मंगलवार, 27 सितंबर 2011

श्री अम्बाजी की आरती



        श्री अम्बाजी की आरती          

सर्वमंगल मांग्लयै , शिवे सर्वार्थसाधिके |
शरण्ये त्र्यम्िके गौरी , नारायणी नमोऽस्तुते ॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।| जय अम्बे गौरी ॥

माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को |मैया टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको|| जय अम्बे गौरी ॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे| मैया रक्ताम्बर साजे
रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे|| जय अम्बे गौरी ॥

केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी| मैया खड्ग कृपाण धारी
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी|| जय अम्बे गौरी ॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती| मैया नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति|| जय अम्बे गौरी ॥
चण्ड मुण्ड शोणित बीज हरे| मैया शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे|| जय अम्बे गौरी ॥

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी| मैया तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी|| जय अम्बे गौरी ॥

चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों| मैया नृत्य करत भैरों
बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू|| जय अम्बे गौरी ॥

तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता| मैया तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता|| जय अम्बे गौरी ॥

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी| मैया वर मुद्रा धारी
मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी|| जय अम्बे गौरी ॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती| मैया अगर कपूर बाती
माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती|| बोलो जय अम्बे गौरी ॥

माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे| मैया जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे|| जय अम्बे गौरी ॥
चण्ड मुण्ड शोणित बीज हरे| मैया शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे|| जय अम्बे गौरी ॥

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी| मैया तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी|| जय अम्बे गौरी ॥

चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों| मैया नृत्य करत भैरों
बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू|| जय अम्बे गौरी ॥

तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता| मैया तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता|| जय अम्बे गौरी ॥

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी| मैया वर मुद्रा धारी
मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी|| जय अम्बे गौरी ॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती| मैया अगर कपूर बाती
माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती|| बोलो जय अम्बे गौरी ॥

माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे| मैया जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे|| जय अम्बे गौरी ॥
देवी वन्दना.....या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

नौरात्रा : राम रावण काल से पूर्व से .....

नौरात्रा शव्द ही नव रात्रा हो गया है.., परम शक्ती की आराधना का यह त्योहार जिसे हम शारदे नौरात्रा कहते हैं .., की भूमिका राम रावण युद्ध में भी सामनें  आती  है ..राम और रावण दोनों  नें ही युद्ध के दौरान देवी के अनुष्ठान किये थे ...और दोनों ही और से इन अनुष्ठानों को  विफल  करनें  की कोशिस  का भी जिक्र है...राम के प्रमुख योद्धा    हनुमानजी  ,रावण का अनुष्ठान भंग करने सफल  रहे ,जबकि रावण राम का अनुष्ठान भंग नहीं कर सका | अर्थार्त देवी पूजा का  इतिहास बताता है की यह राम रावण काल से पूर्व से ही चली आरही है ...!! इसा कर्ण कई जगह इस दौरान रामायण के सुन्दर कांड का पाठ ही किये जाने का विधान है...!!
  
शारदीय नवरात्र
दुर्गा देवी
Durga Devi
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्र का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । नवरात्र में देवी माँ के व्रत रखे जाते हैं । स्थान–स्थान पर देवी माँ की मूर्तियाँ बनाकर उनकी विशेष पूजा की जाती हैं । घरों में भी अनेक स्थानों पर कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती पाठ आदि होते हैं । नरीसेमरी में देवी माँ की जोत के लिए श्रृद्धालु आते हैं और पूरे नवरात्र के दिनों में भारी मेला रहता है । शारदीय नवरात्र आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक यह व्रत किए जाते हैं। भगवती के नौ प्रमुख रूप (अवतार) हैं तथा प्रत्येक बार 9-9 दिन ही ये विशिष्ट पूजाएं की जाती हैं। इस काल को नवरात्र कहा जाता है। वर्ष में दो बार भगवती भवानी की विशेष पूजा की जाती है। इनमें एक नवरात्र तो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक होते हैं और दूसरे श्राद्धपक्ष के दूसरे दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन शुक्ल नवमी तक। आश्विन मास के इन नवरात्रों को 'शारदीय नवरात्र' कहा जाता है क्योंकि इस समय शरद ऋतु होती है। इस व्रत में नौ दिन तक भगवती दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ तथा एक समय भोजन का व्रत धारण किया जाता है। प्रतिपदा के दिन प्रात: स्नानादि करके संकल्प करें तथा स्वयं या पण्डित के द्वारा मिट्टी की वेदी बनाकर जौ बोने चाहिए। उसी पर घट स्थापना करें। फिर घट के ऊपर कुलदेवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन करें तथा 'दुर्गा सप्तशती' का पाठ कराएं। पाठ-पूजन के समय अखण्ड दीप जलता रहना चाहिए। दुर्गा अष्टमी तथा नवमी को भगवती दुर्गा देवी की पूर्ण आहुति दी जाती है। नैवेद्य, चना, हलवा, खीर आदि से भोग लगाकर कन्या तथा छोटे बच्चों को भोजन कराना चाहिए। नवरात्र ही शक्ति पूजा का समय है, इसलिए नवरात्र में इन शक्तियों की पूजा करनी चाहिए।
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नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें । यह पर्व साल में दो बार आता है। एक शारदीय नवरात्रि, दूसरा है चैत्रीय नवरात्रि। नवरात्रि के नौ रातो में तीन हिंदू देवियों - पार्वती,लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं ।
नौ देवियाँ है :-
  * श्री शैलपुत्री
  • श्री ब्रह्मचारिणी
  • श्री चंद्रघंटा
  • श्री कुष्मांडा
  • श्री स्कंदमाता
  • श्री कात्यायनी
  • श्री कालरात्रि
  • श्री महागौरी
  • श्री सिद्धिदात्री
शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की । तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं। इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं । नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।
नवदुर्गा और दस महाविधाओं में काली ही प्रथम प्रमुख हैं। भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य, दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दस महाविधाएँ अनंत सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं। दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति हैं, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं। देवता, मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु हैं, इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है। सभी देवता, राक्षस, मनुष्य, गंधर्व इनकी कृपा-प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं।

चीन - एक सुरक्षा संकट, विस्तारवादी ड्रेगन से



क्या आप जानते है ?
देेश की 43183वर्ग किलोमीटर भूमि पर चीन का अवेैध कब्जा है ।
चीन हमारे अरूणाचंल प्रदेश की 90000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अपना दावा पूरी दादागिरी से जता रहा है ।   
चीन से लगती सम्पूर्ण सीमा पर चीन ने नो मेन्स एरिया ( सीमा का मानव रहित क्षेत्र) में आगे तक अतिक्रमण कर अपनी सीमा चैकियां स्थापित कर ली है । 
चीन ने भारतीय सीमा पर परमाणु मिसाईल्स तैनात कर दी है जिनकी जद में लगभूग पूरा भारत आ जाता है  ।
भारत को चारों ओर से घेेरने की दृष्टि से पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश ,नेपाल एवं श्रीलंका में चीनी सैन्य अड्डे यां सैनिकों की उपस्थिति है । 
भारत की अति संवदेनशील स्थलों पर विविध परियोजनाओं के टेण्डर अत्यन्त नीची दरों पर भरकर देश के अन्दर अपनी उपस्थिति बडा रहा है । 
चीन द्वारा जम्मू-कश्मीर को अपने नक्शों में भारत का अंग नहीं  दिखाया जाता । अरूणांचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बताया जाता है अरूणांचल प्रदेश  के नागरिकों को बिना वीसा-पासपोर्ट के चीन आने का आमऩ्त्रण दिया जाता है । 
चीन का रक्षा बजट 150 अरब डालर हेै जबकि भारत का मात्र 36 लाख अरब डालर । 
दैनंदिन उपयोग की लगभग प्रत्येक घटिया वस्तु को भारत के बाजारों में सस्ते मूल्य  में पहुंचा कर स्थानीय उद्योगों को बन्द करवाने की स्थिति तक पहुंचा दिया है ।      (चीन से भारत को निर्यात 3 लाख करोड रूपया वार्षिक हैं । )


परिणाम क्या हो सकते है ?
  सीमाओं पर हमारी अनदेखी एवं केन्द्र सरकार की ढुलमुल नीति के परिणाम स्वस्प अरूणंचल प्रदेश , लद्दाख के सीमान्त प्रदेश गहन संकट में है । 
  भारत के सभी पडौसी देशों पर चीनी सैन्य उपस्थिति से भारत सभी ओर से एक साथ संकट की स्थिति में । 
  ब्रम्हपुत्र नदी पर चीन द्वारा अपने क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय विरोध के बावजूद बडे बान्धों के निर्माण के फलस्वरूप असम एवं सम्बद्ध राज्यों में सूखे की स्थिति की आशंका । 
  सस्ते एवं घटिया उत्पादों के भारी आयात से हमारे यहां के लघु एवं मध्यम उद्योग शीघ्र ही बन्द होने के कगार पर । 
हम क्या कर सकते है ?
* सक्रिय एवं जागरूक नागरिक होने के नाते  हम चीनी एत्पादों का उपयोग तत्काल बन्द करने का दृढ संकल्प लें । 
* अगर चीन के उत्पादों की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खपत ( जिसका बडा हिस्सा भारत द्वारा आयात किया जाता हेै ) बन्द हो जाती है तो उसके सारे कारखाने छ से 12 माह में ही ओवर केपेसिटी का शिकार  हो, बन्द करने की स्थिति में आ जायेगें । चीन की अर्थव्यवस्था में 60 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से ही प्राप्त होता है । 
* निकट भविष्य में देश के सन्मुख सबसे बडा संकट   चीन की विस्तारवादी नीति से ही हो सकता है । जबकि केन्द्र सरकार इस आसन्न संकट से उदासीन सी दिखती है । विभिन्न संगठनों द्वारा इस सन्दर्भ में सरकार पर दबाव डालने के लिये आयोजित धरनों, प्रदर्शनों , गोष्ठियों में सक्रियता से भाग लें । 
सावधान - चीन आज तिब्बत,हांगकांग,ताईवान देशों पर कब्जा जमा चुका है । ड्रेगन की विस्तारवादी कुदृष्टि एक बार पुनः कश्मीर,अरूणांचल प्रदेश ओर लेह पर अब भी हम नहीं जगे तो ये भी गंवाने पड सकते है ।