सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

देख न लेना नीचे झुक कर; गांधी हिन्दुस्तान को
















- अरविन्द सीसोदिया 

देख न लेना नीचे झुक कर; गांधी  हिन्दुस्तान को ,
फफक - फफक कर रो उठेगो ; अपने स्वाभिमान को ! 
--१--
गांधी तेरी विरासत पर ; नेहरूवंश का कब्जा है, 
गांधी तेरी फ़ोटू नीचे ही  ; बट्टा ही बट्टा है ,
गेहू चावल  दाल ओ घानी ; सब पर सट्टा ही सट्टा है ,
तू नहीं झुका अंग्रेजों से; पर अब अंग्रेजी का पट्टा है !
--२--
राजनीति के ऊचे हिमालय से ; भ्रष्टाचार क़ी गंगा बहती हैं , 
इसी त्रिवेणी  के संगम में ; सरस्वती भी बैठी है ,
कहाँ तुम भारत माता को खोजोगे; डिस्को के  वियावान में ,
वह तो बंद पड़ी है ; संसद के सन्दूकदान में !
--३--
रघुपति राघव राजा राम ; आपका था प्रिय धाम ,
उन्हें भी बंदी बनाया ; बरसों चला यह अपमान, 
प्रातिबंध और आपातकाल ; बने लोकतंत्र का मान,
सत्य अहिंसा और धर्म को ; भूल गई तेरी संतान, 
--४--
गाँव गरीवी की गर्त में ; गायें क़त्ल खानों में ,
इलाज हुआ हैवान  यहाँ ; शिक्षा पूंजीवाद के नाम , 
क्या हुआ तेरी वसीयत का..; कहाँ तेरे सपनों की शान..!
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