सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की सभी क्षमतायें - डॉ. विजय भाटकर




सूर्य नमस्कार महायज्ञ का भव्य आयोजन सम्पन्न
पदमश्री डॉ.भाटकर ने किया मोबाइल से सीधा सम्बोधन
भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की सभी क्षमतायें - डॉ. विजय भाटकर

प्रस्तुति - अरविन्द सिसोदिया
कोटा 18 फरवरी । भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की क्षमता है। यह उद्गार सूर्य नमस्कार महायज्ञ के मुख्य अतिथि डॉ. विजय भाटकर ने अपने मोबाईल सम्बोधन में कहे। भाटकर को सोमवार को कोटा में सूर्य नमस्कार महायज्ञ में मुख्यअतिथि के रूप में आना था किन्तु भारत सरकार की एक आवश्यक बैठक में उन्हे भाग लेने जाने के कारण वे कार्यक्रम में स्वंय भाग लेने कोटा नहीं आ सके। उन्होने कार्यक्रम को मोबाईल से सीधे (लाइव) सम्बोधित किया जिसे लाउडस्पीकर के माध्यम से सहभागियों ने सुना।
स्वामी विवेकानन्दजी के 150 जयन्ति वर्ष के कार्यक्रमों के अन्तर्गत सोमवार को पूरे देश में स्वामी विेकानन्द सार्द्धशती समारोह समिति के तत्वाधान में सामूहिक सूर्य नमस्कार के कार्यक्रम आयोजित हुये है। इसी क्रम में कोटा महानगर समिति के द्वारा कोटा में उपरोक्त आयोजन हुआ ।
कार्यक्रम में स्वामी विवेकानन्द जी के राजस्थान प्रवास पर लिखी गई,हनुमानसिंह राठौड की पुस्तक “ स्वामी विवेकानन्द राजस्थान में ” का भी विमोचन किया गया।
 कोटा स्थित महाराव उम्मेद सिंह स्टेडियम में प्रातः 8 बजे से सूर्य नमस्कार महायज्ञ का अदभुद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में सम्मिलित कोटा महानगर के विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, बहिनों और अन्य सहभागियों नें सामूहिक सूर्य नमस्कार योगासन को , सूर्य भगवान को समर्पित मंत्रोचारण के साथ सम्पन्न किया।
पदमश्री डॉ.विजय भाटकर ने मोबाईल फोन से अपना सम्बोधन दिया जिसमें उन्हाने कहा कि सूर्य नमस्कार योगासन सम्पूर्ण शरीर की क्रियाओं को ठीक रखने ओर उनकी क्षमता वृद्धि के लिये महत्वपूर्ण है। यह शिक्षा ग्रहण कर रहे और परिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिये विषेश उपयोगी है।  
भाटकर ने कहा भारत में पुनः विश्वगुरू बनने की क्षमता है। उन्होने अपनी बात के समर्थन में कहा ” अमरीका की खुफिया विभाग की रिपोर्ट में यह जिक्र  है कि भारत अमरीका और चीन को 2030 से 2040 के बीच पीछे छोड, ज्ञान एवं तकनीक में आगे बड जायेगा।
उन्होने मोबाईल से सम्बोधन में कहा स्वामी विवेकानन्द ने दो भविष्यवाणियां की थी, पहली की देश अगले 50 साल में आजाद हो जायेगा जो कि 1947 में सही साबित हुई और दूसरी भारत पुनः विश्व गुरू बनेगा, जो कि अब सही सिद्ध होने वाली है। भाटकर ने कहा कि आज भारत की प्रतिष्ठा पूरे विश्व में ज्ञान के कारण ही है । भारत सोफ्टवेयर तकनीक में विश्व में अग्रणी है उसे हार्डवेयर तकनीक में भी महारात हांसिल करनी होगी।
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विज्ञान भारती के अखिल भारतीय संगठनमंत्री जयन्तराव सहस्त्रबुद्धे ने अपने सम्बोधन में कहा भारत पूर्व में भी ज्ञान का विश्व केन्द्र था तक्षशिला, नालंदा, विक्रम इत्यादि विश्वविद्यालयों में हजारों विद्यार्थी विदेशों से शिक्षा ग्रहण करने आते थे। अभी हम विदेशों में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैैं । यह स्थिति बदलनी चाहिये और फिर से भारत में लोग शिक्षा ग्रहण करने आयें, यह स्थिति वर्तमान युवा पीढ़ी के बलबूते हमें प्राप्त करनी है।
उन्होने कहा भारतीय वेदान्त का ज्ञान वर्तमान वैज्ञानिकों के लिये भी प्रेरणा स्त्रोत रहा है आज भी इसी ज्ञान के द्वारा सृष्टि के रहस्य खोजने में सहायक है। हम सभी भारतवासियों का यह कर्त्तव्य है कि हम शिक्षा को अपना आधार बना कर, स्वामी विवेकानन्दजी के स्वप्नों को साकार करने में जुट जायें। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों को प्रसाद वितरण किया गया ।
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विज्ञान भारती के अखिल भारतीय संगठनमंत्री जयंतराव सहस्त्रबुद्धे, मुख्य अतिथि गोविन्द माहेश्वरी निदेशक एलन केरियर, अध्यक्षता ओमप्रकाश माहेश्वरी निदेशक केरियर पाइंट, विश्ष्टि अतिथि समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं रेजोनेंस के निदेशक आर. के. वर्मा, समिति की प्रदेश कार्यकारणी सदस्या डॉ. संगीता सक्सेना और समिति के प्रांतीय सह संयोजक जटाशंकर शर्मा रहे। अतिथि परिचय एवं स्वागत समिति के सह संयोजक बाबूलाल भाट ने किया और धन्यवाद समिति के महानगर संयोजक महेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजक श्रवणकुमार शर्मा ने किया । कार्यक्रम के प्रारम्भ में भारतमाता पूजन किया गया अतिथि स्वागत विभाग संयोजक त्रिलोकचंद जैन, प्रचार प्रमुख केवलकृष्ण बांगड, कोषाध्यक्ष रामबाबू सोनी, निरंजनजी और पन्नालालजी ने किया।