शनिवार, 31 दिसंबर 2011

गुरु गोविंद सिंह : प्रकाश पर्व के अवसर पर




गुरु  गोविंद सिंह के 345वें जन्मदिवस  प्रकाश पर्व  के अवसर पर  
गुरु गोविंद सिंह .....
(जन्म- 22 दिसंबर सन 1666 ई. पटना, बिहार; मृत्यु- 7 अक्तूबर सन 1708 ई. नांदेड़, महाराष्ट्र) सिक्खों के दसवें व अंतिम गुरु माने जाते थे, और सिक्खों के सैनिक संगति, ख़ालसा के सृजन के लिए प्रसिद्ध थे। कुछ ज्ञानी कहते हैं कि जब-जब धर्म का ह्रास होता है, तब-तब सत्य एवं न्याय का विघटन भी होता है तथा आतंक के कारण अत्याचार, अन्याय, हिंसा और मानवता खतरे में होती है। उस समय दुष्टों का नाश एवं सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा करने के लिए ईश्वर स्वयं इस भूतल पर अवतरित होते हैं। गुरु गोविंद सिंह जी ने भी इस तथ्य का प्रतिपादन करते हुए कहा है,
"जब-जब होत अरिस्ट अपारा।
  तब-तब देह धरत अवतारा।"
जन्म
गुरु गोविंद सिंह के जन्म के समय देश पर मुग़लों का शासन था। हिन्दुओं को मुसलमान बनाने की औरंगज़ेब ज़बरदस्ती कोशिश करता था। इसी समय 22 दिसंबर, सन 1666 को गुरु तेगबहादुर की धर्मपत्नी गूजरी देवी ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया, जो गुरु गोविंद सिंह के नाम से विख्यात हुआ। पूरे नगर में बालक के जन्म पर उत्सव मनाया गया। बचपन में सभी लोग गोविंद जी को 'बाला प्रीतम' कहकर बुलाते थे। उनके मामा उन्हें भगवान की कृपा मानकर 'गोविंद' कहते थे। बार-बार 'गोविंद' कहने से बाला प्रीतम का नाम 'गोविंद राय' पड़ गया।
बैसाखी
सन 1699 में बैसाखी वाले दिन केशगढ़ साहब में श्री गुरु गोविन्द सिंह ने एक विचित्र नाटक किया। खुले मैदान में खडे़ होकर उन्होंने एक सिर माँगा, लोग हैरान थे कि हाथ में तलवार लेकर वह एक व्यक्ति का सिर माँग रहे हैं। यह कैसी अनोखी माँग है। बैसाख के मेले में एक सोई हुई क़ौम को जगाने का इतिहास रचा जा रहा था। लोग तब यह नहीं समझ सके। बैसाखी को कई इतिहासकार जंग-ए-आज़ादी का शंखनाद मानते हैं। ग़ुलामी की जंजीरों को काटकर गुरु गोविन्द सिंह ने हक़ हलाल की लड़ाई की शुरुआत की, वहीं जो इंसान अपने हाथों में एक लाठी भी पकड़ने में झिझकता था, उन्होंने कृपाण पकड़ने का साहस भरा। एक- एक करके पाँच जांबाज़ अपना शीश हथेली पर रख कर आगे आए और गुरु गोविन्द सिंह के उस आह्वान को चरितार्थ किया।
पंचप्यारे
वो पाँच प्यारे जो देश के विभिन्न भागों से आए थे और समाज के अलग- अलग जाति और सम्प्रदाय के लोग थे, उन्हें एक ही कटोरे में अमृत पिला कर गुरु गोविन्द सिंह ने एक बना दिया। इस प्रकार समाज में उन्होंने एक ऐसी क्रान्ति का बीज रोपा, जिसमें जाति का भेद और सम्प्रदायवाद, सब कुछ मिटा दिया। बैसाखी का एक महत्त्व यह है कि परम्परा के अनुसार पंजाब में फ़सल की कटाई पहली बैसाख को ही शुरू होती है और देश के दूसरे हिस्सों में भी आज ही के दिन फ़सल कटाई का त्योहार मनाया जाता है, जिनके नाम भले ही अलग-अलग हों।
आज के दिन यदि हम श्री गुरु गोविन्द सिंह के जीवन के आदर्शों को, देश, समाज और मानवता की भलाई के लिए उनके समर्पण को अपनी प्रेरणा का स्रोत बनाऐं और उनके बताये गए रास्ते पर निष्ठापूर्वक चलें तो कोई कारण नहीं कि देश के अन्दर अथवा बाहर से आए आतंकवादी और हमलावर हमारा कुछ भी बिगाड़ सकें।
सिक्खों में युद्ध का उत्साह
 सवा लाख से एक लड़ाऊँ चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊँ तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊँ - गुरु गोविंद सिंह
गोविद सिंह ने सिक्खों में युद्ध का उत्साह बढ़ाने के लिए हर क़दम उठाया। वीर काव्य और संगीत का सृजन उन्होंने किया था। उन्होंने अपने लोगों में कृपाण जो उनकी लौह कृपा था, के प्रति प्रेम विकसित किया। ख़ालसा को पुर्नसंगठित सिक्ख सेना का मार्गदर्शक बनाकर, उन्होंने दो मोर्चों पर सिक्खों के शत्रुओं के ख़िलाफ़ क़दम उठाये।
ख़ालसा पंथ
ख़ालसा का अर्थ है ख़ालिस अर्थात विशुद्घ, निर्मल और बिना किसी मिलावट वाला व्यक्ति। इसके अलावा हम यह कह सकते हैं कि ख़ालसा हमारी मर्यादा और भारतीय संस्कृति की एक पहचान है, जो हर हाल में प्रभु का स्मरण रखता है और अपने कर्म को अपना धर्म मान कर ज़ुल्म और ज़ालिम से लोहा भी लेता है।
गोविन्द सिंह जी ने एक नया नारा दिया है- 
वाहे गुरु जी का ख़ालसा, वाहे गुरु जी की फतेह।
गुरु जी द्वारा ख़ालसा का पहला धर्म है कि वह देश, धर्म और मानवता की रक्षा के लिए तन-मन-धन सब न्यौछावर कर दे। निर्धनों, असहायों और अनाथों की रक्षा के लिए सदा आगे रहे। जो ऐसा करता है, वह ख़लिस है, वही सच्चा ख़ालसा है। ये संस्कार अमृत पिलाकर गोविंद सिंह जी ने उन लोगों में भर दिए, जिन्होंने ख़ालसा पंथ को स्वीकार किया था।
ज़फरनामा में स्वयं गुरु गोविन्द सिंह जी ने लिखा है कि जब सारे साधन निष्फल हो जायें, तब तलवार ग्रहण करना न्यायोचित है। गुरु गोविंद सिंह ने 1699 ई. में धर्म एवं समाज की रक्षा हेतु ही ख़ालसा पंथ की स्थापना की थी। ख़ालसा यानि ख़ालिस (शुद्ध), जो मन, वचन एवं कर्म से शुद्ध हो और समाज के प्रति समर्पण का भाव रखता हो। सभी जातियों के वर्ग-विभेद को समाप्त करके उन्होंने न सिर्फ़ समानता स्थापित की बल्कि उनमें आत्म-सम्मान और प्रतिष्ठा की भावना भी पैदा की। उनका स्पष्ट मत व्यक्त है-
मानस की जात सभैएक है।
ख़ालसा पंथ की स्थापना (1699) देश के चौमुखी उत्थान की व्यापक कल्पना थी। एक बाबा द्वारा गुरु हरगोविंद को 'मीरी' और 'पीरी' दो तलवारें पहनाई गई थीं।
एक आध्यात्मिकता की प्रतीक थी।
दूसरी सांसारिकता की।
गुरु गोविन्द सिंह ने आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता का संदेश दिया था। ख़ालसा पंथ में वे सिख थे, जिन्होंने किसी युद्ध कला का कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं लिया था। सिखों में समाज एवं धर्म के लिए स्वयं को बलिदान करने का जज़्बा था।
एक से कटाने सवा लाख शत्रुओं के सिर
गुरु गोविन्द ने बनाया पंथ खालसा
पिता और पुत्र सब देश पे शहीद हुए
नहीं रही सुख साधनों की कभी लालसा
ज़ोरावर फतेसिंह दीवारों में चुने गए
जग देखता रहा था क्रूरता का हादसा
चिड़ियों को बाज से लड़ा दिया था गुरुजी ने
मुग़लों के सर पे जो छा गया था काल सा
गुरु गोविन्द सिंह का एक और उदाहरण उनके व्यक्तित्व को अनूठा साबित करता है-
पंच पियारा बनाकर उन्हें गुरु का दर्जा देकर स्वयं उनके शिष्य बन जाते हैं और कहते हैं- ख़ालसा मेरो रूप है ख़ास, ख़ालसा में हो करो निवास।
वीरता व बलिदान की मिसालें
परदादा गुरु अर्जुन देव की शहादत।
दादा गुरु हरगोविंद द्वारा किए गए युद्ध।
पिता गुरु तेगबहादुर सिंह की शहादत।
दो पुत्रों का चमकौर के युद्ध में शहीद होना।
दो पुत्रों को ज़िंदा दीवार में चुनवा दिया जाना।
इस सारे घटनाक्रम में भी अड़िग रहकर गुरु गोविंद सिंह संघर्षरत रहे, यह कोई सामान्य बात नहीं है। यह उनके महान कर्मयोगी होने का प्रमाण है। उन्होंने ख़ालसा के सृजन का मार्ग देश की अस्मिता, भारतीय विरासत और जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए, समाज को नए सिरे से तैयार करने के लिए अपनाया था। वे सभी प्राणियों को आध्यात्मिक स्तर पर परमात्मा का ही रूप मानते थे। 'अकाल उस्तति' में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जैसे एक अग्नि से करोड़ों अग्नि स्फुर्ल्लिंग उत्पन्न होकर अलग-अलग खिलते हैं, लेकिन सब अग्नि रूप हैं, उसी प्रकार सब जीवों की भी स्थिति है। उन्होंने सभी को मानव रूप में मानकर उनकी एकता में विश्वास प्रकट करते हुए कहा है कि हिन्दू तुरक कोऊ सफजी इमाम शाफी। मानस की जात सबै ऐकै पहचानबो।
मृत्यु
गुरु गोविन्द सिंह ने अपना अंतिम समय निकट जानकर अपने सभी सिखों को एकत्रित किया और उन्हें मर्यादित तथा शुभ आचरण करने, देश से प्रेम करने और सदा दीन-दुखियों की सहायता करने की सीख दी। इसके बाद यह भी कहा कि अब उनके बाद कोई देहधारी गुरु नहीं होगा और 'गुरुग्रन्थ साहिब' ही आगे गुरु के रूप में उनका मार्ग दर्शन करेंगे। गुरु गोविंदसिंह की मृत्यु 7 अक्तूबर सन 1708 ई. में नांदेड़, महाराष्ट्र में हुई थी।
आज मानवता स्वार्थ, संदेह, संघर्ष, हिंसा, आतंक, अन्याय और अत्याचार की जिन चुनौतियों से जूझ रही है, उनमें गुरु गोविंद सिंह का जीवन-दर्शन हमारा मार्गदर्शन कर सकता है।

राजनीती का यह नग्न सत्य भंवरी




- अरविन्द सिसोदिया 
राजनीती का यह नग्न सत्य भंवरी के रूप में राजस्थान की राजनीती में १ सितम्बर 2011 से छैया हुआ हे ...सत्ता का मद और सौन्दर्य की संगत कहाँ ले जाकर खड़ा कर देती हे , यह  इसका नमूना है ! कांग्रेस के विधायक और रिटायर्ड कर्नल सोना राम ने दावा किया कि सीबीआई ने भंवरी के 139 सेक्स सीडी बरामद हुई हैं। इनमें कई नेता और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। भंवरी की बात तो उजागर हो गई , मगर हजारो भंवारियों की सिसकियाँ किसी ने नहीं सुनी || 
      लगता है सी बी आई भी कोंगेस के  डेमेज कंट्रोल करने में लगी हे और बांकी और लोगों को बचा कर भंबरी के भंवर को धीरे धीरे समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है | अन्यथा १३९ कथित सीडीयों में क्या हे यह बहार क्यों नहीं आरहा ??
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केंद्रीय मंत्री के भी थे भंवरी से संबंध?
25 Dec 2011,एजेंसियां 
जयपुर।। भंवरी देवी मामले की लपटें अब दिल्ली तक भी पहुंचने लगी हैं। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एक केंद्रीय मंत्री के भी लापता नर्स भंवरी देवी से संबंध थे। जोधपुर में आयोजित ' किसान संभावना रैली ' में कांग्रेस के विधायक और रिटायर्ड कर्नल सोना राम ने दावा किया कि सीबीआई ने भंवरी के 139 सेक्स सीडी बरामद हुई हैं। इनमें कई नेता और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। सोना राम ने दावा किया कि इन सीडी में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता भी शामिल बताए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उस नेता का नाम क्षेत्रीय न्यूज चैनलों पर भी आ चुका है। सोना राम ने कहा कि या तो उस नेता को चैनल पर मुकदमा करना चाहिए या सबके सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।

इसके तीन दिन पहले जाट नेता यू.आर. बेनीवाल ने भी दावा किया था कि एक केंद्रीय मंत्री के भंवरी से संबंध थे। यह मामला जोधपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जोधपुर की इस रैली में बेनीवाल ने फिर अपने दावे को दोहराया और नाम लेकर उस केंद्रीय मंत्री से इस मामले में अपनी स्थिति साफ करने की मांग की। अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी और मुकुल वासनिक जब जयपुर आए थे, तब यह मामला उनके सामने भी रखा गया था। द्विवेदी ने इसे स्थानीय मामला बताक पल्ला झाड़ लिया, जबकि वासनिक ने कहा कि इसकी जांच सीबीआई कर रही है। 

ऐसा कहा जा रहा है कि सीबीआई जांच के दौरान भी इस केंद्रीय मंत्री का नाम कई बार चर्चा में आया है, लेकिन हर बार इस पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। यही वजह है कि सोना राम उस नेता से अपनी स्थिति साफ करने को कह रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2003 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने से पहले भंवरी टिकट के लिए मंत्री जी से दिल्ली में मिली थीं। इसके पहले भी वह पार्टी के जयपुर मुख्यालय में कई बार उनके साथ देखी गईं |

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http://aajtak.intoday.in/story
भंवरी देवी: सत्ता, सेक्स और शोषण की दास्तां
रोहित परिहार | सौजन्‍य: इंडिया टुडे | जयपुर, 30 दिसम्बर 2011
राजस्थान में तो साल 2011 भंवरी देवी के ही नाम रहा. 36 साल की यह नर्स 1 सितंबर को लापता हो गई. अब तक भी उसका सुराग नहीं मिला है. अंदेशा यही जताया जा रहा है कि वह मर चुकी है. उसके प्रकरण ने यह साबित किया कि कांग्रेस के लोग खुद को बचाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं. बड़े और रसूखदार समझे जाने वाले नेता किस तरह से एक जवान स्त्री का लंबे अरसे तक शोषण करते रहे. नैतिकता को उठाकर उन्होंने दूर कहीं किसी ताक पर रख दिया था. अगर कुछ नजर आ रहा था तो वह थी एक आपराधिक प्रवृत्ति.


28 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


उसी महिला ने जब असहज स्थितियां पैदा करनी शुरू कर दीं तो उसे रास्ते से ही हटा दिया गया. पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा और मलखान सिंह, दोनों को गिरफ्तार किया जा चुका है. दोनों मौजूदा विधायक हैं. उनकी गिरफ्तारी से पूरा प्रदेश सकते में है. परंपरागत सोच वाले इस राज्‍य में जिन महिलाओं ने बाहर निकलकर तमाम तरह के कामों और नौकरियों में शिरकत करनी शुरू की थी, अब वे असुरक्षित और डरी महसूस कर रही हैं.


21 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


आजादी के बाद से राजस्थान में नेताओं और अपराधियों के बीच इतनी गहरी साजिश पहले कभी नहीं देखी गई. यहां तक कि पूरे देश में भी इस तरह की मिसालें कम ही हैं. 1995 में दिल्ली में सुशील शर्मा नाम के एक कांग्रेसी नेता ने अपनी पत्नी नैना साहनी को कत्ल करके उसे तंदूर में जला डाला था. इस घटना को लेकर देश भर में उपजे जनता के गुस्से को देखते हुए केंद्र सरकार को नेताओं और अपराधियों के बीच गठजोड़ की पड़ताल करने के लिए एनएन वोहरा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने को मजबूर होना पड़ा था.


14 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


07 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


भंवरी देवी का प्रकरण एक तरह से यही बताता है कि हालात बद से बदतर ही हुए हैं. यहां तक कि सिल्क स्मिता को भी सेक्स के रास्ते कॅरियर में ऊपर चढ़ने का रास्ता बनाने पर मार नहीं डाला गया. उसे अपनी मौत मरने के लिए उसके हाल पर छोड़ दिया गया. और राजस्थान में भंवरी को मार डाला जाता है. उसके अनुसूचित जाति का होने की वजह से कोई बहुत बड़ा जनाक्रोश भी नहीं पैदा होता. उसके लापता होने की जांच कर रही सीबीआइ भी अब कमोबेश इस निष्कर्ष तक आ पहुंची है कि वह मारी जा चुकी है.


30 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं कि भंवरी देवी जैसे मामलों की वजह से थोड़े ही कैबिनेट में फेरबदल होते हैं लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान स्वीकारते हैं कि इसी वजह से मंत्रियों के सामूहिक इस्तीफे लेकर कुछ को हटाना पड़ा. भंवरी देवी प्रकरण ने कांग्रेस के बदनुमा चेहरे को सामने ला दिया है. महत्वाकांक्षी भंवरी के साथ वैसा ही हुआ, जैसा कि राजनीति फिल्म में श्रुति सेठ के साथ होता है. उसका वीडियो क्लिप उस क्लिप से मिलता-जुलता है, जिसमें मदेरणा और भंवरी एक साथ पाए गए हैं.


23 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
16 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


श्रुति कड़ी मेहनत की दुहाई देती है. भंवरी पहले मुंबई की एक यात्रा और फिर पैसे के लिए आग्रह करती है. इस बीच वह सियासत में भी घुसने की कोशिश जारी रखती है. बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र से टिकट की अर्जी भी लगा देती है. नौकरशाह और पुलिस अफसर भी उसके साथ रंगरेलियां मनाते हैं. इसके बाद ये लोग वही करते हैं, जो मदेरणा और मलखान सिंह उनसे करने को कहते हैं. भंवरी को ड्यूटी पर आने से ही छुट्टी दे दी जाती है.


9 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
2 नवंबर 201: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


उसके कत्ल की साजिश रचने के लिए सरकारी जगहों का खुलकर इस्तेमाल किया गया. जयपुर के सिविल लाइंस के जबरदस्त सुरक्षा वाले इलाके में स्थित मदेरणा के घर में बैठकर आरोपी भगोड़ा सहीराम बिश्नोई फोन पर भंवरी को मारने की पूरी योजना बना रहा था. अपहर्ताओं ने जोधपुर के सर्किट हाउस में बैठकर सारा खाका बनाया और काम को अंजाम देने के बाद वे फिर से वहीं लौट आए.
भंवरी को अगर टिकट मिल गया होता और वह विधायक हो गई होती तब भी क्या मदेरणा की पत्नी लीला यह कहतीं कि यह तो दो वयस्क लोगों के आपसी सहमति से सेक्स करने का मामला है? कांग्रेस के वोटर समुदाय जाट, बिश्नोई और अनुसूचित जाति के वोटों का क्या होता पता नहीं, लेकिन भंवरी ने उसकी चूलें तो हिला ही दी हैं.

सुनो राहुलजी - राज्य महिमा, केन्द्र के गुलछरे राज्यों की जनता के पैसे से..





सुनो राहुलजी - राज्य महिमा..........
राज्यों की जनता के पैसे से केन्द्र की सरकार चलती है....
केन्द्र सरकार चाहे कांग्रेस नेतृत्व की हो या किसी ओर दल की, उसके खजानें में पैसा विदेशों से नहीं आता, जो उनके नेता यह कहते हें कि हम पैसा भेजते हैं और राज्य खा जाते है। सच यह है कि, यह सारा पैसा राज्यों की जनता भेजती है केन्द्र सरकार के खजानें में, एक्साइज डियूटी, कस्टम, आयकर, सेवाकर और कई अनेक प्रकार के करों और राज्यों की सम्पतियों के कारण से पैसा आता है। तब केन्द्र सरकार खर्च करती है। संघ शासित क्षैत्र हे कितना सा ..., उनमें कितनी जनसँख्या और कितने लोग हें .., उनसे कितना सा  टैक्स आपात हे | जो भी होता हे वह राज्यों की जनता के  धन से होता हे | 
राज्यों की जनता के पैसे से ही केन्द्र सरकार चलती है और उसी में से वह खुद व राज्यों पर खर्च करती है। फिर बार - बार यह कहना कि हम पैसा भेजते हैं राज्य सरकार खा जाती है। क्या औचित्य है इसका ????? राज्यों की सरकार और जन प्रतिनिधियों पर यह कैसी दादागिरी भई ? केन्द्र गुलछरे ही राज्यों की जनता के पैसे से उडा रहा है। एक दिन भी राज्यों का पैसा नहीं पहुचे तो हाहाकार मच जायेगा। और यह भी कि राज्यों की जनता से ही लोकसभा और राज्य सभा बनती है। 

कांगेसी लोकपाल बिल तो भ्रष्टाचारियों का सुरक्षा कवच



- अरविन्द सिसोदिया 


  अच्छा ही हुआ कि कांग्रेस का नकली लोकपाल बिल पास नहीं हुआ , अन्यथा लोकपाल को शिकायत करने वाले कि खैर नहीं थी ....! इसमें भरी तबदीली कि जरुरत हे .., शिकायत इस प्रकार से करने कि सुविधा हो कि उसकी जांच हो सके और साबित करने , साक्ष्य जुटाने का भार भी सरकारी जांच एजेंसी पर हो जो कि निष्पक्ष हो और लोकपाल के ही अंतर्गत हो ..!! शिकायत करता को जांच और साक्ष्य जुटाने की जवाव देहि से मुक्त रखना चाहिए , वह सूचना दे रहा हे यह भी काफी हे ...शिकायत को गुप्त  रखनें की बात रखी जा सकती हे ...!

” कांग्रेस और उसके नेता यथा सोनियाजी, राहुलजी,पवन बंसलजी, अभिषेक सिंघवी जी और कई सारे,,,,,कांगेसी लोकपाल बिल के लोकसभा मे संवैधानिक दर्जा नहीं मिलने और राज्यसभा में पास नहीं होने का ठीकरा विपक्ष और भाजपा के सिर फोड रहे है। यह गलत है, कांग्रेस के पास दोनों ही सदनों में बहूमत नहीं है। उसक खुद के सदस्यों की संख्या तो काफी कम है। इस स्थिती में सबसे सलाह मशविरा करके ही बिल आता तो पास होता । कांगेस ने एक तानाशाह की तरह हुक्म फरमाया कि हम चुनावी फायदे का बिल पेश कर रहे हैं इस पर सब मोहर लगाओं । भारतीय लोकतंत्र अभी इतना गुलाम नहीं हुआ कि इटालियन इस पर ईस्ट इण्डिया कंपनी की तरह हुक्म बजायें । संसद में सांसदों ने जो किया ठीक किया । देशहित में और राज्यों के हित में किया । कांगेसी लोकपाल बिल तो भ्रष्टाचारियों की सुरक्षा के लिये बनाया गया हैं इसमें भारी तबदीली की जरूरत है। “

सेक्स 'सर्च' : भारत भी पीछे नहीं : नैतिक पतन




- अरविन्द सिसोदिया 
इन्टरनेट........
तमाम तरीकों से समाज को लाभदायक होते हुये भी,
नैतिक पतन का दूसरा सबसे बडा कारण बन गया।
चैनलों की बेशर्मी के बाद, इन्टरनेट पर तो कोई नियंत्रण ही नहीं,
3 जी और स्मार्ट मोबाईल ने,
लगभग घर - घर को सैक्स का ग्राहक बना दिया!
सरकार अभी तक कोई प्रभावी तरीका,
नियंत्रण या व्यवस्था के लिये नहीं बना पाई!!
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भारत भी पीछे नहीं,
सेक्स 'सर्च' करने में पाक आगे !
Source: dainikbhaskar.com   | 30/12/२०११
http://www.bhaskar.com
नई दिल्ली. साल 2011 में गूगल पर 'सेक्स' शब्द खोजने में रूचि रखने के मामले में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर रहा। गूगल सर्च ट्रेंड के मुताबिक साल 2011 में इंटरनेट पर सेक्स को सर्च करने में सबसे ज्यादा रूचि श्रीलंका के लोगों ने दिखाई और उसके बाद पाकिस्तान के लोगों ने।
सेक्स को सर्च करने में एशियाई देशों में कितनी रूचि रहती है इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि इंटरनेट पर सेक्स को खोजने में पाकिस्तान के बाद भारत का नंबर है। मजे की बात यह है गूगल पर सेक्स को सबसे ज्यादा सर्च करने वाले दस शहरों में से आठ भारत के हैं। भारत में सेक्स सबसे ज्यादा नई दिल्ली से सर्च किया जाता है। सूची में दिल्ली के बाद बेंगलुरु, कलकत्ता, लखनऊ, पुणे, चेन्नई, मुंबई, पटना, चंटीगढ़ और विजयवाड़ा है।
वहीं पाकिस्तान में भी सबसे ज्यादा सेक्स इस्लामाबाद में ही सर्च किया जाता है। इसके बाद लाहौर, क्वेटा, कराची, पेशावर, मुल्तान और रावलपिंडी आते हैं। लेकिन एक मजेदार तथ्य यह है कि पाकिस्तान के करीब 2 करोड़ इंटरनेट यूजर सेक्स को सर्च करने के मालमें में भारत के करीब दस करोड़ इंटरनेट यूजरों को पीछे छोड़ देते हैं।
गूगल ट्रेंड्स के नतीजे देखने पर एक और मजेदार तथ्य यह आता है कि श्रीलंका, जो सेक्स को सर्च करने के मामले में टॉप पर है, में सिर्फ राजधानी कोलंबो से ही सेक्स को सर्च किया जाता है।
सबसे ज्यादा सेक्स सर्च करने वाले देशों में श्रीलंका, पाकिस्तान और भारत के बाद पपुआ न्यू गिनी, इथिओपिया और बंग्लादेश का नंबर आता है।