रविवार, 14 जनवरी 2018

न्यायपालिका : अनेकों प्रश्नों के जबाव नहीं !




अभिषेक मनु सिंघवी सीडी स्कैंडल (2012) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अभिषेक मनु एक सनसनीखेज सीडी सामने आने के बाद सेक्स स्कैंडल में फंसे थे। सिंघवी के यहां ड्राइवर रह चुके एक व्यक्ति ने यह सीडी बनाई थी। सीडी में कथित तौर पर अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट के लॉयर्स चैंबर में एक महिला वकील के साथ आपत्तिजनक पोजिशन में थे।


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- ओमपाल सिंह निडर ( की फेसबुक बाल से )
https://www.facebook.com/kaviompalsingh.nidar/posts/2013020972246855

देश की न्यायपालिका में बड़े गोरखधंधे का पर्दाफ़ाश, अदालतों की ये हकीकत जानकर हों जायेंगे हैरान...!
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भारतीय न्याय व्यवस्था पर कई बार ऊँगली उठती रही है कि यहाँ इन्साफ मिलने में काफी लंबा वक़्त लगता है और आम इंसान को तो कई बार इन्साफ मिल ही नहीं पाता. अदालतों में करोड़ों केस पेंडिंग हैं, जो ना जाने कितने सालों से न्याय का इन्तजार कर रहे हैं. इस दुखद स्थिति का मुख्य कारण है न्यायपालिका का आम जनता की समस्याओं के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैय्या और शीर्ष पदों पर कब्जा करे बैठे कई ऐसे जज जिन्हे राजनीतिक पार्टियों द्वारा पुरस्कृत किया जाता रहता है.
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सेक्स, रिश्वत, ब्लैकमेल और सौदे द्वारा जजों की नियुक्ति
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जजों की नियुक्ति के पीछे का काला सच तब सामने आया था, जब कोंग्रेसी नेता और जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी का सेक्स स्कैंडल सामने आया था, जिसमे एक महिला उनसे पूछती हुई नज़र आ रही थी कि वो उसे जज कब बनाएंगे? उस वक़्त सिंघवी ना केवल सुप्रीम कोर्ट में वकील थे बल्कि जजों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम कमिटी के सदस्य भी थे.
यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के लोगों ने कभी उन न्यायाधीशों और वकीलों से सवाल करने की जहमत नहीं उठायी, जिनकी राजनीतिक पार्टियों की चमचागिरी करके ऊंचे पदों पर नियुक्ति हो गयी. अंग्रेजों के वक़्त से देश में जजों की नियुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम लागू है, जिसमे वरिष्ठ जज ही नए जजों की की नियुक्ति करते हैं. इसने न्यायपालिका को केवल भ्रष्ट और पक्षपातपूर्ण बनाया है.
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जज खुद ही फैसला करते है कि कौन जज बनेगा
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उदाहरण के तौर पर इस सिस्टम के तहत सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति करते हैं. हाई कोर्ट के जज सेशन कोर्ट के जजों की नियुक्ति करते हैं. और ज्यादातर ऐसे में या तो नियुक्ति के लिए वरिष्ठ जजों को मोटी रिश्वत खिलानी पड़ती है और या फिर चमचागिरी करनी होती है. क्या यह पारदर्शिता है?
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जो चमचागिरी करने में ज्यादा अच्छा है, ज्यादातर उसे ही नियुक्ति मिलती है. अंग्रेजों ने भारतियों का शोषण करने के लिए इस सिस्टम को बनाया था ताकि न्यायपालिका में कोई आम इंसान कभी प्रवेश ही नहीं कर सके. कैसा रहेगा यदि आईएएस अधिकारी खुद ही नए आईएएस अधिकारियों की और आईपीएस अधिकारी खुद ही नए आईपीएस अधिकारीयों की नियुक्ति कर ले?
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देश का बड़ा गर्क करने का इससे अच्छा सिस्टम कोई हो ही नहीं सकता. अभिषेक मनु सिंघवी के पास भी हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति की पावर थी, यही कारण है कि अनूसुया सलवान नाम की महिला से उसने नियुक्ति के बदले सेक्स की मांग कर ली. अब ऐसे कई अन्य केस देखिये कि कैसे नेता कॉलेजियम सिस्टम का फायदा उठाकर अपने विश्वासपात्र और पिट्ठू लोगों को न्यायपालिका में जज बनाते हैं.
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हाई कोर्ट का जज बनने के लिए दो मुख्य मानदंड हैं-
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1. वह भारत का नागरिक होना चाहिए.
2. उसे 10 साल वकालत का तजुर्बा होना चाहिए या राज्य सरकार का एडवोकेट जनरल होना चाहिए.
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मोदी को फंसाने के लिए कोंग्रेसी सीएम की साजिश
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, जो फिलहाल आय से अधिक संपत्ति के केस में शामिल है, उन्होंने अपनी बेटी अभिलाषा कुमारी को हाई कोर्ट जज बनाने के लिए उसे अपने राज्य हिमाचल प्रदेश का एडवोकेट जनरल बना लिया, जोकि परिवारवाद का सीधा मामला है. एडवोकेट जनरल बनाने के कुछ ही वक़्त बाद उन्होंने अपनी बेटी को कॉलेजियम के जरिये से हाई कोर्ट का जज बनवा दिया और उसे गुजरात हाई कोर्ट में पोस्टिंग दिलवा दी.
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उसे गुजरात हाई कोर्ट भेजने के पीछे मुख्य उद्देश्य था तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का विरोध करना और हर मोर्चे पर उन पर हमला करना. अभिलाषा के कई फैसले सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द भी किये गए.
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मोदी के खिलाफ लालू की खौफनाक साजिश
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लालू प्रसाद यादव ने भी यही किया, 1990 में जब लालू बिहार का सीएम था, उसने मुस्लिम तुष्टिकरण और वोटबैंक के लिए आफताब आलम को इसी तरह पहले हाई कोर्ट का जज बनवा दिया और बाद में कॉलेजियम के जरिये वो सुप्रीम कोर्ट जज भी बन गया. मजेदार बात ये है कि गुजरात दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा दायर किये गए सभी केस बेहद रहस्य्मयी तरीके से आफताब आलम की बेंच के पास ही गए. स्पष्ट है कि ये कोई संयोग नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश थी.
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बाद में एमबी सोनी की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने पाया कि नरेंद्र मोदी को जबरदस्ती दोषी ठहराने के लिए आफताब आलम पक्षपाती फैसले सुना रहा था, जिसके बाद सोनी को भारत के मुख्य न्यायधीश से कहना पड़ा कि गुजरात दंगों के केस आफताब आलम के पास ना भेजे जाएँ.
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मुख्य न्यायधीश ने आफताब आलम द्वारा सुनाये गए 12 फैसलों की जांच की और पाया कि सभी फैसले नरेंद्र मोदी के खिलाफ पक्षपाती विचारों के साथ सुनाये गए थे. इसके बाद आफताब आलम को नरेंद्र मोदी और गुजरात दंगों से जुड़े केसों से हटा दिया गया.
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तुष्टिकरण के फैसले करती है न्यायपालिका.
आइये अब ज़रा हाल-फिलहाल में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा लिए गए फैसलों पर नज़र डालते हैं. आपको साफ़ पता चल जाएगा कि कैसे केवल एक धर्म के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और एक सम्प्रदाय के लोगों का तुष्टिकरण किया जा रहा है.
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उदाहरण के तौर पर-.
1. कोर्ट रोहिंग्या मुस्लिमों के समर्थन में बावले हुए जा रहे हैं, जबकि भारत सरकार ने खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि रोहिंग्या देश के लिए ख़तरा हैं. भ्रष्ट जजों को मानवता याद आ रही है लेकिन पिछले एक दशक से अधिक वक़्त से कश्मीरी पंडित दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, उनके लिए मानवता सोई रही.
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2. कोर्ट ने फ़टाफ़ट जल्लिकट्टु पर बैन लगा दिया क्योंकि बैल को चोट लगने का ख़तरा होता है, मानवता की खातिर, जीव दया की खातिर. मगर बकरीद पर करोड़ों बेजुबान जीवों को हलाल कर दिया जाता है, जिससे जल प्रदूषण भी होता है, उसपर जज साहब के मुँह पर दही जम जाता है. तब सेकुलरिज्म के बुर्के में छिपे नज़र आते हैं.
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3. कोर्ट हाजी अली दरगाह के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती, जहाँ महिलाओं को जाने की इजाजत नहीं है. मगर शनि शिंगनापुर में महिला अधिकारों को लेकर बहुत उत्सुक थी.
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4. दही हांडी में ऊंचाई ज्यादा होती है, चोट लग सकती है, इसलिए उस पर रोक लगा दी थी कोर्ट ने, मगर मुहर्रम में लोग खुद को और छोटे-छोटे मासूम बच्चों को चाकू और ब्लेडों से घायल कर लेते हैं, उस वक़्त कोर्ट की जबान पर ताला लग जाता है.
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5. कोर्ट में करोड़ों केस पेंडिंग हैं, उसकी चिंता नहीं है, मुम्बई में पानीपुरी बेचने वालों के बारे में परेशान हैं.
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6. कर्नल पुरोहित को 9 साल बाद जमानत मिली, जबकि उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं था और चार्जशीट तक फाइल नहीं की गयी थी, मगर सोनिया गाँधी, जिसके खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में प्रथम दृष्टया सबूत भी थे, उसे 9 मिनट में जमानत मिल गयी.
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7. दोषी साबित होने के बावजूद लालू यादव को क्यों जमानत दी गयी? निर्भया बलात्कार काण्ड के सबसे खौफनाक आरोपी मुहम्मद अफरोज को क्यों छोड़ दिया गया?
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8. दिवाली पर दिल्ली में प्रदूषण होता है मगर क्रिसमस और नए साल पर पटाखों से ऑक्सीजन निकलती है?
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क्या ये सभी केस पक्षपातपूर्ण रवैये को नहीं दिखाते ?
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मोदी के फैसले को खारिज कर दिया सुप्रीम कोर्ट ने
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इसी को देखते हुए मोदी सरकार ने कोलेजियम सिस्टम को हटाकर NJAC (नेशनल जुडिशल अपॉइंटमेंट कमीशन) को लागू करने का फैसला किया था, मगर सुप्रीम कोर्ट के जजों को इससे दिक्कत है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के 28 जजों में से 20 जज कांग्रेस के राज में बनाये गए थे. मोदी सरकार ने जब NJAC का प्रस्ताव पेश किया तो सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इसे खारिज कर दिया.
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क्योंकि NJAC में कोलेजियम की तरह नहीं बल्कि मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक कमिटी, जिसमें दो सुप्रीम कोर्ट के जजों के अलावा कानून मंत्री और समाज के दो प्रतिष्ठित व्यक्ति जजों की नियुक्ति करते हैं. इससे ना केवल न्यायपालिका का सिस्टम पारदर्शी होगा बल्कि चापलूस और भ्रष्टाचारियों की जगह काबिल लोग जज बनेंगे. इसे दो बार पेश किया गया और दोनों बार सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.
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क्या कोई आम इंसान अपने केस का जज खुद ही बन सकता है? नहीं! मगर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला खुद ही कर लिया कि उनके लिए क्या अच्छा है. सवाल ये है कि क्या ये देखा जाना चाहिए कि देश के हित में क्या है या ये देखा जाना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों के हित में क्या है?

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

स्वामी विवेकानन्द : प्रेरक प्रसंग



स्वामी विवेकानंद के ये 8 अनमोल विचार जीवन से दूर कर सकते हैं निराशा


आज स्वामी विवेकानंद जी जन्मदिन हैं. उनके विचार आज भी प्रासांगिक बने हुए हैं. स्वामी जी के विचार किसी भी व्यक्ति की निराशा को दूर कर सकते हैं. उसमें आशा भर सकते हैं. प्रस्तुत हैं स्वामी जी के कुछ ऐसे ही विचार ...

आज स्वामी विवेकानंद जी जन्मदिन हैं. उनके विचार आज भी प्रासांगिक बने हुए हैं. स्वामी जी के विचार किसी भी व्यक्ति की निराशा को दूर कर सकते हैं. उसमें आशा भर सकते हैं. प्रस्तुत हैं स्वामी जी के कुछ ऐसे ही विचार ...

1-उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते.

2-आप जो भी सोचेंगे. आप वही हो जाएंगे. अगर आप खुद को कमजोर सोचेंगे तो आप कमजोर बन जाएंगे. अगर आप सोचेंगे की आप शक्तिशाली हैं तो आप शाक्तिशाली बन जाएंगे.

3-एक विचार चुनिए और उस विचार को अपना जीवन बना लिजिए. उस विचार के बारे में सोचें उस विचार के सपने देखें. अपने दिमाग, अपने शरीर के हर अंग को उस विचार से भर लें बाकी सारे विचार छोड़ दें. यही सफलता का रास्ता हैं.

4-एक नायक की तरह जिएं. हमेशा कहें मुझे कोई डर नहीं, सबको यही कहें कोई डर नहीं रखो

5-ब्रम्हाण्ड की सारी शक्तियाँ पहले से हीं हमारे भीतर मौजूद हैं. हम हीं मूर्खता पूर्ण आचरण करते हैं, जो अपने हाथों से अपनी आँखों को ढंक लेते हैं….. और फिर चिल्लाते हैं कि चारों तरफ अँधेरा है, कुछ नजर नहीं आ रहा है.

6-अगर आप पौराणिक देवताओं में यकीन करते हैं और खुद पर यकीन नहीं करते हैं तो आपको मुक्ति नहीं मिल सकती है. अपने में विश्वास रखो और इस विश्वास पर खड़े हो जाओ, शक्तिशाली बनो, इसी की हमें जरूरत है.

7-ताकत ही जीवन है और कमजोरी मौत है

8-ब्रम्हाण्ड की सारी शक्तियाँ पहले से हीं हमारे भीतर मौजूद हैं. हम हीं मूर्खता पूर्ण आचरण करते हैं, जो अपने हाथों से अपनी आँखों को ढंक लेते हैं…और फिर चिल्लाते हैं कि चारों तरफ अँधेरा है, कुछ नजर नहीं आ रहा है.

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स्वामी विवेकानन्द के जीवन के 5 प्रेरक प्रसंग

 प्राचीन भारत से लेकर वर्तमान समय तक यदि किसी शख्सियत ने भारतीय युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वो है स्वामी विवेकानंद। विवेकानंद एक ऐसा व्यक्तितत्व है, जो हर युवा के लिए एक आदर्श बन सकता है। उनकी कही एक भी बात पर यदि कोई अमल कर ले तो शायद उसे कभी जीवन में असफलता व हार का मुंह ना देखना पड़े। आइए आज जानते है स्वामी विवेकानंद से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक किस्सों को जो किसी के लिए भी प्रेरणा बन कर उसका जीवन बदल सकते हैं। हम यहाँ पर आपको उनके जीवन से जुड़े पांच प्रेरक प्रसंग बता रहे है –

केवल लक्ष्य पर ध्यान लगाओ

एक बार स्वामी विवेकानंद अमेरिका में भ्रमण कर रहे थे। अचानक, एक जगह से गुजरते हुए उन्होंने पुल पर खड़े कुछ लड़कों को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बन्दूक से निशाना लगाते देखा। किसी भी लड़के का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था। तब उन्होंने ने एक लड़के से बन्दूक ली और खुद निशाना लगाने लगे। उन्होंने पहला निशाना लगाया और वो बिलकुल सही लगा, फिर एक के बाद एक उन्होंने कुल 12 निशाने लगाए। सभी बिलकुल सटीक लगे।
ये देख लड़के दंग रह गए और उनसे पुछा – स्वामी जी, भला आप ये कैसे कर लेते हैं ? आपने सारे निशाने बिलकुल सटीक कैसे लगा लिए? स्वामी विवेकनन्द जी बोले असंभव कुछ नहीं है, तुम जो भी कर रहे हो अपना पूरा दिमाग उसी एक काम में लगाओ। अगर तुम निशाना लगा रहे हो तो तम्हारा पूरा ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर होना चाहिए। तब तुम कभी चूकोगे नहीं। यदि तुम अपना पाठ पढ़ रहे हो तो सिर्फ पाठ के बारे में सोचो।
स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda)
सत्य का साथ कभी न छोड़े

स्वामी विवेकानंद प्रारंभ से ही एक मेधावी छात्र थे और सभी लोग उनके व्यक्तित्व और वाणी से प्रभावित रहते थे। जब वो अपने साथी छात्रों से कुछ बताते तो सब मंत्रमुग्ध हो कर उन्हें सुनते थे। एक दिन कक्षा में वो कुछ मित्रों को कहानी सुना रहे थे, सभी उनकी बातें सुनने में इतने मग्न थे की उन्हें पता ही नहीं चला की कब मास्टर जी कक्षा में आए और पढ़ाना शुरू कर दिया। मास्टर जी ने अभी पढऩा शुरू ही किया था कि उन्हें कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी।कौन बात कर रहा है? मास्टर जी ने तेज आवाज़ में पूछा। सभी छात्रों ने स्वामी जी और उनके साथ बैठे छात्रों की तरफ इशारा कर दिया। मास्टर जी क्रोधित हो गए।

उन्होंने तुरंत उन छात्रों को बुलाया और पाठ से संबधित प्रश्न पूछने लगे।  जब कोई भी उत्तर नहीं दे पाया। तब अंत में मास्टर जी ने स्वामी जी से भी वही प्रश्न किया, स्वामी जी तो मानो सब कुछ पहले से ही जानते हों , उन्होंने आसानी से उस प्रश्न का उत्तर दे दिया। यह देख मास्टर जी को यकीन हो गया कि स्वामी जी पाठ पर ध्यान दे रहे थे और बाकी छात्र बात-चीत में लगे हुए थे।फिर क्या था।

उन्होंने स्वामी जी को छोड़ सभी को बेंच पर खड़े होने की सजा दे दी। सभी छात्र एक-एक कर बेच पर खड़े होने लगे, स्वामी जी ने भी यही किया। मास्टर जी बोले – नरेन्द्र तुम बैठ जाओ!नहीं सर, मुझे भी खड़ा होना होगा क्योंकि वो मैं ही था जो इन छात्रों से बात कर रहा था। स्वामी जी ने आग्रह किया। सभी उनकी सच बोलने की हिम्मत देख बहुत प्रभावित हुए।

स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda)
मुसीबत से डरकर भागो मत, उसका सामना करो

एक बार बनारस में स्वामी विवेकनन्द जी मां दुर्गा जी के मंदिर से निकल रहे थे कि तभी वहां मौजूद बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वे उनसे प्रसाद छिनने लगे वे उनके नज़दीक आने लगे और डराने भी लगे। स्वामी जी बहुत भयभीत हो गए और खुद को बचाने के लिए दौड़ कर भागने लगे। वो बन्दर तो मानो पीछे ही पड़ गए और वे भी उन्हें पीछे पीछे दौड़ाने लगे।

पास खड़े एक वृद्ध सन्यासी ये सब देख रहे थे, उन्होनें स्वामी जी को रोका और कहा – रुको! डरो मत, उनका सामना करो और देखो क्या होता है। वृद्ध सन्यासी की ये बात सुनकर स्वामी जी तुरंत पलटे और बंदरों के तरफ बढऩे लगे। उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उनके ऐसा करते ही सभी बन्दर तुरंत भाग गए। उन्होनें वृद्ध सन्यासी को इस सलाह के लिए बहुत धन्यवाद किया।

इस घटना से स्वामी जी को एक गंभीर सीख मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक संबोधन में इसका जिक्र भी किया और कहा – यदि तुम कभी किसी चीज से भयभीत हो, तो उससे भागो मत, पलटो और सामना करो। वाकई, यदि हम भी अपने जीवन में आये समस्याओं का सामना करें और उससे भागें नहीं तो बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जायेगा!

स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda)
माँ से बढ़कर कोई नहीं

स्वामी विवेकानंद जी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया, मां की महिमा संसार में किस कारण से गाई जाती है? स्वामी जी मुस्कराए, उस व्यक्ति से बोले, पांच सेर वजन का एक पत्थर ले आओ। जब व्यक्ति पत्थर ले आया तो स्वामी जी ने उससे कहा, अब इस पत्थर को किसी कपड़े में लपेटकर अपने पेट पर बाँध लो और चौबीस घंटे बाद मेरे पास आओ तो मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा।

स्वामी जी के आदेशानुसार उस व्यक्ति ने पत्थर को अपने पेट पर बांध लिया और चला गया। पत्थर बंधे हुए दिनभर वो अपना कम करता रहा, किन्तु हर छण उसे परेशानी और थकान महसूस हुई। शाम होते-होते पत्थर का बोझ संभाले हुए चलना फिरना उसके लिए असह्य हो उठा। थका मांदा वह स्वामी जी के पास पंहुचा और बोला मैं इस पत्थर को अब और अधिक देर तक बांधे नहीं रख सकूंगा।

एक प्रश्न का उत्तर पाने क लिए मै इतनी कड़ी सजा नहीं भुगत सकता स्वामी जी मुस्कुराते हुए बोले, पेट पर इस पत्थर का बोझ तुमसे कुछ घंटे भी नहीं उठाया गया। मां अपने गर्भ में पलने वाले शिशु को पूरे नौ माह तक ढ़ोती है और ग्रहस्थी का सारा काम करती है। संसार में मां के सिवा कोई इतना धैर्यवान और सहनशील नहीं है। इसलिए माँ से बढ़ कर इस संसार में कोई और नहीं।
स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda)

नारी का सदैव सम्मान करे

एक विदेशी महिला स्वामी विवेकानंद के समीप आकर बोली मैं आपस शादी करना चाहती हूं। विवेकानंद बोले क्यों?मुझसे क्यों ?क्या आप जानती नहीं की मैं एक सन्यासी हूं?औरत बोली  मैं आपके जैसा ही गौरवशाली, सुशील और तेजोमयी पुत्र चाहती हूं और वो वह तब ही संभव होगा। जब आप मुझसे विवाह करेंगे।

विवेकानंद बोले हमारी शादी तो संभव नहीं है, परन्तु हां एक उपाय है। औरत- क्या? विवेकानंद बोले आज से मैं ही आपका पुत्र बन जाता हूं। आज से आप मेरी मां बन जाओ। आपको मेरे रूप में मेरे जैसा बेटा मिल जाएगा।औरत विवेकानंद के चरणों में गिर गयी और बोली की आप साक्षात् ईश्वर के रूप है ।इसे कहते है पुरुष और ये होता है पुरुषार्थ एक सच्चा पुरुष सच्चा मर्द वो ही होता है जो हर नारी के प्रति अपने अन्दर मातृत्व की भावना उत्पन्न कर सके।

सोमवार, 1 जनवरी 2018

शिव-भाव से जीव-सेवा करें : प्रधानमंत्री मोदी : मन की बात






मन की बात ,31 दिसंबर 2017
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ का, इस वर्ष का यह आख़िरी कार्यक्रम है और संयोग देखिए कि आज, वर्ष 2017 का भी आख़िरी दिन है | इस पूरे वर्ष बहुत सारी बाते हमने और आपने share  की | ‘मन की बात’ के लिए आपके ढ़ेर सारे पत्र, comments , विचारों का ये आदान-प्रदान, मेरे लिए तो हमेशा एक नई ऊर्जा लेकर के आता है | कुछ घंटों बाद, वर्ष बदल जाएगा लेकिन हमारी बातों का यह सिलसिला आगे भी इसी तरह जारी रहेगा | आने वाले वर्ष में हम, और नयी-नयी बातें करेंगे, नये अनुभव share करेंगे | आप सबको 2018 की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ | अभी पिछले दिनों 25 दिसम्बर को विश्वभर में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया | भारत में भी लोगों ने काफी उत्साह से इस त्योहार को मनाया | क्रिसमस के अवसर पर हम सब ईसा मसीह की महान शिक्षाओं को याद करते हैं और ईसा मसीह ने सबसे ज़्यादा जिस बात पर बल दिया था, वह था - “सेवा-भाव” | सेवा की भावना का सार हम बाइबल में भी देखते हैं |

The Son of Man has come, not to be served,

But to serve,

And to give his life, as blessing

To all humankind.

यह दिखाता है कि सेवा का माहात्म्य क्या है ! विश्व की कोई भी जाति होगी, धर्म होगा, परम्परा होगी, रंग होंगे लेकिन सेवाभाव, ये मानवीय मूल्यों की एक अनमोल पहचान के रूप में है | हमारे देश में ‘निष्काम कर्म’ की बात होती है, यानी ऐसी सेवा जिसमें कोई अपेक्षा न हो | हमारे यहाँ तो कहा गया है – “सेवा परमो धर्मः” | ‘जीव-सेवा ही शिव-सेवा’ और गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस तो कहते थे – शिव-भाव से जीव-सेवा करें यानी पूरे विश्व में ये सारे समान मानवीय मूल्य हैं | आइए, हम महापुरुषों का स्मरण करते हुए, पवित्र दिवसों की याद करते हुए, हमारी इस महान मूल्य परम्परा को, नयी चेतना दें, नयी ऊर्जा दें और ख़ुद भी उसे जीने का प्रयास करें |

मेरे प्यारे देशवासियो, यह वर्ष गुरुगोविन्द सिंह जी का 350वाँ प्रकाश पर्व का भी वर्ष था | गुरुगोविन्द सिंह जी का साहस और त्याग से भरा असाधारण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है | गुरुगोविन्द सिंह जी ने महान जीवन मूल्यों का उपदेश दिया और उन्हीं मूल्यों के आधार पर उन्होंने अपना जीवन जिया भी | एक गुरु, कवि, दार्शनिक, महान योद्धा, गुरुगोविन्द सिंह जी ने इन सभी भूमिकाओं में लोगों को प्रेरित करने का काम किया | उन्होंने उत्पीड़न और अन्याय के विरुद्ध लड़ाई लड़ी | लोगों को जाति और धर्म के बंधनों को तोड़ने की शिक्षा दी | इन प्रयासों में उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत कुछ गँवाना भी पड़ा | लेकिन उन्होंने कभी भी द्वेष की भावना को जगह नहीं दी | जीवन के हर-पल में प्रेम , त्याग और शांति का सन्देश - कितनी महान विशेषताओं से भरा हुआ उनका व्यक्तित्व था ! ये मेरे लिए सौभाग्य की बात रही कि मैं इस वर्ष की शुरुआत में गुरुगोविन्द सिंह जी 350वीं जयन्ती के अवसर पर पटनासाहिब में आयोजित प्रकाशोत्सव में शामिल हुआ |  आइए, हम सब संकल्प लें और गुरुगोविन्द सिंह जी की महान शिक्षा और उनके प्रेरणादायी जीवन से, सीख लेते हुए जीवन को ढालने का प्रयास करें |

एक जनवरी, 2018 यानी कल, मेरी दृष्टि से कल का दिन एक special दिवस है | आपको भी आश्चर्य होता होगा, नया वर्ष आता रहता है, एक जनवरी भी हर वर्ष आती है, लेकिन जब, special की बात करता हूँ तो सचमुच में मैं कहता हूँ कि special है! जो लोग वर्ष 2000 या उसके बाद जन्मे हैं यानी 21वीं सदी में जिन्होंने जन्म लिया है वे एक जनवरी, 2018 से eligible voters बनना शुरू हो जाएँगे | भारतीय लोकतंत्र, 21वीं सदी के voters का, ‘New India Voters’ का स्वागत करता है | मैं, हमारे इन युवाओं को बधाई देता हूँ और सभी से आग्रह करता हूँ कि आप स्वयं को voter के रूप में register करें | पूरा हिन्दुस्तान आपको 21वीं सदी के voter के रूप में स्वागत करने के लिए लालायित है | 21वीं सदी के voter के नाते आप भी गौरव अनुभव करते होंगे | आपका वोट ‘New India’ का आधार बनेगा | वोट की शक्ति, लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति है | लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ‘वोट’ सबसे प्रभावी साधन है | आप केवल मत देने के अधिकारी नहीं बन रहे हैं | आप 21वीं सदी का भारत कैसा हो? 21वीं सदी के भारत के आपके सपने क्या हों? आप भी तो भारत की 21वीं सदी के निर्माता बन सकते हैं और इसकी शुरुआत एक जनवरी से विशेष रूप से हो रही है | और आज अपनी इस ‘मन की बात’ में, मैं 18 से 25 वर्ष के ऊर्जा और संकल्प से भरे हमारे यशस्वी युवाओं से बात करना चाहता हूँ | मैं इन्हें ‘New India Youth’ मानता हूँ | New India Youth का मतलब होता है - उमंग, उत्साह और ऊर्जा | मेरा विश्वास है कि हमारे इन ऊर्जावान युवाओं के कौशल और ताक़त से ही हमारा ‘New India’ का सपना सच होगा | जब हम नए भारत की बात करते हैं तो, नया भारत जो ये जातिवाद, साम्प्रदायवाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार के ज़हर से मुक्त हो | गन्दगी और ग़रीबी से मुक्त हो | ‘New India’ - जहाँ सभी के लिए समान अवसर हों, जहाँ सभी की आशा–आकांक्षाएँ पूरी हों | नया भारत, जहाँ शांति, एकता और सद्भावना ही हमारा guiding force हो | मेरा यह ‘New India Youth’ आगे आए और मंथन करे कि कैसे बनेगा New India | वो अपने लिए भी एक मार्ग  तय करे, जिनसे वो जुड़ा हुआ है उनको भी जोड़े और कारवाँ बढ़ता चले | आप भी आगे बढें , देश भी आगे बढ़े | अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो मुझे एक विचार आया कि क्या हम भारत के हर ज़िले में एक mock parliament आयोजित कर सकते हैं ? जहाँ ये 18 से 25 वर्ष के युवा, मिल-बैठ करके New India पर मंथन करें, रास्ते खोजें, योजनाएँ बनाएँ ? कैसे हम हमारे संकल्पों को 2022 से पहले सिद्ध करेंगें ? कैसे हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था ? महात्मा गाँधी ने आज़ादी के आंदोलन को जन-आन्दोलन बना दिया था | मेरे नौजवान साथियो, समय की माँग है कि हम भी 21वीं सदी के भव्य-दिव्य भारत के लिए एक जन-आन्दोलन खड़ा करें | विकास का जन-आन्दोलन | प्रगति का जन-आन्दोलन | सामर्थ्यवान-शक्तिशाली भारत का जन-आन्दोलन | मैं चाहता हूँ कि 15 अगस्त के आस-पास दिल्ली में एक Mock Parliament का आयोजन हो जहाँ प्रत्येक ज़िले से चुना गया एक युवा, इस विषय पर चर्चा करे कि कैसे अगले पाँच सालों में एक New India का निर्माण किया जा सकता है ? संकल्प से सिद्धि कैसे प्राप्त की जा सकती है ? आज युवाओं के लिए ढ़ेर सारे नये अवसर पैदा हुए हैं | Skill Development से लेकर के Innovation और entrepreneurship में हमारे युवा आगे आ रहे हैं और सफल हो रहे हैं | मैं चाहूँगा कि इन सारे अवसरों की योजनाओं की जानकारी इस ‘New India Youth’ को एक जगह कैसे मिले और इस बारे में कोई एक ऐसी व्यवस्था खड़ी की जाए ताकि 18 वर्ष का होते ही, उसे इस दुनिया के बारे में, इन सारी चीज़ों के बारे में सहज रूप से जानकारी प्राप्त हो और वह आवश्यक लाभ भी ले सके |

मेरे प्यारे देशवासियो, पिछली ‘मन की बात’ में मैंने आपसे positivity के महत्व के बारे में बात की थी | मुझे संस्कृत का एक श्लोक याद आ रहा है –

उत्साहो बलवानार्य, नास्त्युत्साहात्परं बलम् |

सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम् ||

इसका मतलब होता है, उत्साह से भरा एक व्यक्ति अत्यन्त बलशाली होता है क्योंकि उत्साह से बढ़ कर कुछ नहीं होता | Positivity और उत्साह से भरे व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं | अंग्रेज़ी में भी लोग कहते हैं – ‘Pessimism leads to weakness, optimism to power’ | मैंने पिछली ‘मन की बात’ में देशवासियों से अपील की थी कि वर्ष 2017 के अपने positive moments, share करें और 2018 का स्वागत एक positive atmosphere में करें | मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि भारी संख्या में लोगों ने social media platform, MyGov और NarendraModi App पर बहुत ही positive response दिया, अपने अनुभव share किये | Positive India hashtag (#) के साथ  लाखों tweets किये गए जिसकी पहुँच करीब-करीब डेढ़-सौ करोड़ से भी अधिक लोगों तक पहुँची | एक तरह से positivity का जो संचार, भारत से आरंभ हुआ वह विश्व भर में फ़ैला | जो tweets और response आये वे सचमुच में inspiring थे | एक सुखद अनुभव था | कुछ देशवासियों ने इस वर्ष के उन घटनाक्रमों को साझा किया जिनका उनके मन पर विशेष प्रभाव पड़ा, सकारात्मक प्रभाव पड़ा| कुछ लोगों ने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों को भी share किया |

साउंड बाईट #

# मेरा नाम मीनू भाटिया है | मैं मयूर विहार, पॉकेट-वन, फेज़ वन, दिल्ली में रहती हूँ | मेरी बेटी एम.बी.ए. करना चाहती थी | जिसके लिए मुझे बैंक से loan चाहिए था जो मुझे बड़ी आसानी से मिल गया और मेरी बेटी की पढ़ाई चालू रही |

# मेरा नाम ज्योति राजेंद्र वाडे है | मैं बोडल से बात कर रही हूँ | हमने एक रुपया महीने का कटता वो बीमा था, ये मेरे पति ने करवाया हुआ था | और उनका accident में निधन हो गया था | उस समय हमारी क्या हालत हुई, हमको ही पता | सरकार की ये मदद से हमको बहुत लाभ हुआ और में थोड़ी संभली उससे  

# मेरा नाम संतोष जाधव है | हमारे गाँव से, भिन्नर गाँव से 2017 से National Highway गया है | उसकी वजह से हमारी सड़कें वो बहुत अच्छे हो गये और business भी बढ़ने वाला है |

# मेरा नाम दीपांशु आहूजा, मोहल्ला सादतगंज , ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ | दो घटनाएँ हैं जो हमारे भारतीय सैनिकों के द्वारा - एक तो पाकिस्तान में उनके द्वारा की गयी surgical strike जिससे कि आतंकवाद के launching pads थे, उनको नेस्तनाबूद कर दिया गया और साथ-ही-साथ हमारे भारतीय सैनिकों का डोकलाम में जो पराक्रम देखने को मिला वो अतुलनीय है |

# मेरा नाम सतीश बेवानी है | हमारे इलाके में पानी की समस्या थी बिलकुल पिछले 40 साल से हम आर्मी के पाइप -लाइन पर निर्भर हुआ करते थे | अब अलग से ये पाइप लाइन हुई है independent ..तो ये सब बड़ी उपलब्धि है हमारी 2017 में |

ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने-अपने स्तर पर ऐसे कार्य कर रहे हैं जिनसे कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है | वास्तव में, यही तो ‘New India’ है जिसका हम सब मिल कर निर्माण कर रहे हैं | आइए, इन्हीं छोटी-छोटी खुशियों के साथ हम नव-वर्ष में प्रवेश करें, नव-वर्ष की शुरूआत करें और ‘positive India’ से ‘progressive India’ की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएँ | जब हम सब positivity की बात करते हैं तो मुझे भी एक बात share करने का मन करता है | हाल ही में मुझे कश्मीर के प्रशासनिक सेवा के topper अंजुम बशीर खान खट्टक ( Anjum Bashir Khan Khattak) की प्रेरणादायी कहानी के बारे में पता चला | उन्होंने आतंकवाद और घृणा के दंश से बाहर निकल कर Kashmir Administrative Service की परीक्षा में top किया है | आप ये जानकर के हैरान रह जाएंगे कि 1990 में आतंकवादियों ने उनके पैतृक-घर को जला दिया था | वहाँ आतंकवाद और हिंसा इतनी अधिक थी कि उनके परिवार को अपनी पैतृक-ज़मीन को छोड़ के बाहर निकलना पड़ा | एक छोटे बच्चे के लिए उसके चारों ओर इतनी हिंसा का वातावरण, दिल में अंधकारात्मक और कड़वाहट पैदा करने के लिए काफ़ी था - पर अंजुम ने ऐसा नहीं होने दिया | उन्होंने कभी आशा नहीं छोड़ी | उन्होंने अपने लिए एक अलग रास्ता चुना - जनता की सेवा का रास्ता | वो विपरीत हालात से उबर कर बाहर आए और सफलता की अपनी कहानी ख़ुद लिखी | आज वो सिर्फ जम्मू और कश्मीर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं | अंजुम ने साबित कर दिया है कि हालात कितने ही ख़राब क्यों न हों, सकारात्मक कार्यों के द्वारा निराशा के बादलों को भी ध्वस्त किया जा सकता है |    

अभी पिछले हफ़्ते ही मुझे जम्मू-कश्मीर की कुछ बेटियों से मिलने का अवसर मिला | उनमें जो जज़्बा था, जो उत्साह था, जो सपने थे और जब मैं उनसे सुन रहा था, वो जीवन में कैसे-कैसे क्षेत्र में प्रगति करना चाहती हैं | और वो कितनी आशा-भरी ज़िन्दगी वाले लोग थे ! उनसे मैंने बातें की, कहीं निराशा का नामोनिशान नहीं था - उत्साह था, उमंग था, ऊर्जा थी, सपने थे, संकल्प थे | उन बेटियों से, जितना समय मैंने बिताया, मुझे भी प्रेरणा मिली और ये ही तो देश की ताकत हैं , ये ही तो मेरे युवा हैं, ये ही तो मेरे देश का भविष्य हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश के ही नहीं, जब भी कभी विश्व के प्रसिद्ध धार्मिक-स्थलों की चर्चा होती है तो केरल के सबरीमाला मंदिर की बात होनी बहुत स्वाभाविक है | विश्व-प्रसिद्ध इस मंदिर में, भगवान अय्यप्पा स्वामी का आशीर्वाद लेने के लिए हर वर्ष करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं | जहाँ इतनी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हों, जिस स्थान का इतना बड़ा माहात्म्य हो, वहाँ स्वच्छता बनाये रखना कितनी बड़ी चुनौती हो सकती है ? और विशेषकर उस जगह पर, जो पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित हो | लेकिन इस समस्या को भी संस्कार में कैसे बदला जा सकता है, समस्या में से उबरने का रास्ता कैसे खोजा जा सकता है और जन-भागीदारी में इतनी क्या ताक़त होती है- ये अपने आप में सबरीमाला मंदिर एक उदाहरण के तौर पर है | पी.विजयन नाम के एक पुलिस अफ़सर ने ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ (Punyam Poonkavanam), एक programme शुरू किया और उस programme के तहत, स्वच्छता के लिए जागरूकता का एक स्वैच्छिक-अभियान शुरू किया | और एक ऐसी परम्परा बना दी कि जो भी यात्री आते हैं, उनकी यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक कि वो स्वच्छता के कार्यक्रम में कोई-न-कोई शारीरिक श्रम न करते हों | इस अभियान में न कोई बड़ा होता है , न कोई छोटा होता है | हर यात्री, भगवान की पूजा का ही भाग समझ करके कुछ-न-कुछ समय स्वच्छता के लिए करता है, काम करता है, गन्दगी हटाने के लिए काम करता है | हर सुबह यहाँ सफाई का दृश्य बड़ा ही अद्भुत होता है और सारे तीर्थयात्री इसमें जुट जाते हैं | कितनी बड़ी celebrity क्यों न हो, कितना ही धनी व्यक्ति क्यों न हो, कितना ही बड़ा अफ़सर क्यों न हो, हर कोई एक सामान्य-यात्री के तौर पर इस ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ (Punyam Poonkavanam) कार्यक्रम का हिस्सा बन जाते हैं, सफाई को करके ही आगे बढ़ते हैं | हम देशवासियों के लिए ऐसे कई उदाहरण हैं | सबरीमाला में इतना आगे बढ़ा हुआ ये स्वच्छता - अभियान और उसमें ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ (Punyam Poonkavanam), ये हर यात्री के यात्रा का हिस्सा बन जाता है | वहाँ कठोर-व्रत के साथ स्वच्छता का कठोर-संकल्प भी साथ-साथ चलता है |

मेरे प्यारे देशवासियो, 2 अक्तूबर 2014 पूज्य बापू की जन्म जयन्ती पर हम सब ने संकल्प किया है कि पूज्य बापू का जो अधूरा काम है यानी कि ‘स्वच्छ-भारत’, ‘गन्दगी से मुक्त-भारत’ | पूज्य बापू जीवन-भर इस काम के लिए जूझते रहे, कोशिश भी करते रहे | और हम सब ने तय किया कि जब पूज्य बापू की 150वीं जयंती हो तो उन्हें हम उनके सपनों का भारत, ‘स्वच्छ भारत’, देने की दिशा में कुछ-न-कुछ करें | स्वच्छता की दिशा में देशभर में व्यापक स्तर पर प्रयास हो रहा है | ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जन-भागीदारी से भी परिवर्तन नज़र आने लगा है | शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर की उपलब्धियों का आकलन करने के लिए आगामी 4 जनवरी से 10 मार्च 2018 के बीच दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2018’ किया जाएगा | ये सर्वे , चार हज़ार से भी अधिक शहरों में लगभग चालीस (40) करोड़ आबादी में किया जाएगा | इस सर्वे में जिन तथ्यों का आकलन किया जाएगा उनमें हैं – शहरों में खुले में शौच से मुक्ति, कूड़े का कलेक्शन, कूड़े को उठा कर ले जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था, वैज्ञानिक तरीक़े से कूड़े की processing, behavioral change के लिए किए जा रहे प्रयास, capacity building और स्वच्छता के लिए किये गए innovative प्रयास और इस काम के लिए जन-भागीदारी | इस सर्वे के दौरान, अलग-अलग दल जा करके शहरों का inspection करेंगे | नागरिकों से बात करके उनकी प्रतिक्रिया लेंगे | स्वच्छता App के उपयोग का तथा विभिन्न प्रकार के सेवा-स्थलों में सुधार का analysis करेंगे | इसमें यह भी देखा जाएगा कि क्या ऐसी सारी व्यवस्था शहरों के द्वारा बनायी गई हैं जिनसे शहर की स्वच्छता एक जन-जन का स्वभाव बने, शहर का स्वभाव बन जाए | स्वच्छता, सिर्फ़ सरकार करे ऐसा नहीं | हर नागरिक एवं नागरिक संगठनों की भी बहुत बड़ी ज़िम्मेवारी है | और मेरी हर नागरिक से अपील है कि वे, आने वाले दिनों में जो स्वच्छता-सर्वे होने वाला है उसमें बढ़-चढ़ करके भाग लें | और आपका शहर पीछे न रह जाए, आपका गली-मोहल्ला पीछे न रह जाए - इसका बीड़ा उठाएं | मुझे पूरा विश्वास है कि घर से सूखा-कूड़ा और गीला-कूड़ा, अलग-अलग करके नीले और हरे dustbin का उपयोग, अब तो आपकी आदत बन ही गई होगी | कूड़े के लिए reduce, re-use  और re-cycle का सिद्धांत बहुत क़ारगर होता है | जब शहरों की ranking इस सर्वे के आधार पर की जाएगी - अगर आपका शहर एक लाख से अधिक आबादी का है  तो पूरे देश की ranking में, और एक लाख से कम आबादी का है तो क्षेत्रीय ranking में ऊँचे-से-ऊँचा स्थान प्राप्त करे, ये आपका सपना होना चाहिए, आपका प्रयास होना चाहिए | 4 जनवरी से 10 मार्च 2018,  इस बीच होने वाले स्वच्छता-सर्वेक्षण में, स्वच्छता के इस healthy competition में आप कहीं पिछड़ न जाएँ - ये हर नगर में एक सार्वजनिक चर्चा का विषय बनना चाहिए | और आप सब का सपना होना चाहिए, ‘हमारा शहर- हमारा प्रयास’, ‘हमारी प्रगति-देश की प्रगति’ | आइए, इस संकल्प के साथ हम सब फिर से एक बार पूज्य बापू का स्मरण करते हुए स्वच्छ-भारत का संकल्प लेते हुए पुरुषार्थ की पराकाष्ठा करें |

मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ बातें ऐसी होती हैं जो दिखने में बहुत छोटी लगती हैं लेकिन एक समाज के रूप में हमारी पहचान पर दूर-दूर तक प्रभाव डालती रहती हैं | आज ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम के माध्यम से मैं आपके साथ ऐसी एक बात share करना चाहता हूँ | हमारी जानकारी में एक बात आयी कि यदि कोई मुस्लिम महिला, हज-यात्रा के लिए जाना चाहती है तो वह ‘महरम’ या अपने male guardian के बिना नहीं जा सकती है | जब मैंने इसके बारे में पहली बार सुना तो मैंने सोचा कि ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसे नियम किसने बनाए होंगें? ये discrimination क्यों? और मैं जब उसकी गहराई में गया तो मैं हैरान हो गया - आजादी के सत्तर (70) साल के बाद भी ये restriction लगाने वाले हम ही लोग थे | दशकों से मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा था लेकिन कोई चर्चा ही नहीं थी | यहाँ तक कि कई इस्लामिक देशों में भी यह नियम नहीं है | लेकिन भारत में मुस्लिम महिलाओं को यह अधिकार प्राप्त नहीं था | और मुझे खुशी है कि हमारी सरकार ने इस पर ध्यान दिया | हमारी Ministry of Minority Affairs ने आवश्यक कदम भी उठाए और ये सत्तर(70) साल से चली आ रही परंपरा को नष्ट कर के इस restriction को हमने हटा दिया | आज मुस्लिम महिलाएँ, ‘महरम’ के बिना हज के लिए जा सकती हैं और मुझे खुशी है कि इस बार लगभग तेरह सौ (1300) मुस्लिम महिलाएँ ‘महरम’ के बिना हज जाने के लिए apply कर चुकी हैं और देश के अलग-अलग भागों से- केरल से ले करके उत्तर तक महिलाओं ने बढ़-चढ़ करके हज-यात्रा करने की इच्छा ज़ाहिर की है | अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को मैंने सुझाव दिया है कि वो यह सुनिश्चित करें कि ऐसी सभी महिलाओं को हज जाने की अनुमति मिले जो अकेले apply कर रही हैं | आमतौर पर हज-यात्रियों के लिए lottery system है लेकिन मैं चाहूँगा कि अकेली महिलाओं को इस lottery system से बाहर रखा जाए और उनको special category में अवसर दिया जाए | मैं पूरे विश्वास से कहता हूँ और ये मेरी दृढ़ मान्यता है कि भारत की विकास यात्रा, हमारी नारी-शक्ति के बल पर, उनकी प्रतिभा के भरोसे आगे बढ़ी है और आगे बढ़ती रहेगी | हमारा निरंतर प्रयास होना चाहिए कि हमारी महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर समान अधिकार मिले, समान अवसर मिले ताकि वे भी प्रगति के मार्ग पर एक-साथ आगे बढ़ सकें |

मेरे प्यारे देशवासियो, 26 जनवरी हमारे लिए एक ऐतिहासिक-पर्व है | लेकिन इस वर्ष 26 जनवरी 2018 का दिन, विशेष रूप से याद रखा जाएगा | इस वर्ष गणतंत्र-दिवस समारोह के लिए सभी दस आसियान (ASEAN) देशों के नेता मुख्य-अतिथि के रूप में भारत आएँगे | गणतंत्र-दिवस पर इस बार ‘एक’ (1) नहीं बल्कि ‘दस’ (10) मुख्य अतिथि होंगे | ऐसा भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है | 2017, आसियान (ASEAN) के देश और भारत,दोनों के लिए ख़ास रहा है | आसियान (ASEAN) ने 2017 में अपने 50 वर्ष पूरे किए और 2017 में ही आसियान (ASEAN) के साथ भारत की साझेदारी के 25 वर्ष भी पूरे हुए हैं | 26 जनवरी को विश्व के 10 देशों के इन महान नेताओं का एक साथ शरीक़ होना हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है |

प्यारे देशवासियो, ये त्योहारों का season है | वैसे तो हमारा देश एक प्रकार से त्योहारों का देश है | शायद ही कोई दिवस ऐसा होगा जिसके नाम कोई त्योहार न लिखा गया हो | अभी हम सभी ने क्रिसमस मनाया है और आगे नया-वर्ष आने वाला है | आने वाला नव- वर्ष आप सभी के लिए ढ़ेरों खुशियाँ, सुख और समृद्धि ले करके आए | हम सब नए जोश, नए उत्साह, नए उमंग और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ें, देश को भी आगे बढाएँ | जनवरी का महीना सूर्य के उत्तरायण होने का काल है और इसी महीने में मकर-संक्रांति मनायी जाती है | यह प्रकृति से जुड़ा पर्व है | वैसे तो हमारा हर पर्व किसी-न-किसी रूप में प्रकृति से जुड़ा हुआ है लेकिन विविधताओं से भरी हमारी संस्कृति में,प्रकृति की इस अद्भुत घटना को अलग-अलग रूप में मनाने की प्रथा भी है | पंजाब और उत्तर-भारत में लोहड़ी का आनंद होता है तो यू.पी.-बिहार में खिचड़ी और तिल-संक्रांति की प्रतीक्षा रहती है | राजस्थान में संक्रांत कहें, असम में माघ-बिहू या तमिलनाडु में पोंगल - ये सभी त्योहार अपने आप में विशेष हैं और इनका अपना-अपना महत्व है | यह सभी त्योहार प्राय: 13 से 17 जनवरी के बीच में मनाए जाते हैं | इन सभी त्योहारों के नाम अलग-अलग, लेकिन इनका मूल-तत्व एक ही है - प्रकृति और कृषि से जुड़ाव |

सभी देशवासियो को इन त्योहारों की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ हैं | एक बार फिर से आप सभी को नव-वर्ष 2018 की ढ़ेरों शुभकामनाएँ |

बहुत-बहुत धन्यवाद प्यारे देशवासियो | अब 2018 में फिर से बात करेंगे|

धन्यवाद |

रविवार, 24 दिसंबर 2017

अटल बिहारी वाजपेयी : अनमोल विचार


भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है । हिमालय इसका मस्तक है, गौरीशंकर शिखा है । कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं । दिल्ली इसका दिल है । विन्ध्याचल कटि है, नर्मदा करधनी है । पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएं हैं । कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है । पावस के काले-काले मेघ इसके कुंतल केश हैं । चांद और सूरज इसकी आरती उतारते हैं, मलयानिल चंवर घुलता है । यह वन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है । यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है । इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु गंगाजल है । हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए ।~ अटल बिहारी वाजपेयी




*** अटल बिहारी वाजपेयी के 150+ अनमोल विचार!
आज परस्पर वैश्विक निर्भरता का मतलब है कि विकासशील देशों में आर्थिक आपदायें, विकसित देशों पर एक प्रतिक्षेप पैदा कर सकता है। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

किसी भी देश को खुले आम आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक गठबंधन के साथ साझेदारी, सहायता, उकसाना और आतंकवाद प्रायोजित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।~ अटल बिहारी वाजपेयी

गरीबी बहुआयामी है यह पैसे की आय से परे शिक्षा, स्वास्थ्य की देखरेख, राजनीतिक भागीदारी और व्यक्ति की अपनी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति तक फैली हुई है। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

जैव विविधता सम्मेलन से दुनिया के गरीबों के लिए कोई भी ठोस लाभ नहीं निकला है। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

जो लोग हमें यह पूछते हैं कि हम कब पाकिस्तान के साथ वार्ता करेंगे, वे शायद इस तथ्य से वाकिफ नहीं हैं कि पिछले  वर्षों में पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए हर बार पहल भारत ने ही किया है। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

पहले एक दृढ विश्वास था कि संयुक्त राष्ट्र अपने घटक राज्यों की कुल शक्ति की तुलना में अधिक मजबूत होगा। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वो आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

वास्तविकता यह है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी केवल उतनी ही प्रभावी हो सकती है जितनी उसके सदस्यों की अनुमति है। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

वैश्विक स्तर पर आज परस्पर निर्भरता का मतलब विकासशील देशों में आर्थिक आपदाओं का विकसित देशों पर प्रतिघात करना होगा। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

शीत युद्ध के बाद अब एक गलत धारणा यह बन गयी है की संयुक्त राष्ट्र कहीं भी कोई भी समस्या का समाधान कर सकता है। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

संयुक्त राष्ट्र की अद्वितीय वैधता इस सार्वभौमिक धारणा में निहित है कि वह किसी विशेष देश या देशों के समूह के हितों की तुलना में एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करता है। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

हम मानते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और बाकी अंतर्राष्ट्रीय समुदाये पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को हमेशा के लिए ख़त्म करने का दबाव बना सकते हैं। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

हमारे परमाणु हथियार शुद्ध रूप से किसी भी विरोधी के परमाणु हमले को ख़त्म करने के लिए हैं। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

हमें उम्मीद है कि दुनिया प्रबुद्ध (परिष्कृत) स्वार्थ की भावना से कार्य करेगी। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

हमें विश्वाश है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और बाकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के भारत के विरुद्ध सीमा पार आतंकवाद को स्थायी और पारदर्शी रूप से ख़त्म कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा सकते हैं। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

आप मित्र बदल सकते हैं पर पडोसी नहीं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

You can change friends but not neighbours. ~ Atal Bihari Vajpayee

हम उम्मीद करते हैं की विश्व प्रबुद्ध स्वार्थ की भावना से काम करेगा। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

We hope the world will act in the spirit of enlightened self-interest. ~ Atal Bihari Vajpayee

जैव – विविधता कन्वेंशन ने विश्व के गरीबों को कोई ठोस लाभ नहीं पहुँचाया है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

The Bio-diversity Convention has not yielded any tangible benefits to the world’s poor. ~ Atal Bihari Vajpayee

हमारे परमाणु हथियार विशुद्ध रूप से किसी विरोधी के परमाणु हमले को हतोत्साहित करने के लिए हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

Our nuclear weapons are meant purely as a deterrent against nuclear adventure by an adversary. ~ Atal Bihari Vajpayee

हम मानते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और बाकी अंतर्राष्ट्रीय समुदाये पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को हमेशा के लिए ख़तम करने का दबाव बना सकते हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

We believe that the United States and the rest of the international community can play a useful role by exerting influence on Pakistan to put a permanent and visible end to cross-border terrorism against India. – ~ Atal Bihari Vajpayee

पहले एक अन्तर्निहित दृढ विश्वास था कि संयुक्त राष्ट्र अपने घटक राज्यों की कुल शक्ति की तुलना में अधिक शक्तिशाली होगा। ~ अटल बिहारी वाजपेयी

There was an implicit conviction that the UN would be stronger than the sum of its constituent member-states. ~ Atal Bihari Vajpayee

संयुक्त राष्ट्र की अद्वितीय वैधता इस सार्वभौमिक धारणा में निहित है कि वह किसी विशेष देश या देशों के समूह के हितों की तुलना में एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
The UN’s unique legitimacy flows from a universal perception that it pursues a larger purpose than the interests of one country or a small group of countries. – ~ Atal Bihari Vajpayee
वास्तविकता ये है कि यू एन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन उतने ही कारगर हो सकते हैं जितना की उनके सदस्य उन्हें होने की अनुमति दें । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
The reality is that international institutions like the UN can only be as effective as its members allow it to be.  ~ Atal Bihari Vajpayee
भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वो आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
The overwhelming public sentiment in India was that no meaningful dialogue can be held with Pakistan until it abandons the use of terrorism as an instrument of its foreign policy. ~ Atal Bihari Vajpayee
गरीबी बहुआयामी है । यह हमारी कमाई के अलावा स्वास्थय , राजनीतिक भागीदारी , और हमारी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति पर भी असर डालती है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
 Poverty is multidimensional. It extends beyond money incomes to education, health care, political participation and advancement of one’s own culture and social organisation. ~ Atal Bihari Vajpayee
जो लोग हमसे पूछते हैं कि हम कब पाकिस्तान से वार्ता करेंगे वो शायद ये नहीं जानते कि पिछले  सालों में पाकिस्तान से बातचीत करने के सभी प्रयत्न भारत की तरफ से ही आये हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
People who ask us when we will hold talks with Pakistan are perhaps not aware that over the last  years, every initiative for a dialogue with Pakistan has invariably come from India. ~ Atal Bihari Vajpayee
किसी भी मुल्क को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझदारी का हिस्सा होने का ढोंग नहीं करना चैये , जबकि वो आतंकवाद को बढाने ,उकसाने , और प्रायोजित करने में लगा हुआ हो । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
No state should be allowed to profess partnership with the global coalition against terror, while continuing to aid, abet and sponsor terrorism. ~ Atal Bihari Vajpayee
आज वैश्विक निर्भरता का अर्थ यह है कि विकासशील देशों में आई आर्थिक आपदाएं विकसित देशों में संकट ला सकती हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Global interdependence today means that economic disasters in developing countries could create a backlash on developed countries. ~ Atal Bihari Vajpayee
शीत युद्ध के बाद आये उत्साह में एक गलत धारणा बन गयी की संयुक्त राष्ट्र कहीं भी कोई भी समस्या हल कर सकता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
In the euphoria after the Cold War, there was a misplaced notion that the UN could solve every problem anywhere. ~ Atal Bihari Vajpayee

अमावस के अभेद्य अंधकार का अंतःकरण पूर्णिमा की उज्ज्वलता का स्मरण कर थर्रा उठता है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
निराशा की अमावस की गहन निशा के अंधकार में हम अपना मस्तक आत्म-गौरव के साथ तनिक ऊंचा उठाकर देखें ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
राज्य को, व्यक्तिगत सम्पत्ति को जब चाहे तब जप्त कर लेने का अधिकार देना एक खतरनाक चीज होगी ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
आदिवासियों की समस्याओं पर हमें सहानुभूति के साथ विचार करना होगा ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
सेवा-कार्यों की उम्मीद सरकार से नहीं की जा सकती । उसके लिए समाज-सेवी संस्थाओं को ही आगे उगना पड़ेगा ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
संयुक्त राष्ट्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि वह समरत मानवता का सबल स्वर बन सके और देशों के बीच एक-दूसरे पर अवलम्बित सामूहिक सहयोग का गतिशील माध्यम बन सके ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारत के ऋषियों-महर्षियों ने जिस एकात्मक जीवन के ताने-बाने को बुना था, आज वह उपेक्षा तथा उपहास का विषय बनाया जा रहा है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
जीवन के फूल को पूर्ण ताकत से खिलाएं ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता है कि देश मूल्यों के संकट में फंसा है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
मारुति हनुमानजी की मां का नाम है । पवनसुत के बारे में कहा जाता है कि वे चलते नहीं है,, छलांग लगाते हैं या उड़ते हैं । तो जो गुण पुत्र के बारे में हैं, माता उनसे वंचित नहीं हो सकती । मारुति कार भी जिस तेजी से आगे बढ़ी है, उससे लगता है कि हर मामले में छलांग लगाती है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
इस देश में पुरुषार्थी नवजवानों की कमी नहीं है, लेकिन उनमें से कोई कार बनाने का कारखाना नहीं खोल सकता, क्योंकि किसी को प्रधानमंत्री के घर में जन्म लेने का सौभाग्य नहीं प्राप्त है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
इतिहास में हुई भूल के लिए आज किसी से बदला लेने का समय नहीं है, लेकिन उस भूल को ठीक करने का सवाल है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About India & Nation

भारतीय जहां जाता है, वहां लक्ष्मी की साधना में लग जाता है । मगर इस देश में उगते ही ऐसा लगता है कि उसकी प्रतिभा कुंठित हो जाती है ।. भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है । हिमालय इसका मस्तक है, गौरीशंकर शिखा है । कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं । दिल्ली इसका दिल है । विन्ध्याचल कटि है, नर्मदा करधनी है । पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएं हैं । कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है । पावस के काले-काले मेघ इसके कुंतल केश हैं । चांद और सूरज इसकी आरती उतारते हैं, मलयानिल चंवर घुलता है । यह वन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है । यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है । इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु गंगाजल है । हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
कंधे-से-कंधा लगाकर, कदम-से-कदम मिलाकर हमें अपनी जीवन-यात्रा को ध्येय-सिद्धि के शिखर तक ले जाना है । भावी भारत हमारे प्रयत्नों और परिश्रम पर निर्भर करता है । हम अपना कर्तव्य पालन करें, हमारी सफलता सुनिश्चित है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
देश को हमसे बड़ी आशाएं हैं । हम परिस्थिति की चुनौती को स्वीकार करें । आखों में एक महान भारत के सपने, हृदय में उस सपने को सत्य सृष्टि में परिणत करने के लिए प्रयत्नों की पराकाष्ठा करने का संकल्प, भुजाओं में समूची भारतीय जनता को समेटकर उसे सीने से लगाए रखने का सात्त्विक बल और पैरों में युग-परिवर्तन की गति लेकर हमें चलना है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारत एक प्राचीन राष्ट्र है ।  अगस्त,  को किसी नए राष्ट्र का जन्म नहीं, इस प्राचीन राष्ट्र को ही स्वतंत्रता मिली ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
यदि भारत को बहुराष्ट्रीय राज्य के रूप में वर्णित करने की प्रवृत्ति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो भारत के अनेक टुकड़ों में बंट जानै का खतरा पैदा हो जाएगा ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
पौरुष, पराक्रम, वीरता हमारे रक्त के रंग में मिली है । यह हमारी महान परंपरा का अंग है । यह संस्कारों द्वारा हमारे जीवन में ढाली जाती है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
इस देश में कभी मजहब के आधार पर, मत-भिन्नता के उगधार पर उत्पीड़न की बात नहीं उठी, न उठेगी, न उठनी चाहिए ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारत के प्रति अनन्य निष्ठा रखने वाले सभी भारतीय एक हैं, फिर उनका मजहब, भाषा तथा प्रदेश कोई भी क्यों न हो ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारत कोई इतना छोटा देश नहीं है कि कोई उसको जेब में रख ले और वह उसका पिछलग्गू हो जाए । हम अपनी आजादी के लिए लड़े, दुनिया की आजादी के लिए लड़े ।~ अटल बिहारी वाजपेयी


दुर्गा समाज की संघटित शक्ति की प्रतीक हैं । व्यक्तिगत और पारिवारिक स्वार्थ-साधना को एक ओर रखकर हमें राष्ट्र की आकांक्षा प्रदीप्त करनी होगी । दलगत स्वार्थों की सीमा छोड्‌कर विशाल राष्ट्र की हित-चिंता में अपना जीवन लगाना होगा । हमारी विजिगीषु वृत्ति हमारे अन्दर अनंत गतिमय कर्मचेतना उत्पन्न करे ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
राष्ट्र कुछ संप्रदायों अथवा जनसमूहों का समुच्चय मात्र नहीं, अपितु एक जीवमान इकाई है ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ यह भारत एक राष्ट्र है, अनेक राष्ट्रीयताओं का समूह नहीं ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
मैं चाहता हूं भारत एक महान राष्ट्र बने, शक्तिशाली बने, संसार के राष्ट्रों में प्रथम पंक्ति में आए ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
राजनीति की दृष्टि से हमारे बीच में कोई भी मतभेद हो, जहां तक राष्ट्रीय सुरक्षा और रचतंत्रता के संरक्षण का प्रश्न है, सारा भारत एक है और किसी भी संकट का सामना हम सब पूर्ण शक्ति के साथ करेंगे ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
यह संघर्ष जितने बलिदान की मांग करेगा, वे बलिदान दिए जाएंगे, जितने अनुशासन का तकाजा होगा, यह देश उतने अनुशासन का परिचय देगा ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
देश एक रहेगा तो किसी एक पार्टी की वजह से एक नहीं रहेगा, किसी एक व्यक्ति की वजह से एक नहीं रहेगा, किसी एक परिवार की वजह से एक नहीं रहेगा । देश एक रहेगा तो देश की जनता की देशभक्ति की वजह से रहेगा ।~ अटल बिहारी वाजपेयी
शहीदों का रक्त अभी गीला है और चिता की राख में चिनगारियां बाकी हैं । उजड़े हुए सुहाग और जंजीरों में जकड़ी हुई जवानियां उन उग्त्याचारों की गवाह हैं। ~ अटल बिहारी वाजपेयी
देश एक मंदिर है, हम पुजारी हैं । राष्ट्रदेव की पूजा में हमें अपने को समर्पित कर देना चाहिए । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारतीयकरण का एक ही अर्थ है भारत में रहने वाले सभी व्यक्ति, चाहे उनकी भाषा कछ भी हो, वह भारत के प्रति अनन्य, अविभाज्य, अव्यभिचारी निष्ठा रखें । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारतीयकरण उगधुनिकीकरण का विरोधी नहीं है । न भारतीयकरण एक बंधी-बंधाई परिकल्पना है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारतीयकरण एक नारा नहीं है । यह राष्ट्रीय पुनर्जागरण का मंत्र है । भारत में रहने वाले सभी व्यक्ति भारत के प्रति अनन्य, अविभाज्य, अव्यभिचारी निष्ठा रखें । भारत पहले आना चाहिए, बाकी सब कुछ बाद में । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हम अहिंसा में आस्था रखते हैं और चाहते हैं कि विश्व के संघर्षों का समाधान शांति और समझौते के मार्ग से हो ।
अहिंसा की भावना उसी में होती है, जिसकी उरात्मा में सत्य बैठा होता है, जो समभाव से सभी को देखता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

Atal Bihari Vajpayee Quotes About Religion & Hinduism In Hindi

हिन्दू धर्म तथा संस्कृति की एक बड़ी विशेषता समय के साथ बदलने की उसकी क्षमता रही है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
दरिद्र में जिन्होंने पूर्ण नारायण के दर्शन किए और उन नारायण की उपासना का उपदेश दिया, उनका अंतःकरण करुणा से भरा हुआ था ।. गरीबी, बेकारी, भुखमरी ईश्वर का विधान नहीं, मानवीय व्यवस्था की विफलता का परिणाम है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
कोई भी दल हो, पूजा का कोई भी स्थान हो, उसको अपनी राजनीतिक गतिविधियां वहां नहीं चलानी चाहिए । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
आज कहा जा रहा है कि अगर स्कूल की किताबों में विद्यार्थियों को दीवाली, दशहरा और होली के बारे में पाठ पढ़ाया जाएगा तो हमारा मजहब खतरे में पड़ जाएगा । यह मांग की जा रही है कि इस तरह के पाठ किताबों से निकाल दिए जाएं । मैं पूछना चाहता हूं कि क्या यह मांग ठीक है? होली, दीवाली और दशहरा हमारे राष्ट्रीय त्यौहार हैं । उनसे किसी मजहब का संबंध नहीं है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
देश में कुछ ऐसे पूजा के स्थान हैं, जिनको पिछले हजार-पांच सौ वर्षों में दूसरे मजहब के मानने वालों ने उनके मूल उपासकों से छीनकर अपने अधिकार में कर लिया, चाहे वह कृष्ण जन्मस्थान हो, चाहे राम जन्मस्थान हो, चाहे वह काशी विश्वनाथ का मंदिर हो । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दू धर्म के प्रति मेरे आकर्षण का सबसे मुख्य कारण है कि यह मानव का सर्वोत्कृष्ट धर्म है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दू धर्म ऐसा जीवन्त धर्म है, जो धार्मिक अनुभवों की वृद्धि और उसके आचरण की चेतना के साथ निरंतर विकास करता रहता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन का न प्रारंभ है और न अंत ही । यह एक अनंत चक्र है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मुझे अपने हिन्दूत्व पर अभिमान है, किंतु इसका उरर्थ यह नहीं है कि मैं मुस्तिम-विरोधी हूं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हमें हिन्दू कहलाने में गर्व महसूस करना चाहिए, बशर्ते कि हम भारतीय होने में भी आत्मगौरव महसूस करें
हिन्दू समाज इतना विशाल है, इतना विविध है कि किसी बैंक में नहीं समा सकता । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दू समाज गतिशील है, हिंदू समाज में परिवर्तन हुए हैं, परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है । हिन्दू समाज जड़ समाज नहीं है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Culture In Hindi

भारतीय संस्कृति कभी किसी एक उपासना पद्धति से बंधी नहीं रही और न उसका आधार प्रादेशिक रहा । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
उपासना, मत और ईश्वर संबंधी विश्वास की स्वतंत्रता भारतीय संस्कृति की परम्परा रही है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मजहब बदलने से न राष्ट्रीयता बदलती है और न संस्कृति में परिवर्तन होता । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
सभ्यता कलेवर है, संस्कृति उसका अन्तरंग । सभ्यता सूल होती है, संस्कृति सूक्ष्म । सभ्यता समय के साथ बदलती है, किंतु संस्कृति अधिक स्थायी होती है ।  ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Being Human In Hindi

इंसान बनो, केवल नाम से नहीं, रूप से नहीं, शक्ल से नहीं, हृदय से, बुद्धि से, सरकार से, ज्ञान से । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मनुष्य जीवन अनमोल निधि है, पुण्य का प्रसाद है । हम केवल अपने लिए न जिएं, औरों के लिए भी जिएं । जीवन जीना एक कला है, एक विज्ञान है । दोनों का समन्वय आवश्यक है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मैं अपनी सीमाओं से परिचित हूं । मुझे अपनी कमियों का अहसास है । सद्‌भाव में अभाव दिखाई नहीं देता है । यह देश बड़ा ही अद्भुत है, बड़ा अनूठा है । किसी भी पत्थर को सिंदूर लगाकर अभिवादन किया जा सकता है, अभिनन्दन किया जा सकता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मनुष्य-मनुष्य के संबंध अच्छे रहें, सांप्रदायिक सद्‌भाव रहे, मजहब का शोषण न किया जाए, जाति के आधार पर लोगों की हीन भावना को उत्तेजित न किया जाए, इसमें कोई मतभेद नहीं है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Spirituality

नर को नारायण का रूप देने वाले भारत ने दरिद्र और लक्ष्मीवान, दोनों में एक ही परम तत्त्व का दर्शन किया है ।  ~ अटल बिहारी वाजपेयी
समता के साथ ममता, अधिकार के साथ उगत्मीयता, वैभव के साथ सादगी-नवनिर्माण के प्राचीन स्तंभ हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भगवान जो कुछ करता है, वह भलाई के लिए ही करता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
परमात्मा एक ही है, लेकिन उसकी प्राप्ति के अनेकानेक मार्ग हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
जीवन को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता, उसका ‘पूर्णता’ में ही विचार किया जाना चाहिए । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Literature In Hindi
मुझे स्वदेश-प्रेम, जीवन-दर्शन, प्रकृति तथा मधुर भाव की कविताएं बाल्यावस्था से ही उगकर्षित करती रही हैं ।  ~ अटल बिहारी वाजपेयी
‘रामचरितमानस’ तो मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा है । जीवन की समग्रता का जो वर्णन गोस्वामी तुलसीदास ने किया है, वैसा विश्व-साहित्य में नहीं हुआ है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
साहित्य और राजनीति के कोई अलस-अलग खाने नहीं होते । जो राजनीति में रुचि लेता है, वह साहित्य के लिए समय नहीं निकाल पाता और साहित्यकार राजनीति के लिए समय नहीं दे पाता, लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं, जो दोनों के लिए समय देते हैं । वे अभिनन्दनीय हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
साहित्यकार का हृदय दया, क्षमा, करुणा और प्रेम से आपूरित रहता है । इसलिए वह खून की होली नहीं खेल सकता । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मेरे भाषणों में मेरा लेखक ही बोलता है, पर ऐसा नहीं कि राजनेता मौन रहता है । मेरे लेखक और राजनेता का परस्पर समन्वय ही मेरे भाषणों में उतरता है । यह जरूर है कि राजनेता ने लेखक से बहुत कुछ पाया है ।. साहित्यकार को अपने प्रति सच्चा होना चाहिए । उसे समाज के लिए अपने दायित्व का सही अर्थों में निर्वाह करना चाहिए । उसके तर्क प्रामाणिक हो । उसकी दृष्टि रचनात्मक होनी चाहिए । वह समसामयिकता को साथ लेकर चले, पर आने वाले कल की चिंता जरूर करे । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Our Glory In Hindi
निराशा की अमावस की गहन निशा के अंधकार में हम अपना मस्तक आत्म-गौरव के साथ तनिक ऊंचा उठाकर देखें । विश्व के गगनमंडल पर हमारी कलित कीर्ति के असंख्य दीपक जल रहे हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
सदा से ही हमारी धार्मिक और दार्शनिक विचारधारा का केन्द्र बिंदु व्यक्ति रहा है । हमारे धर्मग्रंथों और महाकाव्यों में सदैव यह संदेश निहित रहा है कि समस्त ब्रह्मांड और सृष्टि का मूल व्यक्ति औरउसका संपूर्ण विकास है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
राष्ट्रशक्ति को अपमानित करने का मूल्य रावण को अपने दस शीशों के रूप में सव्याज चुकाना पड़ा । असुरों की लंका भारत के पावन चरणों में भक्तिभाव से भरकर कन्दकली की भांति सुशोभित हुई । धर्म की स्थापना हुई, अधर्म का नाश हुआ । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Education In Hindi

शिक्षा आज व्यापार बन गई है । ऐसी दशा में उसमें प्राणवत्ता कहां रहेगी? उपनिषदों या अन्य प्राचीन ग्रंथों की उगेर हमारा ध्यान नहीं जाता । आज विद्यालयों में छात्र थोक में आते हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
शिक्षा के द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है । व्यक्तित्व के उत्तम विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप आदर्शों से युक्त होना चाहिए । हमारी माटी में आदर्शों की कमी नहीं है । शिक्षा द्वारा ही हम नवयुवकों में राष्ट्रप्रेम की भावना जाग्रत कर सकते हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मुझे शिक्षकों का मान-सम्मान करने में गर्व की अनुभूति होती है । अध्यापकों को शासन द्वारा प्रोत्साहन मिलना चाहिए । प्राचीनकाल में अध्यापक का बहत सम्मान था । आज तो अध्यापक पिस रहा है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
किशोरों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है । आरक्षण के कारण योग्यता व्यर्थ हो गई है । छात्रों का प्रवेश विद्यालयों में नहीं हो पा रहा है । किसी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता । यह मौलिक अधिकार है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
निरक्षरता का और निर्धनता का बड़ा गहरा संबंध है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
वर्तमान शिक्षा-पद्धति की विकृतियों से, उसके दोषों से, कमियों से सारा देश परिचित है । मगर नई शिक्षा-नीति कहां है? ~ अटल बिहारी वाजपेयी
शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए । ऊंची-से-ऊंची शिक्षा मातृभाषा के माध्यम से दी जानी चाहिए । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मोटे तौर पर शिक्षा रोजगार या धंधे से जुड़ी होनी चाहिए । वह राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में सहायक हो और व्यक्ति को सुसंस्कारित करे । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Hindi & English Language

हिन्दी की कितनी दयनीय स्थिति है, यह उस दिन भली-भांति पता लग गया, जब भारत-पाक समझौते की हिन्दी प्रति न तो संसद सदस्यों को और न हिन्दी पत्रकारों को उपलब्ध कराई गई । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दी वालों को चाहिए कि हिन्दी प्रदेशों में हिन्दी को पूरी तरह जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रतिष्ठित करें । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दी को अपनाने का फैसला केवल हिन्दी वालों ने ही नहीं किया । हिन्दी की आवाज पहले अहिन्दी प्रान्तों से उठी । स्वामी दयानन्दजी, महात्मा गांधी या बंगाल के नेता हिन्दीभाषी नहीं थे । हिन्दी हमारी आजादी के आन्दोलन का एक कार्यक्रम बनी । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारत की जितनी भी भाषाएं हैं, वे हमारी भाषाएं हैं, वे हमारी अपनी हैं, उनमें हमारी आत्मा का प्रतिबिम्ब है, वे हमारी आत्माभिव्यक्ति का साधन हैं । उनमें कोई छोटी-बड़ी नहीं है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारतीय भाषाओं को लाने का निर्णय एक क्रांतिकारी निर्णय है, लेकिन अगर उससे देश की एकता खतरे में पड़ती है तो अहिन्दी प्रांत वाले अंग्रेजी चलाएं, मग्र हम पटना में, जयपुर में, लखनऊ में अंग्रेजी नहीं चलने देंगे । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
राष्ट्र की सच्ची एकता तब पैदा होगी, जब भारतीय भाषाएं अपना स्थान ग्रहण करेंगी । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दी का किसी भारतीय भाषा से झगड़ा नहीं है । हिन्दी सभी भारतीय भाषाओं को विकसित देखना चाहती है, लेकिन यह निर्णय संविधान सभा का है कि हिन्दी केन्द्र की भाषा बने । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
अंग्रेजी केवल हिन्दी की दुश्मन नहीं है, अंग्रेजी हर एक भारतीय भाषा के विकास के मार्ग में, हमारी संस्कृति की उन्नति के मार्ग में रोड़ा है । जो लोग अंग्रेजी के द्वारा राष्ट्रीय एकता की रक्षा करना चाहते हैं वे राष्ट्र की एकता का मतलब नहीं समझते । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Democracy In Hindi

हमारा लोकतंत्र संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है । लोकतंत्र की परंपरा हमारे यहां बड़ी प्राचीन है ।. चालीस साल से ऊपर का मेरा संसद का अनुभव कभी-कभी मुझे बहुत पीड़ित कर देता है । हम किधर जा रहे हैं? ~ अटल बिहारी वाजपेयी
राज्य को, व्यक्तिगत संपत्ति को जब चाहे जब्त कर लेने का अधिकार देना एक खतरनाक चीज होगी । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारत के लोग जिस संविधान को आत्म समर्पित कर चुके हैं, उसे विकृत करने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
लोकतंत्र बड़ा नाजुक पौधा है । लोकतंत्र को धीरे- धीरे विकसित करना होगा । केन्द्र को सबको साथ लेकर चलने की भावना से आगे बढ़ना होगा । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
अगर किसी को दल बदलना है तो उसे जनता की नजर के सामने दल बदलना चाहिए । उसमें जनता का सामना करने का साहस होना चाहिए । हमारे लोकतंत्र को तभी शक्ति मिलेगी जब हम दल बदलने वालों को जनता का सामना करने का साहस जुटाने की सलाह देंगे । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हमें अपनी स्वाधीनता को अमर बनाना है, राष्ट्रीय अखण्डता को अक्षुण्ण रखना है और विश्व में स्वाभिमान और सम्मान के साथ जीवित रहना है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
लोकतंत्र वह व्यवस्था है, जिसमें बिना मृणा जगाए विरोध किया जा सकता है और बिना हिंसा का आश्रय लिए शासन बदला जा सकता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
जातिवाद का जहर समाज के हर वर्ग में पहुंच रहा है । यह स्थिति सबके लिए चिंताजनक है । हमें सामाजिक समता भी चाहिए और सामाजिक समरसता भी चाहिए । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Politics In Hindi

कर्सी की मुझे कोई कामना नहीं है । मुझे उन पर दया उगती है जो विरोधी दल में बैठने का सम्मान छोड्‌कर कुर्सी की कामना से लालायित होकर सरकारी पार्टी का पन्तु पकड़ने के लिए लालायित हैं ।. ~ अटल बिहारी वाजपेयी
वास्तव में हमारे देश की लाठी कमजोर नहीं है, वरन् वह जिन हाथों में है, वे कांप रहे हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मैं हिन्दू परम्परा में गर्व महसूस करता हूं लेकिन मुझे भारतीय परम्परा में और ज्यादा गर्व है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
भारत की सुरक्षा की अवधारणा सैनिक शक्ति नहीं है । भारत अनुभव करता है सुरक्षा आन्तरिक शक्ति से आती है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
राजनीति सर्वांग जीवन नहीं है । उसका एक पहलू है । यही शिक्षा हमने पाई है, यही संस्कार हमने पाए हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
जहां-जहां हमें सत्ता द्वारा सेवा का अवसर मिला है, हमने ईमानदारी, निष्पक्षता तथा सिद्धांतप्रियता का परिचय दिया है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
इस त् संसार में यदि स्वाधीनता की, अखण्डता की रक्षा करनी है तो शक्ति के और शस्त्रों के बल पर होगी, हवाई सिद्धांतों के जरिए नहीं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
बिना हमको सफाई का मौका दिए फांसी पर चढ़ाने की कोशिश मत करिए, क्योंकि हम मरते-मरते भी लड़ेंगे और लड़ते-लड़ते भी मरने को तैयार हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
राजनीति काजल की कोठरी है । जो इसमें जाता है, काला होकर ही निकलता है । ऐसी राजनीतिक व्यवस्था में ईमानदार होकर भी सक्रिय रहना, बेदाग छवि बनाए रखना, क्या कठिन नहीं हो गया है? ~ अटल बिहारी वाजपेयी
अगर हम देशभक्त न होते और अगर हम निःस्वार्थ भाव से राजनीति में अपना स्थान बनाने का प्रयास न करते और हमारे इन प्रयासों के साथ ० साल की साधना न होती तो हम यहां तक न पहुंचते । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

Atal Bihari Vajpayee Quotes About Communalism & Pakistan

मुसलमानों में कुछ लोग ऐसे हैं जो पाकिस्तान से संबंध रखते हैं, जो पाकिस्तान के इशारे पर दंगे करते हैं । पाकिस्तान हमें बदनाम करना चाहता है ।राष्ट्र के प्रति अव्यभिचारी निष्ठा और आने वाले कल के लिए निरंतर पसीना तथा आवश्यकता पड़ने पर रक्त बहाने का संकल्प ही हमें सांप्रदायिकता, भाषावाद तथा क्षेत्रीयता से ऊपर उठने की प्रेरणा दे सकता है । सांप्रदायिकता किसी भी रूप में हो, उसे कुचल दीजिए, सांप्रदायिकता के नाम पर आप एक संप्रदाय के तुष्टीकरण की नीति अपनाएं, इसका आज असर नहीं होगा । अगर चिनगारी गिरेगी तो आग भड़केगी । वन्देमातरम् इस्ताम का विरोधी नहीं है । क्या इस्ताम को मानने वाले जब नमाज पढ़ते हैं तो इस देश र्को धरती पर, इस देश की पाक जमीन पर सिर नहीं टेकते हैं? अब चिकनी-चुपड़ी बातें करने का वक्त नहीं है । परिस्थिति गंभीर है । देश की एकता दांव पर लगी है । सांप्रदायिकता के ज्वार में राष्ट्र की नौका डगमगा रही है । पानी हमारे सिर तक पहुंच गया है । ऐसा इस सदन में तो क्या, देश-भर में भी कोई नहीं होगा जो शिवाजी के प्रति आदर न रखता हो,. लेकिन उनके नाम का इस्तेमाल सांप्रदायिकता भड़काने के लिए करना किसी भी तरह शिवाजी कें प्रति न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता । आज सांप्रदायिकता के साथ देश के भीतर जातीयता का जहर किस तरह से फैलाया जा रहा है, वह क्या सांप्रदायिकता से कम घातक है? ~ अटल बिहारी वाजपेयी
पाकिस्तान के चालक आगरा जाने की बार-बार कोशिश करते थे । आगरा केवल ताजमहल के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है । एक दूसरी बात के लिए भी प्रसिद्ध है । आगरा में हिन्दूस्तान का सबसे बड़ा पागलखाना है । हमने पाकिस्तान की पनडुब्बी डुबा दी । वे कहने लगे, यह डूबी नहीं, गोता खा रही है । भारत में जो पाकिस्तानी रहते हैं, जिनकी संख्या का हमें पता है, हम क्यों नहीं उनसे भारत छोड्‌कर जाने के लिए कहते । हमें पाकिस्तान से कह देना चाहिए कि पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान के हिन्दूओं के साथ न्याय नहीं करेगा तो भारत की शक्ति में जो भी कदम होगा, उठाएगा । जब-जब पाकिस्तान को कुछ लेना होता है, वह शांति की भाषा बोलता है । जहां तक भारत का संबंध है, हम विश्वकुटश्व के कल्याण के लिए कष्ट सहने और पसीना बहाने के लिए तैयार हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मेरा कहना है कि सबके साथ दोस्ती करें लेकिन राष्ट्र की शक्ति पर विश्वास रखें । राष्ट्र का हित इसी में है कि हम आर्थिक दृष्टि से सबल हों, सैन्य दृष्टि से स्वावलम्बी हों । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
पाकिस्तान कश्मीर, कश्मीरियों के लिए नहीं चाहता । वह कश्मीर चाहता है पाकिस्तान के लिए । वह कश्मीरियों को बलि का बकरा बनाना चाहता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मैं पाकिस्तान से दोस्ती करने के खिलाफ नहीं हूं । सारा देश पाकिस्तान से संबंधों को सुधारना चाहता है, लेकिन जब तक कश्मीर पर पाकिस्तान का दावा कायम है, तब तक शांति नहीं हो सकती । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
पाकिस्तान हमें बार-बार उलझन में डाल रहा है, पर वह स्वयं उलझ जाता है । वह भारत के किरीट कश्मीर की ओर वक्र दृष्टि लगाए है । कश्मीर भारत का अंग है और रहेगा । हमें पाकिस्तान से साफ-साफ कह देना चाहिए कि वह कश्मीर को हथियाने का इरादा छोड़ दे । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Society & Corruption

पारस्परिक सहकारिता और त्याग की प्रवृत्ति को बल देकर ही मानव-समाज प्रगति और समृद्धि का पूरा-पूरा लाभ उठा सकता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
दरिद्रता का सर्वथा उन्मूलन कर हमें प्रत्येक व्यक्ति से उसकी क्षमता के अनुसार कार्य लेना चाहिए और उसकी आवश्यकता के अनुसार उसे देना चाहिए । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
संयुक्त परिवार की प्रणाली सामाजिक सुरक्षा का सुंदर प्रबंध था, जिसने मार्क्स को भी मात कर दिया था । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
समता के साथ ममता, अधिकार के साथ आत्मीयता, वैभव के साथ सादगी-नवनिर्माण के प्राचीन आधारस्तम्भ हैं ।  ~ अटल बिहारी वाजपेयी इन्हीं स्तम्भों पर हमें भावी भारत का भवन खड़ा करना है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
जब तक सरकार काले धन की समस्या का कारगर हल नहीं निकालती, कितने भी कानून बनाए जाएं, जमीन और इमारतों का व्यापार फूलता-फलता रहेगा । अगर भ्रष्टाचार का मतलब यह है कि छोटी-छोटी मछलियों. को फांसा जाए और बड़े-बड़े मगरमच्छ जाल में से निकल जाएं तो जनता में विश्वास पैदा नहीं हो सकता । हम अगर देश में राजनीतिक और सामाजिक अनुशासन पैदा करना चाहते हैं तो उसके. लिए भ्रष्टाचार का निराकरण आवश्यक है । हमें बेदाग नेतृत्व ..चाहिए, हमें निष्कलंक नेतृत्व चाहिए । आपको मालूम है, यह भ्रष्टाचार फैलते-फैलते नीचे किस हद तक गया है । हमारे बिहार प्रदेश में जानवरों का चारा खा लिया गया है । काले धन से चुनाव नहीं लड़ना चाहिए । इसका प्रबंध किया जाना चाहिए । कठोर-से-कठोर कदम उठाना चाहिए । हम इसमें साथ देने के लिए तैयार हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

Atal Bihari Vajpayee Quotes About Jawan & Kisan

सेना के उन जवानों का अभिनन्दन होना चाहिए, जिन्होंने अपने रक्त से विजय की गाथा लिखी विजय का सर्वाधिक श्रेय अगर किसी को दिया जा सकता है तो हमारे बहादुर जवानों को और उनके कुशल सेनापतियों को । अभी मुझे ऐसा सैनिक मिलना बाकी है, जिसकी पीठ में गोली का निशान हो । जितने भी गोली के निशान हैं, सब निशान सामने लगे हैं । अगर अपनी सेनाओं या रेजिमेंटों के नाम हमें रखने हैं तो राजपूत रेजिमेंट के स्थान पर राणा प्रताप रेजिमेंट रखें, मराठा रेजिमेंट के स्थान पर शिवाजी रेजिमेंट और ताना रेजिमेंट रखे, सिख रेजिमेंट की जगह रणजीत सिंह रेजिमेंट रखें । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
खेती भारत का बुनियादी उद्योग है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
अन्नोत्पादन द्वारा आत्मनिर्भरता के बिना हम न तो औद्योगिक विकास का सुदृढ़ ढांचा ही तैयार कर सकते है और न विदेशों पर अपनी खतरनाक निर्भरता ही समाप्त कर सकते हैं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हमारा कृषि-विकास संतुलित नहीं है और न उसे स्थायी ही माना जा सकता है ।  ~ अटल बिहारी वाजपेयी
कृषि-विकास का एक चिंताजनक पहलू यह है कि पैदावार बढ़ते ही दामों में गिरावट आने लगती है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Foreign Policy

हम एक विश्व के आदर्शों की प्राप्ति और मानव के कल्याण तथा उसकी कीर्ति के लिए त्याग और बलिदान की बेला में कभी पीछे पग नहीं हटाएंगे । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
एटम बम का जवाब क्या है? एटम बम का जवाब एटम बम है और कोई जवाब नहीं । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
कौन हमारे साथ है? कौन हमारा मित्र है? इस विदेश नीति ने हमको मित्रविहीन बना दिया है । यह विदेश नीति राष्ट्रीय हितों का संरक्षण करने में विफल रही है । इस विदेश नीति पर पुनर्विचार होना चाहिए । कल्पना के लोक से उतरकर हम अपनी विदेश नीति का निर्धारण करें । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हम उरपने घर में एक-दूसरे को प्रॉग्रेसिव कह सकते हैं, रिएक्शनरी कह सकते हैं, लेकिन रूस को इजाजत नहीं दे सकते कि हमारे देश के घरेलू मामलों में दखल दे और किसी को प्रॉग्रेसिव और किसी को रिएक्शनरी कहे । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
नेपाल हमारा पड़ोसी देश है । दुनिया के कोई देश इतने निकट नहीं हो सकते जितने भारत और नेपाल हैं ।  ~ अटल बिहारी वाजपेयी
इतिहास ने, भूगोल ने, परंपरा ने, संस्कृति ने, धर्म ने, नदियों ने हमें आपस में बांधा है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
Atal Bihari Vajpayee Quotes About Untouchability In Hindi

अगर परमात्मा भी आ जाए और कहे कि छुआछूत मानो, तो मैं ऐसे परमात्मा को भी मानने को तैयार नहीं हूं किंतु परमात्मा ऐसा कह ही नहीं सकता । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मानव और मानव के बीच में जो भेद की दीवारें खड़ी हैं, उनको ढहाना होगा, और इसके लिए एक राष्ट्रीय अभियान की आवश्यकता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
अस्पृश्यता कानून के विरुद्ध ही नहीं, वह परमात्मा तथा मानवता के विरुद्ध भी एक गंभीर अपराध है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
मनुष्य-मनुष्य के बीच में भेदभाव का व्यवहार चल रहा है । इस समस्या को हल करने के लिए हमें एक राष्ट्रीय अभियान की आवश्यकता है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी
हरिजनों के कल्याण के साथ गिरिजनों तथा अन्य कबीलों की दशा सुधारने का प्रश्न भी जुड़ा हुआ है । ~ अटल बिहारी वाजपेयी

रविवार, 17 दिसंबर 2017

ईवीएम पुराण - अरविन्द सिसौदिया





नई दिल्ली : ईवीएम हैकिंग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. चुनाव आयोग ने इस मामले पर कोर्ट में कहा है कि अमेरिका की वोटिंग मशीन से भी बेहतर है भारत की ईवीएम, इसे हैक करना नामुमकिन है. आयोग ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इसे कोई हैक कर ही नहीं सकता है.

चुनाव आयोग ने ईवीएम को फुलप्रूफ बताया है और कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पेपर ट्रेल के साथ 16 लाख से ज्यादा ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा. चुनाव आयोग ने यह भी भरोसा दिलाया है कि ये तकनीकी रूप से सक्षम ईवीएम मशीनों से आम चुनाव प्रक्रिया और भी पारदर्शी होगी.

हालांकि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है कि दिसंबर में होने वाले गुजरात चुनाव में EVM के साथ VVPAT का इस्तेमाल होगा या नहीं. EVM में गड़बड़ी के आरोपों पर आयोग ने कहा है कि तकनीकी सुरक्षा फीचर्स के साथ आयोग की ओर से प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए कदम की वजह से EVM ना सिर्फ मतदान के वक्त फुलप्रूफ है बल्कि निर्माण के वक्त, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के वक्त भी सुरक्षित है.


चुनाव आयोग ने कहा है कि राजनीतिक पार्टियों ने गड़बड़ी के आरोप तो लगाए हैं लेकिन इसे लेकर कोई सबूत नहीं दिया है. हलफनामे में बताया गया है कि खराब मशीनों का चुनाव में इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया है कि भारत की EVM मशीनों की तुलना विदेशों से नहीं की जा सकती क्योंकि विदेशों में इंटरनेट से जुडे कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है जिससे हैकिंग का खतरा बना रहता है. भारत में EVM अपनी तरह की है.

चुनाव आयोग का कहना है कि VVPAT का इस्तेमाल सबसे पहले 4 सितंबर 2013 को नागालैंड के विधानसभा चुनाव में किया गया. तब से अब तक 266 विधानसभा और 9 संसदीय क्षेत्रों में इसका प्रयोग किया जा चुका है. हाल ही में हुए पांच राज्यों में चुनाव के दौरान आयोग ने 53500 VVPAT का प्रयोग किया गया.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट EVM में गड़बड़ी के आरोपों पर दायर बीएसपी, समाजवादी पार्टी के विधायक और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. कोर्ट ने बीएसपी को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया है. बीएसपी ने सुनवाई के दौरान कहा है कि चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से जवाब दाखिल कर दिया है और चुनाव आयोग ने जो जवाब दाखिल किया है उसपर उन्हें भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए.


इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन
भूमिका
ईवीएम का क्रमिक विकास
ईवीएम की विशेषताएँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूमिका
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनस्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव किसी भी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए महत्‍वपूर्ण होते हैं। इसमें निष्पक्ष, सटीक तथा पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया में ऐसे परिणाम शामिल हैं जिनकी पुष्टि स्वतंत्र रूप से की जा सकती है। परम्परागत मतदान प्रणाली इन लक्ष्य में से अनेक पूरा करती है। लेकिन फर्जी मतदान तथा मतदान केन्द्र पर कब्जा जैसा दोष पूर्ण व्यवहार निर्वाची लोकतंत्र भावना के लिए गंभीर खतरे हैं। इस तरह भारत का निर्वाचन आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार का प्रयास करता रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के दो प्रतिष्ठानों भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड, बंगलौर तथा इलेक्ट्रानिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद के सहयोग से भारत निर्वाचन आयोग ने ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) की खोज तथा डिजायनिंग की।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल भारत में आम चुनाव तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव में आंशिक रूप से 1999 में शुरू हुआ तथा 2004 से इसका पूर्ण इस्तेमाल हो रहा है। ईवीएम से पुरानी मतपत्र प्रणाली की तुलना में वोट डालने के समय में कमी आती है तथा कम समय में परिणाम घोषित करती है। ईवीएम के इस्तेमाल से जाली मतदान तथा बूथ कब्जा करने की घटनाओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। इसे निरक्षर लोग ईवीएम को मत पत्र प्रणाली से अधिक आसान पाते हैं। मत-पेटिकाओं  की तुलना में ईवीएम को पहुंचाने तथा वापस लाने में आसानी होती है।
ईवीएम का क्रमिक विकास
ईवीएम का पहली बार इस्तेमाल मई, 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केन्द्रों पर हुआ|
1983 के बाद इन मशीनों का इस्तेमाल इसलिए नहीं किया गया कि चुनाव में वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल को वैधानिक रुप दिये जाने के लिए उच्चतम न्यायालय का आदेश जारी हुआ था। दिसम्बर, 1988 में संसद ने इस कानून में संशोधन किया तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में नई धारा-61ए जोड़ी गई जो आयोग को वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल का अधिकार देती है। संशोधित प्रावधान 15 मार्च 1989 से प्रभावी हुआ।
केन्द्र सरकार द्वारा फरवरी, 1990 में अनेक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधियों वाली चुनाव सुधार समिति बनाई गई। भारत सरकार ने ईवीएम के इस्तेमाल संबंधी विषय विचार के लिए चुनाव सुधार समिति को भेजा।
भारत सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। इसमें प्रो.एस.सम्पत तत्कालीन अध्यक्ष आर.ए.सी, रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन, प्रो.पी.वी. इनदिरेशन (तब आईआईटी दिल्ली के साथ) तथा डॉ.सी. राव कसरवाड़ा, निदेशक इलेक्ट्रोनिक्स अनुसंधान तथा विकास केन्द्र, तिरूअनंतपुरम शामिल किए गए। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये मशीनें छेड़छाड़ मुक्त हैं।
24 मार्च 1992 को सरकार के विधि तथा न्याय मंत्रालय द्वारा चुनाव कराने संबंधी कानूनों, 1961 में आवश्यक संशोधन की अधिसूचना जारी की गई।
आयोग ने चुनाव में नई इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों के वास्तविक इस्तेमाल के लिए स्वीकार करने से पहले उनके मूल्यांकन के लिए एक बार फिर तकनीकी विशेषज्ञ समिति का गठन किया। प्रो.पी.वी. इनदिरेशन, आईआईटी दिल्ली के प्रो.डी.टी. साहनी तथा प्रो.ए.के. अग्रवाल इसके सदस्य बने।
तब से निर्वाचन आयोग ईवीएम से जुड़े सभी तकनीकी पक्षों पर स्वर्गीय प्रो.पी.वी. इनदिरेशन (पहले की समिति के सदस्य), आईआईटी दिल्ली के प्रो.डी.टी. साहनी तथा प्रो.ए.के. अग्रवाल से लगातार परामर्श लेता है। नवम्बर, 2010 में आयोग ने तकनीकी विशेषज्ञ समिति का दायरा बढ़ाकर इसमें दो और विशेषज्ञों-आईआईटी मुम्बई के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो.डी.के. शर्मा तथा आईआईटी कानपुर के कम्प्यूटर साइंस तथा इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. रजत मूना (वर्तमान महानिदेशक सी-डैक) को शामिल किया।
नवम्बर, 1998 के बाद से आम चुनाव/उप-चुनावों में प्रत्येक संसदीय तथा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत 2004 के आम चुनाव में देश के सभी मतदान केन्द्रों पर 10.75 लाख ईवीएम के इस्तेमाल के साथ ई-लोकतंत्र में परिवर्तित हो गया। तब से सभी चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ईवीएम की विशेषताएँ
यह छेड़छाड़ मुक्त तथा संचालन में सरल है
नियंत्रण इकाई के कामों को नियंत्रित करने वाले प्रोग्राम "एक बार प्रोग्राम बनाने योग्य आधार पर"माइक्रोचिप में नष्ट कर दिया जाता है। नष्ट होने के बाद इसे पढ़ा नहीं जा सकता, इसकी कॉपी नहीं हो सकती या कोई बदलाव नहीं हो सकता।
ईवीएम मशीनें अवैध मतों की संभावना कम करती हैं, गणना प्रक्रिया तेज बनाती हैं तथा मुद्रण लागत घटाती हैं।
ईवीएम मशीन का इस्तेमाल बिना बिजली के भी किया जा सकता है क्योंकि मशीन बैट्री से चलती है।
यदि उम्मीदवारों की संख्या 64 से अधिक नहीं होती तो ईवीएम के इस्तेमाल से चुनाव कराये जा सकते हैं।
एक ईवीएम मशीन अधिकतम 3840 वोट दर्ज कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - ईवीएम

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प्रश्न 1 : इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है? इसकी कार्यप्रणाली मतदान करने की पारम्परिक प्रणाली से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर : इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पांच-मीटर केबल द्वारा जुड़ी दो यूनिटों-एक कंट्रोल यूनिट एवं एक बैलेटिंग यूनिट-से बनी होती है। कंट्रोल यूनिट पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास होती है तथा बैलेटिंग यूनिट वोटिंग कम्पार्टमेंट के अंदर रखी होती है। बैलेट पेपर जारी करने के बजाए, कंट्रोल यूनिट का प्रभारी मतदान अधिकारी बैलेट बटन को दबाएगा। यह मतदाता को बैलेटिंग यूनिट पर अपनी पसंद के अभ्यर्थी एवं प्रतीक के सामने नीले बटन को दबाकर अपना मत डालने के लिए सक्षम बनाएगा।

प्रश्न 2 : निर्वाचनों में ईवीएम का पहली बार चलन कब शुरू किया गया?

उत्तर : वर्ष 1989-90 में विनिर्मित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोगात्मक आधार पर पहली बार नवम्बर, 1998 में आयोजित 16 विधान सभाओं के साधारण निर्वाचनों में इस्तेमाल किया गया। इन 16 विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्रों में से मध्य प्रदेश में 5, राजस्थान में 5, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में 6 विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र थे।

प्रश्न 3 : उन क्षेत्रों में जहां बिजली नहीं है, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है?

उत्तर : ईवीएम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलूर एवं इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड; हैदराबाद द्वारा विनिर्मित 6 वोल्ट की एल्कलाइन साधारण बैटरी पर चलती है। अत:, ईवीएम का ऐसे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है जहां पर बिजली कनेक्शन नहीं हैं।

प्रश्न 4 : अधिकतम कितने मतों को ईवीएम में डाला जा सकता है?

उत्तर : ईवीएम में अधिकतम 3840 मत दर्ज किए जा सकते हैं। जैसाकि सामान्यब तौर पर होता है, एक मतदान केन्द्र में निर्वाचकों की कुल संख्याह 15,00 से अधिक नहीं होगी फिर भी, ईवीएम की क्षमता पर्याप्त् से अधिक है।

प्रश्न 5 : अधिकतम कितने अभ्यैर्थियों के लिए इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनें काम कर सकती हैं?

उत्तर : ईवीएम अधिकतम 64 अभ्य‍र्थियों के लिए काम कर सकती है। एक बैलेटिंग यूनिट में 16 अभ्यमर्थियों के लिए प्रावधान है। यदि अभ्यर्थियों की कुल संख्याे 16 से अधिक हो जाती है तो पहली बैलेटिंग यूनिट के साथ-साथ एक दूसरी बैलटिंग यूनिट जोड़ी जा सकती है। इसी प्रकार, यदि अभ्येर्थियों की कुल संख्या 32 से अधिक हो तो एक तीसरी बैलेटिंग यूनिट जोड़ी जा सकती है और यदि अभ्यथर्थियों की कुल संख्या 48 से अधिक हो तो एक चौथी यूनिट अधिकतम 64 अभ्ययर्थियों के लिए काम करने हेतु जोड़ी जा सकती है।

प्रश्न 6 : यदि किसी निर्वाचन-क्षेत्र में निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यतर्थियों की संख्या् 64 से अधिक हो जाए तो क्यां होगा?

उत्तर : यदि किसी निर्वाचन-क्षेत्र में निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 64 से अधिक हो जाए तो ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में मत पेटी एवं मत पत्र के माध्येम से किए जाने वाले मतदान की पारम्पररिक प्रणाली को अपनाना पड़ेगा।

प्रश्न 7 : यदि किसी खास मतदान केन्द्र में ईवीएम खराब हो जाए तो क्या होगा?

उत्तर : एक अधिकारी को मतदान के दिन लगभग 10 मतदान केन्द्रोंु को कवर करने के लिए ड्यूटी पर लगाया जाता है। वे अपने पास अतिरिक्त ईवीएम रखे रहेंगे और खराब ईवीएम को नई ईवीएम से बदला जा सकता है। ईवीएम के खराब होने के चरण तक दर्ज मत कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में सुरक्षित रहेंगे और ईवीएम के खराब होने के बाद से मतदान प्रक्रिया जारी रखना पर्याप्ते होगा। प्रारम्भी से, मतदान शुरू करना आवश्यरक नहीं है।

प्रश्न 8 : ईवीएम को किसने बनाया है?

उत्तर :इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनें ढेरों बैठकें करने, प्रोटोटाइपों की परीक्षण-जांच करने एवं व्याजपक फील्डह ट्रायलों के बाद दो लोक उपक्रमों अर्थात भारत इलेक्ट्रॉ निक्स लिमिटेड, बेंगलूर एवं इलेक्ट्रॉ निक कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया, हैदराबाद के सहयोग से निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार एवं डिजाइन की गई है। अब, इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनें उपर्युक्तच दो उपक्रमों द्वारा विनिर्मित की जाती हैं।

प्रश्न 9 : मशीन की लागत क्याव है? क्या‍ ईवीएम का प्रयोग करना अत्यीधिक खर्चीला नहीं है?

उत्तर : वर्ष 1989-90 में जब मशीनें खरीदी गई थीं उस समय प्रति ईवीएम (एक कंट्रोल यूनिट, एक बैलेटिंग यूनिट एवं एक बैटरी) की लागत 5500/- थी। यद्यपि, प्रारंभिक निवेश किंचित अधिक है, लाखों मत पत्रों के मुद्रण, उनके परिवहन, भंडारण आदि, और मतगणना स्टाकफ एवं उन्हें् भुगतान किए जाने वाले पारिश्रमिक में काफी कमी हो जाने की दृष्टि से हुई बचत के द्वारा अपेक्षा से कहीं अधिक निष्प्र भावी हो जाता है।


प्रश्न 10 : हमारे देश की जनसंख्याा के एक काफी बड़े हिस्सेग के निरक्षर होने के परिणामस्व रूप क्या् इससे निरक्षर मतदाताओं के लिए समस्यान नहीं उत्पेन्न होगी?

उत्तर : दरअसल, ईवीएम के द्वारा मतदान किया जाना पारम्पसरिक प्रणाली की तुलना में कहीं अधिक सरल है जिसमें एक व्यक्ति को अपनी-अपनी पसंद के अभ्यपर्थी के प्रतीक पर या उसके समीप मतदान का निशान लगाना पड़ता है, पहले उसे उर्ध्वादधर रूप में और फिर क्षैतिज रूप में मोड़ना पड़ता है और उसके बाद उसे मत पेटी में डालना पड़ता है। ईवीएम में, मतदाता को केवल अपनी पसंद के अभ्यकर्थी एवं प्रतीक के सामने नीला बटल दबाना होता है और मत दर्ज हो जाता है। ग्रामीण एवं निरक्षर लोगों को अपना मत दर्ज करने में कोई कठिनाई नहीं होती है और उन्होंने तो बल्कि ईवीएम के उपयोग का स्वा गत किया है।

प्रश्न 11 : क्या ईवीएम के उपयोग से बूथ-कैप्च रिंग को रोका जा सकता है?

उत्तर : बूथ कैप्चरिंग से तात्पर्य यदि यह है कि मत पेटियों या मत पत्रों को ले जाना या उन्हें क्षतिग्रस्त करना तो ईवीएम के उपयोग द्वारा उस बुराई को नहीं रोका जा सकता है क्यों्कि ईवीएम भी उपद्रवियों द्वारा बलपूर्वक भी ले जाए जा सकते हैं या क्षतिग्रस्तं किए जा सकते हैं। परन्तु यदि बूथ कैप्चलरिंग को उपद्रवियों द्वारा मतदान कर्मियों को धमकाने तथा मतदान पत्रों में प्रतीक पर मुहर लगाने तथा चंद मिनटों में भाग निकलने के मामले के रूप में देखा जाता है तो इसे ईवीएम के उपयोग द्वारा रोका जा सकता है। ईवीएम की प्रोग्रामिंग इस प्रकार की गई है कि मशीनें एक मिनट में केवल पांच मतों को ही दर्ज करेगी। चूंकि मतों का दर्ज किया जाना अनिवार्य रूप से कंट्रोल यूनिट तथा बैलेटिंग यूनिट के माध्य म से ही किया जाना, इसलिए उपद्रवियों की संख्या चाहे कितनी भी हो, वे केवल 5 मत प्रति मिनट की दर से ही मत दर्ज कर सकते हैं। मत पत्रों के मामले में, उपद्रवी एक मतदान केन्द्र के लिए निर्दिष्ट सभी 1000 विषम मत पत्रों को आपस में बांट सकते हैं, उन पर मुहर लगा सकते हैं, उन्हें् मत पेटियों में ठूंस सकते हैं तथा पुलिस बलों के अधिक संख्या में पहुंचने से पहले भाग सकते हैं। प्रत्ये क आधे घंटे में उपद्रवी अधिकतम 150 मतों को ही दर्ज कर सकते हैं और तब तक इस बात की संभावनाएं हैं कि पुलिस बल पहुंच जाए। इसके अतिरिक्त, पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी द्वारा मतदान केन्द्रव के भीतर जैसे ही कुछ बाहरी व्य क्तियों को देखा जाए तो उनके पास “बंद” बटन दबाने का विकल्पे हमेशा रहेगा। एक बार ‘बंद’ बटन दबा देने के पश्चा त कोई भी मत दर्ज करना संभव नहीं होगा और इससे बूथ पर कब्जा करने वालों का प्रयास निष्फल हो जाएगा।

प्रश्न 12 : क्याा यह संभव है कि संसदीय एवं राज्यि विधान सभाओं के लिए एककालिक निर्वाचनों के लिए ईवीएम का प्रयोग किया जाए?

उत्तर : हां

संसदीय एवं राज्य विधान सभाओं के एककालिक निर्वाचनों के लिए ईवीएम का उपयोग करना संभव है और मौजूदा ईवीएम इसी अपेक्षा को ध्याकन में रख कर डिज़ाइन किए गए हैं।

प्रश्न 13 : ईवीएम के उपयोग के क्या-क्या फायदे हैं?

उत्तर : सबसे महत्वमपूर्ण फायदा यह है कि लाखों-करोड़ों की संख्याउ में मत पत्रों की छपाई से बचा जा सकता है क्यों कि प्रत्येैक अलग-अलग निर्वाचक के लिए एक मत पत्र के बजाय प्रत्येाक मतदान केन्द्र पर बैलेटिंग यूनिट पर केवल एक मत पत्र लगाया जाना अपेक्षित है। इसके परिणामस्व्रूप कागज, मुद्रण, पारवहन, भंडारण एवं वितरण की लागत के रूप में भारी बचत होती है। दूसरे, मतगणना बहुत तेजी से होती है और पारम्परिक प्रणाली के अंतर्गत औसतन, 30-40 घंटों की तुलना में 2 से 3 घंटों के भीतर परिणाम घोषित किए जा सकते हैं। तीसरे, ईवीएम मतदान प्रणाली के अंतर्गत कोई अमान्यण मत नहीं होता है। इसकी महत्ताप तब बेहतर तरीके से समझी जाएगी, जब यह याद किया जाए कि प्रत्येाक साधारण निर्वाचन में कई निर्वाचन क्षेत्रों में अमान्यत मतों की संख्याि विजयी अभ्यार्थी एवं द्वितीय स्था्न-प्राप्तब अभ्योर्थी के बीच जीत के अंतर से अधिक होती है। इस सीमा की दृष्टि से निर्वाचकों की पसंद उस परिस्थिति में अधिक उचित तरीके से परिलक्षित होती है जब ईवीएम का इस्तेपमाल किया जाता है।

प्रश्न 14 : क्याि ईवीएम का उपयोग मतदान की गति धीमी कर देता है?

उत्तर : नहीं

दरअसल, ईवीएम उपयोग से मतदान की गति और तेज हो जाती है क्योंीकि मतदाता के लिए यह आवश्येक नहीं होता है कि पहले वह मतपत्र को खोलें, अपनी पसंद चिह्नित करें, फिर उसे मोड़ें और वहां जाएं जहां मत पेटी रखी गई है और उसे पेटी में डालें। ईवीएम प्रणाली के अंतर्गत उसे केवल अपनी पसंद के अभ्यपर्थी एवं प्रतीक के समीप बटन को दबाना होता है।

प्रश्न 15 : मत पेटियों के मामले में मतगणना मत पत्रों के मिलाए जाने के बाद की जाती है। क्या् ईवीएम का उपयोग किए जाने के समय इस प्रणाली को अपनाया जाना संभव है?

उत्तर : सामान्यष नियम यह है कि मतों की गणना मतदान केन्द्रद-वार की जाए और तब ठीक वही किया जाता है जब प्रत्येिक मतदान केन्द्रद में ईवीएम का उपयोग किया जाता है। मतगणना की मिक्सिंग प्रणाली का केवल उन निर्वाचन क्षेत्रों में इस्तेदमाल किया जाता है जो निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित हों। ऐसे मामलों में भी प्रत्येैक ईवीएम से प्राप्तग परिणाम मास्टतर मतगणना मशीन में डाले जा सकते हैं जिसमें केवल एक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के कुल परिणाम का पता चलेगा न कि अलग-अलग मतदान केन्द्रर के परिणाम का।

प्रश्न 16 : कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में परिणाम कितने समय तक रहता है?

उत्तर : कंट्रोल यूनिट, की मेमोरी में, परिणाम, 10 वर्ष और उससे भी अधिक समय तक रहता है।


प्रश्न 17. जब कभी याचिका दायर की जाती है, तो निर्वाचन के परिणाम अंतिम निष्कगर्ष के अध्य्धीन होते हैं। न्याियालय, उपयुक्तह मामलों में, मतों की पुनर्गणना का आदेश दे सकता है। क्या् ईवीएम को इतने लम्बे् समय के लिए स्‍टोर किया जा सकता है और क्याप न्या यालयों द्वारा प्राधिकृत अधिकारियों की उपस्थिति में परिणाम लिया जा सकता है? क्यास बैटरी लीक नहीं होगी या ईवीएम को अन्य था नुकसान नहीं होगा?

उत्तर : बैटरी की आवश्यवकता केवल मतदान और मतगणना के समय इलेक्ट्रॉीनिक वोटिंग मशीनों को सक्रिय करने के लिए होती है। ज्योंा ही मतदान समाप्त् होता है बैटरी को बंद किया जा सकता है और उसका (बैटरी का केवल) मतगणना के समय चालू किया जाना जरूरी होता है। परिणाम लेने के तुरन्तह बाद बैटरी हटाई जा सकती है और अलग रखी जा सकती है। इसलिए, बैटरी लीक होने का या अन्यहथा ईवीएम को नुकसान पहुंचने का कोई प्रश्न ही नहीं होता बैटरी निकाल दिए जाने के बाद भी माइक्रोचिप में मेमोरी ज्यों की त्यों बनी रहती है। यदि न्यानयालय पुनर्गणना करने का आदेश देता है तो कंट्रोल यूनिट में बैटरी लगाकर उसे पुन: सक्रिय किया जा सकता है और वह मेमोरी में संग्रहीत परिणाम प्रदर्शित करेगी।

प्रश्न 18. क्याण बटन को बार-बार दबाकर एक से अधिक बार मतदान करना सम्भलव है?

उत्तर : नहीं

जैसे ही बैलेटिंग यूनिट पर एक विशेष बटन को दबाया जाता है, उस विशेष अभ्योर्थी के लिए मत दर्ज हो जाता है और मशीन लॉक हो जाती है। उस परिस्थिति में भी जब (चाहे) कोई व्यदक्ति उस बटन को या किसी अन्यै बटन को आगे और दबाता है, तो और कोई भी मत दर्ज नहीं होगा। इलेक्ट्रो निक वोटिंग मशीनें इस तरह से ''एक व्य क्ति, एक मत'' का सिद्धांत सुनिश्चित करती हैं।

प्रश्न 19. एक मतदाता इस बात के प्रति कैसे आश्ववस्ति होगा कि इलेक्ट्रॉतनिक वोटिंग मशीन काम कर रही है और उसका मत दर्ज हो गया है?

उत्तर :जैसे ही मतदाता अपनी पसंद के अभ्यहर्थी और प्रतीक के सामने लगे ''नीले बटन'' को दबाता है, प्रतीक के बायीं ओर लगे एक छोटे-से लैम्प में लाल बत्तीा जल उठती है और साथ ही साथ, एक लम्बीे बीप ध्वछनि सुनाई देती है। इस प्रकार, मतदाता को आश्व स्त करने के लिए ऑडियो और वीडियो दोनों में संकेत मैजूद होते है कि उसका मत दर्ज हो गया है।

प्रश्न 20. क्याी यह सही है कि कभी-कभी लघु परिपथिकी या अन्य‍ कारण से 'नीला बटन' दबाते समय मतदाओं को बिजली का झटका लगने की संभावना होती है?

उत्तर : नहीं

इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीन 6-वोल्ट की बैटरी पर कार्य करती है और 'नीला बटन' दबाते समय या बैले‍टिंग यूनिट को हैंडल करते हुए किसी भी समय मतदाता को बिजली का झटका लगने की बिल्कु ल भी संभावना नहीं है।

प्रश्न 21. क्या इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनों को प्रारंभ में ही इस तरह प्रोग्राम करना है कि मान लीजिए 100 मतों तक, संभव है कि मत ठीक उसी तरीके से दर्ज होंगे जैसे कि 'नीले बटन' दबाए गए हैं लेकिन, उसके बाद मत केवल एक खास अभ्यतर्थी के पक्ष में ही दर्ज होंगे, चाहें 'नीला बटन' उस अभ्येर्थी के सामने या किसी अन्यथ अभ्यहर्थी के सामने दबाया गया हो?

उत्तर :इलेक्ट्रो निक वोटिंग मशीनों में प्रयुक्त माइक्रोचिप आयात के समय सील बंद की जाती है। यह खोली नहीं जा सकती और चिप को क्षतिग्रस्त् किए बगैर किसी भी व्यकक्ति द्वारा इस प्रोग्राम को रिराइट किया जा सकता। इसलिए, किसी विशेष अभ्यगर्थी या राजनैतिक दल का चयन करने के लिए ईवीएम की एक खास तरीके से प्रोग्रामिंग करने की बिल्कुैल भी संभावना नहीं है।

प्रश्न 22. क्या मतदान केन्द्रों तक इलेक्ट्रॉ।निक वोटिंग मशीनों को पहुंचाना मुश्किल नहीं होगा?

उत्तर : नहीं।

इसके बजाय मतदान पेटियों की तुलना में इलेक्ट्रोननिक वोटिंग मशीनों का परिवहन अपेक्षाकृत अधिक आसान होगा, क्योंीकि इलेक्ट्रॉननिक वोटिंग मशीनें हल्की, वहनीय होती हैं और ढोए जाने के लिए पॉलीप्रोपीलीन खोलों में आती है।


प्रश्न 23. देश के बहुत से क्षेत्रों में, विद्युत कनेक्शनन नहीं होते हैं और जिन स्थाशनों में विद्युत का कनेक्शनन है भी, वहां ऊर्जा आपूर्ति अनियमित है। ऐसी परिस्थिति में, क्याश बिना वातानुकूलन के मशीनों को संग्रहीत करने में समस्याऊ उत्पअन्नस नहीं होगी?

उत्तर : कमरे/हॉल जहां इलेक्ट्रॉ्निक वोटिंग मशीन स्टोेर की जाती है, को वातानुकूलित करने की कोई आवश्यीकता नहीं है। जरूरी बात केवल यह है कि कमरे/हॉल को धूल, नमी और कृतकों (चूहा, गिलहरी आदि) से मुक्त रखा जाए जैसाकि मतपेटियों के मामले में किया जाता है।

प्रश्न 24. परंपरागत प्रणाली में, किसी भी खास समय-बिंदु पर डाले गए मतों की कुल संख्याव को जानना संभव होगा। इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनों में, 'परिणाम' वाला भाग सील बंद कर दिया जाता है और केवल मतगणना के समय ही खोला जाएगा। मतदान के दिन डाले गए मतों की कुछ संख्या किस प्रकार जानी जा सकती है?

उत्तर :इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनों पर 'परिणाम' बटन के अलावा एक 'टोटल' बटन भी होता है। इस बटन को दबाने पर बटन को दबाए जाने के समय तक डाले गए मतों की कुल संख्याे अभ्यार्थी-वार गणना को दर्शाए बिना, प्रदर्शित हो जाएगी।

प्रश्न 25. बैलेटिंग यूनिट में 16 अभ्य र्थियों के लिए व्यकवस्था की गई होती है। एक निर्वाचन-क्षेत्र में केवल 10 अभ्यबर्थी हैं। मतदाता 11 से 16 तक के बटनों में से किसी भी बटन को दबा सकता है। क्याे ये मत व्यअर्थ नहीं जाऐंगे?

उत्तर : नहीं।

अभ्यर्थी संख्यांओं 11 से 16 तक के लिए पैनलों को इस्तेमाल से पहले छिपा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्तर, अभ्य र्थी 11 से 16 तक के लिए अभ्य र्थियों के मतों का दर्ज किया जाना इलेक्ट्रॉ निक रूप से बंद कर दिया जाएगा, क्यों6कि अभ्यलर्थियों के स्विच को 10 पर ही सेट किया जाएगा। किसी मतदाता द्वारा 11 से 16 तक के अभ्यअर्थियों के लिए कोई बटन दबाने या इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनों में इन अभ्येर्थीयों के लिए मत दर्ज होने का सवाल ही नहीं उठता।

प्रश्न 26. मत पेटियां उत्कीवर्ण होती है ताकि इन पेटियों को बदले जाने संबंधी शिकायत की कोई संभावना न रहे। क्याि इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनों के संख्यां कन की कोई प्रणाली है?

उत्तर : हां।

प्रत्येक कंट्रोल यूनिट में एक विशिष्ट आई डी नम्बर होता है, जो प्रत्येक यूनिट पर स्थायी मार्कर के द्वारा पेंट किया जाता है। पोलिंग एजेंट को यह आई डी नम्बबर नोट करने की अनुमति दी जाएगी और इसे इस प्रयोजन के लिए रखे गए रजिस्टर में भी रिटर्निंग अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाएगा। कन्ट्रोपल यूनिट के साथ संलग्नक (जोड़े गए) एड्रेस टैग पर भी यह आई डी नम्बर दर्शित होगा। इसलिए किसी भी इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीन को बदले जाने का प्रश्नर ही नहीं उठता।

प्रश्न 27. क्या? कोई ऐसा प्रावधान है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोग करने के समय निविदत मत पत्रों को जारी किया जाए?

उत्तर : हां।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की प्रणाली के अंतर्गत भी निविदत्त मतपत्रों को जारी किए जाने का प्रावधान है। परन्तुट, जब ऐसी स्थिति उत्पिन्न‍ होती है तो, संबंधित मतदाता को एक साधारण मतपत्र जारी किया जाएगा। उपलब्ध कराए गए रबड़ की मोहर से मतपत्र पर ऐरो क्रॉस से निशान लगाए जाने के बाद निविदत्त‍ मतपत्र को पीठासीन अधिकारी द्वारा इस विशेष रूप से उपलब्धन करवाए गए एक लिफाफे के भीतर रखा जाएगा, और सीलबंद किया जाएगा।

प्रश्न 28. पारम्पिरिक प्रणाली में, मतदान प्रारंभ होने से पहले पीठासीन अधिकारी उपस्थित मतदान अभिकर्ताओं को यह दिखाते हैं कि मतदान केन्द्रि में प्रयुक्तई होने वाली मतदान पेटी खाली है। क्या मतदान अभिकर्ताओं को संतुष्ट् करने का कोई ऐसा प्रावधान है कि इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीनों में पहले से ही दर्ज किए गए छिपे हुए मत नहीं हैं?

उत्तर : हां।

मतदान प्रारंभ होने से पहले, पीठासीन अधिकारी उपस्थित मतदान अभिकर्ताओं के समक्ष परिणाम बटन दबाकर यह दिखाता है कि मशीन में पहले से ही दर्ज किए गए छिपे हुए मत नहीं है। तदुपरांत, वे मतदान अभिकर्ताओं को अपने-अपने मत दर्ज करने के लिए कह कर मॉक पोल का संचालन करेंगे और उन्हेंा संतुष्टअ करने के लिए परिणाम निकालेंगे कि दर्शाया गया परिणाम ठीक उसी तरह है जैसाकि उन्होंंने दर्ज किया है। इसके तत्पनश्चा त, पीठासीन अधिकारी वास्तकविक मतदान प्रारम्भउ होने से पहले मॉक पोल के परिणाम को हटाने (क्लीायर करने) के लिए क्लियर बटन दबाएंगे।

प्रश्नै 29. मतदान समाप्तभ होने के पश्चा त और मतगणना शुरू होने से पहले इच्छुीक दलों द्वारा किसी भी समय और अधिक मत दर्ज करने की सम्भा वना को किस प्रकार दूर किया जा सकता है?

उत्तर : जैसे ही आखिरी मतदाता, मतदान कर लेता है, कंट्रोल यूनिट के प्रभारी मतदान अधिकारी 'क्लोआज' बटन दबाएंगे। इसके उपरांत, इलेक्ट्रॉ निक वोटिंग मशीन कोई भी मत स्वीसकार नहीं करेगी। इसके अतिरिक्ति, मतदान समाप्तर होने के पश्चाेत, बै‍लेटिंग यूनिट को कंट्रोल यूनिट से अलग किया जाता है और पृथक रूप से रखा जाता है। वोटों को केवल बैलेटिंग यूनिट के माध्यिम से ही दर्ज किया जा सकता हैं। पुन:, पीठासीन अधिकारी, मतदान की समाप्ति पर उपस्थित प्रत्येसक मतदान अभिकर्ता को दर्ज किए गए मतों का लेखा-जोखा पेश करेगा। मतों की गणना के समय, इस लेखा से कुल योग का मिलान किया जाएगा और यदि कोई विसंगति है तो उसका मतगणना अभिकर्ता के द्वारा उल्लेकख किया जाएगा।

शनिवार, 9 दिसंबर 2017

बुजुर्गों की सम्पत्ति हड़पने वाले बच्चों को अब मिलेगी सजा


अंतिम अरण्य में जीवन
केपी सिंह जनसत्ता 1 अक्तूबर, 2014: महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के लव-कुश प्रकरण में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को राजधर्म का पाठ पढ़ाते हुए कहा था कि स्त्रियों, वृद्धों और बच्चों की सुरक्षा का प्रमुख दायित्व राजा पर ही होता है। भारत में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अनेक कानून

जनसत्ता October 1, 2014

केपी सिंह
जनसत्ता 1 अक्तूबर, 2014: महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के लव-कुश प्रकरण में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को राजधर्म का पाठ पढ़ाते हुए कहा था कि स्त्रियों, वृद्धों और बच्चों की सुरक्षा का प्रमुख दायित्व राजा पर ही होता है। भारत में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अनेक कानून बनाए हैं। सामाजिक चेतना के कारण महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार से जुड़े मसले समाचार माध्यमों के जरिए सार्वजनिक बहस का भी विषय बनते रहते हैं। पर यह हकीकत है कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति हम उतने संवेदनशील नहीं हो सके हैं जितने होने चाहिए। देश में पैंसठ प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या पैंतीस वर्ष से कम उम्र के लोगों की है।
आज भारत सबसे युवा देश है, पर आगामी पच्चीस वर्षों बाद यहां वरिष्ठ नागरिकों की तादाद दुनिया में सबसे अधिक होगी। संविधान के इकतालीसवें अनुच्छेद में व्यवस्था है कि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए सरकार उनके सार्वजनिक सहायता प्राप्त करने के अधिकार की रक्षा के कारगर कदम उठाएगी। बदलते राष्ट्रीय और सामाजिक परिवेश में यह जरूरी हो जाता है कि वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें समुचित कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए। प्रतिवर्ष एक अक्तूबर को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस हमें आत्मावलोकन करने का अवसर प्रदान करता है।

जीवन भर समाज और राष्ट्र की सेवा में लगा देने के बाद, जब न शरीर साथ देता है और न ही मस्तिष्क, वरिष्ठ नागरिकों को तरह-तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। कोई पारिवारिक सदस्यों के दुर्व्यवहार और घेरलू हिंसा का शिकार होता है तो किसी को अपने ही घर से बाहर निकाल दिया जाता है। मथुरा की सांसद और अपने समय की प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमामालिनी ने वृंदावन की विधवाओं और वृद्ध महिलाओं को लेकर समाज का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की है।
अकेले रहने वाले बुजुर्ग अमूमन अपराधियों, असामाजिक तत्त्वों और घरेलू नौकरों की हिंसा के शिकार होते रहते हैं। उनकी चल-अचल संपत्ति को हड़पने की फिराक में सगे-संबंधी और रिश्तेदार ही नहीं, किराएदार और आपराधिक तत्त्व भी रहते हैं। बढ़ती उम्र के कारण वरिष्ठ नागरिक अपनी संपत्ति की देखभाल करने में असमर्थ हो जाते है। किराएदार न तो किराया देता है और न ही संपत्ति को वापस सौंपता है। जीवन की सांध्य वेला से गुजर रहे व्यक्ति में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने का हौसला नहीं होता।
सामाजिक और भावनात्मक सुरक्षा की जरूरत वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक होती है। सीमित होते जा रहे पारिवारिक दायरे में वे समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग पड़ जाते हैं। बहुत थोड़े-से संवेदनशील लोग ही उनसे मिलना-जुलना पसंद करते हैं। इस कारण अनेक वरिष्ठ नागरिक एकांत में दूसरे दर्जे का जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं। उनके एकांत-वास को तोड़ने के उपाय करना एक गंभीर चुनौती है।
हजारों की संख्या में वरिष्ठ नागरिक जेलों में बंद हैं। जेल में होने वाली कठिनाइयों को भुगतना उनके लिए सबसे बड़ी त्रासदी है। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता में बुजुर्गों की अवस्था को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं किए गए हैं। न्यायिक प्रक्रिया में वरिष्ठ नागरिक उसी प्रकार संवेदनशील नजरिये के हकदार हैं जिस प्रकार बच्चे। खूंखार अपराधियों से निपटने के लिए बनाई गई दंड प्रक्रिया संहिता वरिष्ठ नागरिकों के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पाती है।
मनुष्य के जीवन की अंतिम वेला में एक पड़ाव ऐसा भी आता है जब उसे अपनी दैनिक निवृत्तियों और स्वास्थ्य संबंधी आपातकालीन समस्याओं से निपटने के लिए दूसरों के सहारे पर निर्भर रहना पड़ता है, जो हमेशा सभी को उपलब्ध नहीं होता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी सरकार की ही है।
कुछ वर्ष पहले तक भारत में औसत आयु कम होने के कारण वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बहुत थोड़ी होती थी। इसलिए उनके कल्याण के लिए कोई सक्षम व्यवस्था यहां विकसित नहीं हो पाई है। वर्ष 2050 तक भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या तैंतीस करोड़ होगी। इनमें से पांच करोड़ लोग अस्सी से ज्यादा उम्र के होंगे। औसत आयु के लगातार बढ़ने से अधिक उम्र के लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और पुनर्वास संबंधी जरूरतों को पूरा करने लिए उचित व्यवस्था भविष्य की सरकारों के लिए एक महत्त्वपूर्ण चुनौती बनने जा रही है।
विदेशों में, विशेषकर पश्चिमी देशों में, सरकारें वरिष्ठ नागरिकों के प्रति बहुत पहले से संवेदनशील रही हैं। वहां उनके रहन-सहन की स्थितियों और सेहत आदि को लेकर सर्वेक्षण भी होते रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उनकी जरूरतों को ध्यान में रख कर बहुत पहले मैड्रिड योजना तैयार की थी। वर्ष 2002 में संयुक्तराष्ट्र ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याणार्थ कुछ मूल सिद्धांत निर्धारित किए थे। उसी साल इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित ‘शंघाई कार्य-योजना’ सभी देशों के मार्गदर्शन के लिए तैयार की गई थी।
वर्ष 2007 में ‘मकाओ दस्तावेज’ के नाम से इसी विषय पर एक दिग्दर्शिका तैयार की गई थी। इन सभी दस्तावेजों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के समुचित कदम उठाने का आह्वान किया गया है। भारत ने इन सभी दस्तावेजों पर सहमति-स्वरूप हस्ताक्षर करके इन्हें कार्यान्वित करने का वचन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिया हुआ है। अत: यह हमारा नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए सक्षम कार्य-योजना तैयार की जाए।
भारत में वरिष्ठ नागरिकों को उचित सम्मान देने की परंपरा रही है। बीसवीं सदी में एक कहावत प्रचलित थी कि बचपन में संरक्षण के लिए जापान, जवानी में लुत्फ उठाने के लिए पश्चिमी देश और वृदावस्था में सुरक्षा पाने लिए भारत दुनिया के सर्वोत्तम स्थान हैं। बुजुर्गों के प्रति पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव हमें विरासत में मिलता है। पर परिस्थितियां और परिवेश बदल रहे हैं। प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक इतना भाग्यशाली नहीं होता कि उसे जरूरत के समय पर्याप्त सहायता मिलने की गारंटी हो। इसी के मद््देनजर पहले वर्ष 1999 और फिर वर्ष 2011 में भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय नीति की घोषणा की गई थी। उनके कल्याण और सुरक्षा के मद््देनजर 2007 में एक कानून भी बनाया गया था।
वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित 2007 का कानून प्रभावकारी साबित नहीं हुआ है। इस कानून में उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी मुख्यतया वारिसों पर डाली गई है। इस जिम्मेदारी का कोई मतलब नहीं रह जाता जब चालीस प्रतिशत जनता खुद गरीबी की रेखा के नीचे गुजर-बसर कर रही है। हमें यह बात भी याद रखनी चाहिए कि किसी को उसकी पारिवारिक, नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का अहसास अकेले कानून बना कर नहीं कराया जा सकता। जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार को वहन करनी चाहिए। उनके लिए आशियाने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथामिकता में होना चाहिए। ऐसे हर वरिष्ठ नागरिक के लिए, जिसे कोई पेंशन नहीं मिलती, सामाजिक सुरक्षा की ऐसी योजना बनाई जाए जिसमें निर्वाह-योग्य न्यूनतम पेंशन की व्यवस्था हो।
वर्ष 2007 में बने कानून में वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मुद््दों पर निर्णय करने के अधिकार सब डिविजनल मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी को दिए गए हैं। यह अधिकारी जिला प्रशासन का सबसे व्यस्त अधिकारी होता है।
वरिष्ठ नागरिकों के मामलों पर विचार करने के लिए उसके पास पर्याप्त समय ही नहीं होता। इस कानून के अंतर्गत केवल वरिष्ठ नागरिकों के रहने और खाने की व्यवस्था की तरफ ही ध्यान केंद्रित किया गया है। यह जिम्मेवारी भी मुख्य रूप से वारिसों पर ही डाली गई है। वरिष्ठ नागरिकों की सबसे मुख्य समस्या उनके साथ होने वाले घरेलू दुर्व्यवहार हैं जिनमें संपत्ति को हड़पने, मारपीट करने और घर से निकाल देने जैसे घिनौने कृत्य शामिल हैं अधिकतर वरिष्ठ नागरिक घर की इज्जत को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की शिकायतों को लेकर किसी भी अधिकारी के पास जाना उचित नहीं समझते हैं। वर्तमान कानून भी इस प्रकार की समस्याओं से निजात नहीं दिला पाता है। यह आवश्यक है कि महिलाओं को ध्यान में रख कर बनाए गए घरेलू हिंसा अधिनियम की तर्ज पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक कारगर कानून बनाया जाए, जिसमें उनकी सभी समस्याओं का निदान हो।
जो वरिष्ठ नागरिक आर्थिक रूप से समर्थ हैं उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा, संपत्ति की सुरक्षा और भावनात्मक सुरक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उचित कानूनी प्रावधान किए जा सकते हैं। वर्तमान कानून में इसके लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं है। वर्ष 2007 के कानून की धारा 22 (2) में वरिष्ठ नागरिकों की जिंदगी और संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक विस्तृत कार्य-योजना बनाने की जिम्मेदारी सरकार पर डाली गई थी। दुर्भाग्यवश इस कार्य-योजना में वरिष्ठ नागरिकों की उपरोक्तवास्तविक जरूरतों को ध्यान में रख कर पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं। वरिष्ठ नागरिकों का एक वर्ग ऐसा भी है जो आर्थिक तंगी का शिकार है। उनके लिए अलग से सरकारी व्यवस्था करने की जरूरत है।
किसी भी कार्य-योजना को बनाने से पहले भरोसेमंद आंकड़ों की जरूरत होती है। किसी भी सरकारी संस्था के पास वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों के संबंध में आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। किसी को ठीक से यह नहीं पता है कि कितने वरिष्ठ नागरिकों को आश्रय चाहिए, कितनों को आर्थिक मदद, कितनों को संपत्ति की सुरक्षा की दरकार है और कितने कारावासों में बंद हैं। वर्ष 2007 के कानून को लागू करने से जुड़े आंकड़े भी किसी संस्था के पास नहीं हैं। यह बहुत जरूरी है कि इस प्रकार के सभी आंकड़ों को सरकारी तंत्र इकट्ठा करे ताकि उनका प्रयोग नीतियां बनाने में किया जा सके।
जिन नागरिकों ने अपने जीवन का बहुमूल्य समय देश और समाज के लिए लगाया है उन्हें सम्मान का जीवन व्यतीत करने के अवसर प्रदान करना हम सबकी नैतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए बनाए गए वर्ष 2007 के कानून से किसी का भी भला नहीं होने वाला है। इस विषय पर एक नए, अधिक सक्षम कानून बनाने के तकाजे को अब ज्यादा समय तक नहीं टाला जा सकता।

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बुजुर्गों की सम्पत्ति हड़पने वाले बच्चों को अब मिलेगी सजा

अक्सर ऐसे बुजुर्ग मेरे पास अपनी पीड़ा व्यक्त करने आते रहते हैं जिनसे उनकी संतानों ने उनकी जमीन-जायदाद ïआदि अपने नाम लिखवा लेने के बाद उनकी ओर से आंखें फेर कर उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। हाल ही में 2 ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिनसे एक बार फिर इस गलत रुझान की पुष्टि हुई। पहला मामला महाराष्ट्र के पुणे का है जहां एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग ने दो मंजिला मकान बनवाया ताकि वह अतिरिक्त आमदनी के लिए ऊपर का हिस्सा किराए पर दे सकें परंतु बेटे ने धोखे से स्टाम्प पेपर पर उनके हस्ताक्षर लेकर उस हिस्से पर कब्जा कर लिया। इस बीच जब पिता बीमार पड़े तो बेटे ने न सिर्फ उनके इलाज में कोई सहयोग नहीं दिया बल्कि घर के निचले हिस्से पर भी कब्जा जमा लिया। इस पर पिता ने पुणे के अतिरिक्त जिलाधिकारी के पास शिकायत की तो फैसला उनके पक्ष में आने पर बेटे ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी जिस पर बम्बई हाईकोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति साधना जाधव ने पुणे अदालत का फैसला बहाल रखते हुए पिता के घर पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले बेटे को घर खाली करने का आदेश देते हुए कहा: ''बच्चे सिर्फ अपने माता-पिता की संपत्ति पर हक ही न जताएं, उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी उठाएं और यदि बेटा घर खाली नहीं करता तो माता-पिता पुलिस का भी सहयोग ले सकते हैं।'' ''यह मामला गिरते सामाजिक मूल्यों की ओर इशारा करता है, इसलिए सरकार को 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक कल्याण एवं भरण-पोषण कानून -2007' के प्रावधानों को सख्ती से लागू करना चाहिए।'' इसी प्रकार के एक अन्य मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजन गुप्ता ने 29 जून को स्पष्ट किया कि: ''जायदाद अपने नाम पर हस्तांतरित करवा लेने के बाद अपने माता-पिता को वहां से बाहर निकाल देने वाली संतान के नाम पर किया गया हस्तांतरण रद्द करके उसे दंडित किया जा सकता है और उसे 3 महीने जेल एवं 5000 रुपए तक जुर्माना भी हो सकता है।'' इस मामले में एक महिला ने, जिसे उसके बेटे ने धोखे से उसका 14 मरले का मकान हड़प कर घर से निकाल दिया था, जून 2014 में अपने बेटे के पक्ष में किए गए मकान का हस्तांतरण रद्द करने के लिए धर्मकोट के एस.डी.ओ. व मैंटेनैंस ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष के समक्ष अपील की थी। इस पर उन्होंने 18 दिसम्बर 2015 को यह आवेदन स्वीकार करके याचिकाकत्र्ता के पक्ष में किया गया हस्तांतरण रद्द करने का आदेश दिया था। 'माता-पिता और वरिष्ठï नागरिक कल्याण एवं भरण-पोषण कानून -2007' की धारा 23 का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति राजन गुप्ता ने कहा, ''यदि अपने नाम सम्पत्ति हस्तांतरित करवाने वाला सम्पत्ति देने वाले को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करता तो इसे धोखे से प्राप्त सम्पत्ति माना जाएगा।'' ''इस स्थिति में कानून ने वरिष्ठ नागरिक को यह विकल्प दिया है कि वह इस हस्तांतरण को रद्द करवा सके। इस मामले में साबित हो गया है कि याचिकाकत्र्ता बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां को गुमराह करके उसे धोखा देने के और मकान से बाहर निकालने के इरादे से ही मकान अपने नाम लिखवाया।'' न्यायमूर्ति राजन गुप्ता ने पीड़िता के बेटे की याचिका रद्द करते हुए कहा : ''आज वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवन की संध्या में बुनियादी सुविधाओं और उनकी शारीरिक जरूरतों से वंचित करने के लगातार बढ़ रहे मामले रोकने के लिए यह कानून बनाया गया है और ट्रिब्यूनल ने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उक्त आदेश दिया जिसे बहाल रखा जाता है।'' पहले बम्बई हाईकोर्ट और अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा संतानों द्वारा पीड़ित बुजुर्गों

को उनकी सम्पत्ति लौटाने के आदेश एक मार्गदर्शक हैं जिनका पालन यदि सभी संबंधित अधिकारी कठोरतापूर्वक करवाएं तो संतानों द्वारा उपेक्षित बुजुर्गों की दशा में काफी सुधार हो सकता है। भारत में जहां बुजुर्गों को अतीत में सम्मानजनक स्थान प्राप्त था, आज बुजुर्गों की यह दयनीय स्थिति परेशान करने वाली एवं भारतीय संस्कृति और संस्कारों के विपरीत है। मां की गोद में आंख खुली, जग देखा बाप के कंधे चढ़ कर, सेवा बड़ी न होगी कोई, इन दोनों की सेवा से बढ़ कर। -विजय कुमार