सोमवार, 15 अगस्त 2011

अन्ना को जगह नहीं ...खुद के लिए मेला लगाया ...


कांग्रेस ने पिछले ही साल अपना ८३ वां राष्ट्रिय महा अधिवेशन दिल्ली के पास बुराड़ी गाँव में हुआ .., तीन दिवसीय इस महा अधिवेशन में लगभग २० हजार लोग सम्मिलित हुए.., १८ से २० दिसंबर २०१० के इस अधिवेशन में हजारों चार पहिया वाहन आये..मेला लगा रहा .., मगर इसी कांग्रेस को देखिये कि वह अन्ना हजारे  को अनशन के लिए जगह तक नहीं दे रही ..!! यह अघोषित आपातकाल है जो भी कोंग्रेस सरकार के विरोध में कुछ बोलेगा , उसी के खिलाफ झूठा मुक़दमा बना देंगे या कोई दुष्प्रचार प्रारंभ कर देते हैं ...!!! कोंग्रेस के अधिवेशन में पुलिस दुमदवाये थे ...मगर यही अन्ना की टीम के पीछे दुश्मन की तरह पीछे पड़ गई है...  
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साम्प्रदायिकता को देश के समक्ष खतरा करार दिया था।
कांग्रेस महाधिवेश शुरू होने से ऐन पहले राहुल गांधी से जुड़े कथित विकीलीक्स खुलासे का भी सत्र पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है जिसकी आरएसएस और भाजपा ने कड़ी आलोचना की है। राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर को कट्टरपंथी हिन्दू संगठनों से लश्कर ए तैयबा के समान खतरा बताया था। कांग्रेस ने इस विषय पर स्पष्टीकरण जारी किया है जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि राहुल ने रोमर से बातचीत की थी कांग्रेस ने हालांकि कहा कि इसके तथ्यों की जांच के बाद कुछ कहा जायेगा और विकीलीक्स के प्रत्येक खुलासे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने पर अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के सवा सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस तंबुओं के शहर में पार्टी का महाधिवेशन आयोजित किया गया है। इस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के सभी आमोखास वहीं रहेंगे। सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद यह पार्टी का तीसरा महाधिवेशन है।
दिल्ली में 32 वर्ष के अंतरराल पर कांग्रेस महाधिवेशन हो रहा है पिछला महाधिवेशन 1978 में हुआ था जिसकी अध्यक्षता इंदिरा गांधी ने की थी। कांग्रेस की स्थापना के सवा सौ साल के इतिहास में दिल्ली में शनिवार से उसका छठा महाधिवेशन शुरू हो गया।आजादी के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में उसका यह तीसरा महाधिवेशन है। राष्ट्रीय राजधानी में 32 वर्ष के अंतराल के बाद कांग्रेस महाधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है।
महाधिवेशन की तैयारियों के सिलसिले में बुराड़ी में अस्थायी तौर पर निर्मित हो रहा यह तम्बुओं का शहर कांग्रेस के झंडे के रंग में रंग गया है। यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं के लिए अटेच बाथरूम वाले तंबुओं के विशेष कक्ष तैयार किये गये हैं।

प्रधानमंत्री सहित सरकार से जुड़े अनेक वरिष्ठ लोगों के वहां प्रवास करने को देखते हुए इसे अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जोड़ा गया है जिससे कि सरकार का आवश्यक काम काज भी वहीं से चलता रहे। प्रदेश कांग्रेस एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि इस महाधिवेशन की विषयवस्तु कांग्रेस की सेवा एवं समर्पण के 125 वर्ष रखा गया है।
इस महाधिवेशन में पिछले 125 वर्ष में देश के विकास में कांग्रेस के योगदान को प्रदर्शित करने के साथ भविष्य में राष्ट्र सेवा के बारे में पार्टी की रणनीति को पेश किया जायेगा। आयोजन स्थल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए 500 तंबुओं के आशियाने बनाये गए है। महिला कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए विशेष प्रबंध किये गए हैं और उनके लिए अलग से टेंटों के ही 80 आवास क्षेत्र बनाये गए हैं। दस बिस्तरों वाला एक अस्थायी अस्पताल भी आयोजन स्थल पर बनाया गया है। दिसंबर में सिहरा देने वाले ठंडक को देखते हुए आयोजन स्थल एवं कक्षों में रूम हीटर एवं अन्य उपकरण लगाये गए हैं। कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में पार्टी के लगभग 8000 प्रतिनिधियों के अलावा जिला एवं ब्लाक स्तर के कार्यकर्ताओं के आने की उम्मीद है। आयोजन स्थल पर करीब पांच हजार लोगों के रूकने की व्यवस्था की गई है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के रूकने के लिए आयोजन स्थल के अतिरिक्त होटलों गेस्ट हाउस धर्मशालाओं में भी व्यवस्था की गई है। सांसदों से भी अपने सरकारी आवास पर कार्यकर्ताओं के रूकने का प्रबंध करने को कहा गया है। आयोजन स्थल पर एक वृहद कांफ्रेंस हाल बनाया गया है जहां करीब 14 हजार कुर्सियां रखी जा सकती है।
इसके अलावा इस मुख्य कक्ष से बाहर एक बड़ा टेलीविजन स्क्रीन लगाया गया है जहां लोग कार्यवाही देख सकते हैं। महाधिवेशन में शामिल होने आने वाले लोगों के लिए आयोजन स्थल पर खानपान का विशेष प्रबंध किया गया है और इनके लिए चार फूड कोर्ट बनाये गए हैं। यहां तीन दिनों में करीब 20 हजार लोगों के खानपान की व्यवस्था है।
महाधिवेशन के दौरान लोगों के खानपान की विशेष व्यवस्था की गई है। चूंकि आयोजन में शामिल होने के लिए देश के कोने कोने से कार्यकर्ता आ रहे हैं इसलिए हर क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए भोजन की व्यवस्था की गई है। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल जैसे क्षेत्र से आने वाले कार्यकर्ताओं के लिए इडली, डोसा, उत्थपम जैसे दक्षिण भारतीय व्यंजन के अलावा पंजाब राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार से आने वाले लोगों के लिए उत्तर भारतीय खाना परोसा जायेगा। पूवोर्त्तर क्षेत्र से आने वाले प्रतिनिधियों के लिए भी क्षेत्र विशेष को ध्यान में रखते हुए भोजन का प्रबंध किया जा रहा है। महाधिवेशन के दौरान व्यवस्था की जिम्मेदारी कांग्रेस सेवादल को सौंपी गई है। इसके तहत 76 पुरूष और 25 महिला दस्ते तैनात किए जायंगे। प्रत्येक दस्ते में 12 सदस्य होंगे।

अन्ना हजारे ने राजघाट में गांधी जी की समाधि के समाने मौन धारण कर लिया


नई दिल्ली। गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके समथर्कों को 16 अगस्त से दिल्ली के जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में आमरण अनशन करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद स्थिति में नया मोड़ आ गया है। अन्ना हजारे ने राजघाट में गांधी जी की समाधि के समाने मौन धारण कर लिया है। उनके साथ उनके समर्थक भी साथ हैं। इस बीच दिल्ली पुलिस भी वहां पहुंच गई है। इस बीच कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि कहीं अन्ना आज से ही अपना अनशन न शुरू कर दें। अन्ना के राजघाट पर पहुंचने के बाद फिर से माहौल गरमा गया है। राजनीतिक सरगर्मी फिर से तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस अपने दल-बल के साथ राजघाट पर पहुंच गई है।

पुलिस का अनशन की अनुमति देने से इंकार

गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके समथर्कों को 16 अगस्त से दिल्ली के जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में आमरण अनशन करने की अनुमति नहीं दी गई। अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों द्वारा पुलिस की ओर से रखी गई कुछ शर्तों को मानने से इंकार करने के बाद दिल्ली पुलिस ने यह कदम उठाया है।

संयुक्त पुलिस आयुक्त सुधीर यादव ने कहा कि इसके बावजूद यदि अन्ना हजारे व उनके समर्थक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में अनशन करने की कोशिश करेंगे तो वह गैरकानूनी होगा। यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘हमनें उन्हें अनुमति देने से इंकार किया है।’’ ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने अन्ना हजारे के समक्ष 22 शर्तें रखी थी, जिनमें अनशन स्थल पर 5000 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने और तीन से अधिक दिनों तक अनशन जारी रखने पर प्रतिबंध भी शामिल था।

प्रतिबंधों से अन्ना हजारे पक्ष नाराज
गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के 16 अगस्त से प्रस्तावित आमरण अनशन के मद्देनजर सरकार की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों पर सामाजिक संगठन के सदस्यों ने नाराजगी जताई है। अन्ना हजारे के सहयोगी व सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि ये प्रतिबंध सरकार के तानाशाही और मनमाने रवैये को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे का अनशन किसी भी सूरत में स्थगित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सरकार के आदेशों का अनुसरण करते हुए अन्ना हजारे के अनशन को रोकने में लगी हुई है।

केजरीवाल ने कहा कि पुलिस ने आयोजकों से कहा है कि आयोजन स्थल पर 5000 से अधिक लोग नहीं इकट्ठा होंगे, 50 से अधिक गाड़ियां नहीं खड़ी की जा सकेंगी, टेंट को फैलाया नहीं जा सकेगा और अनशन के दौरान सरकारी डॉक्टर ही अन्ना हजारे के स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि ये सभी शर्तें न्यायोचित नहीं हैं और अकारण भी हैं। केजरीवाल ने कहा कि कानून व व्यवस्था के मद्देनजर कुछ प्रतिबंध जायज हैं लेकिन उनका यह कहना कि टेंट फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, चौंकाने वाला है। टेंट से कैसे कानून व व्यवस्था बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘बारिश हो रही है। ऐसे में लोग कहां जाएंगे। और सिर्फ 50 गाड़ियों को खड़ा करने की ही अनुमति क्यों। यह सरकार का मनमाना रवैया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे आपातकाल जैसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं।’’

अन्ना को जनजीवन बाधित न करें : कांग्रेस

केंद्रीय कानून व न्याय मंत्री सलमान खुर्शीद ने सोमवार को कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों को विरोध करने का पूरा अधिकार है लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि कानून व व्यवस्था का पालन हो और उससे जनजीवन बाधित न हो। खुर्शीद ने यहां पत्रकारों से चर्चा में कहा, ‘‘सब कुछ नियम व कायदों के भीतर होना चाहिए। आज की परिस्थितियों में बहुत बड़े स्तर पर जनसमूह के इकट्ठा होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कहीं वह अनियंत्रित हो गया तो।’’

उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि कानून व व्यवस्था बनी रहे और जनजीवन प्रभावित न हो। उन्होंने कहा, ‘‘यदि वे प्रदर्शन और विरोध करना चाहते हैं तो यह उनका अधिकार है। लेकिन आम जीवन प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करना सरकार व सम्बंधित विभागों की जिम्मेदारी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि हम सत्ताधारी दलों को भी रैली के लिए अनुमति लेनी होती है और हमें भी प्रतिबंधों का सामना करना होता है। हम उसे स्वीकार भी करते हैं।’’