गुरुवार, 9 जून 2011

चिदम्बरम जी , संसद से बड़ा जनमत है


- अरविन्द सिसोदिया 
      कांग्रेस की जो पार्टी गाइड लाइन है कि मुसलमानों को डराओ, उनमें भय उत्पन्न करो और वोट ठगों ..! इसी नीति के अंतर्गत पी चिदम्बरम यह कह रहे हैं कि बाबा रामदेव के पीछे संघ का हाथ है ! बाबा के साथ दुर्व्यवहार करके दिल्ली से खदेडनें के पीछे भी यही था कि गैर हिन्दू खुश हो जाएँ ...!! एक एक बयान और कार्यवाही के पीछे कांग्रेस कि तय सुदा साम्प्रदायिकता कि नीति काम कर रही है ! फुट डालो राज करो के कुटिल फार्मूले पर ही अंग्रेजों ने राज किया उसी को कांग्रेस ने अजमाया और आज तक भी जरी है | 
      केंद्रीय गृह मंत्री चिदम्बरम जी अब कह रहे हैं कि जन आन्दोलन कारियों से संसद बड़ी है , यह पूरी तरह सही नहीं है , संसद से बड़ा जनमत है जो संसद को बदलता है ! सामाजिक क्षेत्र से जो आन्दोलन आ रहे हैं , वे चाहे अन्ना हजारे के हों अथवा बाबा रामदेव के ये जनमत जाग्रति का ही काम कर रहे हैं ..! अगले चुनवों में इनके परिणाम सामनें आ जायेंगे | १९७५ में जो जुल्म हुए १९७७ में उसका परिणाम दिख दिया था जनमत नें ! एसा ही बोफोर्स दलाली के बाद हुआ , देश वी पी सिंह के साथ खड़ा हुआ ..! अब भी देख लेना , यह आधीरात का आक्रमण केंद्र में सत्ता परिवर्तन करके रहेगा !!!!! 
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केंद्रीय गृह मंत्री ने सामाजिक संगठनों पर संसदीय लोकतंत्र के महत्व को कम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मैं बात करने और आवाज उठाने के लिए सामाजिक संगठनों का समर्थन करता हूं, लेकिन मैं निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा अपने दायित्व तथा जिम्मेदारियां सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को सौंप देने का समर्थन नहीं करता।" उन्होंने मीडिया को भी आड़े हाथों लिया और कहा, "मुझे लगता है कि मीडिया का एक धड़ा, मैं नहीं जानता किन कारणों से, इन आंदोलनों की कवरेज की प्रतिस्पर्धा में जुटा है। इससे संसदीय लोकतंत्र की अनदेखी होती है। जब कोई केंद्रीय वित्त मंत्री को टेलीविजन पर बहस की चुनौती देता है तो वह इस तथ्य को भूल जाता है कि बहस संसद में होती है और मतदाता संसदीय कार्यवाही देखते हैं तथा समय-समय पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं।"