मंगलवार, 23 नवंबर 2010

घोटाले : बड़ी से बड़ी जांच हो ...! भ्रष्टाचार कांग्रेस का अघोषित घोषणा - पत्र




-- अरविन्द सीसोदिया 
        लोगों की याद दास्त कम होने से,वे लोग जो देश का बुरा कर चुके , लोगों का बुरा कर चुके और भ्रष्टाचार और घोटालों में अग्रणी रहे .., बार बार चुन कर सत्ता और सांसद में पहुचते रहे हैं ...!! कहीं न कहीं इसे जन दोष भी माना जाएगा ..!  इसे कानून की कमजोरी भी माना जाएगा !! देश के विभाजन के बाद कांग्रेस सत्ता  में आती है ...! इग्लैंड या अमरीका होता तो यह संभव नहीं हो पाता ..!! १९८४ के सिख नरसंहार के बाद भी कांग्रेस पंजाब और दिल्ली में सत्ता में पहुच जाती है ...!! आपातकाल के दौरान हजारों निर्दोषों को जेल में डालने और जबरिया नसबंदी करवाने सहीत तमाम अत्याचारों को ढाई - तीन साल में ही भूल जाती है ..! और इसी का फायदा कांग्रेस ने उठाया और बिना झिझक  के बड़े से बड़े घोटाले किये ...! यह उनकी संस्कृती बन गई.. और अन्य दलों में भी छूत की बीमारी कि तरह फैल गई..! कांग्रेस  के तमाम घोषणा पत्र दिखावटी रहे , असली  घोषणा पत्र तो अघोषित भ्रष्टाचार है ......, इसकी जननी भी यही डाल है ...! अब इसे सामान्य शिष्टाचार  की तरह अन्य दलों ने भी अपना लिया ..! इस लिए अब इसे समाप्त तो करना ही होगा..! किसीना किसीको तो जोरदार प्रतिरोध तो देश हित में करना ही होगा ! प्रतिपक्ष की यही जिम्मेवारी है !! सरकार के स्तर के भ्रष्टाचार की  जिम्मेवार तो सरकार का मुखिया  होता है , वह लगातार मामले को टाल रहा है तो वह भी शामिल है ...! चुप्पी को मौन स्वीकृति माना जाता है ! सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह और गठबंधन की मुखिया सोनिया गांधी को जिम्मेवारी  स्वीकारनी चाहिए ...!! पदों से इस्तीफा  देना चाहिए ...!!
  जे पी सी तो होनी ही चाहिए..., हर्षद मेहता प्रकरण में भी जे पी सी बैठी थी , इस लिए इस प्रकरण में तो जे पी सी बैठानी ही चाहिए ...!    बल्की गिरफ्तारियां और संसद से सस्पेंशन होना चाहिए ...! जब मामूली से आरोपों पर आपने संसद से सदस्यता समाप्त कीं हों ..., तो यह तो देश की शर्मिन्दगी से जुड़ा मामला है ...!!    

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Saturday, February २१ , २००९
नई दिल्ली. Sukhramसीबीआई कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के प्रमुख राजनीतिज्ञ पूर्व केंद्रीय संचारमंत्री सुखराम को 4.25 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में शुक्रवार को दोषी करार दिया। इसमें 2.45 करोड़ रुपए की रकम भी शामिल है
     सीबीआई ने आरोप लगाया कि सुखराम ने वर्ष 1991 से 1996 के बीच लोक सेवक रहते हुए 5.36 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति एकत्र की। सुखराम इस अवधि में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव मंत्रिमंडल में संचार मंत्री थे। तब सुखराम के पास उनके दिल्ली और हिमाचल प्रदेश स्थित निवासों से 3.61 करोड़ रुपए की नगदी, 10.29 लाख रुपए के आभूषण, 4.92 लाख रुपए बैंक बैलेंस के रूप में और अन्य सामान के अलावा 10.30 लाख रुपए के घरेलू उपकरण मिले थे। बाद में कोर्ट इस निष्कर्ष के पास पहुंचा कि सुखराम के पास 4.25 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्तियां हैं।
सुखराम की सफाई : सुखराम ने इन आरोपों के बारे में यह कहते हुए इनकार किया था कि उनके घर से मिली टाइमलाइन

*16 अगस्त 1996: सीबीआई के छापे। सुखराम के दिल्ली और हिमाचल प्रदेश स्थित निवासों से 3.61 करोड़ रुपए मिले।
*27 अगस्त: सीबीआई ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई।
*18 सितंबर: सुखराम की गिरफ्तारी।
*16 अक्टूबर: सुखराम को मिली जमानत।
*9 जून 1997: चार्जशीट दायर।
*6 नवंबर 2004: पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने दर्ज कराई अपनी गवाही।
*17 फरवरी 2009: विशेष सीबीआई जज ने फैसला बाद में सुनाने की घोषणा की।
*20 फरवरी: कोर्ट ने सुखराम को दोषी ठहराया और कहा कि 24 फरवरी को सुनाई जाएगी सजा।रकम कांग्रेस पार्टी की थी। यह रकम उनके निवास से जब्त की गई थी। विशेष सीबीआई जज वीके माहेश्वरी ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के विभिन्न सेक्शनों के तहत सुखराम (82) को दोषी करार दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री को सजा 24 फरवरी को सुनाई जाएगी। सुखराम को संबंधित अपराधों में अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें ........भास्कर . कॉम पर   
पूर्व मंत्री सुखराम दोषी , सजा २४ को 

http://www.bhaskar.com/2009/02/21/0902210118_

former_union_minister_sukhram.html

जांच एजेंसियां सरकार की ओर से जालसाजी का साधन बन गईं


पी.जे.थॉमस को तुरंत हटाया जाये ....
- अरविन्द सीसोदिया 
थामस कि नियुक्ती मूलरूप से जांचों को प्रभावित करने के लिए की गई है ...!  
    एक येसी परिस्थिति में जब देश की जांच एजेंसियां सरकार की ओर से जालसाजी का साधन बन गईं हों, विरोधी लोगों को फंसाना, फंसा कर लटकाना , उनसे सरकार के काम निंबटाना और फिर बचना या निवता देना जैसे कार्यों में अन्याय पूर्ण तरीके लगा दी गईं हों ..! सरकार के बहुमत को बनाये रखने का इंतजाम जब जांच एजेंसियां करने लगीं हों ..! देश की लगभग समूची राजनैतिक व्यवस्था भ्रष्टाचार की कोख में समाती जा रही हो ...? एक अनुमान से जिसे पूर्व सतर्कता आयुक्त प्रत्यूश सिन्हा ने कहा है कि हर तीसरा भारतीय भ्रष्ट  है या बहुत जल्द हो जाएगा ?? तब भारत के सर्वोच्च न्यायालय  ने नव नियुक्त  मुख्य सतर्कता आयुक्त की नियुक्ती पर एक दम सही सवाल उठाया है कि 'आपराधिक मामले का कोई अभियुक्त मुख्य सतर्कता आयुक्त के पद का कामकाज कैसे देख सकता है?' इस का सीधा सीधा अर्थ यह है की आप जांचें में भी घपला करना चाहते हैं ...!! इस बारे में जनहित याचिका की सुनवाई न्यायाधीश एसएच कपाडिया की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है.सुनवाई के दौरान जस्टिस कपाडिया ने पूछा, "इस फ़ाइल को पढ़े बिना ही हमारी चिंता ये है कि यदि कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त है तो वह सीवीसी का कामकाज कैसे देख सकता है? हम एक साथ बैठकर इस फ़ाइल का अध्ययन करेंगे."  कोर्ट ने कहा कि न्यायिक सिद्धांतों के मुताबिक अगर किसी के खिलाफ आपराधिक केस चल रहा हो और चार्जशीट पेंडिंग हो, तो उसका प्रमोशन तक पर भी विचार नहीं किया जा सकता है, ऐसे में उनका सीवीसी बनाए जाना कितना उचित है।
बेंच ने यह भी कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अगर हम आरोपों के तह तक नहीं जाते हैं, तब भी क्या ये कहना सही नहीं है कि इस तरह के आरोपों के बीच उनके लिए काम करना आसान नहीं होगा।मुख्य सतर्कता आयुक्त (CVC)?
ईसाई होने का फायदा मिला था .....!ज्ञात हो कि नए मुख्य सतर्कता आयुक्त के रूप में पी.जे.थॉमस की नियुक्ति को लेकर विवाद पैदा हो गया है, क्योंकि इस बात के आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने यह पद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चलते हासिल किया है।देश के मुख्य सतर्कता आयुक्त जैसे महत्त्वपूर्ण पद को अपने विवादास्पद व्यक्तित्व से कलंकित करने वाले देश के नव-नियुक्त मुख्य सतर्कता आयुक्त श्री पी. जे. थामस स्वयं ही ईमानदारी के नाम पर एक भद्दा प्रश्नचिन्ह हैं. आप जब दूरसंचार विभाग में मुख्य सचिव के पद पर विराजमान थे, तो उस विभाग में देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा 'दूरसंचार घोटाला' हुआ. आप उस घोटाले के समय बिलकुल भी 'सतर्क' नहीं रहे. 'सतर्कता'के प्रति आपकी ऐसी 'परिपक्व' निष्ठा को देखते हुए सरकार ने आपको अपने लिए सर्वाधिक अनुकूल पाया और उसने संविधान की नितांत उपेक्षा करते हुए बड़ी ही बेशर्मी से 'मुख्य सतर्कता आयुक्त' के पद पर आपको सुशोभित कर दिया. विपक्ष की नेता, जो आपको इस नए पद पर नियुक्त करने वाली टोली की एक महत्त्वपूर्ण घटक हैं, उन्होंने आपके ऊपर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं, परन्तु आप उन आरोपों का खंडन करने के लिए अभी तक कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं.
        अब आपके होते देश के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि किसी केन्द्रीय मंत्रालय में मुख्य सचिव स्तर का व्यक्ति अपने ऊपर लगे आरोपों की जाँच अपने ही अधीनस्थ कर्मचारियों से करवाएगा और उस जाँच के परिणामों का 'मुख्य सतर्कता आयुक्त' के रूप में स्वयं ही अंतिम निर्णायक भी बनेगा. आपने अपने पिछले कार्यकाल में 'सतर्कता' के नए आयाम स्थापित किये है, इसीलिए आज आप देश के 'मुख्य सतर्कता आयुक्त' हैं. देश के लोगों को अब समझ आ रहा है कि CWG घोटाले की पृष्ठभूमि में सरकार ने CVC के इस अति महत्त्वपूर्ण पद पर आप ही की नियुक्ति करने की इतनी जिद्द क्यों पकड़ रखी थी. इतने बड़े घोटाले में, जिसमे स्वयं प्रधानमंत्री कार्यालय पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हों, इन सरकारी कठपुतली लोगों कि रहनुमाई में जाँच के कैसे परिणाम निकलकर सामने आने वाले हैं, इस बात का सभी को अंदाज़ा है. ताज़ी खबर यह है कि CWG के कुछ अति महत्त्वपूर्ण डाटा चोरी हो गया है. सरकार ने इतनी सारी एजेंसियों को सबूत जुटाने के लिए नहीं, बल्कि सबूत मिटाने के लिए लगाया है.



थॉमस पर पॉम आइल आयात घोटाले के आरोप हैं, जिसमें उनके खिलाफ चार्जशीट भी फाइल हो चुकी है।


नियुक्ती से ही विवाद ....
भाजपा का विरोध रहा था ...!


मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इस समारोह का बहिष्कार किया. भाजपा नेता सुषमा स्वराज भी तीन सदस्यीय चयन समिति का हिस्सा थीं लेकिन उनके विरोध को दरकिनार करते हुये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पी जे थामस को नया मुख्य सतर्कता आयुक्त बनाने का निर्णय लिया था. भाजपा का आरोप है कि सतर्कता आयोग 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रहा है और ऐसे में पूर्व टेलीकॉम सचिव को नया मुख्य सतर्कता आयुक्त बनाने से इस घोटाले की जांच पर असर पड़ना तय है. हालांकि इस अवसर पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी, गृहमंत्री पी. चिदंबरम और विधि एवं न्याय मंत्री वीरप्पा मोइली उपस्थित थे. श्री थामस ने उसी दिन से ही अपना कार्यभार संभाल लिया है..


  आज जब देश के साथ लूट पाट और जबरिया साम्राज्य की कोशिशें हो रहीं हैं तब  न्याय और सत्य के साथ इस देश के न्यायालय को खड़ा ही होना चाहिए ..!