गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

भैरोंसिंह शेखावत : सम्पूर्ण राजनैतिक व्यक्तित्व के धनी


- अरविन्द सिसोदिया , कोटा 
२३ अक्टूवर भा ज पा के वरिष्ठ  नेता एवं पूर्व उप राष्ट्रपति रहे माननीय भैंरो सिंह शेखावत की जयंती   है...इस अवसर पर उन्हें शत शत नमन........ 
**** यदि आपके पास कोई प्रकाशित करने योग्य संस्मरण है तो मेरे नीचे लिखे ई मेल पर भेजें चित्र सहित इस ब्लॉग पर प्रकाशित किया जाएगा.... 


भाजपा की वरिष्ठ त्रिमूर्ति , अटल जी , शेखावत जी और अडवानी जी ....
सम्मानीय भैरोंसिंह शेखावत सम्पूर्ण राजनैतिक व्यक्तित्व के धनी 
- रघुवीरसिंह कौशल

    सबसे पहले में एक संस्मरण से अपनी बात प्रारम्भ करता हूं,में बांरा विधानसभा क्षैत्र से विधानसभा का चुनाव बांरा को जिला बनाने की घोषणा के साथ लडा और जीता, हमारी सरकार बनीं,मेंने विधानसभा में प्रश्न पूछा कि सरकार के पास कितने नये जिले बनाने का विचार विचाराधीन हैं ? विधानसभा में उत्तर प्राप्त हुआ कि सरकार के पास नये जिले बनाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस उत्तर से में उत्तेजित हो गया और सदन में मैंने सरकार की कडी आलोचना की...! पार्टी के ही कुछ कार्यकता तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंहजी शेखावत के पास पहुचे और उनसे कहा रघुवीरसिंह कौशल के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्यवाही की जाये,उन्होने पार्टी अनुशासन सदन में भंग किया है। शेखावत सहाब ने जबाव दिया कि मेरे विचार से एक विधायक के नाते कौशलजी ने कोई अनुशासनहीनता नहीं की, उन्होने बांरा को जिला बनाने के नाम पर चुनाव लडा और जीते है। सरकार उनकी पार्टी की है,सरकार जिला बनाने के लिये प्रतिबद्ध भी है, मगर जब सदन का जबाव अखवारों में जायेगा कि राजस्थान सरकार कोई नया जिला नहीं बना रही तो बांरा की जनता अपने विधायक के कपडे फाड देगी, इस जबाव के विरूद्ध कौशल का उत्तेजित होना सही था, में उनके विरूद्ध किसी भी तरह की अनुशासन हीनता की कार्यवाही का समर्थन नहीं करता हूं बल्कि बांरा को नया जिला बनाने की कार्यवाही प्रारम्भ करूंगा। और बाद में बांरा जिला भी बना। इस घटना से यह साबित होता है कि शेखावत सहाब में जन अपेक्षा और जन व्यवहार की कितनी सटीक समझ थी। 
म्ुाझे चार टर्म शेखावत सहाब के साथ काम करने का अनुभव प्राप्त है जब वे उप राष्ट्रपति थे तब में लोकसभा सदस्य था, उनका निरंतर सानिध्य मिलता ही रहा है। वे सहज उपलब्ध,सरल व्यक्तित्व,परिपक्व राजनेता थे। स्वंय कभी उत्तेजित नहीं होना और कोई भी उत्तेजित कार्यकर्ता या व्यक्ति आये तो उसे भी शांत करके भेजना यह उनकी आदत का हिस्सा था। जब तक किसी भी कार्यकता का असंतोष या गलत फहमी दूर न करलें तब तक उसका ध्यान रखना चिन्ता करना उनके ही व्यक्त्वि की विशेषतायें थीं ।
वे अपनी बात कभी भी थोपते नहीं थे, अपने मंत्रीमण्डल के मंत्रियों तक के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते थे,कोई बात कहनी या करवानी हो तो वे विनम्रता से उसे समझााते थे। उनका मत था कि राजनीति में जितने दुश्मन कम करो उतना ही अक्ष्छा होता है। जबकि आज यह चलन चल गया है कि जब तक दो चार नये दुश्मन तैयार नहीं करलें तब तक नींद नहीं आती ।
उनका यह भी विचार महत्वपूर्ण था कि जो कोई भी चुनाव में अपनी पार्टी को हरवानें में लगता है उसे स्वंय की बारी आने पर, वही सब भुगतना भी पडता हे। इसलिये अपनी पार्टी के विरूद्ध कभी भी कोई कार्य नहीं करना चाहिये। चाहे मन कितना ही साथ नहीं दे,मगर पार्टी विरोधी कृत्य पर कठोर मानसिक नियंत्रण होना ही चाहिये। पार्टी को उन्होने हमेशा मां का दर्जा दिया ।  
     टिकिट बंटवारों में सामूहिक निर्णय के ही वे पक्षधर थे, वे खुल कर चर्चायें करवाते थे, कई कई दिनों तक चर्चा करवाने के बाद पूरी सावधानी से निर्णय करवाना उनकी आदत में था। कई वार उनकी इच्छा के विरूद्ध भी निर्णय होते थे, वे निर्णय नहीं होनें तक अपनी बात प्रखरता से रखते थे मगर यदि सामूहिक निर्णय उनकी बात के विपरीत भी गया तो न केबल उसे वे मानते थे बल्कि उसे पूरा करना भी वे अपना कत्र्तव्य मानते थे।
विरोधी दलों में भी उनकी बहुत अच्छी साख थी,सम्मान देना उनकी सबसे बडी विशेषता थी। इसी कारण उनके मित्रों की संख्या अन्य दलोे में भी बहुत होती थी। सरकार में भी वे निर्णय सामूहिक सोच के आधार पर लेते थे,कुछ अवसर इस तरह के भी आते थे जब उनकी बात से भिन्न अन्य विचार प्रबल होत था, तब वे उस विषय को प्रतिक्षारत रख कर अनेकानेक बार उस पर चर्चा करते समझाते और समझते थे, तब निर्णय करते थे। कुल मिला कर वे राजनैतिक इच्छा को थोपते नहीं थे। 
जितनी आसानी से कार्यकता उनसे मिल सकता था,उतनी आसानी से तो मंत्रीयों से भी नहीं मिल सकते,सबसे मिलना सबकी सुनना यह उनकी आादत में था। ग्रामीण पृष्ठ भूमि से उठ कर , लगभग शून्य से शिखर पर पार्टी को ले जाने में उनका भी बडा योगदान रहा है। वे राजस्थान में तीन वार मुख्यमंत्री बनें,यह उनकी लोकप्रियता,सोच समझ और कौशल की ही उपलब्धि थी। में उन्हे शत शत नमन करता हूं।
रघुवीरसिंह कौशल ,
पूर्व लोकसभा सदस्य,
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भाजपा,
पूर्व विधायक एवं मंत्री 
राजस्थान सरकार|

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