शनिवार, 22 जनवरी 2011

काले धन का महा कुम्भ : भारत



750 × 532 - ... जिनके नाम अकूत धन स्विस बैंकके खाते में ...
bhopalreporter.blogspot.com

भास्कर डाट कॉम पर ,२१ जनवरी २०११ को एक समाचार है - 
विदेशों में काली  कमाई जमा करने वालों की पहचान में जुटी सरकार   
कुछ अंश इस प्रकार से हैं ......
विदेशों में भारतीयों की खरबों रुपये की काली कमाई जमा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि  भारत सरकार चाहे तो स्विस बैंक में खरबों रुपयों का काला धन जमा करने वाले भारतीयों के नाम का खुलासा हो सकता है। पर सरकार ने इस दिशा में कभी सक्रियता नहीं दिखाई। सरकार ने अब जो मदद मांगी है, उसका भी कोई नतीजा निकलने की उम्‍मीद नहीं है, क्‍योंकि दोनों सरकारों के बीच इस तरह की मदद करने संबंधी कोई समझौता नहीं है।
टैक्स चोरी के मामलों पर निगाह रखने वाली संस्था टेक्स जस्टिस नेटवर्क के डायरेक्टर जॉन क्रिश्चियनसेन ने कहा है कि भारत का अरबों रुपया स्विस बैंक में जमा है और भारत यह रकम वापस ला सकता है। स्विटजरलैंड के वित्त विभाग ने भी भारत सरकार से कहा है कि यदि वे किसी व्यक्ति द्वारा कर चोरी के ठोस सबूत देती है और उसका किसी स्विस बैंक में एकाउंट हैं तो उसकी पूरी जानकारी भारत को दी जाएगी।
लेकिन सरकार गंभीर नहीं
लेकिन भारत सरकार इस मामले में फिलहाल कार्रवाई करने की असमर्थता जता रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को स्विस बैंक में जमा धन को लेकर मजबूरी जताई थी। बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने काले धन के मामले में केंद्र सरकार को तगड़ी लताड़ लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी थी कि सरकार विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के अरबों रुपए के धन की जानकारी देना नहीं चाहती। कोर्ट ने कहा कि यह केवल कर चोरी का मामला नहीं है बल्कि भारत की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। 
कितना भारतीय धन है जमा विदेशों के बैंकों में
ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी स्टडी द्वारा कुछ समय पहले किए गए आंकलन के अनुसार केवल पिछले पांच सालों में  692,328 करोड़ रुपया विदेशी बैंकों में अवैध रूप से जमा किया गया है। कुल मिलाकर भारतीयों ने कम से कम 71 लाख करोड़ रुपया विदेशी बैंकों में जमा किया है। यह सारा पैसा केवल स्विस बैंक में ही जमा नहीं हुआ है। विश्व में ऐसे करीब 70 देश हैं, जहां काला धन जमा करने में दिक्कत नहीं हैं। इनमें से 40 देश तो काला धन जमा करने वालों को प्रोत्साहित करते हैं। स्विट्जरलैंड के अलावा जिन देशों में भारतीयों ने ज्यादा काला धन जमा किया है उनमें  लिचटेंस्टीन, लक्समबर्ग और चैनल आइलैंड प्रमुख हैं। 
इसी समाचार पर एक प्रतिक्रिया  
RAJESH
Hi,Our Indians' Money - 71, 00,000 Crores Rupees In Swiss Bank 
1) Yes, 71 lakhs crores rupees of India are lying in Switzerland banks. This is the highest amount lying outside any country, from amongst 180 countries of the world , as if India is the champion of Black Money .
2) Swiss Government has officially written to Indian Government that they are willing to inform the details of holders of 70 lakh crore rupees in their Banks, if Indian Government officially asks them. 
3) On 22-5-08 , this news has already been published in The Times of India and other Newspapers based on Swiss Government's official letter to Indian Government. 
4) But the Indian Government has not sent any official enquiry to Switzerland for details of money which has been sent outside India between 1947 to 2008.. The opposition party is also equally not interested in doing so because most of the amount is owned by politicians and it is every Indian's money. 
5) This money belongs to our country. From these funds we can repay 13 times of our country's foreign debt. The interest alone can take care of the Center s yearly budget. People need not pay any taxes and we can pay Rs. 1 lakh to each of 45 crore poor families. 
6) Let us imagine, if Swiss Bank is holding Rs. 70 lakh Crores, then how much money is lying in other 69 Banks? How much they have deprived the Indian people? Just think, if the Account holder dies, the bank becomes the owner of the funds in his account. 
7) Are these people totally ignorant about the philosophy of Karma? What will this ill-gotten wealth do to them and their families when they own/use such money, generated out of corruption and exploitation? 
8) Indian people have read and have known about these facts. But the helpless people have neither time nor inclination to do anything in the matter. This is like "a new freedom struggle" and we will have to fight this. 
9) This money is the result of our sweat and blood.. The wealth generated and earned after putting in lots of mental and physical efforts by Indian people must be brought back to our country. थैंक्स
अन्य सूचनाएं जो चोंका देंती हैं .....

स्विस बैंकों में सख्ती के बाद अब भारतीयों ने दुबई की ओर रुख कर लिया है।
संयुक्त अरब अमीरात के दो बड़े शहरों आबू धाबी और दुबई से खबरें आ रही हैं कि पिछले कुछ महीनों में वहां के बैंकों में बड़े पैमाने पर काला धन जमा किया गया ह। वहां के बैंकरों का कहना है कि यह पैसा भारत से ही आ रहा है।
30 अगस्त को भारत और स्विट्जरलैंड के बीच काले धन पर करार होने के बाद वहां बैंकों में पैसा डिपॉजिट कराने की होड़ सी लग गई है। अकेले अक्टूबर महीने में संयुक्त अरब अमीरात के बैंकों में 11 अरब डॉलर जमा किए गए। वहां अमूमन हर महीने 2.7 अरब डॉलर जमा होते हैं।
ऐसा समझा जा रहा है कि बेईमान भारतीय अपना पैसा स्विस बैंकों से निकालकर दुबई और आबूधाबी के बैंकों में जमा कर रहे हैं। भारत सरकार ने स्विटजरलैंड के अलावा बरमूडा की सरकार से भी काले धन के बारे में समझौता किया है।
दुबई के बैंकों में पैसा जमा कराना बेहद आसान है। इसके लिए वहां के फ्री ट्रेड जोन में एक कंपनी खोलनी होती है। इसमें स्थानीय लोगों के डायरेक्टर रखना होता है। इसके बाद फर्म के नाम किसी भी देश से यहां पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है।
'ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल" ने भ्रष्ट देशों की हालिया सूची में भारत को 87वें स्थान पर रखा है।'अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो आप भ्रष्टाचार की समस्या से निपट सकते हैं। हमने अध्ययनों में पाया है कि दागी नेताओं को दल बेहिचक टिकट दे देते हैं।" पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने कहा था कि अगर वह सत्ता में आती है तो स्विस बैंकों में जमा काले धन को देश में वापस लाएगी। वहीं, कांग्रेस ने वादा किया था कि सरकार बनने के 100 दिन के भीतर वह भी इस दिशा में कदम उठाएगी। वादे तो हुए हैं लेकिन कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति इस दिशा में एक अवरोध है।
माल कितना ........ 
pankaj bedrdi

स्विस बैंक में सबसे ज्यादा पैसा इंडियंस का


स्पष्टीकरण : यह खबर नवभारत टाइम्स के प्रिंट एडिशन में 18.11.2010 को प्रकाशित हुई थी। इस खबर के प्रकाशित किए जाने के बाद हमें पता चला है कि जिस रिपोर्ट के आधार पर यह खबर बनाई गई थी, उस रिपोर्ट की प्रामाणिकता संदिग्ध है। दरअसल, इस रिपोर्ट की जानकारी हमारे संवाददाता को एक महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति ने दी है लेकिन इससे जुड़े दस्तावेज हमारे पास उपलब्ध नहीं हैं इसलिए इसके तथ्यात्मक रूप से सही होने की हम तस्दीक नहीं कर सकते।


जोसफ बर्नाड
नई दिल्ली ।। कहा जाता है कि 'भारत गरीबों का देश है, मगर यहां दुनिया के बड़े अमीर बसते हैं।' यह बात स्विस बैंक की एक चिट्ठी ने साबित कर दी है। काफी गुजारिश के बाद स्विस बैंक असोसिएशन ने इस बात का खुलासा किया है कि उसके बैंकों में किस देश के लोगों का कितना धन जमा है। इसमें भारतीयों ने बाजी मारी है। इस मामले में भारतीय अव्वल हैं। भारतीयों के कुल 65,223 अरब रुपये जमा है। दूसरे नंबर पर रूस है जिनके लोगों के करीब 21,235 अरब रुपये जमा है। हमारा पड़ोसी चीन पांचवें स्थान हैं, उसके मात्र 2154 अरब रुपये जमा है।


भारतीयों का जितना धन स्विस बैंक में जमा है, तकनीकी रूप से वह हमारे जीडीपी का 6 गुना है। सरकार पर दबाव है और कोशिशें भी जारी है कि इस धन को वापस देश में लाया जाए। तकनीकी रूप से यह ब्लैक मनी है। अगर यह धन देश में वापस आ गया तो देश की इकोनॉमी और आम आदमी की बल्ले-बल्ले हो सकती है।


कर्ज नहीं लेना पड़ेगा
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक भारत को अपने देश के लोगों का पेट भरने और देश को चलाने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ता है। यही कारण है कि जहां एक तरफ प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, वही दूसरी तरफ प्रति भारतीय पर कर्ज भी बढ़ता है। अगर स्विस बैंकों में जमा ब्लैक मनी का पहले चरण में 30 से 40 पर्सेंट भी देश में आ गया तो हमें कर्ज के लिए आईएमएफ या विश्व बैंक के सामने हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे। धन की कमी स्विस बैंक में जमा धन पूरा करेगा।


30 साल का बजट बिना टैक्स के
स्विस बैंकों में भारतीयों का जितना ब्लैक मनी जमा है, अगर वह सारी राशि भारत को मिल जाती है तो भारत देश को चलाने के लिए बनाया जाने वाला बजट बिना टैक्स के 30 साल के लिए बना सकता है। यानी बजट ऐसा होगा कि जिसमें कोई टैक्स नहीं होगा। आम आदमी को इनकम टैक्स नहीं देना होगा और किसी भी वस्तु पर कस्टम या सेल टैक्स नहीं देना होगा।


सभी गांव जुड़ेंगे सड़कों से
सरकार सभी गांवों को सड़कों से जोड़ना चाहती है। इसके लिए 40 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है। मगर सरकार के पास इतना धन कहां हैं। अगर स्विस बैंक से ब्लैक मनी वापस आ गया तो हर गांव के पास एक ही चार लेन की सड़क बन सकती है।


कोई बेरोजगार नहीं
देश में कोई भी बेरोजगार नहीं रहेगा। जितना धन स्विस बैंक में भारतीयों का जमा है, उससे उसका 30 पर्सेंट भी देश को मिल जाए तो करीब 20 करोड़ नई नौकरियां पैदा की जा सकती है। 50 पर्सेंट धन मिलेगा तो 30 करोड़ नौकरियां मार्केट में आ सकती हैं।


देश से गरीबी गायब
अमेरिकी एक्सपर्ट का अनुमान है कि स्विस बैंकों में भारतीयों का जितना धन जमा है, अगर वह उसका 50 पर्सेंट भी भारत को मिल गया तो हर साल प्रत्येक भारतीय को 2000 रुपये मुफ्त में दिए जा सकते हैं। यह सिलसिला 30 साल तक जारी रहा सकता है। यानी देश में गरीबी दूर हो जाएगी|


सुभाष जी का सच, सामने आना चाहिए ....!!












 - अरविन्द सीसोदिया 
जवाहरलाल  नेहरु  के  शव  के  पास  सुभाष जी का होना माना जाता है ... 
http://uchcharandangal.uchcharan.com/2010/08/blog-post_18.html
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक द्वारा लिख गया लेख यथावत संलग्न है ...
1- ब्रिटिश पार्ल्यामेंट  में मि. एटिली (तत्कालीन प्रधानमंत्री) ने 18 अगस्त, 1945 में कहा था कि उनका भारतीय नेताओं से समझौता हो चुका है कि  नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के पकड़े जाने पर उन्हें ब्रिटिश सरकार के हवाले कर दिया जायेगा!
2- 1948 में मास्को में दार्शनिक सम्मेलन में भाग लेने गये (पूर्व राष्ट्रपति) भारत के प्रख्यात दार्शनिक सर्वपल्ली राधाकृष्णन की मुलाकात नेता जी सुभाष चन्द्र बोस  से हुई थी!
3- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस तिब्बत में एकनाथलाता के रूप में 1960 में रहे!
4- श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित की मुलाकात 1948 में रूस में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस  से हुई थी! उस समय वे भारत की विदेश मंत्री थी! शांताक्रूज हवाई अड्डे पर उन्होंने यह घोषणा की थी कि वह भारतवासियों के लिए एक अच्छी खबर लाई हैं परन्तु नेहरू जी के दबाव में आकर उन्होंने जीवनभर अपनी जबान नहीं खोली!
5- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस 1960 से 1970 तक शारदानन्द के रूप में प.बंगाल में शौलमारी आश्रम में रहे!
6- नेता जी 1964 में नेहरू जी की मत्यु के बाद उनके शव के साथ देखे गये थे!

7- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस 1971 में काँग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इन्दिरा जी के साथ देखे गये!

8- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस गुमनामी बाबा के रूप में फैजाबाद में 1985 तक रहे!
9- तेरह मई,1962 को नेहरू जी ने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के बड़े बाई श्री सुरेशचन्द्र बोस को पत्र क्रमांक-704, पी.एम. / 62 में लिखा था कि हमारे पास  नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु का कोई प्रमाण नही है!
10- कस्बा पूरनपुर जनपद-पीलीभीत में 15 फरवरी 2009 को भारतीय सुभाष सेना के संस्थापक परम पूज्य महान संत सम्राट सुभाष जी द्वारा यह घोषणा की गई थी कि वे ही  नेताजी सुभाषचन्द्र बोस हैं
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परिचय
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी वकील थे, मगर बाद में उन्होंने निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। उन्होंने कटक की महापालिका में लंबे समय तक काम किया था और वे बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रहे थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था। प्रभावती देवी के पिता का नाम गंगानारायण दत्त था। दत्त परिवार को कोलकाता का एक कुलीन परिवार माना जाता था। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाषचंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था। शरदबाबू प्रभावती और जानकीनाथ के दूसरे बेटे थें।