रविवार, 20 जून 2010

बिहार में बड़ी आग हे , नीतीशजी झुलस मत जाना !

बिहार में बड़ी आग हे , नीतीशजी झुलस मत जाना !
--अरविन्द सीसोदिया 
 राजनीती में न तो दया क़ी जरूरत हे नही अपनेपन  क़ी , गद्दी के लिए बाप को जेल में ड़ाल दिया जाता हे और भाई  को मार दिया जाता हे , भा जा पा ने भले ही ज्यादा विधायक  होते हुए भी नितीश को अपना नेता बना दिया था मगर  नितीश ने गद्दी पर बैठते ही भा जा पा को ख़तम करने क़ी जैसे कसम खाई हो , इस तरह के काम किये जिससे भा जा पा को नुकसान हो , उनकी छबी को ठेस पहुचे .
भा जा पा को , अपनी अलग पहचान बना कर आगे चलना   चाहिए था जो उसने नही किया . न जाने क्यों अलग पहचान बनाने  से डरते हें जबकि अलग पहचान, ही दल को सुरक्षित रखती हे .
  निताश कुमार के मन में लगातार खोट था , मगर बी जे पी को टालने क़ी अदातसी पड गई हे , लोकसभा चुनाव के बाद यह खुलाशा  सामने आ चुका  था क़ी  नितीश कांग्रेस के करीब जा रहे हें , मगर बीजेपी सहयोगी दलों के साथ नतमस्तक हो जाती हे मानों उनकी अटकी हो ,  इस का फायदा सहयोगी दल उठाते हें , दल को कठोर  और स्पष्ट रवैया सहयोगी दलों  के सामने रखना  चाहिए ,  एक नही आनेक  वार यह हो चूका हे क़ी जो, बी जे पी से मदद लेता हे वही ऑंखे दिखाने लगता हे . मायावती से लेकर नितीश तक एक ही कहानी हे . कर्नाटका  में भी यही बी जे पी के साथ पहले हो चूका  हे . मायावती ने य़ू  पी में न केवल कमजोर किया बल्कि बहुत नुकशान पहुचाया , यही उड़ीसा में हुआ . , यही बिहार में होने वाला हे . नितीश सोची समझी राजनीती कर रहे हें . वे लगातार मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिन्दुओं के साथ अन्याय कर रहे हें . आज क़ी तारीख में जो निति कांग्रेस क़ी हे वही निति नितीश क़ी हे . , बी जे पी को यह अच्छी   तरह समझ लेना चाहिए  क़ी हिदुत्व ही उसकी साख हे , अपनी साख  से समझोता करके आप अपने आप से धोका करेंगे और कमजोर होंगे .
  बिहार में वह नही हो सकता जो उड़ीसा में हो गया , उड़ीसा में गरीवी ने आम आदमी को जीने क़ी अभिलाषा से ही अलग कर दिया हे . वहाँ राजनीती मर गई हे , मूर्छित हे , मगर बिहार ईस तरह का नही हे , बिहार में आग हे , नितीशजी बी जे पी को क्या जलाएंगे कही खुद झुलश  न जाएँ . 
   बिहार में 15 साल पुरानी बीजेपी-जेडी (यू)की दोस्ती टूटने के कगार पर पहुंच चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कदमों से आहत बीजेपी ने भी अब आर या पार का फैसला करने का मन बना लिया है। सोमवार को दिल्ली में सीनियर नेताओं की बैठक बुलाई है। बीजेपी दब कर राजनीति नहीं करेगी और जरूरत पड़ी तो हम अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए नीतीश कुमार के साथ पालीगंज विश्वास यात्रा में जाने से इंकार कर दिया। 
- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा ने कोसी बाढ़ पीडि़तों की मदद लौटाए जाने को कांग्रेस के केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सुबोध कांत सहाय ने  चुनावी नौटंकी करार दिया है।
- पूर्व सांसद एवं कांग्रेस नेता लवली आनंद ने कहा है कि कोसी बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए गुजरात सरकार द्वारा भेजी गयी राशि न तो नरेन्द्र मोदी की है न नीतीश कुमार की। यह पैसा गुजरात की आम जनता का है। इसे वापस कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार और गुजरात के करोड़ों लोगों को शर्मिन्दा किया है।
- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रभारी अनिल किशोर झा ने कहा है कि राशि लौटा कर मुख्यमंत्री ने बचकाना और बिहार की जनता को अपमानित करने का काम किया है। ऐसी हरकतों से राष्ट्रीय एकता की भावना पर चोट पहुंचती है।

- राष्ट्रीय जनता दल के प्रधान महासचिव रामकृपाल यादव व मुख्य प्रवक्ता शकील अहमद खां ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कोसी पीड़ितों की सहायता के लिए गुजरात सरकार से प्राप्त राशि को लौटाना ओछापन है।
- लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस व महासचिव केशव सिंह ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि जदयू स्वार्थ की राजनीति कर रही है। मुख्यमंत्री द्वेष की भावना से पीड़ित हैं। देश के किसी भी हिस्से में जब आपदा आती है पूरा देश एकजुट होकर एक-दूसरे की मदद करता है। कोसी आपदा के समय भी ऐसा ही हुआ। कई राज्य सरकारें, सामाजिक व धार्मिक संगठन पीडि़तों की मदद में आगे आये थे। यदि उस वक्त बाहरी मदद नहीं मिलती तो आपदा से निपटना राज्य सरकार के बूते के बाहर की बात थी।
 बिहार में लालू प्रशाद हें , शरद यादव हें , रामविलास पासवान हे , शत्रुघन सिन्हा हें , बिहार कोई मर्त्प्रय राज्य थोड़े ही हे क़ी जो नितीश जी निगल जायेंगे .
   ज्ञात हो कि पिछले दिनों पटना में भाजपा कार्यसमिति की बैठक के दौरान स्थानीय अखबारों में एक विज्ञापन छपा था, जिसमें नीतीश कुमार और मोदी की तस्वीर एक साथ छपी थी। एक अन्य विज्ञापन में इस बात का जिक्र था कि वर्ष 2008 में कोसी बाढ़ आपदा के समय गुजरात ने बिहार को पांच करो़ड रूपये की मदद की थी। उसी दिन इन विज्ञापनों पर नीतीश ने सार्वजनिक तौर पर अपना गुस्सा प्रकट किया और विज्ञापन को बिहार की अस्मिता से जो़डते हुए गुजरात को पैसा लौटाने की धमकी दी थी। विज्ञापन से नाराज नीतीश ने भाजपा नेताओं को दिया जाने वाला रात्रिभोज तक रद्द कर दिया था। इसके बाद गत शनिवार को नीतीश ने गुजरात सरकार को पांच करो़ड की सहायता राशि लौटा दी।
--राधा क्रष्ण मन्दिर रोड ,
डडवाडा , कोटा २ . राजस्थान .

हरभजन नही हनुमान कहो, भारत की शान कहो !

हरभजन नही हनुमान कहो, भारत की शान कहो !
- अरविन्द सिसोदिया   
अंतिम ओवर में भारत को जीत के लिए सात रनों की जरूरत थी और उस वक्त रैना और हरभजन मैदान पर थे और पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी ने तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर को मोर्चे पर लगाया। पहली गेंद पर रैना ने एक रन लिया। दूसरी गेंद हरभजन चूक गए पर रन लेने के चक्कर में रैना रन आउट हो गए। रैना के आउट होने के बाद भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।
चार गेंदों पर छह रन चाहिए थे. पुछल्ले बल्लेबाज प्रवीण कुमार ने दो और फिर एक रन लिया. आखिर की दो गेंदों में टीम इंडिया को तीन रन बनाने थे.बेहद रोमाचंक और दवाब वाली इस स्थिति में मोहम्मद आमेर के सामने स्ट्राइक पर हरभजन सिंह थे. युवा गेंदबाज आमेर ने जैसे ही गेंद फेंकी, हरभजन सिंह ने उसे सीधे मिड विकेट के ऊपर हवा में उठाते हुए सीमा रेखा के पार पहुंचा दिया.इस जीत के साथ ही भारत ने बीते साल चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान मिली हार का हिसाब चुकता हुआ   और पाकिस्तानी टीम को एशिया कप से बाहर का रास्ता दिखाया.
    हलांकि  गोतम   गंभीर मेन  ऑफ़ द मैच रहे , लेकिन जीत के लिए हरभजन सिंह को ही याद किया जाएगा. भज्जी ने 11 गेंदों पर दो छक्के जड़कर 15 रन बनाए और टीम को जीत के दर्शन कराए. इस जीत के साथ ही अब भारत एशिया कप के फाइनल में पहुंच गया है. यह तो भगवन ही जानता होगा की पाकिस्तान में कितने टी वी सेट फूटे  होंगे !  पुरानी बात हे जब जाबेद मियादाद ने आखरी गेंद पर छक्का मार कर भारत को हराया था .शरजाह कप में चेतन शर्मा की उस आखिरी गेंद का आज तक नहीं भूला पाया हूं, जिस पर कि जावेद मियांदाद ने छक्का मारा था। उस आखिरी गेंद को टीवी पर करते देखना मेरे भाग्य में नहीं था। हुआ था यूं कि एक बॉल पर शायद छह रन बनाने में थे, मैं भारत की जीत को सुनिश्चित मान पानी पीने चला गया और सोचा सेलिब्रेट करेंगे, इतने में फिर लौटकर आने के बाद पूरी सीन ही बदली मिली थी। पाकिस्तानी खिलाड़ी ऊपरवाले को शुक्रिया अदा कर रहे थे।  सोचा क्या बात हो गयी और जब रिप्ले देखा, तो धत, तेरे की। 
दाम्बुला (श्री लंका ) एशिया कप 2010 में शनिवार को खेले गए एक रोमांचक मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को तीन विकेट से करारी शिकस्त दी। पाकिस्तान की ओर से जीत के लिए रखे गए 268 रनों के लक्ष्य का पीछ करते हुए भारतीय टीम ने 50वें ओवर में सिर्फ एक गेंद शेष रहते जीत दर्ज की। अंतिम ओवर में भारत को जीत के लिए सात रनों की जरूरत थी और उस वक्त रैना और हरभजन मैदान पर थे और पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी ने तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर को मोर्चे पर लगाया। पहली गेंद पर रैना ने एक रन लिया। दूसरी गेंद हरभजन चूक गए पर रन लेने के चक्कर में रैना रन आउट हो गए। रैना के आउट होने के बाद भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। लेकिन सरदार हरभजन सिंह ने जो कुछ किया वह हनुमानजी के द्वारा लंका दहन  से कम  नही था , लग यह रहा था की अब  नही जीत सकते , मगर हरभजन ने छक्का मार कर पूरे देश का दिल जीत लिया . १९ जून २०१० के तो हीरो वे ही हें  .
- राधा कृष्ण मन्दिर रोड ,
डडवाडा , कोटा २ . राजस्थान .