बुधवार, 5 सितंबर 2012

गहलोत सरकार ने कौड़ी के भाव में दी मंत्री बीना काक की संस्था को जमीन!

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गहलोत सरकार ने कौड़ी के भाव में दी मंत्री की संस्था को जमीन!

 राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी ही कैबिनेट मंत्री बीना काक की संस्था पर मेहरबान है। इस संस्था को नियमों को दरकिनार कर रिजर्व प्राईस की महज दस फीसदी दर पर दो हजार वर्गगज जमीन जयपुर की पॉश लोकेशन में महज सात लाख में आंवटित कर दी। जमीन की बाजार कीमत करीब 15 करोड़ है। वो भी तब जब इस संस्था को इससे पहले रियायती दर पर जमीन आवंटन की मांग सरकार ने 2008 में ठुकरा दी थी और राजस्थान आवासन मंडल ने आरक्षित दर पर पैसे जमा कराने का नोटिस दिया था। लेकिन सत्ता बदली तो नियम कायदे धरे रह गए।
जयपुर के पॉश मानसरोवर इलाके के शिप्रा पथ में जमीन 70 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर से कम रेट पर मिले, लेकिन लगभग दो हजार मीटर का प्लॉट गहलोत सरकार ने अगस्त 2011 में महज 352 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से आवंटित कर दिया। जिस संस्था को ये जमीन दी गई है उसका नाम है, ‘उमंग सेंटर फॉर स्पेशल एजेकुशन’ और इस संस्था की चेयरपर्सन राजस्थान की पर्यटन एवं वन मंत्री बीना काक हैं।
याचिकाकर्ता अभय पुरोहित के मुताबिक काक ने प्रभाव का इस्तेमाल किया और निरस्त फैसले को जिंदा कर दस फीसदी दर पर आंवटन करा लिया। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक बीना काक की संस्था को ये जमीन सरकारी रिजर्व प्राइस के महज 10 फीसदी रेट पर दी गई और वो भी तीन साल पुराने रेट पर। दरअसल काक की संस्था ने 2006 में राज्य सरकार से मानसिक तौर पर विक्लांग बच्चों के लिए रियायती दर पर जमीन मांगी थी। हाउसिंग बोर्ड ने संस्था को रिजर्व रेट के पचास फीसदी दर पर जमीन आंवटन का फैसला लिया, लेकिन तब की बीजेपी सरकार ने उसे निरस्त कर दिया।
लेकिन दिसंबर 2008 में सत्ता बदली तो काक मंत्री बन गईं। काक के दबाव के चलते गहलोत सरकार ने पिछली सरकार के रियायती दर पर जमीन आंवटन के निरस्त फैसले को बदल कर ये कहते हुए सिर्फ 10 फीसदी दर पर जमीन आंवटित कर दी कि राजस्थान में मांसिक तौर पर विक्लांग बच्चों और लोगों के लिए काम करने वाली अपनी तरह की ये इकलौती संस्था है।

आरटीआई कार्यकर्ता विवेक कालिया के मुताबिक पहले पचास फीसदी दर पर भी सरकार जमीन नहीं दे रही थी, लेकिन काक खुद मंत्री बनी तो दस फीसदी पर दे दी गई। हैरानी इस बात की भी है कि राज्य सरकार ने ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन होने से पहले ही काक की संस्था को जमीन आंवटित कर दी।

अगस्त 2011 में जमीन का आंवटन तीन साल पुराने तारीख 4 जनवरी 2008 की तारीख में किया। जबकि विभाग में ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन 6 महीने बाद 24 जुलाई 2008 में हुआ। नियम के मुताबिक जमीन आंवटन के लिए आवेदन के वक्त संस्था का पिछले तीन साल से रजिस्टर्ड होना जरूरी है।उमंग ट्रस्ट ये सफाई दे रहा है कि सब कुछ नियम के मुताबिक हुआ।
उमंग ट्रस्ट के ट्रस्टी दीपक कालरा के मुताबिक बिना पंजीयन के जमीन कैसे मिलती है?, कैबिनेट ने सबकुछ देखने के बाद आंवटन किया। आरोप ये भी है कि सरकार ने संस्था को रियायती दर पर जमीन आंवटन के वक्त आरक्षित दर 4,755 प्रति वर्ग मीटर बताई थी, लेकिन आंवटन के वक्त इसे घटाकर सिर्फ 3520 रुपए प्रति वर्गमीटर कर दिया गया।