रविवार, 14 अप्रैल 2013

खिलाडिय़ों को वैचारिक आधार पर नहीं बांटें : भाजपा






शनिवार, 13 अप्रैल 2013
RSS Strongly reacts as Rajasthan govt asks affidavit from sportsmen stating no link with RSS!
Jaipur/New Delhi April 12, 2012: A sports ceremony organised by Rajasthan's Congress government was turned in to huge controversy when government's Sports Department demanded an affidavit from every awardees stating that they are not involved in RSS !

More than 300 sports persons were given out cash award in Jaipur's SMS Stadium this afternoon for excelling at the state level championships. But a controversy broke out over an affidavit that every awardees was asked to file, stating that they are not involved in RSS and activities of Jamat-e-Islame. Sports persons were taken by surprise when this clause was pointed out to them but Rajasthan Sports Council says they have only followed government guidelines even as BJP accused Gehlot govt of bringing politics into sports.
More than 300 sports persons who have done well at state level championship, Rs 2.26 crore doled out, Rs 1 Lakh to first position holders, Rs 50,000 to second and Rs 20,000 to third position holders! But a row has erupted over the cash prizes. As a formality for claiming the award, every sports person had to give an affidavit to the effect that they will not participate in activities of RSS and Jamat-e-Islame!
RSS Reacted strongly:
Reacting to VSK-Karnataka on the above incident, RSS Akhil Bharatiya Prachar Pramukh Dr Manmohan Vaidya said, "We strongly condemn this vindictive attitude of the Rajasthan Government and the Congress. Unless the said Organisations are banned, Rajasthan government's decision to take up such affidavit from sportspersons is totally unconstitutional, vindictive and politically motivated".
'Congress should not bring its politics and personal vendetta in the field of sports', said Dr ManmohanVaidya.

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व जमात-ए-इस्लामी संगठन की गतिविघियां भले ही गैरकानूनी ना हों, लेकिन इनमें शामिल होने पर प्रदेश के अव्वल खिलाडियों को भी सरकार से पुरस्कार नहीं मिलेगा। क्रीड़ा परिषद की ओर से शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कृत खिलाडियों को इन संगठनों की गतिविघियों में शामिल नहीं होने का शपथ पत्र लिए जाने की खबर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व भाजयुमो कार्यकर्ताओं को लगी तो उन्होंने सवाई मानसिंह स्टेडियम में करीब ढाई घंटे जोरदार हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों ने कुर्सियां फेंकी और तोड़फोड़ करने लगे जिससे समारोह में पुलिस बुलानी पड़ी।
इसलिए विरोध 
खिलाडियों को प्रोत्साहन राशि देने के लिए सरकार एक शपथ पत्र लेती है। इसमें आवेदनकर्ता को बताना होता है कि उसका आरएसएस, जमात-ए-इस्लामी से कोई सम्बन्ध नहीं है। विद्यार्थी परिषद और भाजयुमो के कार्यकर्ता इस नियम का ही विरोध कर रहे थे। क्रीड़ा भारती राजस्थान समेत कुछ अन्य संगठनों ने भी विज्ञप्ति जारी कर इस पर विरोध जताया। 
1986 से है नियम 
क्रीड़ा परिषद के सूत्रों का कहना है कि हमने खेल विभाग के आदेशों की पालना की है और यह शर्त 1986 से लागू है। गौरतलब है कि इस दौरान दो बार भाजपा भी सत्ता में रही है। हालांकि भाजपा सरकार में खेल मंत्री रहे युनूस खान का कहना है कि मेरे कार्यकाल में आरएसएस और जमात ए इस्लामी का नियम वापस ले लिया था।
स्त्रोत:  राजस्थान पत्रिका
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कानूनी लड़ाई लड़ेगी क्रीड़ा भारती  
संदीप देशपांडे 

जयपुर, 13 अप्रेल। पुरस्कार के हकदार खिलाडिय़ों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध न रखने का शपथ पत्र भरवाने वाले खेल परिषद के अध्यक्ष शिवचरण माली स्वयं अब सवालों के घेरे में आ गए है। शिवचरण माली न सिर्फ लंबे समय तक संघ के अनुषांगिक संगठन विद्याभारती के अधीन संचालित स्कूल आदर्श विद्या मंदिर में शिक्षक रहे बल्कि संघ गतिविधियों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहे। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगे हंै कि यदि क्रीड़ा परिषद को खिलाडिय़ों के संघ से जुड़े रहने पर आपत्ति है तो खुद परिषद के अध्यक्ष को क्यों छूट दी गई है!
 दूसरी ओर खेलों के क्षेत्र में काम करने वाली संघ की आनुषांगिक संस्था क्रीड़ा भारती अब इस मामले पर अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। क्रीड़ा भारती के सचिव और आदर्श विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य रामानंद चौधरी के अनुसार क्रीड़ा परिषद का यह फरमान गैरकानूनी है इसका जवाब कानूनी रूप से ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई प्रतिबंधित संगठन नहीं है ऐसे में खिलाडिय़ों से संघ से संबंध नहीं होने का शपथ पत्र भरवाना अवैधानिक है। चौधरी ने क्रीड़ा परिषद अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि खुद अध्यक्ष शिवचरण माली आदर्श विद्या मंदिर में शिक्षक रहे हंै। इतना ही नहीं बल्कि वे संघ शाखा में जाते थे और सभी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। चौधरी ने कहा कि जब क्रीडा परिषद अध्यक्ष ही संघ से जुड़े रहे हैं तो वे खिलाडिय़ों से इस प्रकार का बेतुका शपथ पत्र कैसे भरवा सकते है! क्या है मामलाविभिन्न खेलों में पदक हासिल करने वाले खिलाडिय़ों को सम्मान स्वरूप चेक प्रदान करने की प्रक्रिया तब विवादों में आ गई है जब खेल परिषद ने चेक देने से पूर्व खिलाडिय़ों से एक शपथ-पत्र भरवाया, जिसमें उनसे इस बात की शपथ ली गई कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जमात ए इस्लामी संगठन के सदस्य नहीं है। इस तरह का शपथ पत्र भरवाए जाने की बात सार्वजनिक होने पर हंगामा मच गया है।

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खेल परिषद में पुरस्कार शपथ पत्र और हंगामा 
विवाद को लेकर राजनीतिक बयानों का खेल
घमंडाराम को 3.50 लाख रुपए 
आरएसएस-जमायते इस्लामी से संबंध नहीं होने का शपथ पत्र भराने को लेकर हुआ विवाद, एबीवीपी और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने किया इसका विरोध 

225 खिलाडिय़ों को दिया अनुदान 
इस बीच खेल परिषद ने विभिन्न खेलों के 225 खिलाडिय़ों को अनुदान दिया। 800 मी. दौड़ के नेशनल चैंपियन घमंडाराम को सर्वाधिक 3.50 लाख रुपए की राशि दी गई। 353 खिलाडिय़ों को अनुदान दिया जाना था, जिनमें से शुक्रवार को 225 खिलाड़ी मौजूद थे। बैडमिंटन की योशिता माथुर को तीन लाख रुपए का चेक दिया गया। इसके अलावा शॉटपुटर शक्ति सिंह व डेकेथलॉन के दयाराम को ढाई-ढाई लाख, वेटलिफ्टर अनिता चौधरी को दो लाख और शटलर निखिल जांगिड़ को 1.50 लाख रु. मिले। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2012-13 के बजट में खिलाडिय़ों की पुरस्कार राशि में 10 गुना इजाफे की घोषणा की थी। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में स्वर्ण पर 50 हजार के स्थान पर पांच लाख, राष्ट्रीय टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक पर 25 हजार के स्थान पर 2.50 लाख तथा राज्य स्तरीय स्पर्धाओं में पहले स्थान पर 10 हजार स्थान पर एक लाख रु. की घोषणा की थी। 

खेल राज्यमंत्री मांगीलाल गरासिया ने इस बारे में कहा कि यह नियम 1986 से लागू है। वर्तमान सरकार तो सिर्फ उसका पालन कर रही है। यदि कोई कह रहा है कि इसे हमने लागू कराया है, तो वो झूठ बोल रहा है। वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान ने कहा कि सांप्रदायिक व कट्टरपंथी संगठनों को बढ़ावा देना ठीक नहीं है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री सतीश पूनिया ने कहा कि खिलाडिय़ों को वैचारिक आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए। उनकी उपलब्धियों व प्रदर्शन पर ही ध्यान दिया जाना चाहिए। 
युवा मोर्चा के जयपुर अध्यक्ष राजेश टिक्कीवाल ने कहा कि ऐसे शपथ पत्र भराते हुए राज्य सरकार मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है। हम जनता की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। यदि यह शर्त नहीं हटाई गई, तो हम आंदोलन तेज करेंगे। वहीं एबीवीपी कार्यकर्ता कुलदीप सिंह, अंकित चेची और दीपेश शर्मा ने कहा कि खेलों को ऐसी राजनीति से दूर रखना चाहिए। यह कांग्रेस सरकार की गलत नीति है और हम इसका विरोध जारी रखेंगे। 

खेल संवाददाता त्न जयपुर
राज्य खेल परिषद ने सवा दो करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि बांटने के लिए शुक्रवार को खिलाड़ी तो बुला लिए, लेकिन शपथ पत्र की एक शर्त के कारण वहां काफी देर हंगामा हुआ। खिलाडिय़ों से एक शपथ पत्र भरवाया जा रहा था, जिसमें उनके आरएसएस या जमायते इस्लामी से नहीं जुड़े होने की जानकारी मांगी गई थी। खिलाडिय़ों ने तो इस पर ज्यादा आपत्ति नहीं की, लेकिन जब एबीवीपी और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लगी, तो वे विरोध के लिए स्टेडियम पहुंच गए। इस बीच जयपुर जिला बास्केटबॉल संघ के पदाधिकारियों ने अपने खिलाडिय़ों को पुरस्कार राशि नहीं देने का विरोध किया। परिषद के पदाधिकारियों का इस बारे में कहना था कि जब उनकी ओर से आवेदन ही नहीं किया गया, तो राशि देने का सवाल ही नहीं उठता। 

पुलिस ने कार्यकर्ताओं को मेन बिल्डिंग में प्रवेश करने से रोका गया। इस पर कार्यकर्ताओं ने विरोध तेज किया, तो उनकी पुलिसकर्मियों से भिड़ंत हो गई। 

कार्यकर्ताओं ने स्टेडियम की सीढिय़ों पर बैठकर नारेबाजी भी की। 

समारोह में पुरस्कार राशि का चेक लेते घमंडाराम (बाएं) व अन्य खिलाड़ी। 

शुक्रवार दोपहर एसएमएस स्टेडियम पर प्रदर्शन करते और कुर्सियां तोड़ते एबीवीपी और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता। 

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राजस्थान में खिलाड़ियों से 'अजीब' शपथ-पत्र भरवाने पर हंगामा
नवभारतटाइम्स.कॉम | Apr 13, 2013, 11.44AM IST
जयपुर।। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और जमात ए इस्लामी की गतिविधियां भेल ही गरकानूनी ना हों, लेकिन इनमें शामिल होने पर राजस्थान के अव्वल खिलाड़ियों को भी प्रदेश सरकार की तरफ से पुरस्कार नहीं मिलेगा। राजस्थान खेल परिषद ने मेडल हासिल करने वाले खिलाड़ियों को चेक देने से पहले एक शपथ-पत्र भरवाया, जिसमें उनसे इस बात की शपथ ली गई कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जमात-ए-इस्लामी के सदस्य नहीं हैं। इस खबर के सार्वजनिक होने पर सियासी बवाल मच गया है। इस पर आरएसएस ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

राजस्थान खेल परिषद की ओर से मेडल हासिल करने वाले खिलाड़ियों को चेक प्रदान करने की प्रक्रिया विवादों में आ गई है। खेल परिषद ने चेक देने से पहले खिलाड़ियों से एक शपथ-पत्र भरवाया, जिसमें उनसे इस बात की शपथ ली गई कि वे आरएसएस और जमात-ए-इस्लामी के सदस्य नहीं हैं। इस बात के सार्वजनिक होते ही हंगामा मच गया। बीजेपी ने जयपुर स्टेडियम में विरोध भी किया। विरोध को शांत करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। आरएसएस ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। आरएसएस प्रवक्ता राममाधव ने कहा है कि राजस्थान सरकार का यह फैसला गैरकानूनी है। उन्होंने इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है।

क्या है प्रक्रिया
खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देने के लिए सरकार एक शपथ लेती है। इसमें आवेदनकर्ता को बताना होता है कि उसका आरएसएस और जमात-ए-इस्लामी से कोई संबंध नहीं है।

यह शर्त तो पहले से थी!
खेल परिषद के सूत्रों का कहना है कि हमने सिर्फ खेल विभाग के आदेशों का पालन किया है। यह शर्त 1986 से लागू है। गौरतलब है कि इस दौरान 2 बार बीजेपी भी सत्ता में भी रही है। हालांकि, बीजेपी सरकार में खेल मंत्री रहे युनूस खान का कहना है कि मेरे कार्यकाल में आरएसएस और जमात-ए-इस्लामी का नियम वापस ले लिया था।

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खिलाड़ियों से शपथ-पत्र लेकर फंसी गहलोत सरकार
Updated on: Sat, 13 Apr 2013 

जयपुर [जासं]। राजस्थान में पदक जीतने वाले खिलाडि़यों को पुरस्कार देने के पहले दस रुपये के स्टांप पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और जमात-ए-इस्लामी का सदस्य नहीं होने का शपथ-पत्र लेने पर अशोक गहलोत सरकार मुश्किल में फंस गई है। भाजपा समेत हिंदू संगठनों के साथ मुस्लिम संगठनों ने भी इस मसले पर नाराजगी जताई है और सरकार के इस निर्णय के खिलाफ आंदोलन की भी तैयारी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान खेल परिषद ने पुरस्कृत होने वाले खिलाडि़यों को चेक देने से पूर्व दस रुपये के स्टांप पर एक शपथ-पत्र भरवाया कि संघ और जमात-ए-इस्लामी संगठन से उनका कोई संबंध नहीं हैं। अब विभिन्न संगठन इसके विरोध में उतर आए हैं। प्रदेश के खेल मंत्री मांगीलाल गरासिया का कहना है कि यह नियम 1986 से लागू है। सरकार उसका पालन कर रही है। लेकिन राजस्थान खेल परिषद के पूर्व अध्यक्ष एसएन माथुर ने इस तरह के किसी नियम होने से इन्कार किया है। कांग्रेसी नेताओं का एक वर्ग भी इस शर्त के खिलाफ है और आलाकमान से कहा है कि चुनावी साल में इस तरह का शपथ-पत्र मांगना पार्टी के लिए नुकसान दायक हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं ने भी मुख्यमंत्री गहलोत से विरोध दर्ज कराया है। राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ललित किशोर चतुर्वेदी और प्रदेश महामंत्री कालीचरण सर्राफ का कहना है कि ऐसा शपथ पत्र भरवाने की बात बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह तुगलकी फरमान वापस नहीं लिया तो इसके खिलाफ सड़कों पर लड़ाई लड़ी जाएगी। आरएसएस वरिष्ठ पदाधिकारी बीरू सिंह राठौड़ का कहना है कि खिलाड़ियों को वैचारिक रूप से बांटना ठीक नहीं। हिंदू समाज इस मामले को लेकर आंदोलन करेगा। जमात-ए-इस्लामी हिंद के पूर्व प्रदेश सचिव मो. नाजिमुद्दीन का कहना है कि यह गलत और गैर कानूनी है। यदि जमात-ए-इस्लामी गलत संगठन है तो इस पर प्रतिबंध लगाएं। लेकिन ऐसी हरकत का हम विरोध करेंगे। यह नियम बदला नहीं गया तो संघर्ष करेंगे। राज्य अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष शादिक अली का कहना है कि देश में कहीं भी ऐसी शर्त नहीं है तो फिर यहां क्यों रखी गई। शुक्रवार को भाजपा युवा मोर्चा और संघ के स्वयंसेवकों ने स्टेडियम में पहुंच कर इस मसले पर हंगामा किया था।
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