शुक्रवार, 30 मार्च 2012

जनरल वी के सिंह को घूस का ऑफर प्रकरण , ४० लाख का टाट्रा ट्रक, १ करोड़ से भी अधिक में सेना की सप्लाई में



40 लाख में मिल जाते हैं सेना को एक करोड़ में बेचे गए ट्रक!

- अरविन्द सिसोदिया ,आज का दिन जनरल के पक्ष का रहा , रक्षा मंत्री का यह दावा ख़त्म हो गया की लिखित शिकायत नहीं थी । वैसे तो मंत्री स्तर के व्यक्ती से सेना का मुख्य जनरल कोई बात कह रहा हो तब , यह बात हल्की ही थी की कोई लिखित शिकायत नहीं...मगर लिखित शिकायत तो कई वर्ष पहले से थी...... यह बात सामने आनें के बाद अब रक्षा मंत्री के पास बचाव का कोई साधन नहीं बचा .....इसी कारण अब मंत्री से इस्तीफा  मांगा जा रहा हे....यूँ भी अब इतनी  किरकिरी होने के बाद उन्हें  पद पर बने रहने का हक़ नहीं बचाता ...

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40 लाख में मिल जाते हैं सेना को एक करोड़ में बेचे गए ट्रक!

आईबीएन-7 Mar 30, २०१२
http://khabar.ibnlive.in.com
 नई दिल्ली। सेना में अब तक 7000 टाट्रा ट्रक खरीदे गए हैं। दशकों से ये खरीद चल रही है लेकिन सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने एक झटके में इस सारी खरीद पर सवाल उठा दिए। उन्हें घूस का ऑफर करने वाले दलाल ने ये कहकर सारी खरीद को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया कि आपसे पहले भी लोग पैसे लेते थे और आपके बाद भी लोग पैसे लेंगे। जाहिर है ये बयान जनरल वी के सिंह को मनाने की कोशिश में दिया गया था। लेकिन इसके पीछे एक सच्चाई भी छुपी हुई थी।
टाट्रा ट्रकों की पहली डील एक चेक कंपनी ओमनीपोल से 1986 में साइन की गई। चेकोस्लोवाकिया के बंटने के बाद 1992 से ये ट्रक बीईएमएल यानि भारत अर्थ मूवर लिमिटेड ने टाट्रा सिपॉक्स यूके नाम की कंपनी से लेना शुरू किया और यहीं से शुरू हुआ असली खेल, यहीं से टूटा सेना का पहला नियम, पहला कायदा।
आईबीएन7 के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि टाट्रा सिपॉक्स यूके लंदन की एक ट्रेडिंग कंपनी है। ये टाट्रा ट्रक खुद नहीं बनाती। किसी भी सौदे में ये सेना का पहला नियम है कि खरीद हमेशा निर्माता से सीधे होनी चाहिए। किसी भी बिचौलिया कंपनी से नहीं। लेकिन इसके बावजूद टाट्रा सिपॉक्स कंपनी से ट्रक खरीदे गए। सार्वजनिक क्षेत्र बीईएमएल ने खरीद जारी रखी। आईबीएन7 के पास उस वक्त की टाट्रा सिपॉक्स कंपनी की बैलेंस शीट है। जिसमें ये साफ होता है कि इस कंपनी की कैपिटल महज 24 करोड़ रुपये की है लेकिन इसे ठेके हजारों करोड़ के मिले।
इस कंपनी के शेयर होल्डर रवि ऋषि और जोसेफ माजेस्की हैं। स्लोवाकियन पेपर्स के मुताबिक ये लोग अवैध तरीके से पैसों के हेरफेर में जेल तक जा चुके हैं। हालांकि रवि ऋषि का दावा है कि उनकी कंपनी कई देशों को ये ट्रक सप्लाई करती है। बीईएमएल ने सिपॉक्स कंपनी के साथ जो समझौता साइन किया उसके मुताबिक सिपॉक्स आध्यात्मकि, धार्मिक और सामाजिक सेवा मुहैया करवाती है। ये कंपनी इसी काम के लिए रजिस्टर्ड हुई है। यानी आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी भारत को सैन्य ट्रकों की सप्लाई कर रही है।
ये डील हर तरह से सवालों के घेरे में है। 2003 में खुद सेना का इक्विपमेंट ब्रांच सिपॉक्स से ट्रकों की खरीद पर सवाल उठा चुका है। आईबीएन7 के पास इस ब्रांच की लिखी चिट्ठियां मौजूद हैं। इस चिट्ठी में अफसर ने सवाल उठाए हैं कि आखिर इन ट्रकों का वास्तविक निर्माता कौन है, किससे और किस कीमत पर हो रही है इनकी खरीद। इस पूरी खरीद में आखिरकार टाट्रा सिपॉक्स की क्या भूमिका है लेकिन इस खत ने फाइलों में ही दम तोड़ दिया।
इस खत के बाद स्थिति में थोडा़ बदलाव आया। 2003 में बीईएमएल ने टाट्रा और वेक्ट्रा नाम की दो कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर साइन किया। खास बात ये थी कि इस बार फिर टाट्रा और वेक्ट्रा के बड़े शेयर होल्डर रवि ऋषि ही थे। 2003 में बीईएमएल ने टाट्रा सिपॉक्स के साथ दस सालों का अग्रीमेंट किया। नियमों के मुताबिक सेनाध्यक्ष को इस डील पर हर साल साइन करना पड़ता है। इस डील पर आखिरी बार फरवरी 2010 में हस्ताक्षर हुए और ये साइन थे जनरल दीपक कपूर के। इसके बाद जनरल वीके सिंह ने इस डील पर ही सवाल उठा दिए।
इस पूरी डील में बीईएमएल की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। 2003 में बीईएमएल ने चिट्ठी लिखकर सरकार से टाट्रा ट्रकों के लिए टाट्रा सिपॉक्स यूके से ज्वाइंट वेंचर करने की इजाजत मांगी। उस वक्त बीईएमएल ने दावा किया था कि टाट्रा सिपॉक्स यूके चेक रिपब्लिक कंपनी एमएस टाट्रा की मेजर शेयरहोल्डर है। सिपॉक्स इस कंपनी के लिए मार्केटिंग का काम करती है लेकिन दस्तावेज बीईएमएल के दावे पर ही सवाल उठाते हैं। इस कंपनी की कोई ओवरसीज खरीद-बिक्री की डिटेल मौजूद नहीं है।
सिपॉक्स यूके की कोई ब्रांच नहीं है। कंपनी को करोड़ों की डील महज 24 करोड़ रुपये के वर्किंग कैपिटल पर मिली। इस कंपनी के शेयरों की कीमत महज एक पाउंड यानि 80 रुपए है। कंपनी के मेजर शेयर होल्डर रवि ऋषि हैं। जिन्होंने बाद में वेक्ट्रा कंपनी बनाई जिसके पास टाट्रा सिपॉक्स के ज्यादातर शेयर हैं। चेक मीडिया में भी इस ट्रक बनाने वाली कंपनी पर सवाल उठ चुके हैं। बहरहाल जो एक ट्रक यूरोप में 40 लाख तक में मिल जाता है। उस एक ट्रक की खरीद के लिए भारतीय सेना को एक करोड़ रुपये तक चुकाने पड़े। सवाल ये है कि आखिर इस नुकसान का जिम्मेदार कौन-कौन है। 



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एंटनी को थी टाट्रा घोटाले की जानकारी!
Friday, March 30, 2012
ज़ी न्यूज ब्यूरो http://zeenews.india.com
    नई दिल्ली: टाट्रा ट्रक पर डीएनए अखबार के नए खुलासे ने खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्री एके एंटनी को टाट्रा ट्रकों की खरीद में गड़बड़ी की जानकारी वर्ष 2009 से ही थी। सरकार में शामिल मंत्रियों की तरफ से भी इस सिलसिले में कई बार शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बावजूद रक्षा मंत्री ने ध्यान नहीं दिया। 
     रक्षा मंत्री एंटनी ने राज्यसभा में कहा था कि सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने उन्हें घटिया क्वालिटी के 600 टाट्रा ट्रक की फाइल आगे बढ़ाने के लिए 14 करोड़ रुपए की रिश्वत पेशकश की बात मौखिक रुप से बताई थी। लिखित शिकायत करते तो कार्रवाई जरूर होती।  रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इसकी जानकारी सरकार में शामिल दो केंद्रीय मंत्रियों को भी थी। 
      डीएनए के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक कर्नाटक के वरिष्ठ नेता डॉ. हनुमनथप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि बीईएमएल के सीएमडी वीआरएस नटराजन ने 6000 करोड़ रुपए का टाट्रा ट्रकों का ठेका सीधे उत्पादन कंपनी को न देते हुए उसके ब्रिटिश एजेंट को दिया था। 
      यह रक्षा खरीद से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था। जिस पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा था। जवाब में रक्षा मंत्रालय ने जांच की बात कही थी। लेकिन यह भी कहा गया था जांच में समय लग सकता है।
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टाट्रा ट्रक सौदे पर गिरी गाज, मामला दर्ज

प्रकाशित Fri, मार्च 30, 2012 , 30 मार्च 2012,आईबीएन-7,नीतीश
http://hindi.moneycontrol.com
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्योरो (सीबीआई) ने आज टाट्रा ट्रक सौदा दलाली मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। सीबीआई सिर्फ आर्मी चीफ की चिट्ठी की सिफारिशों के मुताबिक ही नहीं, बल्कि पूरे मामले की जांच करेगी।
सूत्रों के मुताबिक टाट्रा ट्रक कंपनी चीफ रवि ऋषि से भी सीबीआई पूछताछ करेगी। उनके कार्यालयों की तलाशी भी सीबीआई ले सकती है। सीबीआई ने टाट्रा चीफ को इस संबंध में नोटिस जारी किया है।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि टाट्रा डील में बहुत दिन से दाल में काला चल रहा है।
एक सवाल के जवाब में राजीव शुक्ला ने कहा कि रक्षा मंत्री ने पहले ही कह दिया है कि वे जो कुछ कहेंगे संसद में कहेंगे। 
वहीं, भाजपा नेता जसवंत सिंह नें कहा कि प्रधानमंत्री अपना मौन व्रत तोड़ें।
रक्षामंत्री को टाट्रा ट्रक घोटाले की जानकारी थी? 
आखिर क्या है विवादों में घिरी टाट्रा डील?
सेनाध्यक्ष जनरल वी. के. सिंह द्वार कथित तौर पर ट्राटा डील में रिश्वत की पेशकश के आरोप के बाद यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर यह टाट्रा डील है क्या? 
आरोप है कि ट्रकों की सप्लाई में एक कंपनी बीईएमएल ने भारी मुनाफा कमाया। एक करोड़ रुपए में खरीदे गए ट्रक पूर्वी यूरोप से आधी कीमत पर खरीदे जा सकते थे।
भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड यानी बीईएमएल सेना को 1986 से ही टाट्रा ट्रकों की सप्लाई करती आ रही है। 2010 में बीईएमएल को 632 करोड़ के अनुमानित खर्चे पर 788 और टाट्रा ट्रक की सप्लाई का ऑर्डर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक जनरल वी.के. सिंह ने तीन मुद्दों पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं।
पहला टाट्रा ट्रकों को बीईएमएल ने खुद न बनाकर आयात किए थे, दूसरा ट्रकों में ड्राइविंग सीट बाईं ओर थी, जबकि भारत में वाहनों की ड्राइविंग सीट दाईं ओर होती है और तीसरा ट्रकों की सप्लाई में बीईएमएल भारी मुनाफा कमा रही थी।
एक करोड़ रुपए में खरीदे गए यही ट्रक पूर्वी यूरोप से आधी कीमत पर खरीदे जा सकते थे। टाट्रा ने साल 1997 में 7000 हजार गाड़ियां सप्लाई की थीं। 1964 से टाट्रा इंडियन आर्मी को अलग-अलग गाड़ियां सप्लाई करते आ रहा है। इन सभी पहलुओं की सीबीआई जांच करेगी। साथ ही टाट्रा के साथ सौदे की मियाद की भी जांच की जाएगी।

सेना प्रमुख सिंह के बयान : जांच न्यायिक हो या जे पी सी करे



- अरविन्द सिसोदिया
टाट्रा ट्रकों की खरीद का निर्णय प्रधान मंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल से जुड़ा हे ....सब जानते हें की यह सप्लाई उनके मित्र रवि श्रिशी से १९८६ में हुआ था .., तब ही जब बोफोर्स का हुआ था .., राजस्थान, कोटा  से प्रकाशित राष्ट्रदूत  के अंक दिनांक २९ व ३० मार्च के अंकों में बड़ी रिपोर्ट हे ...
अतः इस पूरे मामले की जांच न्यायिक हो या जे पी सी करे ...सी बी आई की जाँच सिर्फ और सिर्फ लीपापोती करेगी ........
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सेना प्रमुख सिंह के बयान पर विवाद
रक्षा मंत्री ने की सीबीआई जांच की सिफारिश
नई दिल्ली, मंगलवार, 27 मार्च २०१२

थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह के इन आरोपों के बाद सरकार नए विवाद से घिर गई कि उन्हें एक सौदे को मंजूरी देने के लिए 14 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की गई थी। मामले से सकते में आए रक्षा मंत्रालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है।

थलसेना प्रमुख के आरोपों पर सोमवार को संसद के दोनों सदनों में हंगामा हुआ और विपक्ष ने इन्हें गंभीर करार देते हुए सरकार पर कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।

जनरल सिंह ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि एक लॉबीस्ट ने उन्हें 600 घटिया वाहनों की खरीदी से जुड़े सौदे को मंजूरी देने के लिए 14 करोड़ रुपए की पेशकश की थी और पेशकश करने वाला कुछ ही समय पहले सेवानिवृत्त हुआ था।

जनरल सिंह ने कहा कि जरा कल्पना कीजिए, एक व्यक्ति साहस कर मेरे पास आता है और मुझसे कहता है कि यदि मैं सौदे को मंजूरी दे दूंगा तो वह मुझे 14 करोड़ रुपए देगा। वह मुझे यानी थलसेना प्रमुख को रिश्वत की पेशकश कर रहा था। उसने मुझसे कहा कि मुझसे पहले भी लोगों ने पैसा लिया है और बाद में भी लेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस बात से हैरान हुए और मामले की जानकारी रक्षा मंत्री एके एंटनी को दी, जिन्होंने चिंतित होते हुए कहा कि ऐसे लोगों को बाहर रखा जाना चाहिए।

जनरल सिंह ने वह समय नहीं बताया जब घटनाक्रम हुआ। उन्होंने रिश्वत की पेशकश करने वाले के नाम का भी खुलासा नहीं किया है। यह खबर सामने आते ही एंटनी ने मामले को गंभीर बताते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया।

आरोपों से इनकार : आरोपों के बाद मामले में शामिल होने की अटकलों में अपना नाम आने पर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदरसिंह ने आज आरोपों से इनकार किया। इससे पहले तेजिंदर पर रक्षामंत्री के फोनों की जासूसी के बारे में खबरें लीक करने का आरोप लग चुका है। उन्होंने कहा कि मेरा उन वाहनों से कोई लेना-देना नहीं था, जिनके लिए रिश्वत की पेशकश की गई। मैंने किसी निजी या रक्षा कंपनी के लिए काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे कानूनी कार्रवाई करेंगे, हालांकि यह नहीं बताया कि किसके खिलाफ वह यह कदम उठाएंगे।

रक्षा सौदों को लेकर उनकी जनरल सिंह से बातचीत होने के सवाल पर तेजिंदर सिंह ने कहा कि जहां तक मेरी समझ है, थलसेना प्रमुख को रक्षा सौदों से कोई लेना-देना नही हैं। ये सभी उच्च स्तर के सौदे हैं, जिन्हें रक्षा मंत्रालय देखता है।

जनरल वीके सिंह से जब एक इंटरव्यू में पूछा गया कि उन्होंने रिश्वत की पेशकश करने वाले को गिरफ्तार क्यों नहीं कराया तो उन्होंने कहा कि वे बयान का आशय नहीं समझ सके और इसलिए उन्होंने बयान देने वाले के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

जनरल सिंह ने कहा कि कोई व्यक्ति जो कुछ दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुआ है, आपसे कहता है कि यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको यह मिलेगा और जब आपने इस तरह की कोई बात नहीं सुनी हो तो आपको हैरानी होगी। उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आया कि वह क्या कह रहा था। मैंने उसे जाने के लिए कहा और इस बारे में रक्षा मंत्री को सूचित किया।

जब जनरल से पूछा गया कि उन्होंने उस लॉबीस्ट को तत्काल क्यों नहीं गिरफ्तार कराया। इस पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि बेहतर होता यदि मैं उसके खिलाफ शिकायत करता। जिस तरह से बात कही गई उससे समझ नहीं आया कि वह क्या कह रहा था।

सेना प्रमुख ने कहा कि वह महज यह कह रहा था कि यदि इस फाइल को मंजूरी मिल गई तो इतने का भुगतान किया जाएगा। सभी इसे इस तरह देखते हैं कि समस्या क्या है। यह ऐसा नहीं था कि मेरे हाथ में रिश्वत दी जा रही थी। यह अप्रत्यक्ष तरीका था और इसलिए गिरफ्तारी नहीं की गई।

भाजपा का एंटनी पर आरोप : खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने सरकार पर और खासतौर पर रक्षा मंत्री एंटनी पर एक गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधने और कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि बहुत तेजी से जांच होनी चाहिए और संसद में तत्काल परिणामों की जानकारी दी जानी चाहिए।

पूर्व रक्षा मंत्री और भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा कि एंटनी की कार्यशैली में चुप्पी, निष्क्रियता और अनिर्णय की स्थिति दिखाई देती है जो देश के लिए बहुत भारी है। हालांकि पार्टी नेता मुरली मनोहर जोशी और वेंकैया नायडू ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराने पर थलसेना प्रमुख को ही जिम्मेदार ठहराया।

पहले चुप क्यों थे जनरल : भाकपा ने अलग रुख अख्तियार करते हुए कहा कि जनरल ने यह बात पहले क्यों नहीं बताई। भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि वे इतने दिनों तक चुप थे। जब उनकी उम्र पर फैसला हो चुका है तो अब वे सारी बातें कह रहे हैं। उन्होंने पहले यह बात क्यों नहीं की।

कांग्रेस ने आलोचना की : मनीष तिवारी ने जनरल सिंह की आलोचना करते हुए कहा कि रिश्वत की पेशकश करने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कराना उनकी जिम्मेदारी थी। सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि जब भी कोई वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के आरोप लगाता है तो सरकार सुनिश्चित करती है कि मामला साफ हो। उन्होंने कहा कि जनरल सिंह ने अपने बयान में बहुत गंभीर बात कही है और सबकुछ साफ होना चाहिए। (भाषा)

जनरल सिंह ने देश पर उपकार किया है



- अरविन्द सिसोदिया
***** कोटि - कोटि प्रमाण *****
जनरल सिंह ने सेना के सच के लिये, कोयला और 2जी स्पेक्ट्रम घोटालों में व्यस्त कांग्रेस सरकार को चेता कर देशहित का बडा काम किया है। उन्हे मां भारती की ओर से कोटि - कोटि प्रमाण..........

जनरल सिंह सही हैं और कांग्रेस सरकार गलत है........
आखिर कब होगा सेना का आधुनिकी करण.....?
सेना की गुप्त रिपोटों को तो छोडिये.....रक्षा विभाग से सम्बंधित संसदीय समिति की बैठकों की अनेकानेक रिर्पोटों, कैग की चेतावनीयां और सामरिक उत्पादनों की आत्म निर्भरता के विश्लेषण गवाही देते है। कि भारत सरकार ने सेना की आधुनिकता के साथ गंभीरतम लापरवाहियां की हैं और उसे आज भी विदेशी रक्षा उत्पादकों का मौहताज बना रखा है।

सिंह तुम संघर्ष करो देश तुम्हारे साथ है।
जनरल की बात गौर से सुनो ओर सेना को तुरंत उन्नत करो....!
समय रहते सेना का सच उजागर कर,जनरल सिंह ने देश पर उपकार किया है।



‘हजार फीसदी सच हैं जनरल के दावे’

dainikbhaskar.com (28/03/12)       http://www.bhaskar.com

नई दिल्‍ली. सेना की बदहाली के बारे में आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह की ओर से पीएम को लिखी चिट्ठी का मामला गरमाता दिख रहा है। 'दैनिक भास्‍कर' और सहयोगी प्रकाशन ‘डीएनए’ में इससे जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद रक्षा राज्‍य मंत्री पल्‍लम राजू ने बुधवार को सफाई दी। पत्रकारों से बातचीत में राजू ने कहा, ‘आर्मी चीफ की चिट्ठी को सरकार गंभीरता से ले रही है।’ रक्षा राज्‍यमंत्री ने सेना की तैयारियों में कमी की बात भी कबूल की।  

यह खबर लिखने वाले पत्रकार सैकत दत्‍ता ने कहा है कि जनरल सिंह ने यह चिट्ठी 12 मार्च को पीएम को लिखी थी लेकिन अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है।  

पूर्व सेनाध्‍यक्ष जनरल शंकर रॉय चौधरी ने भी जनरल वीके सिंह का समर्थन किया है। उन्‍होंने कहा कि जनरल सिंह ने जो बातें चिट्ठी में कही हैं वो सौ नहीं हजार फीसदी सच हैं। उन्‍हें भी अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था। जनरल चौधरी ने यह भी कहा कि सेना की दिक्‍कतों के बारे में मिलिट्री ऑफ डिफेंस को कई वर्षों से जानकारी है।