मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

भुखमरी : दुनिया की एक चौथाई आबादी भारत में

'ऑन द ब्रिंक : हू बेस्ट प्रिपयर्ड फॉर ए क्लाइमेट एंड हंगर क्राइसिस'


हमारे प्रधान मंत्री बड़े अर्थ शास्त्री हैं उन्हें छोटी छोटी जरुरत भी नहीं जुटा पा रही जनता नहीं दिख रही ...बड़े बड़े घोटालों से जो फुर्शत नहीं है... विश्व की एक चोथाई भूखा मारी की कगार पर खडी जन संख्या उन्हें बिचलित नहीं कर पा रही.., इस का एक ही मतलव है की हमारे प्रधान मंत्री असंवेदनशील हैं...

जलवायु परिवर्तन और भुखमरी का खतरा झेलने वाले 21 विकासशील देशों में भारत को सातवें स्थान पर रखा गया है। यह खुलासा 10 octbar 2011 सोमवार को एक नए अध्ययन में किया गया है। गैरसरकारी संगठन एक्शनएड द्वारा किए गए अध्ययन 'ऑन द ब्रिंक : हू बेस्ट प्रिपयर्ड फॉर ए क्लाइमेट एंड हंगर क्राइसिस' में भारत को पाकिस्तान और नाइजीरिया से ऊपर रखा गया है। अध्ययन में कहा गया है कि विश्व के सामने आज तीन प्रमुख चुनौतियां हैं- जलवायु परिवर्तन, संसाधन का अभाव और खाद्य मूल्य में अस्थिरता।
एक्शनएड के कार्यकारी निदेशक संदीप चचरा ने कहा कि भुखमरी के कगार पर जीवनयापन कर रहे दुनिया की एक चौथाई आबादी भारत में रहती है। अगर यहां हालात में सुधार होता है तो इससे वैश्विक स्तर पर गरीबी और भुखमरी कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के एक तिहाई कुपोषित बच्चे भारत में हैं।

हमें भंवरी चाहिए-राजस्थान हाईकोर्ट

bhanwari case



तो कोर्ट की निगरानी में होगी मामले की जांच
जोधपुर। अपह्रत एएनएम भंवरी देवी मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने ११ ओक्ट्बर  २०११ मंगलवार को एक बार फिर राजस्थान राज्य की सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने भंवरी देवी के पति अमरचंद की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार को पूरी तरह विफल करार देते हुए कहा कि प्रदेश के इतिहास में ऎसी नाकारा सरकार कभी नहीं देखी। 


कोर्ट ने पुलिस को भंवरी देवी को शीघ्र बरामद कर अदालत में पेश करने के आदेश दिया। न्यायाधीश गोविंद माथुर एवं न्यायाधीश एन के जैन की खंडपीठ ने कहा कि मामले की सीबीआई से जांच कराने की कोई जरूरत नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। 


खंडपीठ ने कहा कि हमें पुलिस पर भरोसा है लेकिन राज्य सरकार पर नहीं है। मामले में राज्य सरकार बहुत ही कमजोर तरीके से कार्रवाई कर रही है तथा आरोपियों को बचाने एवं मामले के तथ्यों को छुपाने का प्रयास कर रही है, इसलिए अब यह उचित होगा की मामले की सुनवाई प्रतिदिन करके न्यायालय निगरानी रखे। 


न्यायालय ने कहा कि सरकार मामले में कितनी गंभीर है इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि अतिरिक्त महाधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित होने के बजाए लोक अभियोजक पैरवी करने आ रहे है।  राज्य सरकार ने पुलिस को नाकारा साबित करने का प्रयास किया है जिससे पुलिस के कर्मठ अधिकारियों का मनोबल गिर रहा है। इससे बड़ा पलायनवाद का उदाहरण नहीं हो सकता है कि राज्य सरकार आंखें मूंद कर काम कर रही है तथा एक मंत्री की छवि को बचाने में लगी हुई है। 




खंडपीठ ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को हवा में लहराते हुए कहा कि आपकी जांच रिपोर्ट तो कूड़े में फैंकने लायक है। राज्य सरकार ने पुलिस बल को नाकामयाब मानते हुए मात्र दस दिन में जांच सीबीआई को देने का फैसला कैस कर दिया यदि ऎसा है तो सभी मामले सीबीआई को ही सौंप देने चाहिए। हमारी सुरक्षा में भी पुलिसकर्मी तैनात है और उन पर हमें कैसे भरोसा होगा। न्यायालय ने कहा कि जांच चाहे सीबीआई करे या राज्य पुलिस, जांच लगातार होनी चाहिए तथा हमें भंवरी चाहिए। 


मामले को रफादफा करने के प्रयास किए जा रहे है। खंडपीठ ने कहा कि बलिया को पकडने गई पुलिस की सूचना भंवरलाल को पहले ही कैसे मिल गई और वह फरार हो गया। इसके अलावा जांच में सामने आए सभी व्यक्तियों से पुलिस ने ठीक से पूछताछ नहीं की। मामले की 13 अक्टूबर को फिर सुनवाई की जाएगी।





लालकृष्ण आडवाणी की जन चेतना यात्रा शुरू


वर्त्तमान सरकार की भ्रष्टाचार में संलिप्तता और भयावह मंहगाई के कारण देश में अचानक सभी राजनैतिक दलों के प्रति अविश्वास उत्पन्न हो गया है..! बात यहीं खत्म नहीं होती , बल्कि वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था को लुटेरी और भ्रष्ट होने की जन धारणा बन गई..,जबकि यह कृत्य कांग्रेस नेतृत्त्व वाली यू पी ए सरकार का है..उनके भ्रष्टाचार हिमालय जैसे बड़े हैं .., विश्व में इससे बड़ा कोई एकाध ही भ्रष्टाचार होगा..! इन परिस्थितियों में लाल कृष्ण अडवानी जी की रथ यात्रा कम से कम राजनेतिक अविश्वाश को दूर करने और देश के सामने एक प्रभावी विकल्प रखनें के लिए उचित कदम है....
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भ्रष्टाचार के खिलाफ देशभर में बने माहौल के बीच बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बिहार के सिताब दियारा से अपनी जनचेतना यात्रा शुरू कर दी। उन्होंने दावा किया कि यह यात्रा सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए है। यात्रा का मकसद देश और सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश देना है।

यात्रा को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, लेकिन इससे पहले नीतीश ने इशारों में साफ कर दिया कि वह इसलिए इस यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए आए हैं, क्योंकि यह यात्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ है। यात्रा 20 नवंबर को दिल्ली में रैली के साथ समाप्त होगी।

1990 से लेकर अब तक लालकृष्ण आडवाणी 5 पांच बार रथ यात्रा निकाल चुके। मंगलवार से शुरू हो रही जन चेतना यात्रा अडवाणी की पिछले 21 सालों में छठी रथ यात्रा है।

लालकृष्ण आडवाणी की जन चेतना यात्रा शुरू हो चुकी है। यह यात्रा 23 राज्यों और चार केन्द्र शासित क्षेत्रों से गुजरते हुए 38 दिन में करीब 7600 किलोमीटर का सफर तय करेगी। यात्रा के दौरान वह अपने सहयोगियों के साथ रथ के अलावा कई बार हवाई यात्रा भी करेंगे करेंगे।

जनचेतना यात्रा से पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश से भ्रष्टाचार मिटना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन नहीं व्यवस्था परिवर्तन होना चाहिए। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार के कारण पूरे देश में लोगों में अनास्था है, विश्वास का अभाव है जिसे बदलने की जरूरत है। इसी माहौल को बदलने के लिए यात्रा निकालने की बात आडवाणी ने कही।

जयप्रकाश नारायण: सम्पूर्ण क्रांति के जनक




कांग्रेस को केंद्र की सत्ता से विदा करने वाले प्रथम राजनेता : जयप्रकाश नारायण,सन १९७७ में जनता पार्टी सरकार बनवाने के नायक जयप्रकाश ही थे ........,जन्मदिवस पर शत शत नमन..! 




जयप्रकाश नारायण (11 अक्तूबर, 1902 - 8 अक्तूबर, 1979) (संक्षेप में जेपी ) भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। उन्हें 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। वे समाज-सेवक थे, जिन्हें लोकनायक के नाम से भी जाना जाता है। 1998 में उन्हें भारत रत्न से सम्मनित किया गया।
पांच जून के पहले छात्रें-युवकों की कुछ तात्कालिक मांगें थीं, जिन्हें कोई भी सरकार जिद न करती तो आसानी से मान सकती थी। लेकिन पांच जून को जे. पी. ने घोषणा की:-
"भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रान्ति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं; क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए। और, सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, ’सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।"
सम्पूर्ण क्रान्ति के आह्वान उन्होने श्रीमती इंदिरा गांधी की सत्ता को उखाड़ फेकने के लिये किया था।
लोकनायक नें कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है - राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।
सम्पूर्ण क्रांति की तपिश इतनी भयानक थी कि केन्द्र में कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था। जय प्रकाश नारायण जिनकी हुंकार पर नौजवानों का जत्था सड़कों पर निकल पड़ता था। बिहार से उठी सम्पूर्ण क्रांति की चिंगारी देश के कोने-कोने में आग बनकर भड़क उठी थी। जेपी के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण घर-घर में क्रांति का पर्याय बन चुके थे। लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान या फिर सुशील मोदी, आज के सारे नेता उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा थे।