मंगलवार, 1 मई 2012

48 घंटों में महाराष्ट्र में पांच किसानों ने की खुदकुशी


यह घटना आश्चर्य जनक  नहीं हे पूरे देश में किशानों की जो उपेक्षा हो रही हे यह उसका तो बहुत ही सूक्ष्म रूप मात्र हे भारत में जब भी अब नया क्रांति का आगाज होगा तो वह किसान के घर से होगा , महंगे खाद बीज और क्ष्रम के बाद भी जब उसे फसल घटे में बेंचना होती हे तो आखिर कब तक वह सहेगा यह जुल्म ...

महाराष्ट्र में पांच किसानों ने की खुदकुशी
Tue, 01 May 2012
Jagran Hindi News
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मुंबई। महाराष्ट्र दिवस के जश्न एवं नेताओं के लोक लुभावन वादों के बीच सूखा प्रभावित विदर्भ क्षेत्र में बीते 48 घंटों में पांच किसानों ने खुदकुशी की है। किसानों ने कर्ज के मकड़जाल से निजात के लिए मौत को गले लगाया है। राज्य में बीते चार माह में खुदकुशी करने वाले खेतिहारों का आंकड़ा 332 पहुंच गया है।
विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष और कृषक नेता किशोर तिवारी ने कहा, यवतमाल जिले के चिंचोली गांव में मंगलवार सुबह रामदास धाले नामक किसान ने आत्महत्या कर ली। कपास की खेती करने वाले रामदास पर तीन लाख का कर्ज था। तिवारी ने कहा, बीते 48 घंटों में यवतमाल जिले के अरिल गांव निवासी अजबराव मेश्राम और रामन्ना पेडकुलवार तथा वासिम के पोहारादेवी निवासी पार्वती बाई कादल और अमरावती जिले के सातेगांव निवासी श्रीराम काकड़ ने खुदकुशी कर ली। कर्ज चुका पाने में नाकामी के कारण ही इन चारों ने मौत को गले लगाया।
तिवारी ने राजनेताओं और अफसरों पर निशाना साधते हुए कहा, राहुल गांधी जैसी कद्दावर शख्सियत समेत तमाम नेता, मंत्री और अधिकारी इलाके का दौरा करते हैं। किसानों की दिक्कतें जानने के बाद समाधान का आश्वासन देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं।

पादरियों के व्यभिचार : नन सिस्टर मैरी चांडी की आत्मकथा

बहुत पहले से ही इस की कहानिया आती रहीं हें .....

सेक्सी किताबें पढ़वा, करते हैं सेक्स, प्रेग्नेंट कर गिरवा देते हैं गर्भ!
Source: Agency   01/05/2012

http://www.bhaskar.com/article
सेक्सी किताबें पढ़वा, करते हैं सेक्स, प्रेग्नेंट कर गिरवा देते हैं गर्भ!
नई दिल्ली. कैथोलिक चर्च की एक पूर्व नन ने पादरियों के व्यभिचार के बारे में सनसनीखेज खुलासा किया है। अपनी आत्मकथा में उसने लिखा है कि पादरी ननों के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं। जब वह गर्भवती हो जाती हैं तो बच्चों को गर्भ में ही मार देते हैं। ऐसी प्रवृत्ति यहां लगातार बढ़ रही है।
इस तरह नन सिस्टर मैरी चांडी की आत्मकथा 'ननमा निरंजवले स्वस्ति' औपचारिक रिलीज से पहले ही विवादित हो चुकी है। कैथोलिक धर्म में पूर्ण आस्था रखने वाली मैरी ने इन्हीं अनैतिक कृत्यों से परेशान होकर 12 साल पहले कान्वेंट छोड़ दिया था। 
उन्होंने कहा, 'मैंने वायनाड गिरिजाघर में हासिल अनुभवों को सहेजने की कोशिश की है। चर्च के भीतर की जिंदगी आध्यात्मिकता के बजाय वासना से भरी थी। एक पादरी ने मेरे साथ बलात्कार की कोशिश की थी। मैंने उस पर स्टूल चलाकर इज्जत बचाई थी।'
मैरी का कहना है कि चर्च में ननें सेक्सी किताबें पढ़ती है। वह जब 13 साल की थी तब ही घर से भाग गई थी और नन बन गई थी। वहां पर एक नन होते हुए उन्हें जिस तरह की पीड़ा से गुजरना पड़ा और उन्होंने जिस तरह के व्यभिचार को अपने इर्दगिर्द फैलते हुए देखा। उसी को आत्मकथा में शामिल किया हैं।
बताते चलें कि इसी तरह से नन सिस्टर जेस्मी ने एक किताब लिखकर धार्मिक पाखंडों का खुलासा किया था। इस किताब का नाम 'आमेन: द आटोबायोग्राफी' था। उन्होंने लिखा था कि जीसस के प्रति पूर्णतः समर्पित, सत्रह साल की उम्र में कॉन्वेंट में दाखिल हो गई थी। लंबे समय तक नन बनी रहने वाली सिस्टर जेस्मी ने जब खुली आंखों से अपने धर्म की बुराइयों को देखा तब उन्होंने कॉन्वेंट की चहारदीवारी तोड़कर बाहर निकलने का दुस्साहसिक फैसला ले लिया।