मंगलवार, 26 जून 2012

मायावती : सत्ता दुरउपयोग : 86 करोड़ रुपए से रिनोवेटेड बंगला, एक-एक खिड़की 15 लाख की


ये है मायावती का 86 करोड़ रुपए से रिनोवेटेड बंगला, एक-एक खिड़की 15 लाख की


मायावती: गरीब और दलितों के नाम पर वोट बटोरने वाली इस महिला ने भी सत्ता के दुरउपयोग में कोई कसर नहीं छोडी, रहने के बंगले पर किया गया खर्चा मुह आश्चर्य से खुला रखने के लिये पर्याप्त है।

ये है मायावती का 86 करोड़ रुपए से रिनोवेटेड बंगला,
एक-एक खिड़की 15 लाख की
प्रकाशन तरीख : 09-May-2012 21:07:18 स्त्रोत: एजेंसी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने राजधानी लखनउच्च् के 13 माल एवेन्यू स्थित अपने बंगले की मरम्मत के लिये राजकोष से 86 करोड़ रुपए से ज्यादा की धनराशि खर्च की है। राज्य के मौजूदा काबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव द्वारा सूचना का अधिकार :आरटीआई: के तहत मांगी गयी जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ है।
सूत्रों ने आज यहां बताया कि शिवपाल सिंह यादव ने मायावती के पूर्ववर्ती शासनकाल में नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से दाखिल आरटीआई अर्जी में मायावती द्वारा अपने बंगले के लिये सरकारी धन खर्च किये जाने सम्बन्धी जानकारी मांगी थी। अब इस बारे में जाहिर की गयी जानकारी में खुलासा हुआ है कि मायावती ने अपने बंगले की मरम्मत और जीर्णोद्वार के लिये सरकारी कोष से 86 करोड़ रुपए खर्च किये थे। मायावती इस समय राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से इस बंगले का इस्तेमाल कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा खर्च की गयी इस धनराशि का आंकड़ा 100 करोड़ तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि महकमा मायावती के बंगले के लिये व्यय की गयी कुल धनराशि का आकलन कर रहा है। राज्य के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस प्रकरण की जांच के आदेश दे दिये गये हैं और वित्तीय अनियमितता के दोषी पाये जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लखनउच्च् के माल एवेन्यू में पांच एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैले इस बंगले की मरम्मत और जीर्णोद्वार का काम वर्ष 2007 में मायावती के मुख्यमंत्री बनने के फौरन बाद शुरू हुआ था, लेकिन वह काम उनके कार्यकाल की समाप्ति तक यानी इस साल के शुरू में पूरा हो सका।
मायावती ने 13 माल एवेन्यू में शामिल करने के लिये गन्ना आयुक्त कार्यालय को ध्वस्त करा दिया था।

मायावती के इस एक मंजिला बंगले में बने लम्बे गलियारे में लॉकरों की पूरी श्रृंखला बनी हुई है। इस गलियारे में बसपा प्रमुख की वर्ष 1995 में पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए विशाल तस्वीर भी टंगी है।

इस गलियारे के बाहर एक बरामदा बना है, जिसमें बुलेटप्रूफ शीशे से युक्त दो खिड़कियां लगायी गयी हैं। इनमें से हर खिड़की की कीमत करीब 15 लाख रुपए है। इन खिड़कियों को खासतौर पर चंडीगढ़ में डिजायन किया गया था।

बंगले में ही 14 शयनकक्षों से युक्त दो मंजिला आलीशान अतिथि गृह भी बनवाया गया है, जिसमें गुलाबी इतालवी संगमरमर का फर्श है। परिसर में मायावती और बसपा संस्थापक कांशीराम की 20-20 फुट की दो प्रतिमाएं भी लगी हैं।

अपनी सुरक्षा के प्रति खासी चिंतित रहने वाली मायावती के इस बंगले में हिफाजत के भी पुख्ता बंदोबस्त हैं। बंगले की चहारदीवारी के चारों तरफ कंटीले तार बांधे गये हैं और हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर रखने के लिये क्लोज सर्किट टेलीविजन का पूरा संजाल लगाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक इस बंगले पर खर्च होने वाली ज्यादातर धनराशि राज्य सम्पत्ति विभाग ने व्यय की है लेकिन बाकी का खर्च निर्माण निगम, लखनउच्च् नगर निगम, गृह तथा संस्कृति विभागों द्वारा किया गया है।

amarujala : नेताजी की मौत का सच क्यों छिपा रहे थे प्रणब?


pranab mukherjee behind cover up on Subhash Chandra Bose air crash
नेताजी की मौत का सच क्यों छिपा रहे थे प्रणब?
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Tuesday, June 26, 2012
http://www.amarujala.com

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राष्ट्रपति पद के यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का सच छुपाने का आरोप लगाया गया है। पूर्व पत्रकार अनुज धर ने अपनी जल्द ही प्रकाशित होने वाली किताब में प्रणब मुखर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
किताब के मुताबिक आजाद हिंद फौज के संस्‍थापक सुभाष चंद्र बोस की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी। प्रणब मुखर्जी ने अपने विदेश मंत्री कार्यकाल के दौरान अपनी सीमा से बाहर जाकर इस सच को छुपाया। किताब के मुताबिक नेताजी ने आखिरी दिन कैसे गुजारे, इस पर पर्दा डालने में भी प्रणब मुखर्जी शामिल थे।
सरकारी दस्तावेज के मुताबिक सुभाष चंद्र बोस की मौत 1945 में ताइवान में हुए विमान हादसे में हुई थी। अनुज धर की किताब में इस बात को नकारा गया है कि सुभाष चंद्र बोस के मौत विमान हादसे में हुई। यह किताब अम‌ेरिका और ब्रिटेन की गुप्त सूची से हटाए गए रिकॉर्ड और भारतीय प्रशासन के दस्तावेजों पर आधारित है, जिन्हें पिछले 65 सालों से सीक्रेट रखा गया।
किताब में अनुज धर ने प्रणब मुखर्जी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने विदेश मंत्री कार्यकाल के दौरान विमान हादसे की थ्योरी को अपनी सीमा से बाहर जाकर समर्थन किया था। हालांकि सबूतों से साफ जाहिर था कि नेताजी की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी।
1996 की एक घटना का हवाला देते हुए धर कहते हैं कि विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने एक सीक्रेट नोट के जरिए सलाह दी थी कि भारत को बोस की मौत से जुड़े सबूत जमा करने के लिए रशियन फेडरेशन को सख्त कदम उठाने संबंधित नोटिस जारी करना चाहिए।
किताब के मुताबिक मुखर्जी ने इस नोट को देखा और विदेश सचिव सलमान हैदर को संयुक्त सचिव से मिलने का आदेश दिया। मीटिंग के बाद संयुक्त सचिव नोटिस के बारे में भूल गए और स्वार्थी हो गए। उन्हें ऐसा लगा कि केजीबी आर्काइव्स को खंगालने से भारत और रूस के संबंध खराब होंगे। ऐसे में मुखर्जी बोस की मौत की ताईवान थ्योरी के सबसे पहले समर्थक बन गए।

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