गुरुवार, 15 अगस्त 2013

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा



सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा
हम बुलबुले है इसकी ये गुलसिता हमारा ॥धृ॥

घुर्बत मे हो अगर हम रहता है दिल वतन मे
समझो वही हमे भी दिल है जहाँ हमारा ॥१॥

परबत वो सब से ऊंचा हमसाय आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबा हमारा ।२॥

गोदी मे खेलती है इसकी हजारो नदिया
गुलशन है जिनके दम से रश्क-ए-जना हमारा ।३॥

ए अब रौद गंगा वो दिन है याद तुझको
उतर तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा ॥४॥

मझहब नही सिखाता आपस मे बैर रखना
हिन्दवी है हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा ॥५॥

युनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा सब मिट गये जहाँ से
अब तक मगर है बांकी नामो-निशान हमारा ॥६॥

कुछ बात है की हस्ती मिटती नही हमारी
सदियो रहा है दुश्मन दौर-ए-जमान हमारा ॥७॥

इक़्बाल कोइ मेहरम अपना नही जहाँ मे
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहा हमारा ॥८॥

मेरी आवाज पाकिस्तान पहले पहुंचती है : नरेंद्र मोदी



मेरी आवाज पाकिस्तान पहले पहुंचती है: मोदी
नवभारतटाइम्स.कॉम | Aug 15, 2013, 

भुज।। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर भुज के लालन कॉलेज से दिए गए भाषण में पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। मोदी ने पीएम के स्वतंत्रता दिवस भाषण को बेहद निराशाजनक बताते हुए कहा कि वह पाक को कड़ा संदेश देने में नाकाम रहे हैं और बस एक ही परिवार का गुणगान करते रहे। उन्होंने कहा कि देश के आखिरी छोर पर बैठे होने के बाद भी उनकी आवाज पाकिस्तान तक पहले पहुंचती है। गौरतलब है कि मोदी के इस भाषण पर सभी की नजरें लगी हुई थीं। मोदी ने बुधवार को ही अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में पीएम को निशाने पर लेने का इशारा कर दिया था। मोदी ने किया भी ऐसा ही। मनमोहन का भाषण सुनकर आए मोदी ने इसको आधार बनाकर पीएम को निशाने पर लिया। 
पीएम को शास्त्री, पटेल क्यों नहीं याद आएः मोदी ने कहा, 'देश की भलाई के लिए विकास एकमात्र उपाय है। इसी वजह से हम चाहते थे कि लाल किले से प्रधानमंत्री देश को कुछ पॉजिटिव संदेश देंगे। प्रधानमंत्री लाल किले से केवल एक परिवार को याद करते दिखे। प्रधानमंत्री से क्या यह गलत उम्मीद थी कि वे सरदार वल्लभ भाई पटेल और लाल बहादुर शास्त्री को भी याद करते। लाल बाहदुर शास्त्री और वल्लभाई पटेल भी इसी देश के सपूत हैं। मुझे यह बात तो समझ में आती है कि आप अटल बिहारी वाजपेयी को याद नहीं करें, क्योंकि आपकी मर्यादा की समझ मुझे पता है। लेकिन शास्त्री और पटेल से ऐसी बेरुखी क्यों?'
मेरी आवाज पाकिस्तान पहले पहुंचती हैः मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से देश को संबोधित करने के बजाय एक परिवार को संबोधित किया। मोदी ने कहा, 'लाल किले पर प्रधानमंत्री एक परिवार की भक्ति में डूबे रहे। मैं तब और हैरान होता हूं कि लाल किले से सबसे ज्यादा बार झंडा फहराने का रेकॉर्ड आपने बनाया, लेकिन आपने वही भाषण दिया जो पहले आजादी दिवस में पंडित नेहरू ने दिया था। मैं गुजरात के आखिरी छोर से बोल रहा हूं। मेरी आवाज पाकिस्तान पहले पहुंचती है, देश के शासक तक बाद में।' 
राष्ट्रपति के भाषण की तारीफ: मोदी ने लालन कॉलेज में कहा कि आजादी तो मिली लेकिन आज भी कई तरह की आजादी की जरूरत है। हम आज भी गुलामी की मानसिकता में जकड़े हुए हैं। मोदी ने कहा कि कल मैं राष्ट्रपति का भाषण सुन रहा था। राष्ट्रपति के भाषण में पीड़ा साफ झलक रही थी। मुझे नहीं पता कि देश का शासक राष्ट्रपति की पीड़ा को समझता है या नहीं। मोदी ने कहा कि देश का शासक दल संसद को आखाड़ा बना दिया है। ऐसा पहली बार हुआ जब देश का शासक दल ही संसद को नहीं चलने दे रहा है। संसद को बंधक बना रखा है। इस संदर्भ में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की चिंता वाजिब है। मोदी ने राष्ट्रपति के हवाले से ही केंद्र की कांग्रेस सरकार पर हमला बोला। 
मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने पाकिस्तान पर सख्त टिप्पणी की लेकिन मनमोहन सिंह का तेवर लाल किले पर बिल्कुल नरम रहा। मुझे उम्मीद थी कि लाल किले से प्रधानमंत्री सेना का मनोबल बढ़ाएंगे, ऐसा नहीं हुआ। मोदी ने कहा कि लाल किला पाकिस्तान को ललकारने की जगह नहीं है। हम इसके पक्ष में नहीं हैं। लेकिन लाल किला से हम देश के बहादुर सैनिकों का मनोबल बढ़ा सकते हैं।
मोदी ने पूछा कि हमारे साथ चीन ने क्या किया? क्या यह प्रधानमंत्री को खबर नहीं है। हमारी सेना अपनी ही जमीन से हटने पर मजबूर क्यों हुई? पाकिस्तान की सेना हमारी सरहद में आकर हमारे सैनिकों की गर्दन काट ले तब मुझे चिंता होती है। राष्ट्रपति के भाषण के हवाले से मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार एक शब्द नहीं कहा। दूसरी तरफ राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता जताई। क्या यह चिंता लाल किले से प्रकट नहीं होनी चाहिए थी?
कांग्रेस में सास, दामाद, बेटा सीरियल: नरेंद्र मोदी ने सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा का नाम लिए बिना कहा कि एक वक्त था जब देश में भ्रष्टाचार पर सीरियल बनते थे, फिर मामा और भांजे पर सीरियल बना। लेकिन अब जमाना सास, दामाद और बेटे का है।
गरीबों की थाली में ऐसिड न छिड़को: मोदी ने कहा कि प्रधानंत्री ने 1991 में हुए आर्थिक सुधारों का जिक्र किया लेकिन रुपया क्यों गिर रहा है इस पर उन्होंने चुप्पी साध ली। मोदी ने कहा कि पीएम ने फूड सिक्यूरिटी बिल की बात कही लेकिन उसकी कमियों पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हैं। कांग्रेस का कोई नेता कहता है कि 5 रुपये में थाली मिल जाएगी तो कोई कहता है कि 12 रुपए में। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी गरीबों की थाली में ऐसिड छिड़कना बंद करें। हिन्दुस्तान की सरहद पर स्थित भुज से मैं देशवासियों से कह रहा हूं कि केंद्र सरकार गरीबों का मजाक उड़ाना बंद करे। 

पीएम का यह विदाई भाषण है: मोदी ने कहा कि संविधान में जो समानता का हक मिला है उसी को आपने नकार दिया। उन्होंने कहा कि आज गुजरात में गरीबों को 35 किलो अनाज मिलता है लेकिन फूड सिक्यूरिटी बिल के बाद यह 25 किलो हो जाएगा। ऐसे में इस फू़ड सिक्यूरिटी बिल की क्या जरूरत है। प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी राज्यों पर थोप कर लोगों को भूखे ऱखना चाहते हैं। गरीबों के घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं। मोदी ने कहा कि मैं मीडिया में चल रही उस बात से हैरान हूं, जिसमें चर्चा चल रही थी कि यह मनमोहन सिंह का लाल किले पर आखिरी भाषण है। दूसरी तरफ से प्रधानमंत्री का कहना है कि अभी और फासले तय करने हैं। मोदी ने कहा, मैं प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हू कि अब क्या रॉकेट में बैठकर और फासले तय करोगे।'
गरीब की रोटी की सोचिएः जिस तरह से हमने देश को अंग्रेजों से मुक्त कराया उसी तरह देश को भ्रष्टाचार और महंगाई से मुक्त कराना है। मोदी ने कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि गुजरात आज जहां खड़ा है, उसमें केवल मेरा योगदान है। गुजरात को आगे बढ़ाने में हर सरकारों का योगदान है। यहां की 6.30 करोड़ जनता का योगदान है। हां, मैंने तरक्की को गति दी है। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी आज देश में हाशिए पर खड़े आदमी को कैसे दो जून की रोटी मिले इस पर सोचिए। मोदी ने कहा कि देश जब तिरंगा झंडा लहरा रहा है तो आपकी एक ब्रिगेड कंप्यूटर पर बैठी है और मोदी को गाली दे रही है।
पीएम को मेरी खुली चुनौतीः उसके पास वंदे मातरम् और राष्ट्रगीत गाने का वक्त नहीं है। मोदी ने कहा कि अरे मोदी से कम से कम आज तो मुक्त रहो। प्रधानमंत्री जी मैं आपको खुली चुनौती दे रहा हूं कि गुजरात और दिल्ली में विकास की स्पर्धा हो जाए। मोदी ने पीएम पर ताना मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सोच में ही खोट है। हिन्दुस्तान का नौजवान बेरोजगार है। 21वीं सदी का पहला दशक खत्म हो गया लेकिन हुआ क्या। 10 के साल के शासनकाल में इतना गड्ढे हो गए हैं कि उसने भरने में लंबा वक्त लगेगा।
---------------------------------

मोदी का मनमोहन पर हमला, 'परिवार भक्ति में डूबे हैं PM'ibnkhabar.com | Aug 15, 2013

भुज। स्वतंत्रता दिवस पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुज के लालन कॉलेज में तिरंगा फहराया। इस दौरान अपने भाषण में मोदी ने गुजरात की उपलब्धियों का जिक्र करने के साथ ही पीएम मनमोहन सिंह के लाल किले से दिए गए संबोधन पर जमकर हमला बोला। मोदी ने कहा कि पीएम ने अपने भाषण में सिर्फ एक परिवार का ही जिक्र किया। पीएम ने भ्रष्टाचार पर भी कुछ नहीं किया। मोदी ने मनमोहन को आर्थिक नीतियों से लेकर विदेश नीति तक घेरा।
राष्ट्रपति के संबोधन का किया जिक्र
मोदी ने अपने भाषण में राष्ट्रपति के संबोधन का भी जिक्र किया। मोदी ने कहा कि आजादी की जंग में गुजरात का बड़ा योगदान है। आजादी के इतने साल बाद। संसद, विधानसभा अखाड़ा बन गई है। राष्ट्रपति की चिंता इस बात से है कि सत्ता में दल संसद और विधानसभा नहीं चलने देते हैं। संसद की इज्जत को बनाए रखने के लिए यथोचित प्रयास करें।
सहनशक्ति की सीमा होती है- मोदी
पाकिस्तान का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सहनशक्ति की एक सीमा होती है। आशा थी कि पीएम राष्ट्रपति की चिंता पर जवाब देते। पीएम से ये सुनने को नहीं मिला। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए कैसे बोलना चाहिए, ये मैं जानता हूं। सेना का आत्मविश्वास बना रहे। सेना के मनोबल को शक्ति देने का प्रयास करना चाहिए था। लालकिला देश की सेना का मनोबल बढ़ाने की जगह है। सहनशीलता का फैसला केंद्र करना चाहिए। सवाल पाकिस्तान का नहीं, देश की सुरक्षा का है। चीन आजाद भारत की सीमा पर अड़ंगा डाल रहा है। देश चुपचाप देखता है। तब सुरक्षा का सवाल खड़ा होता है। केरल में इटली के सैनिक देश कें मछुआरों को मार दे, पाक के सैनिक हमारे सैनिकों को मार डाले इससे चिंता होती है। भारत के राष्ट्रपति की चिंता के साथ मैं भी हूं। मोदी ने कहा पीएम से पहले उनकी आवाज पाकिस्तान तक पहुंचती है।
भ्रष्टाचार पर चुप्पी क्यों?
मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लाल किले से पीएम कुछ बोलते। राष्ट्रपति की भावना का आदर करना पीएम का पहला कर्तव्य होता है। लेकिन वो कुछ नहीं बोले। भ्रष्टाचार देश की पीड़ा है। भाई भतीजावाद, मामा-भांजा और सास-दामाद का दौर चल रहा है। देश तबाह हो रहा है। शासन में बैठे लोग बुरी तरह लूट रहे हैं। मुंह पर ताले लगाकर देश चलाया जा रहा है।
शास्त्री-पटेल का जिक्र क्यों नहीं?
लालकिले से भारत के पीएम का भाषण सुन रहा था, गुजरात का मंत्र रहा है भारत का विकास के लिए गुजरात का विकास। ये दायित्व हम सभी को निभाना चाहिए। हमें पीएम से अच्छे संदेश की आशा थी। आप इस देश के पीएम हैं सभी सरकारों के काम से ही देश आगे पहुंचा है। पीएम लालकिले से भाषण में एक परिवार का स्मरण कर रहे थे। वो सरदार पटेल को भी याद करते लालकिले से। पंडित नेहरू का जिक्र, इंदिरा, राजीव का जिक्र कर रहे थे तो लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र कर लेते पीएम।
परिवार भक्ति में डूबे पीएम-मोदी
राजनीति या परिवारवाद नहीं होना चाहिए था। वाजयपेयी को याद नहीं करें तो ये समझ में आता है लेकिन शास्त्री को याद नहीं किया ये बात पीड़ा देती है। पीएम एक परिवार की भक्ति में डूब गए हैं। देश को चिंता हो रही है। पंडित नेहरू ने जो अपने पहले भाषण में कहा था वहीं आपने भी गिनाया तो आपने देश को क्या दिया। कच्छ से बोल रहा हूं मेरी आवाज पाकिस्तान को पहले सुनाई देती है। देश की सरकार को बाद में सुनाई देती है।
आर्थिक नीतियों पर हमला
मोदी ने कहा कि रुपये का स्तर गिर रहा है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? आपने वैश्विक मंदी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। कोई राज्य सरकार के विकास में बाधा की जिम्मेदार केंद्र की नीतियां हैं। फूड सिक्योरिटी बिल में कमियां हैं। हमने बिल का विरोध नहीं किया है। कमियों को दूर करना जरूरी है। कमियों को दूर करने की नहीं सोच रहे हैं। गरीब की थाली में नमक, एसिड छिड़कते जा रहे हैं।



आरती भारत माता की



आरती भारत माता की


आरती भारत माता की,
जगत की भाग्यविधाता की॥धृ॥

मुकुटसम हिमगिरिवर सोहे,
चरण को रत्नाकर धोए,
देवता कण-कण में छाये
वेद के छंद, ग्यान के कंद, करे आनंद,
सस्यश्यामल ऋषिजननीकी॥1॥ जगत की...........

जगत से यह लगती न्यारी,
बनी है इसकी छवि प्यारी,
कि दुनिया झूम उठे सारी,
देखकर झलक, झुकी है पलक, बढ़ी है ललक,
कृपा बरसे जहाँ दाता की॥2॥ जगत की...........

पले जहाँ रघुकुल भूषण राम,
बजाये बंसी जहाँ घनश्याम,
जहाँ पग-पग पर तीरथ धाम,
अनेको पंथ, सहस्त्रों संत, विविध सद्ग्रंथ
सगुण-साकार जगन्माँकी॥3॥ जगत की...........

गोद गंगा-जमुना लहरे,
भगवा फहर-फहर फहरे,
तिरंगा लहर-लहर लहरे,
लगे हैं घाव बहुत गहरे,
हुए हैं खण्ड, करेंगे अखण्ड, यत्न कर चण्ड
सर्वमंगल-वत्सल माँ की॥4।। जगत की...........

बढ़ाया संतों ने सम्मान,
किया वीरों ने जीवनदान,
हिंदुत्व में निहित है प्राण,
चलेंगे साथ, हाथ में हाथ, उठाकर माथ,
शपथ गीता - गौमाता की॥5॥ जगत की...........
भारत माता की जय.....
----------
भारत-माता
जिसका कंकर-कंकर शंकर है, और जिसकी बूँद-बूँद गंगा है;
कश्मीर जिसका मस्तक है और हिमालय जटाएँ हैं;

विंध्याचल जिसका कटिपट है और नर्मदा जिसकी करधनी है;
पूर्व-पश्चिम घाटियाँ जिसकी जंघाएँ हैं और कन्याकुमारी जिसके चरण हैं;

काले-काले बादल जिसके बाल हैं, और बसन्त जिसका श्रृंगार है;
जो ऋषिमुनियोंकी भूमि है और जिसमें गंगा बहती है;

वह हमारा देश भारत है।

भारत हमारी जननी है, जन्मभूमि है, मातृभूमि है, पितृभूमि है।
यह सन्तोंकी भूमि है, महन्तोंकी भूमि है।

यह अर्पणकी भूमि है, यह तर्पणकी भूमि है;
यह वन्दनकी भूमि है, अभिनन्दनकी भूमि है।

हम जियेंगे तो इसके लिये और मरेंगे तो इसके लिये।

यह गद्यकाव्य भूतपूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय श्री अटलजी का है
----------
प्रार्थना
है प्रार्थना गुरुदेवसे, हो स्वर्गसम माँ भारती
संसार में उन्नत रहें, सब जन उतारें आरती |
हो आचरण से शुद्ध हम, इस विश्वसे मैत्री करें
हर दु:ख-दैन्य-दरिद्रता, निज-बोधसे सबकी हरें ||१||धन-धान्यसे समृद्ध हो, धरती यहाँ की सर्वदा
हो मुक्त आधि-व्याधिसे, आये न कोई आपदा |
विज्ञानमय मस्तक हमारा, स्नेह अंतरमें बहे
वेदांतकी हो दृष्टि हरपल, हाथ सेवामें रहें ||२||
परिवारमें सुख-शांति हो, कर्तव्यतत्पर व्यक्ति हो
आरोग्य-शिक्षा-धन उपार्जन, सर्वदा उपलब्ध हो |
ग्रामीण पिछड़े बंधुओंकी, शीघ्र होवे उन्नति
गिरिवासि-वनवासी-अपंगों को मिले सेवा तति ||३||स्वातंत्र्य-समता-बंधुता हो विविधतामें एकता
हो सर्व भेद विलीन समरस जागती राष्ट्रीयता |
सद्बुद्धि-बल-पुरुषार्थसे चारित्र्य और विवेकसे
संपन्न हो युववर्ग भी सर्वत्र दिग्विजयी रहें ||४||यह विश्व है हरीरूप इसकी, कर्मसे पूजा करें
हम दीपवत् जलकर स्वयं इस, संस्कृति का तम हरें |
कल्याण होवे विश्वका, निर्वैरता का भाव हो
मंगल समन्वय-मंत्र गूँजे धर्मकी यह राह हो ||५||

- स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज