मंगलवार, 16 जुलाई 2013

2 लाख वेश्‍याओं को बढ़ावा देगा महाराष्‍ट्र में बार डांस पर हटा बैन


2 लाख वेश्‍याओं को बढ़ावा देगा महाराष्‍ट्र में बार डांस पर हटा बैन

2 लाख वेश्‍याओं को बढ़ावा देगा महाराष्‍ट्र में बार डांस पर हटा बैन
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मुंबई। 8 साल बाद मुंबई के बारों में अब बार बालाएं ठुमके लगाती देखी जा सकेंगी। सीधे शब्‍दों में कहें तो 8 साल के सन्‍नाटे के बाद मुंबई के बार अब गुलजार हो जायेंगे क्‍योंकि सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार को फिर से खोलने की अनुमति दे दी है। बॉम्‍बे हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया है और कहा कि डांस बार पर पाबंदी गलत है। मालूम हो कि वर्ष 2005 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल ने मुंबई समेत महाराष्ट्र के सभी डांस बारों पर पाबंदी लगा दी थी। अपने इस फैसले पर पाटिल ने दलील दी थी कि डांस बार के लिए लड़कियों की तस्करी की जाती है। डांस बार के मालिक लड़कियों का आर्थिक और शारीरिक शोषण करते हैं और इससे देह व्यापार को बढ़ावा मिलता है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने इस इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों को तो राहत दी है मगर कहीं ऐसा ना हो कि ये फैसला देश के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ कर बैठे। जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला देह व्‍यापार को बढ़ावा देगा। आप शायद सुनकर दंग रह जायेंगे कि मुंबई देश की सबसे बड़ी सेक्‍स इंडस्‍ट्री है। ये बात हम नहीं बल्कि राष्‍ट्रीय एड्स कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट कह रही है। मुंबई में 2 लाख से ज्‍यादा वेश्‍याएं हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि यहां 50 फीसदी से अधिक वेश्‍याएं एचआईवी से ग्रसित हैं। वर्ष 2000 में मुंबई में वेश्‍याओं की संख्‍या 1 लाख थी। यह संख्‍या हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ रही है। देह व्‍यापार के मामले में कोलकाता दूसरे नंबर पर है। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार मुंबई एशिया की सबसे बड़ी सेक्‍स इंडस्‍ट्री है। जानकारों का कहना है कि डांस बार के बाद ये महिलाएं देह व्‍यापार के धंधे में सक्रिय हो जायेंगी और एड्स जैसे खतरनाक बीमारी के फैलने का खतरा रहेगा।
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महाराष्ट्र में फिर खुलेंगे डांस बार, सुप्रीम कोर्ट ने हटाई पाबंदी
Updated on: Tue, 16 Jul 2013
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिए एक अहम फैसले में महाराष्ट्र सरकार को झटका देते हुए राज्य में बंद किए गए डांस बार को खोलने का आदेश दिया है। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी राज्य में डांस बार पर लगाई गई रोक को गलत बताते हुए इन्हें खोलने का आदेश दिया था। इस आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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गौरतलब है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2005 में राज्य के सभी डांस बार को बंद करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य के सभी डांस बार दोबारा से खुल सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अल्तमस कबीर और न्यायधीश एसएस निज्जर की खंडपीठ ने इस मामले पर फैसला सुनाते राज्य सरकार के आदेश को असंवैधानिक बताया।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा वर्ष 2005 में बंद किए गए डांस बार के खिलाफ रेस्टोरेंट और होटल एसोसिएशन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी। वर्ष 2006 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को झटका देते हुए इस मामले में रेस्टोरेंट एसोसिएशन के हक में अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने राज्य में बंद किए गए सभी डांस बार को खोलने का भी आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने दलील दी थी कि डांस बार की आड़ में राज्य के अंदर जिस्मफरोशी का धंधा चलाया जा रहा है। सरकार के मुताबिक राज्य में करीब 345 डांस बार को लाइसेंस मिला हुआ है जबकि करीब 2500 डांस बार बिना लाइसेंस के ही चल रहे हैं। एसोसिएशन का तर्क था कि राज्य सरकार के फैसले के बाद करीब सत्तर हजार बार ग‌र्ल्स बेरोजगार हो गई हैं और कुछ ने तंगी के हालातों में आत्महत्या तक कर ली है।
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आसानी से हार नहीं मानेगी महाराष्ट्र सरकार
Updated on: Tue, 16 Jul 2013
मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही डांस बार फिर से शुरू किए जाने के पक्ष में फैसला सुना दिया है, लेकिन महाराष्ट्र सरकार आसानी से हार मानने वाली नहीं है। वह कानूनी विशेषज्ञों के पैनल से सलाह लेकर फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर करेगी। यदि उसमें सफलता नहीं मिली तो ऐसा सख्त कानून बनाएगी कि पुन: लाइसेंस लेकर डांस बार चलाना आसान नहीं होगा। सरकार के हौसले बुलंद हैं क्योंकि ज्यादातर राजनीतिक दल उनके साथ खड़े हैं।

डांस बार पर कोर्ट का फैसला महाराष्ट्र सरकार ही नहीं राकांपा नेता व गृहमंत्री आरआर पाटिल के लिए बड़ा झटका है। डांस बार पर पाबंदी का फैसला अगस्त 2005 में पाटिल ने किया था, तब भी वह गृहमंत्री ही थे। सुप्रीम कोर्ट में हार के बावजूद पाटिल के हौसले पस्त नहीं पड़े हैं। उन्होंने मंगलवार को विधान परिषद में कहा, अभी हमें कोर्ट के फैसले की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। प्रति मिलने के बाद कानूनविदों, वकीलों और विधायकों का एक पैनल उसका अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। उसीआधार पर सरकार फैसला करेगी कि वह इस मुद्दे पर पुनरीक्षण याचिका दायर करे, सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ के समक्ष जाए या सख्त कानून बनाकर डांस बार लाइसेंस पुन: देने की शुरुआत करे।

पाटिल के हौसले बुलंद हैं क्योंकि राकांपा और कांग्रेस ही नहीं भाजपा व शिवसेना जैसे दल भी नैतिकता के बहाने इस मुद्दे पर उनके साथ खड़े दिख रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस ने जहां कोर्ट के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है,वहीं शिवसेना की नेता नीलम गोरे का कहना है कि डांस बार की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि वहां महिलाओं का शोषण किया जाता है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे डांस बार पर पाबंदी के लिए सख्त कानून के पक्ष में हैं तो राकांपा अध्यक्ष भास्कर जाधव का मानना है कि महाराष्ट्र की जनता डांस बार पर पाबंदी का समर्थन करेगी।
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