शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

नक्सलवाद का नासूर

नक्सल वाद का नासूर
नक्सलवाद जब चालू हुआ तब ही मालूम था ,
की यह देश की आन्तरिक सुरक्षा के लिए खतरा हें ।
मगर टालने की निति का यह दुस परिणाम हे ,
जब आग लग जाए तब कुआ खोदो की निति नुकसान पहुचाती हे ,
नक्सल वाद देश पर हमला हे , यह सासस्त्र हमला हे ।
धर्मंतार्ण , आतंकवाद , घुसपेठ , नकली मुद्रा भी विदेशी हमले हे ॥
देशा को एक दमदार नेता चाहिया , जो सरदार वल्लभ भाई पटेल की तरह हो ,
जिसमें बिखराव को एक करने की छमता हो ,
साम , दाम , दंड , भेद की दकछ्ता हो । अन्दर बहार दोनों और संघर्स हे ,
विसवास से आगे बदना होगा । विकल्प ।
पड़ोसियों से घिघियाना छोड़े , मर्द की तरह बात करें ,
इजराइल की तरह आगे बड़े ।
अरविन्द सीसोदिया
राधा krishan रोड ,
ददवारा वार्ड ५९ कोटा ( raj)
०९४१४१ ८०१५१