शनिवार, 4 दिसंबर 2010

नीरा राडिया : टेपों की ओरिजनलटी के साथ छेड़छाड़ न हो ...


- अरविन्द सीसोदिया
    मेरी व्यक्तिगत  राय यह है कि , नीरा राडिया  की टेपें कई कापी में कई जगह अलग अलग रखी जानीं चाहिए ..! उनकी बातचीत का हार्ड कापी में लिपीवध्य भी तुरंत होना चाहिए, वह भी कई जगह रखी जानी चाहिए ..! कारण बहुत  स्पष्ट है कि देश के हर संस्थान ने अपना विश्वास खोया है ..! 
राजनीति , प्रशासनिक क्षैत्र , न्यायपालिका और जांच संस्थानों की विश्वसनीयता पर बहुत सारे प्रश्न चिन्ह अंकित  हैं ..! 
          जिस तरह से हमारा तंत्र भ्रष्ट हुआ है और उसने आम नियम कानून को धन के आधार पर बेंचने की प्रवृती में पूरी जान झोंक रखी है .., उसी का कारण है की हमारा अति संम्पन्न वर्ग  धन आधारित प्रलोभन के आधार पर अपने हर हित को साधनें में सफल हुआ है ! विसरा की जांच बदल जाती है , ज्यादातर अपराधी अपराध करके वरी हो जाते हैं ..! ....डर यह है कि इन टेपों का असली तथ्य ही न बदल जाये ..! इनकी असली बातचीत समाप्त न करदी जाए ..! इसलिए सर्वोच्चा न्यायालय को सावधानी रखनी होगी...! पुखता व्यवस्था करवानी होगी की उनमें कोई हेफेर नहीं हो पाए ...! और जल्द से जल्द इन्हें सार्वजनिक भी करवाना चाहिए ..! क्यों की ये बातें  कोई दाम्पत्य जीवन की नहीं हैं .. ये लोकतंत्र के जीवन को प्रभावित कर रहीं हैं ..! देश को इन्हें जानने का हक़ है की हमारा अति संपन्न वर्ग देश की व्यवस्था के साथ क्या क्या कर रहा है ....?
 ये कई जगह  होतो उसमें हेरफेर की गुनजईस उतनी कम हो जाती है ...! उनकी सलामती का भी भरोष हो जाता है ! एक स्पष्ट और विश्वसनीय व्यवस्था होनी चाहिए ..! कुल मिला कर ये महा पूंजीपति  गण जो अपने रुतवे के आधार पर देश हित से खेल खेल रहे थे , ये लोग व्यक्तिगत बातों का ढिंढोरा पीट कर बात को ठंडी कर दफ़न  कर देना चाहते हैं .... खुलास से कोई खेल न हो जाये ..उसकी टेपों की ओरिजनलटी के साथ छेड़छाड़  न हो , इसकी पुखता व्यवस्था हो ..!

**** ३ दिस्म २०१० की एक खबर है .., नई दिल्ली। कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के टेप लीक होने की जांच की मांग करने वाली उद्योगपति रतन टाटा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को 10 दिन में जवाब देने के निर्देश दिया है। ये टेप अब सुप्रीम कोर्ट की हिरासत में है। गुरूवार को सरकार ने टेपों की मूल प्रति एक पैकेट में शीर्ष अदालत में जमा कर दी थी। जस्टिस जी.एस. सिंघवी और ए.के. गांगुली की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए टाटा के वकील से कहा कि वह टेप प्रकाशित करने वाली पत्रिकाओं को भी इस मामले में पार्टी बनाएं।
*****सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से गुरुवार को कहा कि वह टाटा समूह के रतन टाटा की उस याचिका पर दस दिन के अंदर जवाब दे जिसमें कारपोरेट जगत के लिए लॉबीइंग करने वाली नीरा राडिया के साथ उनकी निजी वार्ता वाले ऑडियो टेप के लीक होने की जांच और उसका प्रकाशन रोकने के लिए सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय गृहसचिव जी़ क़े पिल्लै, सीबीआई, आयकर विभाग और वित्त मंत्रालय को नोटिस जारी कर उनसे इस मुद्दे पर हलफिया बयान दाखिल करने को कहा और मामले की सुनवाई 13 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई। उच्चतम न्यायालय ने दो पत्रिकाओं — ओपन और आउटलुक को टाटा की याचिका का पक्ष बनाने को कहा और उन्हें नोटिस जारी किया। इन दोनों पत्रिकाओं ने वार्ता प्रकाशित की है।
विभिन सरकारी विभागों की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल जी़ ई़ वाहनवती ने उनकी तरफ से नोटिस स्वीकार किया।
उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय गृहसचिव जी़ क़े पिल्लै, सीबीआई, आयकर विभाग और वित्त मंत्रालय को नोटिस जारी कर उनसे इस मुद्दे पर हलफिया बयान दाखिल करने को कहा और मामले की सुनवाई 13 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई।
उच्चतम न्यायालय ने दो पत्रिकाओं — ओपन और आउटलुक को टाटा की याचिका का पक्ष बनाने को कहा और उन्हें नोटिस जारी किया। इन दोनों पत्रिकाओं ने वार्ता प्रकाशित की है। विभिन सरकारी विभागों की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल जी़ ई़ वाहनवती ने उनकी तरफ से नोटिस स्वीकार किया।