सोमवार, 17 जनवरी 2011

सुभाष जिनकी मृत्यु भी रहस्यमय है ..



http://srijanshilpi.com/archives/९५ 'सृजन शिल्पी ' का यह लेख अत्यंत अच्छा है , इसे यथावत यहाँ दिया जाता है ....

नेताजी सुभाष : सत्य की अनवरत तलाश

नेताजी के कथित रूप से लापता हो जाने से संबंधित अधिकांश आधिकारिक दस्तावेजों को सरकार ने अब तक अति गोपनीय श्रेणी में रखा है। यहाँ तक कि कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेश पर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मनोज मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित जाँच आयोग को भी सरकार ने बारंबार अनुरोध किए जाने के बावजूद इस मामले से संबंधित कई दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए और जाँच में अपेक्षित सहयोग भी नहीं दिया। मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार के इस रवैये के बारे में विस्तार से लिखा है। इसके बावजूद मुखर्जी आयोग ने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया और जाँच के पाँच प्रमुख बिन्दुओं पर 8 नवम्बर, 2005 को पेश अपनी रिपोर्ट में निम्नानुसार ठोस निष्कर्ष दिए: 
(क) क्या सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो चुकी है या वे जीवित हैं?
मुखर्जी आयोग - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु हो गई है।
(ख) यदि उनकी मृत्यु हो चुकी है तो क्या उनकी मृत्यु जैसा कि कहा गया है हवाई दुर्घटना में हुई थी?
मुखर्जी आयोग - उनकी मृत्यु वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई, जैसा कि बताया जाता है।
(ग) क्या जापानी मंदिर में जो अस्थियाँ रखी हैं वे नेताजी की अस्थियाँ हैं?
मुखर्जी आयोग - जापानी मन्दिर में रखे अवशेष नेताजी के नहीं हैं।
(घ) क्या उनकी मृत्यु किसी अन्य स्थान पर किसी अन्य ढंग से हुई है और यदि हाँ तो कब और कैसे?
मुखर्जी आयोग - किसी निश्चित साक्ष्य के अभाव में कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दिया जा सकता।
(ङ) यदि वे जीवित हैं तो उनके पते-ठिकाने के संबंध में…
मुखर्जी आयोग – उत्तर (क) में पहले ही दिया जा चुका है।
लेकिन भारत सरकार संसद में प्रस्तुत अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) में मुखर्जी आयोग के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हुई कि नेताजी की मौत 18 अगस्त, 1945 को कथित वायुयान दुर्घटना में नहीं हुई थी और जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी अस्थियाँ नेताजी की नहीं हैं। संसद में इस बारे में हुए वाद-विवाद के दौरान गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने सरकार की तरफ से यह सफाई दी कि इस मामले पर पूर्ववर्ती शाह नवाज खान जाँच समिति तथा जी. डी. खोसला आयोग के निष्कर्षों को सरकार अधिक विश्वसनीय मानती है।
जबकि इसके ठीक विपरीत 28 अगस्त, 1978 को लोक सभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उन दो पूर्ववर्ती जाँचों के निष्कर्षों के संबंध में निम्न वक्तव्य दिया था:
18 अगस्त 1945 को मंचूरिया की हवाई यात्रा के दौरान तैहोकु हवाई अड्डे पर हवाई दुर्घटना में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु की रिपोर्ट के बारे में दो बार जांच की गई है जिनमें से एक मेजर जनरल शाह नवाज खां की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा की गई थी और दूसरी पंजाब उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री जी.डी. खोसला की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जाँच समिति द्वारा की गई थी। पहली समिति ने बहुमत से और श्री खोसला ने उनकी मृत्यु संबंधी रिपोर्ट को सच माना था। उसके बाद से इन दो रिपोर्टों में पहुंचे निष्कर्षों की सच्चाई को लेकर उचित शंकाएँ प्रस्तुत की गई हैं तथा साक्षियों की गवाही में अनेक महत्वपूर्ण असंगतियाँ देखी गई हैं, कुछेक अन्य और अधिक समकालीन सरकारी दस्तावेजी रिकार्ड भी उपलब्ध हो गए हैं। इन शंकाओं और असंगतियों तथा रिकार्डों के प्रकाश में सरकार यह स्वीकार करने में दिक्कत महसूस करती है कि पिछले निर्णय असंदिग्ध थे। 
तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उपर्युक्त वक्तव्य देते समय जिन समकालीन आधिकारिक दस्तावेजी अभिलेखों का संदर्भ लिया था, उन दस्तावेजों के बारे में मुखर्जी आयोग द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और मंत्रिमंडल सचिवालय (रॉ) से बारंबार पूछे जाने पर यही जवाब मिला कि उनके पास इस तरह के कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। मुखर्जी आयोग ने सरकार के इस रवैये के बारे में निम्न शब्दों में टिप्पणी की:
2.5.7 अत: भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों/ कार्यालयों ने जो रुख अपनाया उससे यह देखा जा सकता है कि उनके पास इस तरह के कोई समकालीन सरकारी दस्तावेजी रिकार्ड उपलब्ध नहीं थे जिनके आधार पर स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने उपर्युक्त वक्तव्य दिया था जबकि आयोग अपने आपको यह समझाने और विश्वास करने में अत्यंत कठिनाई महसूस करता है कि देश का एक प्रधानमंत्री संसद के सदन में इस तरह का एक गलत वक्तव्य दे सकता है और उनके द्वारा उल्लिखित समकालीन सरकारी रिकार्डों के उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिकार हनन का जोखिम आमंत्रित कर सकता है। अब जैसा कि भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों/ कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दृढ़तापूर्वक उन रिकार्डों की अनुपलब्धता की बात कही गई है – इस स्थिति ने निश्चय ही जाँच की कार्रवाई में एक रोक लगा दी है।
नेताजी की मौत की परिस्थितियों की जाँच से संबंधित अभी तक के अनुभव से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी जब तक सत्ता में रहेगी तब तक इस मामले की सच्चाई जनता के सामने नहीं आ पाएगी। कोई गैर-कांग्रेसी सरकार ही मामले की सच्चाई के उजागर होने में निमित्त बन सकती है। खोसला आयोग की रिपोर्ट के जिन निष्कर्षों को 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने खारिज कर दिया था, उसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार अब विश्वसनीय मान रही है। इसी तरह, वर्ष 1999 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा गठित जस्टिस मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों से कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने असहमति जता दी है। 
इस संबंध में 2 फरवरी, 2007 को कोलकाता उच्च न्यायालय ने मुखर्जी आयोग के मुख्य निष्कर्षों को खारिज करने वाली केन्द्र सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट को रद्द किए जाने की मांग करते हुए दायर एक जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी अस्थियों को भारत लाए जाने की अनुमति नहीं दिए जाने की प्रार्थना भी की गई है। गौरतलब है कि कोलकाता उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिए गए आदेश पर ही भारत सरकार ने मुखर्जी आयोग का गठन किया था।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इस मामले से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की प्रतियाँ हासिल करने की कोशिशों में जुटे दिल्ली की एक गैर-सरकारी संस्था मिशन नेताजी के अनुज धर के अनुभव कुल मिलाकर बहुत उत्साहवर्धक नहीं रहे हैं। हाल ही में 19 जनवरी, 2007 को देश की बाह्य खुफिया एजेंसी रॉ ने अनुज धर को भेजे उत्तर में अपने पास नेताजी से संबंधित किसी गोपनीय दस्तावेज का अस्तित्व होने से इन्कार कर दिया है। लेकिन जैसा कि वर्ष 2001 में मुखर्जी आयोग के समक्ष तत्कालीन गृह सचिव कमल पाण्डे द्वारा दायर शपत्र पत्र के साथ संलग्न अति गोपनीय दस्तावेजों की सूची से पता चलता है कि रॉ के पास इस तरह के कुछ दस्तावेज अवश्य रहे हैं।
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कालेधन को कांग्रेस का ही अति आशीर्वाद

- अरविन्द सीसोदिया 
देश में काला धन किसका ?
विदेश में काला धन किसका ? ? 
यह प्रश्न बार बार उठता जरुर है और मगर बड़ी बेसर्मी  के साथ , यह प्रश्न लुप्त  कर दिया जाता है!
क्यों कि यह धन उन लोगों का है जो इसे झुपाना चाहते हैं..!
सही रास्ते का यह धन है भी नहीं , इस कारण झुपाना चाहते हैं !!
मगर यह धन देश के लोगों का तो  है !
सच यह है कि व्यवसाही  वर्ग के काकस  ने लोकतंत्र पर कब्ज़ा कर लिया है !
राजनेताओं के बिकाऊ हो जानें से , लोकतंत्र लूट तंत्र में बदल गया !
कांग्रेस इस परिस्थिति से कैसे बच सकत है ? उसने १९४७ से १९७७ तक लगातार देश पर राज किया है और देश में काले धन का कारोबार इस  दौरान न केवल मजबूत हुआ बल्कि राजनीती पर हावी हो गया ..!! घोटालों  और राजनीति से लाभ बटोरनें का भी यही वह दौर था जिसमें लूट तंत्र की तमाम नींबें मजबूत हुई..? इस दौरान जिस घरानें नें देश पर राज किया वह नेहरु वंश ही था ..?
विदेशी काले धन और स्विस बैंकों में धन जमा होने का बड़ा खुलासा भी इसी   वंश  के शासकों के नाम आया ..!!
मतलब यह है की लूट तंत्र की सारी की सारी नींव तो कांग्रेस कस शासन काल में ही दली , फली , फूली और विकसित हुई..? इस पर लगाम वे क्यों नहीं लगा सके ..?
 यह सच है की स्विस बैंकों में जमा धन किसी दल  का नहीं होगा , मगर वहां धन जो भी जमा है उसके स्वामी भारत के आम लोग तो नहीं है बल्की खास लोग हैं .., जैसे अनेंकों राजनेता , बड़े उद्योगपति , तस्कर ,भू माफिया ,  आतंकवादी  संगठन..!
कांग्रेस इस समस्या से इसलिए पीछा  नही छुड़ा  सकती  की उसके एक नेता का नाम स्पष्ट रूप से आने के बाद भी उसने इस संदर्भ में जो नैतिक प्रयत्न  करने चाहिए थे नहीं किये , इस कारण राजनीति से धन कमाना एक पेसे के रूप में विकसित हो गया ! आज लोग राजनीति में सेवा के लिए नहीं धन कमाने के लिए आरहे हैं , कम ज्यादा सभी दलों में पद से लाभ कमानें की प्रवृति हावी हो गई ...! जहाँ भी गहरी नजर से हाथ डालोगे बहीं बड़ी बड़ी बामियाँ मिल जायेंगी ! कुछ एसे भी हैं जो बिलकुल बेदाग़ हैं मगर नगण्य..!

*** विदेशी बैंकों पर जमा काले धन के मसले पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग करते हुए भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा है कि काला धन के तौर पर स्विस बैंक में जमा 20 लाख करोड़ रुपये भारत लाने के लिए कानून बनाना चाहिए। महंगाई और भ्रष्‍टाचार के खिलाफ यहां एक रैली को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि ग्‍लोबल फाइनेंसियल ट्रांसपैरेंसी की रिपोर्ट चौंकाने वाली है जिसमें कहा गया है कि भारत के 20.85 लाख करोड़ रुपये स्विस बैंक में जमा हैं। उन्‍होंने कहा, ' हमने इस इस बारे में प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी थी लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।'
***सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए सरकार से पूछा है कि विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के नाम सार्वजनिक करने को लेकर इतनी अनिच्छुक क्यों है? सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कोर्ट को बताया कि जर्मन बैंकों में अकाउंट रखने वाले भारतीयों की लिस्ट मिल गई है, लेकिन सरकार इसका खुलासा नहीं करना चाहती है। इस पर जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी और जस्टिस एस. एस. निज्जर की बेंच ने पूछा कि इसे सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है।
कोर्ट ने सुब्रमण्यम से पूछा कि किस विशेषाधिकार के तहत आप इस सूचना को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अकाउंट होल्डरों के नामों के बारे में वह सरकार से निर्देश लेने के बाद जवाब देंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट मशहूर क्रिमिनल लॉयर राम जेठमलानी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। उन्होंने कुछ रिटायर हो चुके नौकरशाहों और पुलिस अफसरों के साथ मिलकर विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने का सरकार को निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।


*** दैनिक भास्कर ने काले धन की वापसी को लेकर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से भी सवाल किए। वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता डीएस मलिक जवाब देने सामने आए। कुछ सवालों के जवाब टाल गए।सवाल सरकार विदेशी बैंकों में जमा हमारे पैसे को लाने के लिए क्या कर रही है जवाब आठ देशों में आयकर विभाग के दफ्तर खोल रहे हैं। अब पैसे का नाजायज लेनदेन पर निगाह रखेंगे।मायने जो काली कमाई पहले से जमा है, वह इन कोशिशों से महफूज बनी रहेगी। यह दिखावे के कदम हैं।सवाल स्विस संसद ने पिछले साल बैंकों की गोपनीयता के कानून खत्म किए हैं। हमारी सरकार ने क्या किया?जवाब संभव है सरकार गोपनीय तौर पर जानकारियां मांग रही हो। इस बारे में कुछ भी बताना मुश्किल है।मायने सरकार ने कुछ नहीं किया। पांच साल से संयुक्तराष्ट्र संकल्प को ही अनुमोदन नहीं मिल सका है।सवाल हसन अली मामले में सरकार को कई नाम पता चले थे। कितने नाम थे? उनके खिलाफ क्या किया?जवाब चुप्पी
*** हमारे मित्र शालीन गुप्ता का कहना है कि ___ 
Shalin गुप्ता

THE AMOUNT OF BLACK MONY IS 70 lAKHS CARORE 

INDIA CAN REPAY ALL ITS DEBT BY THIS MONEY AND
THE 32 TIMES THE GDP OF INDIA IS REMAINED WITH THE GOVERNMENT
THINK HOW MUCH AMOUNT IS LYING OUTSIDE THE INDIA THAT WAS DEPOSITED BY THE INDIAN PEOPLE TO GOVERNMENT IN THE FORM OF TAXES
STOP PAYING TAXES TILL THAT MONEY WILL NOT COME TO INDIA


कुल मिला कर कालेधन को अन्य दलों सहित कांग्रेस का ही अति आशीर्वाद रहा है..,