शनिवार, 7 मई 2011

अभी लादेन जिन्दा है



- अरविन्द सिसोदिया 
        सम्पूर्ण विश्व को इस्लाम के अधीन लाने का स्वप्न देखने वाला क्रूरतम हत्यारा ओसामा बिन लादेन अमरीकी कार्यवाही में मारा गया | अपराध को दंड के माध्यम से रोकनें की व्यवस्था है सो यह हुआ | मगर सच यह भी है कि ओसामा बिन लादेन अभी नहीं मारा गया ! क्योंकि वह मानसिकता ,वह विचारधारा या वह मजहवी कट्टरपन तो जिन्दा है ; जो ओसामा बिन लादेन बनाता है ! अपराधी को खत्म करना और अपराधी बनानें कि फैक्ट्री को ख़त्म करनें में फर्क है ! एक डाकू जब मारा जाता था तो गिरोह का दूसरा उसकी पाग बांध लेता था , वह बुरा काम जो रुकना चाहिए वह तो अवाध चलता रहता है ! यानि कि अमरीकी कार्यवाही में एक अपराधी ओसामा मारा गया , मगर वह बातें या वे कारण जो ओसामा निर्माता हैं , में समझता हूँ वे जिन्दा हैं और उन पर भी सार्वजानिक चर्चा होनी चाहिए !
         वह मानसिकता ,वह विचारधारा या वह मजहवी कट्टरपन चिन्हित होना चाहिए जिसमें मानवता का वध किया जाता  हो ! समाज में व्यवस्थाओं का सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है | समय समय पर कुछ कारण बनाते हें जिनके कारण अस्थाई परिस्थिति में अपनाई गई विधि या परम्परा दूरगामी दोष बन जाती है ! जैसे बाल विवाह , पर्दा प्रथा एक समय सामाजिक सुरक्षा के लिए अस्थाई रूप से आवश्यक हो गए होगें , मगर यह निरंतरता में सामाजिक दोष हैं ! 
        सवाल यही है कि मजहब के नाम पर हम किसी भी निर्दोष का वध करना ईश्वरीय  कार्य मान लेंगे तो यह अपराध निरंतर होता रहेगा और हो रहा है ! हमारे मजहब के आलावा बाकीं सब मजहब  ईश्वर के शत्रु हैं यह कहना भी पूरी तरह गलत होगा , वह हमारे मजहब को नहीं मानता उसे मार देना पुन्य हो गया ..! क्या बकवास है | सैनिक सिद्धांत  सामाजिक सिद्धांत कभी नहीं होते, इसीलिए समाज में मानवता और समता के व्यवहार को मान्यता है | दया करुना और कल्याण का भाव है | 
         मुख्य विषय यह है कि लादेन जिस विचारधारा के कारण लादेन बना या आतंकवादी बना या क्रूर हत्यारा बना .., क्या हमनें उसको शुद्ध करने के लिए कोई कदम उठाया ? क्या विश्व कि महत्वपूर्ण ताकतों नें इस हेतु कोई कार्य हाथ में लिया !! यदि नहीं तो , अपराधी भले ही मर गया ; अपराधी उत्पन होनें का कारण बचा हुआ है ! अर्थात लादेनियत बची हुई है , जिसे हम कह सकते हैं कि अभी लादेन जिन्दा है !
        आज वैज्ञानिक युग है , शरीर विज्ञानं से लेकर रोग निदान तक सारी  कार्य विधि यह कह रही है कि सम्पूर्ण प्रकृति का , समस्त जीवों का , सभी मानवों का असल निर्माता - निर्देशक एक ही शक्ति है ! शरीर की  समस्त रचना  एकसी है | हम अपनी सोच से  कब तक लोगों को अलग अलग बांटते रहेंगे | सच यह है सबका मालिक एक है ! मूल फैक्ट्री एक है | उसका कर्ता धर्ता एक है | किसी भी निर्दोष  का वध उस मूल मालिक के प्रति अपराध है | अर्थात सोच में सुधार करवानें की जो बहुयामी आवश्यकता है , उस पर भी ध्यान देना चाहिए !
          जब तक आतंकवाद को जन्म देने वाली विचारधारा को परिष्कृत नहीं करवा ओगे , शुद्ध तथा मानवीयता युक्त नहीं करवा ओगे, तब तक लादेन जिन्दा ही रहेगा , उसका नाम ,जात,देश और शरीर भले ही बदल जाये , वह निरंतर अन्यान्य नामों से हमारे बिच आता रहेगा !