बुधवार, 9 मार्च 2011

वसुंधरा राजे के जन्मदिवस : नया जोश उमड़ पड़ा है ; राजस्थान भाजपा में ...

08 मार्च 2014
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का जन्मदिवस 8 मार्च
कोटि कोटि शुभकामनायें !
एक स्मृति.....राजस्थान में दूसरीबार मुख्यमंत्री पद संभाल रहीं, भाजपा की नेत्री सम्मानीया वसुंधरा राजे की लोकप्रियता हमेशा ही शिखर पर रही है। राजस्थान के इतिहास में पहलीबार कोई पार्टी 200 में से 163 सीटें जीत कर इतिहास भाजपा रचती है,जिसका नेतृत्व लोकप्रिया वसुंधरा राजे कर रहीं थी। यह पोस्ट तब की है जब वे नेता प्रतिपक्ष थीं और उनके जन्मदिवस को भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोश और उमंग के साथ मनाया था।

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- अरविन्द सिसोदिया
09 मार्च 2011

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वसुंधरा राजे जो की महारानी धोलपुर भी हैं और ग्वालियर के सुप्रसिद्ध सिंधिया राज घरानें की राजकुमारी भी हैं ..! सम्मानीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वे पुत्री हें , ग्वालियर महाराजा माधवराव सिंधिया उनके सगे भाई थे ,  वे राजस्थान की मुख्यमंत्री भी रहीं हैं , उनकी लोकप्रियता जन - जन में है और इतनी है की आज उन्हें नंबर १ ही कहा जाना उचित है ..! वे राजस्थान में आज की तारीख में सबसे अधिक लोकप्रिय राजनेता हैं ....!



       जयपुर०८ - ०३ - २०११ |  विश्व महिला दिवस के मौके पर जहां प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. वहीं आज राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ओर भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव वसुंधरा राजे भी अपना 58 वां जन्मदिन मना रही है. इस मौके पर सिविल लाइंस स्थित उनके आवास पर सुबह से ही बधाई देने वाले का तांता लगा रहा. विभिन्न जिलों से आए राजे के समर्थकों ने ढोल नगाड़ों और फूल मालाएं पहना कर जन्मदिन की शुभकामनाए दी. कतारों में खडे लोग अपनी अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए .
        राजे ने भी प्रदेश की महिलाओं को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी है. राजे ने मोती डूंगरी गणेश मंदिर में धौक लगाकर आशीर्वाद लिया. राजे को बधाई देने में वालों में भाजपा प्रदेषाध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी, विधायक राजेन्द्र राठौड सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और महिला संगठन शामिल रहे. राजे के जन्मदिन को खास बनाने के लिए उनके गृह जिले झालावाड़ जिले के झालरापाटन में समारोह का आयोजन किया गया. और लम्बे बैनर पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर उन्हें बधाई दी.
         गौरतलब है कि राजे के नेताप्रतिपक्ष बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान आई है. नेता प्रतिपक्ष की घोषणा के बाद से ही उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.





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जागरण की रिपोर्ट का अंश ......
जयपुर, जागरण संवाद केन्द्र। पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में प्रतिपक्ष की नेता वसुंधरा राजे ने मंगलवार को अपने निवास पर 59वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया। जन्मदिन समारोह में पूरे प्रदेश से बड़ी तादाद में आए समर्थकों और आम आदमी की भीड़ से भाजपा नेता उत्साहित है। सूत्रों का मानना है कि इतनी बड़ी भीड़ लम्बे समय बाद देखने को मिली है। वसुंधरा को बधाई देने पहुंचे लोगों की भीड़ से उत्साहित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी का कहना है कि आज का माहौल देखकर साफ हो गया कि राज्य की जनता मौजूदा कांग्रेस सरकार की नाकामी से परेशान हो गई और अब सत्ता बदलने का मौका देख रही है। 
        सिविल लाइंस स्थित अपने निवास पर 58 किलो का केक काटा। झालावाड़ के कार्यकर्ताओं की ओर से 58 मीटर लंबे बैनर पर जन्मदिन की बधाई दी गई। इससे पहले वसुंधरा राजे ने सुबह मोती डूंगरी गणेश मंदिर जाकर पूजा अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने निवास पर कार्यकर्ताओं, नेताओं और विधायकों से शुभकामनाएं एवं बधाईयां ली। हाल ही दुबारा विपक्ष की नेता बनने के कारण उनके निवास पर बधाईयां देने वालों का तांता लगा रहा। वसुंधरा राजे सुबह साढ़े दस बजे अपने निवास पर स्थित मंच पर आई और दोपहर ढाई बजे तक भीड़ बनी रही। इस दौरान बेरीकेट्स टूट गए। विभिन्न जिलों के कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते गाते हुए वहां पहुंचे। अधिक भीड़ के कारण यातायात पुलिस को दो बार टै्रफिक डायवर्ट करना पड़ा। वसुंधरा राजे की ओर से रात को मानसरोवर स्थित खुशबू फार्म हाउस पर डिनर रखा गया। इस मौके पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

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  भाजपा राष्ट्रीय महासचिव एवं नेता प्रतिपक्ष वसुंधरा राजे के ५८वें जन्मदिवस समारोह पर रविंद्र मंच पर रक्तदान शिविर में चौमू से स्वाभिमान ग्रामीण विकास संस्थान के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया है। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. श्रवण बराला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने राजे का चुनरी ओढ़ाकर व तलवार भेंट कर स्वागत किया। रक्तदान शिविर में भाग लेने वालों में जैतपुरा सरपंच बाबूलाल टोड़ावता, पार्षद कजोड़ मल गौरा, रामेश्वर लाल सामोता, नानूराम बराला, एडवोकेट भवानीसिंह, बंशीधर बेसरवाडिय़ा, बजरंग लाल बुनकर कार्यकर्ता थे। 

ग़रीब का जीवन - आशा पाण्डे ओझा ' आशा '





















 मुझे लगा की यह कविता अपनों को भी पढ़ वानी चाहिए , इसी लिए इसे उठा लाया ..,

अच्छी लगे तो आशा जी को बधाई अवश्य भेजें , वे फेस बुक पर खूब छाई हुई हैं ....!! हालांकी इनका नाम आशा पाण्डे ओझा ' आशा ' है , मगर होना चाहिए थे .., आशा पाण्डे ' अविरल ' .., इनकी निरंतरता सराहनीय है ..!

ग़रीब का जीवन

- आशा पाण्डे ओझा ' आशा '

'दर्द 'के समृद्ध महल हैं


'रंज़" की ऊँची दीवारें


'दुःख 'का रंग रोगन सजा


बंधी 'वेदनाओं ' की बन्दनवारें


'विपदाओं के बाग़ -बग़ीचे


'करुण'झूलों की कतारें


'आंसू 'के रिमझिम सावन


'कसक' की शीतल फुहारें


'चिंताओं 'के झाड़-फानूस से


'सजते' घर के गलियारे


'बेबसी के पलंग पर लेटी


दुल्हन'पीड़ा 'की चीत्कारें


'सूनेपन की साँझ में आता


दूल्हा'मजबूरी घर -द्वारे


दे 'अभावों ' की महंगी मिठाई


करते लाडलों की' मनुहारें '


पा 'दुत्कारों 'के खेल -खिलौने


खिलतीं बच्चों किलकारें


रोज़ सजाते आँगन देहरी


दीपक से 'आहों 'के अंगारे


'भूख 'परी सी छम -छम आती


टिम-टिम करते 'टीस' के तारे


जब' अरमानों का चूल्हा' जलता


मिल बैठ खाते ग़म सारे


'कंटक -प्रस्तर' के कोमल बिस्तर


बजती आल्हादित स्वपन झंकारें


'अँधेरे 'लिखते जिस की यश गाथा


यही है 'ग़रीब 'का जीवन प्यारे
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