सोमवार, 2 जनवरी 2012

अंग्रेजी नया साल,'डर्टी डांस',३० - ३० युवक एक लड़की के पीछे ..ब्लेक 2012



- अरविन्द सिसोदिया 
ब्लेक 2012 , 
एक तरफ चैत्र माह में जब भारतीय नव वर्ष आता है .. मंदिरों में घंटे घड़ियाल बजते हैं .., आरतियाँ होतीं हैं , उगते सूर्य की आराधना होती है ,  ईश्वर के नाम का गुणगान होता है , मगर यह कैसा सन का आगमन कि ३० - ३० युवक ..वह भी भारतीय ...एक लड़की के पीछे पड़ जाते हैं पागलों की तरह...???? उन युवाओं के नैतिक  पतन कि यह वारदात सामान्य नहीं है......केंद्र सरकार को यह जबाव देना होगा कि वह समाज को कहाँ ले जा रही है..???  यह चारित्रिक पतन क्यों कर हुआ..??? स्वतंत्रता और स्वछंदता में कोई तो फर्क होगा ही..भारतीय संविधान कि विधान कि धज्जियां क्यों कर उडीं ...जबाव सरकार को ही देना है...वह देश को कहाँ ले जाकर छोड़ेगी ...??? हमारी शिक्षा प्रणाली और व्यवस्था में कोई गंभीर दोष  तो है ही न तब तो यह हुआ...
अंग्रेजी नया साल याने अय्याशी  , नशाखोरी , आपराधिकता ..भला क्यों ..??? क्यों कि आप इस भटको को रोकना  नहीं चाहते..इसलिए !! एक तरफ भारतीय संस्कृति नर से नारायण बनती है तो पाश्चत्य संस्कृति पवित्रता को पशुता में बदल देती है ..यह उदाहरण एक नही अनेकों हैं ...
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नए साल के स्वागत में ----------------
नशे में धुत 30 लड़के सरेराह लड़की पर टूटे
Source: Bhaskar news   |   Last Updated 04:13(02/01/12)
http://www.bhaskar.com/article
गुड़गांव. नए साल के स्वागत में शराब की मस्ती में चूर युवकों ने शनिवार रात एमजी रोड पर एक युवती के साथ सरेराह जबरदस्ती करने की कोशिश की। विरोध पर उसके दोस्त की पिटाई कर दी।पुलिस ने लाठियां भांजीं तो युवकों ने पुलिस पर पथराव कर दिया।पथराव में आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए।दो पुलिसकर्मियों की हालत गंभीर है। उन्हें आर्बिट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
साइबर सिटी गुड़गांव के एमजी रोड पर करीब एक दर्जन मॉल हैं। न्यू इयर के मौके पर शनिवार की रात यहां लोगों के मनोरंजन की व्यवस्था की गई थी। मॉल्स में स्थित बार में खूब शराब भी चली।रात करीब साढ़े 11 बजे एक युवती अपने दोस्त के साथ एमजी रोड मैट्रो स्टेशन के पास सड़क पारकर रही थी। 
इसी बीच वहां मौजूद नशे में धुत करीब 30 युवकों ने युवती और युवक पर हमला बोल दिया। नशेबाज युवकों ने युवती के साथ जबरदस्ती की।विरोध पर उसके दोस्त को जमकर पीटा।शोरगुल सुनकर पास में मौजूद पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने युवकों पर लाठियां भांज किसी तरह युवती को छुड़ाया।लेकिन जवाब में युवकों ने भी पुलिस पर पथराव कर दिया।इस पथराव में आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए।  
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दिल्ली में नए साल के जश्न में भरोसे का कत्ल!
नई दिल्ली: नए साल के जश्न के बहाने दिल्ली में हुई एक लड़की से बलात्कार की कोशिश. लड़की के दो दोस्तों ने पहले तो उसे नए साल पर पार्टी के लिए बुलाया और फिर उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की.आरोप है कि नए साल की पार्टी के लिए इन लोगों ने अपनी एक दोस्त को हरियाणा से दिल्ली के रोहिणी  बुलाया. लड़की के मुताबिक इन लोगों ने उनसे जबरदस्ती करने की कोशिश की.
लड़की ने बचने के लिए छत से छलांग लगा दी जिसकी वजह से लड़की के दोनों हाथ टूट गए और पैरों में भी गंभीर चोट आई है.लडकी को गंभीर चोट लगने के बाद भी आरोपियों ने उसे कार में लेकर दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की लेकिन भीड़ इकट्टा होने से वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके.घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपी लड़कों को गिरफ्तार कर लिया है.इस बारे में आरोपियों का पक्ष जानने की भी कोशिश की जा रही है.
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नए साल के जश्न के दौरान नोएडा में फायरिंग
1 Jan 2012, 1151 hrs IST,नवभारत टाइम्स 
नोएडा / गुड़गांव।। नए साल के जश्न के दौरान हुड़दंगियों और मनचलों ने कई जगह बवाल कर दिया। नोएड में सेक्टर-18 के कॉफी हाउस में नए साल की पार्टी में लड़कियों की छेड़खानी और फायरिंग की खबर है, तो गुड़गांव में हुड़दंगियों ने एमजी रोड जाम करके आने जाने वाली लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करनी शुरू कर दी। हुड़दंगियों को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। 
नोएडा के कॉफी हाउस में लड़कियों की छेड़खानी का विरोध करने पर बदमाशों की फायरिंग में अमित और सुखविंदर नामक युवक घायल हो गए। दोनों को सेक्टर-27 के कैलाश हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
गुड़गांव में भीड़ ज्यादा होने की वजह से मॉल्स और पब में एंट्री बंद कर दी गई। इसके बाद लोग सड़क पर ही जश्न मनाने लगे। कुछ मनचलों ने लड़कियों की छेड़खानी भी शुरू कर दी। जब लोगों की परेशानी बढ़ गई तब पुलिस ने इन हुड़दंगियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।
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नए साल के जश्न पर गुड़गांव में बवाल
गुड़गांव/ब्यूरो। Monday, January 02, 2012 
नए साल के जश्न के मौके पर एमजी रोड पर खूब बवाल कटा। शनिवार की रात को नशे में धुत हुड़दंगियों ने जमकर उत्पात मचाया। पब एवं बार से बाहर निकालने पर हुड़दंगियों ने आधी रात में सड़क जाम कर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। शनिवार की रात बारह बजते ही पुलिस ने पब एवं बार को खाली कराना शुरू कर दिया। इसके चलते नशे में धुत युवाओं ने उपद्रव मचाना शुरू कर दिया।
कुछ युवक बिना एंट्री कार्ड के ही पब में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इसके बाद लोगों की भीड़ सड़क जमा हो गई। पुलिस ने जब इनको रोकने का प्रयास किया तो युवाओं ने अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया। हुड़दंगियों ने अपने दोस्त के साथ आई रोहिणी (दिल्ली) निवासी एक युवती के साथ छेड़खानी करते हुए उसे जबरदस्ती उठाकर ले जाने का प्रयास भी किया।
मौके पर मौजूद आईआरबी के सिपाही रवि कुमार और प्रवीन ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो हुड़दंगी भीड़ में शामिल हो गए। इसके बाद भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू किया तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में सिपाही प्रवीन और रवि कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है। सेक्टर 29 थाना पुलिस ने घायल सिपाही रवि कुमार के बयान पर अज्ञात के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया है। 
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http://navbharattimes.indiatimes.com
रोड पर 'डर्टी डांस'
2 Jan 2012, 0554 hrs IST,नवभारत टाइम्स  
प्रदीप नरुला 
एमजी रोड ।। मॉल और बार में एंट्री बंद हो जाने के बाद नए साल के जश्न में हुड़दंगियों ने एमजी रोड पर जमकर बवाल किया। लड़कियां छेड़ने और गाड़ियां तोड़ने के बाद इन लोगों ने रोड पर जाम लगा दिया। इससे घंटों वाहन फंसे रहे। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने बवाल बढ़ता देख लाठीचार्ज किया, जिसमें कई युवक घायल हो गए। उधर, युवकों ने भी पथराव किया, जिसमें 2 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। पुलिस ने घायल पुलिसकर्मी की शिकायत पर अज्ञात युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने बवाल के बाद सहारा मॉल को भी बंद करवा दिया। 
छेड़छाड़ से रोका तो बुरी तरह पीटा 
हाउसफुल होने के कारण रात करीब 12:30 बजे अधिकतर मॉल और बार में एंट्री बंद हो गई। इससे नाराज युवकों ने शराब पीकर सड़कों पर ही नाचना शुरू कर दिया। इस दौरान अंदर से भी बहुत सारे लोग बाहर आ चुके थे। कुल मिलाकर एक बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई सहारा मॉल के पास 15-20 युवकों ने एक युवती को पकड़ लिया। युवती के साथी ने जब विरोध किया तो उन्होंने उसकी जमकर धुनाई कर दी। मॉल के सामने पीसीआर में बैठे पुलिसकर्मी भी इस दौरान बेबस नजर आए। युवती ने काफी मशक्कत के बाद लोगों के सहयोग से अपने आप को बचाया। वह चिल्लाकर लोगों से बचाव की अपील कर रही थी। 
गाडि़यों में की जमकर तोड़फोड़ 
यहां पर कुछ ही देर में शराब के नशे में धुत युवकों ने गाडि़यों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसी प्रकार एमजी रोड मेट्रो स्टेशन के सामने भी युवकों ने पागलों की तरह खड़ी गाडि़यों के शीशे तोड़ने शुरू कर दिए। गाडि़यों का आवागमन रोक दिया। देखते ही देखते पूरे एमजी रोड पर हंगामा शुरू हो गया।
पुलिस ने किया लाठीचार्ज 
हंगामे के कारण सैकड़ों वाहन चालक जाम में फंस गए। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम में दी। सूचना पाकर सेक्टर -29, डीएलएफ फेज टू , फेज वन थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। एसीपी ट्रैफिक भी अपनी टीम के साथ एमजी रोड पर आए। पुलिस ने हुड़दंग कर रहे युवकों को समझाने का प्रयास किया लेकिन युवकों ने पुलिस की एक न सुनी। इसके बाद पुलिस ने युवकों पर लाठीचार्ज किया। कई युवक इसमें घायल हो गए। इसी दौरान पुलिस ने सहारा मॉल के सभी बार बंद करवाकर मॉल को बंद करवा दिया।
2 पुलिसकर्मी हुए घायल 
लाठीचार्ज के जवाब में युवकों ने पुलिस पर पथराव शुरू किया। करीब आधे घंटे तक चले इस पथराव में सोहन व पवन नामक पुलिसकर्मी घायल हो गए , जिन्हें सेक्टर -31 के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया है। दोनों आईआरबी में तैनात हैं। इन दिनों थाना मानेसर में रिजर्व फोर्स में ड्यूटी पर तैनात थे। रात 3 बजे तक हुए इस हुड़दंग के कारण एमजी रोड पुलिस छावनी में तब्दील हो गई। पूरी तरह भीड़ के जाने तक पुलिस मौके पर मौजूद रही।
एक कॉन्स्टेबल के बयान पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट , छेड़छाड़ व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। शहर में प्रदेश के कई जिलों के अलावा यूपी व दिल्ली से भी लोग जश्न में शामिल होने आए हुए थे। 
- जगदीश प्रसाद , थाना इंचार्ज , डीएलएफ सेक्टर -29 

भारतीय सिक्के कहाँ गए...महंगे ब्लेड बनाने में ?



- अरविन्द सिसोदिया 
जनता परेशान है की भारतीय सिक्के कहाँ गए... सिक्के कौन ले गया जी ...क्या इन्हें गायब करवानें में बैंकों की भी भूमिका हे ...कोई कहता है की महंगे ब्लेड बनाने में उनका उपयोग होता है , कोई कहता हे की इनकी मंहगी बिल्डिंग निर्माण के कम आने वाली शीटें बनाई जाती है , जो बहुत मंहगी बिकती हें ...,कुल मिला कर जरुरी है की सिक्के बच्चाये  जाएँ , जनता को उपलब्ध करवाएं ...कानून के तहत भारतीय सिक्का अधिनियम-1906, छोटे सिक्के (अपराध)अधिनियम-1971, धातु टोकन अधिनियम-1889 और कांस्य सिक्का (कानून निविदा) अधिनियम-1918 शामिल हैं। वित्त मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने सिक्का नष्ट करने वालों को 10 साल की कैद की सजा देने की मांग रखी थी लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सात साल के कैद को मंजूरी दी।
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 सिक्के बरामद 
1 छह क्विंटल भारतीय सिक्के बरामद | rashtriyaujala
rashtriyaujala.com/छह-क्विंटल-भारतीय-सिक्के.html12 मई 2011 – कोतवाली सूरजपुर पुलिस ने चेकिंग के दौरान कुलेसरा के पास एक बोलेरो में छह क्विंटल भारतीय सिक्के बरामद किए हैं। पुलिस ने दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है, इनके खिलाफ मामला दर्ज करके जेल भेज दिया गया है। 
2 चलाने से ज्यादा गलाना फायदेमंद - Coins ...
bollywood2.bhaskar.com › Madhya Pradesh13 अप्रैल 2011 – भारतीय सिक्कों को गला कर उससे निकली धातु को यह गिरोह ऊंचे दामों में बेच देता था। ... उसके पास से 60 किलो सिक्के,करीब डेढ़ किलो की पिघली धातु की सिल्ली और एक इलेक्ट्रिक तराजू बरामद किया ... कई टन सिक्के गलाने पर क्विंटल के हिसाब में धातु निकलती है। 
3 पकड़ी सिक्कों की तस्करी
www.dailynewsnetwork.in/news/jaipur/27082011/hj/42775.html27 अगस्त 2011 – ... स्थित कल्पना कार्गो के ऑफिस से 2 व 5 रूपए के सिक्कों से भरे 60 कट्टे बरामद किए, जिनका वजन करीब पौने चार क्विंटल है। ... सिक्कों की जांच व कानूनी कार्रवाही के लिए भारतीय रिर्जव बैंक के अधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है।
4 भोपाल. साढ़े आठ हजार रुपए के सिक्कों ...
www.bhaskar.com/dainikbhaskar2010/.../index.php?...in...भारतीय सिक्कों को गला कर उससे निकली धातु को यह गिरोह ऊंचे दामों में बेच देता था। ... उसके पास से 60 किलो सिक्के,करीब डेढ़ किलो की पिघली धातु की सिल्ली और एक इलेक्ट्रिक तराजू बरामद किया गया है। ... कई टन सिक्के गलाने पर क्विंटल के हिसाब में धातु निकलती है। 
5 12 दिसम्बर 2007 आईबीएन-7
http://hindi.in.com/showstory.php?id=95663 
नई दिल्‍ली। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में सिक्कों को गलाने का गैरकानूनी काम चल रहा है। यहां सिक्कों को गलाकर निकिल की शीट बनाई जाती हैं। यह शीट बिल्डिंग निर्माण में उपयोग में लाई जाती है। निकिल के शीट रद्दी से भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन सिक्के से बनाए गए शीट सस्ते और बढ़िया होते हैं। इन शीटों को बांग्‍लादेश भी भेजा जाता है।
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सिक्कों की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश
स्टार न्यूज़ संवाददाता
Saturday, 27 August 2011 
जयपुर: वि‍धायकपुरी थाना पुलि‍स ने भारी मात्रा में गलाने के लि‍ए चोरी छिपे ले जाए रहे दो और पांच रूपये के सि‍क्‍कों से भरीं 60 बोरियां बरामद की हैं. पुलि‍स के मुताबिक ये सि‍क्‍के ब्‍लेड बनाने के काम में लि‍ए जाते हैं. इनसे बने एक ब्‍लेड की कीमत बाजार में करीब सौ रूपये के लगभग है. पुलि‍स के अनुसार एक अज्ञात शख्स ने इस खेप को जयपुर से अहमदाबाद ले जाने के लि‍ए बुक कराया था. 
इन सि‍क्‍कों का वजन चार टन के लगभग है. पुलि‍स ने भारतीय मुद्रा की तस्‍करी का मामला अज्ञात लोगों के खि‍लाफ दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, साथ ही भारतीय रि‍जर्व बैंक के अधि‍कारि‍यों को भी इसकी सूचना दे दी गई है. 
दक्षि‍ण जयपुर के पुलि‍स उपायुक्‍त ने बताया कि फतेह सिंह मार्केट के पास बडी संख्‍या में सि‍क्‍के तस्‍करी करने की सूचना सामने आई तो इस पर तुरंत कार्रवाई की गई.इस मामले में खास बात ये है क़ि इन सिक्कों को गलाकर उनसे निकलने वाली निकिल नामक धातु से काफी बेहतरीन क्वालिटी के शेविंग ब्लेड बनते हैं. कई मल्टी नेशनल कम्पनी इस तरह से सिक्कों की खरीद करती हैं. एक अनुमान के अनुसार पांच रूपए के एक सिक्के से इस तरह के पांच ब्लेड बन जाते हैं. ऐसी एक ब्लेड, बाज़ार में पचास से सौ रूपए में आसानी से बिकती है. 
ये सारे सिक्के कानपुर से जयपुर लाये गए और इन्हें निजी कूरियर कम्पनी के जरिए अहमदाबाद भेजा जा रहा था. अब जयपुर पुलिस की जांच के दायरे में अहमदाबाद की ब्लेड बनाने वाली कुछ कम्पनी भी आ गई हैं. 

पैड न्यूज



- अरविंद सिसोदिया 
सारा मीडिया तो नहीं मगर लीडिंग करने वाला मीडिया तो पैड न्यूज में बुरी तरह फंस चुका है। मीडिया की पेड न्यूज ( पैसा लेकर पक्ष में समाचार छापना ) पर प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह जी के द्वारा कोई ठोस नियंत्रण नहीं करने की घोषणा से निराशा ही हाथ लगी है। अभी पांच राज्यों के चुनाव में चुनाव लडने वालों से जम कर मीडियाई वसूली होगी। बेशर्मी से यह कह कर होगी कि हमें भी तो पैसा चाहिये। क्यों कि मीडिया अब उद्योगपतियों और व्यवसाईयों की मिल्कियत में है। एक निर्धन या कम पैसे वाले का अच्छे से अच्छा समाचार चार आठ लाईन में आयेगा और जो पैसा देगा उसका समाचार चार कालम में आयेगा।
प्रधानमंत्री को इस दुष्प्रवुति पर रोक के ठोस उपाय करने चाहिये , पैड न्यूज भी एक प्रकार का मीडियाई भ्रष्टाचार है।
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http://www.p7news.com
'मीडिया पर नियंत्रण की ज़रूरत नहीं'

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मीडिया की आज़ादी की ज़ोरदार वकालत की है, लेकिन साथ ही उन्होंने मीडिया को सनसनी फैलने से बचने की सलाह भी दी। दिल्ली में एक समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ाद मीडिया लोकतंत्र की पहली निशानी है।
उन्होंने कहा कि देश में इस बात पर आम सहमति है कि मीडिया पर किसी प्रकार का बाहरी नियंत्रण नहीं लगाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि मीडिया ख़ुद अपने पर नियंत्रण रखे और पेड न्यूज़ जैसी बुराइयों के लिए ख़ुद के गाइडलाइंस बनाए।

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http://www.eklavyashakti.com
पेड न्यूज क्या है
पेड न्यूज क्या है ? इसकी परिभाषा क्या है। यह स्पष्ट नहीं किया जा सकता क्योंकि अनेक समाचार ऐसे होते हैं जो दिखने में ऐसे साधारण दिखते हैं परन्तु उसके पीछे गम्भीर षड़यन्त्र की योजना होती है। इमरजेन्सी के समय देश भर के समाचार पत्रों में खासकर मध्यप्रदेश में सत्यनारायण की कथा होने की सूचना समाचार पत्र में छपती थी परन्तु उसका अर्थ होता था यह आमन्त्रण विशेष मीसा बन्दी के समाचार उसके रिश्तेदार तक पहुचाने का माध्यम होता था। इसी तरह पाठक कोई समाचार को साधारण रूप से पढ़ लेता फिर लगता है इसका विशेष प्रयोजन है। मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग का पहले नाम सूचना एवं प्रकाशन था। सूचना देना मुख्य उद्देश्य था। परन्तु किसको सूचना दी जायगी र्षोर्षो प्रदेश की जनता से संपर्क बनाने के लिये प्रदेश के विकास में उनकी सहभागिता बढ़ाने ओर शासन द्वारा शिक्षा, स्वास्थय कृषि, पानी, पर्यावरण एवं बिजली सड़क के विकास के लिये गहन रूप से समाचार के माध्यम से उन तक पहंचना जरूरी है।
क्या प्रदेश के नागरिकों को विज्ञापन, लेखों के माध्यम से जागरूक करने का कार्य किस श्रेणी में आयेंगे। जनता के हित में सबेसे बड़ी पेड न्यूज देने वाली संस्था जनसंपर्क विभाग है। यह जनता के हित में है। आज राजनैतिक नेताओं ने चुनाव के समय ऐसी ऐजेसियों का सहारा लेते हैं जो सभी मीडिया को मेनेज करने का दावा करती है। अपनी इच्छानुसार समाचार छपवाने के लिये धन के साथ शराब और शवाब की व्यवस्था करती है। मध्य प्रदेश के लोकसभा ओर विधानसभा के चुनाव में दिल्ली और भोपाल के होटलों में कर रखी थी । मीडिया को मेनेज करने का यह कार्य मध्य प्रदेश बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में चल रहा है सेक्स शराब का उपयोग आज बड़े टेन्डर पास करने के बाद उनके पूरे होने तक जारी हें किसी परियोजना के घोटालों और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिये अखबार को विज्ञापन के माध्यम धन मुआया कराया
जाता है। पेड न्यूज का चलन टाईम्स आफ इण्डिया दिल्ली से 80 के दशक से शुरू हुआ था, जो अब दिल्ली, बम्बई, कलकत्ता, मद्रास के समाचार (मीडीया) पत्रों के साथ देश के सभी बैंक और बड़ी कंपनीयां 70 के दशक में पूरे पृष्ठ बुक कर लेती थी। जिसमें उनके संस्थान की प्रगति का विवरण छपता था परन्तु अब राजनैतिक पार्टीयां ´´पैड न्यूज´´ का उपयोग करती हैं। मीडिया आज समाचार नहीं दे रहा बल्कि भावनाओं को भड़काने का काम भी कर रहा है। फिल्म समाचार पत्र और मग्जीन हमेशा पेड न्यूज देते रहे हैं। परन्तु भाषायी समाचार पत्र भी पेड न्यूज के चक्कर मे आजकर चारों और समचनातन्त्र, प्रचार तन्त्र में बदलता जा रहा है। नदियों की स्वच्छता, पर्यावरण के प्रति जनता की उदासीनता को मीडिया ललकारता नहीं दिखता।
क्या आने वाले समय में लादेन, दाउद, इब्राहीम, नक्सलवादी भी न्यूज पेड का सहारा नहीं लेंगें? यह प्रवृति खतरनाक है। क्योंकि आज देश में ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है। इसका हमें विरोध करना चाहिए।

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http://shabdshikhar.blogspot.com 

'पेड़ न्यूज' के चंगुल में पत्रकारिता
आकांक्षा यादव : Akanksha Yadav 
आजकल ‘पेड-न्यूज’ का मामला सुर्खियों में है। जिस मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, ‘पेड-न्यूज’ ने उसकी विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया जिस तरह से लोगों की भूमिका को मोड़ देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है, ऐसे में उसकी स्वयं की भूमिका पर उठते प्रश्नचिन्ह महत्वपूर्ण हो जाते हैं। मीडिया का काम समाज को जागरूक बनाना है, न कि अन्धविश्वासी. फिर चाहे वह धर्म का मामला हो या राजनीति का. पर मीडिया में जिस तरह कूप-मंडूक बातों के साथ-साथ आजकल पैसे लेकर न्यूज छापने/प्रसारित करने का चलन बढ़ रहा है, वह दुखद है. शब्दों की सत्ता जगजाहिर है. शब्द महज बोलने या लिखने मात्र को नहीं होते बल्कि उनसे हम अपनी प्राण-ऊर्जा ग्रहण करते हैं। शब्दों की अर्थवत्ता तभी प्रभावी होती है जब वे एक पवित्र एवं निष्कंप लौ की भाँति लोगों की रूह प्रज्वलित करते हैं, उसे नैतिक पाश में आबद्ध करते हैं। सत्ता के पायदानों, राजनेताओं और कार्पोरेट घरानों ने तो सदैव चालें चली हैं कि वे शब्दों पर निर्ममता से अपनी शर्तें थोप सकें और लेखक-पत्रकार को महज एक गुर्गा बना सकें जो कि उनकी भाषा बोले। उनकी कमियों को छुपाये और अच्छाइयों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करे. देश के कोने-कोने से निकलने वाले तमाम लघु अखबार-पत्रिकाएं यदि विज्ञापनों के अभाव और पेट काटकर इस दारिद्रय में भी शब्द-गांडीव की तनी हुई प्रत्यंचा पर अपने अस्तित्व का उद्घोष करते हैं तो वह उनका आदर्श और जुनून ही है. पर इसके विपरीत बड़े घरानों से जुड़े अख़बार-पत्रिकाएँ तो 'पत्रकारिता' को अपने हितों की पूर्ति के साधन रूप में इस्तेमाल करती हैं.



‘पेड-न्यूज’ का मामला दरअसल पिछले लोकसभा चुनाव में तेजी से उठा और इस पर एक समिति भी गठित हुई, जिसकी रिपोर्ट व सिफारिशें काफी प्रभावशाली बताई जा रही हैं।पर मीडिया तो पत्रकारों की बजाय कारपोरेट घरानों से संचालित होती है ऐसे में वे अपने हितों पर चोट कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। अतः इस समिति की रिपोर्ट व सिफारिशों को निष्प्रभावी बनाने का खेल आरंभ हो चुका है। पर समाज के इन तथाकथित कर्णधारों को यह नहीं भूलना चाहिए कि रचनात्मक पत्रकारिता समाज के लिए काफी महत्वपूर्ण है। पत्रकारिता स्वतः स्फूर्ति व स्वप्रेरित होकर निर्बाध रूप से चीज को देखने, विश्लेषण करने और उसके सकारात्मक पहलुओं को समाज के सामने रखने का साधन है, न कि पैसे कमाने का. यहाँ तक कि किसी भी परिस्थिति में मात्र सूचना देना ही पत्रकारिता नहीं है अपितु इसमें स्थितियों व घटनाओं का सापेक्ष विश्लेषण करके उसका सच समाज के सामने प्रस्तुत करना भी पत्रकारिता का दायित्व है.

आज का समाज घटना की छुपी हुई सच्चाई को खोलकर सार्वजनिक करने की उम्मीद पत्रकारों से ही करता है। इस कठिन दौर में भी यदि पत्रकांरिता की विश्वसनीयता बढ़ी है तो उसके पीछे लोगों का उनमें पनपता विश्वास है. गाँव का कम पढ़ा-लिखा मजदूर-किसान तक भी आसपास की घटी घटनाओं को मीडिया में पढ़ने के बाद ही प्रामाणिक मानता है। कहते हैं कि एक सजग पत्रकार की निगाहें समाज पर होती है तो पूरे समाज की निगाहें पत्रकार पर होती है। पर दुर्भाग्यवश अब पत्रकारिता का स्वरूप बदल गया है। सम्पादक खबरों की बजाय 'विज्ञापन' और 'पेड न्यूज' पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। यह दौर संक्रमण का है. हम उन पत्रकारों-लेखकों को नहीं भूल सकते जिन्होंने यातनाएं सहने के बाद भी सच का दमन नहीं छोड़ा और देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया. ऐसे में जरुरत है कि पत्रकारिता को समाज की उम्मीद पर खरा उतरते हुए विश्वसनीयता को बरकरार रखना होगा। पत्रकारिता सत्य, लोकहित में तथा न्याय संगत होनी चाहिए।