बुधवार, 1 सितंबर 2010

कांग्रेस सरकार के देश लूटो अभियान को रोका जाना चाहिए
















लुटेरी सरकार, करे महंगाई से प्यार..,
 मर रही जनता, आम हो गया  अधमरा, 
जमाखोरों  की बल्ले बल्ले...!
हें मंत्रीजी के ख़ास..!!
- अरविन्द सीसोदिया
सवाल यह है कि एक मंत्री जो कांग्रेस की केंद्र सरकार के घटक दल का सर्वेसर्वा है, वह पहले चीनी कि अपार कीमतें  बढावा  देता है ..., सारा देश, सारा मीडिया, जनता के सारे शुभ चिन्तक कुछ नहीं कर पाए और उसने सरे  आम; पूरे देश को; चीनी मीलों के लाभ के लिए; जम कर जनता को लुटवा दिया ...! फिर जब देखा की इस देश में सब मर गए कोई कुछ नहीं कर पा रहा है जो करना है वह किया ही जा सकता है ...!! तो क्रिकेट के नाम पर खुली लूट  हुई .., इस खेल में भी इतना  धन वर्षा कि कूत - अकूत सब शब्द फीके पड गए, जब कोई रोक नही पाया और जो चाहा वही कर लिया तो हौंसले इतने  बड़ गये कि गरीव और आम , क्या खास और खास का भी आका क्या, सब को महंगाई  कि जद में ले लिया,  अन्य मंत्रियों ने भी महंगाई बड़ने की संभावना बता कर माल जमा करने वालों को प्रोत्साहित किया ..., कुल मिला कर अख़बार रोज सोनिया भी पढती  हैं , राहुल भी पढ़ते हैं ..., मनमोहन भी..., इस खेल में सब शामिल हैं .., इस लुटेरी सरकार को एक दिन भी सत्ता में रहने का हक नही है ..., महंगाई सहित तमाम मुद्दे देश की लूट से संबध हैं , इसके विरुद्ध गंभीर  अभियान चला कर इस लूट अभियान को बंद  करवाया जाये ..!     
  मुझे जहाँ तक मालूम है अनाज की अनाप - सनाप स्टाक और उसकी व्यवस्था नही कर पाने पर ध्यान भा ज पा का गया , उनके नेता कई जगह गए और जमा माल की दुर्द्सा से मीडिया को भी अवगत करवाया .., मीडिया ने उतना वजन इस मुद्दे  को इसलिए नही दिया कि केंद्र सरकार से अनाप सनाप विज्ञापन मिल रहे हैं ..., लिहाज रखना पड़ता है..! धीरे धीरे मीडिया को भी जब यह लगा कि इस बात में दम है तब वे उसमें घुसे...!! मगर तब तक देर बहुत हो चुकी थी लिहाजा अनाज खराब भी हुआ , सड़ा भी , आगे की फसल समर्थन मूल्य पर खरीद कर कहाँ रखेंगे यह बात भी सामने है ..!! दो महीने बाद धान तो मंडी में आने लगेगा..!!
लोकसभा में यह मुद्दा...
   गरीबों में मुफ्त अनाज बांटने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और कृषि मंत्री की देश के गरीबों के प्रति दिखाई गयी शत्रुता की वजह से उपजे गंभीर राजनीतिक हंगामे के कारण मंगलवार को लोकसभा दो बार स्थगित हुई।
  विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर किस आधार पर कृषि मंत्री ने न्यायालय के आदेश को सुझाव बताया? उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार इस बात का आश्वासन दे कि खाद्यान्नों को गरीबों में बांटा जाएगा। सरकार को इस काम को पूरा करने के लिए एक सप्ताह में योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।" स्वराज ने लोकसभा में कृषि मंत्री को बुलाए जाने की मांग की।

     बाद में लोकसभा पहुंचे शरद पवार के पहले वाले सुर बदल चुके थे , पहले उनने कहा था मुफ्त अनाज नहीं देंगे  भले ही वह सड जाये , शरद पवार ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है। हालांकि उन्होने यह भी दलील दी कि न्यायालय के निर्णय की प्रति उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। यहाँ सवाल यह है कि जब आपने आदेश पढ़ा  नहीं था तो उसे सुझाव कैसे कह दिया...? या तो पहले झूठ  बोले थे या अब झूठ बोल रहे हैं , यह एक केंद्रीय मंत्री को ना तो शौभा  देता ना इस तरह की गलत बयानीं  को राजनैतिक मान्यता है ..!!
इसके बाद लोकसभा में अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने 'खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण द्वारा पीयूए-201 वेरायटी के 40 लाख टन चावल को अस्वीकार किए जाने के मुद्दे पर' ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। कौर ने कहा कि खाद्यान्न सड़ रहे हैं जबकि देश में लाखों लोग भूखे हैं। उन्होंने सदन के सदस्यों को याद दिलाया कि नई फसल आने से पहले जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत है क्योंकि और चावल रखने के लिए गोदामों में जगह नहीं है। इस मुद्दे पर केद्रींय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के जवाब से असंतुष्ट अकाली दल के सदस्यों के हंगामे के कारण दो बार सदन को स्थगित किया गया।
  ज्ञातव्य रहे कि , जब भा ज पा के द्वारा यह मामला सामने लेन पर भी मीडिया का ठीक रेसपोंस नही था तब एक जन हित याचिका दायर हुई थी  ,  याचिका में कहा गया था कि देश भर में हजारों लोगों के भूखे रहने के बावजूद गोदामों में अनाज सड़ रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।    इसी सन्दर्भ में , सुप्रीम कोर्ट ने  केंद्र सरकार को ये निर्देश दिया था कि वो गरीबी की रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले परिवारों को मुफ्त अनाज बांटें।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार को आदेश दिया कि यदि अनाज रखने की जगह नहीं है तो इसे मुफ्त में ही गरीबों में बांट दिया जाए। कोर्ट ने कहा था कि अनाज के सड़ने से बेहतर है कि इसे गरीबों को दे दिया जाए।

कुल मिला कर देश लूटो अभियान को रोका जाना चाहिए और उन चेहरों को बेनकाव किया जाना चाहिए जो देश को लूट रहे हैं और लुटावा रहें हैं ...!!