मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

देश में अराजकता की स्थिति



- अरविन्द सीसोदिया
  देश में आज आराजकता कि स्थिति नजर आने लगी हर ओर अपराधवाद हावी हो चुका है, नैतिकता और व्यवस्था नाम की चीज बची नहीं है ! देश को संभालने वाले असहाय नजर आरहे हैं ! अव्यवस्थाएं चरम पर हैं .....! आप जिस तरफ नजर दौड़ाएंगे उस तरफ ही अव्यवस्था ही अव्यवस्था नजर आयेगी !! इस घटना के लिए बिना व्यवस्था किये बेरोजगार युवकों को बुलाना ओर फिर बिना निर्णय किये उन्हें लौटना रहा है !   
    एक बड़ी और दुखद खबर उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर से आ रही है जहां बरेली में आईटीबीपी में भर्ती के लिए आये बेरोजगार युवक ,   घर लौटते हेतु  ट्रेन से सफर कर रहे कई छात्रों की मौत हो गई है। जो खबर मिल रही है उससे पता चल रहा है कि ये सभी छात्र ट्रेन की छत पर बैठे थे, जो कि हाईटेंशन तार की चपेट में आ गये, जिससे उनकी मौत हो गई। हादसे में कई छात्र घायल भी हो गए हैं, घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।मरने वालों की संख्या के बारे में अभी ठीक से पता नहीं चल पाया है क्योंकि जीआरपी की ओर से कोई बयान नहीं आया है।  एक ओवरब्रिज से टकरा जाने पर हिमगिरि एक्सप्रेस की छत पर सवार १३  युवकों की मौत हो गई, जबकि अन्य १७ से अधिक  घायल हो गए। गुस्साए लोगों ने ट्रेन में आग लगा दी है, पूरी ट्रेन में आग फैल गई है। रेलवे प्रशासन ने ट्रेन को खाली करा दिया गया है। अणु क्षेत्रों में भी विरोध फेल गया है , कई बसें भी जला दी गई हैं !
घटना  इस प्रकार बताई जा रही है कि-
     एक न्यूज चैनल समय लाइव के मुताबिक बरेली रेंज के आई जी ने बताया कि बरेली में आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) की भर्ती के चलते करीब 12 राज्यों से लाखों की तादाद में छात्र पहुंचे थे।गौरतलब है कि यहां सेना में भर्ती के दौरान शामिल होने आए युवकों ने जमकर हंगामा किया है, मिली जानकारी के मुताबिक, इस भर्ती अभियान में 415 पोस्ट के लिए करीब १.५० लाख  युवक आए थे। इनके रजिस्ट्रेशन में देरी एवं अव्यवस्था के चलते  युवक आक्रोशित हो गए।भर्ती निरस्त किए जाने के बाद यह छात्र वापस अपने घरों को लौट रहे थे। 
           भर्ती प्रक्रिया से लौटे अभ्यर्थियों ने घटना के बाद तोड़फोड़ कर रेलगाड़ी की एक बोगी को आग लगा दी। आग दो अन्य बोगियों में भी फैल गई। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आगजनी और तोड़फोड़ से पहले ही इन बोगियों में सवार यात्रियों को बाहर निकालकर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया। हालात सामान्य होने पर जल्द ही उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा।
         उत्तर प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) बृजलाल ने संवाददाताओं को बताया कि रेल की बोगियों में लगाई गई आग बुझा ली गई है। फिलहाल हालात पूरी तरह काबू में हैं। मौके पर रेलवे पुलिस के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय पुलिसकर्मियों को तैनात किया | 

विचारणीय बिंदु -
१- देश में बेरोजगारी के हाल क्या हैं ,यह उपस्थिति इस बात का घोतक है ....
२- देश में आज तक नागरिकों की स्थिति कीड़ों - मकोड़ों की तरह है ...,कोई व्यवस्थित भरती प्रक्रिया तक नही है |
३- केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक जवावदेही लेने तैयार नहीं है ..?
४- भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की भरती के लिए , प्रथम दृष्टया केंद्र सरकार ही दोषी है ,क्यों कि यह आमन्त्रण और आयोजन राज्य सरकार अथवा रेलवे का नहीं था !  

राष्ट्रद्रोही सफ़ेदपोशों का सच : सुरेश चिपलुकर का आलेख

 अवश्य पढ़ें .... पूरा पढनें के लिए नीचे दी गई वेव साईड को खोलें ......

Sunday 30 January 2011

         मुम्बई हमले के बाद से लगातार पिछले 2 साल से राष्ट्रीय सहारा (उर्दू) के सम्पादक अज़ीज़ बर्नी ने 100 से अधिक लेख एवं एक पुस्तक “26/11, RSS Conspiracy” नाम की बेहूदा और देशद्रोही पुस्तक लिखकर न सिर्फ़ देश को अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर शर्मिन्दा किया बल्कि RSS एवं हिन्दुओं के खिलाफ़ सतत जहर उगलते रहे। इनकी हाँ में हाँ मिलाने व पिछलग्गूपन को मात करते हुए दिग्विजय सिंह भी इसकी पुस्तकों के विमोचन समारोहों में जाते रहे, संघ को गरियाते रहे। 
         अब राष्ट्रीय सहारा ने अज़ीज़ बर्नी का खेद व माफ़ीनामा प्रकाशित किया है, जिसमें उसने कहा है कि “मेरा इरादा किसी को ठेस पहुँचाने का नहीं था, यदि मेरी बातों से किसी की भावनाओं को दुख पहुँचा हो तो मैं उसके लिये माफ़ी माँगता हूँ…”। देखा आपने, हद है मक्कारी की… यदि ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं था तो इस पुस्तक को दो साल तक बाजा बजा-बजाकर क्यों बेच रहे थे? क्यों बार-बार हेमन्त करकरे की स्वर्गीय आत्मा को नोच रहे थे? संघ के बारे में जानते नहीं थे, तो क्यों अपना सड़ा हुआ मुँह फ़ाड़ रहे थे? और अब माफ़ी का ढोंग कर रहे हैं… जी हाँ ढोंग ही है, क्योंकि अभी भी अज़ीज़ बर्नी ने अपने बयान (माफ़ीनामे) में यह नहीं कहा कि 26/11 के लिये संघ पर आरोप लगाती हुई मेरी पुस्तक नम्बर एक की कूड़ा पुस्तक है…।
     और ऐसा भी नहीं कि अज़ीज़ बर्नी की अक्ल अचानक ठिकाने आ गई हो, इसके पीछे नवी मुम्बई स्थित श्री विनय जोशी हैं जिन्होंने अपने वकील प्रशान्त मग्गू के जरिये, अज़ीज़ बर्नी और सहारा प्रकाशन, लखनऊ के खिलाफ़ दो साल पहले नवी मुम्बई की अदालत में देशद्रोह, भारत की सुरक्षा से खिलवाड़, मानहानि, भावनाएं भड़काने, भावनाओं को चोट पहुँचाने सम्बन्धी कोर्ट केस दायर किया था। इस कोर्ट केस की वजह से बर्नी को लगातार मुम्बई के चक्कर काटने पड़े, जिस वजह से उसे अपने अन्य अखबारी एवं व्यावसायिक काम करना मुश्किल हो गया था। अज़ीज़ बर्नी ने इस कथित माफ़ीनामे सम्बन्धी जो ई-मेल श्री विनय जोशी को भेजा है उसका मजमून इस प्रकार है– 




---------- Forwarded message ----------
From: Aziz Burney 
Date: 28 January 2011 21:45
Subject: Letter for apology
To: Vinay Joshi 

Dear Mr.Vinay Joshi,

Since last two years I am writing various articles regarding 26/11 Mumbai terror attack.You had filed court suit against me and Sahara Publications in Navi Mumbai court for my articles regarding Mumbai attack.I never wrote anything to deliberately hurt the feelings of anyone.But if you are disturbed or hurt due to any article or anything I quoted in my article,then I am extremely sorry for this.Hope you would accept my apology.

Also I am requesting you for the immediate withdrawal of court case filed against me in Navi Mumbai court,as it is creating professional difficulties for me and I cannot afford to bear cost of litigation.I never intended to target India's security apparatus and any patriotic organisation working in India.but if there are any references made in my articles by mistake then I am really sorry for that.I assure you that I will not write anything in future that may hurt anyone and I will take utmost care for the same.Expecting quick withdrawal of court case once again.

Thanks & regards,

Aziz Burney,
Sahara India Complex,
C-2,3,4; Sector 11,Noida-201301
Phone:0120-2553921,2598419
Fax:0120-2545231,2537635


Jeet Bhargava said...


पहली बात तो विनय जोशी को बरनी का अजीज बनने और मुकदमे वापस लेने से बचना चाहिए.

दूसरी बात, हुसैन की तरह इसे भी इतना रगडा जाए कि बर्नियो की नानिया याद आ जाएँ.
बेंगानी जी ने बिलकुल सही कहा है कि तीस्ता जावेद की हालत भी ठीक नहीं है. अब उसकी पोल खुल गयी है. उसने भोले मुस्लिमो को बहला-फुसला कर ढेर सारे इनाम-इकराम बटोरे हैं. कोर्ट से कई बार लताड़ खाई है. फिर भी तीस्ता खाला कुत्ते की दम की तरह टेढ़ी की टेढ़ी ही हैं. जो लगता है क़ानून की मार से ही सीधी होगी.
आज जहां हिन्दू समाज को सुरेशजी जैसे तथ्य परक और तार्किक लेखको की जरूरत है, वैसे ही विनय जोशी जैसे कानूनी कुश्तीबाजो की भी जरूरत है.
आखिर सरे आम सैकड़ो लोगो की जान लेने वाले जेहादी क़ानून की मदद लेकर बच जाते हैं तो, हमें भी जेहादियों और बिकाऊ सेकुलर भाँड़ो से देश की रक्षा के लिए क़ानून की मादा लेने में कैसा आलस??
फिर देखना कैसे महेश भत्तो, तरुण तेज्पालो, बुर्का दत्तो और तीस्ताओ की अकाल