रविवार, 2 दिसंबर 2012

हिन्दू शब्द अपमान का नहीं बल्कि,गौरव की बात है !






हिन्दू शब्द अपमान का नहीं बल्कि,गौरव की बात है !
अक्सर हम हिन्दू लोगों को बरगलाने के लिए..... हमें यह सिखाया जाता है कि.... "हिन्दू" शब्द..... हमें.... मुस्लिमों या फिर कहा जाए तो.... अरब वासियों ने दिया है...!
दरअसल... ऐसी बातें करने के पीछे कुछ स्वार्थी तत्वों का मकसद यह रहा होगा कि..... हिन्दू ..... अपने लिए "हिन्दू" शब्द सुनकर..... खुद में ही अपमानित महसूस करें..... और, हिन्दुओं में आत्मविश्वास नहीं आ पाए..... फिर.... हिन्दुओं को खुद पर गर्व करने या ..... दुश्मनों के विरोध की क्षमता जाती रहेगी ...!
और, बहुत दुखद ह
ै कि..... समुचित ज्ञान के अभाव में.... बहुत सारे हिन्दू भी... उसकी ऐसी ... बिना सर-पैर कि बातों को सच मान बैठे हैं..... और, खुद को हिन्दू कहलाना पसंद नहीं करते हैं..... जबकि, सच्चाई इसके बिल्कुल ही उलट है...!
हिन्दू शब्द.... हमारे लिए... अपमान का नहीं बल्कि ... गौरव की बात है...... और, हमारे प्राचीन ग्रंथों एक बार नहीं.... बल्कि, बार-बार "हिन्दू शब्द" गौरव के साथ प्रयोग हुआ हुआ है....!
वेदों और पुराणों में हिन्दू शब्द का सीधे -सीधे उल्लेख इसीलिए नहीं पाया जाता है कि.... वे बेहद प्राचीन ग्रन्थ हैं.... और, उस समय हिन्दू सनातन धर्म के अलावा और कोई भी धर्म नहीं था...... जिस कारण.... उन ग्रंथों में .. सीधे -सीधे ... हिन्दू शब्द का उपयोग बेमानी था..!
साथ ही.... वेद .. पुराण जैसे ग्रन्थ.... मानव कल्याण के लिए हैं.... हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई ... जैसे क्षुद्र सोच उस समय नहीं थे.... इसीलिए ... उन ग्रंथों में .... हिन्दू शब्द पर ज्यादा दवाब नहीं दिया है... लेकिन प्रसंगवश .. हिन्दू और हिन्दुस्थान शब्द का उल्लेख वेदों में भी है..!
@@@@ ऋग्वेद में एक ऋषि का नाम "सैन्धव" था जो बाद में "हैन्दाव/ हिन्दव" नाम से प्रचलित हुए... जो बाद में अपभ्रंश होकर ""हिन्दू"" बन गया..!
@@@@ साथ ही.... ऋग्वेद के ही ब्रहस्पति अग्यम में हिन्दू शब्द इस प्रकार आया है...
हिमालयं समारभ्य यावत इन्दुसरोवरं ।
तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते ।।
( अर्थात....हिमालय से इंदु सरोवर तक देव निर्मित देश को हिन्दुस्थान कहते हैं )
@@@@ सिर्फ वेद ही नहीं ... बल्कि.. मेरु तंत्र ( शैव ग्रन्थ) में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया है....
'हीनं च दूष्यत्येव हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये'
( अर्थात... जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं)
@@@@ इतना ही नहीं.... लगभग यही मंत्र यही मन्त्र शब्द कल्पद्रुम में भी दोहराई गयी है.....
'हीनं दूषयति इति हिन्दू '
( अर्थात... जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं)
@@@@ पारिजात हरण में"हिन्दू" को कुछ इस प्रकार कहा गया है |
हिनस्ति तपसा पापां दैहिकां दुष्टम
हेतिभिः शत्रुवर्गं च स हिंदुरभिधियते ।।
@@@@ माधव दिग्विजय में हिन्दू शब्द इस प्रकार उल्लेखित है ....
ओंकारमंत्रमूलाढ ्य पुनर्जन्म दृढाशयः ।
गोभक्तो भारतगुरूर्हिन्द ुर्हिंसनदूषकः ॥
( अर्थात ... वो जो ओमकार को ईश्वरीय ध्वनि माने... कर्मो पर विश्वास करे, गौ पालक रहे... तथा .... बुराइयों को दूर रखे.... वो हिन्दू है )
@@@ और तो और.... हमारे ऋग्वेद (८:२:४१) में 'विवहिंदु' नाम के
राजा का वर्णन है.... जिसने 46000 गाएँ दान में दी थी..... विवहिंदु बहुत पराक्रमी और दानी राजा था..... और, ऋग वेद मंडल 8 में भी उसका वर्णन है|
#### सिर्फ इतना ही नहीं.... हमारे धार्मिक ग्रंथों के अलावा भी अनेक जगह पर हिन्दू शब्द उल्लेखित है....
*** (656 -661 ) इस्लाम के चतुर्थ खलीफ़ा अली बिन अबी तालिब लिखते हैं कि ....... वह भूमि जहां पुस्तकें सर्वप्रथम लिखी गईं, और जहां से विवेक तथा ज्ञान की‌ नदियां प्रवाहित हुईं, वह भूमि हिन्दुस्तान है। (स्रोत : 'हिन्दू मुस्लिम कल्चरल अवार्ड ' - सैयद मोहमुद. बाम्बे 1949.)
*** नौवीं सदी के मुस्लिम इतिहासकार अल जहीज़ लिखते हैं..... "हिन्दू ज्योतिष शास्त्र में, गणित, औषधि विज्ञान, तथा विभिन्न विज्ञानों में श्रेष्ठ हैं। मूर्ति कला, चित्रकला और वास्तुकला का उऩ्होंने पूर्णता तक विकास किया है।
उनके पास कविताओं, दर्शन, साहित्य और नीति विज्ञान के संग्रह हैं। भारत से हमने कलीलाह वा दिम्नाह नामक पुस्तक प्राप्त की है। इन लोगों में निर्णायक शक्ति है, ये बहादुर हैं। उनमें शुचिता, एवं शुद्धता के सद्गुण हैं। मनन वहीं से शुरु हुआ है।
@@@@ इस तरह हम देखते हैं कि.... इस्लाम के जन्म से हजारों-लाखों साल पूर्व से हिन्दू शब्द प्रचलन में था.... और, हिन्दू तथा हिन्दुस्थान शब्द ... पूरी दुनिया में आदर सूचक एवं सम्मानीय शब्द था...!
साथ ही इन प्रमाणों से बिल्कुल ही स्पष्ट है कि.... हिन्दू शब्द ना सिर्फ हमारे प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित है ... बल्कि... हिन्दू धर्म और संस्कृति हर क्षेत्र में उन्नत था.... साथ ही , हमारे पूर्वज काफी बहादुर थे और उनमे निर्णायक शक्ति थी... जिस कारण विधर्मियों की..... हिन्दू और हमारे हिंदुस्तान के नाम से ही फट जाती थी..... जिस कारण उन्होंने ये अरब वाली कहानी फैला रखी है...!
इसीलिए मित्रों..... सेकुलरों और धर्मभ्रष्ट अवं पथभ्रष्ट लोगों कि नौटंकियों पर ना जाएँ..... और " गर्व से कहो, हम हिन्दू हैं " ।
जय महाकाल...!!!
(स्रोत : हिन्दू ग्रन्थ एवं द विज़न आफ़ इंडिया - पेज 226

पाकिस्तान में हिंदुओं का श्रीराम पीर मंदिर ढहाया




पाकिस्तान में हिंदुओं का विरोध 
अरमान साबिर,बीबीसी संवाददाता, कराची
खबर ये है कि पाकिस्तान में,श्रीराम पीर मंदिर को ढहाए जाने के बाद से हिंदुओं में खासी नाराजगी है,कराची में 100 साल पुराने श्रीराम पीर मंदिर को ढहाने का मामला सामने आया है | मंदिर को भारत-पाक विभाजन के पहले ही बनाया था, मंदिर  के अलावा बिल्डर ने कल समीप  के  कई मकान तोड़ दिए,फलस्वरूप करीब 40 लोग बेघर हो गए जिनमें से ज्यादातर हिंदू हैं | मंदिर को तोड़े जाने के बाद रविवार 2 दिसंबर, 2012 को पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के लोगों ने कराची प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन भी किया | कराची के हिंदुओं का कहना है कि उनके साथ धोखा हुआ है और वे मामले में दोबारा केस दर्ज कराएंगे | स्थानीय निवासी मलबे से मंदिर का नाम फलक निकालने में सफल रहे. मंदिर में रहने वाले महाराज बदरी ने इस बात से इनकार किया कि अतिक्रमण किया गया था । उन्होंने कहा, ‘हमारे पूर्वज आजादी से पहले से यहां रह रहे हैं. हम अतिक्रमण करने वाले लोग नहीं हैं '|

गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल से इस्तीफे की मांग




कमला बेनीवाल जयपुर जमीन घोटाले के जांच के आदेश न्यायालय ने दिये, नैतिकता के नाम पर अब बेनीवाल को पद से इस्तिफा देना चाहिये।

कमला बेनीवाल के खिलाफ जांच का आदेश

नवंबर 23, 2012,शुक्रवार
http://www.rashtriyasahara.com/epapermain.aspx?queryed=9&eddate=11%2f23%2f2012
जयपुर (एसएनबी)। शहर की एक अदालत ने अरबों रुपए की सरकारी भूमि हड़पने के मामले में गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल सहित 17 आरोपियों के खिलाफ करघनी थाना पुलिस को जांच का आदेश दिया है। खास बात यह है कि इस मामले में सभी आरोपी रसूखदार घरानों के लोग हैं। अदालत ने यह आदेश संजय किशोर अग्रवाल के परिवाद पर दिया। अन्य अरोपियों में अमरसिंह, अजय कुमार, चंद्रप्रकाश, गोपालराम, हरिनारायण मीणा, हनुमान सिंह, राधाकृष्ण चौधरी, रतनसिंह, रणवीर सिंह, राकेश कुमार सिंह, राजेन्द्र पूनिया, सुरजाराम मील, शांतिदेवी, संजीव आर्य, सुमित शर्मा और विजयपाल हैं। सरकार ने 1951 में खाली पड़ी भूमि को बीस साल की लीज पर देने की योजना बनाई थी। बाद में 1956 के अधिनियम से इस अवधि को 25 साल कर दिया गया। सरकार ने पांच जनवरी 1953 को राजेन्द्र सिंह व अन्य को सहकारी समिति बनाकर कृषि कार्य के लिए 218 एकड़ भूमि आवंटित कर दी। राजेन्द्र ने भूमि का पंजीयन किसान सामूहिक कृषि सहकारी समिति झोटवाड़ा के नाम कराया। 25 साल की लीज पूरी होने के बाद यह भूमि सरकार में निहित हो गई लेकिन राजस्व अधिकारियों ने भूमि को सरकारी खाते में दर्ज नहीं किया।
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राज्यपाल पद से इस्तीफा दें बेनीवाल: बीजेपी
अहमदाबाद (एसएनएन): गुजरात की बीजेपी सरकार, गुजरात बीजेपी ने राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जयपुर जमीन घोटाले को लेकर बीजेपी ने गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल से इस्तीफे की मांग की है. गुजरात सरकार के प्रवक्ता और हेल्थ मिनिस्टर जयनारायण व्यास ने कहा है कि राज्यपाल को नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

क्या है मामला ?
ये मामला राजस्‍थान के जयपुर की बेशकीमती सरकारी जमीन हड़पने से जुड़ा है. सरकार ने 1951 में ये जमीन किसान सामूहिक कृषि सहकारी समिति को खेती के लिए लीज पर दी थी. शुरुआत में ये लीज 20 साल के लिए थी जिसे बाद में 5 साल और बढ़ाया गया था. साल 2003 में कमला बेनीवाल को इस समिति का सदस्य बनाया गया था. बाद में जब जमीन सरकार के कब्जे में आ गई तो इसे समिति के सभी सदस्यों में बांट दिया गया. कमला बेनीवाल को भी कुल सात प्लॉट्स मिले जिनका क्षेत्रफल करीब डेढ़ हज़ार वर्ग मीटर है. आरोप है कि गलत तथ्यों के आधार पर लाखों-करोड़ों मूल्य की सरकारी जमीन को समिति के सदस्यों को आवंटित कर दिया गया.
बीजेपी इसी को मुद्दा बनाकर चुनावों के ऐन पहले राज्यपाल से इस्तीफा मांग रही है. गौरतलब है कि राज्यपाल कमला बेनीवाल कांग्रेस की बड़ी नेता रह चुकी हैं.
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'राज्यपाल कमला बेनीवाल ने मजदूर बनकर करोडों की जमीन हथियाई'
एजेंसियां | May 15, 2012
जयपुर।। बीजेपी ने गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने खुद को खेतिहर मजदूर बताकर करोड़ों रुपए की जमीन हथिया ली। बीजेपी के मुताबिक कई और नामी लोगों को इसी तरह से फायदा पहुंचाया गया है। बीजेपी का कहना है कि गहलोत सरकार के दबाव में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने इस तरह से जमीनें बांटीं हैं और यह करीब एक हजार करोड़ रुपए का घोटाला है। बीजेपी के राष्ट्रीय मंत्री किरीट सोमैया ने कहा कि किसान सहकारी समिति के नाम पर राज्यपाल कमला बेनीवाल के साथ ही पूर्व मंत्री कुंभाराम आर्य, बिल्डर सुरजाराम मील समेत 20 लोगों को 50-50 करोड़ रुपए के प्लॉट दिए गए है। जेडीए ने मुआवजे में दिए व्यावसायिक-आवासीय भूखंडों का मूल्यांकन कम दिखाया है |

सोमैया ने बताया कि 1953 में राज्य सरकार ने किसान सहकारी समिति को सहकारिता के आधार पर खेती करने के लिए 384 बीघा जमीन आवंटित की थी। 1990 में जेडीए ने इस जमीन को गोविंदपुरा-करधनी योजना के लिए ले लिया। इसके बदले 20 सदस्यों को 209 व्यावसायिक और आवासीय विकसित भूखंड आवंटित किए गए। सोमैया ने आरोप लगाया कि सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार पीएन मेहरा ने जब इस पर आपत्ति जताई तो उन्हें इस पद से हटा दिया गया।