शनिवार, 30 जुलाई 2011

जिन्ना सनकी थे,पागल थे - माउंटबैटन


- अरविन्द सीसौदिया
माउंटबैटन - जिन्ना सनकी थे,पागल थे,बिलकुल असंभब..!  मैं नहीं समझता हम उनके मरने का इंतजार करते.....न हमारे पास समय था, न हम निश्चित थे,लेकिन हम उनके साथ दूसरों की तरह बहस कर सकते थे। मैंने सोचा था कि मैं एक ऐसे आदमी के साथा पेश आ रहा हमं जो हमेशा बना रहेगा। जिसका लक्ष्य पाकिस्तान है और मैं उसे इस लक्ष्य से हटा नहीं सकता था। एक पल मान लीजिए कि अगर सत्ता के हस्तांतरण के पहले जिन्न मर जाते तो अपने सबसे बउे दुश्मन के हट जानें से कांग्रेस पार्टी निश्चित ही राहत की सांस लेती। बाकी लोगों को सिर्फ जिन्न की छाया माना जाता था। तब हम ऐसे आाधार पर काम करते जहां कांग्रेस को कहीं जादा देनें के लिए तैयार हो जाता और दूसरे लोग उसे स्विकार करते। भयंकर बात है कि हमें कुछ भी नहीं बताया गया। (पृष्ठ 57)
माउंटबैटन - ....अगर जिन्ना दो वर्ष पहले अपनी बीमारी से मर जाते तो हम भारत को एक रख सकते थे। वही थे जिन्होंने इसे असम्भव बना दिया था। जब तक में जिन्ना से मिला नहीं , मैं सोच भी नहीं सकता था कि कितनी असम्भव स्थिति है। (पृष्ठ 60)
जिन्ना- नहीं। मैं भारत का एक हिस्सा नहीं बनना चाहता। हिन्दू राज्य के अधीन होने से तो सब कुछ खो देना पशंद करूंगा। (पृष्ठ 61)
माउंटबैटन - ....जिन्ना की नीचता सब पर जाहीर हो गई। वह सचमुच नीच था। मेरी तो उससे इसलिये निभ गई कि मेरी सबसे निभ जाती हे। उसने एक भी कोशिश नहीं की । मेरे साथ उसने जो सबसे बुरा किया वह यह कि मुझसे कहता रहता कि आप मत जाइए, यहीं बनें रहीए इसलिये कि अगर में चला जाउगा तो उनकी सम्पत्ती उनको नहीं दी जायेगी। कहते हैं कि सत्ता हस्तांतरण के बाद भी में इन्चार्ज बना रहूं।
माउंटबैटन - आजादी के बाद एक वाइसराय के अन्र्तगत दो गर्वनर जनरल नहीं रह सकते थे। अतः तय हुआ कि सत्ता सौंचने के दौरान में दोनों राज्यों का गर्वनर जनरल रहूं। दोनों पक्षों ने यह बात खामोशी से मान ली। मेरे और जिन्ना के स्टाफों में बातचीत हुई। पहले भारतीयों ने सुझाव दिया था कि मैं उनके साथ रहूं। यह आश्चर्य चकित कर देने बाली बात थी कि वे मुझे अपने साथ चाहते हैं।
मैंनें कहा कि अगर जिन्ना भी चाहते हैं कि मैं उनके साथ रहूं तो तरकीब यह होगी कि मैं पाकिस्तान का भी गर्वनर जनरल बनूं। दो घरों में एक ही समय में रहना कष्टकर होता लेकिन में कोशिश करने के लिए तैयार था। लेकिन जिन्ना ने  यहां भी चकमा दिया। आखिरी मौके पर उस आदमी ने जो पाकिस्तान कर शासन करना चाहता था, प्रधानमंत्री का पद न लेकर राज्य के संवैधनिक प्रमुख ( गर्वनर जनरल ) का पद ले लिया जिसके संविधान के अंतर्गत कोई प्रशासकीय अधिकार नहीं था।
माउंटबैटन - ...और इस तरह पाकिस्तान का टूटना पहले से ही निश्चित कर दिया,क्योंकि सम्पत्ती और आबादी पूर्वी बंगाल में थी, वे दूसरों से नफरत करते थे,वे अलग हो गये पूरी तरह। 
........ उत्तर  के छोटे छोटे कबीले भी बिखर जायेंगे। अगर अमरीका उनकी मदद नहीं  करेगा तो जीना मुश्किल हो जायेगा उनका। जिस दिन अमरीका हाथ खींच लेगा , ये लोग खत्म हो जाएंगे। ये कैसे बचेंगे में नहीं जानता। सेना,वायु सेना के बावजूद से भारत के रहमों करम पर रहेंगे। मेंने यह सब जिन्ना को समझाने की कोशिश की ,किन्तु  कोई असर नहीं हुआ। 
( एक पुस्तक “ माउन्टबैटन और  भारत विभाजन” है, जो कि प्रसिद्ध लेखक लैरी कांलिन्स और दामिनिक लैपियर ने लिखी है इसका मुख्य आधार उनके द्वारा ही लिखी गई “ फ्रीडम ऐट मिडनाइट ” का ही संझिप्त रूप है। से ये अंश लिये गये है। यह 2005 में अनु प्रकाशन ,जयपुर से प्रकाशित एवं डा. शाहिद अहमद द्वारा सम्पादित है।
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कश्मीर पर पाकिस्तान का पहला हमला भी जिन्ना की सनक थी....
क्या कोई भरोसा करेगा कि जिस कश्मीर समस्या ने पिछले 62 सालों से भारत की नाक में दम कर रखा है उसका मूल कारण पाकिस्तान के कायदा-ए-आजम जिन्ना के कश्मीर में छुट्टी मनाने के आवेदन को अस्वीकार करना था।

एक नादानी जीवन भर का संकट ..

एक नादानी जीवन भर का संकट ..
जयपुर में एक सरकारी  कमर्चारी ने अपनी सारी उम्र की कमाई,आखिरी दिन आखिरी छड़ों में गँवा दी ....!! इस आदमी का बुढ़ापा ख़राब हो गया , न जानें कितने चक्करों के बाद यह सुलझेगा या फंसेगा, भगवान जानें..!! 
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जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने देवस्थान विभाग के एक मैनेजर को 11 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए शुक्रवार को उसके ऑफिस में रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मैनेजर ने यह रिश्वत एक समाजसेवी से किसी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में ली थी।

एसीबी के एएसपी आशाराम चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी भंवरसिंह राजपुरोहित है। वह पुरानी विधानसभा के सामने रामचंद्र जी के मंदिर में स्थित देवस्थान विभाग में मैनेजर है। इस संबंध में निवाई महंत का रास्ता रामगंज बाजार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गालाल पांचाल ने एसीबी में भंवरसिंह राजपुरोहित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, कि वह करीब एक माह पहले नर नारायण सेवा समिति ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए भंवरसिंह से मिला था।
काफी दिनों तक दुर्गालाल को चक्कर कटवाने के बाद भंवरसिंह ने उसे सेवा पानी की व्यवस्था करने को कहा। बाद में, भंवरसिंह ने दुर्गालाल से ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में 11 हजार रुपयों की मांग की। इस पर परिवादी दुर्गालाल गुरुवार को देवस्थान के कार्यालय में पहुंचा और भंवरसिंह को ऑफिस में 1 हजार रुपए दे आया। इस बीच दुर्गालाल ने एसीबी में इसकी शिकायत दर्ज करा दी।  
सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने पर एएसपी आशाराम चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की। शुक्रवार दोपहर को दुर्गालाल रिश्वत के 10 हजार रुपए लेकर भंवरसिंह को देने उनके ऑफिस पहुंचा। रिश्वत की राशि देने के बाद दुर्गालाल ज्योंही ऑफिस से बाहर आया। तभी एसीबी की टीम ने भंवरलाल को रंगे हाथों पकड़ लिया।
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जयपुर. देवस्थान विभाग के एक मैनेजर को एसीबी ने रिटायरमेंट की विदाई पार्टी से चंद घंटे पहले दफ्तर में घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। मैनेजर ने ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने के लिए 11 हजार रु. लिए थे। एक हजार रुपए वह पहले ले चुका था। एसीबी के एएसपी आशाराम चौधरी ने बताया कि पुरानी विधानसभा के सामने रामचंद्रजी के मंदिर में स्थित देवस्थान विभाग में मैनेजर भंवरसिंह राजपुरोहित के खिलाफ निवाई महंत का रास्ता रामगंज बाजार निवासी दुर्गालाल पांचाल ने एसीबी में शिकायत की थी।

पांचाल ने बताया था कि करीब एक माह पहले नर नारायण सेवा समिति ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए वे भंवरसिंह से मिले थे। काफी चक्कर कटवाने के बाद भंवरसिंह ने ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में 12 हजार रु. की रिश्वत मांगी। पांचाल ने गुरुवार को भंवरसिंह को हजार रुपए दे दिए। शुक्रवार दोपहर पांचाल 11 हजार रु. लेकर भंवर के ऑफिस पहुंचा। वहां एक तरफ भंवर के रिटायरमेंट की विदाई पार्टी की तैयारी चल रही थी, वहीं दूसरी ओर वह रिश्वत ले रहा था।

पांचाल दोपहर 3 बजे जैसे ही रिश्वत देकर ऑफिस से बाहर आए, एसीबी की टीम ने भंवरलाल को पकड़ लिया।

गिड़गिड़ाने लगा, कहा- मैंने नहीं ली रिश्वत 

रिश्वत के रुपयों को भंवरसिंह ने ऑफिस की अलमारी में रख दिया था। एसीबी टीम पहुंची तो वह गिड़गिड़ाने लगा। उसने कहा—मैंने रुपए नहीं लिए। मेरे पास रुपए कहां हैं। इस पर एसीबी ने भंवरलाल के हाथ धुलवाए तो गुलाबी रंग छूटने लगा। फिर अलमारी से रुपए बरामद कर अलमारी जब्त कर ली।

काम कराने का वादा किया था 

मैनेजर भंवरसिंह की दुर्गालाल से बातचीत

पांचाल : आपके कहे अनुसार मैं बाकी रकम ले आया हूं। अब ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा ना।

भंवरलाल : आज मेरा रिटायरमेंट है। तुम्हारा काम करवा दूंगा।

पांचाल : साहब, आपका रिटायरमेंट हो जाएगा तो मेरे काम का क्या होगा? आप मेरी मुलाकात किसी और अधिकारी से करा दो।

भंवरलाल : काम पूरा होने की आप चिंता मत करो। मैं यहां आता रहूंगा। आपका काम हो जाएगा। आप तो कोई और काम हो तो भी बता देना।