शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

'Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram ' : Dharma sansad




Dharma sansad 9
Ninth Dharma Sansad
This was convened on the occasion of Maha Kumbh at Prayag on 19-21 January 2001. Pujya Jagadguru Shankaracharya Jyotish Peethadhishwar Swami Vasudevanand Maharaj and Shri. Ashok Singhal delivered the introductory speech. About 6,000 Siants and Dharmacharyas participated in this Dharma Sansad.
Note Worthy Activities
It was proclaimed from the platform of Dharma Sansad that all the obstacles in the way of construction of Shriram Janmabhumi Mandir at Ayodhya be removed forthwith i.e. the construction activities could be started on any auspicious day after Shivaratri i.e. 12 March 2002. Following three programmes were also announced to provide spiritual energy to the Abhiyan; to awaken Hindutva and give momentum to this work of Mandir Construction :
Jalabhishek to Lord Shankar in the Purushottam Mas
* Japa Yajna of Vijaya Maha-Mantra Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram€
* Sant Chetavani Yatra from Ayodhya to Delhi
* Resolutions Passed
Resolutions Passed
01. While expression its concern over the fundamentalism in Muslim society and Jihadi tendency,they were insisted to give up the path of Jihad and terrorism; and join hands with the efforts being made to the all-around upliftment of Bharat and Bharatiya society.
02. Seeing the hand of the Church behind the separatist and terrorist tendencies in the entire north- east region including Tripura, the Dharma Sansad demanded that anti-national activities of the church be reined in by passing a Central enactment to ban conversions and strict measures be taken in Tripura to protect the nationalist Hindus there.
03. While proving the greatness of Ganga and futility of Tihri Dam, the Dharma Sansad asked Hindu society to take an oath in the presence of the holy stream of Ganga at Prayagraj Tirtha that they would be prepared for sacrificing everything for maintaining the purity and continuity of Ganga undisturbed and demanded of the Govt. to keep the stream of Ganga pure throughout her length.
04. The Dharmacharyas demanded of the Central and State Govts. to pass an enactment banning conversions by the Christian and Muslims bodies. After demanding that conversion be declared as a serious cognizable crime, the Parishad expressed its firm determination to start social service activities on a very large scale in Vanavasi communities and Dalit segments with the active involvement of Sant-Mahatmas- Dharmacharyas and nationalist organisations.
05. Demands concerning gau vansha- The government should ban cow-slaughter once and for all; to set up a National Commission on Cows and create a Gau-Samvardhan Ministry; to prevent smuggling of cattles; to open a National Bovine Research Centre; to activate the Gau-Sadans that have become defunct or sluggish; to encourage bio-agriculture; to remove the encroachment on the grazing grounds; to dismantle slaughter houses; and to arrange relief to cattles from the horrible drought. Or else the Dharmacharyas would be forced to start a revolution in the whole country.
06 Central and State Govts. were requested not to bring management of the Mutt-Mandirs under government control, but they should be regulated through an autonomous body and this autono- mous body should be comprised of Sadhu-Saints, Retired Judges, Government Officers, Social activists; and religious and peoples representatives.
07. The Central Govt. was requested to provide support to the Swadeshi Andolan in the interest of the nation and people; as also to encourage the use of Swadeshi goods in all the undertakings; so that millions of youth could come forward in the field of self-employment and become self-reliant. The Dharma Sansad appealed to the masses to stop use of the goods of multi-national companies and get involved in making Bharat economically self-reliant.

Important Achievement

An announcement was made to perform Jalabhishek to Lord Shankar in the Purushottam Mas, Japa Yajna of Vijaya Mahamantra 'Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram ' and take out a Sant Chetavani Yatra for providing spiritual energy to the Abhiyan; to awakening of Hindutva and giving momentum to the work of Mandir Construction.

जो दया नहीं करते वे दया के हकदार नहीं: सर्वोच्च न्यायालय



जो दया नहीं करते वे दया के हकदार नहीं: सर्वोच्च न्यायालय
               नई दिल्ली: साल 1993 के दिल्ली बम विस्फोट के दोषी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट के जरिए बरकरार रखे जाने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की अपनी-अपनी राय है. पंजाब में सत्तारुढ़ शिरोमणि अकाली दल भुल्लर की फांसी के विरुद्ध है.
भुल्लर की फांसी को लेकर यह बहस भी छिड़ी हुई है जब उसने फांसी पर फैसले के इंतज़ार में 11 साल तक जेल में गुजार दिए हैं तो फिर उसे फांसी पर लटकना इंसाफ नहीं होगा.
इसे ही आधार बनाकर भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी फांसी की सजा को उम्र कैद में बदलने का आग्रह किया था, जिसे शुक्रवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया.
कोर्ट ने फांसी की सजा बरकार रखने के अपने फैसले में कहा, "आतंकवादी हत्या से पहले पलभर के लिए भी पीड़ितों के परिवार, माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चों और रिश्देतार व दोस्तों के बारे में नहीं सोचते. जो पीड़ित होते हैं उन्हें यह ताउम्र सहना पड़ता है. आर्थिक नुकसान इसके अलावा है.  यह अजीबोगरीब बात है कि जो लोग दूसरों के साथ दया और करुणा का भाव नहीं रखते वे दया की अपील करते हैं."
कोर्ट ने मानवाधिकार संगठनों को फटकार लगाते हुए कहा, "कुछ लोग ऐसे लोगों के मानवाधिकारों का हवाला देकर आतंकवादियों के जरिए किए गए मासूम लोगों की हत्या और सामूहिक हत्या का एक तरह से अनुमोदन करते हैं."
फांसी पर फैसला मुद्दों लटके रहने की बुनियाद पर मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की भुल्लर की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह सच है कि याचिकाकर्ता की अर्जी को निपटाने में लंबा समय लगा है. लेकिन इस केस की अजीब स्थिति को देखते हुए हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि राष्ट्रपति द्वारा मौत की सजा को बरकरार रखने के फैसले को आजीवन कारावास की सजा में नहीं बदला जा सकता है.
कोर्ट ने आगे कहा, "साल 1999 से 2011 के बीच 18 दया याचिकाएं एक से लेकर 13 साल से लंबित हैं. इससे यह संदेश जाता है कि सरकार इन मामलों को लेकर गंभीर नहीं है. हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों का निपटारा अनुचित देरी के बिना किया जाएगा."
ग़ौरतलब है कि 1993 में दिल्ली में युवक कांग्रेस कार्यालय पर हुए बम हमले में नौ लोग मारे गए थे. इसी केस में भुल्लर को मौत की सजा सुनाई गई है.

160 सीटों पर असर डाल सकता है सोशल मीडिया!





चुनाव में 160 सीटों पर असर डाल सकता है सोशल मीडिया!

नई दिल्ली। अगले आम चुनाव में फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोग खासा असर डाल सकते हैं। लोकसभा की तकरीबन 160 सीटों पर इसका असर दिखाई पड़ सकता है। आयरिश नॉलेज फाउंडेशन एंड इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक अध्ययन में ये दावा किया गया है।
इसके मुताबिक लोकसभा की कुल 543 में से 160 सीटों पर सोशल मीडिया का खासा असर देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र में इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। यहां की 21 सीटों पर सोशल मीडिया का असर पड़ सकता है। जबकि गुजरात में 17 सीटें सोशल मीडिया से प्रभावित हो सकती हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश में 14, कर्नाटक की 12, तमिलनाडु की 12, आंध्र प्रदेश की 11, केरल की 10 और मध्य प्रदेश की 9 सीटों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
ये वो लोकसभा सीटें हैं जहां लोग सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करते हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मतदाताओं के दस फीसदी से ज्यादा लोग फेसबुक से जुडे़ हुए हैं। ताजा सर्वे के मुताबिक फेसबुक से जुड़े लोग चुनाव से पहले अपने आसपास के वोटरों को प्रभावित कर सकते हैं। इस अध्ययन के मुताबिक पिछले चुनाव में कांग्रेस ने जिन 75 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहां इस बार सोशल मीडिया का खास असर दिखाई देगा। इसी तरह पिछले चुनाव में बीजेपी ने जिन 44 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहां के मतदाता भी इस बार फेसबुक से प्रभावित होकर अपनी राय बनाएंगे.
अध्ययन ने ये भी संकेत दिए हैं कि जब चुनाव से 48 घंटे पहले उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार पर रोक लग जाती है, तब फेसबुक, ट्विटर पर चुनाव प्रचार अपना रंग दिखाएंगे।

विजय महामंत्र का जाप पूरे देश में प्रारम्भ





विजय महामंत्र का जाप पूरे देश में प्रारम्भ हो गया है
राम मंदिर निर्माण के लिए संत करेंगे विजय महामंत्र जाप
अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की सभी बाधाओं को दूर करने के लिये,प्रयागाराज महाकुंभ में विश्वहिन्दू परिषद के आव्हान पर देश भर के संतों ने निर्णय लिया था कि नवसंवतसर  11 अप्रैल के शुभारम्भ से अक्षय तृतिया  13 मई तक ” विजय महामंत्र “ ” श्रीराम, जय राम, जय जय राम“ की 13 मालायें प्रतिदिन जाप  देश भर  में एक साथ प्रत्येक हिन्दू करेगा।
 विहिप के केंद्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय विशेष संपर्क प्रमुख पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने बताया, "प्रयाग महाकुंभ के दौरान संतों के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल ने देशभर में 11 अप्रैल (प्रतिपदा) से 13 मई (अक्षय तृतीया) तक विजय महामंत्र 'श्रीराम जय राम जय जय राम' का 13 माला नित्य जाप कर सिद्ध क्षेत्र बनाने का आह्वान किया है।" संतों का मानना है कि विजय महामंत्र के द्वारा ही मंदिर निर्माण के मार्ग में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सकता है।