सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

Karwa Chauth : 15 Oct 2011



* Karwa Chauth is a festival celebrated by all married Hindu women. They observe a fast for the long life of her husband and in the evening, they adorn bridal makeup.
* Karwa Chauth is a festival that provides an opportunity for all married women to get close to their in-laws. All married women observes fast that ensures the well-being, prosperity and longevity of their husbands. This Hindu festival has a cultural and social significance and all Indians celebrate this festival with great enthusiasm.
* The festival of Karwa Chauth is celebrated mostly by North India to All India. This event is growing bigger with each passing day. In addition to the traditional items such as henna, beauty products and fashionable clothes, the demand of special eateries are also gearing up. Nowadays, Karwa Chauth is more of fun than a serious festival.

करवाचौथ के दिन बिल्कुल दुल्हन जैसी




* करवाचौथ के दिन पूजा और विधियों की शुरुआत सुबह सूरज निकलने से पहले शुरू हो जाती है। महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा करती हैं। रात्रि में चांद निकलने पर छलनी से चांद को देखकर और अघ्र्य चढ़ाने के बाद ही करवाचौथ का व्रत तोड़ा जाता है।
*  जरूरी नहीं है कि सभी महिलाएं करवाचौथ के दिन ब्यूटीशियन से मेकअप करवाएं ही, पर वो इनमें से कुछ बॉडी ट्रीटमेंट तो जरूर करवाती हैं। जिन महिलाओं का पहला करवाचौथ होता है, उनके लिए यह मौका लगभग शादी के दिन सजने-संवरने जैसा ही होता है। कई महिलाएं करवाचौथ के दिन बिल्कुल दुल्हन जैसी दिखना चाहती हैं।’
* करवाचौथ से संबंधित कई कथाएं प्रचलित हैं। आज इस त्योहार का मूल भाव भले वही पुराना हो, पर मायने  बदल गए हैं। अब यह पति के लिए अपना प्यार जताने का पर्व बन गया है। .अधिकांश महिलाओं के लिए उनकी जिंदगी पहला करवाचौथ सबसे खास होता है।
* अपने पति की लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य की कामना के लिए? उनके प्रति अपने प्यार को जताने के लिए या फिर परंपरा को कायम रखने के लिए? इस व्रत को रखने का कारण चाहे जो हो, पर यह सालों से भारत की महिलाओं द्वारा रखे जाने वाले लोकप्रिय व्रतों में से एक है।
* करवाचौथ वैसे तो उत्तर भारत की हिंदू महिलाओं द्वारा रखा जाता है, पर पिछले कुछ सालों से अन्य क्षेत्र की महिलाएं भी इस व्रत को रखने लगी हैं। यह काफी हद छोटे परदे के धारावाहिकों व बॉलीवुड की फिल्मों का प्रभाव है।
* करवाचौथ से जुड़ी दो कथाएं प्रचलित है। एक कथा यम व सावित्री से जुड़ी हुई है और दूसरी कथा करवा और यम से संबंधित है। दोनों कथाओं के मूल में पतिव्रता पत्नी है, जो अपने तप और व्रत के बल पर अपने पति के प्राण यम से छीन कर लाने में सफल होती हैं।
* मुझे भी दिखना है खूबसूरत!
करवाचौथ के मौके पर जहां एक ओर सभी ब्यूटी पार्लर की बुकिंग फुल हो जाती है, वहीं कॉस्मेटिक सजर्न भी अचानक से बहुत ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं। ऐसे ब्यूटी ट्रीटमेंट्स जिनमें ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती है, उनकी मांग करवाचौथ के आते ही बढ़ जाती है। इन ट्रीटमेंट्स में बोटोक्स, डर्मल फिलर इन्जेक्शन और लेजर व कैमिकल पीलिंग सबसे प्रमुख है। अधिकांश महिलाएं, ब्यूटी एक्सपर्ट्स के पास अपनी ब्यूटी से संबंधित परेशानियों का तुरंत हल पाने के लिए आती हैं। चूंकि लेजर और कैमिकल पीलिंग का असर तुरंत नजर आने लगता है, इसलिए एक खास वर्ग की महिलाओं के बीच इन ट्रीटमेंट्स की मांग ज्यादा है। पर, इन ट्रीटमेंट्स को अपनाने वाली महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है। ‘कैमिकल पीलिंग करवाने के लिए महिलाएं आती तो हैं, पर बॉडी ट्रीटमेंट के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या इसकी तुलना में कहीं ज्यादा होती है। बॉडी ट्रीटमेंट्स में बॉडी मसाज, थ्रेडिंग, पेडिक्योर, मेनिक्योर, वैक्सिंग, फेशियल और ब्लीच आदि शामिल हैं। जरूरी नहीं है कि सभी महिलाएं करवाचौथ के दिन ब्यूटीशियन से मेकअप करवाएं ही, पर वो इनमें से कुछ बॉडी ट्रीटमेंट तो जरूर करवाती हैं। जिन महिलाओं का पहला करवाचौथ होता है, उनके लिए यह मौका लगभग शादी के दिन सजने-संवरने जैसा ही होता है। कई महिलाएं करवाचौथ के दिन बिल्कुल दुल्हन जैसी दिखना चाहती हैं।’

जगजीत सिंह - मेरा गी त अमर कर दो








* जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर में हुआ था. पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे.जगजीत का परिवार मूलतः पंजाब के रोपड़ ज़िले के दल्ला गांव का रहने वाला है.मां बच्चन कौर पंजाब के ही समरल्ला के उट्टालन गांव की रहने वाली थीं.

* लाखों दिलों को अपनी नज्मों और गजलों से छूनेवाले जगजीत सिंह की गायकी में वह जादू था कि दुनिया भर में उनके प्रशंसकों की तादात खासी है.70 साल के जगजीत सिंह अपनी मखमली आवाज और गजलों के लिए जाने जाते थे. उन्होंने कई फ़िल्मों के लिए भी गीत गाए.

* पद्मभूषण से सम्मानित गायक एकमात्र ऐसे गायक हैं जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं को अपने दो एल्बम नयी दिशा (1999) और संवेदना (2002) में अपनी आवाज दी.

* होठों से छू लो तुम..फिल्म अर्थ में गाया ये गीत लोगों के ज़ेहन से कभी नहीं उतरेगा.

* तुमको देखा तो ये ख्याल आया...कोई समझेगा क्या राज़ ए गुलशन..अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें...कल चौदहवीं की रात थी ...होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है ...वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी.....

कहां तक गिनाया जाए गज़ल सम्राट जगजीत सिंह ने जो गा दिया वो अनमोल हो गया.

जगजीत सिंह को सभी संगीत को चाहने वालों की तरफ से शत शत श्रद्धासुमन..

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होठों से छू लो तुम

मेरा गी त अमर कर दो

बन जाओ मीत मेरे

मेरी प्रीत अमर कर दो,

होठों से छू लो तुम
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न उम्र की सीमा हो

न जन्म का हो बन्धन,

जब प्यार करे कोई

तो देखे केवन मन,

(नई रीत चला कर तुम

ये रीत अमर कर दो) - २

होठों से छू लो तुम

मेरा गी त अमर कर दो
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आकाश का सूनापन

मेरे तन्हा मन में,

पायल छन्काती तुम

आ जाओ जीवन में,

सासें दे कर अपनी

संगीत अमर कर दो,

संगीत अमर कर दो,

मेरा गीत अमर कर दो
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जग ने छीना मुझसे

मुझे जो भी लगा प्यारा,

सब जीता किये मुझसे

मैं हरदम ही हारा,

तुम हार के दिल अपना

मेरी जीत अमर कर दो

होठों से छू लो तुम

मेरा गी त अमर कर दो

बन जाओ मीत मेरे

मेरी प्रीत अमर कर दो

राहुल बताओ , कांग्रेस राज में कहा गई भंवरी




भवंरी का परिवार पूछे ,
कहां है भंवरी राहुल बताओ......
कांग्रेस के ड्रामेंबाज महासचिव राहुल गांधी ने राजस्थान के दंगाग्रस्त गोपालगढ में नाटकबाजों की तरह पहुंच कर....कुछ पीडितों को सांत्वना दी...और पुलिस अधिकारी की तरह घटना स्थल का मौका मुआयना किया....मगर बे 1 सितम्बर से गाायब कर संभवतः मार डाली गई भंवरी देवी के बच्चों को सांत्वना देने नहीं गये। क्यों कि उसमें उनकी पार्टी के कददावर नेता तथा केबिनेट मंत्री महीपाल मदेरणा का नाम आ रहा हे। राहुल में वास्तविक साहनुभूती है तो भंवरी के बच्चों के पास पहुच कर उनकी पीडा दूर करें। सुख दुख पूछने में भी राजनैतिक फायदा देखने वाले मात्र अभिनेता या नाटकबाज ही कहलाते हैं।



बोलेरो मिली, भंवरी के नाम से रजिस्टर्ड पर भंवरी की नहीं!

पालनपुर (गुजरात)/जोधपुर/. एएनएम भंवरी देवी के अपहरण में प्रयुक्त शहाबुद्दीन की बोलेरो गाड़ी गुजरात में अंबाजी के पास काणोदर कस्बे में बरामद की गई है। यह बोलेरो एक माह से मिस्त्री के गैराज में पड़ी थी। 
आबूरोड में छिपने के दौरान उसने यह बोलेरो ठीक कराने के बहाने इस गैराज में छोड़ी थी। फिर सांचौर के रास्ते बाड़मेर की ओर फरार हो गया। शहाबुद्दीन का अब तक सुराग नहीं लगा है। भंवरी का अपहरण 1 सितंबर को हुआ था। 
शहाबुद्दीन 4 सितंबर की सुबह आबूरोड पहुंचा था। वह 7 सितंबर तक वहां छिपा रहा। फिर मिल्कमैन कॉलोनी में रहने वाली अध्यापिका उसके पास पहुंची और दोनों 10 सितंबर तक साथ रहे। इस दौरान ये दोनों 9 सितंबर को गुजरात के बनास कांठा जिले के काणोदर कस्बे में गए। 
अपहरण में प्रयुक्त इस बोलेरो को ठीक कराने के बहाने एक मिस्त्री के पास छोड़ दिया। करीब 25 हजार का खर्चा बताने पर शहाबुद्दीन ने उसे 10 हजार रुपए एडवांस भी दिए थे। पुलिस रिमांड पर चल रहे बलदेव से हुई पूछताछ के बाद पुलिस ने यह बोलेरो बरामद की है।
अध्यापिका ने किया पुलिस को गुमराह :
अध्यापिका अपने पति को छोड़ कर कुछ सालों से शहाबुद्दीन के साथ रह रही हैं। उसने पहले पुलिस को बताया था कि वह 10 सितंबर को आबूरोड से जोधपुर आ गईं और शहाबुद्दीन हैदराबाद चला गया। इस सूचना पर पुलिस की टीम हैदराबाद भेजी गई थी। अब काणोदर के मिस्त्री ने बताया कि शहाबुद्दीन, अध्यापिका और दो बच्चे यहां आए थे। 
बोलेरो छोड़ कर वे किराए की इनोवा गाड़ी से सांचौर गए, वहां से रोडवेज बस में सवार होकर बाड़मेर की ओर चले गए थे। अध्यापिका यह बात जानती थी, मगर उसने पुलिस को हैदराबाद की जानकारी देकर गुमराह किया।

बोलेरो दूसरी भंवरी के नाम से रजिस्टर्ड
काणोदर में बरामद हुई शहाबुद्दीन की बोलेरो भी भंवरी देवी के नाम से रजिस्टर्ड है, मगर यह भंवरी देवी खारिया निवासी नवलसिंह रलिया की पत्नी है। शहाबुद्दीन ने 2009 में यह बोलेरो एग्रीमेंट पर खरीदी थी। बोलेरो फाइनेंस पर ली हुई थी और किश्तें अभी बाकी हैं, इसलिए शहाबुद्दीन के नाम नहीं हुई थी। पुलिस ने एग्रीमेंट की कॉपी भी जब्त कर ली है।

राहुल  बताओ , कांग्रेस राज में कहा है भंवरी......?

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गोपालगढ़ पहुचे राहुल ,मुसलमानों को लुभानें की कोशिस 
गोपालगढ़। राजस्थान के गोपालगढ़ में उपजी सांप्रदायिक हिंसा पर मरहम लगाने में अब कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी भी कूद पड़े हैं। करीब एक महीने बाद राहुल गांधी ने आज अचानक गोपालगढ़ का दौरा करके हालात का जायजा लिया। राहुल के इस दौरे को कांग्रेस की अल्पसंख्यकों को लुभाने की मुहिम के तौर पर देखा जा रहा है।
राजस्थान के गोपालगढ़ कस्बे में उपजी सांप्रदायिक हिंसा पर राजनीतिक रोटी सेंकने का दौर बदस्तूर जारी है। इसी कड़ी में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी अचानक गोपालगढ़ पहुंच गए। उनके इस दौरे की भनक कांग्रेस की राज्य सरकार तक को नहीं थी। यही वजह थी कि इस दौरे में राज्य सरकार का कोई भी प्रतिनिधि नजर नहीं आया। शायद राहुल को एहसास था की स्थानीय मुसलमान गहलोत सरकार और उनके नुमाइंदों से कितना नाराज हैं।
मालूम हो कि इससे पहले कांग्रेस की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल ने घटना स्थल का दौरा करके अपनी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंपी थी।
उधर बीजेपी पहले ही अपना प्रतिनिधिमंडल भेजकर राज्य सरकार की भूमिका को कठघरे में खड़ा कर चुकी है। लांकि दबे छिपे सुरों में कांग्रेस के कई नेता भी ये मानते हैं कि राज्य सरकार सही तरीके से मामले को संभाल नहीं पाई और हालात अचानक बिगड़ गए। दो समुदायों के बीच हुई हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई थी जबकि दर्जन भर घायल हुए थे। अब करीब एक महीने बाद हो रहे राहुल गांधी के दौरे को बीजेपी ज्यादा तूल देती नजर नहीं आती।
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अर्थात राहुल को गोपालगढ़ जीतनी ही चिंता भंवरी की भी करनी चाहिए और कोंग्रेस के राष्ट्रिय महा सचिव ने नाते यह बताना चाहिए की भंवरी कहाँ है....?
भवंरी का परिवार पूछे ,
कहां है भंवरी राहुल बताओ......
कांग्रेस के ड्रामेंबाज महासचिव राहुल गांधी ने राजस्थान के दंगाग्रस्त गोपालगढ में नाटकबाजों की तरह पहुंच कर....कुछ पीडितों को सांत्वना दी...और पुलिस अधिकारी की तरह घटना स्थल का मौका मुआयना किया....मगर बे 1 सितम्बर से गाायब कर संभवतः मार डाली गई भंवरी देवी के बच्चों को सांत्वना देने नहीं गये। क्यों कि उसमें उनकी पार्टी के कददावर नेता तथा केबिनेट मंत्री महीपाल मदेरणा का नाम आ रहा हे। राहुल में वास्तविक साहनुभूती है तो भंवरी के बच्चों के पास पहुच कर उनकी पीडा दूर करें। सुख दुख पूछने में भी राजनैतिक फायदा देखने वाले मात्र अभिनेता या नाटकबाज ही कहलाते हैं।