गुरुवार, 5 सितंबर 2013

डॉ. राधाकृष्णन के सम्‍मान में 'शिक्षक दिवस' मनाते हैं




डॉ. राधाकृष्णन, जिनके सम्‍मान में हम मनाते हैं 'शिक्षक दिवस'
आईएएनएस [Edited By: अमरेश सौरभ] | नई दिल्ली, 5 सितम्बर 2013
              एक शिक्षक की दी हुई शिक्षा से ही बच्चे आगे चलकर देश के कर्णधार बनते हैं. ऐसे ही एक शिक्षक थे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और दार्शनिक तथा शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जिनके सम्मान में उनके जन्मदिवस यानी 5 सितंबर को देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है.
            डॉ. राधाकृष्णन महान शिक्षाविद थे. उनका कहना था कि शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं है. जानकारी और तकनीकी गुर का अपना महत्व है लेकिन बौद्धिक झुकाव और लोकतांत्रिक भावना का भी महत्व है, क्योंकि इन भावनाओं के साथ छात्र उत्तरदायी नागरिक बनते हैं. डॉ. राधाकृष्णन मानते थे कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा, तब तक शिक्षा को मिशन का रूप नहीं मिल पाएगा.
            अपने जीवन में आदर्श शिक्षक रहे भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था. इनके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी राजस्व विभाग में काम करते थे. इनकी माता का नाम सीतम्मा था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा लूनर्थ मिशनरी स्कूल, तिरुपति और वेल्लूर में हुई. इसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की. 1903 में युवती सिवाकामू के साथ उनका विवाह हुआ.
          महान शिक्षाविद राधाकृष्ण ने 12 साल की उम्र में ही बाइबिल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन कर लिया था. उन्होंने दर्शन शास्त्र से एम.ए. किया और 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई. उन्होंने 40 वर्षो तक शिक्षक के रूप में काम किया.
           वह 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे. इसके बाद 1936 से 1952 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहे और 1939 से 1948 तक वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आसीन रहे. उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया.
            वर्ष 1952 में उन्हें भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति बनाया गया और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनने से पहले 1953 से 1962 तक वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति थे. इसी बीच 1954 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें 'भारत रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया. डॉ. राधाकृष्णन को ब्रिटिश शासनकाल में 'सर' की उपाधि भी दी गई थी. इसके अलावा 1961 में इन्हें जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा 'विश्व शांति पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया था.

डॉ. राधाकृष्णन ने 1962 में भारत के सर्वोच्च, राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया. जानेमाने दार्शनिक बर्टेड रशेल ने उनके राष्ट्रपति बनने पर कहा था, 'भारतीय गणराज्य ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति चुना, यह विश्व के दर्शनशास्त्र का सम्मान है. मैं उनके राष्ट्रपति बनने से बहुत खुश हूं. प्लेटो ने कहा था कि दार्शनिक को राजा और राजा को दार्शनिक होना चाहिए. डॉ. राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाकर भारतीय गणराज्य ने प्लेटो को सच्ची श्रद्धांजलि दी है.'

वर्ष 1962 में उनके कुछ प्रशंसक और शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जाहिर की तो उन्होंने कहा, 'मेरे लिए इससे बड़े सम्मान की बात और कुछ हो ही नहीं सकती कि मेरा जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए.' और तभी से पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा. शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाता है.

डॉ. राधाकृष्णन का देहावसान 17 अप्रैल, 1975 को हो गया, लेकिन एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में वह आज भी सभी के लिए प्रेरणादायक हैं.

वैसे तो विश्व शिक्षक दिवस का आयोजन पांच अक्टूबर को होता है, लेकिन इसके अलावा विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है. ऑस्ट्रेलिया में यह अक्टूबर के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है, भूटान में दो मई को तो ब्राजील में 15 अक्टूबर को. कनाडा में पांच अक्टूबर, यूनान में 30 जनवरी, मेक्सिको में 15 मई, पराग्वे में 30 अप्रैल और श्रीलंका में छह अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है.

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने वर्ष 2003 में शिक्षक दिवस पर अपने संबोधन में कहा था, 'विद्यार्थी 25,000 घंटे अपने विद्यालय प्रांगण में ही बिताते हैं, इसलिए विद्यालय में ऐसे आदर्श शिक्षक होने चाहिए, जिनमें शिक्षण की क्षमता हो, जिन्हें शिक्षण से प्यार हो और जो नैतिक गुणों का निर्माण कर सकें.'
-----------
pawan sharma गुरूवार, 5 सितम्बर 2013
            एक शिक्षक की दी हुई शिक्षा से ही बच्चे आगे चलकर देश के कर्णधार बनते हैं. ऐसे ही एक शिक्षक थे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और दार्शनिक तथा शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जिनके सम्मान में उनके जन्मदिवस यानी 5 सितंबर को देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है. डॉ. राधाकृष्णन महान शिक्षाविद थे. उनका कहना था कि शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं है. जानकारी और तकनीकी गुर का अपना महत्व है , लेकिन बौद्धिक झुकाव और लोकतांत्रिक भावना का भी महत्व है, क्योंकि इन भावनाओं के साथ छात्र उत्तरदायी नागरिक बनते हैं. डॉ. राधाकृष्णन मानते थे कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा, तब तक शिक्षा को मिशन का रूप नहीं मिल पाएगा.
                अपने जीवन में आदर्श शिक्षक रहे भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था. इनके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी राजस्व विभाग में काम करते थे. इनकी माता का नाम सीतम्मा था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा लूनर्थ मिशनरी स्कूल, तिरुपति और वेल्लूर में हुई. इसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की. 1903 में युवती सिवाकामू के साथ उनका विवाह हुआ.
                  महान शिक्षाविद राधाकृष्ण ने 12 साल की उम्र में ही  स्वामी विवेकानंद और बाइबिल  के दर्शन का अध्ययन कर लिया था. उन्होंने दर्शन शास्त्र से एम.ए. किया और 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई. उन्होंने 40 वर्षो तक शिक्षक के रूप में काम किया. वह 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे. इसके बाद 1936 से 1952 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहे और 1939 से 1948 तक वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आसीन रहे.              उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया. वर्ष 1952 में उन्हें भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति बनाया गया और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनने से पहले 1953 से 1962 तक वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति थे.
            इसी बीच 1954 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें 'भारत रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया. डॉ. राधाकृष्णन को ब्रिटिश शासनकाल में 'सर' की उपाधि भी दी गई थी. इसके अलावा 1961 में इन्हें जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा 'विश्व शांति पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया था. डॉ. राधाकृष्णन ने 1962 में भारत के सर्वोच्च, राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया. जानेमाने दार्शनिक बर्टेड रशेल ने उनके राष्ट्रपति बनने पर कहा था, 'भारतीय गणराज्य ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति चुना, यह विश्व के दर्शनशास्त्र का सम्मान है. मैं उनके राष्ट्रपति बनने से बहुत खुश हूं. प्लेटो ने कहा था कि दार्शनिक को राजा और राजा को दार्शनिक होना चाहिए.
             डॉ. राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाकर भारतीय गणराज्य ने प्लेटो को सच्ची श्रद्धांजलि दी है.' वर्ष 1962 में उनके कुछ प्रशंसक और शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जाहिर की तो उन्होंने कहा, 'मेरे लिए इससे बड़े सम्मान की बात और कुछ हो ही नहीं सकती कि मेरा जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए.' और तभी से पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा. शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाता है. डॉ. राधाकृष्णन का देहावसान 17 अप्रैल, 1975 को हो गया, लेकिन एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में वह आज भी सभी के लिए प्रेरणादायक हैं. वैसे तो विश्व शिक्षक दिवस का आयोजन पांच अक्टूबर को होता है, लेकिन इसके अलावा विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है. ऑस्ट्रेलिया में यह अक्टूबर के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है, भूटान में दो मई को तो ब्राजील में 15 अक्टूबर को. कनाडा में पांच अक्टूबर, यूनान में 30 जनवरी, मेक्सिको में 15 मई, पराग्वे में 30 अप्रैल और श्रीलंका में छह अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने वर्ष 2003 में शिक्षक दिवस पर अपने संबोधन में कहा था, 'विद्यार्थी 25,000 घंटे अपने विद्यालय प्रांगण में ही बिताते हैं, इसलिए विद्यालय में ऐसे आदर्श शिक्षक होने चाहिए, जिनमें शिक्षण की क्षमता हो, जिन्हें शिक्षण से प्यार हो और जो नैतिक गुणों का निर्माण कर सकें.' 

राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक सुधार के हम बनें भागीदार



३१ ऑगस्ट और १ सितम्बर २०१३ को जयपुर में ' आयोजित राष्ट्रिय संगोष्ठी 
भारत की रक्षा और अर्थ व्यवस्था पर , माननीय इन्द्रेश कुमार जी के मुख्य मार्ग दर्शन में संपन्न हुई ,
सारभूत सन्दर्भ विषय वस्तु निम्नानुसार हे । - अरविन्द सिसोदिया , कोटा ।

राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक सुधार के हम बनें भागीदार
    राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक व सामाजिक सुधार, घुसपैठ, जाली नोट, नशीले पदार्थ, आतंकी व आतंकी हथियारों का सीमाओं से प्रवेश, मतान्तरण, भ्रष्टाचार, आतंकी हमला, मंहगाई, साम्प्रदायिकता राम मन्दिर, गोधरा गुजरात, धारा 370, वोट बैंक व अल्पसंख्यकवाद, पंथीय आरक्षण, गाय गंगा संरक्षण, महिला सुरक्षा, अस्पृश्यता निवारण, आतंकवाद/ अलगाववाद/ माओवाद आदि महत्वपूर्ण विषय आज हमारे देश को प्रभावित कर रहे हैं। आज हमारे देश में आये दिन होती आतंकवादी घटनाओं से हमारे नागरिकों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है वहीं करोड़ों रूपये की हमारी सम्पत्ति का भी नुकसान हो रहा है। इस सबसे आम आदमी में भय व्याप्त हो रहा है। सरकार व सुरक्षा एजेन्सियों के हवाले छोड़ कर हम चैन की नींद नहीं सो सकते है। हमारे भी कुछ कर्तव्य है जिन्हें यदि हम ठीक प्रकार से करें तो आतंकी घटनाओं की रोकथाम कर सकते हैं व जान-माल के नुकसान से भी देश को बचा सकते हैं।
कुछ करने योग्य कार्यः
आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ मेंः
1.    कश्मीर में चल रही आतंकवादी व अलगाववादी घटनाओं की जानकारी से अपडेट (युक्त) रहना व लोगों को भी बताना।
2.    असम, मेघालय, पं0 बंगाल, मणिपुर आदि में होने वाले बंगलादेशी घुसपैठियों के बारे में बताना।
3.    नार्थ-इस्ट प्रदेशों में किस प्रकार ये राजनीतिक पार्टियों में शामिल होकर एवं राजनीतिक दल बना कर एमएलए एमपी बन रहे हैं, की जानकारी देना।
4.    लोगों को जागरूक करंे कि बंगलादेशी घुसपैठ के आधार पर आज असम में कब्जा कर रहे हेैं, कल दूसरे प्रदेश में और फिर भारत पर भी कब्जा करने का प्रयास करेंगे।
5.    सस्ते में मिलने वाले बंगलादेशी मजदूरों के खतरों से स्वयं को एवं जनता को बचाये रखने के लिये सावचेत करना।
6.    अपने आस-पास हो रही घुसपैठ को पहचानना, विदेशी बंगलादेशी भाषा से आसानी से पहचाने जा सकते हैं। उनकी सूचना संबंधित थाने में निःसंकोच दें।
7.    माओवाद नक्सलवाद क्या है? इसकी जानकारी रखना, लोगों को बताना कि किस प्रकार गरीबों की रक्षा के नाम पर यह खूंखार गतिविधियों में गांवों के भोले भाले लोगों को फंसा कर नक्सली बना रहे हैं। हथियार उठाने को मजबूर कर रहे हैं। विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य पर धन खर्च न कर, आतंकवादी गतिविधि बढ़ाते हैं और फिर उनके आधार पर मुटठी भर लोग ऐशो आराम करते हैं।
8.    जाली नोट भी आतंकवाद की नई परिभाषा है। यह अर्थ व्यवस्था को खोखला करते हैं, अतः जाली नोटों के बारे में तुरन्त पुलिस को सूचना दें। अपने शहर या गांव में किस माध्यम से जाली नोट आ रहे हैं, नजर रखें।
9.    हमारे आस-पास रह रहे अराष्ट्रीय तत्वों को पहचानना, उनमें कुछ एनजीओ चलाने वाले व कुछ व्यापार उद्योग करने वाले भी हो सकते हैं, उन्हंे पहचानना व पुलिस को सूचना देना।
10.    अराष्ट्रीय गतिविधियों की जानकारी अपने मित्रों, सहयोगियों को व्यक्तिगत, फोन, मैसेज द्वारा बताना।
11.    लोगों को बताना कि हम आम लोग भी किस प्रकार देश की सुरक्षा कर सकते हैं, आतंकवाद को रोक सकते हैं।
12.    अपने आस-पास रह रहे संदिग्ध लोगों को पहचानना, उन पर नजर रखना व पुलिस को सूचना देना।
13.    अपने समूह में, कार्यालयों में, अपना वैचारिक पक्ष रखना, कोई गलत बयानवाजी है तो उसका प्रतिकार करना, पत्र-पत्रिकाओं में गलत बातों पर विरोध स्वरूप लेख लिखना, गलत व संदिग्ध बातों की जानकारी पुलिस प्रशासन को देना। सोशल मीडिया का अधिकाधिक उपयोग करना। 
14.    अपने आस-पास पनप रहे भ्रष्टाचार व अपराध की जानकारी रखना तथा उसे संबंधित लोगों तक पहुंचाना।
15.    आतंकी घटना यदि हो जाये तो उसके उपचार व निदान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना जैसे-
क.    घायलों को अस्पताल पहुंचाना व प्राथमिक उपचार करवाना।
ख.    समाज के लोगों को बताना व सहायता हेतु प्रेरित करना।
ग.    घायलों की जीवन रक्षा हेतु खून, दवाईयों व अन्य मदद के लिये आव्हान करना।
घ.    हमलों में मारे गये लोगों के परिवारों की सुरक्षा उनके रोजगार के साधनों, सरकारी सहायता व बच्चों की पढ़ाई आदि के प्रयास करना।
16.    बच्चोें व नागरिकों को नागरिक सुरक्षा के पाठ्यक्रम के लिये प्रेरित करना। अपने एनजीओ में इसे शामिल करना।
17.    बच्चों को एनसीसी, एनएसएस व स्काउट आदि विषयों के लिये प्रेरित करना व यदि सम्भव हो तो स्कूल व काॅलेजों की पढ़ाई के साथ अनिवार्य कराने का प्रयास करना।
18.    पाठ्यक्रमों में व परिवार में, समाज में, सरकारी तन्त्र में बच्चांे एवं युवाओं को नैतिक व चारित्रिक शिक्षा के बारे में बताने के लिये प्रेरित करना। अच्छा इन्सान, अच्छा नागरिक बनने की प्रेरणा देना।
19.    महिलाओं का आदर करना, उनकी सुरक्षा करने हेतु प्रेरित करना, हमारी धार्मिक आस्थाआंें में नारी का पूजनीय स्थान है, यह बताना
 बेटी होगी तो बहन मिलेगी, बहन होगी तो पत्नी मिलेगी,
 पत्नी होगी तो माॅ मिलेगी और प्रभु की सृष्टि आगे चलेगी।
20.    अपने आस-पास के लोगों को सामाजिक कार्यों व  श्रेष्ठ संगठनों से जुड़ने की प्रेरणा देना।
21.    ऐसे आदर्श विद्यालयों व महाविद्यालयों का निर्माण करना जिनमें निकलने वाले छात्र हर दृष्टि से जैसे नैतिकता में, चरित्र में एक आदर्श बने।
22.    भारत में विविधता में एकता का प्रचार-प्रसार करना। अलग जाति अलग भाषा अलग पन्थ अलग वेश फिर भी अपना एक देश का प्रचार करना।
23.    अपने समूह में, कार्यालयों में, कर पत्रकों द्वारा व अन्य प्रकार से भारतीय विचारों का प्रचार-प्रसार करना।
24.    कैरियर काउंसिल आयोजित करके युवाओं में देश प्रेम, समाज सेवा, नैतिक जीवन मूल्य, छुआछूत मुक्ति (जाति भेद नहीं), ’’अपने पंथ चलों दूसरों का आदर करो’’ का भाव विकसित करना।
25.    युवाआंे में यह भाव भरना कि
“ We can do ” हम कर सकते हैं अर्थात हम देश के लिये कुछ कर सकते हैं, हम देश में परिवर्तन ला सकते हैं। इससे हम उस अच्छे परिवर्तन के हीरो बनेंगे।
26.    अपराधियों को कैसे पहचाने, विद्यार्थियों व युवाओं को बतायें।
27.    मादक पदार्थों की बिक्री के स्थानों पर नजर रखें, कौन बेच रहा है? कौन खरीद रहा है?
28.    बस व रेल में यात्रा करते समय आस-पास नजर रखें। कोई संदिग्ध गतिविधि हो तो तुरंत रेल, पुलिस को सूचित करें।
29.    अपने आस-पास यदि विस्फोटक पदार्थ बनते हैं तो किस काम आ रहे हैं, उस पर नजर रखें। विस्फोटकों का गलत उपयोग तो नहीं हो रहा है !
30.    छुआछूत पाप व अपराध है, घर मन्दिर, कुआ, तालाब व मन को छुआछूत से मुक्ति का अभियान चलायें।
31.    लव एण्ड लिव डेली विद मदरलैण्ड


1-                                                                          “love and live daily with motherland””””
    भारत माॅं को प्रतिदिन प्यार करना एवं प्रतिदिन उसके साथ जीना
32.    हमारा मोहल्ला, हमारी सोसायटी, हमारा गांव यह एकता का भाव, संगठन का भाव विकसित करें।
33.    चीन ने तिब्बत हड़प लिया, कैलाश मानसरोवर पराया होगया, हिमालय में तेजी से पांव पसार रहा है। माल से घर घर में घुस रहा है। चीनी माल के साथ नहीं जीना। आजाद तिब्बत का प्रसार करना।
34.    पाकिस्तान के कब्जे वाले भारत (जम्मू कश्मीर) को वापिस लेने का जन-जन में संकल्प कराना।