शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

संत श्री आशाराम बापू : Sant Shree Asaram Bapu


http://bharatdiscovery.org
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति


आध्यात्मिक गुरु 

आशाराम बापू

संत श्री आशाराम बापू अथवा आसाराम बापू (अंग्रेज़ी: Asaram Bapu, जन्म: 17 अप्रॅल, 1941, सिंध) एक भारतीय आत्मज्ञानी संत हैं, जो मानवमात्र में एक सच्चिदानन्द ईश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते हैं। आशाराम बापू का वास्तविक नाम 'आसुमल सिरुमलानी' है।

जीवन परिचय
संत श्री आसारामजी महाराज का जन्म सिंध प्रान्त के नवाबशाह ज़िले में सिंधु नदी के तट पर बसे बेराणी गाँव में नगर सेठ श्री थाऊमलजी सिरुमलानी के घर 17 अप्रैल 1941 तदनुसार विक्रम संवत 1998 को चैत्र वदी षष्ठी के दिन हुआ था। इनकी पूजनीय माताजी का नाम महँगीबा है। उस समय नामकरण संस्कार के दौरान आपका नाम आसुमल रखा गया था।

बाल्य अवस्था
आशाराम का बाल्यकाल संघर्षों की एक लंबी कहानी हैं। विभाजन की विभिषिका को सहनकर भारत के प्रति अत्यधिक प्रेम होने के कारण आपका परिवार अपनी अथाह चल-अचल सम्पत्ति को छोड़कर यहाँ के अहमदाबाद शहर में 1947 में आ पहुँचा। अपना धन-वैभव सब कुछ छूट जाने के कारण वह परिवार आर्थिक विषमता के चक्रव्यूह में फँस गया लेकिन आजीविका के लिए किसी तरह से पिताश्री थाऊमलजी द्वारा लकड़ी और कोयले का व्यवसाय आरम्भ करने से आर्थिक परिस्थिति में सुधार होने लगा। तत्पश्चात् शक्कर का व्यवसाय भी आरम्भ हो गया।

शिक्षा
आशाराम बापू की प्रारम्भिक शिक्षा सिन्धी भाषा से आरम्भ हुई। तदनन्तर सात वर्ष की आयु में प्राथमिक शिक्षा के लिए आपको 'जयहिन्द हाईस्कूल', मणिनगर, (अहमदाबाद) में प्रवेश दिलवाया गया। अपनी विलक्षण स्मरणशक्ति के प्रभाव से आप शिक्षकों द्वारा सुनाई जाने वाली कविता, गीत या अन्य अध्याय तत्क्षण पूरी की पूरी हू-ब-हू सुना देते थे। विद्यालय में जब भी मध्यान्ह की विश्रान्ति होती, बालक आसुमल खेलने-कूदने या गप्पेबाजी में समय न गँवाकर एकांत में किसी वृक्ष के नीचे ईश्वर के ध्यान में बैठ जाते थे। चित्त की एकाग्रता, बुद्धि की तीव्रता, नम्रता, सहनशीलता आदि गुणों के कारण बालक का व्यक्तित्व पूरे विद्यालय में मोहक बन गया था। आप अपने पिता के लाड़ले संतान थे। अतः पाठशाला जाते समय पिताश्री आपकी जेब में पिश्ता, बादाम, काजू, अखरोट आदि भर देते थे जिसे आसुमल स्वयं भी खाते एवं प्राणिमात्र में आपका मित्रभाव होने से ये परिचित-अपरिचित सभी को भी खिलाते थे। पढ़ने में ये बड़े मेधावी थे तथा प्रतिवर्ष प्रथम श्रेणी में ही उत्तीर्ण होते थे, फ़िर भी इस सामान्य विद्या का आकर्षण आपको कभी नहीं रहा। लौकिक विद्या, योगविद्या और आत्मविद्या ये तीन विद्याएँ हैं, लेकिन आपका पूरा झुकाव योगविद्या पर ही रहा।

परिवार
माता-पिता के अतिरिक्त आशाराम बापू के परिवार में एक बड़े भाई तथा दो छोटी बहनें थीं। बालक आसुमल को माताजी की ओर से धर्म के संस्कार बचपन से ही दिये गये थे। माँ इन्हें ठाकुरजी की मूर्ति के सामने बिठा देतीं और कहतीं -“बेटा, भगवान की पूजा और ध्यान करो। इससे प्रसन्न हो कर वे तुम्हें प्रसाद देंगे।” वे ऐसा ही करते और माँ अवसर पाकर उनके सम्मुख चुपचाप मक्खन-मिश्री रख जातीं। बालक आसुमल जब आँखें खोलकर प्रसाद देखते तो प्रभु-प्रेम में पुलकित हो उठते थे।

विवाह
तरुणाई के प्रवेश के साथ ही घरवालों ने इनकी शादी करने की तैयारी की। वैरागी आसुमल सांसारिक बंधनों में नहीं फँसना चाहते थे इसलिए विवाह के आठ दिन पूर्व ही वे चुपके से घर छोड़ कर निकल पड़े। काफी खोजबीन के बाद घरवालों नें उन्हें भरूच के एक आश्रम में पा लिया। "चूँकि पूर्व में सगाई निश्चित हो चुकी है, अतः संबंध तोड़ना परिवार की प्रतिष्ठा पर आघात पहुँचाना होगा। अब हमारी इज्जत तुम्हारे हाथ में है।" सभी परिवारजनों के बार-बार इस आग्रह के वशीभूत होकर तथा तीव्रतम प्रारब्ध के कारण उनका विवाह हो गया, किन्तु आसुमल उस स्वर्णबंधन में रुके नहीं। अपनी सुशील एवं पवित्र धर्मपत्नी लक्ष्मीदेवी को समझाकर अपने परम लक्ष्य ‘आत्म-साक्षात्कार’ की प्राप्ति तक संयमी जीवन जीने का आदेश दिया। अपने पूज्य स्वामी के धार्मिक एवं वैराग्यपूर्ण विचारों से सहमत होकर लक्ष्मीदेवी ने भी तपोनिष्ठ एवं साधनामय जीवन व्यतीत करने का निश्चय कर लिया।

गृहत्याग एवं ईश्वर की खोज
विक्रम संवत 2020 की फाल्गुन सुदी 11 तदनुसार 23 फरवरी 1964 के पवित्र दिवस आप किसी भी मोह-ममता एवं अन्य विघ्न-बाधाओं की परवाह न करते हुए अपने लक्ष्य की सिद्धि के लिए घर छोड़कर चल पड़े। घूमते-घूमते आप केदारनाथ पहुँचे, जहाँ अभिषेक करवाने पर आपको पंडितों ने आशीर्वाद दिया कि ‘लक्षाधिपति भव।’ जिस माया को ठुकराकर आप ईश्वर की खोज में निकले, वहाँ भी मायाप्राप्ति का आशीर्वाद....! आपको यह आशीर्वाद रास न आया। अतः आपने पुनः अभिषेक करवा कर ईश्वरप्राप्ति का आशीर्वाद पाया एवं प्रार्थना की ‘भले माँगने पर भी दो समय का भोजन न मिले लेकिन हे ईश्वर! तेरे स्वरूप का मुझे ज्ञान मिले’ तथा ‘इस जीवन का बलिदान देकर भी अपने लक्ष्य की सिद्धि करके रहूँगा...!’ इस प्रकार का दृढ़ निश्चय करके वहाँ से आप भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र लीलास्थली वृन्दावन पहुँच गये। होली के दिन यहाँ के दरिद्रनारायण में भंडारा कर कुछ दिन वहीं पर रुके और फिर उत्तराखंड की ओर निकल पड़े। गुफाओं, कन्दराओं, वनाच्छाति घाटियों, हिमाच्छादित पर्वतश्रृंखलाओं एवं अनेक तीर्थों में घूमे। कंटकाकीर्ण मार्गों पर चले, शिलाओं की शैया पर सोये। मौत का मुकाबला करना पड़े, ऐसे दुर्गम स्थानों पर साधना करते हुए वे नैनीताल के जंगलों में पहुँचे।

गुरु की प्राप्ति
ईश्वरप्राप्ति की तड़प से वे नैनीताल के जंगलों में पहुँचे। 40 दिन के लम्बे इन्तजार के बाद वहाँ इनका परमात्मा से मिलाने वाले परम पुरुष से मिलन हुआ, जिनका नाम था स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज। वह बड़ी अमृतवेला कही जाती है, जब ईश्वर की खोज के लिए निकले परम वीर पुरुष को ईश्वरप्राप्त किसी सदगुरु का सान्निध्य मिलता है। उस दिन को नवजीवन प्राप्त होता है। गुरु के द्वार पर भी कठोर कसौटियाँ हुई थीं, लेकिन परमात्मा के प्यार में तड़पता यह परम वीर पुरुष सारी-की-सारी कसौटियाँ पार करके सदगुरुदेव का कृपाप्रसाद पाने का अधिकारी बन गया। सदगुरुदेव ने साधना-पथ के रहस्यों को समझाते हुए आसुमल को अपना लिया। आध्यात्मिक मार्ग के इस पिपासु-जिज्ञासु साधक की आधी साधना तो उसी दिन पूर्ण हो गई जब सदगुरु ने अपना लिया। परम दयालु सदगुरु साईं श्री लीलाशाहजी महाराज ने आसुमल को घर में ही ध्यान भजन करने का आदेश देकर 70 दिन तक वापस अहमदाबाद भेज दिया।

आश्रम की स्थापना
साबरमती नदी के किनारे की उबड-खाबड़ टेकरियों (मिट्टी के टीलों) पर भक्तों द्वारा आश्रम के रूप में 29 जनवरी 1972 को एक कच्ची कुटिया तैयार की गई। इस स्थान के चारों ओर कंटीली झाड़ियाँ व बीहड़ जंगल था, जहाँ दिन में भी आने पर लोगों को चोर-डाकुओं का भय बराबर बना रहता था। लेकिन आश्रम की स्थापना के बाद यहाँ का भयावह एवं दूषित वातावरण एकदम बदल गया। आज इस आश्रमरूपी विशाल वृक्ष की शाखाएँ भारत में ही नहीं, विश्व के अनेक देशों तक पहुँच चुकी हैं। साबरमती के बीहड़ों में स्थापित यह कुटिया आज ‘संतश्री आसारामजी आश्रम’ के नाम से एक महान पावन तीर्थधाम बन चुकी है। इस ज्ञान की प्याऊ में आज लाखों की संख्या में आकर हर जाति, धर्म व देश के लोग ध्यान और सत्संग का अमृत पीते हैं तथा अपने जीवन की दुःखद गुत्थियों को सुलझाकर धन्य हो जाते हैं।

सत्संग समारोह
आज के अशांत युग में ईश्वर का नाम, उनका सुमिरन, भजन, कीर्तन व सत्संग ही तो एकमात्र ऐसा साधन है जो मानवता को जिन्दा रखे बैठा है और यदि आत्मा-परमात्मा को छूकर आती हुई वाणी में सत्संग मिले तो सोने में सुहागा ही मानना चाहिए। श्री योग वेदान्त सेवा समिति की शाखाएँ अपने-अपने क्षेत्रों में संतश्री के सुवचनों का आयोजन कर लाखों की संख्या में आने वाले श्रोताओं को आत्मरस का पान करवाती हैं। श्री योग वेदान्त सेवा-समितियों के द्वारा आयोजित आसारामजी बापू के दिव्य सत्संग समारोह में अक्सर यह विशेषता देखने को मिलती है कि इतनी विशाल जनसभा में ढाई-ढाई लाख श्रोता भी शांत व धीर-गंभीर होकर इनके वचनामृतों का रसपान करते हैं तथा मंडप कितना भी विशाल क्यों नहीं बनाया गया हो, वह भक्तों की भीड़ के आगे छोटा पड़ ही जाता है।

नारी उत्थान केन्द्र की स्थापना
‘राष्ट्र को उन्नति के परमोच्च शिखर तक पहुँचाने के लिए सर्वप्रथम नारी-शक्ति का जागृत होना आवश्यक है...’ यह सोचकर इन दीर्घदृष्टा मनीषी ने साबरमती के तट पर ही अपने आश्रम से क़रीब आधा किलोमीटर की दूरी पर ‘नारी उत्थान केन्द्र’ के रूप में महिला आश्रम की स्थापना की। महिला आश्रम में भारत के विभिन्न प्रान्तों से एवं विदेशों से आईं हुई अनेक सन्नारियाँ सौहार्दपूर्वक जीवनयापन करती हुई आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हो रही हैं।

आशाराम बापू
आशाराम बापू
पूरा नामसंत श्री आशाराम बापू
अन्य नामआसुमल सिरुमलानी
जन्म17 अप्रॅल 1941
जन्म भूमिसिंध, ब्रिटिश भारत
अविभावकथाऊमलजी सिरुमलानी और महँगीबा
गुरुस्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज
कर्म-क्षेत्रआध्यात्मिक गुरु
नागरिकताभारतीय
अद्यतन‎

पश्चिम बंगाल चिटफंड घोटाला : कांग्रेस का एक और घोटाला



                      पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता और  वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम

चिटफंड घोटाले की आंच कांग्रेस तक

Apr 26, 2013,
navbharattimes.indiatimes.com
पीटीआई॥ नई दिल्ली, कोलकाता
पश्चिम बंगाल में निवेशकों के 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम डकार लेने के आरोपी शारदा गु्रप से जुड़े मामले की आंच अब तृणमूल से आगे बढ़कर कांग्रेस तक पहुंच गई है। आरोपों से बैकफुट पर आई तृणमूल कांग्रेस ने मामले में चेन्नै की एक सीनियर महिला वकील की भूमिका को लेकर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। इस वकील की केंद्र सरकार के एक मिनिस्टर से शादी हुई है।
गौरतलब है कि आरोपी सुदीप्तो सेन की ओर से सीबीआई को कथित तौर पर लिखे गए लेटर में आरोप लगाया गया था कि कुछ राजनेताओं, जर्नलिस्ट और वकीलों ने उसे ब्लैकमेल किया और सिक्युरिटी देने की एवज में उससे मोटी रकम भी ऐंठ ली। उधर, केंद्र में प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने भी महिला वकील की भूमिका होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
------------------------
चिदंबरम की पत्नी लपेटे में
-सुदीप्तो सेन की कथित चिट्ठी में तृणमूल एपी संृजॉय बोस और कुनाल घोष, असम से कांग्रेस के एक मिनिस्टर के अलावा वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम का नाम भी शामिल है।
- तृणमूल ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नलिनी का नाम लिए बिना लिखा है, 'चेन्नै की एक महिला वकील शारदा घोटाले में डीलिंग क्यों कर रही थी? कांग्रेस के मंत्री को इसकी सफाई देनी चाहिए।
- तृणमूल ने आरोप लगाया कि महिला वकील ने एक एग्रीमेंट तैयार करने के बदले 1 करोड़ रुपये लिए। तृणमूल ने पूछा है कि इतनी बड़ी रकम वकील को क्यों दी गई और इसके बदले में उसने शारदा गु्रप के लिए क्या किया?
- तृणमूल ने यह भी पूछा है कि जब दिल्ली और गुवाहाटी में इतने वकील हैं तो चेन्नै के एक वकील की सेवाएं क्यों ली गईं? हालांकि, नलिनी के करीबी सूत्रों ने आरोपों को खारिज किया है।
------------
मामले में जांच के आदेश: कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के शारदा गु्रप और उस पर लगे धांधली करने के आरोपों की जांच करने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, कॉरपोरेट मामलों के मंत्री सचिन पायलट की दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ गुरुवार सुबह हुई मीटिंग में इसका फैसला लिया गया। इस मीटिंग में इस मुद्दे के अलावा दूसरे संदिग्ध चिटफंड कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने पर भी चर्चा हुई। बता दें कि सेबी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भी मामले की जांच कर रहा है।
पुलिस रिमांड में सुदीप्तो : चिटफंड धांधली के मुख्य आरोपी सुदीप्तो सेन को कोर्ट ने गुरुवार को 14 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। सुदीप्तो के अलावा कंपनी की एक डायरेक्टर देवजानी मुखोपाध्याय और झारखंड में कंपनी के कामकाज देखने वाले अरविंद सिंह चौहान को भी रिमांड में भेजा गया है। इन पर धोखाधड़ी ( धारा 420) के अलावा कुछ अन्य चार्ज लगाए गए हैं।
शारदा गु्रप के नाम सैकड़ों कंपनियां : शारदा गु्रप ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के यहां 100 से अधिक कंपनियों का रजिस्ट्रेशन करा रखा है। ये रीयल एस्टेट , ऑटोमोबाइल , एजुकेशन और एंटरटेनमेंट क्षेत्र की कंपनियां हैं। अधिकारी शारदा गु्रप की कम से कम 10 कंपनियों में फर्जी निवेश की स्कीम्स की जांच कर रहे हैं।
वेस्ट बंगाल सरकार को हलफनामा दायर करने का आदेश :
कोलकाता हाई कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया कि वह 2 मई तक शारदा गु्रप के खिलाफ उठाए गए अपने कदमों की जानकारी एक हलफनामे के जरिए कोर्ट के सामने रखे। कोर्ट ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। कंपनी को अग्रिम आदेश तक कोई भी आर्थिक लेनदेन करने से भी रोका गया है।
-----------------------

सुदीप्तो की चिट्ठी में कांग्रेस नेताओं के नाम भी

एजेंसी | Apr 26, 2013 आर्टिकल

कोलकाता/नई दिल्ली. सुदीप्तो सेन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शारदा ग्रुप के चैनल 10 के कर्मचारियों ने कोलकाता के पार्क स्ट्रीट थाने में सांसद कुणाल घोष, शारदा ग्रुप के सीएमडी सुदीप्तो सेन और वाइस प्रेसिडेंट समेत कई शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। इसी बीच पश्चिम बंगाल में सक्रिय दो अन्य चिट फंड कंपनियां लोगों का पैसा लेकर चंपत हो गई हैं। वहीं, शारदा ग्रुप की ब्रैंड एंबेसेडर रह चुकीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद शताब्दी रॉय का कहना है कि उनका शारदा ग्रुप के फर्जीवाड़े से कोई लेना देना नहीं है।

इससे पहले, पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाले की लपेट में केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी भी आ गई हैं। घोटाले के मुख्य आरोपी शारदा ग्रुप के चेयरमैन सुदीप्तो सेन ने उन पर भी ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए हैं।

सीबीआई को भेजी 18 पेज की चिट्ठी में सुदीप्तो ने नलिनी का नाम लिया है। इसी में तृणमूल कांग्रेस के दो सांसद कुणाल घोष और सृंजय बोस का भी जिक्र है। दोनों सांसदों ने पी. चिदंबरम से इस पर जवाब मांगा है। हालांकि नलिनी ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। सुदीप्तो ने असम सरकार के एक मंत्री समेत 22 लोगों पर उनसे फायदा उठाने का आरोप लगाया है। उसने 15 अप्रैल को ही सीबीआई को चिट्ठी लिखी थी। लेकिन संबंधित जानकारियां अब बाहर आई हैं। सुदीप्तो सेन और उनके दो साथियों को गुरुवार को कोलकाता की कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। तीनों को मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में गिरफ्तार किया गया था। पेशी के दौरान कोर्ट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा भी किया।

नलिनी से जुड़े पांच आरोप

1. नरसिम्हा राव सरकार में मंत्री रहे मतंग सिंह, उनकी पत्नी मनोरंजना और मेरी कंपनी के बीच नलिनी चिदंबरम ने डील कराई।

2. सबसे अधिक नुकसान मनोरंजना सिंह और मतंग सिंह ने पहुंचाया। मनोरंजना ही अपने पॉजिटिव ग्रुप्स की बिक्री के लिए नलिनी के पास ले गईं।

3. नलिनी ने कहा था कि मैं उन्हें नॉर्थ-ईस्ट में एक चैनल स्थापित करने में मदद करूं। कोई भी विवाद होने पर उसके निपटारे का भरोसा दिलाया था।

4. मैंने उन्हें एक करोड़ से अधिक दिए। इसके अलावा जब भी वह मनोरंजना के साथ कोलकाता आतीं उनकी यात्रा और होटल खर्च मैं ही वहन करता था।

5. नलिनी ने मुझे 42 करोड़ रुपए चैनल के लिए देने को कहा। मैंने अब तक मनोरंजना सिंह और उनके एक सहयोगी को 25 करोड़ रुपए दिए हैं।

सेबी ने चार और कंपनियों पर कार्रवाई को कहा
पश्चिम बंगाल में चार और कंपनियां चार हजार करोड़ रुपए से अधिक की चिट फंड स्कीम चला रही हैं। सेबी ने राज्य सरकार को भेजी चिट्ठी में इनके खिलाफ भी जांच कर कार्रवाई करने को कहा है। इन कंपनियों में रोज वैली इन्वेस्टमेंट, सुमंगल इंडस्ट्रीज, एमपीएस ग्रीनरी और सन प्लांट ग्रुप शामिल है। सेबी के एक अधिकारी के अनुसार हालात इतने बुरे हैं कि पश्चिम बंगाल प्रेशर कुकर बम जैसी स्थिति में आ चुका है।
ईडी ने भी दर्ज किया मामला
चिटफंड कंपनी शारदा समूह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामला दर्ज कर लिया है। कंपनी के खिलाफ निदेशालय के गुवाहाटी ऑफिस में मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है। इससे पहले शारदा ग्रुप के खिलाफ पश्चिम बंगाल की पुलिस, सेबी, आयकर विभाग और कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय पहले से ही जांच कर रहा है। उधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने 29 अप्रैल को विधानसभा की विशेष बैठक बुलाई है। उम्मीद है कि इसमें चिट फंड कंपनियों पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कानून पास किया जाएगा। या संभव है कि मौजूदा कानून में ही संशोधन किया जाए।

केंद्र ने मार्च में ही किया था आगाह
नई दिल्ली त्नकेंद्रीय कंपनी मामलों के मंत्री सचिन पायलट ने मार्च में ही भारतीय रिजर्व बैंक से वित्तीय कारोबार से जुड़ी संदिग्ध कंपनियों की जांच के लिए लिखा था। आम और गरीब निवेशकों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी करने का पश्चिम बंगाल में शारद ग्रुप ऑफ कंपनीज और दो अन्य कंपनियों का मामला तो खुल गया लेकिन देश में ऐसी 22 हजार से अधिक वित्तीय कंपनियों के संदिग्ध कारोबार पर सरकार की नजर है। भास्कर में यह खबर तब भी प्रमुखता से छपी थी। संभवत: कंपनी मामलों के मंत्रालय को शारदा ग्रुप जैसी कंपनियों के फरेब का आभास हो गया था। पायलट ने इस मामले में केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भी पत्र लिखा था। कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक ऐसी 87 कंपनियों के खिलाफ जांच की जा रही है, जिनके खिलाफ शिकायत मिली है।
इनमें पश्चिम बंगाल की शारदा ग्रुप की कंपनियां भी हैं। इनमें अधिकतर गैर-बैंकिंग कंपनियों के रूप में लोगों को उनके निवेश पर बेहतर रिटर्न देने का वादा करती रही हैं। मार्च के शुरू में सचिन पायलट ने रिजर्व बैंक को पत्र लिखा था कि इस समय 34,754 कंपनियां गैर-बैंकिंग या उससे मिलता-जुलता कारोबार कर रही हैं। इनमें मात्र 12,375 को ही रिजर्व बैंक ने गैर-बैकिंग कारोबार की अनुमति दी हुई है जबकि दूसरों ने बचने के लिए अपने पंजीकरण के समय ऐसी बातें जोड़ दी हैं जिससे लगे कि ये भी गैर-बैंकिंग संस्था के तौर पर काम करने को अधिकृत हैं। पायलट ने रिजर्व बैंक को सभी 34,754 कंपनियों की जानकारी साझा करते हुए उनके खिलाफ जांच की सलाह दी थी। उस समय कंपनी मामलों के मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को भी एक पत्र लिखा था और अनुरोध किया था कि वह रिजर्व बैंक को स्पष्ट निर्देश दे कि अवैध वित्तीय कारोबार में लगी कंपनियों की जांच करे। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक जिन 87 कंपनियों के खिलाफ जांच की जा रही है, उनमें 73 के साथ पश्चिम बंगाल की हैं। वहीं दिल्ली में 5 व तमिलनाडु में 5 कंपनियों के खिलाफ जांच चल रही है। इसके अलावा राजस्थान में 2 कंपनियों के साथ कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की 1-1 कंपनी की जांच की जा रही है।
क्या कर रहा है कंपनी मामलों का मंत्रालय
ऐसे मामले, जिसमें छोटे निवेशकों को मल्टी लेवल मार्केटिंग के नाम पर फंसाया जाता है, को रोकने के लिए पूर्वानुमान सेल बनाया जा रहा है। यह सेल बिना शिकायत के उन कंपनियों के खिलाफ अपनी जांच शुरू कर देगा, जिसकी योजनाएं अव्यावहारिक लगेंगी। मंत्रालय ने अपने एंटी फ्रॉड इंवेस्टीगेशन ऑफिस को सभी राज्य के ऐसे कार्यालय के साथ तालमेल करने को कहा है। इसके अलावा मंत्रालय अपने मार्केट रिसर्च एवं एनालिसिस यूनिट को अपनी इंटेलिजेंस यूनिट के तौर पर नए सिरे से गठित कर रहा है। राज्य सरकार के माध्यम से विभिन्न राज्यों में पुलिस के साथ भी तालमेल बढ़ा रहा है, जिससे त्वरित आधार पर किसी कंपनी के बाबत जानकारी हासिल की जा सके।
'आम और गरीब निवेशक अपने जीवन की जमा-पूंजी आकर्षक प्रलोभन की वजह से इन कंपनियों में लगा देते हैं, जब ऐसे लोगों के साथ धोखाधड़ी होती है तो केंद्र सरकार का उसमें दखल जरूरी हो जाता है। कंपनी मामलों का मंत्रालय और स्वयं मैं इस मामले से आहत और स्तब्ध हूं। इस मामले की जांच पर हम निगरानी रख रहे हैं और अपने स्तर पर भी जांच शुरू करेंगे, ताकि गरीब और आम लोगों का पैसा, जो इन कंपनियों ने हड़प लिया है, वापस दिलाने का हर संभव प्रयास किया जा सके।'
-सचिन पायलट - कंपनी मामलों के मंत्री