सोमवार, 26 नवंबर 2012

बालों का झड़ना बन्द : देशी चिकित्सा




बालों का बढ़ना
देशी  चिकित्सा :
1. अमरबेल : 250 ग्राम अमरबेल को लगभग 3 लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाये तो इसे उतार लें। सुबह इससे बालों को धोयें। इससे बाल
लंबे होते हैं।
2. त्रिफला : त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।
3. कलौंजी : 50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें। इस उबले हुए पानी से बालों को धोएं। इससे बाल 1 महीने में ही काफी लंबे हो जाते हैं।
4. नीम : नीम और बेर के पत्त
ों को पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा लें और इसके 2-3 घण्टों के बाद बालों को धो डालें। इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे भी होते हैं।
5. लहसुन : लहसुन का रस निकालकर सिर में लगाने से बाल उग आते हैं।
6. सीताफल : सीताफल के बीज और बेर के बीज के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। ऐसा करने से बाल लंबे हो जाते हैं।
7. आम : 10 ग्राम आम की गिरी को आंवले के रस में पीसकर बालों में लगाना चाहिए। इससे बाल लंबे और घुंघराले हो जाते हैं।
8. शिकाकाई : शिकाकाई और सूखे आंवले को 25-25 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूटकर इसके टुकड़े कर लें। इन टुकड़ों को 500 ग्राम पानी में रात को डालकर भिगो दें। सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे सिर की मालिश करें। 10-20 मिनट बाद नहा लें। इस तरह शिकाकाई और आंवलों के पानी से सिर को धोकर और बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगाने से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार बन जाते हैं। गर्मियों में यह प्रयोग सही रहता है। इससे बाल सफेद नहीं होते अगर बाल सफेद हो भी जाते हैं तो वह काले हो जाते हैं।
9. मूली : आधी से 1 मूली रोजाना दोपहर में खाना-खाने के बाद, कालीमिर्च के साथ नमक लगाकर खाने से बालों का रंग साफ होता है और बाल लंबे भी हो जाते हैं। इसका प्रयोग 3-4 महीने तक लगातार करें। 1 महीने तक इसका सेवन करने से कब्ज, अफारा और अरुचि में आराम मिलता है।
नोट : मूली जिसके लिए फयदेमन्द हो वही इसका प्रयोग कर सकते हैं।
10. आंवला : सूखे आंवले और मेंहदी को समान मात्रा में लेकर शाम को पानी में भिगो दें। प्रात: इससे बालों को धोयें। इसका प्रयोग लगातार कई दिनों तक करने से बाल मुलायम और लंबे हो जायेंगे।
11. ककड़ी : ककड़ी में सिलिकन और सल्फर अधिक मात्रा में होता है जो बालों को बढ़ाते हैं। ककड़ी के रस से बालों को धोने से तथा ककड़ी, गाजर और पालक सबको मिलाकर रस पीने से बाल बढ़ते हैं। यदि यह सब उपलब्ध न हो तो जो भी मिले उसका रस मिलाकर पी लें। इस प्रयोग से नाखून गिरना भी बन्द हो जाता है।
12. रीठा
* कपूर कचरी 100 ग्राम, नागरमोथा 100 ग्राम, कपूर तथा रीठे के फल की गिरी 40-40 ग्राम, शिकाकाई 250 ग्राम और आंवले 200 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी का चूर्ण तैयार कर लें। इस मिश्रण के 50 ग्राम चूर्ण में पानी मिलाकर लुग्दी (लेप) बनाकर बालों में लगाना चाहिए। इसके पश्चात् बालों को गरम पानी से खूब साफ कर लें। इससे सिर के अन्दर की जूं-लींकें मर जाती हैं और बाल मुलायम हो जाते हैं।
* रीठा, आंवला, सिकाकाई तीनों को मिलाने के बाद बाल धोने से बाल सिल्की, चमकदार, रूसी-रहित और घने हो जाते हैं।
13. गुड़हल : * गुड़हल के फूलों के रस को निकालकर सिर में डालने से बाल बढ़ते हैं।
* गुड़हल के पत्तों को पीसकर लुग्दी बना लें। इस लुग्दी को नहाने से 2 घंटे पहले बालों की जड़ों में मालिश करके लगायें। फिर नहायें और इसे साफ कर लें। इस प्रयोग को नियमित रूप से करते रहने से न केवल बालों को पोषण मिलेगा, बल्कि सिर में भी ठंड़क का अनुभव होगा।
* गुड़हल के पत्ते और फूलों को बराबर की मात्रा में लेकर पीसकर लेप तैयार करें। इस लेप को सोते समय बालों में लगाएं और सुबह धोयें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से बाल स्वस्थ बने रहते हैं।
* गुड़हल के ताजे फूलों के रस में जैतून का तेल बराबर मिलाकर आग पर पकायें, जब जल का अंश उड़ जाये तो इसे शीशी में भरकर रख लें। रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में मल-मलकर लगाना चाहिए। इससे बाल चमकीले होकर लंबे हो जाते हैं।
14. शांखपुष्पी : शांखपुष्पी से निर्मित तेल रोज लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।
15. भांगरा :
* बालों को छोटा करके उस स्थान पर जहां पर बाल न हों भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकलते हैं जिनके बाल टूटते हैं या दो मुंहे हो जाते हैं। उन्हें इस प्रयोग को अवश्य ही करना चाहिए।
* त्रिफला के चूर्ण को भांगरा के रस में 3 उबाल देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरल यानी पीसकर रख लें। इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बन्द जाता है तथा इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।
* आंवलों का मोटा चूर्ण करके, चीनी के मिट्टी के प्याले में रखकर ऊपर से भांगरा का इतना डाले कि आंवले उसमें डूब जाएं। फिर इसे खरलकर सुखा लेते हैं। इसी प्रकार 7 भावनाएं (उबाल) देकर सुखा लेते हैं। प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ सेवन से करने से असमय ही बालों का सफेद होना बन्द जाता है। यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने वाला, उम्र को बढ़ाने वाला लाभकारी योग है।
* भांगरा, त्रिफला, अनन्तमूल और आम की गुठली का मिश्रण तथा 10 ग्राम मण्डूर कल्क व आधा किलो तेल को एक लीटर पानी के साथ पकायें। जब केवल तेल शेष बचे तो इसे छानकर रख लें। इसके प्रयोग से बालों के सभी प्रकार के रोग मिट जाते हैं।

16. अनन्तमूल : अनन्तमूल की जड़ का चूर्ण 2-2 ग्राम दिन में 3 बार पानी के साथ सेवन करने से सिर का गंजापन दूर होता है।
17. तिल :
* तिल के पौधे की जड़ और पत्तों के काढ़े से बालों को धोने से बालों पर काला रंग आने लगता है।
* काले तिलों के तेल को शुद्ध करके बालों में लगाने से बाल असमय में सफेद नहीं होते हैं। प्रतिदिन सिर में तिल के तेल की मालिश करने से बाल हमेशा मुलायम, काले और घने रहते हैं।
* तिल के फूल और गोक्षुर को बराबर मात्रा में लेकर घी और शहद में पीसकर लेप बना लें। इसे सिर पर लेप करने से गंजापन दूर होता है।
* तिल के तेल की मालिश करने के एक घंटे बाद एक तौलिया गर्म पानी में डुबोकर उसे निचोड़कर सिर पर लपेट लें तथा ठण्डा होने पर दोबारा गर्म पानी में डुबोकर निचोड़कर सिर पर लपेट लें। इस प्रकार 5 मिनट लपेटे रखें। फिर ठंड़े पानी से सिर को धो लें। ऐसा करने से बालों की रूसी दूर हो जाती है।
और अंत एक बात याद रखे !! किसी भी विदेशी कंपनी का कोई भी शैंपू का प्रयोग मत करे !!
ये clinic all clear,clinic plus, head and shoulder,dove,pantene सब विदेशी कंपनिया बनती है ! और बहुत ही खतरनाक कैमिकलों का प्रयोग करती है ! !! और हर 2 -3 महीने बाद एक ही शैंपू मे थोड़ा बदलाव कर उसका नाम बादल कर फिर बेचने लग जाती है !आपको मालूम है pantene से एक लड़की के सारे बाल झड़ गये !!और वो खबर अखबार मे भी आई है !!

कोटा,राजस्थान Kota,Rajasthan




                                                            कोटा जग मंदिर (छत्र बिलास तालाब )





                                                          कोटा सर्किट हॉउस 


कोटा,राजस्थान
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
कोटा, जिसे पहले 'कोटाह' नाम से जाना जाता था, राजस्थान की राजधानी जयपुर से लगभग 246 किमी. दक्षिण में स्थित है। कोटा की पहचान चम्बल नदी से भी है। इस नदी पर कोटा में 'कोटा डैम' के नाम से एक बाँध का निर्माण भी हुआ है, जिससे बिजली के उत्पादन में मदद मिल सके।

व्यापारिक केंद्र:-
कोटा एक प्रमुख व्यापारिक केन्द्र है। साथ ही यह एक औद्योगिक नगरी भी है, यहाँ पर कॉटन टेक्सटाइल, केमिकल पावर प्लांट्स आदि कई उद्योग-धन्धे उपलब्ध है, जैसे - डी.सी.एम., सैमटेल, बिड़ला सीमेन्ट, श्रीराम फ़र्टिलाइजर आदि। इसे राजस्थान का 'पावर हाउस' भी कहा जाता है। यह शहर कोटा साड़ी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। म्यूज़ियम, मन्दिर और पिकनिक स्पॉट से भरे इस शहर में अब मॉल भी खुल चुके हैं। गुमानपुरा और कोटरी रोड यहाँ के दो प्रमुख बाज़ार हैं। वर्तमान में यह एक शैक्षणिक नगरी के रूप में स्थापित हो चुका है। कोटा में यहाँ पर स्थित कोचिंग संस्थानों के कारण 'शैक्षणिक नगरी' का नाम मिला। इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षाओं में यहाँ के छात्रों को जितनी सफलता मिलती रही है, उतनी की कल्पना भी दूसरे शहर नहीं कर सकते।
इतिहास :-
इतिहास के पन्नों पर 12वीं सदी में भी कोटा की चर्चा है। 17वीं शताब्दी में मुग़ल शासक जहाँगीर के शासनकाल के दौरान बूँदी के राजा राव रतन सिंह ने कोटा का कुछ हिस्सा अपने बेटे माधो सिंह को दे दिया। तब से कोटा राजपूती सभ्यता व संस्कृति का प्रतीक बन गया। 1631 में शाहजहाँ द्वारा राव रतन सिंह के बेटे को कोटा का शासक घोषित कर दिया गया, तब से कोटा स्वतंत्र रूप से कार्य करने लगा। बाद में महाराव भीमसिंह ने कोटा के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवहन :-
कोटा सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, मुम्बई और भारत के अन्य शहरों से भी यह सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। यहाँ पर दो मुख्य बस स्टैण्ड -

    नयापुरा में राजस्थान रोडवेज की बस
    डी.सी.एम रोड पर इण्टर स्टेट बस टर्मिनल।

रेलवे द्वारा;-
सेन्ट्रल रेलवे का यह मुख्य जंक्शन है, जो दिल्ली - मुम्बई मुख्य रेलमार्ग पर स्थित है। इसलिए रेलमार्ग से भी यहाँ पहुँचना आसान है। 'मुम्बई राजधानी' सहित लगभग 100 ट्रेन यहाँ पर रुकती हैं। ,हवाई जहाज़ द्वारा कोटा का नज़दीकी बड़ा हवाई अड्डा जयपुर में है, जहाँ के लिए दिल्ली, मुम्बई, पुणे, इन्दौर, अहमदाबाद और देश के अन्य शहरों से उड़ानें उपलब्ध हैं।

शिक्षा---
कोटा में मुख्य रूप से तीन विश्वविद्यालय हैं :-
    1.राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी,
    2.कोटा यूनिवर्सिटी और
    3.वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी।

यहाँ पर विभिन्न इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य सामान्य कॉलेज भी हैं। इसके अलावा राजस्थान सरकार ने यहाँ 'इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी' (आई.आई.आई.टी.) के निर्माण की भी घोषणा की है।
कोचिंग संस्थान :-
इन सबसे भी बढ़कर कोटा यहाँ का कोचिंग के लिए जाना जाता है। इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों के कारण ही पूरे भारत में कोटा की पहचान एक 'एजुकेशन हब' के रूप में हुई है। एलेन कैरियर इंस्टीट्यूट, कैरियर प्वॉइंट, बंसल क्लासेज, रेजोनेंस, मोशन आईआईटी-जेईई, वाइब्रेंट एकेडमी, राइज एकेडमी आदि कोंचिग संस्थान कोटा में इंजीनियरिंग और मेंडिकल की तैयारी में संलग्न हैं।


सैमटेल ग्लास लिमिटेड बंद (कलर पिक्चर ट्यूब्स) कोटा, राजस्थान




Published on 27 Nov-2012

कब क्या हुआ

परेशानी: श्रमिकों ने फर्नेश से छेड़छाड़ की शिकायत बोरखेड़ा पुलिस-प्रशासन से की, श्रमिकों का आंदोलन जारी
* 6 नवंबर से ग्लास फैक्ट्री में उत्पादन बंद
* 7 नवंबर को गैस की सप्लाई बंद होने के साथ ही कलर में उत्पाद ठप
* 8 नवंबर को फैक्ट्री की बिजली कटी, फैक्ट्री अंधेरे में डूबी
* 17 नवंबर की रात प्रोप्रिन गैस समाप्त होने से फर्नेश में लगे बर्नर बंद
* 20 नवंबर को डीजल खत्म होने से जनरेटर बंद
:- पीएफ कटा पर जमा नहीं
श्रमिकों का कहना है कि प्रबंधन ने उनका पीएफ काटा, लेकिन भविष्य निधि कार्यालय में जमा नहीं कराया। इसके लिए वे लगातार पीएफ कमिश्नर से संपर्क कर रहे हैं।
:- आज मशाल जुलूस
सेमटेल ग्लास एवं कलर के श्रमिकों को मंगलवार शाम को 6.00 बजे सेमटेल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक क्रांति तिवारी के नेतृत्व में कोटड़ी चौराहे से लेकर एरोड्रम सर्किल, घोड़े वाला बाबा चौराहा होते हुए पुलिस कंट्रोल रूम तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
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सेमटेल फैक्ट्री में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ
भास्कर न्यूज , कोटा
सेमटेल फैक्ट्री में अंधेरे का फायदा उठाने के लिए अब असामाजिक तत्वों की घुसपैठ शुरू हो चुकी है। रविवार की रात को भी कुछ हथियार बंद असामाजिक तत्वों ने फैक्ट्री में फर्नेश से छेड़छाड़ की। श्रमिकों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन पर हमले का प्रयास किया गया। इस मामले की शिकायत सेमटेल ग्लास एवं सेमटेल कलर के श्रमिकों ने सोमवार को बोरखेड़ा पुलिस एवं प्रशासन को दे दी है।
सेमटेल ग्लास वक्र्स समिति के अध्यक्ष मिलन शर्मा एवं कलर वक्र्स समिति के कृष्णदत्त द्विवेदी समेत 100 श्रमिकों ने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन में बताया कि कलेक्टर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को दिए ज्ञापन में कहा है कि सिक्युरिटी गार्डों ने उन्हें बताया कि कुछ असामाजिक तत्व फैक्ट्री की दीवार कूद कर अंदर घुस गए। उन्होंने फर्नेश से छेड़छाड़ की कोशिश की। इस मामले में श्रमिकों की ओर से एडीएम सिटी, एएसपी, संयुक्त श्रमायुक्त, कारखाना एवं बॉयलर इंस्पेक्टर एवं प्रबंधन को दी। इससे पहले भी 21 नवंबर की रात को इसी तरह का प्रयास हुआ। जिसकी सूचना प्रशासन को दी जा चुकी है। इसके बाद भी प्रबंधन वर्ग से कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फैक्ट्री में किसी प्रकार की घटना होती है तो प्रबंधन वर्ग की होगी।
बोरखेड़ा पुलिस के थाना अधिकारी श्रीराम ने बताया कि श्रमिकों की ओर से उन्हें जो शिकायत दी है, उससे उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। यदि अधिकारी निर्देश देंगे तो फैक्ट्री की सुरक्षा के लिए पुलिस जाप्ता लगाया जा सकता है। संयुक्त श्रमायुक्त संतोष शर्मा ने बताया कि इस मामले में श्रमिकों की ओर से उनके पास शिकायत आई है। उधर, मैनेजमेंट की ओर से फैक्ट्री में मौजूद सामानों की एक सूची उन्हें सौंपी गई है।
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वीडियोकॉन का सेमटेल शुरू करने से इंकार
भास्कर न्यूज - कोटा
बारां रोड स्थित पिक्चर ट्यूब बनाने वाली सेमटेल की बंद फैक्ट्री को वीडियोकॉन कंपनी ने चलाने से साफ इंकार कर दिया है। यदि खुद सेमटेल के चेयरमैन सतीश कोरा भी चलाना चाहें तो 125 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।
वीडियोकॉन के सीनियर फाइनेंशियल एडवाइजर संजीव राठी ने भास्कर को बताया कि फैक्ट्री में सबसे महत्वपूर्ण फर्नेश होता है। एक बार फर्नेस ठंडा होने के बाद वह जम जाता है। जमने के बाद उसे किसी भी हालत में काम नहीं लिया जा सकता, बल्कि पूरी भट्टी इसके लिए दुबारा बनानी पड़ती है। जिस पर 70 करोड़ रुपए की लागत आती है। उन्होंने बताया कि प्रबंधन यदि तकनीकी तरीके से बंद करता तो फर्नेस नहीं जमता, तब फिर से चालू करने में इतना खर्चा नहीं आता।उन्होंने बताया कि फैक्ट्री को रनिंग में लाने के लिए तीन महीने का रॉ मेटेरियल एवं अन्य खर्चों के लिए कम से 50 करोड़ रुपए की वर्किंग केपिटल चाहिए।
यानी 125 करोड़ रुपए की व्यवस्था हो तो फैक्ट्री चल सकती है। सेमटेल कंपनी पिक्चर ट्यूब का फनल बनाती है। आगे का पैनल हिन्दुस्तान में एक मात्र वीडियोकॉन कंपनी बनाती है। बिना इसके फनल का कोई उपयोग नहीं है।

वीडियोकॉन का जापान से टाईअप
राठी ने बताया कि सेमटेल और वीडियोकॉन के बीच पिछले दिनों एमओयू समाप्त होने के बाद हमारी कंपनी ने जापान की कंपनी से पिक्चर ट्यूब का फनल मंगाने का टाईअप कर लिया है, इसलिए अब कोटा की सेमटेल को चलाने के लिए न तो फाइनेंस होगा और न किसी कीमत पर चलाया जाएगा। सीनियर फाइनेंशियल एडवाइजर राठी ने बताया कि पुरानी डिजायन की पिक्चर ट्यूब वाली टीवी की भारत के अलावा, थाइलैंड, इंडोनेशिया, चाइना, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, टर्की, साउथ अफ्रीका, बांग्लादेश, श्रीलंका एवं नेपाल आदि देशों में अभी भी मांग है। अगले पांच साल तो इसका मार्केट है। इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने सेमटेल के साथ टाईअप किया था।
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कलर पिक्चर ट्यूब के आयात पर लगेगा विशेष कर
31 Mar 2009,
http://hindi.economictimes.indiatimes.com
नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने कलर पिक्चर ट्यूब बनाने वाली सैमटेल और जीसीटी जैसी घरेलू कंपनियों को राहत देने के लिए इंडोनेशिया से आयात की जाने वाली कलर पिक्चर ट्यूब्स पर विशेष कर लगाया है। जानकारों का कहना है कि सरकार के इस कदम से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को तो राहत मिलेगी, लेकिन उपभोक्ताओं को कलर टेलीविजन खरीदने में पहले की तुलना में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
कलर टेलीविजन बनाने वाली एलजी और ओनिडा जैसी कंपनियां पिक्चर ट्यूब आयात करती हैं। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक एंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव सुरेश खन्ना ने बताया, 'कलर पिक्चर ट्यूब्स के आयात पर विशेष प्रकार का कर लगाए जाने के बाद टीवी की कीमतों में तेजी आएगी, क्योंकि टेलीविजन की कुल लागत में पिक्चर ट्यूब की अहम हिस्सेदारी होती है।'
जानकारों का कहना है कि पिक्चर ट्यूब की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी से टेलीविजन की कीमतों पर इसका असर पड़ता है, क्योंकि टेलीविजन की लागत में इसकी हिस्सेदारी 40-45 फीसदी होती है। सुरेश खन्ना ने कहा कि भारतीय कलर पिक्चर ट्यूब इंडस्ट्री की मासिक क्षमता दस लाख से काफी कम है, जबकि टीवी बाजार में हर महीने दस लाख से अधिक टेलीविजन सेट तैयार किए जाते हैं। पिक्चर ट्यूब्स की इस कमी को पूरा करने के लिए पिक्चर ट्यूब का आयात किया जाता है। स्पेशल ड्यूटी को एंटी डंपिंग ड्यूटी भी कहा जाता है और यह एक प्रकार का अतिरिक्त कर है।
जब किसी से किसी उत्पाद का निर्यात सस्ते दामों पर किया जाता है, तो आयातक देश अपने यहां यह विशेष कर लगाता है। इस कर को लगाने का मकसद स्थानीय उत्पादकों के हितों की रक्षा करना और दूसरे मुल्कों से होने वाली डंपिंग को रोकना है। अप्रत्यक्ष कर से जुड़े मामलों को देखने वाली शीर्ष संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम ने कहा कि कलर पिक्चर ट्यूब्स के दूसरे मुल्कों से होने वाले आयात के कारण घरेलू इंडस्ट्री का नुकसान पहुंच रहा है, जिसकी वजह से इसके आयात पर विशेष शुल्क लगाया जा रहा है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एंटी डंपिंग एंड एलाइड ड्यूटीज की सिफारिशों के बाद ही यह विशेष कर लगाया गया है।
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सेमकोर ग्लास फैक्ट्री कोटा राजस्थान
रंग पिक्चर ट्यूब घटकों और
सैमटेल कलर लिमिटेड रंग पिक्चर ट्यूब
SAMTEL ग्लास लिमिटेड    
रंग पिक्चर ट्यूब
CPT ग्लास, एविओनिक्स ग्लास,ऑटोमोटिव ग्लास,इलेक्ट्रॉन बंदूकें,विक्षेपन Yokes
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Samtel India Limited, MMD

Samtel Color Limited, Ghaziabad
Teletube Electronics Limited, Ghaziabad
Samtel India Limited, Bhiwadi
Samtel Color Limited, Ghaziabad
Samcor Glass Limited, Kota
Samtel Electron Devices, (EG Div.) Parwanoo
Samtel India Limited, (DY Div.) Parwanoo
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Samtel Color Limited [CPT division]
Incorporated in 1987 Samtel Color Manufactures 14", 20", 21" ( F&FST ) Color Picture Tubes. The unit has two operational lines manufacturing 21" (FST and F&FST ), 20" and 14" Color Picture Tubes for exports as well as the domestic market. The installed capacity at present is 3.3 million tubes per annum.
Samtel Color is the Largest exporter of Color Picture Tubes from India and has been successfully exporting to various countries in Europe & South East Asia.

The company has received safety approvals from UL, CSA, VDE & BSI for it's products.
Towards its commitment of creating a world class quality organization, the company has launched its SIX SIGMA initiatives.

Samtel Color Limited
Factory Village Chhapraula, Bulandshaher Road,
Distt. Gautam Budh Nagar (U.P.)
Phone : (0120)-4674510, 4674512 to 4674518.

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Samcor Glass Limited
Incorporated in 1987 Samcor is a 50:50 joint venture between Corning Incorporated, USA and Samtel Group to manufacture glass for TV and display tubes. The commercial operations started in 1998 with the commissioning of a USD 70 million B&W glass plant with a capacity of 5.5 million sets of 14" parts per annum. Samsung Corning was the engineering contractor for the facility.

Samcor has a 2-phased strategy to manufacture color glass. In the first phase the existing facility was upgraded to manufacture 4.8 million color funnels per annum with an investment of Rs. 120 Crores.
Simultaneous manufacture of B&W glass will continue for 4 to 6 months every year till economically viable. In the second phase, Samcor will invest approximately Rs. 450 Crores to manufacture panels for Color TV picture tubes. On completion of all phases of expansion and after Samcor switches to 100% glass for CPTs, it will have a capacity of approximately 9 million sets of parts (Panels & Funnels).

Samcor Glass Limited
Village Naya Nohra, Kota-Baran Road, Kota
Rajasthan
Phone : (0744) 450150, 450151, 450153, 450156
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Samtel firsts

    1st to introduce Digital Color Monitor in India.

    1st to launch 12", 14" and 17" Black & White picture tubes in India.

    1st to launch 14" and 21" FST tubes in India.

    1st to launch Mono Display Tubes in India.

    1st to assemble and seal glass shells in India.

    1st to offer the largest range of 14", 21" FST and 21" F&FST colour picture tubes in India.

    1st to establish itself as the largest regular exporter of tubes.

    1st to manufacture specialty tubes for industrial, military and medical applications, from the private sector.