रविवार, 12 जून 2011

बाबा रामदेव : यह हार नहीं पहला पड़ाव है ...



- अरविन्द सिसोदिया
      बाबा रामदेव का काला धन देश में वापस लाने का अभियान का पहला चरण पूरा हो गया ..! देश ने यह भी देख लिया की काला धन नाम सुनते ही सोनिया सरकार किस तरह बौखला जाती है ..! तमाम संवैधानिक मर्यादाएं भूल जाती है ! ४ जून को दिल्ली में वाही हुआ जो ३/४  जून १९८९ चीनमें प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुआ था| चीन के श्यानामान चौराहे पर 1989 में छात्र आंदोलन हुआ था. 3-4 जून को. चीन ने टैंकों से छात्र आंदोलन कुचल दिया. 
रामदेव पिछले नौ दिन से भ्रष्टाचार और विदेशों में काले धन के मुद्दे को लेकर अनशन पर थे. सरकार के साथ बातचीत नाकाम हो जाने के बाद कांग्रेस ने उनके खिलाफ मुहिम छेड़ दी और उन्होंने एक के बाद एक झूठे और गैर जरुरी बार करते हुए उन्हें आरएसएस का तक  करार दिया.
सरकार पर वार
वहीं बीजेपी ने रामदेव का अनशन खत्म होने पर राहत की सांस ली है लेकिन सरकार पर अपने हमले जारी रखे हैं. बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें खुशी है कि रामदेव ने अहम संतों और आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत की अपीलों पर अपना अनशन तोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता लाल कृष्ण ने पहली बार मई 2009 में काले धन का मुद्दा उठाया और पार्टी ने इसके खिलाफ विशेष मुहिम चलाई.
प्रसाद के मुताबिक, "मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने कोई कदम उठाने के बजाय रामलीला मैदान में दमनकारी कार्रवाई कराई जो सभ्य लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में दमन की सबसे बुरी मिसाल है." रामलीला मैदान में आधी रात को पुलिस ने अनशन पर बैठे रामदेव और उनके साथियों पर कार्रवाई की जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए.
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के मुद्दे पर सरकार के नकारेपन को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, "बीजेपी इन मुद्दों पर कांग्रेस का भंडाफोड़ करती रहेगी और इस बात को सुनिश्चित करेगी कि भ्रष्टाचार के बारे में लोगों के गुस्से को लोकतांत्रिक तरीके से जाहिर किया जाए."
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देहरादून।। बाबा रामदेव ने संत समाज की अपील पर रविवार को नौ दिन से चला आ रहा अपना अनशन तोड़ दिया है। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने बताया कि बाबा रामदेव ने हिमालयन हॉस्पिटल में उनके हाथ से जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। अनशन तोड़ने के बाद बाबा ने कहा कि करप्शन के खिलाफ उनकी लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी।

आखिरी सांस तक जारी रहेगी लड़ाई
बाबा रामदेव के सहयोगी और उनके साथ अनशन पर बैठे आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि बाबा रामदेव ने संत समाज, हरिद्वार के अखाड़ों और अपने करोड़ों भक्तों के आग्रह पर अनशन खत्म करने का निर्णय लिया। बालकृष्ण ने कहा कि मांगें पूरी हुए बगैर बाबा के अनशन तोड़ने को हार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बाबा रामदेव ने अनशन खत्म करने के बाद कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वह आखिरी सांस तक लड़ाई जारी रखेंगे।

बाबा को मनाने पहुंचा था संत समाज
रविवार सुबह आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर तीसरी बार बाबा को मनाने के लिए हिमालयन हॉस्पिटल पहुंचे। उनके साथ धार्मिक गुरु मुरारी बापू और कृपालु महाराज भी बाबा से मिले। हरिद्वार से संतो का जत्था भी बाबा से मिलने आया था। सभी बाबा से अनशन तोड़ने की अपील की। संत मुरारी बापू ने कहा, 'हमने बाबा से अपील की कि आपका संदेश देश के घर-घर तक ही नहीं घट-घट तक पहुंच गया है, इसलिए आप अपना अनशन समाप्त कीजिए। उन्होंने हमारी मांग मान ली।'

नेता भी पहुंचे बाबा को मनाने
रविवार को बाबा रामदेव को मनाने के लिए संत समाज के लोगों से पहले दूसरी पार्टियों के नेता भी पहुंचे। प्रकाश सिंह बादल, ओमप्रकाश चौटाला और सुब्रमण्यम स्वामी ने रविवार सुबह बाबा से मुलाकात की। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा, ' भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन में बाबा अपने उद्देश्य से ज्यादा सफल हुए हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति पूरे देश को जागरूक किया है। सरकार के झुकने या नहीं झुकाने का प्रश्न नहीं है। अब यह भ्रष्ट सरकार हटाने का प्रश्न है।'

रविशंकर ने निभाया वादा
दो दिन से देहरादून में जमे श्री श्री रविशंकर ने शनिवार को कहा था कि अगर बाबा रामदेव अनशन नहीं तोड़ने पर अड़े हैं, तो मेरी भी जिद है कि उनका अनशन तुड़वाकर ही यहां से जाऊंगा। रविवार को रामदेव ने उन्हीं के हाथ से जूस पीकर अपना अनशन खत्म किया। इस तरह श्री श्री ने अपना वादा निभा दिया।
कांग्रेस की अब भी बौखलाहट  
कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा, "यह अच्छी खबर है कि रामदेव ने अनशन तोड़ दिया है." कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने बड़ी सावधानी से इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अनशन तोड़ने का फैसला रामदेव का है और "इससे कांग्रेस का कोई लेना देना नही है. लेकिन यह उनकी सेहत के लिए अच्छा है. उन्हें पहले ही डॉक्टरों की बात सुन लेनी चाहिए थी."
एक अन्य कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि अनशन अब समाधान के बजाय समस्या का हिस्सा बन गए हैं. उनका कहना है, "विरोध के एक बढ़िया तरीके को अस्थिरता का एजेंडा नहीं बनना चाहिए. अब अनशन समाधान के बजाय समस्या का हिस्सा बन गए हैं." उन्होंने दावा किया कि भारत अब उदारवाद के तीसरे दशक में दाखिल हो रहा है और "ऐसे में विरासत से जुड़े कुछ मुद्दों पर रचनात्मक सहयोग की भावना से चर्चा करनी होगी. इसमें व्यवस्था की बेवजह आलोचना से बचना होगा."
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आओ बच्चों तुम्हें दिखाए झाकी घपलिस्तान की.
इस मिट्टी पे सर पटको ये धरती है बेईमान की.
बंदों में है दम, राडिया-विनायकयम्.
बंदों में है दम, राडिया-विनायकम्.

उत्तर में घोटाले करती मायावती महान है
दक्षिण में राजा-कनिमोझी करुणा की संतान है.
जमुना जी के तट को देखो कलमाडी की शान है
घाट-घाट का पानी पीते चावला की मुस्कान है.
देखो ये जागीर बनी है बरखा-वीर महान की
इस मिट्टी पे सर पटको ये धरती है बेईमान की.
बन्दों में है दम...राडिया-विनायकम्.

ये है अपना जयचंदाना, नाज़ इसे गद्दारी पे.
इसने केवल मूंग दला है मजलूमों की छाती पे.
ये समाज का कोढ़ पल रहा, साम्यवाद के नारों पे
बदल गए हैं सभी अधर्मी भाडे के हत्यारे में .
हिंसा-मक्कारी ही अब,पहचान है हिन्दुस्तान की
इस मिट्टी पे सर पटको ये धरती है हैवान की.
बन्दों में है दम...राडिया-विनायकम्.

देखो मुल्क दलालों का, ईमान जहां पे डोला था.
सत्ता की ताकत को चांदी के जूतों से तोला था.
हर विभाग बाज़ार बना था, हर वजीर इक प्यादा था.
बोली लगी यहाँ सारे मंत्री और अफसरान की.
इस मिट्टी पे सर पटको ये धरती है शैतान की.
बन्दों में है दम...नंगे- बेशरम....!

: Pankaj Jha
https://www.facebook.com/jay7feb
द्वारा: ShreshthBharat

विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले......

 मुझे इंटरनेट पर एक बेव साईट मिली , जिसमें काले धन पर  दो अच्छे लेख हैं जो बहुत कुछ  कह रहे हैं .., इन लेखों का खंडन भी नहीं हुआ है ..! लिंक  दिए गए हैं जिन्हें आप स्वंय सीधे खोल सकते हैं ..! सच यह है की काले धन की बात जो भी करेगा वह बाबा रामदेव की तरह खदेड़ दिया जाएगा , क्योंकि यह बड़े नेताओं का माल है .., जेल तो छुट भैय्या जाते हैं ,,,!!

 

http://www.aadhiabadi.com/content A 

करोड़ काला धन स्विस बैंक में!


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सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले भारतीयों के नामों को सार्वजनिक किए जाने के मामले में 19 जनवरी 2011 को एक बार फिर सरकार की जमकर खिंचाई की। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आखिर देश को लूटने वाले का नाम सरकार क्‍यों नहीं बताना चाहती है? बेशर्म मनमोहनी सरकार खीसें निपोरती नजर आई। इससे पहले 14 जनवरी 2011 को भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जमकर फटकार सुनाई थी। अदालत ने पूछा कि विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के नाम सार्वजनिक करने को लेकर सरकार इतनी अनिच्छुक क्यों है?


हम आपको बताते हैं कि सरकार देश को लूटने वाले काले धन जमाखोरों का नाम क्‍यों नहीं बताना चाहती है। वास्‍तव में कांग्रेस के राजपरिवार गांधी परिवार का खाता स्विस बैंक में है। राजीव गांधी ने स्विस बैंक में खाता खुलवाया था, जिसमें इतनी रकम जमा है कि यदि उन नोटों को जलाकर सोनिया गांधी खाना बनाए तो 20 साल तक रसोई गैस खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
चलिए मुद्दे पर आते हैं, हमारे पास क्‍या सबूत है कि राजीव गांधी का बैंक खाता स्विस बैंक में है? सो पढि़ए,
एक स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte के 19 नवम्बर, 1991 के अंक में प्रकाशित एक खोजपरक समाचार में तीसरी दुनिया के 14 नेताओं के नाम दिए गए है। ये वो लोग हैं जिनके स्विस बैंकों में खाते हैं और जिसमें अकूत धन जमा है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी इसमें शामिल है।

यह पत्रिका कोई आम पत्रिका नहीं है. इस पत्रिका की लगभग 2,15,000 प्रतियाँ छपती हैं और इसके पाठकों की संख्या लगभग 9,17,000 है जो पूरे स्विट्ज़रलैंड की व्यस्क आबादी का छठा हिस्सा है
राजीव गांधी के इस स्विस बैंक खुलासे से पहले राजीव गांधी के मिस्‍टर क्‍लीन की छवि के उलट एक और मामले की परत खोलते हैं। डा येवजेनिया एलबट्स की पुस्तक “The state within a state – The KGB hold on Russia in past and future” में रहस्योद्धाटन किया गया है कि राजीव गांधी और उनके परिवार को रूस के व्यवसायिक सौदों के बदले में लाभ मिले हैं। इस लाभ का बड़ा हिस्‍सा स्विस बैंक में जमा है।
रूस की जासूसी संस्‍था KGB के दस्‍तावेजों के अनुसार  स्विस बैंक में स्थित स्‍वर्गीय राजीव गाँधी के खाते को उनकी विधवा सोनिया गाँधी अपने अवयस्क लड़के (जिस वक्‍त खुलासा किया गया था उस वक्‍त कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी व्‍यस्‍क युवा नेता नहीं बने थे) के बदले संचालित करती हैं। इस खाते में 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक हैं जो करीब 2 .2 बिलियन डॉलर होता है। यह 2.2मिलियन डॉलर का खाता तब भी सक्रिय था, जब राहुल गाँधी जून 1998 में वयस्क हुए थे। भारतीय रुपये में इस काले धन का मूल्‍य लगभग 10 ,000करोड़ रुपए होता है।



कांग्रेसियों और इस सरकार के चाहने वालों को बता दें कि इस रिपोर्ट को आए कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन गांधी परिवार ने कभी इस रिपोर्ट का औपचारिक रूप से खंडन नहीं किया है और न ही संदेह पैदा करने वाले प्रकाशनों के विरूध्द कोई कार्रवाई की बात कही है।
जानकारी के लिए बता दें कि स्विस बैंक अपने यहाँ जमा राशि को निवेश करता है, जिससे जमाकर्ता की राशि बढती रहती है। अगर इस धन को अमेरिकी शेयर बाज़ार में लगाया गया होगा तो आज यह रकम  लगभग 12,71 बिलियन डॉलर यानि 48,365 करोड़ रुपये हो चुका होगा। यदि इसे लंबी अवधी के शेयरों में निवेश किया गया होगा तो यह राशि 11.21 बिलियन डॉलर बनेगी. यानि 50,355 करोड़ रुपये हो चुका होगा।
वर्ष 2008 में उत्‍पन्‍न वैश्विक आर्थिक मंदी से पहले यह राशि लगभग 18.66 बिलियन डॉलर अर्थात 83 हजार 700 करोड़ रुपए पहुंच चुकी होगी। आज की स्थिति में हर हाल में गांधी परिवार का यह काला धन 45,000 करोड़ से लेकर 84,000 करोड़ के बीच में होगी।


कांग्रेस की महारानी और उसके युवराज आज अरख-खरबपति हैं। सोचने वाली बात है कि जो कांग्रेसी सांसद व मंत्री और इस मनमोहनी सरकार के मंत्री बिना सोनिया-राहुल से पूछे बयान तक नहीं देते, वो 2जी स्‍पेक्‍ट्रम, कॉमनवेल्‍थ, आदर्श सोसायटी जैसे घोटाले को अकेले अंजाम दिए होंगे? घोटाले की इस रकम में बड़ा हिस्‍सा कांग्रेस के राजा गांधी परिवार और कांग्रेस के फंड में जमा हुआ होगा?


यही वजह है कि बार-बार सुप्रीम कोर्ट से लताड़ खाने के बाद भी मनमोहनी सरकार देश के लूटने वालों का नाम उजागर नहीं कर रही है। यही वजह है कि कठपुतली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जेपीसी (संयुक्‍त संसदीय समिति) से मामले को जांच नहीं करना चाहती, क्‍योंकि जेपीसी एक मात्र संस्‍था है जो प्रधानमंत्री से लेकर 10 जनपथ तक से इस बारे में पूछताछ कर सकता है। यही वजह है कि भ्रष्‍टाचारी थॉमस को सीवीसी बनाया गया है ताकि मामले की लीपापोती की जा सके। सुप्रीम कोर्ट बार-बार थॉमस पर सवाल उठा चुकी है, लेकिन विपक्ष के नेता के विरोध को दरकिनार कर सीवीसी बनाए गए थॉमस के पक्ष में सरकार कोर्ट में दलील पेश करती नजर आती है। क्‍या वजह है कि एक भ्रष्‍ट नौकरशाह को बचाने के लिए संसदीय मर्यादा से लेकर कोर्ट की फटकार तक सरकार सुन रही है?
सरकार के पास ऐसे 50 लोगों की सूची आ चुकी है, जिनके टैक्‍स हैवन देशों में बैंक एकाउंट है। लेकिन इसमें केवल 26 नाम ही सरकार ने अदालत को सौंपे हैं। जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी और जस्टिस एस. एस. निज्जर की बेंच ने 19 जनवरी 2011 को सरकार से पूछा कि इसे सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है? कोर्ट ने कहा कि सभी देशों के सभी बैंकों की सूचनाएं जरूरी हैं। अदालत ने यहां तक कह दिया कि देश को लूटा जा रहा है।
जानकारी के लिए बता दें कि 1948 से 2008 तक भारत ने अवैध वित्तीय प्रवाह (गैरकानूनी पूंजी पलायन) के चलते कुल 213 मिलियन डालर की राशि गंवा दी है। भारत की वर्तमान कुल अवैध वित्तिय प्रवाह की वर्तमान कीमत कम से कम 462 बिलियन डालर है। यानी 20 लाख करोड़ काला धन देश से टैक्‍स हैवन देशों में जमा है।


यदि यह रकम देश में आ जाए तो भारत के हर परिवार को 17 लाख दिए जा सकते हैं। सरकार हर वर्ष 40 हजार 100 करोड़ मनरेगा पर खर्च करती है। इस रकम के आने पर 50 सालों तक मनरेगा का खर्च निकल आएगा। सरकार ने किसानों का 72 हजार करोड रुपए का कर्ज माफ किया था और इसका खूब ढोल पीटा,  इस रकम के आने के बाद किसानों का इतना ही कर्ज 28 बार माफ किया जा सकता है!
क्‍या अभी भी जनता कांग्रेसी राज परिवार को राजा और खुद को प्रजा मानकर व्‍यवहार करती रहेगी? यदि जनता नहीं जगी तो देश तो कंगाल हो ही रहा है, उसकी आने वाली पीढ़ी भी बेरोजगारी, गरीबी से लड़ते-लड़ते ही दम तोड़ देगी... और फिर राहुल गांधी और होने वाले बच्‍चे किसी विदेशी मंत्री को बुलाकर उसे देश की गरीबी दिखाएंगे, मीडिया तस्‍वीर खींचेगी...अखबार और चैनल रात-दिन उसका गुणगान करने में जुट जाएंगे और उधर स्विस बैंक के खाते में गांधी परिवार की आने वाली कई नस्‍लों के लिए धन जमा होता रहेगा...
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भ्रष्‍ट राजनीतिज्ञ व नौकरशाह, 66 हजार अरब स्विस बैंक में


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स्विट्जरलैंड से मिले आंकड़ों के अनुसार विश्व के सभी देशों के काले धन से कहीं ज्यादा अकेले भारत का काला धन स्विस बैंकों में जमा है। स्विस बैंकों में कुल जमा भारतीय रकम 66,000 अरब रुपए (1500 अरब डॉलर) है।
स्विस बैंकिंग एसोसिएशन की है रिपोर्टस्विस बैंकिंग ऐसोसिएशन की 2008 की रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के बाद काला धन जमा करने में रूस (470 बिलियन डॉलर), ब्रिटेन ( 390 बिलियन डॉलर) और यूक्रेन (100 बिलियन डॉलर) का नंबर है। इन देशों के अलावा बाकी विश्व के अन्य सभी देशों का मिला जुला काला धन 300 बिलियन डॉलर है।
कुल विदेशी कर्ज का 13 गुना काला धन है विदेशों में जमाभारत से 1948 से विदेशों में पैसा जमा किया जाता रहा है। स्विट्जरलैंड तो केवल एक देश है, इसके अलावा कई देशों में भारतीयों का काला धन जमा है। ये देश वे देश हैं जहां सरकारें खुद इस तरह की कमाई को जमा करने के लिए प्रोत्साहन देते हैं।
यह काला धन भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, आईएएस, आईपीएस और उद्योगपतियों का माना जाता है। यह रकम भारत पर कुल विदेशी कर्जे का 13 गुना है। हर साल यह रकम तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है।
काला धन आने से हमेशा के लिए दूर हो जाएगी देश की गरीबीभारत में आज भी करीब 45 करोड़ (450 मिलियन) लोग गरीबी रेखा से नीचे का जीवन बिता रहे हैं। उनकी रोजाना की औसत आमदनी 50 रुपयों से कुछ ही ज्यादा है। यदि भारत का विदेशों में जमा काला धन भारत लाया जाता है तो केवल कुछ ही घंटों में देश की काया पलट हो सकती है। न केवल गरीबों का जीवन स्तर सुधरेगा बल्कि विदेशों का सारा कर्ज भी उतर जाएगा।
इनकी पहचान करना है आसान, लेकिन सरकारें खुद रही हैं शामिलभारत से औसतन 80,000 लोग हर साल स्विट्जरलैंड की यात्रा करते हैं और इनमें से 25,000 लोग अक्सर ही इस देश की यात्रा पर जाते हैं। सरकार यदि केवल इन 25,000 लोगों पर ही कड़ी नजर रखे तो काफी कुछ खुलासा हो सकता है। लेकिन सच यह है कि हर सरकार के मंत्री, सांसद व नौकरशाह काली कमाई विदेशों में जमा करने में जुटे रहे हैं, इसलिए कार्रवाई की इच्‍छा किसी में नहीं है। स्विट्जरलैंड सरकार ने काला धन वापस लाने में भारत की मदद नहीं की है, लेकिन यदि भारत सरकार लगातार दबाव बनाए तो भारत को इन भ्रष्ट लोगों की जानकारी मिल सकती है।
इस धन के आने से हो सकता है
* विदेशों का सारा कर्ज उतर जाएगा।
 * यदि पूरे देश पर कोई कर नहीं लगाया जाए तो भी सरकार अपनी मुद्रा को अगले 30 साल तक स्थिर रख सकती है। 
 * 60 करोड़ लोगों को नौकरियां मिल सकती हैं।
 * देश के किसी भी गांव से दिल्‍ली तक चार लेन की सड़क बनाई जा सकती है। बता दें कि इस समय देश में करीब 6 लाख गांव हैं।
 * 500 योजनाओं को हमेशा के लिए नि:शुल्‍क बिजली की आपूर्ति हो सकती है।
 * देश के प्रत्‍येक नागरिक को 60 साल तक हर महीने 2000 रुपए का भत्‍ता मिल सकता है।
 *  देश को कभी भी वर्ल्‍ड बैंक व आईएमएफ से कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगी।