रविवार, 23 सितंबर 2012

विचारक व प्रचारक : पंडित दीनदयाल उपाध्याय

 
विचारक व प्रचारक : पंडित दीनदयाल उपाध्याय (1916-1968) 
माननीय लाल कृष्ण आडवाणी जी के पोर्टल से -------
पंडित दीनदयाल उपाध्याय 1953 से 1968 तक भारतीय जनसंघ के नेता रहे। वे एक प्रखर विचारक, उत्कृष्ट संगठनकर्ता तथा एक ऐसे नेता थे जिन्होंने जीवनपर्यंन्त अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी व सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को अक्षुण्ण रखा। वे भारतीय जनता पार्टी के जन्म से ही पार्टी के लिए वैचारिक मार्गदर्शन और नैतिक प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। उनकी पुस्तक ''एकात्म मानववाद'' (इंटीगरल ह्यूमेनिज्म) जिसमें साम्यवाद और पूंजीवाद, दोनों की समालोचना की गई है, में मानव जाति की मूलभूत आवश्यकताओं और सृजन कानूनों के अनुरुप राजनीतिक कार्रवाई हेतु एक वैकल्पिक सन्दर्भ दिया गया है।
संक्षिप्त जीवनी
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म सोमवार,  दीनदयाल जी की माता श्री चुन्नीलाल शुक्ल, स्टेशन मास्टर धानकिया रेल्वे स्टेशन, जयपुर - अजमेर रेल मार्ग, जयपुर की पुत्री थीं, दीनदयाल जी का जन्म भी नानाजी के यहां धानकिया जिला जयपुर, राजस्थान में ही, 25 सितम्बर 1916 में हुआ था। जब वे मात्र 3 वर्ष के थे तब पिताजी का तथा 8 वर्ष के थे तब माताजी का एवं जब वे 16 वर्ष के थे तब छोटे भाई का निधन हो गया। 
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का पैतृक गांव नंगला - चन्द्रभान, मथुरा जिले में है, उनके दादाजी वहां के सुप्रसिद्ध ज्योतिषी पं. हरीरामजी शास्त्री थे, पिता श्री भगवती प्रसाद उपाध्याय, रेल्वे स्टेशन मास्टर, जलेसर रोड़, उ.प्र. और माता श्रीमती रामप्यारी देवी थीं। उनकी प्रथम संतान दीनदयाल एवं द्वितीय संतान शिवदयाल जी थे।   
            जब भरतपुर में एक त्रासदी से उनका परिवार प्रभावित हुआ, तो सन् 1934 में बीमारी के कारण उनके भाई का देहान्त हो गया। बाद में वे हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के लिए सीकर चले गए। सीकर के महाराजा ने पं उपाध्याय को एक स्वर्ण पदक, पुस्तकों के लिए 250 रुपये तथा प्रतिमाह 10 रुपये की छात्रवृत्ति दी।
पंडित उपाध्याय ने पिलानी में विशिष्टता (Distinction) के साथ इंटरमीडिएट परीक्षा पास की और बी.ए. करने के लिए कानपुर चले गये। वहां पर उन्होंने सनातन धर्म कालेज में दाखिला लिया। अपने मित्र श्री बलवंत महाशब्दे के कहने पर वे सन् 1937 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आए। उन्होंने सन् 1937 में प्रथम श्रेणी में बी.ए. परीक्षा पास की। पंडित जी एम.ए. करने के लिए आगरा चले गये।

वे यहां पर श्री नानाजी देशमुख और श्री भाऊ जुगाडे के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे। इसी बीच दीनदयाल जी की चचेरी बहन रमा देवी बीमार पड़ गयीं और वे इलाज कराने के लिए आगरा चली गयीं, जहां उनकी मृत्यु हो गयी। दीनदयालजी इस घटना से बहुत उदास रहने लगे और एम.ए. की परीक्षा नहीं दे सके। सीकर के महाराजा और श्री बिड़ला से मिलने वाली छात्रवृत्ति बन्द कर दी गई।

उन्होंने अपनी चाची के कहने पर धोती तथा कुर्ते में और अपने सिर पर टोपी लगाकर सरकार द्वारा संचालित प्रतियोगी परीक्षा दी जबकि दूसरे उम्मीदवार पश्चिमी सूट पहने हुए थे। उम्मीदवारों ने मजाक में उन्हें 'पंडितजी' कहकर पुकारा-यह एक उपनाम था जिसे लाखों लोग बाद के वर्षों में उनके लिए सम्मान और प्यार से इस्तेमाल किया करते थे। इस परीक्षा में वे चयनित उम्मीदवारों में सबसे ऊपर रहे। वे अपने चाचा की अनुमति लेकर बेसिक ट्रेनिंग (बी.टी.) करने के लिए प्रयाग चले गए और प्रयाग में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधिया में भाग लेना जारी रखा। बेसिक ट्रेनिंग (बी.टी.) पूरी करने के बाद वे पूरी तरह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों में जुट गए और प्रचारक के रूप में जिला लखीमपुर (उत्तर प्रदेश) चले गए। सन् 1955 में वे उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय प्रचारक बन गए।

उन्होंने लखनऊ में ''राष्ट्र धर्म प्रकाशन'' नामक प्रकाशन संस्थान की स्थापना की और अपने विचारों को प्रस्तुत करने के लिए एक मासिक पत्रिका ''राष्ट्र धर्म'' शुरू की। बाद में उन्होंने 'पांचजन्य' (साप्ताहिक) तथा 'स्वदेश' (दैनिक) की शुरूआत की। सन् 1950 में केन्द्र में पूर्व मंत्री डा0 श्यामा प्रसाद मुकर्जी ने नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध किया और मंत्रिमंडल के अपने पद से त्यागपत्र दे दिया तथा लोकतांत्रिक ताकतों का एक साझा मंच बनाने के लिए वे विरोधी पक्ष में शामिल हो गए। डा0 मुकर्जी ने राजनीतिक स्तर पर कार्य को आगे बढ़ाने के लिए निष्ठावान युवाओ को संगठित करने में श्री गुरूजी से मदद मांगी।

पंडित दीनदयालजी ने 21 सितम्बर, 1951 को उत्तर प्रदेश का एक राजनीतिक सम्मेलन आयोजित किया और नई पार्टी की राज्य ईकाई, भारतीय जनसंघ की नींव डाली। पंडित दीनदयालजी इसके पीछे की सक्रिय शक्ति थे और डा0 मुकर्जी ने 21 अक्तूबर, 1951 को आयोजित पहले अखिल भारतीय सम्मेलन की अध्यक्षता की।

पंडित दीनदयालजी की संगठनात्मक कुशलता बेजोड़ थी। आखिर में जनसंघ के इतिहास में चिरस्मरणीय दिन आ गया जब पार्टी के इस अत्यधिक सरल तथा विनीत नेता को सन् 1968 में पार्टी के सर्वोच्च अध्यक्ष पद पर बिठाया गया। दीनदयालजी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालने के पश्चात जनसंघ का संदेश लेकर दक्षिण भारत गए। 11 फरवरी, 1968 की काली रात ने दीनदयालजी को अकस्मात् मौत के मुंह में दबा लिया।
http://www.lkadvani.in


नोट : - कुछ लोगों को भ्रान्ति हे कि पंडित जी का जन्म मथुरा जिले के नंगला चन्द्रभान गांव में हुआ] यह गलत हे , उनका जन्म जयपुर के पास स्थित धानकिया रेल्वे स्टेशन, जयपुर - अजमेर रेल मार्ग,  पर नाना जी के घर हुआ , जिस घर में उनका जन्म हुआ वह स्मृति स्थल के रूप में संरक्षित हे  

मोबाइल कॉल दरों में हुआ इजाफा : आदत डालो और फिर मुनाफा कमाओ


 
























 पहले सस्ता दो , फिर आदत डालो और फिर मुनाफा कमाओ 
मोबाईल  कंपनियां  अब इसी अदा से  काम करना प्रारंभ  कर चुकी हें  ऐसा  ही FDI  में आने वाली कंपनियां  करेंगी 

 मोबाइल कॉल दरों में हुआ इजाफा

दूरसंचार कंपनियों ने किया बढ़ती लागत के बोझ को कम करने का प्रयास
पियाली मंडल और कात्या नायडू / नई दिल्ली/मुंबई September 21, 2012

दूरसंचार क्षेत्र ने प्रति सेकंड की दरों को लंबे समय तक बनाए रखने के बाद अब इनमें इजाफा शुरू कर दिया है। रिलायंस कम्युनिकेशंस और आइडिया सेल्युलर कुछ दूरसंचार सर्किलों में मोबाइल कॉल दरों में इजाफा कर चुकी हैं।

हालांकि भारती एयरटेल, वोडाफोन और टाटा टेलीसर्विसेज जैसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे कॉल दरों में तुरंत वृद्घि किए जाने पर विचार नहीं कर रही हैं। उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि दरों में बदलाव इस सेक्टर में जरूरी है। हालांकि दूरसंचार ऑपरेटरों ने पिछले कुछ महीनों में चुनिंदा सर्किलों में दरों में इजाफा किया है, लेकिन बड़ी वृद्घि पिछले साल की गई थी जब भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर ने कुछ सर्किलों में कॉल दरों में 20 फीसदी तक का इजाफा किया था।

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने कहा, 'लंबे समय से हम यह कहते रहे हैं कि यह उद्योग इतनी ऊंची लागत को लगातार वहन नहीं कर सकता। दूरसंचार कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत नहीं है। उनका मुनाफा बढ़ाए जाने के लिए सिर्फ कारक हैं, या तो दरों में बदलाव या फिर सरकार से करों में कटौती की मांग करना।'  हालांकि उन्होंने इस पर भी सहमति जताई कि दूरसंचार कंपनियां फिलहाल पूरे भारत में दरों में इजाफा नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा, 'उद्योग अब अलग अलग मूल्य निर्धारण नीति पर जोर दे रहा है। कोई भी ऑपरेटर दरों में कटौती नहीं करना चाहेगा। दूरसंचार ऑपरेटर इस पर विचार कर रहे हैं कि दरों में कब और कितनी वृद्घि की जानी चाहिए।'

ट्राई पर बीएसएनएल टीडीसैट पहुंची
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के मूल्य वर्धित सेवाएं (वैस) प्रदान करने संबंधी आदेश के खिलाफ अब सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल ने दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) का दरवाजा खटखटाया है।  इससे पहले जीएसएम और सीडीएमए ऑपरेटर तथा उनके संगठनों ने इस फैसले को टीडीसैट में चुनौती दी है।  बीएसएनएल ने 18 जुलाई के ट्राई के उस नोटिस को चुनौती दी है जिसमें वैस दिशा-निर्देशों को लागू करने को कहा गया है।

भारत में, बाल्मार्ट का प्रखर विरोध हो


 बालमार्ट  जैसे संस्थान भारत में इस लिए अधिक खतरनाक हें की वे यहाँ की बिकाऊ राजनीति  के सहारे अपने हित ही नहीं साधेंगे बल्कि ईसाई मिस्नरीज के हितों के लिए भी काम  करेंगी । भारतीय  संस्कृति की रक्षा के लिए अनिवार्य हे कि बाल्मार्ट का प्रखर विरोध हो।।।।।।।।।।।

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दैनिक भास्कर का समाचार 23 सितम्बर 2012 के अंक में 

अमेरिका की यह मल्टीनेशनल रिटेलर कंपनी- १९६२ में शुरू हुई, संस्थापक थे- सैम वॉल्टन।
बायोग्राफी की बात सुनते ही जवाब देते-वक्त नहीं है,८५०० स्टोर्स दुनियाभर में,२० लाख कुल कर्मचारियों की संख्या,१५ देशों में ५५ अलग अलग नामों से कर रही कारोबार
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पर न्यूयॉर्क में आज तक एक भी स्टोर नहीं खोल पाई दुनिया की सबसे बड़ी रिटेलर कंपनी
...पर न्यूयॉर्क में आज तक एक भी स्टोर नहीं खोल पाई दुनिया की सबसे बड़ी रिटेलर कंपनी

न्यूयॉर्क | रिटेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वॉलमार्ट १२ से १८ महीनों में भारत में रिटेल स्टोर खोल सकती है। कंपनी जल्द ही उन राज्यों की अनुमति लेगी जिन्होंने अपने यहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अनुमति देने की इच्छा जताई है। कंपनी के एशिया वाइस प्रेसीडेंट और सीईओ स्कॉट प्राइस ने यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल को एक इंटरव्यू में दी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कुल मिलाकर दो साल का समय पर्याप्त होगा, लेकिन कंपनी ने अभी यह तय नहीं किया है कि वह भारत में कितने स्टोर खोलना चाहेगी। वॉलमार्ट को मौजूदा साझेदार भारती एंटरप्राइजेस के साथ कारोबार जारी रहने की उम्मीद है। वॉलमार्ट इस समय भारत में इसके साथ १७ थोक स्टोर्स चला रही है। अब तक 10 राज्यों ने अपने यहां विदेशी रिटेल स्टोर खोलने की इजाजत देने की मंशा जताई है। इनमें राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, असम, आंध्रप्रदेश तथा दमन और दीव, दादरा नागर हवेली शामिल हैं।
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न्यूयॉर्क में प्रदर्शन करते लोग। 'वालमार्ट फ्री एनवायसी' के प्रवक्ता स्टेफनी याज्की ने कहा- वॉलमार्ट का पीछे हटना इसका सबूत है कि न्यूयॉर्क के लोग नहीं चाहते कि दुनिया की सबसे अमीर रिटेलर उनके घर के पास आए।
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वॉलमार्ट का भले ही दुनिया में बड़ा दबदबा हो, लेकिन अमेरिका तक में यह सिर्फ छोटे शहरों तक सीमित है, अमेरिका के भी बहुत कम बड़े शहरों में वॉलमार्ट मौजूद है। वॉलमार्ट के अमेरिका में कुल ४००० स्टोर हैं, लेकिन दिलचस्प यह है कि न्यूयॉर्क और वाशिंगटन डीसी की शहरी सीमा में कंपनी का एक भी स्टोर नहीं है। मैरीलैंड और वर्जिनिया की उपनगरीय सीमा के ४० किमी के दायरे में हालांकि कंपनी के कई स्टोर्स हैं। वॉलमार्ट की नजरें अब न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर हैं। कंपनी यहां २०,००० वर्ग फीट जैसी छोटी जगह पर भी स्टोर खोलने को तैयार हैं। उल्लेखनीय है कि वालमार्ट के सामान्य स्टोर का दायरा भी करीब १.९५ लाख वर्ग फीट तक का होता है। वाशिंगटन में वॉलमार्ट साल के अंत तक छह स्टोर्स खोलना चाहती है।
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वॉलमार्ट सबसे पहले रख सकती है कदम

निवेदिता मुखर्जी / नई दिल्ली September 16, 2012

http://hindi.business-standard.com 
विश्व की सबसे बड़ी खुदरा शृंखला वॉलमार्ट अपने सुपरमार्केट फॉर्मेट के साथ भारत में कदम रखने वाली संभवत: पहली अंतरराष्ट्रीय कंपनी होगी। करीब 446 अरब डॉलर के कारोबार वाली अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट भारत में अपने 195 स्टोरों के नेटवर्क के साथ कारोबार शुरू करने के लिए तैयार है। उसे भारती एंटरप्राइजेज के साथ अपने बैक-एंड और कैश ऐंड कैरी साझेदारी को महज फ्रंट एंड रिटेल  में बदलना होगा।

भारती की खुदरा शृंखला ईजी डे देश में विभिन्न फॉर्मेट के तहत 195 स्टोरों का संचालन करती है। वॉलमार्ट ने 2006 में भारती के साथ मिलकर संयुक्त उद्यम की स्थापना की थी ताकि भारतीय समूह के रिटेल स्टोरों को बैक-एंड सुविधा मुहैया कराने के साथ-साथ कैश ऐंड कैरी या थोक आउटलेटों की स्थापना की जा सके। अब सरकार ने बहुब्रांड खुदरा में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दे दी है जिससे फ्रंट एंड रिटेल स्टोरों में वॉलमार्ट के निवेश का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि यह राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है कि उनके राज्य में खुदरा क्षेत्र में एफडीआई निवेश की अनुमति होगी या नहीं।

कुल 195 ईजी डे आउटलेटों में से 47 आउटलेट उन राज्यों (उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश) में स्थित हैं जो बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई का विरोध कर रहे हैं। साथ ही, 69 स्टोर पंजाब में हैं जहां अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गठबंधन सरकार सत्ता में है। हालांकि बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई निवेश के मुद्दे पर पंजाब सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही 'हां' कह देगी।

राज्य सरकारों के निर्णय के अलावा बहुब्रांड खुदरा कंपनियों को शहर की न्यूनतम आबादी का ध्यान रखना होगा। सरकार ने कहा है कि कम से कम 10 लाख आबादी वाले शहर में एक स्टोर होना चाहिए। साथ ही उसके आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में नगरपालिका या शहरी आबादी होनी चाहिए। भारती समूह ने अपने स्टोर वाले शहरों के बारे में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, लेकिन यह सही है कि ईजी डे 100 से अधिक शहरों में अपने स्टोरों का संचालन करती है और उनमें कई शहरों की आबादी 10 लाख से अधिक है। भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक राजन भारती मित्तल ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा कि ईजी डे संभवत: सबसे पहले खुदरा कारोबार के लिए संयुक्त उद्यम होगी और इस संदर्भ में दोनों पक्ष जल्द ही समझौते पर हस्ताक्षरण करेंगे।