शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2010

राहुल की उमर के बारे में समझ गलत थी...!!

राहुल की बाल बुद्धी ...;
संघ देश भक्तों का संगठन.., 
- अरविन्द सीसोदिया  
   राहुल गांधी ने कुछ ही दिनों पहले जो  उमर अब्दुल्ला का समर्थन  करके गलती  की थी यह अब सामने आ गयी  है.., उमर  के हलके स्तर के बयान फिर से सामने आने लगे; पहले इन्होने युवाओं को गलत आक्रोस में धकेला , फिर पुलिस और सेना पर पत्थर फिकवाए , गोलियों और आग की होली खेली , जानता को मरवाया , फिर उनकी लाशों पर राजनीति की..! अब कहते हैं कश्मीर भारत का अंग नहीं है..! सिहासन और राष्ट्र विरोधी शेखी .. इन शेख वंशजों की विशेषता है..! मकशद सिर्फ सट्टा पर आरूढ़ रहना है ..!! देश हित की बात भाजपा  विधायकों ने की तो उन्हें मार्शलों के  द्वारा बाहर किये जाने की घटना के बाद , उमर  के मशूबे साफ हो जाते हैं.., इस वंश ने हमेशा भारत विरोधी बातें कर के राज किया और यह लोग वे थे जिन्होंने भारत के संबिधान पर हस्ताक्षर  किये हैं..! विलय की संधी पर महाराजा हरि सिंह  के साथ इनके हस्ताक्षर किये हैं ...!! खैर  सवाल यह है कि राहुल की उमर के बारे में समझ गलत थी...!!  
   राहुल गाँधी ने जो संघ के बारे में कहा है वही राहुल की अपरिपक्वता की सच्चाई है .., नौ सीखिय लोग यही कहते हैं .., यही करते हैं.., फिर नेहरु वंश की तो यह परंपरा है.., इग्लेंड  में पढ़ते हैं भारत में राज  करते हैं ...! समझ दूसरे देश की और इस्तेमाल दूसरे देश में...! 
    जवाहरलाल नेहरु ने खूब कांटे बोये..., देश को विभाजित करवाने में उनकी सबसे ज्यादा भूमिका थी, १ करोड़ लोगों के घर बदल गए देश छूट गए..! १० से २० लाख लोग बिना बजह मारे गए...! चीन को समस्या बनाया हो या पाकिस्तान को सूरमा .., या कश्मीर विलय को केंसर ..., सामान नागरिक संहिता न लागू करना हो या  राष्ट्र भाषा  का अपमान हो.., गो वध जारी हो या विक्रमी संवत को दरकिनार किया जाना हो.., देश पर अंग्रेजियत लादे रखने की समस्या का नाम ही नेहरु है..! साम्प्रदायिकता को देश में बनाये रखने का कोई गुनहगार हर तो वह भी नेहरु जी हैं ..! हिन्दू मंदिरों पर मुस्लिम कब्जे हों .., सबके लिए नेहरु जिम्मेवार रहे..,
    इंदिरा गांधी ने १९७१ में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे , उनकी ९५ हजार सेना ने हमारे सैनिकों के कामाक्ष आत्म सपर्पण किया हुआ था.., हमनें  पाकिस्तान से उसके द्वारा दवाये हुए कश्मीर को  लिए बिना क्यों छोड़ा उसे.., जब तक पाकिस्तान हमारे कश्मीर से हट नही जाता तब तक हम भी क्यों हटें..? यह प्रश्न पैदा कर हमें भी जीते हुए पाकिस्तानी क्षेत्रों पर दते रहना चाहिए था.!! अपना दवाया भू भाग लेने का अवसर गंवाने वाले  नाम में इंदिरा जी का नाम सबसे ऊपर है...!!
   राजीव गांधी ने भी श्री लंका में तमिलों को मारने के लिए भारतीय सैनिकों को भेज दिया , मारने वाले और मारने वाले दोनों भारतीय ही थे.., सिख  विरोधी दगों को समय रहते रोका जा सकता था.., मगर तब यह कह कर कि कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो .... आग में घी का काम किया.., 
  राहुल क्या समझें कि संघ क्या है..., वे क्या जानें की हिंदुत्व क्या है.., राष्ट्र की कल्पना भी उन्हें क्या होसकती है .., जो सिमी ओए संघ को एक तराजू पर तौले उसके  बारे में टिप्पणी करना बेकार है...! नेहरु जी ने संघ को १९६३ में राष्ट्रिय परेड  में सम्मिलित किया था और ३००० संघ  स्वंयसेवक उस में सम्मिलित हुए थे..! सबसे जोरदार बात यह है कि संघ ने १९६५ के युद्ध में देश की आंतरिक व्यवस्था को संभाला था..! पूर्व में भी तीन बार संघ पर कांग्रेस ने दुर्भावनावश प्रतिबंध लगाया मगर वे बिना किसी तथ्य के वापस लिए गए ..!