रविवार, 14 जुलाई 2013

देश को चीन से सीख लेनी चाहिए - नरेंद्र मोदी



देश में निराशा का माहौल,

चीन से लेना होगा सबक: मोदी

आईबीएन-7 | Jul 14, 2013
क्या कहा मोदी ने?
पुणे में  मोदी फर्ग्युसन कॉलेज के छात्र-छात्राओं को संबोधित किया।
मोदी ने अपने भाषण में कहा कि हम देश के सबसे युवा देश हैं। इस देश का भविष्य उज्जवल है। मोदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में निराशा का माहौल है। लेकिन युवा देश के लिए काम कर सकते हैं। देश में युवाशक्ति के इस्तेमाल की जरूरत है। अगर हम अपनी पद्धति अपनाते तो आगे होते। हमारी परंपरा और शिक्षा महान है।
मोदी ने कहा कि आजादी की आकांक्षाएं पूरी नहीं हुई है। देश को चीन से सीख लेनी चाहिए। आज भी काफी कुछ बदला जा सकता है। देश में ताकत है सिर्फ दिशा चाहिए। युवाओं को दिशा देने वाला चाहिए। हमें आधुनिकता चाहिए, पश्चिमीकरण नहीं। हमारे देश में रिसर्च डेटा का सही इस्मेमाल नहीं हो रहा है। शोध पर ध्यान देने की जरुरत है।
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आज शिक्षा मनी मेकिंग मशीन बन गई: मोदी

नवभारतटाइम्स.कॉम | Jul 14, 2013
पुणे।। बीजेपी कैंपेन कमिटी के अध्यक्ष और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पुणे के फर्ग्युशन कॉलेज के युवाओं को सियासी पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि देश में निराशा का माहौल है। देश का युवा कुछ करना चाहता है, लेकिन उन्हें मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। ये युवा न सिर्फ भारत को बल्कि पूरी दुनिया को निराशा के माहौल से बाहर निकालेंगे। मोदी ने कहा कि भारत में जगब की ताकत है। यह देश 1,200 साल की गुलामी के बाद भी जिंदा है। सीना तानकर खड़ा है। विश्वविद्यालयी शिक्षा के 2,600 साल के इतिहास में भारत 1,800 साल तक दुनिया का सरताज रहा। सिर्फ गुलामी के 800 सालों में इसका नाश हुआ। पूरी दुनिया से लोग यहां पढ़ने आते थे। नरेंद्र मोदी ने यहां 'युवा, समाज, आर्थिक स्थिति व वर्तमान राजनीति विषय' पर लेक्चर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में मोदी के भाषण को लेकर खूब चर्चा हुई थी।

अपने भाषण के शुरुआत में मोदी ने कहा कि इस जगह से (पुणे से) महान नेताओं को संदेश मिला है। यह सावरकर की धरती है, तिलक की धरती है। मोदी ने कहा कि जैसे ही फर्ग्युशन कॉलेज में लेक्चर देने की तिथि तय हुई, मैंने एक प्रयोग किया। मैंने सोशल मीडिया पर नौजवानों से पूछा कि मुझे फर्ग्युशन कॉलेज में क्या कहना चाहिए? करीब 2,500 नौजवानों ने मुझे सलाह दी। मैं बस उन्हीं की सलाह को आपको सामने रख रहा हूं। मैं सिर्फ माध्यम हूं, ये विचार कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के 2,500 नौजवानों के हैं। मैं उन नौजवानों का आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि नौजवान सिर्फ जिन्स पहनते हैं, तो वे भ्रम हैं। नौजवान सोचते हैं। देश के बारे में सोचते हैं। कुछ करना चाहते हैं। उनमें उमंग है। सामर्थ्य है। कुछ करने का सामर्थ्य है। यह सब देख कर लगता है कि देश का भविष्य कभी भी अंधकारमय नहीं हो सकता है।
मोदी ने वहां मौजूद 5,000 छात्रों से कहा कि विश्व की समस्याओं के समाधान के लिए भी यह युवा शक्ति काम आ सकती है। बशर्ते कोई काम करवाने वाला शख्स चाहिए। पूरे देश में निराशा का भाव है। मैं निराशा की बात नहीं करता। मुझे उम्मीदें दिखती हैं। नौजवानों का उमंग देखकर मैं उत्साहित हूं। मैं व्यवस्था बदलने में विश्वास रखता हूं।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश में शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। पूरी दुनिया में विश्वविद्यालयी शिक्षा का 2,600 साल का इतिहास है। इसमें से 1,800 साल तक शिक्षा के क्षेत्र में हमने राज किया है। सिर्फ गुलामी के 800 साल में यह व्यवस्था कमजोर हुई।

भारत में पहले गुरुकुल शिक्षा की व्यवस्था थी। हमें उस गुरुकुल व्यवस्था को आधुनिक पश्चिमी शिक्षा व्यवस्था से तुलना करने की जरूरत है। गुरुकुल की व्यवस्था बेहतर थी। हमें गुरुकुल से विश्वकुल तक का सफर पूरा करना है। हमने उपनिषद से उपग्रह की यात्रा की है। दुनिया में पहला दीक्षांत समारोह भारत में हुआ था। तैतरीय उपनिषद में इसका विवरण मिलता है।

लेकिन, दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी व्यवस्था को छोड़कर पश्चिमी व्यवस्था का नकल करने लगे हैं। पहले शिक्षा 'मैन मेकिंग मशीन' थी, लेकिन अब यह 'मनी मेकिंग मशीन' बन गई है। यह सब पश्चिम के नकल का परिणाम है। लेकिन, स्थितियां बदली जा सकती है। बस विजन की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि यह स्थिति जरूर बदली जाएगी। अब पश्चिम का वक्त चला गया है। पूर्व का वक्त आया है। बस बहस इस बात की है कि अगला नेतृत्व चीन करेगा या भारत।
उन्होंने कहा कि आज भी जब हम बेहतरीन शिक्षण संस्थान की चर्चा करते हैं तो उनमें फर्ग्युशन कॉलेज, शांति निकेतन, बीएचयू जैसे संस्थान की चर्चा होती है। इनकी स्थापना में समजा योगदान का था, किसी सरकार का नहीं। शिक्षा हमेशा से समाज का काम रहा है। वह अपनी जरूरत के हिसाब से शिक्षा की व्यवस्था करता था। आज केरल में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे है। वहां गांव-गांव तक शिक्षा फैल चुका है। यह सरकार के बल पर नहीं। इसमें श्री नारायण गुरु का बड़ा योगदान रहा है। वह पिछड़ी जाति में पैदा हुए थे, लेकिन उन्होंने हर किसी को शिक्षित करने का प्रण लिया था। आज परिणाम आज आपके सामने है।
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मोदी ने कहा, देश को युवाओं की जरूरत,आधुनिकता चाहिए पर पश्चिमीकरण नहीं

आज तक ब्‍यूरो [Edited By: कुलदीप मिश्र] | पुणे, 14 जुलाई 2013 |
पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में अपने संबोधन के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए. उन्होंने 'आधुनिकता चाहिए, पश्चिमीकरण नहीं' का मंत्र दिया और कहा कि अगर हम अपनी शिक्षा पद्धति अपनाते तो आज कहीं आगे होते.
नरेंद्र मोदी ने कहा कि सावरकर और सीवी रमन के कॉलेज की रज को माथे से लगाने की तमन्ना उन्हें पहले से थी. सावरकर के कमरे में उन्होंने देश के लिए कुछ करने की ताकत महसूस की. यहां बोलना उनके लिए सौभाग्य की बात है.

गुजरात के मुख्यमंत्री ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर जमकर कटाक्ष किए. उन्होंने कहा कि शिक्षा पहले 'मैन मेकिंग मशीन' थी, अब 'मनी मेकिंग मशीन' हो गई है. मोदी ने कहा कि वह सावरकर की 'पवित्र भूमि' से कोई सियासी टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन टिप्पणियां तो उन्होंने खूब कीं, हालांकि किसी पार्टी का नाम नहीं लिया. उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष संस्थानों की स्थापना में हमारे महापुरुषों का योगदान है, शासन-व्यवस्था का नहीं. 1835 के एक गजेट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय बंगाल में 100 फीसदी साक्षरता थी. लेकिन खराब नीतियों की वजह से साक्षरता घटती गई.

लगे हाथ वह केरल की साक्षरता का श्रेय कांग्रेस से छीनने से भी नहीं चूके. उन्होंने कहा कि केरल देश में सबसे ज्यादा साक्षरता वाला राज्य है तो इसमें शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि शिवगिरि मठ के नारायण गुरु स्वामी का योगदान है. जिन्होंने सौ साल से भी पहले राज्य में शिक्षा की बुनियादी व्यवस्था की थी.मोदी ने बताया कि सोशल साइट्स पर उन्होंने सुझाव आमंत्रित किए थे. जिसके बाद देश भर से उन्हें 2500 युवाओं के संदेश मिले हैं. उन्होंने सोशल साइट पर सक्रिय रहने वाले युवाओं और परोक्ष रूप से अपने समर्थकों का भी शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सिर्फ जींस पैंट पहनने और लंबे बाल रखने वाली नहीं है, वह मुद्दों पर सोचती है और बात करना चाहती है.

मोदी ने कहा कि हम विश्व के सबसे युवा देश हैं. हमारा भविष्य अंधकारमय नहीं हो सकता. हमें निराशा के माहौल से निकलना होगा. लोकमान्य तिलक का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि गुलामी के दौर में अंग्रेजों का ललकारने का साहस तिलक ने दिखाया था. उन्होंने कहा कि स्थिति बदली जा सकती है, पर इसके लिए विजन की जरूरत है.