मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

माओवादियों की विदेशी सहायता को रोकना होगा

माओ वाद की हिंसा से निवटने में नाकाम रहे केंद्रिया मंत्री चिदम्बरम ने पहले तो इस्तीफा फेंका ,फिर जाँच कमेटी बिठाई , मगर वे भूल गए की बी एस ऍफ़ के पूर्व आध्यक्छ इ एन राम मोहन बी एस ऍफ़ के नजरिये से बहार नही जा पायेगे । वहि सम्भवता सामने आयेगे । कहा जएगा राज्य की पुलिस साथ नही दे रही थी , अर्थार्थ राज्य को लपेटा जाये , केंद्र को बिचारा साबित किया जाया । रिपोर्ट भी यही कहने बलि हे ।

जब की जाँच की जरूरत यह हे की माओ वादियें के पास इतनी बड़ी मात्र में असलाह , शस्त्र , सम्पर्क ,सुचना तन्त्र की सुविधा कहाँ से आई । एक सच सब जानते हें , की चीन की कब्जा करो योजना का हिस्सा हे माओवाद । जब तक उस पर प्रहार नही होगा , तब तक समस्या के मूल पर प्रहार नही होगा . इसलिय आप को वास्तव में कुछ करना हे तो माओ वादियो, नक्सल वादियो के सच्चे सच को स्वीकारना होगा । उस देस से कहने का साहस करना होगा , दूर हटो ये दुनिया वालों यह हिदोस्ता हमारा हे , कहने का साहस करो ।

बहर पिट कर आओ और अंदर घरवालों को पिटा ..... , जो दुनिया को दिख रहा हे , वह भारत सरकार को क्यों नही दिख रहा हे । सबसे पहले चीन का दखल रोको । नेपाल को पढो समांछो । छुठे मुथे सपने में कुछ नही हे ।

सच चीन हे , उसका संसाधन हे ,उसका दिमाग हे । ये आदिवासी नही उसकी सेना हे । छदम सेना ।

राज्य सरकार को साथ लें , स्थानीय लोगों को साथ लें , उन्हें पुलिस बनाएं , वे ही इन्हे मुह तोड़ जबाब देंगे ।

अरविन्द सीसोदिया

राधा क्रिशन मंदिर रोड ; ददवारा ;

वार्ड ५९ ; कोटा २ ; राजस्थान ।

आई पी एल की, सही जाँच जरूरी हे

सही जाँच जरूरी हे आई पी एल की ....,

अभी जो भी आई पी एल में हुआ , वह बहुत कम सच हे , सारा सच अभी छुपा हुआ हे । देश का अभी में सबसे बड़ा घोटाले बाज , शरद पंवार केसे पाक साफ हो सकता हे , बिना जाँच उसे केसे बरी कर दिया जी , मेरी चित्त मेरी पट्ट , वाह..., क्या बात ,

असली सच तो सारा ही छुपा रखा हे , सिर्फ ललित मोदी को शिकार कर चुप करने से मामला ख़त्म नही होता हे ।जहाँ अलीबाबा चलिस चोरों के साथ हो ,उसे एक चोर से केसे ख़त्म कर दोगे ॥ सब कुछ सरे आम सालों पहले हुआ , केंद्रिया मंत्री की मोजुदगी में हुआ , मिडिया के सामने हुआ , सभी विभागों ने इन ख़बरों को पड़ा , सुना , टी बी पर देखा , तब मोंन क्यों ..., गलती की सजा उन्हें क्यों नही । उन्हों ने भी मोटी मोटी तनखाह उठाई ही हे । सारी जाँच गेर सरकारी तन्त्र से होनी जरूरी हे ।

क्यों की थरूर के पकड़ में आनें से सारा मामला उजागर हुआ , अबतो बदले की कार्यवाही जारी हे ,सत्ता के वरद हस्त से सांप छोड़े जा रहे हें । बोलना बंद कर ,नहीं तो काटेंगे ॥ कानून को पलंग के पाए से बांध कर बदमासी दे रहे हें । न्यायलय को हस्त छेप करना चाहिए , जब गुजरात के लिए विशेस जाँच दल हो सकता हे तो आई पी एल घोटाले पर क्यों नही बन सकती ।

न्यायालय ने अनेक वार अनेतिकता को रोका हे । आज फिर स्थिति वेसी हे ।

अरविन्द सीसोदिया.

राधा क्रिशन मंदिर रोड , ददवारा ,वार्ड ५९ , कोटा २राजस्थान ।