गुरुवार, 30 जून 2011

अमरत्व के नाथ : बाबा अमरनाथ

 श्रीनगर | 

              बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच बुधवार सुबह पवित्र गुफा में प्रथम पूजन के साथ ही 13,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा अमरनाथ की वार्षिक तीर्थ यात्रा शुरू हो गई। पहले दिन शाम पांच बजे तक करीब 9700 यात्री बाबा के दर्शन कर चुके थे। पहले दिन बाबा अमरनाथ के दर्शन करने वालों में अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष और राज्यपाल एनएन वोहरा, राज्य की प्रथम महिला ऊषा वोहरा व बोर्ड के सीईओ आरके गोयल भी थे। गुफा में जब वैदिक मंत्रोच्चारण व शंख की आवाज गूंजी तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। मौसम की खराबी से अधिक यात्रियों को गुफा की ओर रवाना कर देने से बालटाल मार्ग पर कई यात्री फंस गए। आधार शिविर बालटाल पहुंचे कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि बराड़ी मल और संगम टाप के बीच सैकड़ों श्रद्धालु जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, मौसम खराब होने के कारण फंस गए हैं। खराब मौसम के कारण अमरनाथ यात्रा पर जा रहे वाहनों को ऊधमपुर व रामबन में रोक लिया गया। इस बीच, बालटाल से 19 हजार 498 और नुनवन से करीब 13 हजार 652 श्रद्धालुओं का पहला जत्था सुबह पवित्र गुफा के लिए रवाना हुआ। यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि मंगलवार देर शाम को ही लगभग पांच हजार श्रद्धालु पवित्र गुफा और पंचतरणी पहुंच गए थे। सुबह साढे़ सात बजे जब राज्यपाल प्रथम दर्शन के लिए पवित्र गुफा में पहुंचे तो हजारों लोग दर्शन के लिए कतार में लगे थे। प्रथम पूजन संपन्न होने के बाद ही अन्य श्रद्धालुओं को बाबा बर्फानी के दर्शन का मौका मिला। इस मौके पर राज्यपाल ने श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने वहां पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के प्रमुख अधिकारियों के साथ बैठक भी की। वहीं बाबा बर्फानी की दर्शन से लौटे एक श्रद्धालु ने दावा किया कि बाबा बर्फानी के पवित्र हिमलिंग स्वरूप का ऊपरी हिस्सा एक तरफ से आज पतला होता नजर आया। हो सकता है कि मौसम में अचानक आई गर्मी और उम्मीद से कहीं ज्यादा श्रद्धालुओं के पहले ही दिन पवित्र गुफा में पहुंचने से तापमान बढ़ गया हो, जिससे बाबा बर्फानी पिघलने लगे हों।
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अमरत्व के नाथ : बाबा अमरनाथ


मान्यता है कि पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाने के लिए शिव ने जिस निर्जन स्थल का चयन किया था, वही अमरनाथ गुफाहै। आज से अमरनाथ यात्रा आरंभ हो रही है, इस अवसर पर जानिए इस यात्रा का माहात्म्य..
एक पौराणिक आख्यान है कि मां पार्वती ने एक बार भगवान शिव से उनके मुंडमाला पहनने का कारण पूछा। शिव ने कहा कि जब भी तुम जन्म लेती हो, मैं इसमें एक मुंड और जोड लेता हूं। इस पर पार्वती सोचने लगीं कि साक्षात शक्ति होते हुए भी मुझे बार-बार जन्म लेना पडता है, परंतु भगवान शिव अजर-अमर हैं। मां पार्वती शिव से उनके अमरत्व का रहस्य जानने को व्याकुल हो उठीं। भगवान शिव नहीं चाहते थे कि उनके अलावा कोई और अमरत्व के रहस्य सुने, इसलिए वे ऐसे निर्जन स्थान की तलाश करने लगे, जहां कोई न हो। तब उन्हें मिली अमरनाथ गुफा।इस बार अमरनाथ यात्रा 29जून से शुरू होकर श्रावण पूर्णिमा अर्थात 13अगस्त तक चलेगी।
भौगोलिक स्थिति
समुद्र तल से 13600फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफाजम्मू-कश्मीर के उत्तर-पूर्व में स्थित है। 16मीटर चौडी और लगभग 11मीटर लंबी यह गुफाभगवान शिव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। गुफामें बनने वाला पवित्र हिमलिंगशुक्ल पक्ष के दौरान बढने लगता है, जबकि कृष्ण पक्ष में चंद्रमा के आकार के साथ ही इसका आकार भी घटने लगता है।
ऐतिहासिक महत्व
कल्हणकी ऐतिहासिक पुस्तक राजतरंगिणीमें अमरनाथ गुफाका उल्लेख मिलता है। इसका अस्तित्व 12वींसदी से पहले का माना जाता है, परंतु मौजूदा दौर में इसकी खोज मुसलमान गडरियेबूटा मलिक ने की थी। उसने सर्वप्रथम इस गुफामें प्राकृतिक हिमलिंगबनने की खबर सबको दी। आज तक बूटा मलिक के परिवार को अमरनाथ पर चढने वाले चढावे का एक हिस्सा दिया जाता है।
आध्यात्मिक आभास
सावन के महीने में भक्तों का सैलाब उमड पडता है। आस्था, उल्लास, उत्सव और सेवा का समागम एक साथ दिखाई देता है। यात्रा शुरू होने से पहले ही मंदिरों का शहर जम्मू साधुओं का डेरा बन जाता है।
यात्रा मार्ग
यात्रा जम्मू से शुरू होती है। इसके दो मार्ग हैं। पहला मार्ग पहलगामसे, तो दूसरा बालटालसे शुरू होता है। श्रीअमरनाथश्राइनबोर्ड यात्रियों की सुरक्षा और सुगमता के लिए पहलगाममार्ग से यात्रा करने की सलाह देता है। यह मार्ग लंबा, परंतु बालटालकी तुलना में कम जोखिम भरा है।
जम्मू से पहलगाम315किलोमीटर की दूरी पर है। जहां एसआरटीसीकी बसों और निजी टैक्सियों से पहुंचा जा सकता है। पहलगामसे चंदनबाडी16किलोमीटर, चंदनबाडीसे पिस्सु टॉप 3किलोमीटर, पिस्सु टॉप से शेषनाग 9किलोमीटर, शेषनाग से पंचतरणी12किलोमीटर और पंचतरणीसे गुफाका रास्ता 6किलोमीटर का है।
वहीं, दूसरे मार्ग में जम्मू से ऊधमपुर,काजीगुंड,अनंतनाग, श्रीनगर और सोनमर्गहोते हुए बालटालपहुंचा जा सकता है। बालटालसे पवित्र गुफामहज 14किलोमीटर की दूरी पर है। बालटालसे 2किलोमीटर पर दोमेल,दोमेलसे 5किलोमीटर पर बरारीमार्ग, यहां से संगम 4किलोमीटर और संगम से गुफामात्र 3किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सद्भाव का संगम
श्री अमरनाथ श्राइनबोर्ड की सदस्य प्रो. वेद कुमारी घई अमरनाथ यात्रा पर दिखने वाले धार्मिक सद्भाव से अभिभूत हैं। वे कहती हैं कि यात्रा से जुडे लोगों का धार्मिक सद्भाव देखकर मुझे बहुत खुशी होती है। वे चाहे पालकी और घोडे वाले हों या फिर वहां टेंट लगाने और कंबल बांटने वाले, सभी अमरनाथ यात्रा की व्यवस्था देख रहे होते हैं। हालांकि वे सभी दूसरे धर्म के लोग होते हैं, लेकिन वे भी वर्ष भर इस यात्रा का इंतजार करते हैं।
हर इंसान में दिखे भगवान
जम्मू निवासी ऋतु शर्मा अमरनाथ यात्रा के संदर्भ में अपने अनुभव बांटते हुए भावुक हो जाती हैं, वे कहती हैं, वर्ष 2009में हम आठ लोग यात्रा के लिए निकले थे। हमने गलती यह की कि आधिकारिक यात्रा शुरू होने से पहले ही यात्रा पर निकल पडे। हमें बालटालमें एक और समूह मिलने वाला था। उसी के पास हमारे कंबलों, खाने, बिस्तर आदि का इंतजाम था। यूं समझिए कि हम बिना किसी तैयारी के खाली हाथ यात्रा पर निकल पडे थे। बालटालपहुंचने से पहले ही रात के 11बज गए। सेना ने वहां बैरियर लगाया हुआ था। उन्होंने हमें बैरियर से आगे नहीं जाने दिया। तापमान शून्य के आसपास था। ठंड से हम ठिठुर रहे थे। हमारे पास न खाना था न पानी। एक-दूसरे को दोष देने के अलावा हम और कुछ नहीं कर पा रहे थे। पुरुष तो सोने की तैयारी करने लगे, लेकिन हम तीनों औरतों को डर, ठंड और भूख के कारण नींद नहीं आ रही थी। दूर तक फैला सुनसान अंधेरा हमें और भी डरा रहा था। इतने में दूर से हेडलाइट चमकती हुई नजर आई। एक ट्रक आ रहा था। सेना के जवान ने उसे भी बैरियर पर रोक दिया। दूर से हमें सिर्फ इतना समझ आ रहा था कि वे लोग भी आगे जाने की गुजारिश कर रहे हैं, पर उन्हें आगे नहीं जाने दिया जा रहा। और फिर ट्रक वहीं साइड में रुक गया। पहले तो हमें डर लगा, लेकिन फिर ट्रक से एक-एक कर सामान उतरने लगा और आवाज आने लगी, आओ जी आओ.. लंगर लग गया.. पहिले भगतांनूंखिलाओ.. आओ जी आओ.. ट्रक से उतरे आदमियों ने टाट बिछाई, कडाही-पतीले उतारे, वहीं चूल्हा जलाया और सब दौड-दौडकर अपने-अपने काम में लग गए। उस सुनसान, कंपा देने वाली रात में जहां हम बिल्कुल खाली हाथ थे, वहां हमने आलू-मटर की सब्जी और गर्मागर्म पूडियांखाई। हमारी सेवा में लगा हर आदमी मुझे भगवान शिव का अवतार लग रहा था। उस रात मुझे लगा कि हमें भेजने वाला भी वही था, रोकने वाला भी वही और अंत में हमारे लिए अन्न-पानी और बिस्तर देने वाला भी वही था। सुबह हमारे जागने से पहले ही वह ट्रक वहां से रवाना हो चुका था।



भयग्रस्त प्रधानमंत्री

सच यह है की देश  के सबालों से यह प्रधानमंत्री डरा हुआ है | 


- अरविन्द सिसोदिया 
बहुत दिनों बाद एकबार फिर प्रधानमंत्री सच और झूठ मिला कर बोले , मानलो भई में ही प्रधानमंत्री हूँ ..! यह सच है कि मनमोहन सिंह जी को प्रधानमंत्री सोनिया गांधी ने ही बनाया है ! बस  एक बार सिंह सहाब लोकसभा चुनाव लड़े और हार गए , इसके बाद कभी भी लोकसभा चुनाव हार के डर से नहीं लड़े !! राज्य सभा से ही संसद में पहुचते हैं !! प्रधानमंत्री नरसिंह राव के कार्यकाल में वित्तमंत्री रहते हुए उन्होंने सोनिया जी कि बहुत सेवा की थी , उसकी मेवा उन्हें प्रधानमंत्री पद के रूप में मिली ! बहुमत तो सोनिया जी के पास है मनमोहन सिंह पर तो है नहीं और यह भी सच है कि जब तक सोनिया जी कि कृपा है तब तक ही वे प्रधानमंत्री हैं !! वे एक उच्चस्तरीय नौकरशाह ही तो रहे हैं , कभी राजनीती में थे भी नहीं सो वे इतने समय प्रधानमंत्री रह कर भी अपनी राजनैतिक जमीन तैयार नहीं कर सके ! सोनियाजी जब चाहें और कहें मूषक भवः तभी ये भूतपूर्व हो जायेंगे !! राजनैतिक स्वाभिमान या स्वभाव कभी था ही नहीं जो अब आये !  
अब देखिये खजाना लुट रहा है तो लुट ही रहा है ...
अंधेरगर्दी हो रही है तो हो ही  रही है .....
सीबीआई दुरूपयोग हो रहा है तो हो ही रहा है ....
राज्यों से भेदभाव हो रहा है तो हो ही रहा है ....
मंत्री और पार्टी नेता कुछ भी कह रहे हैं तो कह ही रहे हैं ...
मतलब कोई आपका नियंत्रण ही नहीं है ..?????
मंत्री और पार्टी नेता भी आपकी बजाये सोनियाजी की ही तीमारदारी में हैं ! जब आपकी कोई सुनाने वाला नहीं है, आपको समझनें वाला नहीं है तो फिर आप सरकार के मुखिया भी कब हो ? पद पर बैठाना और काम करके दिखाना , दोनों में फर्क है !! फ़्रांस ब्रिटेन के मुकाबले अधिक मजबूत देश था मगर कमजोर और दिशाहीन सरकारों के कारण, ब्रिटेन से पिछड़ता ही चला गया !! आज निश्चित रूप से देश समस्याओं के समाधान में पिछड़ गया है |  कहीं कोई नियंत्रण नहीं है | महंगाई रोज सुरसा के मुह की तरह बढ़ जाती है | कालाधन देश में वापस आये और देशहित में उसका उपयोग हो इसमें क्या बुराई है , सरकार के पास नाम हैं उन्हें उजागर क्यों नहीं करते ? चोर का नाम छुपाना क्या बात हुई ??
सरकार जन प्रतिनिधियों से चुनी जनता कि होती है , उसमें और पार्टी में नैतिक फर्क होता है , 
सरकार देश की मुखिया है न्याय करना , समस्याओं का समाधान करना , कानून का राज्य चलाना और लोक कल्याणकारी होना यह कर्तव्य हैं | यह नहीं है तो सरकार नहीं है !! आप एक प्रधान मंत्री तरह काम करो और अपने मंत्रीमण्डल को अपनी नीतियों के हिसाब से चलाओ तब ही तो प्रधानमंत्री माने जाओगे !!! हर छेः  महीनें में मीडिया के आगे आकर यह कहनें से काम थोड़े ही चलेगा की में प्रधानमंत्री हूँ..!
दुर्भाग्यपूर्ण
देश का एक प्रधानमंत्री एक बंद कमरे में कुछ मीडिया संपादकों से बात  करे और उस बात को कोई और संपादक अन्य मीडिया वालों को  बताये यह पहली बार देखा !! सरकार के पास कई सरकारी चॅनल हैं उनका खुद का सुचना और जनसंपर्क तंत्र है !  यह वार्ता सीधी देश देखता तो उसे शायद प्रधानमंत्री पर फक्र होता ! सीधी न सही संपादित करके प्रसारित करवा देते !! इस घटना क्रम से तो यह सन्देश  गया की प्रधानमंत्री डरा और भयग्रस्त  है, जो जनता से बात करनें में डर रहा है  !! सच यह है की देश  के सबालों से यह प्रधानमंत्री डरा हुआ है | 
फेसबुक पर एक प्रतिक्रिया .........
उजड़ गया फिर कर रहे, 'मनमोहक' संवाद!
टिड्डी दल ने गुलशन को, खूब किया बर्बाद!!
खूब क्या बर्बाद, नहीं मिल सकती माफ़ी!
बचा-खुचा भी हज़म करो, होगा नाकाफ़ी!!
दर्ज़ हुई इतिहासों में, सारी करतूतें!
सबके काले हाथ, नहीं हैं शेष अछूते!!
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रामदेव हमारे लिए एक खतरा : स्विस बेंक
स्विस बैंक एसोसिएशन और स्विस सरकार ने बताया है की स्विस बैंको में जमा धन में पन्द्रह लाख करोड डॉलर की भयंकर कमी आयी है .. और स्विस इकोनोमी को खतरा पैदा हो गया है .. वहा के सारे अखबारों और टीवी डिबेट में इसे "रामदेव इफेक्ट " कहा जा रहा है . स्विस बैंको में सबसे ज्यादा काला धन भारत से जमा होता है फिर चीन और रूस का नम्बर आता है .. बाबा रामदेव के अभियान से प्रभावित होकर चीन और रूस में भी काले धन के वापस लेन की जोरदार मुहीम चल रही है. चीन सरकार अरब देशो में हुई क्रांति से डरकर तुरंत ही एक कानून बना कर स्विस सरकार से सारा ब्योरा माँगा है और काले धन विदेश में जमा करने वालो को मृतुदंड देने की क़ानूनी बदलाव किया है, रूस में भी पिछले कई दिनों से लोग काले धन के खिलाफ लेनिन स्क्वायर पर प्रदर्शन कर रहे थे आखिरकार रुसी सरकार ने भी २ महीने में सारे काले धन को वापस लेन का देश की जनता को लिखित आश्वाशन दिया है .. रूस के सामाजिक कार्यकर्ता और रूस में काले धन के खिलाफ आन्दोलन चला रहे बदिमिर इलिनोइच ने बाबा रामदेव को प्रेरणाश्रोत मानकर अपना आन्दोलन चलाया ..
स्विटरज़रलैंड के लगभग सभी अखबारों जैसे स्विस टुडे, स्विस इलेस्ट्रेटेड, और टीवी चनेलो ने बाबा रामदेव को एक "खलनायक " के रूप में बता रहे है . इधर भारत में भी कांग्रेस पार्टी और सरकार उपरी मन से चाहे जो कुछ भी कहे लेकिन उसे भी अब जनता के जागरूक होने का डर सताने लगा है . कांग्रेस इस देश की टीवी चनेलो और अखबारों को तो खरीद सकती है लेकिन भारत में तेजी से उभर रही न्यू मीडिया [ वेब पोर्टल , फेसबुक , ट्विटर ] पर चाहकर भी वो प्रतिबन्ध नहीं लगा सकती .. एक सर्वे में पाया गया है की इन्टरनेट पर कांग्रेस के खिलाफ जोरदार अभियान चल रहा है और ये अभियान कोई पार्टी नहीं चला रही है बल्कि इस देश के जागरूक और शिछित युवा चला रहे है जिनका किसी भी राजनितिक पार्टी से कोई लेना देना नहीं है ..