बुधवार, 19 जून 2013

सुधीन्द्र कुलकर्णी: वामपंथी खुराफात कर गया भाजपा में


सुधीन्द्र कुलकर्णी: वामपंथी खुराफात कर गया भाजपा में

सभी राजनैतिक जानकारों को पता होगा कि राजग सरकार में भाजपा में घुसा मार्किस्ट आईडियोलोजी के वामपंथी सुधीन्द्र कुलकर्णी ( कालम लेखक ) बडी पहुंच वाला था। अच्छे - अच्छे मंत्रीयों की नहीं चलती थी और इनके इशारों पर ...! यह तब पुनः प्रसिद्ध हुये जब भाजपा के एक बडे नेता जिन्ना की मजार पर फूल चढ़ाने पहुचे और देश विभाजक जिन्ना को धर्मनिरपक्ष बता आये। इसके बाद यूपीए सरकार ने नोट फोर वोट के मामले में इन्हे मास्टर माइंड ठहराया। इस व्यक्ति की सलाहों ने भाजपा को अंदर और बाहर बहुत नुकसान पहुंचाया है

Sudheendra Kulkarni
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Sudheendra Kulkarni is an Indian politician and columnist.
Kulkarni was educated at Jadhavji Anandji High School in Athani, a town in Belgaum district, Karnataka, India. He then attended the Indian Institute of Technology Bombay.
A former member of the Communist Party of India (Marxist), Kulkarni joined the Bharatiya Janata Party (BJP) in 1996. Of this ideological switch he said, "People like me were living in an illusory land. I realised very late in my life that the Marxist ideology is not suitable in India - in fact, I would say it is unsuitable for any corner of the world."
Kulkarni worked as executive editor for[when?] Blitz, a Mumbai-based tabloid format weekly that was edited and owned by Russi Karanjia. According to Kulkarni, Karanjia was sympathetic to the communist movement in India but became disillusioned with it and its anti-Hindu secularism. He became a strong sympathiser of the BJP and the Ayodhya movement, which led to Kulkarni being appointed in place of P. Sainath as deputy editor. Kulkarni was tasked with having Blitz reflect Karanjia's new-found sympathies.Kulkarni then transformed Blitz from a left-wing newspaper into a BJP-oriented publication.
As a member of the BJP, he was associated with the India Shining campaign and rode on the inaugural Delhi–Lahore Bus.He helped former Indian Prime Minister Atal Bihari Vajpayee write his speeches and in 2008 was acting as a strategist for Lal Krishna Advani, who had influenced his rise within the party.
Kulkarni resigned from the BJP in 2009. The electoral defeat suffered by the party, led by Advani, had effectively ended his role with the party and he had also become disenchanted with the influence exerted by the Rashtriya Swayamsevak Sangh on party decision-making. In January 2012, he was reported to be once more working full-time for the BJP, on this occasion as an advisor to its president, Nitin Gadkari. He had been working for the Observer Research Foundation, a think tank, prior to this.
Cash for votes scandal [edit]

In 2008, a sting operation was carried out that involved Kulkarni and another BJP activist. Later televised and known as the "cash-for-votes scandal", the operation purported to show a bribe of one crore (10 million) rupees being offered to three BJP MPs on behalf of the Indian National Congress-led United Progressive Alliance government. The alleged bribes were intended to obtain the support of the MPs in the 2008 Lok Sabha Vote of Confidence. Subsequently, both the Kishore Chandra Deo committee — a parliamentary panel — and the police investigated the arrangements and questioned various participants, including Kulkarni. In 2011, Kulkarni was remanded in judicial custody for a period and In November of that year was released on bail.

इस्लामिक क़ानून चाहते है उन्हे ऑस्ट्रेलिया से बाहर जाने के लिए कहा


ऑस्ट्रेलियन प्राइम मिनिस्टर - जूलीया गिलर्ड
को दुनिया की रानी बना देना चाहिए!!


- ऑस्ट्रेलिया प्राइम मिनिस्टर
जूलीया गिलर्ड
सीखो भारत के नेताओ ..
कुछ सीखो इनसे....
" मित्रो एक बार जरुर पढ़िए ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री का देश के नाम सन्देश " .... ये पढ़ने के बाद शायद भारतीय मुस्लिमो को कुछ अकल आये , शायद ???????

इस महिला प्राइम मिनिस्टर ने जो कहा है, उस बात को कहने के लिए बड़ा साहस और आत्मविश्वास चाहिए! पूरी दुनिया के सब देशो मे ऐसे ही लीडर होने चाहिए! वो कहती है : "मुस्लिम, जो इस्लामिक शरिया क़ानून चाहते है उन्हे बुधवार तक ऑस्ट्रेलिया से बाहर जाने के लिए कहा हे क्यूकी ऑस्ट्रेलिया देश के कट्टर मुसलमानो को आतंकवादी समझता है.

ऑस्ट्रेलिया के हर एक मस्जिद की जाँच होगी और मुस्लिम इस जाँच मे हमे सहयोग दे जो बाहर से उनके देश मे आए है उन्हे ऑस्ट्रेलिया मे रहने के लिए अपने आप को बदलना होगा और ना की ऑस्ट्रेलियन लोगो को... अगर नही होता है तो मुसलमान मुल्क छोड़ सकते है कुछ ऑस्ट्रेलियन चिंतित है ये सोच के की क्या हम किसी धर्म के अपमान तो नही कर रहे.. पर मई ऑस्ट्रेलियन लोगो को विश्वास देती हू की हम जो भी कर रहे है वो सिर्फ़ ऑस्ट्रेलिया के लोगो के हित मे कर रहे है हम यहा इंग्लीश बोलते है ना की अरब इसलिए अगर इस देश मे रहना होगा तो आपको इंग्लीश सीखनी ही होगी ऑस्ट्रेलिया मे हम JESUS को भगवान मानते है, हम भगवान को मानते है! हम सिर्फ़ हमारे CHRISTIAN RELIGION को मानते है और किसी धर्म को नाही इसका यह मतलब नही की हम संप्रदायिक है ! इसलिए हुमारे यहा भगवान की तस्वीर और धर्म ग्रंथ सब जगह होते है!

अगर आपको इस बात से आपत्ति है तो दुनिया मे आप कही भी जा सकता है ऑस्ट्रेलिया छोड़ के ऑस्ट्रेलिया हमारा मुल्क है, हमारी धरती है, और हमारी सभ्यता है हम आपके धर्म को मानते नही पर आपकी भावना को मानते है! इसलिए अगर आपको नमाज़ पढ़नी है तो ध्वनि प्रदूषण नाकरे हमारे ऑफीस, स्कूल या सार्वजनिक जगहो मे नमाज़ बिल्कुल ना पढ़े! अपने घरो मे या मस्जिद मे शांति से नमाज़ पढ़े जिस से हमे कोई तकलीफ़ ना हो! अगर आपको हमारे ध्वज से, राष्ट्रा गीत से हमारे धर्म से या फिर हमारे रहण सहन से कोई भी शिकायत है तो आप अभी इसी वक़्त ऑस्ट्रेलिया छोड़ दे"

ऑस्ट्रेलिया P.M. जूलीया गिलर्ड सीखो भारत के नेताओ इनसे कुछ....



सही उम्र में यौन संबंध बनाने वाले बन जाते हैं पति-पत्नी : मद्रास उच्च न्यायालय




सही उम्र में यौन संबंध बनाने वाले बन जाते हैं पति-पत्नी : अदालत
Tuesday, June 18, 2013
चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर कोई सही कानूनी उम्र को पूरा करने वाला युगल यौन संबंध बनाता है तब उसे वैध विवाह माना जायेगा और उन्हें पति-पत्नी घोषित किया जा सकता है।
उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति सी एस करनान ने अपने आदेश में कहा, ‘अगर कोई युगल यौन आकांक्षा को पूरा करना तय करता है, तब कानून कुछ अपवादों को छोड़कर उसके बाद उत्पन्न होने वाले सभी परिणामों के अनुरूप पूर तरह से प्रतिबद्ध होता है।’
उन्होंने कहा कि मंगलसूत्र, वरमाला, अंगुठी आदि पहनने जैसी वैवाहिक औपचारिकताएं केवल समाज की संतुष्टि के लिए होती हैं।
कोई भी पक्ष यौन संबंध के बारे में दस्तावेजी सबूत पेश करके वैवाहिक संबंध का दर्जा प्राप्त करने के लिए परिवार अदालत से सम्पर्क कर सकता है।
न्यायाधीश ने कहा कि एक बार ऐसी घोषणा हो जाने के बाद युगल किसी भी सरकारी रिकार्ड में पति पत्नी के रूप में स्थापित हो सकते हैं। उच्च न्यायालय ने कोयंबतूर के एक गुजाराभत्ता संबंधी मामले की सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी। (एजेंसी)