सोमवार, 15 जुलाई 2013

चुनाव आते ही सेक्युलरिजम का बुर्का पहन लेती है कांग्रेसः नरेंद्र मोदी


चुनाव आते ही सेक्युलरिजम का बुर्का पहन लेती है कांग्रेसः नरेंद्र मोदी
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नवभारतटाइम्स.कॉम | Jul 15, 2013,
पुणे।। गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी की कैंपेन कमिटी के प्रमुख नरेंद्र मोदी ने रविवार को पुणे में बीजेपी वर्कर्स की बैठक से कांग्रेस और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। मोदी ने कांग्रेस पर एक तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि जब-जब संकट आता है वह सेक्युलरिजम का बुर्का पहनकर बंकर में घुस जाती है। मोदी ने अपने भाषण में पीएम मनमोहन सिंह पर तीखे हमले किए। उन्होंने पीएम को 'अनर्थशास्त्री' कहा तो, रुपये की गिरती कीमत पर वित्तमंत्री पर ताना कसते हुए कहा कि रुपया उनकी उम्र तक पहुंच रहा है। मोदी ने कांग्रेस को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह यूपीए के 10 साल और एनडीए सरकार के 6 साल के कामकाज की तुलना करके देख ले कि किसने बेहतर काम किया है। उधर, कांग्रेस नेता और संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने मोदी के बयान को संविधान के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि मोदी एक ऐसे नेता हैं जो ऐसे हथकंडे अपनाते रहते हैं।

बुर्का पहन लेती है कांग्रेसः मोदी ने कांग्रेस पर सेक्युलरिजम के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाने का आरोप लगाया। मोदी ने कहा, 'केंद्र सरकार पर जब भी कोई संकट आता है वह सेक्युलरिजम का बुर्का पहन लेते हैं और बंकर में छिप जाते हैं। कांग्रेस की पिछले 50 साल से बुर्का पहनकर बंकर में छिपने की चाल अब नहीं चलेगी। उसे बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई का जवाब देना होगा।'

वित्त मंत्री की उम्र तक पहुंचेगा रुपयाः मोदी ने रुपये की गिरती कीमत के लिए केंद्र सरकार के करप्शन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आजादी के समय रुपये और डॉलर की कीमत बराबर थी। 1 रुपया एक डॉलर के बराबर था। आज रुपये की कीमत दिनोंदिन टूटती चली जा रही है। ऐसा लग रहा है कि रुपया बहुत तेजी से भारतीय वित्त मंत्री के उम्र तक पहुंच जाएगा।
पीएम अर्थशास्त्री नहीं अनर्थशास्त्रीः मोदी ने पीएम मनमोहन सिंह पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा, 'रुपया आज डॉलर के मुकाबले 60 पर है। यह तब है जब देश के प्रधानमंत्री अर्थशास्त्र के विद्धान हैं। यह कौन सा अर्थशास्त्र है? यह कांग्रेस एक ऐसी धारा है जिसमें अच्छे से अच्छा शास्त्री भी 'अनर्थशास्त्री' बन जाता है। कांग्रेस में कोई भी गया, तबाही के रास्ते पर चल पड़ता है।'

यूपीए की विदेश नीति फेलः मोदी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी वार किया और कहा कि पाकिस्तान सैनिकों के सिर काटकर ले जाता है और उनके पीएम को बिरयानी खिलाई जाती है। सरबजीत को मार दिया गया और दिल्ली की सरकार ने चूं तक नहीं की। इटली के लोग केरल में मछुआरों की मार देते हैं और वह भारत के कानून को स्वीकार करने से मना कर देते हैं।

शराब कंपनियों को बेचा अनाजः मोदी ने फूड सिक्यूरिटी स्कीम पर केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। मोदी ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने जब कहा कि अन्न सड़ रहा है तो उसे गरीबों तक क्यों नहीं बांटा गया? केंद्र सरकार ने तब अन्न बांटने से इनकार कर दिया था। शराब बनाने वालों को 65 पैसे में यह अन्न बेच दिया गया। मोदी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शराब कंपनियों को बेचने के लिए अन्न को जानबूझकर सड़ने दिया।

ब्लैक मनी की रक्षक सरकारः मोदी ने अपने भाषण में केंद्र सरकार पर विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए गंभीरता न दिखाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी खास कारण से ऐसा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार काला धन जमा करने वाले लोगों को बचा रही है। मोदी ने कहा कि यूपीए के राज में जल, थल, नभ में भी करप्शन हुआ है।

आज शिक्षा 'मनी मेकिंग मशीन' बन गई: नरेंद्र मोदी ने इससे पहले पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में भाषण दिया तो वह बहुत ही सावधान दिखाई दिए। उन्होंने कोशिश की कि कोई राजनीतिक बात न करें, लेकिन इशारों-इशारों में कई बार अपने विरोधियों और विपक्ष पर तीर चलाए। मोदी ने कहा, 'लोग पावर चाहते हैं जबकि मैं इम्पावरमेंट चाहता हूं।'

नरेंद्र मोदी ने सीधे-सीधे कांग्रेस सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी नीतियों की आलोचना पूरे भाषण में करते रहे। मोदी ने कहा कि यह भारत का दुर्भाग्य है कि एक भी पड़ोसी उसका दोस्त नहीं है। सरकार की शिक्षा नीति पर निशाना साधते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाने की कोशिश नहीं की जा रही है, जो युवाओं की ताकत का इस्तेमाल कर सके। स्पोर्ट्स का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ओलिंपिक गेम्स के बाद हम हर बार निराश होते हैं कि सवा अरब लोगों का देश चंद गोल्ड मेडल नहीं ला सकता, लेकिन शिक्षा को खेलों से जोड़ने की कोई कोशिश नहीं हो रही। मोदी ने कहा, 'अगर सैनिकों को अच्छे से ट्रेनिंग दी जाए तो पांच सात मेडल तो वे ही जी लाएं।'
बीजेपी कैंपेन कमिटी के अध्यक्ष और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज के युवाओं को सियासी पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि देश में निराशा का माहौल है, देश का युवा कुछ करना चाहता है, लेकिन उन्हें मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। मोदी ने कहा, "ये युवा न सिर्फ भारत को बल्कि पूरी दुनिया को निराशा के माहौल से बाहर निकालेंगे। भारत में गजब की ताकत है। यह देश 1,200 साल की गुलामी के बाद भी जिंदा है। सीना तानकर खड़ा है। विश्वविद्यालयी शिक्षा के 2,600 साल के इतिहास में भारत 1,800 साल तक दुनिया का सरताज रहा। सिर्फ गुलामी के 800 सालों में इसका नाश हुआ। पूरी दुनिया से लोग यहां पढ़ने आते थे।" नरेंद्र मोदी ने यहां 'युवा, समाज, आर्थिक स्थिति व वर्तमान राजनीति' विषय पर लेक्चर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में मोदी के भाषण को लेकर खूब चर्चा हुई थी।
अपने भाषण की शुरुआत में मोदी ने कहा कि इस जगह से (पुणे से) महान नेताओं को संदेश मिला है। उन्होंने कहा, 'यह सावरकर की धरती है, तिलक की धरती है। फर्ग्युसन कॉलेज में लेक्चर देने की तिथि तय हुई तो मैंने एक प्रयोग किया। मैंने सोशल मीडिया पर नौजवानों से पूछा कि मुझे फर्ग्युसन कॉलेज में क्या कहना चाहिए। करीब 2,500 नौजवानों ने मुझे सलाह दी। मैं बस उन्हीं की सलाह को आपको सामने रख रहा हूं। मैं सिर्फ माध्यम हूं, ये विचार कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के 2,500 नौजवानों के हैं।'

उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि नौजवान सिर्फ जीन्स पहनते हैं और बाल बढ़ाते हैं, वे भ्रम में हैं। नौजवान सोचते हैं। देश के बारे में सोचते हैं। कुछ करना चाहते हैं। उनमें उमंग है। सामर्थ्य है। यह सब देख कर लगता है कि देश का भविष्य कभी भी अंधकारमय नहीं हो सकता है।

मोदी ने वहां मौजूद 5,000 छात्रों से कहा कि विश्व की समस्याओं के समाधान के लिए भी यह युवा शक्ति काम आ सकती है, बस कोई काम करवाने वाला शख्स चाहिए। मोदी ने कहा कि पूरे देश में निराशा का भाव है लेकिन मैं निराशा की बात नहीं करता। मुझे उम्मीदें दिखती हैं। नौजवानों का उमंग देखकर मैं उत्साहित हूं। मैं व्यवस्था बदलने में विश्वास रखता हूं।
भारत में पहले गुरुकुल शिक्षा की व्यवस्था थी। मोदी ने कहा कि हमारी गुरुकुल की शिक्षा परंपरा और अमेरिका की आधुनिक शिक्षा पद्धति की तुलना की जाए तो हमें पता चलेगा कि दोनों कुछ हद तक समान हैं। दोनों में लोगों को दिशा देने का काम होता है। हमें उस गुरुकुल व्यवस्था को आधुनिक पश्चिमी शिक्षा व्यवस्था से तुलना करने की जरूरत है। हमें गुरुकुल से विश्वकुल तक का सफर पूरा करना है। हमने उपनिषद से उपग्रह की यात्रा की है। दुनिया में पहला दीक्षांत समारोह भारत में हुआ था। तैतरीय उपनिषद में इसका विवरण मिलता है।

नरेंद्र मोदी ने पश्चिमीकरण पर भी अफसोस जाहिर किया। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी व्यवस्था को छोड़कर पश्चिमी व्यवस्था की नकल करने लगे हैं। पहले शिक्षा 'मैन मेकिंग मशीन' थी, लेकिन अब यह 'मनी मेकिंग मशीन' बन गई है। यह सब पश्चिम की नकल का परिणाम है। लेकिन, स्थितियां बदली जा सकती है। बस विजन की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि यह स्थिति जरूर बदली जाएगी।'

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पश्चिम का वक्त चला गया है, पूर्व का वक्त आया है और बस बहस इस बात की है कि अगला नेतृत्व चीन करेगा या भारत। मोदी ने कहा कि चीन बहुत आगे बढ़ गया है और हमें उससे सबक लेने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आज भी जब हम बेहतरीन शिक्षण संस्थानों की चर्चा करते हैं तो उनमें फर्ग्युसन कॉलेज, शांति निकेतन, बीएचयू जैसे संस्थान की चर्चा होती है। इनकी स्थापना में समाज का योगदान था, किसी सरकार का नहीं। शिक्षा हमेशा से समाज का काम रहा है। वह अपनी जरूरत के हिसाब से शिक्षा की व्यवस्था करता था। मोदी ने केरल और श्री नारायण गुरु की तारीफ की। उन्होंने कहा, 'आज केरल में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे है। वहां गांव-गांव तक शिक्षा फैल चुकी है। यह सरकार के बल पर नहीं। इसमें श्री नारायण गुरु का बड़ा योगदान रहा है। वह पिछड़ी जाति में पैदा हुए थे, लेकिन उन्होंने हर किसी को शिक्षित करने का प्रण लिया था। आज परिणाम आपके सामने है।'

गरीबी हटाने में कांग्रेस विफल - नरेंद्र मोदी



भारत अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपना सम्मान खो दिया
14, Jul, 2013, Sunday

गरीबी हटाने में कांग्रेस विफल
  पुणे !   गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस पर गरीबी दूर करने का वादा पूरा नहीं कर देश के लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया। 1970 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था।
इंदिरा गांधी के 1971 के चुनाव में दिए गए नारे 'गरीबी हटाओ' और बाद में उनके बेटे व पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा इसका इस्तेमाल किए जाने की ओर इशारा करते हुए मोदी ने कहा, "35 वर्ष पहले उन्होंने गरीबी उन्मूलन का वादा किया था। कोई उनसे पूछे कि उस वादे का क्या हुआ?"
भाजपा कार्यकर्ताओं को यहां संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, "क्या यह धोखा नहीं है? भारत के गरीब उनकी मत पेटियां भरते रहे, और अब उन्होंने खुले तौर पर मान लिया है कि वे गरीबी नहीं हटा सकते।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनाव प्रचार समिति के मुखिया मोदी ने केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार के खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर भी निशाना साधा।
इससे पहले फग्र्यूसन कॉलेज में मोदी ने पुणे के सांसद सुरेश कलमाड़ी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस तरह से राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ, उससे भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपना सम्मान खो दिया है।
उन्होंने कहा, "दक्षिण कोरिया जैसा छोटा-सा देश ओलंपिक का आयोजन करता है और अंतर्राष्ट्रीय सराहना का पात्र बनता है। लेकिन हम राष्ट्रमंडल खेलों के जैसा छोटा-सा आयोजन कर खुद को मजाक का पात्र बना लेते हैं।"
मोदी ने शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया, लेकिन कहा कि भारत को आधुनिकीकरण की जरूरत है, पश्चिमीकरण की नहीं।
उन्होंने कहा, "हमें अपनी शिक्षण पद्धति में आधुनिकीकरण की दरकार है, पश्चिमीकरण की नहीं। मैं आधुनिक शिक्षा का समर्थन करता हूं, लेकिन पश्चिम के अंधानुकरण का नहीं।"
मोदी ने कहा कि सरकार को उच्च शिक्षा पर और खर्च करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "चीन ने अपने जीडीपी का 20 प्रतिशत शिक्षा को आवंटित किया है और इसके मुकाबले भारत ने महज चार प्रतिशत आवंटित किया है। हमें आज जीडीपी का 25 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने की जरूरत है।"
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नरेंद्र मोदी के भाषण में अटल-कलाम की झलक 
Written by: Naveen Nigam / Monday, July 15, 2013,
[नवीन निगम] आप से यदि पूछा जाए कि एनडीए के शासनकाल में दो ऐसे लोगों का नाम लीजिए जो अपने पद से भी आगे निकल गए हो तो आपका एक ही जवाब होगा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम। इसे इत्‍तेफाक कहें या कुछ और। गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में इन्‍हीं दोनों की झलक दिखाई देती है। नरेंद्र मोदी जब आज पुणे के फार्ग्‍युसन कॉलेज के छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे तो आपने उनके अंदाज में कलाम वाली छवि और विचार नहीं देखे। भाषण में मोदी, अटल को और बातों में कलाम को फॉलो करते दिखाई पड़े। युवा शक्ति में देश को आगे बढऩे की ताकत हैं, खोज की बातें, विकसित देश बनाने का सपना। भाषण में अटल की तरह लोगों को मंत्रमुग्ध करना जैसे कोई राजनेता नहीं, कोई संत बोल रहा हो। ज्ञात हो कि कलाम और अटल ने 2002 के दंगों के समय मोदी को मुख्यमंत्री पद से हटाने का विचार तक किया था और आज उन्ही दो महापुरुषों के गुणों को मोदी अपने अंदर समेट रहे हैं। मोदी को मालूम है कि देश का युवा निराश है और वह आगे बढऩा चाहता है। बातों का असर कितना होता है यह मैं एक उदाहरण से देना चाहता हूं। मेरे एक मित्र हैं। मुसलमान हैं इसलिए मोदी को पसंद नहीं करते। एक दिन बातों ही बातों में मुझसे बोले ...निगम, सत्य तो यह है कि हमको सभी राजनीतिक दलों ने ठगा है। हम भाजपा के खिलाफ जीतने वाले को वोट देते रहते हैं, तुम लोग अच्छे हो किसी से डरकर तो वोट नहीं देते हो। मैंने उन्हें समझाने के अंदाज से कहा यह तो ठीक है लेकिन इसमें आपकी क्या गलती है। उन्होंने कहा ...तुम कुछ भी सोचो, लेकिन मोदी में कोई बात तो है, जो गुजरात इतना आगे निकल गया। मैं आश्चर्य में था, वह कहने लगे, अभी थोड़े दिनों पहले भाई के पास बडौदा गया था, वहां की सड़के देखी, दिल खुश हो गया। युसुफ से बात की तो पता चला कि उसकी फैक्टरी में उत्पादन तीन गुना हो गया है। अभी नई गाड़ी खरीदी है और दूसरी फैक्टरी भी डाल रहा है। इस उदाहरण को लोग मोदी की तारीफ में न ले, यह केवल एक वाक्या था, हो सकता है कि युसुफ दिमागदार हों और अपनी मेहनत से आगे आए हों, लेकिन मित्र की बात सुनकर मैं हैरत में तो था कि मोदी के बारे में कोई मुसलमानों की मानसिकता अब बदल रही है|
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धर्मनिरपेक्षता के बुर्के में छिप जाती है कांग्रेस: मोदी
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान 15-07-13
दो दिन पहले ही पिल्ले और हिंदू राष्ट्रवादी के बयान को लेकर कांग्रेस के निशाने पर आए नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यूपीए सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि मैं दिल्ली की सल्तनत का आह्वान करता हूं कि वह मेरा मुकाबला करे।पुणे के फर्गुसन कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि यूपीए सरकार खाद्य सुरक्षा विधेयक लाई है और ऐसे दावा कर रही है, मानो पहले से ही हर किसी की थाली में भोजन पहुंच गया हो। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स पर कहा कि इससे दुनियाभर में देश की प्रतिष्ठा को तगड़ा झटका लगा है।
राजीव गांधी का नाम लिए बगैर मोदी ने कहा कि हमारे कान भारत को 21वीं सदी में ले जाने की बात सुन-सुनकर पक गए हैं, लेकिन क्या किसी के पास इसकी कोई रुपरेखा है? यूपीए की विदेश नीति पर मोदी ने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि कोई भी पड़ोसी देश भारत का मित्र नहीं है। हालांकि मोदी ने भाषण शुरू करते ही कहा था कि वे राजनीति पर कोई बात नहीं करेंगे। उन्होंने पिल्ले व हिंदू राष्ट्रवादी के बयान पर टिप्पणी से भी मना कर दिया।
मोदी ने बताया कि मैंने सोशल मीडिया पर पूछा था कि कॉलेज में मुझे किस मुद्दे पर बात करनी चाहिए। करीब 2,500 नौजवानों ने अपने सुझाव भेजे। जो लोग यह सोचते हैं कि युवा सिर्फ जींस पहनते हैं और बाल बढ़ाते हैं, वे भ्रम में हैं। हमारे युवा भी देश के बारे में सोचते हैं और कुछ करना चाहते हैं।
भाजपा में अपनी प्रोन्नति के बाद चुनावी मूड़ में आते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था में गिरावट, रुपये के अवमूल्यन को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर रविवार को करारा प्रहार किया और कांग्रेस पर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए धर्मनिरपेक्षता के बुर्के के पीछे छिपने का आरोप लगाया।
गुजरात के मुख्यमंत्री ने गरीबी हटाने के अपने वादे पर विफल रहने पर एवं (गरीबों को) खाद्य सुरक्षा कानून वाला महज एक कागज का टुकड़ा सौंपने को लेकर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। मोदी ने यह कहते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा कि सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्रियों में शुमार होने के बाद भी वह विनाश के मार्ग पर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रुपए का अवमूल्यन हो रहा है, क्योंकि जो लोग दिल्ली में बैठे हैं वे रुपए लूटने और खाने में व्यस्त हैं। कांग्रेस एक ऐसी धारा है जहां श्रेष्ठ अर्थशास्त्री भी विनाश के पथ पर चलने लगता है।
कांग्रेस में राहुल गांधी को अहम स्थान देने पर पार्टी पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस की वंशवादी राजनीति देश के समक्ष खड़ी समस्याओं की जड़ है। वंशवाद ने जनाकांक्षाओं को कुचला है। कांग्रेस ने लोगों को हल्के में लिया है। राहुल का नाम लिए बगैर उन्होंने उन पर कटाक्ष किया, कांग्रेस साहबजादे गरीब लोगों के घर जाते हैं और जो कभी महल थे, उनके भग्नावशेष को दिखाने के लिए मीडिया को बुलाते हैं और कहते हैं देखिए यह हमारे पूर्वजों ने क्या कर रखा है।
गुजरात दंगे को लेकर अपनी सरकार पर बचाव करने पर विरोधियों के निशाने पर आए मोदी ने कहा कि जरा गौर से देखिए। जब भी कांग्रेस चुनौतियों से घिरी होती है, चाहे वह भ्रष्टाचार हो, महंगाई हो, उच्चतम न्यायालय के निर्देश हों, किसी मंत्री का जेल जाना हो, लड़कियों से बलात्कार हो या असुरक्षा का माहौल हो, वह लोगों के सवालों का जवाब नहीं देती। उन्होंने कहा कि जब भी संकट पैदा होता है, वे धर्मनिरपेक्षता का बुर्का पहन लेते हैं और बंकर में छुप जाते हैं। भाजपा ने अक्सर कांग्रेस पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण एवं वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है।
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कांग्रेस छिप जाती है धर्मनिरपेक्षता के ‘बुर्के’ में: नरेन्द्र मोदी
Monday, 15 July 2013
पुणे। भाजपा में अपनी प्रोन्नति के बाद चुनावी मूड में आते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था में गिरावट, रुपए के अवमूल्यन को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर रविवार को करारा हमला किया। कांग्रेस पर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए धर्मनिरपेक्षता के बुर्के के पीछे छिपने का आरोप लगाया। गुजरात के मुख्यमंत्री ने गरीबी हटाने के अपने वादे पर नाकाम रहने पर व गरीबों को खाद्य सुरक्षा कानून वाला महज एक कागज का टुकड़ा सौंपने को लेकर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। यहां एक जनसभा में मोदी ने यह कहते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा कि सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्रियों में शुमार होने के बाद भी वे विनाश के मार्ग पर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा-रुपए का अवमूल्यन हो रहा है क्योंकि जो लोग दिल्ली में बैठे हैं वे रुपए लूटने और खाने में व्यस्त हैं। कांग्रेस एक ऐसी धारा है जहां श्रेष्ठ अर्थशास्त्री भी विनाश के पथ पर चलने लगता है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस इस बात पर जोर देकर अपना यह नाटक कर रही है कि इस समय लोग गरीबी या भ्रष्टाचार या महंगाई की बात नहीं करें क्योंकि धर्मनिरपेक्षता खतरे में है। कांग्रेस ने ऐसा दशकों तक किया है। सरकार ने सौ दिनों के अंदर महंगाई नीचे लाने का वादा किया था लेकिन दाम बढ़ते ही गए।
उन्होंने कहा-लेकिन एक बार भी किसी कांग्रेस नेता या कांग्रेस अध्यक्ष या प्रधानंत्री ने यह नहीं कहा कि हम महंगाई नीचे लाने का प्रयास कर रहे हैं, कि हम सफल नहीं हुए लेकिन इस दिशा में काम कर रहे हैं? वर्तमान शासन नीतिगत पंगुता का शिकार है जिससे सभी मोर्चों पर उसकी विफलता परिलक्षित होती है। देश में बिजली संयंत्र बंद कर दिए गए क्योंकि कोयले की आपूर्ति नहीं है। प्रधानमंत्री फाइल लेकर बैठे हैं और कोई फैसला नहीं किया जा रहा। देश अंधेरे में है। मोदी ने कहा कि विदेशों में छिपाकर रखे गए काले धन को वापस लाने में सरकार की निष्क्रियता से यह संदेह पैदा होता है कि वह कुछ लोग और उनके धन को बचाने की कोशिश में है।
मोदी ने 80 साल के सिंह का जिक्र करते हुए कहा-जब देश आजाद हुआ था तब रुपए डालर के बराबर था। अब रुपए का अवमूल्यन हो रहा है और ऐसा लगता है कि मानो यह प्रधानमंत्री की उम्र तक पहुंच जाएगा। हाल के दिनों में रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और एक डालर 61 रुपए के बराबर हो गया। उन्होंने कहा कि जब तक हम कांग्रेस मुक्त भारत का निर्माण नहीं करते, देश समस्याओं से मुक्त नहीं होगा। वैश्विक मंदी के बाद भी पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की मुद्राओं का अवमूल्यन नहीं हुआ।
खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लाने की हड़बड़ी पर सरकार पर हमला करते हुए मोदी ने कहा-लोगों को दो जून की रोटी भी नहीं मिलती है। ऐसे में उसने एक कानून लाया और लोगों के हाथों में एक कागज का टुकड़ा थमा दिया कि उन्हें भोजन अधिकार के रूप में मिलेगा जबकि उन्होंने इस बात पर तनिक भी विचार नहीं किया कि गरीबों को भोजन देना संभव है या नहीं। कांग्रेस खाद्य विधेयक पर ऐसे दावा कर रही मानो भोजन लोगों की थालियों में पहले ही पहुंच गया हो। बेशर्म कांग्रेस पार्टी पिछले 35 साल में किए गरीबी हटाओ वादे से मुकर गई। उन्होंने नारा दिया और गरीबों ने इस आस में उसके पक्ष में मतदान किया कि उनके दिन भी बहुरेंगे। कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता के नाम पर लोगों की आकांक्षाओं को कुचल नहीं सकती।
मोदी ने रुपए के अवमूल्यन, महंगाई और बुनियादी ढांचा विकास जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई वाली राजग सरकार की उपलब्धियों और यूपीए की उपलब्धियों पर बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा-यह सरकार इतनी अहंकारी है कि यह लोगों के समक्ष सिर झुकाकर नहीं कह सकती कि वह मुद्रास्फीति पर काबू नहीं पा सकती। निर्वाचित सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह क्यों नहीं है?
मोदी ने केंद्र पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को घेरने के लिए सीबीआइ के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। मोदी ने कहा-यह पुणे ही था जहां से लोकमान्य तिलक ने ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी। उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का मंत्र दिया था। अब आजादी के 60 साल बाद भी सुराज (सुशासन) मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, का नारा पुणे से दिया जाना चाहिए। उन्होंने यहां फर्गुसन कॉलेज में छात्रों व शिक्षकों से कहा-दो देशों ने दो खेलों की मेजबानी की। दक्षिण कोरिया ने ओलंपिक की मेजबानी की जबकि भारत ने राष्ट्रमंडल खेल की मेजबानी की। कोरिया ने ओलंपिक के माध्यम से अपने लिए सम्मान लाया जबकि 120 करोड़ जनता वाले हमारे देश ने दुनिया की नजर में अपना सम्मान खो दिया। एक देश वैश्विक बिरादरी में अपने लिए प्रतिष्ठा पाने के लिए खेल का इस्तेमाल करता है जबकि दूसरा अपने लिए बदनामी लाता है।
गुजरात के मुख्यमंत्री ने 2002 के गुजरात दंगे से निबटने के तौर-तरीकों का बचाव करने व अपने ‘कुत्ते के बच्चे’ व ‘मैं हिंदू राष्ट्रवादी हूं’ संबंधी बयानों को लेकर विरोधियों की आलोचना का जवाब नहीं दिया। बढ़ते साइबर अपराधों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने गुजरात में दुनिया के पहले अपराध विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की।
उन्होंने कहा-अब कांग्रेस कहेगी कि इसमें नया क्या है? आप जरा विचार कीजिए, मैं महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में अपराध विज्ञान में चल रहे पाठ्यक्रम की बात नहीं कर रहा। मैं अपराध विज्ञान विश्वविद्यालय की बात कर रहा हूं जो दुनिया में अपनी तरह का पहला विश्वविद्यालय है। राजीव गांधी का नाम लिए बगैर मोदी ने 21वीं सदी में नए भारत का निर्माण करने संबंधी दिवंगत कांग्रेस प्रधानमंत्री का हवाला दिया। उन्होंने कहा-हमारे कान 21वीं सदी के बारे में सुन-सुनकर पक गए हैं। क्या किसी के पास इस बात का विजन है कि कैसे भारत को 21वीं सदी में ले जाया जाए। उन्होंने यूपीए सरकार में चल रही कूटनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा-मैं चकित हूं कि पड़ोस में भी हमारा कोई दोस्त नहीं बचा। रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा-देश पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर जितना खर्च करता है, उससे कहीं ज्यादा वह रक्षा उपकरणों व हथियारों के आयात पर खर्च करता है। क्या हमारे पास ऐसे इंजीनियर नहीं है जो ऐसे उपकरण तैयार करें। मैं आपको बताता हूं हमारे इंजीनियंरिंग कॉलेजों में रक्षा इंजीनियरिंग नामक विषय ही नहीं है। मोदी ने पश्चिमीकरण किए बगैर भारत को आधुनिक बनाने का आह्वान किया।
अपने भाषण में शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में गुजरात सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए मोदी ने कहा-राष्ट्र निर्माण के लिए मेधा को सींचने की जरूरत है। शिक्षा राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका निभाती है। अगर हम एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं तो हमें अच्छे शिक्षक बनाने होंगे लेकिन अच्छे शिक्षकों का निर्माण अभी प्राथमिकता नहीं है।