बता रहा था एक सब्‍जी वाले ने शुरू किया। कल कोई मुझे रिपोर्ट दे करके गया। उसको पूछा तेरा क्‍या फायदा है। बोले साहब पहले क्‍या होता था एक तो मेरे ग्राहक Permanent थे। सबको मैं जानता था। अब मान लीजिए 52 Rupees का सब्‍जी लिया तो फिर वो मैडम कहती थी कि चल जेबों में पैसे नहीं है, 50 रूपये का नोट है ले लो, तो मेरे दो रूपये चले जाते थे। अब मैं भी बोल नहीं पाता था और बोलने में लगाता था हिसाब तो साल भर में मेरा आठ सौ, हजार रूपया, ये रूपया दो रूपया न देने में ही हो जाता था। बोले इसके बाद BHIM App लगाने के बाद 52 रूपया है तो 52 रूपया मिलता है। 53 रूपया है तो 53 मिलता है। 48 Rupees, 45 पैसा है तो पूरा मिलता है। बोले मेरा तो आठ सौ हजार रूपया बच गया।

देखिए चीजें कैसे बदलती हैं और इसलिए हम कम से कम आप मोदी का विरोध करें, कोई बात नहीं आपका काम भी है, करना भी चाहिए। लेकिन जो अच्‍छी चीजें है उसको आगे बढ़ाएं। जहां मान लीजिए गांव में नहीं है। शहरों में है तो आगे तो बढ़ाओं, उसको योगदान करो, देश का भला होगा। हमको और किसी व्‍यक्ति का भला नहीं है और इसलिए मैं आग्रह करूंगा कि ऐसी चीजों में हम मदद कर सकते हैं, तो करनी चाहिए।

कार्य और संस्‍कृति कैसे बदलती है। अब ये रोड बनाना क्‍या हमारे आने के बाद हुआ क्‍या। ये टोडरमल्ल के जमाने से चल रहा है। शेरशाह सूरी के जमाने से चल रहा है, तो यह कहना कि ये तो हमारे जवाने से था, हमारे जमाने से था। अब कहां-कहां जाओगे भाई। फर्क क्‍या है पिछली सरकार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना प्रति दिन 69 किलोमीटर होती थी। हमारे आने के बाद 111 किलोमीटर हो गयी है, यह फर्क होता है।

और और हमने रोड बनाने में Space Technology का उपयोग किया है। Space Technology से photography होती है, monitoring होता है। हमने रेलवे में Drone का उपयोग किया है। photography करते हैं, काम का हिसाब लेते हैं। कार्य संस्‍कृति Technology की मदद से कैसे बदलाव लाया जा सकता है।

आवास योजना, ग्रामीण आवास योजना, राजनीतिक फायदा उठाने के लिए नामों को जोड़ करके उसका जो उपयोग हुआ, वो हुआ। लेकिन फिर भी आपके समय में एक साल में, 1083000 घर बनते थे। इस सरकार में एक वर्ष में 2227000 घर बने। National Urban Renewal Mission एक महीने में 8017 घर बने। हमारी योजना से 13530 घर बने हैं।

रेलवे- पहले Broad Gauge Railway का commissioning एक साल में 1500 किलोमीटर हुआ करता था। पिछले साल यह बढ़ करके 1500 किलोमीटर से सामने 3000 किलोमीटर, double और हम 3500 किलोमीटर तक और इसलिए यह परिणाम अचानक नहीं आए। योजनाबद्ध तरीके से, हर पल, हर चीज का monitor करते-करते यही लोग, यही कानून, यही मुलाजि़म, यही फाइल, यही माहौल उसके बाद भी बदलाव लाने में तेज गति से आगे बढ़ रहें हैं। और यह अचानक नहीं होता है।

इसके लिए पुरूषार्थ करना पड़ता है और इसलिए हमारे शास्‍त्रों में कहा गया है –

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः ।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः ।।

उद्यम से ही कार्य सिद्ध हाते हैं, न कि मनोरथो से, सोये हुए सिंह के मुख में हिरण आ करके प्रवेश नहीं करता है, उसको भी शिकार करना पड़ता है।

आदरणीय अध्‍यक्षा महोदया, कुछ मूलभूत परिवर्तन कैसे आते हैं। हम जानते हैं कि राज्‍यों के Electricity Board- DISCOM सारे राज्‍य संकट में हैं। तभी तो हिन्‍दुस्‍तान में लालकिले पर से इसकी चिंता की गई थी प्रधानमंत्री के द्वारा। इतनी हद तक यह हालत बिगड़ी हुई थी। पिछले दो साल में बिजली उत्पादन में क्षमता बढ़ी। Conventional Energy उसको जोड़ा गया। Transmission line उसको बढ़ाया गया, Solar Energy को लाया गया। 2014 में 2700 मेगावाट थी, आज हम उसको 9100 मेगावाट पहुंचा दिए हैं। सबसे बड़ी बात, DISCOM योजना के कारण, उदय योजना के तहत राज्‍यों को उस योजना जब वो सफल कर पाएंगे करीब-करीब 1 करोड़ 60 हजार से ज्‍यादा रकम राज्‍यों की तिजौरी में बचने वाली है और राज्‍यों के साथ जोड़ करके अगर भारत सरकार ने 1 करोड़ 60 हजार की घोषणा कर दी होती, तो चारों तरफ कहते कि वाह, मोदी सरकार ने इतना पैसा दिया। हमने योजना ऐसी बनाई कि राज्‍यों के खजानों में 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपया DISCOM के द्वारा, उदय योजना के द्वारा बचत होने वाली है, जो उनके लिए विकास के काम आने वाली है और ऊर्जा क्षेत्र का जो बोझ है उस बोझ से वो बचने वाले हैं।

कोयला- आप जानते हैं कोयला जहां से निकलता है, उसके नज़दीक नहीं दिया जाता था। दूर-दूर से देखा, क्‍यों? तो बोले रेलवे को थोड़ा कमाई हो जाए। हमने कहा कमाल हो भई, रेलवे की कमाई के लिए इतना सारा बोलते हैं, हमने rationalize कर दिया, जहां नजदीक है उसी को वहां से कोयला मिलेगा, कोयले का खर्चा हो, उस दिशा में प्रयास किया और उसके कारण करीब-करीब कायेले में 1300 करोड़ रुपये transportation खर्च कम हुआ है।

LED Bulb- अब यह तो हम नहीं कहते कि हम LED Bulb लाए। वैज्ञानिक शोध हुई, आपने भी शुरू किया। लेकिन आपके समय वो LED Bulb करीब तीन सौ, साढ़े तीन सौ, तीन सौ अस्‍सी उस रुपये में चलते थे। LED Bulb से energy saving होता है हमने बड़ा mission रूप में काम उठाया और करीब-करीब इतने कम समय में पिछले आठ-नौ महीने में इस योजना को बल दिया है। इतने कम समय में 21 करोड़ LED Bulb लगाने में हमने सफलता पाई है और तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। और अब तक जो LED Bulb लगे हैं उसके कारण परिवारों में जो बिजली का बिल आता था, वो जो बिजली का बिल कम हुआ है, वो परिवारों में करीब-करीब 11000 करोड़ रुपयों की बचत हुई है। अगर किसी सरकार ने बजट में 11000 करोड़ बिजली उपभोक्‍ताओं को देने का तय किया होता, तो अखबारों में Head-Line बनती। हमने LED Bulb लगाने मात्र से 11000 करोड़ बिजली का बिल सामान्‍य मानव के घर में कम किया है। कार्य संस्‍कृति अलग होती है, तो कैसा परिवर्तन आता है इसका यह नमूना है।

यहां पर हमारे विपक्ष के नेता Scheduled Casts के बजट को ले करके भाषण कर रहे थे। लेकिन बड़ी चतुराई पूर्वक 13-14 के आंकड़ों को उन्‍होंने बोलना अच्‍छा नहीं माना। तुक्‍का लगाते थे 13-14 आता था अटक जाते थे। Scheduled Casts Sub-Plan कुल आवंटन 2012-13- 37113; 13-14- 41561; 16-17- 38833; 16-17 – 40920, 33.7% Increase और इस साल के बजट में 52393; और इसलिए सत्‍य सुनने के लिए हिम्‍मत चाहिए एक और मैं काम बताना चाहता हूं, ये सरकार भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली सरकार है। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के समय किस प्रकार से काम किए जाते हैं।

17 मंत्रालय के 84 योजनाएं, हमने Direct Benefit Transfer AADHAR योजना के साथ जोड़ करके उसको आगे किया और 32 करोड़ लोगों को 1 लाख 56 हजार करोड़ रूपया Direct Benefit Transfer स्‍कीम में दिया गया। अब उससे क्‍या लाभ हुआ है, और इसको समझना होगा कि किस प्रकार से हर गली-मौहल्‍ले में चोरी लूट की व्‍यवस्‍था रही थी। और मैं जानता हूं इतनी बारीकी से हर जगह पर चोरी लूट को रोकूंगा तो मेरे पर कितना तूफान होगा। और तब जा करके मैंने गोवा में बोला था कि मैं जानता हूं मैं ऐसे निर्णय करता हूं। मेरे पर क्‍या बीतेगी। मेरे को मालूम है। आज भी मालूम है। और इसमें दोबारा कहता हूं ऐसे-ऐसे बड़े लोगों को तकलीफ हो रही है और ज्‍यादा होने वाली है। उसके कारण मुझे अंदाजा है मुझ पर क्‍या जुल्‍म होने वाले हैं। उसके लिए तैयार हूं। क्‍योंकि देश के लिए, मैंने यह प्रण ले करके निकला हुआ इंसान हूं और इसलिए मैं कदम उठा रहा हूं।

PAHAL योजना हमारे यहां गैस सिलेंडर जाते थे, सब्सिडी मिलती थी, जब उसको आप AADHAR योजना से जोड़ा तो उसका leakage करीब-करीब 26 हजार करोड़ रूपये से ज्‍यादा leakages रूका, जिसका परिणाम यह आया कि डेढ़ करोड़ गरीब परिवारों को गैस का कनेक्‍शन देने हम सफल हुए हैं। आप जरा अध्‍ययन कर लीजिए मैं जब सदन में बोलता हूं तो जिम्‍मेवारी के साथ बोलता हूं। पिछले ढाई वर्षों में, फर्जी राशनकार्ड, गरीब आदमी के हक छीनने का काम, फर्जी राशनकार्ड वाले करते थे। गरीब को जो मिलना चाहिए उसको बिचौलिए अपने यहॉं फर्जी राशन कार्ड के ठप्‍पे रखते थे और माल चुरा लेते थे और कालेबाजारी में बेचते थे जब से हमने Technology का उपयोग किया AADHAR का उपयोग किया करीब-करीब 4 करोड़, 3 करोड़ 95 लाख, करीब-करीब चार करोड़ फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए, उससे करीब-करीब 14 हजार करोड़, 14 हजार करोड़ इतनी रकम बिचौलिए मार खाते थे, गरीब के हक का मार खाते थे, वो मुख्‍य धारा में आया और गरीबों की तरफ गया।

MGNREGA- MGNREGA में AADHAR से payment दिया जाता है, direct transfer पैसा होता है करीब 94% success मिली है। और उसका परिणाम ये हुआ है कि leakages 7633 Crore Rupees, उसका leakage अब तक बच पाया है और ये हर वर्ष एक का वर्ष नहीं आने वाले हर वर्ष में बचने वाला है।

और आगे भी जो है National Social Assisting Programme (NSAP) करीब-करीब 400 करोड़ रूपया है जिसका कोई लेनदार नहीं मिल रहा है, लेकिन पैसे जाते थे कुछ तो ऐसी चीजें पायी गयीं जिस बेटी का जन्‍म नहीं हु,आ वो बेटी विधवा भी हो गयी और खजाने से धन भी जा रहा है। इन सब को रोकने की कार्य संस्‍कृति को ले करके हम चले हैं। Scholarship, ऐसे कई चीजें हैं एक मोटा-मोटा अंदाज लगाता हूँ। एक वर्ष में और हर वर्ष अभी तो मैं कह रहा हूँ शुरूआत है 49500 Crore Rupees, ये बिचौलिए के पास जाते हुए रूक गए। आप कल्‍पना कर सकते हैं करीब-करीब 50 हजार करोड़ रूपया जो गरीबों के हक का था वो बिचौलिए खा जाते थे corruption के नाम पर लूट के नाम पर उनको रोकने का काम उसके लिए एक बड़ी हिम्मत लगती है और वो करके दिखया है।

आदरणीय अध्‍यक्षा जी, मैं कार्य संस्‍कृति का एक उदाहरण भी देना चाहता हूँ किसानों की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। हर वर्ष राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री भारत सरकार को इस बात की चिट्ठी लिखते थे कि हमें यूरिया मिलना चाहिए जब मैं मुख्‍यमंत्री था तब यह लिखता रहता था और यूरिया पाने में बहुत बड़ी दिक्‍कत होती थी। मैं आज बड़े संतोष के साथ कहता हूँ कि पिछले दो साल से किसी मुख्‍यमंत्री को यूरिया के लिए चिट्ठी नहीं लिखनी पड़ी। कहीं यूरिया के लिए कतार नहीं लगी है, कहीं यूरिया के लिए लाठीचार्ज नहीं हुआ है, लेकिन ये बात हम भूले नहीं पुराने अख़बार निकाल दीजिए, किसानों को यूरिया पाने के लिए कितनी तकलीफ होती थी। अब मुझे बताइए नीम-कोटिंग, नीम-कोटिंग इसका ज्ञान सिर्फ हमी को है क्‍या ? क्‍या आप को नहीं था क्‍या ? आपको था, आपने 5 अक्‍टूबर 2007 यूरिया नीम-कोटिंग की चर्चा आपके Group of Ministers के द्वारा principally approved हुई है, 5 अक्‍टूबर 2007 से ले करके क्‍या हुआ? करीब-करीब छह साल! एक आपने cap लगाई 35%, उससे ज्‍यादा नहीं नीम-कोटिंग करना, आप 100% नहीं करते हैं उसका कोई लाभ ही नहीं होता है क्‍योंकि यूरिया चोरी होता है कारखानों में चला जाता है किसान के नाम पर subsidy के bill कटते हैं लेकिन किसान को लाभ नहीं मिलता था। यूरिया का दूसरा दुरूपयोग होता था synthetic-milk बनाने में और उसके कारण गरीब बच्‍चों की जिंदगी के साथ खेला जाता था। यूरिया को 100% नीम कोटिंग किया आपने निर्णय किया था, छह साल में आपने सिर्फ 20%, 35% cap लगाने के बाद 35% भी नहीं पहुँच पाए, सिर्फ 20%, नीम-कोटिंग किया। हमने आ करके इस बात को हात में लिया और 188 देश, आपका छह साल, मेरा छह महीना हिंदुस्‍तान में 100% नीम कोटिंग यूरिया कर दिया, imported यूरिया को भी नीम-कोटिंग कर दिया और उस नीम-कोटिंग का लाभ, इसका हमने सर्वे करवाया यानि की आप की कार्य संस्‍कृति और हमारी कार्य संस्‍कृति में फर्क इतना है नीम-कोटिंग की बात आती है आप खड़े हो जाते हो कि ये तो हमारे जमाने का है तो ये आप के जमाने को आपके मैदान में मैंने खेलना तय किया है इसलिए मैं खेल करके दिखाता हूँ कि आप का हाल क्‍या है? नीम कोटिंग का अध्‍ययन हमने करवाया। Agriculture Development and Rural Transformation Centre उन्‍होंने तो analysis करके Report दिया है, किसानों का कितना भला हो रहा है देखिए। धान के उत्‍पादन में 5 प्रतिशत वृद्धि, गन्‍ने के उत्‍पादन में 15 प्रतिशत वृद्धि, आप कल्‍पना कर सकते हैं कि किसानों को इसके कारण कितना खर्चा बच रहा है।

किस प्रकार से आदरणीय राष्‍ट्रपति जी ने हम सबसे एक आह्वान किया है कि लोक सभा और विधान सभा के चुनाव साथ-साथ होने की दिशा में सोचने का समय आ गया है। इसको राजनीतिक तराजू से न तौला जाए, तत्‍कालीन हर किसी को थोड़ा बहुत नुकसान होगा हर किसी को थोड़ा बहुत होगा, लेकिन इस विषय पर गंभीरता से सोचन की आवश्‍यकता है। आज हर वर्ष, पॉंच-सात, राज्‍यों में चुनाव होते ही रहते हैं। एक करोड़ से ज्‍यादा सरकारी मुलाजि़म कभी न कभी चुनावों में लगे रहते हैं। सबसे ज्‍यादा नुकसान शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हमारे अध्‍यापकों प्रध्‍यापकों को चुनाव के कामों में जाना पड़ता है। भविष्‍य के पीढि़यों का नुकसान हो रहा है, बार-बार चुनाव के कारण हो रहा है और उसके कारण खर्च में भी बहुत बड़ी वृद्धि हो रही है। और इसलिए 2009 का जो लोक सभा चुनाव हुआ तो 1100 करोड़ रूपये का खर्च हुआ और 2014 का लोक सभा का चुनाव हुआ 4000 करोड़ से भी ज्‍यादा का हुआ। आप कल्‍पना कर सकते हैं इस गरीब देश पर ये गरीब देश पर कितना बोझ पड़ रहा है। आज कानून व्‍यवस्‍था की दृष्टि से अनेक नई-नई चुनौतियॉं आ रही हैं। प्राकृतिक संकटों के कारण भी security force की मदद लगती है, दुनिया भर में फैल रहा आतंकवाद और दुश्‍मन देश जिस प्रकार से हरकते कर रहे हैं हमारी security force को उसमें ताकत लगानी पड़ रही है। इतना बड़ा काम बढ़ता जा रहा है। दूसरी तरफ security forces की ज्‍यादातर शक्ति चुनावी प्रबंधों में लगानी पड़ रही है उनको भेजना पड़ रहा है। इन संकट को हम समझें और एक दीर्घ दृष्‍टा के रूप में कोई एक दल इसका निर्णय नहीं कर सकता है। सरकार इसका निर्णय कतई नहीं कर सकती है, लेकिन अनुभव के आधार पर जिम्‍मेवार लोगों ने मिल करके इस समस्‍या का समाधान हमने खोजना होगा, हमें रास्‍ता खोजना होगा और राष्‍ट्रपति जी ने जो चर्चा निकाली है उस चर्चा को हमने आगे बढ़ाना चाहिए। उनका धन्‍यवाद करते हुए उनके धन्‍यवाद के लिए हम लोगों ने प्रयास करना चाहिए।

आदरणीय अध्‍यक्षा जी, हमारे देश की ग्रामीण अर्थ-कारण को मजबूत किए बिना देश का अर्थ-कारण आगे नहीं बढ़ता है। मैं हैरान हूँ हमारे विपक्षी नेता को राष्‍ट्रपति जी के संबोधन में दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित, युवा मजदूर इनके उल्‍लेख से भी परेशानी हुई है क्‍या इस देश में दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित इन लोगों को इन लोगों का क्‍या उन लोगों का राष्‍ट्रपति के भाषण में स्‍थान नहीं होना चाहिए। उससे पीड़ा होनी चाहिए मैं हैरान हूँ कि ऐसी पीड़ा क्‍यों होनी चाहिए। हमने कृषि सिंचाई योजना पर बल दिया है क्‍योंकि मैं मानता हूँ कि अब आप देखिए MGNREGA में कैसा मूलभूत परिवर्तन आया है आपने तीन साल में सिर्फ 600 करोड़ रूपया बढ़ाया था। हमने आ करके दो साल में 11000 करोड़ रूपया बढ़ा दिया है। क्‍यों हमने उसमें space technology का उपयोग किया है, हमने उसके अंदर zero taking की व्‍यवस्‍था की है और हमने बल दिया है बल दिया है कि तालाब तालाब पर बल दिया जाएगा कि सिंचाई चाहिए सबसे बड़ी बात है मत्‍स्‍य पालन के लिए भी छोटे-छोटे तालाब चाहिए। गरीब व्‍यक्ति कता सकता है और उसके कारण करीब 10 लाख से ज्‍यादा तालाब बनाने का संकल्‍प ले करके हम चल रहे हैं और पिछले बार भी हमने तालाब की ओर बल दिया था। उसी से हमारे जो किसान हैं उनको एक बहुत बड़ा लाभ होने की संभावना है। monitoring की व्‍यवस्‍था है zero taking के कारण monitoring की व्‍यवस्‍था है उसका भी लाभ होगा। और space technology सेटेलाइट के अंदर बहुत चीजें होने के कारण भी हम उसका उपयोग नहीं किए हमने सेटेलाइट छोड़ करके अख़बारों सुरखियों में जगह बना लिया। ये सरकार है जिसने लगातार भरपूर प्रयास किया है और उसको भी आगे बढ़ाने के लिए काम करें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना- फसल बीमा पहले भी थी लेकिन फसल बीमा लेने के लिए किसान पहले तैयार नहीं था। फसल बीमा पहले भी थी लेकिन किसान के हकों की रक्षा नहीं होती थी। मैं चाहुँगा हम सब सार्वजनि‍क जीवन में काम करने वाले लोग हैं। राजनीतिक दल के सिवाय भी समाज के प्रति हमारी एक जिम्‍मेवारी है। इस सदन के सभी लोग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अध्‍ययन करें और हमारे इलाके के किसानों को कैसे मदद मिल सकती है इसके लिए इसका फायदा पहुँचाएं। पहली बार बुआई न हुई हो तो प्राकृतिक आपदा के कारण तो भी वो बीमा का हकदार बना है और फसल काटने के बाद भी अगर 15 दिन के अन्‍दर-अन्‍दर कोई और आपदा आयी तो भी वो फसल बीमा का हकदार बने, ये निर्णय छोटा नहीं है और इसलिए ये हम सब का दायित्‍व बनता है कि हम हमारे किसानों को ये जो लाभ मिला है उस राज्‍य को हम पहुँचाएं।

Soil Health Card- राजनीतिक मदभेद हो सकता है लेकिन अपने इलाके के किसानों को Soil Health Card समझाइए। उनका फायदा होगा उनकी लागत कम हो जाएगी। सही भूमि पर सही फसल से उपयुक्‍त लाभ होगा। ये सीधा-सीधा विज्ञान है, उसमें राजनीति करने की कोई जरूरत नहीं है। इसको हमें आगे बढ़ाना चाहिए और उसमें मैं तो चाहुँगा छोटे-छोटे Entrepreneur आगे आएं खुद अपनी Private Lab बनाएं और वे खुद Certify Labs के द्वारा धीरे-धीरे गॉंवों में भी एक नए रोजगार का क्षेत्र भी खुले उस दिशा में हमें काम करना चाहिए।

आदरणीय अध्‍यक्षा महोदया, हमने और भी अनेक विषयों यहॉं पर युवाओं के लिए चर्चा हुई रोजगार के अवसर। मुद्रा योजना से करीब-करीब दो करोड़ से ज्‍यादा लोगों को बिना कोई गारंटी जो धन दिया गया है या तो वह खुद अपने पैरों पर खड़ा हुआ है या पहले से था तो ये एक से अधिक व्‍यक्ति को रोजगार देने की ताकत आयी है। हम लोग, हम लोगों की यही सोच रही, जब तक हम देश में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाएगें हमारी नीतियॉं वो होनी चाहिए कि हर जगह पर उसके रोजगार की संभावना बढ़े और हमने उस नीति को अपनाया, Skill Development पर बल दिया है और उसका लाभ है कि हमारे यहॉं कृषि क्षेत्र…ये प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ये प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जब लागू कर रहे हैं तो उस काम में लोगों को रोजगार मिलेगा की नहीं मिलेगा? हम लोगों को ऊर्जा गंगा योजना के साथ पूर्वी भारत को गैस पाइप लाइन से जोड़ने का एक बड़ा अभियान चलाया है। सैकड़ों किलोमीटर का गैस पाइप लाइन लगने वाला है क्‍या उसमें नौ जवानों के रोजगार की संभावना पड़ी है की नहीं पड़ी है?

और इसलिए विकास का वह दिशा हो जिसमें नौजवानों को रोजगार मिले हमने अभी Textile में, जूतों के क्षेत्र में अनेक Initiative लिए हैं, जिसके कारण अनेक लोगों को नये रोजगार और नये-नये क्षेत्रों में रोजगार की संभावना हुई है । देश के छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है, इस बजट में भी बहुत महत्‍त्‍वपूर्ण फैसले किए हैं और छोटे-छोटे उद्योगों को जितना बल मिलेगा उसके कारण हमारे देश में रोजगार की संभावनाएं बढेगी।

‘Zero Defect Zero Effect’ ये हमारे Production का criteria रखें तो हम दुनिया के Market को भी capture कर सकते हैं और हमारे छोटे उद्योग-कारों की export करने की ताकत होती है बड़े-बड़े उद्योग-कारों को छोटे-छोटे पूरजे लगते हैं वो छोटे-छोटे कारखानों से मिलते हैं और बहुत बड़ा Engineering की दुनिया में हम miracle कर सकते हैं। और इसलिए सरकार ने और अभी बजट में जो योजना लाए हैं, नए बजट में उसका लाभ 96% उद्योगकारों को मिलने वाला है, 96%, 4% जो बड़े लोग हैं वो बाहर रह गये, लेकिन 50 करोड़ से कम वाले करीब 96% हैं उन सबको फायदा मिल रहा है और बहुत बड़ा फायदा मिल रहा है। उसके कारण रोजगार के लिए बहुत बड़ी संभावनाएं बढ़ने वाली है।

Surgical Strike- मैं हैरान हॅूं अपने सीने पर हाथ रख करके पूछिए Surgical Strike के पहले 24 घंटे राजनेताओं ने कैसे-कैसे बयान दिए थे, कैसी भाषा का प्रयोग किया था लेकिन जब देखा कि देश का मिज़ाज अलग है, उनको अपनी भाषा बदलनी पड़ी और मैं आज आपसे आग्रह करता हॅूं, ये बहुत बड़ा निर्णय था और उस निर्णय को कोई मुझे पूछता नहीं है, नोटबंदी में तो पूछता है कि मोदी जी secret क्‍यों रखा? Cabinet को क्‍यों नहीं बताया! ऐसा पूछते हैं। Cabinet को भी नहीं बताया! Surgical Strike के संबंध में कोई नहीं पूछ रहा है। भाइयों और बहनों! हमारे देश की सेना का, हमारे देश की सेना उसके जितने गुणगान करें, हमारे देश की सेना का जितना गुणगान करें उतना ही कम है और इतने बड़े फलक में इतनी सफल Surgical Strike की है surgical strike आपको परेशान कर रही है मैं जानता हूँ। Surgical Strike आप को परेशान कर रहीं है और इसलिए Surgical Strike आप की मुसीबत ये है कि Public में जाकर बोल नहीं पाते हो अंदर पीड़ा अनुभव कर रहे हो, ये आप की मुसीबत है। लेकिन आप मान के चलिए ये देश ये देश, हमारी सेना इस राष्‍ट्र की रक्षा के लिए पूरी सामर्थ्‍यवान है पूरी शक्तिवान है।

आदरणीय अध्‍यक्षा महोदया, मुझे विश्‍वास है कि हम इस सदन में संवाद हो नए-नए शोध हो, नए-नए विचारों को रखा जाए क्‍योंकि हम लोग तो ज्ञान के पुजारी हैं विचारों को स्‍वागत करने वाले लोग हैं, जितने नए विचार मिलेगें किसी भी दिशा में से विचार आएं जरूरी नहीं की विचार इसी दिशा में आएं, इसी दिशा में विचार आए उत्‍तम विचारों का स्‍वागत है क्‍योंकि हमने सब मिल करके ultimately हम सब का उद्देश्‍य है हमारे देश को आगे बढ़ाना, ultimately हम सब का उद्देश्‍य है देश को बुराइयों से मुक्‍त कराना, ultimately हमारा उद्देश्‍य है इस देश को नयी ऊँचाइयों पर ले जाना। और विश्‍व के अंदर एक अवसर आया है ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं। आज की जो विश्‍व की व्‍यवस्‍था है उसमें भारत के लिए एक अवसर आया है इस अवसर का अगर हम फायदा उठाएं और एक स्‍वर से एक ताकत के साथ हम दुनिया के सामने प्रस्‍तुत होगें। मुझे विश्‍वास है विश्‍व में भी जो सपना देख करके हमारे पूर्वज चले थे उसको हम पूरा कर सकते हैं।

आदरणीय अध्‍यक्ष महोदया, आपने मुझे समय दिया सदन ने मुझे सुना इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ और मैं फिर एक बार आदरणीय राष्‍ट्रपति जी को हृदय से अभिनंदन करते हुए मेरी बात को विराम देता हूँ, बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने दी किसानों को कई बड़ी सौगातें


आभार,मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी का !

यह पहला अवसर है जब बढी हुई बिजली दरों को वापस लिया गया और राजस्थान के लाखों किसानों को सीधे राहत दी गई हो। किसान राजस्थान की और देश की रीड है। उसे मजबूती देना देश को मजबूत करना होता है। राजस्थान की यशश्वि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी को बहुत - बहुत धन्यवाद आभार !!

- अरविन्द सिसोदिया,

जिला महामंत्री भाजपा कोटा शहर जिला !

94141 80151 / 95095 59131


कृषि बिजली दरें घटाईमुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने दी किसानों को कई बड़ी सौगातें

जयपुर, 18 फरवरी 2017



मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कृषि बिजली की दरें घटाने सहित प्रदेश के किसानों को कई सौगातें दी हैं। किसानों को अब पूर्ववर्ती दर 90 पैसे प्रति यूनिट की दर से ही बिजली मिलेगी और फ्लैट रेट भी 120 के स्थान पर 85 रुपये प्रति एचपी ही होगी। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग द्वारा कृषि विद्युत कनेक्शन की नई दरों का बढ़ा हुआ भार अब राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने किसानों को राहत देते हुए और कई घोषणाएं की हैं।

ऊर्जा राज्यमंत्री श्री पुष्पेन्द्र सिंह राणावत ने किसानों के हित में मुख्यमंत्री द्वारा लिए गये निर्णयों की शनिवार को पत्रकार वार्ता में जानकारी दी। ऊर्जा राज्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए निर्णय किया है कि राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग द्वारा कृषि विद्युत कनेक्शन की नई दरों का बढ़ा हुआ भार सरकार वहन करेगी। सितम्बर, 2016 में विनियामक आयोग ने किसानों की दरों में करीब 25 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की थी, जिसे अब राज्य सरकार वहन करेगी।

ज्यादा जमा कराई राशि समायोजित होगी
श्री राणावत ने बताया कि अब किसानों को कृषि कनेक्शन के सामान्य श्रेणी के मीटर पर 1 रुपये 15 पैसे के स्थान पर 90 पैसे प्रति यूनिट की दर देय होगी। वहीं फ्लैट रेट के काश्तकारों के लिए प्रति एचपी की दर 120 रुपये के स्थान पर 85 रुपये रहेगी। इस निर्णय के अनुसार पूर्व में सामान्य श्रेणी के कृषि कनेक्शनों पर काश्तकारों द्वारा बढ़ी हुई दरों पर जमा कराई गई राशि को आगामी बिलों में समायोजित किया जाएगा।

ऊर्जा राज्यमंत्री ने बताया कि प्रतिवर्ष विद्युत दरें बढ़ाने का निर्णय पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लिया गया था। इसके बावजूद हमारी सरकार ने पिछले दो वर्षों में नियामक आयोग द्वारा किसानों के लिए बढ़ी हुई दरों का समस्त भार अपने ऊपर लिया है।

पूरे जिले में हो सकेगा कृषि कनेक्शनों का स्थानान्तरण
श्री राणावत ने मुख्यमंत्री की ओर से घोषणा के अनुसार बताया कि किसानों की मांग पर कृषि कनेक्शनों के स्थानांतरण में पंचायत समिति की सीमा को बढ़ाकर जिला क्षेत्र तक कर दिया जाएगा।

समझौता राशि की दर घटाई
ऊर्जा राज्यमंत्री ने कृषि उपभोक्ताओं के लिए सिविल लाइबिलिटी की अधिकतम अवधि चार माह से घटाकर 2 माह करने की घोषणा की। इसके साथ ही समझौता राषि की दर भी 2000 रुपये से घटाकर 1000 रुपये प्रति एचपी की गई है।

मीटर सही तो लोड चैकिंग नहीं
श्री राणावत ने बताया कि अगर किसी उपभोक्ता का मीटर सही पाया जाता है तो उसकी लोड चैकिंग नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शिकायतों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कमेटियां गठित की गयी हैं। इन कमेटियों में वीसीआर जांच के 60 दिन तक प्राप्त होने वाली शिकायतों का निस्तारण 15 दिन में किया जाएगा।

बिना जांच, बिना आवेदन लोड बढ़ने की शिकायतों का होगा निस्तारण
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बिना आवेदन या बिना जांच के लोड बढ़ने की शिकायतों का निस्तारण किया जायेगा। किसानों के पम्प की लोड चैकिंग में 20 प्रतिशत एवं अधिकतम 5 एचपी तक के लोड में रियायत दी जाएगी। इस निर्णय से लगभग 5 लाख किसान लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि दिसम्बर, 2014 के बाद भी किसी कारण मांग राशि जमा नहीं कर पाने वाले किसानों को मांग राशि जमा कराने का एक और अवसर दिया जाएगा।

बूंद-बूंद कृषि कनेक्शनों पर अब तीन वर्ष बाद ही सामान्य दरें
श्री राणावत ने बताया कि बूंद-बूंद, फव्वारा एवं डिग्गी सिंचाई पद्धति आधारित कृषि कनेक्शनों की विद्युत दरें 3 वर्ष पश्चात् ही सामान्य श्रेणी में परिवर्तित कर दी जाएंगी। इस निर्णय से लगभग 45 हजार किसान लाभान्वित होंगे।

शिकायतों के निराकरण के लिए शिविर अगले माह
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा आगामी माह में प्रदेशभर में पंचायत एवं उपखण्ड स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें उपभोक्तओं की शिकायतों का निराकरण किया जाएगा।

इस दौरान डिस्कॉम्स चेयरमैन श्री श्रीमत पाण्डेय, प्रमुख शासन सचिव ऊर्जा श्री संजय मल्होत्रा एवं डिस्कॉम्स के सलाहकार श्री आरजी गुप्ता भी उपस्थित थे।
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कृषि कनेक्शनों के स्थानांतरण में जिले के अंदर शिथिलता

1. कृषि कनेक्शनों के स्थानान्तरण की वर्तमान पंचायत समिती की सीमा को बढ़ा कर जिला क्षेत्र करने की मैं घोषणा करता हूँ।

वी.सी.आर. में राहत
2. मैंने किसानों के लिये सिविल लाइबिलिटी के अलावा समझौता राशि को पूर्व में कम किया है। अब मैं यह घोषणा करता हूॅं कि कृषि उपभोक्ताओं के लिये सिविल लाईबिलिटी की अधिकतम अवधि 4 माह से घटा कर मात्र 2 महीने की जाएगी। इसके अतिरिक्त समझौता राशि की दर को भी हमने 2000 रूपये प्रति हार्स पावर से घटाकर 1000 रूपये प्रति हार्स पावर कर दिया है।

3. वीसीआर में किसानों की कुछ शिकायतें आ रही थी, शिकायतों की सुनवाई के लिये जिला स्तर पर वीसीआर मोनीटरिंग कमेटियाँ गठित की गयी हैं। इन कमेटियों में वीसीआर जाँच के 60 दिन तक शिकायत प्राप्त होने पर 15 दिन में निस्तारित किया जायेगा।

4. जिन किसानों के मीटर सही ढंग से चल रहे हैं ऐसे काश्तकारों के लोड की जांच नहीं की जाएगी।

मांग-पत्र राशि जमा कराने का एक और अवसर
5. ऐसे कृषि आवेदक जो किसी कारण मांग पत्र समय पर जमा नहीं करा पाते हैं उनके लिये मैंने दिसम्बर, 2014 तक के आवेदकों को मांग पत्र राशि जमा कराने का अवसर दिया था। अब मैं यह घोषणा करता हूॅ कि दिसम्बर, 2014 के बाद भी किसी कारण मांग राशि जमा न कर सके किसानों को मांग राशि जमा कराने पर एक अवसर और प्रदान किया जायेगा।

लोड एक्सटेंशन की शिकायत के संबंध में
6. पिछले कुछ माह में किसानों द्वारा डिस्कॉम के स्तर पर बिना जांच या बिना आवेदन लोड बढ़ाये जाने के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ऐसे समस्त प्रकरणों में शिकायत दूर करने के लिए बढ़ाये गये लोड को समाप्त किये जाने की घोषणा की जाती है।

7. किसानों के पम्प के लोड चैकिंग में 20 प्रतिशत एवं अधिकतम 5 एच.पी. तक के लोड में रियायत दी जाएगी।

इस निर्णय से लगभग 5 लाख कृषक लाभान्वित होंगे।

विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण के संबंध में
8. विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा आगामी माह में पूरे प्रदेश में पंचायत/उपखण्ड स्तर पर विद्युत संबंधी शिकायतों के निराकरण एवं उपभोक्तओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान किये जाने के लिए शिविर का आयोजन किया जायेगा।

बूंद-बूंद कृषि कनेक्शनों की बढ़ी दरों का तीन वर्ष में सामान्य श्रेणी में परिवर्तित
9. बूंद-बूंद/फौव्वारा/डिग्गी सिंचाई पद्धति आधारित कृषि कनेक्षनों के लिए मैं यह घोषणा करता हूं कि ऐसे कनेक्शनों की 3 वर्ष पश्चात् ही विद्युत दरें सामान्य श्रेणी में परिवर्तित कर दी जायेंगी। इस निर्णय से लगभग 45000 कृषक लाभान्वित होंगे।

बिजली की बढ़ी दरों के संबंध में
10. कांग्रेस शासनकाल में लिये गये निर्णय के अनुसार नियामक आयोग में दर निर्धारण के लिये प्रतिवर्ष याचिका लगाना अनिवार्य है। पिछले 2 वर्षों में भी याचिकाएं लगाई गई एवं नियामक आयोग द्वारा किसानों के लिये बढी हुई दरों का समस्त भार सरकार ने लिया था एवं किसानों के द्वारा पूर्व की दरों पर ही भुगतान किया जाता था। सितम्बर, 2016 में नियामक आयोग ने किसानों की दरों में लगभग 25 पैसे प्रति यूनिट की बढोत्तरी की।

11. कृषि कनेक्शन के अन्तर्गत सामान्य श्रेणी के मीटर एवं फ्लैट रेट के काश्तकारों के लिए बढ़ी हुई दरें वापस ली जाती हैं अर्थात् मीटर श्रेणी के काश्तकारों द्वारा 1.15 रूपये के स्थान पर 90 पैसे प्रति यूनिट की दर देय होगी एवं फ्लैट रेट के काश्तकारों के लिए 120 रूपये प्रति एच.पी. के स्थान पर 85 रूपये प्रति एच.पी. देय होगा।

12. काश्तकारों द्वारा पूर्व में बढ़ी हुई दरों पर जमा कराई गई राशि को आगामी बिलों में समायोजित किया जायेगा।

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

शशिकला का राजनैतिक षड़यंत्र फ़िलहाल फैल



शशिकला का राजनैतिक षड़यंत्र फ़िलहाल फैल 


शशीकला के षड़यंत्रों की जांच होनी चाहिये।
शशीकला ने मूलतः जयललिता के घर में शरण ली थी और वहां के कुछ कार्यों में हिस्सा बंटाती थी। वह जयललिता के घर की मालकिन किस तरह बन गई ? चिकित्सालय में परिवार से जुड़े लोगों को क्यों आनें नहीं दिया गया ? अस्पताल का व्यवहार भी अपराधयुक्त है। वह किसी नाते रिस्तेदार को कैसे रोक सकता है। चिकित्सालय ने चिकित्सा सम्बंधी सही तथ्यों को क्यों झुपाये रखा । सभी तथ्य बहुत ही अधिक सक्षम संस्था के द्वारा जांच के योग्य है। सबसे महत्वपूर्ण बात कि जब जयललिता को धीमें जहर से मारे जानें की बात उजागर हो गई थी तब भी उसके अपनों को दूर क्यों रखा गया । बहुत गहरा षड़यंत्र रहा है। जांच सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में ही संभव है। शशीकला के षड़यंत्रों की जांच होनी चाहिये।
 

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया, कोटा 

शशिकला का राजनैतिक भविष्य शुरू होने से पहले ही खत्म, 


पढ़ें कब क्या हुआ
Amitabh Kumar |  15 Feb 2017

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अन्नाद्रमुक महासचिव शशिकला को दोषी करार देते हुए निचली अदालत के चार साल की सजा और 10 करोड़ जुर्माने को बरकरार रखा. मामले में शशिकला के अलावा उनके दो रिश्तेदार इलावरसी और सुधाकरण को भी दोषी पाया गया. पूर्व सीएम जयललिता के निधन के बाद उन पर चल रहे सभी मामलों को खत्म कर दिया गया. कोर्ट ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की.
जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय की खंडपीठ ने शशिकला और अन्य आरोपियों को बंगलुरु की विशेष  अदालत के सामने समर्पण करने और बाकी सजा को जेल में बिताने का आदेश दिया. खंडपीठ ने कहा कि आरोपियों ने अवैध धन कमाने के लिए गहरी साजिश रची. फर्जी कंपनियां बना कर धन को छिपाने की कोशिश की, ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके. भ्रष्टाचार के बढ़ते स्वरुप और समाज के हर क्षेत्र में व्यापक रूप को देखते हुए सख्त सजा देना जरूरी है, ताकि भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रवैया अपना सके.

खंडपीठ ने कहा कि भ्रष्टाचारी समाज और देश के प्रति जबावदेह हैं, खासकर जनप्रतिनिधि,  जिन पर समाज के कल्याण की जिम्मेवारी है. ऐसे में सार्वजनिक पद पर बैठे लोग सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर भ्रष्ट आचरण करते हैं, तो उन्हें सजा होनी चाहिए. शपथ लेकर भ्रष्ट आचरण करनेवाले समाज के  दोषी हैं. उन्हें दंड देना जरूरी है.
आठ मिनट में आ गया फैसला
शशिकला की किस्मत का फैसला करनेवाला शीर्ष अदालत का बहुप्रतीक्षित निर्णय महज आठ मिनट में घोषित हो गया. दोनों जज, जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय कोर्ट छह में सुबह 10:32 बजे आसन पर पहुंचे.  कर्मियों द्वारा इस फैसले की सील खोले जाने के बाद जजों ने कुछ देर चर्चा की.
क्या है मामला
जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी ने इस मामले में सबसे पहले 1996 में एक मामला दर्ज कराया. उन्होंने जयललिता पर आरोप लगाया कि 1991 से 1996 तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने 66.65 करोड़ की संपत्ति जमा की और यह उनके आय के स्रोत से अधिक है. 
कब क्या हुआ
1996 : सात दिसंबर को अम्मा अरेस्ट
1997 : जयललिता के साथ-साथ तीन अन्य के खिलाफ भी चेन्नई की एक अदालत में आइपीसी की धारा 120 बी, 13 (2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) (ई) के तहत  मामले की सुनवाई हुई.
1997 : एक अक्तूबर को तत्कालीन राज्यपाल फातिमा बीबी ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दी. इसके खिलाफ जयललिता ने मद्रास हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की. लेकिन, अदालत ने इसे खारिज कर दिया. 
2001 : विधानसभा चुनाव में जयललिता की पार्टी एआइएडीएम को बहुमत मिला और दोबारा सीएम बनी.
2003 : द्रमुक महासचिव के अनबझगम ने इस मामले को कर्नाटक स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. 18 नवंबर, 2003 को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक मामले को बेंगलुरु हस्तांतरित कर दिया.
2011 :  आय से अधिक संपत्ति मामले में जयललिता अक्तूबर-नवंबर 2011 में विशेष अदालत में पेश हुईं.
2014 : 27 सितंबर को विशेष अदालत ने जयललिता और शशिकला समेत चार को दोषी करार दिया. चार साल की जेल और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा. 29 सितंबर को जयललिता ने कर्नाटक हाइकोर्ट में फैसले को चुनौती दी. अक्तूबर में जमानत याचिका खारिज कर. नौ अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की. 14 अक्तूबर को जमानत मिली. 
2015 : 11 मई को कर्नाटक हाइकोर्ट ने जयललिता और तीन अन्य को बरी कर दिया. कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. 
2016 : 23 फरवरी को अम्मा को दोषमुक्त किये जाने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सात जून, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
1996 : सात दिसंबर को अम्मा अरेस्ट
1997 : जयललिता के साथ-साथ तीन अन्य के खिलाफ भी चेन्नई की एक अदालत में आइपीसी की धारा 120 बी, 13 (2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) (ई) के तहत  मामले की सुनवाई हुई.
 1997 : एक अक्तूबर को तत्कालीन राज्यपाल फातिमा बीबी ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दी. इसके खिलाफ जयललिता ने मद्रास हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की. लेकिन, अदालत ने इसे खारिज कर दिया. 
2001 : विधानसभा चुनाव में जयललिता की पार्टी एआइएडीएम को बहुमत मिला और दोबारा सीएम बनी.
 2003 : द्रमुक महासचिव के अनबझगम ने इस मामले को कर्नाटक स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. 18 नवंबर, 2003 को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक मामले को बेंगलुरु हस्तांतरित कर दिया.
2011 :  आय से अधिक संपत्ति मामले में जयललिता अक्तूबर-नवंबर 2011 में विशेष अदालत में पेश हुईं.
2014 : 27 सितंबर को विशेष अदालत ने जयललिता और शशिकला समेत चार को दोषी करार दिया. चार साल की जेल और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा. 29 सितंबर को जयललिता ने कर्नाटक हाइकोर्ट में फैसले को चुनौती दी. अक्तूबर में जमानत याचिका खारिज कर. नौ अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की. 14 अक्तूबर को जमानत मिली. 
2015 : 11 मई को कर्नाटक हाइकोर्ट ने जयललिता और तीन अन्य को बरी कर दिया. कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. 
2016 : 23 फरवरी को अम्मा को दोषमुक्त किये जाने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सात जून, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
अब तक इन्हें सजा
रशीद मसूद : एमबीबीएस सीट आवंटन घोटाला
लालू प्रसाद : चारा घोटाला
जगदीश शर्मा : चारा घोटाला
ओमप्रकाश चौटाला : अध्यापक भर्ती में गड़बड़ी

रविवार, 12 फ़रवरी 2017

चाहे वर्षा हो या अग्नि प्रलय संघ कार्य चलता रहेगा – जे. नंद कुमार




चाहे वर्षा हो या अग्नि प्रलय संघ कार्य चलता रहेगा – जे. नंद कुमार


पूर्ण गणवेशधारी 1205 स्वयंसेवकों ने भारी वर्षा के बीच सुव्यवस्थित व अनुशासित ढंग से पथ संचलन पूर्ण किया.

नई दिल्ली, 26 जनवरी (इंविसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रान्त द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर पथ संचलन निकाला गया. पूर्ण गणवेशधारी 1205 स्वयंसेवकों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार भारी वर्षा के बीच, सुव्यवस्थित व अनुशासित ढंग से पथ संचलन पूर्ण किया. मंदिर मार्ग स्थित एन.पी. बॉयज स्कूल से आरम्भ आरम्भ हुआ संचलन पेशवा रोड, गोल मार्किट, भाई वीर सिंह मार्ग, बंगला साहिब गुरुद्वारा, बाबा खड़ग सिंह मार्ग, राजीव चौक सर्कल होते हुए राजीव चौक पर वर्षा के बीच संपन्न हुआ.

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्री जे.नन्द कुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया. उन्होंने बताया कि समाज के अन्दर संगठित भाव, अनुशासन, आत्मविश्वास जगाने के लिए, राष्ट्र के प्रति, देश के प्रति काम करने की प्रेरणा जगाने के लिए इस तरह का संचलन, एकत्रीकरण ऐसे कार्यक्रम चलते रहते हैं। गणतन्त्र दिवस पर और स्वतन्त्रता दिवस में भी जगह-जगह पर इस तरह के कार्यक्रम करते हैं। इसके द्वारा दो प्रकार के उद्देश्य संघ के सामने हैं एक तो देश के अन्दर, समाज के अन्दर आत्मविश्वास जगाना चाहिए, अनुशासन का भाव जगाना चाहिए, राष्ट्र के लिए काम करने का भाव जगाना। इसके साथ-साथ संघ स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण का, उनके एजुकेशन और ट्रेनिंग का भाव भी है। संघ स्वयंसेवकों के अन्दर देश के प्रति काम करने का अवसर और शक्ति मिले इसके लिए इस तरह से अलग-अलग कार्यक्रम संघ करता है।

उन्होंने स्वयंसेवकों को गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि 68वें गणतन्त्र दिवस में इतने सुन्दर, अनुशासित ढंग से एक गुणात्मक पथ संचलन इतनी अच्छी तरह सफल सम्पन्न हुआ इसके लिए हम सभी बधाई के पात्र हैं। स्वयंसेवकों को बधाई देने की आवश्यकता नहीं है लेकिन आपने जो अनुशासन यहां कर के दिखाया, निश्चित रूप से आप सभी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि चाहे बारिश हो, तूफान हो या अग्नि प्रलय हो, संघ ऐसा एक आर्गनाइजेशन, संगठन है, कुछ भी बाधा आए मगर हमारा यह मार्च-पथ संचलन, संघ का अभियान, यह आगे बढ़ेगा। संघ कभी रुकने वाला नहीं है, इस देश को परमवैभव के उच्च सिंहासन पर ले जाने के लिए यह हमेशा आगे बढ़ेगा। इसी संकल्प शक्ति, समर्पण, त्याग के कारण गत् 92 सालों से संघ आगे बढ़ता गया। बहुत सारी बाधाएं, प्रतिकूलताएं आईं, इमरजेंसी आई, ब्रिटिश सरकार ने भी संघ को रोकने की कोशिश की फिर भी संघ अधिकाधिक शक्ति पाकर आगे बढ़ा। आजादी मिलने के तुरन्त बाद यहां जो इतना भीषण नरसंहार हुआ, मुल्क का बंटवारा हुआ, उस समय भी भारत के हिन्दू समाज की रक्षा के लिए स्वयं आहूति, प्राण न्यौच्छावर करके संघ ने इस समाज, इस देश की रक्षा की और आगे बढ़ा।

नन्द कुमार जी ने बताया कि आजादी मिलने के बाद गांधी हत्या के झूठे आरोप संघ पर लगा के, संघ को कुचलने के लिए कुछ लोगों ने कोशिश की, फिर भी संघ आगे बढ़ा। संघ का इतिहास ही ऐसा है चाहे बारिश हो अग्नि प्रलय हो, संघ आगे बढ़ा, रुका नहीं। क्योंकि संघ की शाखाओं से पाने वाला संस्कार वही है जो  श्रीराम जी ने धर्म की विजय के लिए अधर्मी रावण को नष्ट करके समाज को दिए थे. राम जी के सामने भी बहुत सारी बाधाएं थीं, साथी बहुत ज्यादा नहीं थे, लेकिन उस प्रतिकूलता में भी राक्षस कुलों को विशेष उन्मूलन करके उन्होंने धर्म की विजय करवाई। राम जी के साथ केवल कपि लोग, वानर सेना थी, लेकिन राम ने अकेले इस कपि सेना का सहारा लेकर अधर्म के राक्षस कुल को पूरी तरह नष्ट कर दिया।

उन्होंने बताया की महान, समर्पित, त्यागी व्यक्तियों को केवल सात्विक क्रिया सिद्धि चाहिए। क्रिया सिद्धि है सम्पति नहीं है, कोई उपक्रम नहीं है तो भी विजय हमेशा उस प्रकार की शक्ति की है.  संघ ये महान कृत्य करके दिखाता रहता है। संघ के पास बहुत सारी सम्पत्ति नहीं है, संघ के पास बहुत सारे सहायक लोग नहीं हैं, फिर भी हम तो शाखा से पाए हुए संस्कार-संस्कृति के बलबूते पर, उस क्रिया सिद्धि के बलबूते पर आगे बढ़ रहे हैं।

Hindus Gotra System: Scientific Meaning




Hindus Gotra System: Scientific Meaning of Gotra in the Vedas

http://www.indiadivine.org/hindus-gotra-system-scientific-meaning-of-gotra-in-vedas/

In Hindu society, the term gotra means clan. It broadly refers to people who are descendants in an unbroken male line from a common male ancestor.

However, all families having same gotra need not be cousins. They can be descendants of sons or disciples or even adopted sons of the Rishi(Seer), who is the root and whose name is used as Gotra. For example if a person says that he belongs to the Kutsa Gotra then it means that he traces back his male ancestry to the ancient Rishi (Saint or Seer) Kutsa.

Gotra means cowshed (Go=Cow, tra=shed) in Sanskrit. Paini defines gotra for grammatical purposes as apatyam pautraprabhrti gotram (IV. 1. 162), which means “the word gotra denotes the progeny (of a sage) beginning with the son’s son. This system was started among Brahmins, with a purpose to classify and identify the families in the community.

Hindu Brahmins identify their male lineage by considering themselves to be the descendants of the 8 great Rishis i.e Saptarishis (The Seven Sacred Saints) + Bharadwaja Rishi. So the list of root Brahmin Gotras is as follows :

. Angirasa
. Atri
. Gautam
. Kashyapa
. Bhrigu
. Vasistha
. Kutsa
. Bharadwaja

The offspring (apatya) of these eight are gotras and others than these are called ‘ gotravayava. These eight sages are called gotrakarins from whom all the 49 gotras (especially of the Brahmins) have evolved.

For instance, from Atri sprang the Atreya and Gavisthiras gotras.In almost all Hindu families, marriage within the same gotra is prohibited, since people with same gotra are considered to be siblings.

But the hidden reason behind this practice is the ‘Y’ Chromosome which is expected to be common among all male in same gotra. So, the woman too carries similar ‘X’ Chromosome and if married, their offspring may be born with birth defects. Few families even maintain their Pravara which is a list of all seers through which their Gotra was derived.

It connects to the root Seer. Gotra is always passed on from father to children among most Hindus, just like lastname(surname) is passed on worldwide. However, among Malayalis and Tulu’s its passed on from mother to children.

Additional rule in the Gotra system is that, even if the Bride and Bridegroom belong to different Gotras, they still cannot get married even if just one of their Gotra Pravara matches. Now, why only male carries fixed lastname and gotra and why female can change her last name, gotra after marriage?

Genes and Chromosomes Among Humans

Humans have 23 pairs of Chromosomes and in each pair one Chromosome comes from the father and the other comes from the mother. So in all we have 46 Chromosomes in every cell, of which 23 come from the mother and 23 from the father.

Of these 23 pairs, there is one pair called the Sex Chromosomes which decide the gender of the person. During conception, if the resultant cell has XX sex chromosomes then the child will be a girl and if it is XY then the child will be a boy. X chromosome decides the female attributes of a person and Y Chromosome decides the male attributes of a person.

When the initial embryonic cell has XY chromosome, the female attributes get suppressed by the genes in the Y Chromosome and the embryo develops into a male child. Since only men have Y Chromosomes, son always gets his Y Chromosome from his father and the X Chromosome from his mother. On the other hand daughters always get their X Chromosomes, one each from both father and mother.

So the Y Chromosome is always preserved throughout a male lineage (Father – Son – Grandson etc) because a Son always gets it from his father, while the X Chromosome is not preserved in the female lineage (Mother, Daughter, Grand Daughter etc) because it comes from both father and mother.

A mother will pass either her mother’s X Chromosome to her Children or her father’s X Chromosome to her children or a combination of both because of both her X Chromosomes getting mixed (called as Crossover).

On the other hand, a Son always gets his father’s Y Chromosome and that too almost intact without any changes because there is no corresponding another Y chromosome in his cells to do any mixing as his combination is XY, while that of females is XX which hence allows for mixing as both are X Chromosomes.

Women never get this Y Chromosome in their body. And hence Y Chromosome plays a crucial role in modern genetics in identifying the Genealogy ie male ancestry of a person. And the Gotra system was designed to track down the root Y Chromosome of a person quite easily. If a person belongs to Angirasa Gotra then it means that his Y Chromosome came all the way down over thousands of years of timespan from the Rishi Angirasa!

And if a person belongs to a Gotra (say Bharadwaja) with Pravaras (Angirasa, Bhaarhaspatya, Bharadwaja), then it means that the person’s Y Chromosome came all the way down from Angirasa to Bhaarhaspatya to Bharadwaja to the person.

This also makes it clear why females are said to belong to the Gotra of their husbands after marriage. That is because women do not carry Y Chromosome, and their Sons will carry the Y Chromosome of the Father and hence the Gotra of a woman is said to be that of her husband after marriage.

Y is the only Chromosome which does not have a similar pair in the human body. The pair of the Y Chromosome in humans is X Chromosome which is significantly different from Y Chromosome. Even the size of the Y Chromosome is just about one third the size of the X Chromosome. In other words throughout evolution the size of the Y Chromosome has been decreasing and it has lost most of its genes and has been reduced to its current size.

Scientists are debating whether Y Chromosome will be able to survive for more than a few million years into the future or whether it will gradually vanish, and if it does so whether it will cause males to become extinct! Obviously because Y Chromosome is the one which makes a person male or a man.

Y Chromosome has to depend on itself to repair any of its injuries and for that it has created duplicate copies of its genes within itself. However this does not stop DNA damages in Y Chromosome which escape its local repair process from being propagated into the offspring males.

This causes Y Chromosomes to accumulate more and more defects over a prolonged period of evolution and scientists believe that this is what is causing the Y Chromosome to keep losing its weight continuously.

Y Chromosome which is crucial for the creation and evolution of males has a fundamental weakness which is denying it participation in the normal process of evolution via Chromosomal mix and match to create better versions in every successive generation, and this weakness MAY lead to the extinction of Y Chromosome altogether over the next few million years, and if that happens scientists are not sure whether that would cause males to become extinct or not.

And that is because Scientists are not sure whether any other Chromosome in the 23 pairs will be able to take over the role of the Y Chromosome or not.

On the other hand, it is not necessary that humanity will not be able to survive if males become extinct. Note that females do not need the Y Chromosome, and since all females have X Chromosomes, it would be still possible to create a mechanism where X Chromosomes from different females are used to create offspring, say like injecting the nuclei from the egg of one female into the egg of another female to fertilize it and that would grow into a girl child. So yes, that would be a humanity where only females exist.

Even modern scientists have concluded that children born to parents having blood relation (like cousins) can have birth defects. For example, there is a recessive dangerous gene in one person.

What this means is that say a person is carrying a dangerous abnormality causing gene in one of his chromosome, but whose effect has been hidden in that person (or is not being expressed) because the corresponding gene in the pairing Chromosome is stronger and hence is preventing this abnormality causing gene from activating.

Now there are fair chances that his offsprings will be carriers of these genes throughout successive generations. As long as they keep marrying outside his genetic imprint, there is a fair chance that the defective gene will remain inactive since others outside this person’s lineage most probably do not have that defective gene.

Now if after 5-10 generations down the line say one of his descendants marries some other descendant who may be really far away cousins. But then there is a possibility that both of them are still carrying the defective gene, and in that case their children will definitely have the defective gene express itself and cause the genetic abnormality in them as both the Chromosomes in the pair have the defective genes.

Hence, the marriages between cousins always have a chance of causing an otherwise recessive, defective genes to express themselves resulting in children with genetic abnormalities.

So, Ancient Vedic Rishis created the Gotra system where they barred marriage between a boy and a girl belonging to the same Gotra no matter how deep the lineage tree was, in a bid to prevent inbreeding and completely eliminate all recessive defective genes from the human DNA.

‘भारत माता की जय’ हमारे हृदय की भाषा है –परम पूज्य डॉ.मोहन भागवत जी




‘भारत माता की जय’ हमारे हृदय की भाषा है –परम पूज्य डॉ.  मोहन भागवत जी

दुनिया भारत को विश्वगुरु की भूमिका में देख रही है – डॉ. मोहन भागवत जी


भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूज्य डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम हिन्दू समाज कहते हैं, तब उसका अर्थ होता है, संगठित हिन्दू. यदि हममें किसी भी प्रकार का भेद और झगड़ा है, तब हम अस्वस्थ समाज हैं. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए हमें संगठित रहना होगा, सभी प्रकार के भेद छोड़ने होंगे, विविधताओं का सम्मान करना होगा. यही आदर्श और उपदेश हमारे पूर्वजों के थे. हिन्दू संगठित होगा, तब ही भारत विश्वगुरु बनेगा. सरसंघचालक जी 08 फरवरी को बैतूल में आयोजित हिन्दू सम्मलेन में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मत-पंथ की भिन्नता को लेकर दुनिया में रक्त-पात किया जा रहा है. अर्थ के आधार पर भी संघर्ष है. इन संघर्षों का समाधान उनके पास नहीं है. समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है. दुनिया भारत को विश्वगुरु की भूमिका में देख रही है और भारत को विश्वगुरु बनाने का दायित्व हिन्दू समाज पर है. इसलिए हिन्दू समाज का संगठित रहना जरूरी है. इस देश में जाति-पंथ के आधार पर कोई भेद नहीं था. यहाँ सबमें एक ही तत्व को देखा गया. सब एक ही राम के अंश हैं.

सरसंघचालक जी ने कहा कि हमें एक होकर अपने समाज की सेवा करनी होगी. समाज के जो बंधु कमजोर हैं, पिछड़ गए हैं, हमारा दायित्व है कि उन्हें सबल और समर्थ बनाएं. हमें एक बार फिर से देने वाला समाज खड़ा करना है. बहुत वर्षों पहले अंग्रेजों ने हमें टूटा हुआ आईना पकड़ा दिया था. इस टूटे हुए आईने में हमें समाज में भेद दिखाई देते हैं. हमें अंग्रेजों के इस आईने को फैंकना होगा. उन्होंने बैतूल में हिन्दू सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य बताया कि यह प्राचीन भारत का केंद्र बिंदु है. संगठित हिन्दू समाज का संदेश यहाँ से सब जगह प्रभावी ढंग से जाएगा. समाज को सबल बनाना और भारत को विश्वगुरु बनाना, इस हिन्दू सम्मेलन का उद्देश्य है.

इस अवसर पर प्रख्यात रामकथा वाचक पंडित श्यामस्वरूप मनावत जी ने कहा कि दुनिया में केवल भारत ही है, जिसने विश्व कल्याण का उद्घोष किया. हमारे ऋषि-मुनियों ने यह नहीं कहा कि केवल भारत का कल्याण हो, बल्कि वे बार-बार दोहराते हैं कि विश्व का कल्याण हो और प्राणियों में सद्भाव हो. दुनिया में एकमात्र भारतीय संस्कृति है, जिसमें कहा गया है कि धर्म की जय हो और अधर्म का नाश हो. यहाँ यह नहीं कहा गया कि केवल हिन्दू धर्म की जय हो और बाकि पंथों का नाश हो. भारत भूमि ही है, जहाँ सब पंथों का सम्मान किया जाता है.

उत्तराखण्ड से आए आध्यात्मिक गुरु संत सतपाल महाराज ने महिला सशक्तिकरण के लिए समस्त समाज से आह्वान किया. उन्होंने कहा कि संत समाज का यह दायित्व है कि आध्यात्मिक शक्ति के जागरण से पुन: इस देश में मातृशक्ति की प्रतिष्ठा को स्थापित करे. समाज को भी महिला सशक्तिकरण के लिए आगे आना होगा. इस अवसर पर मंच पर संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी, आयोजन समिति के अध्यक्ष गेंदूलाल वारस्कर, सचिव बुधपाल सिंह ठाकुर और वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. शैला मुले भी उपस्थित थीं. कार्यक्रम का संचालन मोहन नागर ने किया. इस अवसर पर गोंडी भाषा में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ‘लोकांचल’ के विशेषांक और बैतूल पर केन्द्रित स्मारिका ‘सतपुड़ा समग्र’ का विमोचन भी किया गया.

हिन्दुस्थान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है

हिन्दू सम्मेलन में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जापान में रहने वाला जापानी, अमेरिका का निवासी अमेरिकन और जर्मनी का नागरिक जर्मन कहलाता है, इसी प्रकार हिन्दुस्थान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है. लोगों के पंथ-मत और पूजा पद्धति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन हिन्दुस्थान में रहने के कारण सबकी राष्ट्रीयता एक ही है – हिन्दू. इसलिए भारत के मुसलमानों की राष्ट्रीयता भी हिन्दू है. भारत माता के प्रति आस्था रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है. मत-पंथ अलग होने के बाद भी हम एक हैं, इसलिए हमको मिलकर रहना चाहिए.
सरसंघचालक ने ये संकल्प कराए – 1. समाज के कमजोर बंधुओं को समर्थ बनाने का प्रयास करूंगा. 2. अपने घर-परिसर में पर्यावरण की रक्षा करूंगा. 3. अपने घर में अपने जीवन के आचरण, महापुरुषों के प्रेरक प्रसंग अपने परिवार को सुनाकर भारत माता की आरती करूंगा. 4. अपने देश का नाम दुनिया में ऊंचा करने के लिए जीवन में सभी कार्य परिश्रम के साथ निष्ठा और प्रामाणिकता से करूंगा. 5. भेदभाव नहीं करूंगा. समाज को संगठित रखने का प्रयास करूंगा.

भारत माता की जय है हृदय की भाषा

हिन्दू समाज में भाषा, जाति और पूजा पद्धति की भिन्नता है, लेकिन इससे हमारी एकता को कोई खतरा नहीं है. यह विविधता तो हमारी पहचान है. हमारी हृदय की भाषा तो एक है. ‘भारत माता की जय’ हृदय की भाषा है. उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से पश्चिम में सभी जगह भारत माता की जय, इन्हीं शब्दों में बोला जाता है.
बैतूल जेल, जहाँ गुरुजी को कैद में रखा गया
अपने प्रवास के दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी 11 बजे बैतूल जेल भी पहुंचे. इस दौरान सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी और क्षेत्र संघचालक अशोक सोहनी जी भी उनके साथ थे. 68 साल पहले वर्ष 1948 में प्रतिबंध के दौरान संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ को बैतूल जेल में ही रखा गया था. गुरुजी को यहाँ तीन माह बंद करके रखा गया था. उन्हें जिस बैरक में रखा गया था, आज उस बैरक में उनका चित्र लगा है. डॉ. भागवत ने गुरूजी के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की.

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

भारतीय नववर्ष उत्सव आयोजनों हेतु समिति की घोषणा




नववर्ष उत्सव आयोजनों हेतु समिति की घोषणा 

भारतीय नववर्ष के प्रति युवा वर्ग में विशेष दिलचस्पी बड़ी है - प्रो0 चन्द्रदेव प्रसाद

कोटा 08 फरवरी । “ नववर्ष उत्सव आयोजन समिति “ के कोटा महानगर संयोजक प्र्रो0 चन्द्रदेव प्रसाद ने संझिप्त सम्बोधन में कहा “ भारतीय नववर्ष पूरे देश में प्रमुख त्यौहार के रूप में मनाया जानें लगा है। इससे जुड़े तिथि, महूर्त, वार,व्रत - त्यौहार हमारे देश के रोम - रोम में बसे हुए हैं, सभी महत्वपूर्ण कार्य इसी संवत गणना से होते हैं। भारतीय जीवन पद्यती से इन्हे अलग नहीं जा सकता। ” उन्होने कहा “ अब स्वदेशी नववर्ष के प्रारम्भ दिवस वर्ष प्रतिपदा के प्रति युवा वर्ग में तेजी से आकर्षण बढ़ रहा है। सम्पूर्ण देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी अब भारतीय नववर्ष शुभारम्भ दिवस वर्ष प्रतिपदा अपनी उत्सव पद्यती से अलग आकर्षण और आभा प्रस्तुत कर रहा है। इससे जुडे़ सटीक वैज्ञानिक तथ्यों और प्राकृतिक प्रभावों को लोग गंभीरता से ले रहे हैं। पाश्चात्य अनुसंधान कर्त्ता इसकी प्रमाणिकता से चकित भी हैं। ” 


भारतीय नववर्ष, विक्रम संवत 2074 चैत्र शुक्ल एकम् दिनांक 28 मार्च 2017 को आ रहा है। इसे धूमधाम से मनाये जानें एवं आयोजनों को सम्पादित करवाने हेतु “ नववर्ष उत्सव आयोजन समिति “ के महानगर संयोजक प्रो0 चन्द्रदेव प्रसाद , नव नियक्त महानगर अध्यक्ष गोविन्द नारायण अग्रवाल एवं नव नियुक्त महानगर मंत्री सत्यनारायण श्रीवास्तव ने मंगलवार को रात्रि में मानव विकास भवन कोटा में सम्पन्न बैठक में नवगठित समिति की घोषणा की। बैठक में समिति के मंत्री सत्यनारायण श्रीवास्तव ने नवगठित समिति को पढ़ कर सुनाया। बैठक में भारतीय नववर्ष से जुड़ी प्रचार सामग्री का विमोचन किया जिसमें कार स्टिकर, स्टीकर, पेम्पलेट एवं भगवा झण्डियां प्रमुख थीं। 


समिति के मीडिया प्रभारी अरविन्द सिसोदिया ने बताया कि समिति के संरक्षक मण्डल में बाबा सनातनपुरी महाराज थेगड़ा धाम, पूज्य हेमा सरस्वती मौजीबाबा गुफा एवं श्री शेलेन्द्र भार्गव गोदावरी धाम हैं तथा मार्गदर्शक मण्डल में कुलपति प्रो0 पी के दशोरा, कुलपति प्रो0 एन0 पी0 कौशिक, महापौर महेश विजय, कोटा नगर विकास न्यास अध्यक्ष रामकुमार मेहता, ताराचन्द्र गोयल (गोयल प्रोटीन्स), नवीन माहेश्वरी(एलन केरियर),महेश गुप्ता (शिव ज्योती), कोटा व्यापार महासंघ अध्यक्ष क्रांति जैन, गोविन्दराम मोदी, जी डी पटेल, अवधेश दुबे अधिशाषी अभियंता, सतीश कुमार गुप्ता, राकेश अग्रवाल, आनंद राठी, रामगोपाल अग्रवाल, डॉ0 रामअवतार अग्रवाल, हरपाल त्यागी, विशाल गर्ग होंगे।


इसी प्रकार समिति में उपाध्यक्ष श्रीमती सुनीता व्यास उपमहापौर, युधिष्ठर सिंह हाड़ा, कंुजबिहारी गौतम, बृजेश शर्मा नीटू,श्रीनाथ मित्तल,मधु विश्नोई,डॉ0 प्राची दीक्षित, सत्यनारायण अग्रवाल, करण माहेश्वरी, रमेश जेठमलानी होंगे इसी प्रकार सहमंत्री मोहन मालव, मुकेश विजय, देबू राही, आनंद सक्सेना, सीमा भारद्वाज,नीना भटनागर, रेखा पंचोली,ललित चतुर्वेदी, ललित चित्तौड़ा,श्याम बिहारी नाहर,अजय चौधरी,कोषाध्यक्ष बी0 एल0 शर्मा एवं महेन्द्र दुबे । समिति के मीडिया प्रभारी अरविन्द सिसोदिया, प्रतापसिंह तोमर, अनिल तिवारी, मनोहर पारीक, आशीष मेहता, प्रकाशन प्रभारी डॉ0 एन0 एल0 हेड़ा,संदीप पालीवाल,राकेश मेहरा होंगे। 


इसी के साथ समिति में सदस्य के रूप में प्रभा तंवर, वीरेन्द्र जैन, नाथूलाल पहलवान, हरमीत सिंह आनंद, ओम अडवाणी, जितेन्द्र गोयल, रवि अग्रवाल, विपुल अग्रवाल, राकेश चावला एडवोकेट, राजेन्द्र मेघवाल, रविन्द्र बैरवा, मनोज जैन, अनिल अग्रवाल बैंगलोरसिल्क वाले,मोहित परिहार,रोहित चौधरी होंगे। इसके अतिरिक्त कोटा महानगर को 10 उपनगरों में विभाजित कर नगरों की समितियों का एक सप्ताह में ही गठन किया जायेगा।
समिति की अगामी बैठक 16 फरवरी को सायं 6.30 बजे मानव विकास भवन कोटा पर रखी गई है। जिसमें केन्द्रीय एवं उप नगरीय समितियों के कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया जायेगा।


बैठक में महानगर संयोजक प्रो0 चन्द्रदेव प्रसाद, महानगर अध्यक्ष गोविन्द नारायण अग्रवाल, महानगर मंत्री सत्यनारायण श्रीवास्तव, मार्गदर्शक मण्डल सदस्य रामकुमार मेहता अध्यक्ष नगर विकास न्यास एवं सतीश कुमार गुप्ता,युधिष्ठर सिंह हाड़ा,अरविन्द सिसोदिया,मोहन मालव,आनंद सक्सेना,प्रतापसिंह तोमर,मनोहर पारीक,संदीप पालीवाल, देबू राही, डॉ0 प्राची दीक्षित, मधु विश्नोई, नीना भटनागर,रेखा पंचोली, सीमा भरद्वाज, मनोज कुमार मीणा,राकेश कुमार मेहरा,महेन्द्र दुबे, महेन्द्र कुमार भरद्वाज, राजेश चौहान, पवनसिंह,रामदास जसोन्दा, रोहित चौधरी, नवीन अमरवाल,उदय सिंह,देवेन्द्र जांगिड,श्याम बिहारी नाहर,ासेमप्रकाश प्रजापति,धमेन्द्र दुबे, प्रदीप सिंह आदि ने भाग लिया ।


मीडिया प्रभारी,अरविन्द सिसोदिया9509559131