शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

भारत जगे, श्रीराम बनें, रामराज्य फिर आये..!


घर- घर उजियारा हो , 
जीवन में सबके दूर अंधियारा हो...
- अरविन्द सीसोदिया
   आप एवं आपके परिवार को दीपावली की 
हार्दिक बधाई और बहुत बहुत शुभकामनाएं ...!!
दीपावली का पवन पर्व बहुत पुराने समय से मनाया जा रहा हर .., यह पौराणिक पर्व है .., इससे अनेक कथाएं और घटनाएँ जुड़ी हुई हैं.., प्रमुख रूप से इस दिन राम के अयोध्या लोटने से जुड़ा हुआ माना जाता है.., उनके स्वागत में नगर वासियों ने जो दीपक जलाये थे .., वही परंपरा पूरे देश में फेल गई...!!
अनादिकाल से जो दीपावली का पांच दिवसीय पर्व है उससे हमें सन्देश मिलता है कि .., यह धन की पूजा का पर्व है.., जो हमें धन के महत्व को , उसके संशाधनों को और उसकी व्यवस्था को , प्रतिवर्ष स्मरण करवाता है ! 
१- पहला दिन - धन तेरश - पूजा आयुर्वेद के संस्थापक धन्वन्तरी भगवान की..! 
   अर्थात स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है...!
२- दूसरा दिन - रूप चौदस - अर्थात सोंदर्य या सुन्दर स्वरूप  भी एक धन है ..!!
   इसी दिन हनुमान जी की भी पूजा होती है.., यह मित्र धन से संबध है..!! 
३- तीसरा दिन - अमावश्या - मूल दीपावली - इस दिन धन की पूजा लक्ष्मी जी के सानिध्य में होती है.., पशुधन से लेकर मशीनरी तक , फैक्ट्री इत्यादी की .., 
इस दिन महालक्ष्मी की पूजा .., गणेश जी के साथ होती है..., गणेश जी विद्या के स्वामी हैं .., बुधी  के अधिष्ठाता हैं .., रिद्धि  सिद्धि उनकी पत्नियाँ हैं.., शुभ और लाभ उनके पुत्र हैं .., संतोषी उनकी पुत्री है..,  
अर्थात उद्यम , पुरुषार्थ , श्रम पूर्ण योग्यता से कमाया हुआ धन पूज्यनीय है और मानव जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता है.., हिन्दू धर्म के चार पुरुषार्थों में से एक अर्थ पुरुषार्थ है ! 
४- चौथा दिन - गोवर्धन पूजा - अर्थात पर्यावरण की पूजा , प्राक्रतिक संसाधनों की सुरक्षा , जिसे आज ग्लोवलवार्मिंग  कह कर चिंता  की जा रही है.., भगवान श्री कृष्ण प्रक्रती की रक्षा करतें हैं ..,  हम सभी को प्रक्रती रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहना हमारा हिन्दू धर्म सिखाता है..! 
५- पांचवा दिन - भाई दोज- बहन के घर भाई जाता है.., वह उसका तिलक करती है, भोजन करवाती है ..! यह है संवंधों का धन.., आपसी एकता धन ...!! 
 इस प्रकार से दीपावली , जीवन धन के सभी  प्रकार के धनों की पूजा है....,  


 दीपावली
दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपावली शब्द ‘दीप’ एवं ‘आवली’ की संधिसे बना है। आवली अर्थात पंक्ति, इस प्रकार दीपावली शब्दका अर्थ है, दीपोंकी पंक्ति । भारतवर्षमें मनाए जानेवाले सभी त्यौहारों में दीपावलीका सामाजिक , धार्मिक और आर्थिक तीनों  दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति ( प्रकाश ) की ओर जाइए’ यह उपनिषदोंकी आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए । कार्तिकमास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। उन्होंने अपना राज्य संभाल कर जानता कि जो सेवा की उसे आज तक एक आदर्श और कल्याणकारी राज के रूपमें याद किया जाता है..!

  महात्मा गांधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम में जिस मूलमन्त्र का सहारा लिया था .., वह भी राम के नाम में निहित है..., 
रघुपति राघव राजा राम
पतित पावन सीता राम
सीता राम सीता राम
भज प्यारे तू सीता राम
रघुपति ...
ईश्वर अल्लाह तेरे नाम
सबको सन्मति दे भगवान
रघुपति ...
रात को निंदिया दिन तो काम
कभी भजोगे प्रभु का नाम
करते रहिये अपने काम
लेते रहिये हरि का नाम
रघुपति ...
गांधी जी ने देश की स्वतंत्रता राम के नाम से ली और उनके द्वारा नियुक्त प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने राम जन्म भूमी को ही मुक्त होने से लटका दिया ! उसे इस तरह से उलझाया की आज तक उलझा हुआ है ...!! राम राज की क्या बात है ये तो राम के भी सगे नहीं हुए ...!!

  यह दीपावली आव्हान करती है कि ..., 
हर भारतवासी देश की दशा संभालने के लिए , 
उठ खड़ा हो श्रीराम का अनुशरण करे ..,
देश में लोकतान्त्रिक पद्यति है .., 
रामराज की तरह कल्याण कारी राज्य स्थापित करने के लिए ,
देश में जरुरी जनजागरण और 
अन्य लोकतान्त्रिक पद्यति से कार्यों को करने का संकल्प लेना ..!!    




आतिशबाजी का बड़ा विरोध करने वाले मिल जायेंगे..., 
मगर इसका भी महत्व है.., 
एकतो यह अपनी रक्षा प्रणाली का सूक्ष्म परिक्षण है.., 
इसी से तोप से लेकर प्रेक्षापास्त्र तक हैं..,
दूसरा इसके धुएं से वायरल ,डेंगू और अन्य वर्षा जानी विषाणुओं का नाश गंधक के धुएं के कारण हो जाता है ..!! इसलिए यह वैज्ञानिक आधार पर भी उपयोगिता रखता है !!