मंगलवार, 30 नवंबर 2010

जाती पूछोगे और धर्म झुपाओगे...?

- अरविन्द सीसोदिया 
जाती पूछो और धर्म छिपाओ ....
सवाल यह है की सारे देश में आप ..,जाती पूछोगे और धर्म झुपाओगे .... ये कैसे चलेगा ..! इस देश में आप हिन्दू विधि और मुस्लिम पर्सनल कानून चलाते हो...! आज यह जरुरी ही गया है कि लोग किसी धर्म के होते हैं और अपने लाभ और स्वार्थ के हिसाब से शोऊ कुछ और करते हैं , पहचान छुपाने में भी इसका उपयोग हो रहा है जैसे कि हेडली नाम से इसाई लगता है मगर गए यह व्यक्ती मुस्लिम आतंकवादी  , जी मौलिक सूचनाएं हैं वे उजागर होनी चाहिए ..! उनकी स्पष्ट इन्द्राजी होनी चाहिए ..! चाहे वह धर्म हो , जाती हो , जन्म स्थान हो , मातृ  भाषा हो , इन्हें छुपाने का अधिकार क्यों दिया जाये ..?  
*** सोनिया का धर्म जानने सम्बंधी याचिका खारिज
    चण्डीगढ़ स्थित  पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के धर्म से जु़डी जानकरी के सम्बंध में दायर एक याचिका सोमवार को खारिज कर दी।
     हरियाणा पुलिस के पूर्व प्रमुख पी.सी. वाधवा द्वारा दायर याचिका को उच्च न्यायालय की एक खण्डपीठ ने खारिज कर दिया। पूर्व पुलिस प्रमुख ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत रजिस्ट्रार जनरल एवं भारत के जनगणना आयुक्त से सोनिया गांधी और उनके बच्चों के धर्म व आस्था के बारे में जानकारी मांगी थी। मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुदगल और न्यायाधीश रंजन गोगोई ने वाधवा की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि धर्म के बारे में मांगी गई जानकारी "पूरी तरह से व्यक्तिगत" है। वाधवा ने सोनिया गांधी और उनकी बेटी प्रियंका व बेटे राहुल गांधी के धर्म के बारे में सूचना मांगी थी। उन्होंने अदालत में दलील दी थी कि कांग्रेस अध्यक्ष एक जननेता हैं लिहाजा यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि वह किस धर्म को मानती हैं।
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उनके धर्म के बारे में विकिपीडिया ने स्पष्ट लिखा है जो निम्न  प्रकार से है ... जो नीचे दिया गया है ! लिंक  पर जाने के लिए .....
http://hi.wikipedia.org/wiki 



जन्म९ दिसंबर १९४६
लूसियानावैनेतो,इटली
राजनैतिक पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
जीवन संगीराजीव गांधी (१९६९-१९९१)
संतानराहुल गांधीप्रियंका गांधी वड्रा
आवास१० जनपथनई दिल्लीभारत
धर्मईसाई (रोमन कैथोलिक)

भोपाल गैसत्रासदी वरसी : प्रथम दृष्टया दोषी भारत सरकार है

- अरविन्द सीसोदिया
यूनीयन कार्बाइड के जहरीले कारखानें को भोपाल में सातवाँ स्थान पर बनाए जानें की अनुमती नहीं दी जा रही थी...! मध्यप्रदेश की सरकार संभवतः भोपाल के लोगों के जीवन से खिलवाड़ नहीं करना चाहती होगी ..! मगर जा आपातकाल लगा और प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी जी सर्वे भन्तु सुखिना हुईं तो.., अमेरिकन यूनीयन कार्बाइड को साख यह मिला की उन्हें यूनीयन कार्बाइड कारखाना भोपाल में लगानें कि सुविधा मिल गई..! जो १९८४ में भोपाल में महान और अत्यंत दर्दनाक दुखान्तकी बनीं ..!
























  बात यह है की किसी भी बड़ी कंपनी को कहीं भी कोई भी इजाजत उसके श्रमिकों से जुड़े रिकार्ड को देखकर ही दी जानीं चाहिए...! इस कंपनी का यह रिकार्ड देख ही नहीं गया ..! उन्हें अनुमती नियमानुसार नहीं राजनैतिक प्रभाव में दी गई और उसे भुगता भोपाल नें ..!! यह एक बुरी कंपनी थी .., इस का रिकार्ड ठीक नहीं था..! हनन कभी भी यह ध्यान नहीं किया कि इसके ख़तरना उत्पादनों से जन सुरक्षा को कैसे सुरक्षित रखा जाए..! सच तो यह है की आज तक वह जहरीला कचरा वहीं है और हटानें तक की हिम्मत नहीं की गई ..!!












एक ब्लेक लिस्ट में डालने योग्य कंपनी को अनुमती देने की जिम्मेवारी से केंद्र सरकार मुकर नहीं सकती .., इसलिए जनता का हर्जा - खर्चा स्वंय वहन करना चाहिए और यूनीयन कार्बाइड से जो लेना देना है वह करती रहे ..!!









एक काली सूची लायक कंपनी.,




हॉक्स नेस्ट सुरंग आपदा हॉक्स नेस्ट सुरंग आपदा सन 1927 और 1932 के बीच पश्चिम वर्जीनिया सुरंग परियोजना में घटी थी, जिसे यूनियन कार्बाइड के नेतृत्व में बनाया जा रहा था। सुरंग के निर्माण के दौरान श्रमिकों को सिलिका खनिज मिला और उन्हें उसका खनन करने का आदेश मिला। इस सिलिका का प्रयोग इस्पात के वैद्युतप्रसंस्करण में होना था। खनिकों को खनन के दौरान सुरक्षा उपकरण जैसे कि नकाब (मास्क) या श्वसन यंत्र नहीं प्रदान किए गये। सिलिका की धूल के संपर्क में आने से कई खनिकों को एक कमजोर फेफड़ों की बीमारी सिलिकोसिस हो गयी। निर्माण स्थल के एक ऐतिहासिक स्मारकपट्ट के अनुसार, सिलिकोसिस 109 मौतों के लिए जिम्मेदार थी। एक कॉंग्रेशनल सुनवाई के अनुसार मरने वालों की संख्या 476 थी। सच भगवान ही जानता होगा ...!

मुश्किल है गिरफ्तारी : अरुंधति राय,सैयद अली शाह गिलानी की...

- अरविन्द सीसोदिया
      जिस सरकार ने अपने अपने मंत्रालय की सलाह के बावजूद इन दोनों गद्दारों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया , उन्ही की पुलिस को अदालत के निर्देश पर रिपोर्ट दर्ज करनी पढ़ रही है .., अब यह पुलिस क्या करेगी ..., मुझे नहीं लगता की जांच से जुड़े अधिकारीयों के रीड होगी और वे कानून के हिसाब से कम करेगे..इनमें रीड होती तो सभ के समापन के साथ ही गिरफ्तारी होनी चाहिए थी ..!! न्यायालय का आदेश विफल होता नजर आता है ...! जब सरकार ही गद्दारों के साथ हो तब बचता क्या है ....!  
----दिल्ली पुलिस ने लेखिका अरुंधति राय, हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी और अन्य लोगों पर पिछले महीने यहां एक सेमिनार में ‘भारत विरोधी’ भाषण देने के मामले में देशद्रोह का मामला दर्ज किया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सुशील पंडित नामक व्यक्ति की याचिका पर शनिवार को एक स्थानीय अदालत के दिशानिर्देश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गयी. पंडित ने आरोप लगाया था कि गिलानी और राय ने 21 अक्तूबर को ‘आजादी-द ओनली वे’ के बैनर तले हुई एक सेमिनार में भारत विरोधी भाषण दिया था.
राय और अन्य पर धारा 124ए (देशद्रोह), 153ए (वर्गों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 153बी (राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने के लिए लांछन), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 505 (विद्रोह के इरादे से झूठे बयान, अफवाहें फैलाना या जन शांति के खिलाफ अपराध) के तहत मामले दर्ज किये गये हैं. अधिकारी ने कहा, ‘‘इन प्रावधानों को 1967 के गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम के प्रावधान 13 के साथ पढ़ा जाना है.’’ राय और गिलानी ने माओवादी समर्थक वारवरा तथा अन्य लोगों के साथ मंच साझा किया था.
मामला दर्ज हो जाने के बाद अब राय और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है. उन पर लगाये गये प्रावधान गैर जमानती हैं और यदि गिरफ्तार कर लिया जाता है, तो उन्हें जमानत के लिए अदालत में जाना होगा. यदि उन्हें इन मामलों में दोषी साबित किया जाता है तो अधिकतम सजा उम्रकैद दी जा सकती है.आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सरकार ने इससे पहले गिलानी और राय के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं करने का फैसला किया था और सरकार का मानना था कि इस तरह के कदम से उन्हें अनावश्यक प्रचार मिलेगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में कानूनी सलाह मांगी थी, जिसने सुझाया था कि देशद्रोह का मामला दर्ज किया जा सकता है. हालांकि राजनीतिक विचार विमर्श के बाद मंत्रालय ने गिलानी और राय के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने का फैसला किया.
इससे पहले अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए राय ने कहा कि उन्हें शायद ‘जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ मरणोपरांत एक मामला दर्ज करना चाहिए.’ इसके लिए उन्होंने 14 घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि ‘किसी विवादित क्षेत्र या प्रदेश में शामिल करने के सवाल पर फैसला जनता की इच्छाओं के अनुरूप होना चाहिए.’

क्या जेपीसी के इटली पहुचने का डर है ...

- अरविन्द सीसोदिया
सोमवार से तीन दिवसीय यात्रा पर श्रीमति सोनिया गांधी रायवरेली की यात्रा पर हैं .., संसद में जे पी सी गठन का गतिरोध चल रहा है ..! वे उसे यथा स्थिति छोड़ कर यात्रा पर हैं जबकि वे उस गठबंधन की अध्यक्ष  हैं जो सरकार चला रहा है ..! जे पी सी से जांच होनें का इतिहास रहा है.., इस घोटाले से कम रकम कीई जांच जे पी सी ने की है ..!
  लगता है कि जे पी सी की जांच , जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा लगाये आरोपों पर भी होगी जिसमें उन्होंने कहा है कि " पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 60 हजार करोड़ रुपये घूस में बांटी गई, जिसमें चार लोग हिस्सेदार थे। इस घूस में सोनिया गांधी की दो बहनों का हिस्सा 30-30 प्रतिशत है। दस जनपथ को घोटाले का केंद्र बिंदु बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सब कुछ जानते हुए भी मूक दर्शक बने रहे।"
     यदी जे पी सी बनीं तो वह इन नामों से भी पूछताछ कर सकती है..! यानी इटली तक बात जा सकती है ..! प्रधान मंत्री को भी रहस्य उजागर करने को कह सकती है ..! कोई कमजोर नस  अवश्य है ..!
***** एक समाचार जो हमने देखा ...... 
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_6927406.html
       देहरादून [जागरण ब्यूरो]। जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी अब 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जद में कांग्रेस व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी ले आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 60 हजार करोड़ रुपये घूस में बांटी गई, जिसमें चार लोग हिस्सेदार थे। इस घूस में सोनिया गांधी की दो बहनों का हिस्सा 30-30 प्रतिशत है। दस जनपथ को घोटाले का केंद्र बिंदु बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सब कुछ जानते हुए भी मूक दर्शक बने रहे।स्पेक्ट्रम मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले अपने घर आराम करने देहरादून पहुंचे स्वामी ने पत्रकार वार्ता के दौरान 2 जी मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर कई आरोप लगाए। स्वामी ने दावा किया इस घोटाले में घूस के तौर पर बांटे गए 60 हजार करोड़ रुपये का दस प्रतिशत हिस्सा पूर्व संचार मंत्री ए राजा को गया। तीस प्रतिशत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और 30-30 प्रतिशत सोनिया गांधी को दो बहनों नाडिया और अनुष्का को गया है। हालांकि, इसके कोई दस्तावेजी सबूत उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए।

       स्वामी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि अमेरिका से स्पेक्ट्रम मामले में हुए लेन-देन का रिकार्ड भी मंगाया जाए। साथ ही उन्होंने पूर्व मंत्री ए राजा की सुरक्षा की मांग भी प्रधानमंत्री से की है।
       उनका कहना था कि ए राजा की सबसे अच्छी सुरक्षा तभी हो सकती है जब वो जेल में हों या फिर उन्हें हाउस अरेस्ट किया जाए। स्वामी ने राजा की सुरक्षा को लेकर लिखी चिट्ठी के जवाब में प्रधानमंत्री की ओर से आए पत्र को भी सार्वजनिक किया। इस पत्र में कहा गया है कि ए राजा को उच्च स्तरीय सुरक्षा दी जा रही है और स्पेक्ट्रम डील के बैंक रिकार्ड की जानकारी के लिए अमेरिकी सरकार से कहा जा रहा है।
       ए राजा की चिंता की वजह पूछे जाने पर स्वामी ने कहा कि इस महा घोटाले की सारी जानकारी राजा के पास है। इस मामले में अरब देशों के अंडरव‌र्ल्ड के लोग भी शामिल हैं। राजा की हत्या कर वे सबूत मिटाना चाहेंगे। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव मुहिम में सहयोग करने पर भी खुद को तैयार बताया।
****** हालांकी में स्वामी से कोई खास सच की उम्मीद नहीं रखता मगर वे किसी न किसी लिंक से अवश्य जुड़े हैं जो उन्हें आतंरिक सच से परिचित करवा देता है.., ऐसा उनके लगाये आरोपों से प्रतीत होता है.., इस कारण आरोपों को जांचने में हमारा क्या बिगड़ता है..!
-- बोफोर्स घोटाला मामले में सबसे अधिक 45 दिन तक चले शोर शराबे और व्यवधान के बाद सरकार ने जेपीसी की घोषणा की।
-- हर्षद मेहता से जुड़े प्रतिभूति एवं बैंक घोटाला मामले में जेपीसी की मांग को लेकर 17 दिन तक संसद की कार्यवाही बाधित रही।
-- केतन पारिख से जुड़े शेयर घोटाला मामले में जेपीसी की मांग पर 15 दिन तक संसद की कार्यवाही बाधित रही थी।
-- अंतिम बार संयुक्त संसदीय समिति का गठन शीतल पेय, फलों से जुड़े पेय पदार्थो और अन्य पेय सामग्रियों में कीटानुनाशकों के अंश पाए जाने से संबंधित मामलों की जांच के लिए 2003 में किया गया था। इस मामले में जेपीसी की अध्यक्षता शरद पवार ने की थी।
-- जयललिता ने कहा, "यदि डीएमके को छोड़कर संप्रग के सभी सहयोगी पाक-साफ हैं तो वे जेपीसी की जांच से दूर क्यों भाग रहे हैं?"