बुधवार, 2 जनवरी 2013

अश्लील गायक हनी सिंह पर मुकदमा,मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ डांस



- अरविन्द सिसोदिया कोटा राजस्थान 
भारत का पूरा कल्चर( संस्कृति ) खतरे में है। आज चारों और अश्लीलता ही परोसी जा रही है। जिधर देखतें हैं वहीं महिलाओं के ऊपर कुछ न कुछ कहा जा रहा है। चाहे इंटरनेट हो , विज्ञापन हो या फिल्मे या अन्य कार्यक्रम, सभी में अश्लीलता ही परोसी जा रही है। इसे रोकने के लिए चारों ओर से कदम उठाने होंगे। भारतीय संस्कृति की ओर वापिस जाना होगा। स्कूलों की शिक्षा बदलनी होगी। फिल्मों का रूप बदलना होगा। अपराधी के प्रति दंड सख्त करना होगा। ऐसे अनेक उपायों के बाद ही कहीं जाकर कुछ सालों में लोग नारी का आदर करना सीख पाएंगे। अन्यथा बातों में और करनी में फर्क नज़र आता रहेगा।http://navbharattimes.indiatimes.com

आईपीएस ने 'यो यो हनी सिंह' पर ठोंका मुकदमा

आईएएनएस॥ लखनऊ : मशहूर पंजाबी और बॉलीवुड सिंगर हनी सिंह के खिलाफ अश्लील गीत लिखने और गाने के आरोप में राजधानी लखनऊ में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुकदमा दर्ज कराया है। ट्विटर पर उनके खिलाफ छिड़ी ऑनलाइन मुहिम की वजह से न्यू ईयर पर गुड़गांव में होने वाला उनका कॉन्सर्ट भी कैंसल हो गया।  
फंस गए हनी सिंह
लखनऊ निवासी सीनियर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने गोमती नगर थाने में गायक हनी सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा (आईपीसी) 292, 293 और 294 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। आईपीएस ऑफिसर अमिताभ ठाकुर ने बताया कि हनी सिंह के लिखे और गाए गए 'मैं हूं बलात्कारी' और 'केंदे पेचायिया' जैसे गाने अत्यंत अश्लील, उत्तेजक और अभद्र हैं और समाज में महिलाओं के प्रति असम्मान और गंभीर अपराध बढ़ाने के लिए लोगों को प्रेरित करती हैं।
अश्लीलता की हद
सीनियर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर का कहना है कि इन गानों को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जब देश दिल्ली गैंगरेप पीडि़ता की मौत पर शोक मना रहा है और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर आक्रोश व्यक्त कर रहा है, तब गाने के इस तरह के बोल बर्दाश्त नहीं कर सकते।
ऑनलाइन पिटीशन
ब्रिस्टल होटल के मैनेजमेंट को संबोधित यह ऑन लाइन याचिका सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक गुट ने दी थी। याचिका में हनी सिंह की कॉन्सर्ट कैंसल करने की आयोजकों से मांग की गई। याचिका के अनुसार हनी सिंह ने करियर की शुरुआत में एडल्ट गाने गाए थे। ये गाने महिलाओं के खिलाफ अपराध को प्रेरित करते हैं।
ट्विटर पर कैंपेन
ऑनलाइन याचिका कल्पना मिश्रा वाया चेंज. ओआरजी की ओर से दायर की गई थी। उनका कहना है कि गाने के इस तरह के बोल सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किए जा सकते। महिलाओं के प्रति नफरत और अपराध को बढ़ावा देने वाले ऐसे गाने सुनकर ही लोगों के कदम बहक जाते हैं। फेसबुक और ट्विटर पर पिछले दिनों हनी सिंह के गानों के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़का हुआ है।
डबल मीनिंग गाने
पंजाब के होशियारपुर के एक छोटे से गांव में रहने वाले हनी सिंह ने करियर की शुरुआत में डबल मीनिंग गानों से लोकप्रियता हासिल की। हनी ने ' मैं हूं बलात्कारी ' गाना भी उन्हीं दिनों गाया था। इन्हीं गानों की बदौलत वह हिट हुए। इसके बाद हनी सिंह ने मशहूर पंजाबी सिंगर अशोक मस्ती के साथ रैप गाने शुरू किए। शुरुआत में वह इंग्लिश रैप गाते थे , लेकिन बाद में उन्होंने पंजाबी रैप गाना शुरू किया। इससे उनके गानों में अश्लीलता कुछ कम जरूर हुई , लेकिन अधिकतर में लड़कियों के खिलाफ जमकर जहर उगला गया।
हंगामा अंग्रेजी बीट ते
हालांकि पिछले कुछ सालों में अंग्रेजी बीट ते .... ब्राउन रंग और हाई हील्स इस कदर हिट हुए कि हर शादी , डिस्को और पब में इन्हें सुना जा सकता था। दिल्ली रेप कांड के बाद हनी सिंह के गाने ' मैं हंू बलात्कारी ...' पर निशाना साधा गया। हालांकि हनी ने इस मामले में अपना बचाव यह कहकर करने की कोशिश की कि यह गाना उनका नहीं है और उन्होंने सिर्फ इसे गाया है।
माइकल जैकसन का सपना
पिछले दिनों 28 साल के हनी ने एक बॉलीवुड के एक गाने के लिए 70 लाख रुपये की फीस ली थी। कुछ दिनों पहले खुद हनी ने इंडिया का माइकल जैक्सन बनने की ख्वाहिश जाहिर की थी। लेकिन अफसोस कि अपने अश्लील गानों की वजह से हनी यंगस्टर्स के निशाने पर आ गए। उल्लेखनीय है कि हनी सिंह ने पंजाबी के अलावा ' कॉकटेल ', ' खिलाड़ी 786', ' रेस -2' और ' सन ऑफ सरदार ' जैसी हिंदी फिल्मों में गाने गाए हैं।
-----------------
‘मैं हूं बलात्कारी’ कहना हनी सिंह को पड़ा महंगा!
लखनऊ (अभिषेक): बालीवुड के उभरते पंजाबी गायक हनी सिंह व उसके 2 साथियों के खिलाफ अश्लील गानों के जरिए महिलाओं पर भद्दी टिप्पणी करने के  आरोप में आई.पी.एस. अफसर अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ के गोमती नगर थाने में मुकद्दमा दर्ज करवाया है। ठाकुर ने कहा कि हनी सिंह व उसके साथी बादशाह और दिलजीत ने अश्लील, अभद्र व उत्तेजक गाने गाकर महिलाओं का अपमान किया है। इन गायकों ने महिलाओं के प्रति घृणित शब्द का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सभी सीमाएं लांघने वाले गाने ‘मैं हूं बलात्कारी’ और ‘केंदे पेचायिया’ गाए हैं। गोमती नगर पुलिस ने अमिताभ ठाकुर की शिकायत पर हनी सिंह व उनके साथियों के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर मामले की जांच एस.आई. राजेश कुमार सिंह को सौंपी है। उल्लेखनीय है कि हनी सिंह ने पंजाबी के अलावा कॉकटेल, खिलाड़ी 786, रेस-2 और सन ऑफ सरदार जैसी हिंदी फिल्मों में गीत गाए हैं।
...जब एक गाने के मिले 70 लाख
पंजाबी रैपर हनी सिंह ने नसीरुद्दीन शाह अभिनीत फिल्म मस्तान के एक गाने के लिए 70 लाख रुपए लिए हैं। बॉलीवुड में पहली बार किसी गीतकार को इतनी अधिक रकम मिली है। इससे हनी सिंह बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के सबसे महंगे संगीतकार बन गए हैं। 2011 में बी.बी.सी. एशियन डाऊनलोड चाट्र्स में हनी सिंह और दिलजीत दोसांझ का गाना ‘लक्क ट्वंटी ऐट कुड़ी दा’ पहले स्थान पर रहा। वहीं बीते साल 2012 में यू-ट्यूब की टॉप टैन लिस्ट में भी इस पंजाबी गायक ने पहले और चौथे स्थान पर अपना कब्जा जमाया।  हनी सिंह ने बहुत से अवार्ड भी हासिल किए हैं।
80 घंटे में मिले 10 लाख दर्शक
गायक जैजी बी और हनी सिंह के एक गीत को इंटरनैट पर सिर्फ 80 घंटे में 10 लाख से अधिक विजीट मिले। गीत ‘दिस पार्टी गेटिन हॉट’ को 28 दिसम्बर को जारी किया गया था। नेटवॄकग साइटों पर गीत शीर्ष 10 शेयर्ड वीडियो की सूची में शामिल हुआ है।
शो रद्द होने के बाद बोले हनी—मैंने नहीं लिखा गाना
दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के विरोध में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच नए साल के मौके पर आयोजित किया जाने वाला अपना शो रद्द करने पर मजबूर हुए रैपर हनी सिंह ने उस पूरे विवाद से पल्ला झाड़ लिया जिसमें कहा जा रहा था कि उनके गाने आपत्तिजनक होते हैं। बॉलीवुड की कई फिल्मों में गाने गा चुके 28 साल के हनी ने कहा कि जिस गाने के बाबत आपत्ति जताई जा रही है उसे उन्होंने नहीं लिखा है।
हनी के प्रबंधक अनूप कुमार ने दावा किया कि गुडग़ांव में आयोजित शो विरोध की वजह से नहीं बल्कि दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई दिवंगत पीडि़ता के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए रद्द किया गया।
------------------

हनी के संग मुख्यमंत्री शीला दीक्षित  का डांस, हर तरफ सवाल

सांध्य टाइम्स | Jan 2, 2013
नई दिल्ली।। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अब एक नए विवादों में फंसती नजर आ रही हैं। नया विवाद एक विडियो के जरिए सामने आया है, जिसमें वह रैप सिंगर हनी सिंह के साथ स्टेज पर डांस करते हुए दिख रही हैं। यह विडियो अक्टूबर 2012 का है।
गौरतलब है कि नए साल के मौके पर हनी सिंह अपने अश्लील गानों को लेकर कंट्रोवर्सी में आ गए हैं। आरोप लग रहे हैं कि उनके गानों में महिलाओं के प्रति सम्मान नहीं होता और गानों की लाइनों में कई जगह उन्हें लेकर फूहड़ता भी शामिल रहती है।
लोगों का कहना है कि शीला दीक्षित दिल्ली की सीएम हैं और उन्हें कोई भी कदम बहुत ही सोच समझकर उठाना चाहिए। वैसे भी इन दिनों गैंग रेप की घटना के बाद देश में इस तरह का माहौल बन चुका है कि महिलाओं के प्रति सम्मान की समझ जरूरी है।
विडियो को लेकर शीला दीक्षित की ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पब्लिक में इस बात की डिबेट जरूर शुरू हो गई है। किसी का कहना है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है तो कोई इसे सीएम की लापरवाही बता रहा है। जो लोग शीला पर आरोप लगा रहे हैं, उनका कहना है कि शीला दीक्षित एक पढ़ी लिखी सीएम हैं। उन्हें हर चीज की अच्छे से समझ होनी चाहिए।
डीयू की ही स्टूडेंट कविता ने कहा कि शीला दीक्षित को पब्लिकली कुछ भी करने या कहने के पहले सोचना चाहिए। जिसके गानों में महिलाओं का सम्मान नहीं होता, उस गाने पर डांस करना साफ बताता है कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति शीला कितनी सजग हैं। डीयू के छात्र पीयूष का कहना है कि जब तक हनी सिंह पर आरोप नहीं लगे थे, तब तक ये कोई मुद्दा ही नहीं था। छात्रा सयाली का कहना है कि अगर विवाद करना था तो उसी समय करना चाहिए था। इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
 

घर घर पहुचेंगे स्वामी विवेकानंद

घर घर पहुचेंगे स्वामी विवेकानंद


स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती समारोह स्वामी विवेकानंद को जाने जन-जन -

'उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको' का ऊर्जावान संदेश देने वाले भारत के युवा संन्यासी, जिन्होंने 40 वर्ष से भी कम की आयु में देश-विदेश में लोगों के हृदय को अपने तेजस्वी विचारों से जीतकर संसार से विदा ली थी। ऐसे स्वामी विवेकानंद आज विश्व के करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत तथा आदर्श बन चुके हैं। अंग्रेजी और बंगला सहित अनेक भाषाओं पर समान अधिकार रखने वाले स्वामी विवेकानंद सभी मत-पंथों को बराबर आदर देने के साथ-साथ समाज जीवन से संबंधित हर विषय पर दूरगामी विचार रखते थे। 11 सितंबर, 1893 को शिकागो (अमरीका) में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने अमरीकी जनता के सामने हिन्दू धर्म और संस्कृति के उदात्त सिद्धांतों का प्रतिपादन किया, जिन्हें सुनकर अमरीकावासियों के मन में भारत के इस युवा संन्यासी के प्रति अगाध श्रद्धा उमड़ पड़ी। विश्वभर में दिए अपने व्याख्यानों में भी उन्होंने धर्म और वेदांत पर विचार रखने के साथ-साथ आर्य सभ्यता, भारतीय संस्कृति एवं समाज व्यवस्था, मूर्ति पूजा आदि विषयों को छुआ।

अपार विशेषताओं के धनी स्वामी विवेकानंद की 12 जनवरी, 2013 को 150वीं जयंती है। वैसे तो हर वर्ष 12 जनवरी के दिन स्वामी विवेकानंद की जयंती देशभर में 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में धूमधाम से मनाई जाती है। स्थान-स्थान पर भिन्न-भिन्न संस्थाओं और संगठनों द्वारा स्वामीजी और उनके विचारों का मनन किया जाता है। इस वर्ष भी देश स्वामीजी की जयंती मनाएगा। व्याख्यान होंगे, उन्हें और उनके विचारों को याद किया जाएगा। परन्तु समाज के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले कुछ जागरूक महानुभावों द्वारा एक समिति बनाई गई है, जिसने निश्चित किया है कि वह स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती वर्षभर मनाएगी। इसके लिए उसने पुख्ता योजना भी तैयार की है तथा उसका क्रियान्वयन करना भी शुरू कर दिया है। समिति का नाम है 'स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती समारोह समिति'।

स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य बीते 18 नवंबर, 2012 को नई दिल्ली में 'स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती समारोह समिति' की केन्द्रीय समिति की घोषणा हुई। समिति की अध्यक्षा के रूप में माता अमृतानंदमयी मठ की संस्थापक तथा प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी देवी हैं। मानद अध्यक्ष हैं प्रख्यात संविधानविद् डा. सुभाष चंद्र कश्यप। विवेकानंद केन्द्र के अध्यक्ष श्री पी. परमेश्वरन् समिति में संरक्षक हैं। इनके अतिरिक्त देश की अनेक प्रसिद्ध विभूतियां समिति में पदाधिकारी हैं। समिति की देशभर में सार्द्धशती समारोह करने की योजना है। इसलिए हर स्तर पर समितियों का गठन किया जा रहा है।

'भारत जागो! विश्व जगाओ!!' के विचार को ध्यान में रखते हुए समिति ने समाज के हर वर्ग तक पहुंचने के लिए एक अनूठी योजना बनाई है। सम्पूर्ण समाज योजना में समाहित हो इसलिए समिति ने समाज को 5 भागों में विभाजित किया है। यह हैं- युवाशक्ति, संवर्धिनी, प्रबुद्ध भारत, ग्रामायण और अस्मिता। इन 5 आयामों के जरिए समिति वर्षभर स्वामी विवेकानंद के विचार समाज तक पहुंचाने हेतु प्रयत्नशील रहेगी।

युवाशक्ति- इस आयाम के अंतर्गत समिति 40 वर्ष तक के युवाओं के लिए शक्ति, स्वाध्याय व सेवा को प्रेरित करने वाली गतिविधियों का आयोजन करेगी। विवेकानंद यूथ फोरम, विवेकानंद स्वाध्याय मंडल आदि का गठन करके युवाओं को जागरूक करने के कार्यक्रम होंगे।

संवर्धिनी- इसके अंतर्गत राष्ट्र जागरण एवं संस्कृति संरक्षण, संवर्धन व प्रसार में महिला सहभाग को बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रबुद्ध महिला संगोष्ठी, शक्ति सम्मेलन, किशोरी शिविर, युवा दंपति सम्मेलन आदि प्रमुख होंगे।

प्रबुद्ध भारत- इस आयाम के जरिए शिक्षित एवं प्रबुद्ध वर्ग की विचार शैली परिष्कृत करने के उद्देश्य से कार्यक्रम होंगे। इनमें स्वामी विवेकानंद के जीवन पर केन्द्रित व्याख्यानमालाएं, राज्यस्तरीय सम्मेलन आदि प्रमुख हैं।

ग्रामायण- ग्रामीणों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाले आयोजन इस आयाम के अंतर्गत होंगे। इस आयाम का उद्देश्य ग्राम जीवन को सशक्त बनाना है। स्वामी विवेकानंद शोभायात्रा, उनके चित्रों और विचारों को घर-घर पहुंचाना इसमें अहम होगा।

अस्मिता- इसके अंतर्गत जनजातीय बंधुओं में 'अस्मिता' का जागरण करने वाले कार्यक्रम होंगे। जनजाति मंचों के सम्मेलन, जनजाति उत्सव, मतांतरण रोकने के लिए परिचर्चा आदि इस आयाम के अंतर्गत होंगी।

स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती समारोह 12 जनवरी, 2013 से प्रारम्भ होकर 12 जनवरी, 2014 तक चलेगा। इसके लिए केन्द्रीय समिति ने कुछ कार्यक्रम भी तय किए हैं। सार्द्धशती समारोह का उद्घाटन कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती की पूर्व संध्या (11 जनवरी, 2013) पर नई दिल्ली में सम्पन्न होगा। इसमें समिति के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। प्रबुद्ध भारत आयाम के अंतर्गत सम्पन्न होने वाले इस समारोह में देशभर के प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेंगे। 12 जनवरी, 2013 को स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती है। इस दिन देशभर में जगह-जगह शोभायात्राएं होंगी। इन शोभायात्राओं में समाज का हर वर्ग सम्मिलित होगा। 18 फरवरी, 2013 को सम्पूर्ण देश में सूर्य नमस्कार महायज्ञ होगा। युवा आयाम के अंतर्गत होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर में लाखों की संख्या में युवा भाग लेंगे। समिति के कार्यकर्ता विद्यालयों-महाविद्यालयों तथा अन्य शैक्षिक संस्थाओं से सम्पर्क करके छात्रों को इस महायज्ञ में भाग लेने का अनुरोध करेंगे। 11 सितंबर को देशभर में भारत जागो दौड़ का आयोजन होगा। इन तय कार्यक्रमों के अलावा समिति के कार्यकर्ता देशभर में गृह सम्पर्क करेंगे, जिसके अंतर्गत 4 करोड़ परिवारों से सम्पर्क किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय हित के विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन भी समिति द्वारा आयोजित किए जाएंगे। इसी प्रकार स्थानीय समितियां भी स्वामी विवेकानंद के विचार जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी।

वर्षभर चलने वाले स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती समारोह को सफल बनाने के लिए गत 25 दिसंबर को समिति ने देशभर में संकल्प दिवस का आयोजन किया। देशभर में अनेक स्थानों पर हुए संकल्प दिवस के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में देशवासियों ने भाग लिया तथा स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर देश तथा समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लिया।

आज भी है स्वामी विवेकानंद के संदेश की आवश्यकता

-डा. सुभाष चंद्र कश्यप, मानद अध्यक्ष, स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती समारोह समिति

स्वामी विवेकानंद देश की महान और महत्वपूर्ण विभूतियों में से हैं। जब देश शारीरिक और मानसिक रूप से भयंकर दासता में जकड़ा था उस समय स्वामीजी ने 'उतिष्ठ जाग्रत' का आह्वान किया। जन-जन को जाग्रत करने का बीड़ा उठाया। एक नई बौद्धिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना पैदा की। विश्वभर में जब भारत को किसी प्रकार भी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था, ऐसे में उन्होंने अपने को सभ्य और सुशिक्षित समझने वाले पाश्चात्य देशों को आईना दिखाया। भारत की सोच, उसके दर्शन, उसकी सभ्यता-संस्कृति और आध्यात्मिक महानता का संदेश दिया। देश के भीतर घूम-घूमकर भी उन्होंने सभी युवकों और नर-नारियों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि उनमें अदम्य शक्ति है। और यदि वह अपनी धरोहर व सामर्थ्य को पहचानें तो वह एक बार फिर विश्वगुरु के आसन पर बैठ सकते हैं। आज स्वामी विवेकानंद के आने के 150 वर्ष बाद भी उनके संदेश की उतनी ही आवश्यकता महसूस होती है जितनी तब थी। स्वाधीनता के बाद आज हम जिस दुर्दशा और दिशाहीनता का अनुभव कर रहे हैं, उसमें स्वामी विवेकानंद, उनके विचार, उनके आह्वान और उद्घोष का व्यापक प्रचार-प्रसार ही संभवत: हमें पुनर्जीवित कर सकेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए 'स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती समारोह समिति' ने स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती वर्षभर मनाने का निर्णय किया है। आयोजन का उद्देश्य है कि देशवासी स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति कुछ जिम्मेदारी समझें और देश के लिए कुछ करने का संकल्प लें। वर्षभर समाज के भिन्न-भिन्न वर्गों के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज को जागरूक करना ही है और जागरूक समाज को किसी राजनीतिक दल में कार्य करने के लिए नहीं लगाया जाएगा, बल्कि वे समाज के प्रति अपना कुछ दायित्व समझकर देश के लिए कुछ कार्य करें इसलिए यह समारोह आयोजित किया जा रहा है।

संत और स्वयंसेवक समस्याओं से निराश नहीं होते -मोहनराव भागवत,



मेरठ में रा.स्व.संघ का कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग
संत और स्वयंसेवक समस्याओं से निराश नहीं होते
-मोहनराव भागवत, सरसंघचालक, रा.स्व.संघ

रा.स्व.संघ से ली जा सकती है अनुशासन और देशभक्ति की सीख
-पुलक सागर महाराज, जैनमुनि
अजय मित्तल

गत दिनों मेरठ में रा.स्व.संघ का तीन दिवसीय कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग सम्पन्न हुआ। वर्ग में मेरठ प्रांत के मंडल स्तर तक के 1148 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। रा.स्व.संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत वर्ग में पूरे समय उपस्थित रहे। वर्ग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि वर्तमान में देश समस्याओं से घिरा हुआ है। इनके कारण आमजन में निराशा है। लेकिन संत और संघ के स्वयंसेवक कभी निराश नहीं होते। समस्याओं की चुनौती स्वीकार कर वे स्वार्थमुक्त, भेदभावमुक्त समाज रचना के निर्माण में जुटे रहते हैं। वे जानते हैं कि सनातन हिन्दू जीवन और हिन्दू राष्ट्र को मिटाने की ताकत समस्याओं में नहीं है। चीन को सबसे बड़ा खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सीमाएं खुली होने के कारण सब ओर से दुश्मन घुस आता है। असम में कई बंगलादेशी घुसपैठिए आज विधानसभा सदस्य बन चुके हैं। भारत सरकार चीन ही नहीं, पाकिस्तान और बंगलादेश के सामने भी दब्बू व्यवहार करती है।
आंतरिक समस्याओं पर बोलते हुए श्री भागवत ने कहा कि एफ.डी.आई. हमारे खुदरा व्यापार को नष्ट करेगी। लेकिन हमारे सत्ताधारी जनहित नहीं देख रहे। आज अमरीका के लोग भी वॉलमार्ट नहीं चाहते। पूरी दुनिया में एफ.डी.आई. का अनुभव अच्छा नहीं है। किन्तु सरकार देशहित की बलि चढ़ा रही है। सामाजिक भेदभाव व अस्पृश्यता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमने अपने ही बंधुओं से पशुवत् व्यवहार किया है। विविधता में एकता देखने वाले हम लोगों ने इस प्रकार उन्हें परायेपन की ओर धकेला है। सम्पूर्ण समाज को इस भेदभाव से मुक्त करना होगा।
श्री भागवत ने कहा कि हिन्दुत्व भारत का स्वत्व है, भारत की जीवन पद्धति है। इसी के आधार पर सामाजिक पुनर्निर्माण होगा, क्योंकि स्वत्व के विकास के बिना समाज का विकास संभव नहीं है। उसके बिना शील-चरित्र नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि हिन्दू कोई सम्प्रदाय नहीं है। इसका एक संस्थापक, एक पुस्तक, एक पूजा पद्धति नहीं है। इस देश के सब मत-पंथ-सम्प्रदाय हिन्दू हैं। हिन्दू भारत की प्रकृति है, पहचान है। भारतीयों को दुनिया में हिन्दू विशेषण दिया जाता है। अब्दुल्ला बुखारी के पिता को हज के दौरान अरब के लोगों ने 'हिन्दू' बताया था। अहमद खां ने 1884 में लाहौर की सभा में आयोजकों को कहा था कि वे खुद को हिन्दू बताते हैं, पर उन्हें (अहमद खां) को हिन्दू क्यों नहीं कहते, जबकि भारत के तमाम लोग, जो पूजा पद्धति से मुस्लिम या ईसाई हों, राष्ट्रीयता से हिन्दू हैं। लेकिन आज राजनीति के कारण बहुत से लोग स्वयं को हिन्दू कहने में संकोच करते हैं। हिन्दुत्व के गौरव की याद दिलाने वाले लोगों को साम्प्रदायिक कहा जाता है। स्वगौरव की स्मृति बिना शक्ति का संचार नहीं हो सकता। हनुमानजी को स्वगौरव याद दिलाने पर वे पर्वताकार हो गए थे।
श्री भागवत ने समाज का आह्वान करते हुए कहा कि वे हिन्दू चिंतन के आधार पर स्वार्थमुक्त, भेदभावमुक्त समाज के निर्माण में संघ के साथ जुड़ें। संघ अपना नाम नहीं चाहता। हमारा भाव है- 'तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें'। देश के भाग्योदय के लिए सबको साथ लेकर हम चलना चाहते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जैनमुनि पुलक सागर महाराज ने कहा कि अनुशासन तथा देशभक्ति की सीख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से ली जा सकती है। संघ के स्वयंसेवकों का जीवन किसी संत से कम नहीं है। उनका गणवेश संतों के वस्त्रों जैसा पवित्र है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की एकता मजबूत करने की आवश्यकता है। फटे नोट और टूटे देश-समाज की कोई कीमत नहीं होती। एकता द्वारा ही मतांतरण करने वालों को जवाब दिया जा सकता है। उन्होंने गीता को संसार के हर मत-पंथ की नींव बताया। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने विभिन्न प्रकार के शारीरिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन भी किया। साथ ही मेरठ से प्रकाशित 'राष्ट्रदेव' पत्रिका के 'स्वामी विवेकानंद सार्द्धशती विशेषांक' का लोकार्पण भी श्री भागवत एवं मुनि पुलक सागर महाराज ने संयुक्त रूप से किया। वर्ग के समापन समारोह में मेरठ के हजारों लोग उपस्थित थे।
वर्ग में स्वामी विवेकानंद, विश्व में भारतीयों की उपलब्धियों, हिन्दू स्वयंसेवक संघ के कार्यों तथा रा.स्व.संघ व विविध संगठनों की गतिविधियों पर लगाई गई भव्य प्रदर्शनी को हजारों लोगों ने देखा

मानसिक गुलामी

मानसिक गुलामी
- अरविन्द सिसोदिया


संगठन द्रोपती बन गए

संगठन द्रोपती बन गए
- अरविन्द सिसोदिया
कोटा राजस्थान