शनिवार, 3 नवंबर 2012

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकरी मंडल बैठक







चेन्नई राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक आज सवेरे प्रारंभ हुई। परम पूजनीय  सरसंघचालक मोहन जी भगवत तथा सरकार्यवाह मान  सुरेश जी जोशी ने भारत माता के चित्र पर दीप प्रजव्लन किया। दूसरे चित्र में देश के सभी भागों से आए ४०० प्रतिनिधि ।

चेन्नई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के
अखिल भारतीय कार्यकरी मंडल बैठक का उद्घाटन
 प्रेस वार्ता के प्रश्नोत्तर
दिनांक २ नवम्बर २०१२
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारी मंडल बैठक जो पहली बार तमिलनाडु में आयोजित होने जा रही है, का उद्घाटन सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के कर कमलों से दिनांक २ नवम्बर को हुआ| तमिल सूक्तियों और मंत्रोच्चार के बीच सर कार्यवाह श्री सुरेश जोशी की उपस्थिति में श्री भागवत ने दीप प्रज्ज्वलन किया | इस तीन दिवसीय बैठक में देश के सभी भागों से आए ४०० प्रतिनिधि भाग लेंगे | उद्घाटन के पश्चात् सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबले ने पत्रकारों को संबोधित कर अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के उद्देश्य से अवगत कराया |
श्री दत्तात्रेय होसबले का उद्बोधन
आप सभी जानते हैं की आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक पहली बार तमिलनाडु में होने जा रही है | संगठन की दृष्टि से संघ ने तमिलनाडु को दो भागों में विभक्त किया है, उत्तर और दक्षिण तमिलनाड |उत्तर तमिलनाड में इस प्रकार की बैठक का यह पहला अवसर है | कुछ वर्ष पूर्व कन्याकुमारी में ऐसी ही बैठक हुयी थी | तमिलनाड के लोगों ने आत्मीय सत्कार से सभी पदाधिकारियों को अभिभूत कर दिया | चक्रवाती हवा और प्रतिकूल वातावरण के उपरांत ऐसी सुंदर व्यवस्था और तमिलनाड के व्यंजनों का रसास्वादन वास्तव में बहुत आनंद दायक रहे | श्री सरसंघचालक जी द्वारा आरंभ हुए कार्यक्रम का समापन ४ नवम्बर को होगा | इस प्रकार की बैठकें वर्ष में दो बार होती है | एक मार्च में और दूसरी दसहरा और दीपावली के मध्य | इस बैठक में हम अगले तीन वर्षों में विस्तार की योजनाओं पर चर्चा करेंगे | हम सभी जानते है कि स्वामी विवेकानंद की १५० वीं जयंती पूरे देश में मनाई जाएगी | विवेकानंद केंद्र और संघ प्रेरित संगठन मिल कर आयोजन समिति का गठन करेंगे, जिसकी घोषणा १९ नवम्बर को दिल्ली में की जाएगी | कार्यक्रमों का शुभारम्भ २५ दिसंबर से होगा | २५ दिसंबर का महत्त्व इसलिए भी है की इसी दिन से स्वामी विवेकानंद ने तीन दिन का ध्यान कन्याकुमारी के पास समुद्र के चट्टान पर बैठ कर किया था. आज वह चट्टान ‘विवेकानंद रॉक’ के नाम से प्रसिद्ध है | ये कार्यक्रम पञ्च आयामों – युवा, मातृशक्ति, प्रबुद्ध वर्ग, ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों के लिए आयोजित किये जायेंगे, जिनका आधार स्वामीजी के मूल सिद्धांत ‘त्याग और सेवा’ होंगे | इन कार्यक्रमों में संघ द्वारा योगदान के विषय पर भी हम चर्चा करेंगे | वास्तव में पिछले ६ महीनों से इस विषय में योजनायें चल रही थी प्रत्येक प्रान्त की एक प्रांतीय समिति और एक अखिल भारतीय समिति का गठन होगा |

हम दो प्रस्तावों पर यहाँ चर्चा करेंगे :-
१.       हाल ही में उत्तर पूर्व और असम में हुए घटनाक्रम : बंगलादेश से हो रही लगातार घुसपेठ के कारण जुलाई के अंतिम और अगस्त के प्रथम सप्ताह के मध्य बोडो क्षेत्र में हुए हिंसक आन्दोलन से हम सभी अवगत है | निरंतर हो रही घुसपेठ ने देश के सांप्रदायिक समीकरण बदल दिए | देश के सभी भागों यहाँ तक की तमिलनाडू में भी बंगलादेशी घुसपेठियों ने अपने घर बसा लिए हैं | इन में से अघिकांश ने चुनाव पहचान पत्र तक बना लिए और सांसद और विधायक के चुनाव में अब इनकी भूमिका निर्णायक हो गयी है | हाल ही में बोडो क्षेत्र में हुई हिंसा इसी से उत्पन्न हुए तनाव का परिणाम था | संघ के स्वयंसेवकों ने सभी आवश्यक राहत सेवाकार्य कर अपना कर्त्तव्य निभाया |
हम इस समस्या को देश की मुख्य धारा से जोड़ना चाहते हैं | सभी घुसपेठियों की पहचान कर उनका नाम चुनाव सूचि से हटाना होगा और उन्हें उनके देश भेजने के सभी प्रयास किये जाने चाहिए |
२.      चीन भी अपना वर्चस्व विशेषकर एशियाई क्षेत्र में बढाने के लिए आस्तीन तान रहा है| सन् १९६२ में चीन ने २१ अक्तूबर को हमारे देश में आक्रमण किया था और हमारी शर्मनाक हार के बाद ही पीछे हटा | वर्त्तमान पीढ़ी को देश पर आसन्न संकटों के प्रति जागरूक होना चाहिए | देश की वर्तमान सरकार पर भी दवाब बनाने की आवश्यकता है |डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में देश के वैज्ञानिकों ने आतंरिक सुरक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में प्रगति की है लेकिन चीन के मुकाबले हमारी सामरिक तैयारी अपर्याप्त है | बैठक में इस सन्दर्भ में चर्चा होगी और प्रस्ताव पारित किया जायेगा |
३.      जनवरी-फरवरी २०१३ में प्रयाग में पूर्ण कुम्भ मेला होगा | बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी लोगों और साधू-संतों के आगमन के इस सुअवसर का सदुपयोग करते हुए गो रक्षा और मंदिरों की सुरक्षा आदि विषयों पर चर्चा करने की भी योजना है |
एक बार फिर तमिलनाडु की जनता और तमिलनाड के संघ स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए आशा करता हूँ की यह एक अविस्मरणीय आयोजन रहेगा |
प्रश्नोत्तरी :-
प्रश्न - १ : क्या तमिलनाडु के मुद्दों – मुल्लैपेरियार , कावेरी और श्रीलंका पर भी प्रस्ताव होगा ?
उत्तर : इन विषयों पर चर्चा हुई है | वस्तुतः श्रीलंका के विषय पर कुछ समय पर प्रस्ताव भी पारित किया था | संघ इस विषय को तमिल नाडू का नहीं बल्कि सारे देश का मानता है |  
प्रश्न -२ : सभ्यताओं का निर्माण लोगों के प्रवर्जन, स्थानांतरण से होता आया है| फिर संघ ने अकेले बंगलादेशी घुसपेठियों को ही क्यों निशाना बनाया है ?
उत्तर : सांस्कृतिक रूप से एक होते हुए भी बंगलादेश और पाकिस्तान राजनीतिक रूप से अलग हैं | उनकी अलग नागरिकता है | इसलिए गैर क़ानूनी रूप से हमारे देश की सीमाओं प्रवेश करनेवाले लोगों को घुसपेठिया ही समझा जायेगा |
इसे रोका जाना संभव है या नहीं यह लोगों और सरकार की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है |
प्रश्न -३ : यदि हिन्दू इस देश में शरण माँगते हैं तो आपका रुख क्या होगा ? क्या यह उनसे भिन्न होगा ?
उत्तर : किसी भी देश से भारत आनेवाले हिन्दुओं को शरणार्थी ही समझा जायेगा | संविधान ने भी १९४७ में यही स्वीकार किया है | हिन्दुओं के लिए यही उनका देश है | हिन्दू प्रताड़ना , अत्यचार और अपमानित होने पर यहाँ आते हैं |
प्रश्न – ४ : संघ की राय में विरोधाभास है | हिन्दुओं को शरणार्थी और अन्य सभी घुसपेठिये- ऐसा क्यों ?
उत्तर : सांस्कृतिक रूप से हम एक हैं | लेकिन बंगालदेश और पाकिस्तान ने खुद को धर्मतंत्र घोषित किया है | हमारा देश धर्म निरपेक्ष है | हिन्दुओं को वहां कोई अधिकार नहीं है | सामान नागरिकता भी नहीं है | बंगलादेशी यहाँ प्रताड़ित होकर नहीं आते हैं |
प्रश्न -५ : गणतंत्र और बहुसंख्यवाद इस देश के स्तम्भ रहे हैं | क्या यह विचार इसके विरुद्ध नहीं है ?
उत्तर : हम तो सारे विश्व को ही अपना कुटुंब मानते है | इसका अर्थ क्या यह माना जाये की चीन हम पर आक्रमण करे और हम कहें की हमारे भाई ने ही हमला किया है इसलिए चुचाप बैठे रहो ?
प्रश्नं – ६ : केजरीवाल भाजपा और कांग्रेस दोनों पर सामान रूप से आरोप लगा रहा है | आपकी इस विषय में क्या राय है ?
उत्तर : भाजपा और कांग्रेस को ही इस प्रश्न जवाब देना है | संघ ने अपना अभिमत प्रकट कर दिया है की जिन पर भी आरोप लगे हैं उन्हें जाँच का सामना कर स्वयं को निर्दोष साबित करना होगा |
प्रश्न -७ : गडकरी एक स्वयंसेवक है |क्या उनके विषय इस बैठक में इस पर चर्चा नहीं करेंगे? भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आप कांग्रेस पर की इतनी भर्त्सना करते हैं, उनके बारे में क्या निर्णय होगा?
उत्तर : गडकरी स्वयंसेवक है | आतंरिक रूप से इस विषय में कुछ चर्चा हो सकती है | निर्णय तो भाजपा को ही लेना है | हम हस्तक्षेप नहीं करते |
प्रश्न- ८ : भूमि हड़पने के मामले में आपके एक प्रस्ताव में जिक्र था | गडकरी भी इन आरोपों से घिरे हैं ?
उत्तर- अकेले गडकरी ही क्यों ? हम किसी पर भी इस नरम नहीं हैं | कोई भिन्न मान दंड नहीं है | सामाजिक प्रमाणिकता और राष्ट्रीय अखंडता सर्वोपरि है |
प्रश्न –९ : राजनितिक स्थिति के विषय में आपके क्या विचार है ?
देश के अलग अलग हिस्सों में स्थिति अलग अलग है | कहाँ कठिन है | लेकिन एक बात है : लोगों ने एक बेहतर विकल्प के लिए परिवर्तन का मन बना लिया है |
प्रश्न – १० : येदुरप्पा बनाम गडकरी | येदुरप्पा को पदत्याग का निर्देश दिया था लेकिन गडकरी को नहीं, क्यों ?
उत्तर : लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद येदुरप्पा को पद छोड़ना पड़ा था | लेकिन गडकरी पर तो केवल मिडिया ही आरोप लगा रही है | येदुरप्पा के मामले में पार्टी का  निर्णय था की उन्हें पदत्याग कर देना चाहिए |
प्रश्न -११ : समाज का बहुत राजनैतिककरण होता अनुभव हो है ?
उत्तर  : यह चिंता का विषय है | यह ठीक नहीं है | डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था की आवश्यकता अध्यात्मिकीकरण की है ना की  राजनीतिक करण की | यह अत्यंत चिता का विषय है की जनता राजनितिक दलों में अपना विश्वास खोती जा रही है |Posted by Vishwa Samvad Jodhpur

इसाई बनाने के तौर - तरीके : एक घटना का विवरण




इसाई बनाने के तौर - तरीके---By Arya Jasdev,,Jugal Kishore Soman
एक घटना का विवरण :-
सन २००५ की १७ फरवरी को मैं मेरी धर्मपत्नी श्रीमती शांता के साथ बैंगलोर से जयपुर की ट्रेन में यात्रा के लिए दोपहर को रवाना हुआ . अर्द्ध
रात्रि सिकंदराबाद / हैदराबाद स्टेशन पर कुछ वनवासी से युवक हमारे कोच में आ घुसे , संयोग से उनके डिब्बे में आते ही ट्रेन चल पड़ी . ये वनवासी
, जो करीब ५ - ६ थे , घबराए हुए से थे . हिन्दी भाषा तो उनको आती नहीं थी किन्तु राजस्थान का एक परिवार जो बेल्लारी में रहता था , इसी कम्पार्टमेंट में था , उन्होंने उनसे बात की तो मालुम पडा कि ये लोग करीब ३०० की संख्या में धर्मावरम से कोटा जा रहे हैं , जहां इन हिन्दुओं को धर्मांतरण कर इसाई बनाया जाना है . इन लोगों को लाने वाले एजेंट टाइप पादरी ( ४ पुरुष और २ महिलाएं ) इसी कोच में यात्रा कर रहे हैं और उनके पास ही इनकी टिकटें हैं . साधारण कोच में यात्रा कर रहे इन लोगों को टिकट चेकर ने पकड़ लिया इस कारण ये लोग अपनी टिकटें लेने हेतु इस कोच में आये हैं . चूंकि अगले स्टेशन के आने में करीब २ घण्टों की देरी थी अतः हमने धीरे - धीरे इन लोगों से धर्मांतरण संबंधी पूरी जानकारी प्राप्त कर ली . इन लोगों को काफी लालच देकर ये लोग ले जा रहे थे किन्तु इन भोले भाले वनवासियों के मन में भारी क्लेश भी था . ये कत्तई अपना हिन्दू धर्म छोड़ने को तैयार नहीं थे किन्तु भयंकर भुखमरी के शिकार विवश होकर इस कुकृत्य को करने तैयार हुए .
मैंने करीब ४ बजे प्रातः ( १८ फरवरी ) सरदारशहर के डा. महेश शर्मा को मोबाइल से संपर्क कर पूरी कहानी बताई . फिर जयपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुख्यालय " भारती भवन " के पधाधिकारियों ( माननीय शंकर जी भाई साहब एवं माननीय अजेय जी भाई साहब ) को पूरी स्थिति से अवगत कराया . चूंकि यह ट्रेन अगले दिन ( १९ फरवरी ) अर्द्ध रात्रि को कोटा पहुँचती है अतएव इस कुकृत्य का भंडाफोड़ की पूरी तैयारी कर ली गयी .
इस बीच एजेंटो को कुछ संदेह हुआ कि यह ( यानि मैं ) कोई न कोई गड़बड़ कर रहा है . इटारसी आने से पहले एक छोटे स्टेशन पर कारण वश गाड़ी रुक गयी , मैं मोबाइल चार्ज करने हेतु एक कर्मचारी के सामने ही बने कमरे की ओर गया . चूंकि हमारा कोच सामने ही था - देखता हूँ कि चारों पुरुष एजेंटों ने अपने सूटकेशों से रिवाल्वरे / पिस्तोले निकाल कर अपनी कमर में दबा ली और डिब्बे से नीचे उतर कर मेरी तरफ बढ़ने लगे . प्रभु कृपा से उसी समय ट्रेन ने चलने की व्हीशल बजा दी , कोच के दूसरे दरवाजे से मैं भी भाग कर कोच में चढ़ गया . मुझे खतरे का ज्ञान तो हो ही गया था , अतः मैं कम्पार्टमेंट के अन्दर की तरफ बैठ गया ( हम दोनों की सीट ७ ; ८ थी - साइड वाली ) इटारसी आते आते नेटवर्क आ गया और मैंने जयपुर सारी बात बता दी . उन्होंने भोपाल तक सावधान रहने को कहा . भोपाल स्टेशन पर २ हट्टे कट्टे स्वयं सेवक कोच में चढ़ कर मेरे पास ही बैठ गए . भवानी मंडी में २ और कार्यकर्ता आ गए .
२ घंटे विलम्ब से गाड़ी करीब ४ बजे कोटा पहुँची . भयंकर शर्दी थी . करीब १५०० स्वयं सेवकों ने गाड़ी को घेर लिया . सारे वनवासियों को उन्होंने संरक्षण प्रदान किया और उन एजेंटों को पुलिस के हवाले किया .
चूंकि मैंने पहले ही बता दिया था कि इन वनबंधुओं के पास कोई गर्म कपड़ा भी नहीं है और भूखें भी हैं अतएव कोटा के साथी कम्बले आदि लेकर ही स्टेशन आये थे . जहां इनके रुकने की व्यवस्था संघ परिवार ने की थी वहाँ इन लोगों के सहायतार्थ २ - ३ कन्नड़ / हिन्दी भाषी बंधुओं की भी व्यवस्था के साथ ही साम्भर - चावल आदि दक्षिण भारतीय भोजन का प्रबंध भी था . नंगे पैरों में चप्पल / जूतों तक पहनाने की अतुलनीय व्यवस्था कोटा साथियों ने की .
मुझे सीधे जयपुर पहुँचाने का आदेश था ताकि रूबरू पूरी बात बता सकूँ .
तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा जी ने विधान सभा में धर्मांतरण रोकने संबंधी विधेयक पारित कर राज्यपाल ( उस समय श्रीमती प्रतिभा पाटिल थी ) के समक्ष प्रस्तुत किया , जो आज तक पास नहीं हो सका . आशा है कि यदि आगामी राज्य सरकार गैर कांग्रेसी आई तो हो सकता है कि यह विधेयक पुनः सदन पटल पर रख कर पास कराया जाय .
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साथियों , इस तरह के कुकृत्य न जाने देश में कहाँ कहाँ हो रहे हैं , यदि हम सोये रहें , अपने ही भाइयों से छुआछूत जैसा भेदभाव करते रहेंआपके साथ बांटना चाहता हूँ तो ....... हाँ , ऐसा ही होता रहेगा ...........By Arya Jasdev,,Jugal Kishore Soman

1984 के सिख विरोधी दंगों पर आस्ट्रेलियाई संसद में 'नरसंहार प्रस्ताव'

यह प्रश्न कांग्रेस के ही खिलाफ हे की, उस पर देश का कानून क्यों लागू  नहीं होता ......
मोदी या किसी भी दूसरे से प्रश्न करने से पहले कांग्रेस को इस प्रश्न का जबाब देना ही होगा की उसके खिलाफ किसी भी अपराध का कोई दोषी क्यों नहीं होता ?????????????????????.......................
यह देश के संघीय ढांचे का मखोल नहीं हे क्या की कांग्रेस से जड़े अनेकों अपराधों पर आज तक किसी कोई कार्यवाही नहीं हुई और मामले हमेशा रफा दफा कर दिए गए। बोफोर्स से लेकर वाड्रा तक यही हुआ।।।।।।।।




http://www.aajkikhabar.com/hindi
1984 के सिख विरोधी दंगों पर आस्ट्रेलियाई संसद में प्रस्ताव
Monday, Oct 29 2012
 आज की खबर
सिडनी| आस्ट्रेलिया में एक सांसद ने नवम्बर 1984 में भारत में भड़के सिख विरोधी दंगों को भयानक हिंसा करार देने की आस्ट्रेलिया सरकार से मांग करते हुए संसद में एक 'नरसंहार प्रस्ताव' पेश करने का निर्णय लिया है। ये दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे।
सिख सुरक्षाकर्मियों द्वारा 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद राजधानी नई दिल्ली में तीन दिनों तक चले दंगों में कम से कम 3,000 सिख मारे गए थे।
सुप्रीम सिख काउंसिल ऑफ आस्ट्रेलिया की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आस्ट्रेलियाई संघीय संसद के सदस्य, वॉरेन एंटस आस्ट्रेलियाई संसद में 'नरसंहार प्रस्ताव' पेश करेंगे। यह प्रस्ताव पहली नवम्बर को स्थगन बहस के दौरान हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में पेश किया जाएगा।
प्रस्ताव में आस्ट्रेलियाई सरकार से इस तथ्य को मान्यता देने की मांग की जाएगी कि नवम्बर 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ भयानक हिंसा का एक संगठित अभियान चला था, और उस दौरान हुई हत्याएं नरसंहार के प्रतिशेध एवं दंड सम्बंधी संयुक्त राष्ट्र के समझौते के तहत 'नरसंहार' थीं।
मौजूदा समय में लिबरल पार्टी ऑफ आस्ट्रेलिया के मुख्य विपक्षी सचेतक वॉरेन ने कहा कि उन्होंने इसलिए इस प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया, क्योंकि सिखों के साथ अतीत में हुए और वर्तमान में हो रहे बर्ताव से वह भयभीत हैं।
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1984 दंगा: आस्ट्रेलिया की संसद में याचिका दायर
Friday, November 02, 2012,
http://zeenews.india.com/hindi
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मेलबर्न : आस्ट्रेलिया की संसद में एक याचिका पेश कर भारत में वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों को ‘नरसंहार’ के तौर पर चिन्हित करने की गुजारिश की गई है। संघीय सांसद वारेन एन्श ने गुरुवार को यह याचिका पेश की। उन्होंने कहा कि जब तक 1984 के दंगों को ‘सिख विरोधी दंगे कहना जारी रहेगा’, सिख समुदाय को राहत नहीं मिलेगी। इस याचिका पर चार हजार 453 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं और इसमें आस्ट्रलिया की सरकार से भारत सरकार को 1984 के दंगे के जिम्मदार लोगों को सजा दिलाने के लिए ‘सभी उचित कदम’ उठाने का आग्रह करने को भी कहा गया है।
गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया की संसद में पहली बार यह मुद्दा उठाया गया है।‘सिख्स फॉर जस्टिस’ समूह की ओर से जारी बयान के अनुसार उत्तरी क्विंसलैंड के सांसद एन्श ने कल राजधानी कैनबरा में इस याचिका को पढ़ा और इस दौरान सिख समुदाय के सैकड़ों लोग मौजूद थे। (एजेंसी)
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सिखों की याद में निकाला कैंडल मार्च
 Dainik Jagran Hindi News
Sat, 03 Nov 2012
जासं, लुधियाना
http://www.jagran.com/punjab/ludhiana-9813796.html
सिख रांयोटस विक्टमस आर्गेनाइजेशन ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए निर्दोष सिखों की याद में शुक्रवार को कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च पुरानी सब्जी मंडी स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा से आरंभ होकर प्रताप बाजार, गिरजाघर चौक, किताब बाजार, केसरगंज मंडी चौक, रेखी चौक के रास्ते जीटी रोड से होते हुए घंटा घर चौक में समाप्त हुआ। घंटा घर चौक में आर्गेनाइजेशन के नेताओं ने मोमबत्ती जलाकर एवं 2 मिनट का मौन रख कर शहीदों को श्रद्घांजलि दी। इस समय सिख रायोटस विक्टम आर्गेनाइजेशन के प्रधान कुलविंदर सिंह नीटू ने 28 साल पहले दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों में हुए सिख विरोधी हुए दंगों की सख्त शब्दों में निन्दा की। उन्होंने देश के राष्ट्रपति एवं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया कि वे सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को उनके जुर्म के अनुसार सजा दिलवाकर सिख कौम के जख्मों पर मरहम लगाएं। इस समय प्रधान कुलविंदर संह नीटू, बलविंदर सिंह खालसा, हरचरन सिंह चन्नी, रणजीत सिंह बतरा, गुरदेव सिंह, अमरीक सिंह, गुरदीप सिंह काहलों, जसवीर सिंह, कल्याण सिंह, हरमिन्द्रपाल सिंह बब्बू, डीपी सिंह प्रीत, गुरमीत सिंह ताजपुर, बलदेव सिंह, गुरमीत सिंह, गुरदीप सिंह व जसपाल सिंह भी मौजूद थे।