मंगलवार, 2 अक्तूबर 2012

हिन्दू जीवन मूल्यों में ही है,सभी समस्याओं का निदान - सुरेश सोनी, सह सरकार्यवाह


***हिन्दू जीवन मूल्यों में ही है,सभी समस्याओं का निदान ***
- सुरेश सोनी, सह सरकार्यवाह
कोटा 2 अक्टूबर 2012। सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त समस्याओं का हल भारतीय जीवन पद्धति में आज के विश्व स्तरीय विश्लेषक मानते हैं और विश्व समुदाय को प्रभ
ावी नेतृत्व प्रदान करने भारतीय समाज अपनी क्षमताओं को और अधिक उन्नत करे। यह विचार मंगलवार को कोटा में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोटा महानगर एकत्रीकरण को, स्वामी विवेकानन्द विद्यालय, महावीर नगर कोटा तृृतीय के परिसर में सम्बोधित करते हुए, संघ के सह सरकार्यवाह माननीय सुरेश सोनी जी ने कहे। उन्होने कहा सम्पूर्ण विश्व सहित भारत एक संक्रमण काल से गुजर रहा है, इसमें भारतीय चिन्तन की सकारात्मक सामाजिक चेतना से सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त करते हुए, नई उन्नती के विश्व मंगल को प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होने स्वयंसेवकों को आव्हान किया कि हिन्दू जीवन मूल्य ही सभी समस्याओं का निदान हैं तथा प्रत्येक स्वयंसेवक समाज, संस्कृति और देश के लिये निरंतर सक्रीय रहे। सह सरकार्यवाह ने कहा समस्याओं के कारण ही परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है तथा समाज में अच्छी दिशा में जाने की सक्रियता उत्पन्न होती है। जो कि वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व सहित भारत में भी घटित हो रही है। ऐसे में सकारात्मक सोच के साथ प्रभावीरूप से समाज के खड़े होने पर सार्थक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होने विस्तारपूर्वक विश्व की वर्तमान दयनीय स्थिती पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुये बताया कि भोगवादी अपसंस्कृति के कारण अमेरीका-यूरोप भयंकर आर्थिक संकट से ग्रस्त हैं। सामाजिक विषमताओं, टूटे हुये परिवारों की त्रासदी से ग्रस्तता, अनैतिकता व व्याभिचार सहित घोर समस्या ग्रस्त है, तथा वहाँ के बुद्धिजीवी, विचारक और राष्ट्रहित चिन्तक जिन दृष्टिकोणों को निदान विकल्प के रूप मंे देख रहे हैं वे सभी हजारों-हजार वर्षों से भारतीय संस्कृति हिन्दू जीवन पद्धति मंे हैं।
माननीय सुरेश सोनी ने कहा कि भारत का वर्तमान, विश्व दृष्टिकोण में अच्छे भविष्य का सूचक है क्योंकि सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक युवा जनसंख्या भारत को प्राप्त हैं तथा आगामी बीस वर्षों में करोड़ों की संख्या में ज्ञानवान युवक भारत के पास होंगे ,जो कि भारत की नोलेज पॉवर (ज्ञान शक्ति) होगी, वह विश्व को दिशा देगी। उन्हांेने कहा आज विश्व मंे प्रकृति संरक्षण, विश्व शान्ति एवं सुखी जीवन की लगातार चिंतायें की जा रही हैं और इन सभी सस्याओं का हल भी वे ईर्स्टन थोट (पूर्व दिशा के विचार) में देखते है।
श्री सोनी ने कहा व्यापार की नैतिकता होती है,अनैतिक व्यापार अन्ततः पतन को ही प्राप्त होता है। आजकल विज्ञापनों के द्वारा लालसा पैदा की जाती है उसके द्वारा व्यापार बढाया जाता है। इस तरह के अनैतिक व्यापार से भारत भी ग्रस्त है। इससे सावधान रहाना होगा, इसका प्रतिकार और प्रतिरोध भी करना चाहिये। उन्होने कहा अब कई जगह टीवी फ्री दिन का प्रचलन चल पडा है, एक दिन पूरा परिवार टीवी से दूर रहेगा, आपस में , मित्रों से बात करेगें - मिलेंगे, उस दिन टीवी नहीं देखेंगे। अर्थात अनावश्यक लालसाओं में फंसने के बजाये उनसे सावधान रहना बेहतर होगा। हमारी संस्कृति में संयमित जीवन पद्यती को बहुत अधिक महत्व दिया गया है।
सोनी ने कहा हमारी संस्कृति ने कभी भी भोगवाद को अपनी जीवन शैली पद्धति में महत्व नहीं दिया है बल्कि हमेशा ही पृथ्वी, गाय, नदियों, व तुलसी को माता के रूप में माना है। पीपल, वट वृक्ष, व सर्प की पूजा की है अर्थात् प्रकृति परिवार में हमने अपने आप को एक अंग माना है। उन्होने कहा ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या प्रकृति के अनावश्यक क्रूरतम दोहन के कारण उत्पन्न हुई है। नदियाँ सूख रही है जल स्तर नीचे दर नीचे जा रहा है। मनुष्य जैसे तैसे पानी पी लेता है मगर पानी की कमी से पशु पक्षी विलुप्त होेते जा रहे हैं। वायु प्रदूषित हो रही है। यह प्रकृति का विनाश मानव के विनाश तक पहुँच सकता है।
सह सरकार्यवाह ने कहा कि भारत में भ्रष्टाचार शासन व सामाजिक दोनों ही क्षेत्रों में बढ़ा है तथा जनता ने कई बार भ्रष्टाचार के कारण सरकारों को बदला भी हैं किन्तु सरकार बदलनेे के बावजुद भ्रष्टाचार नहीं रूका और निरन्तर बढ़ाता ही गया आज भ्रष्टाचार की राशि में कितने शुन्य है यह गिनना मुश्किल हो गया है। उन्हांेने कहा कि भ्रष्टाचार सिर्फ सरकार बदलने से समाप्त नहीं होगा बल्कि समाज को भी सोच बदलनी होगी।
उन्हांेने कहा कि देश की स्वतंत्रता के पूर्व जो आजाद भारत के स्वप्न हमारे अग्रज महापुरूषों ने देखे थे वे पूरे नहीं हुये है। नेताजी सभाषचन्द्र बोस ने, महात्मा गांधी ने और रातप्रशाद बिस्मिल सहित अनेकों क्रांतिकारियों ने अपने अपने विचार आजादी के बाद के बारे में कैसा भारत होगा व्यक्त किये थे। वीर सावरकर के विचार तो बहुत अधिक लोकप्रिय हुये थे। मगर आजादी के बाद भी हम वैसा भारत नहीं बना पाये।
उन्होंने कहा किसी भी देश की समुन्नति में सम्पुर्ण समाज के योगदान को संघ के संस्थापक माननीय डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार ने स्वातं़त्र्य संघर्ष के दौरान ही समझ लिया था तथा उन्हांेने कहा था कि समाज का समुन्नत होना भी जरूरी है और इसी हेतु हेडगेवार जी ने संघ शाखाओं के माध्यम से सदचरित्र व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ की जो कि आज पुरे भारत में प्रभावी भूमिका के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा स्वयंसेवक के रूप में हम जहाँ भी है वहाँ स्वप्रेरणा से राष्ट्रहित, समाजिक समरसता और नैतिकता पूर्ण जीवन मूल्यों की अभिवृद्धि करते हुए संघ विचार को अपने परिवार में, अपने मौहल्ले में स्थापित करते हुए समाज में विस्तार करें। श्री सोनी ने कहा जब तक हिन्दु समाज संगठित नहीं होगा तब तक भारतीय समस्याओं का हल नहीं होगा।
श्री सोनी ने अपने सम्बोधन में आज 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादूर शास्त्री को श्रृद्धापूर्वक याद करते हुये कहा कि वे भारत की भलाई और नव निर्माण के लिये जीवन जीने वाले महापुरूष थे। मंच पर श्री सोनी के साथ कोटा विभाग संघचालक प्रभाष चन्द्र तेलंग एवं कोटा महानगर संघचालक आंेकारमल पुरोहित थेे। कोटा महानगर के 2365 गणवेषधारी स्वंयसेवकों को वे सम्बोधित कर रहे थे।