बुधवार, 25 सितंबर 2013

राष्ट्र ही प्रथम और राष्ट्र ही अन्तिम- इन्द्रेश कुमार



- अरविन्द सिसौदिया,कोटा

युवा संगम कार्यक्रम
दो संकल्प लो,गरीब से प्यार करो और देश से प्यार करो

कोटा 25 सितम्बर। भारत की युवा शक्ति का लक्ष्य ‘‘राष्ट्र ही प्रथम-राष्ट्र ही अंतिम’’ होना चाहिए। ताकि हम अपने देश की सुरक्षा, उन्नति और स्वालम्बन के साथ-साथ विश्व सभ्यता को सुसंस्कार और मानवता से परिपूर्ण कर सकें। यह विचार युवाओं को प्रेरक सम्बोधन करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय विचारक एवं प्रखर वक्ता इन्द्रेश कुमार ने, ‘‘युवा संगम ’’ कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के तौर पर सम्बोधित करते हुए कहे।
यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानन्द जी की 150 वीं जयन्ति वर्ष पर आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की श्रंखला में ‘‘युवा आयाम’’ द्वारा आयोजित किया गया। आयोजन कर्ता स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह समीति, कोटा महानगर के तत्वाधान में श्रीराम रंगमंच दशहरा मैदान, कोटा में सायं 5.00 बजे प्रारंभ हुआ।
इन्द्रेश कुमार ने अपना प्रेरक उद्बोधन छोटे-छोटे उद्धरणों के रूप में बोला जिससे कार्यक्रम स्थल बार-बार तालीयों से गुंजायमान होता रहा। उन्होंने राष्ट्र प्रेम का संदेश देते हुए कहा कि अच्छे डाॅक्टर बनो, अच्छे इंजीनियर बनो, अच्छे चार्टेड एकाउन्टेट बनो लेकिन साथ ही एक अच्छे नागरिक भी बनो, राष्ट्र भक्त बनो, राष्ट्र के साथ जीना सीखो, राष्ट्र की समस्याओं से जुडो और उनका निदान करने वाले सक्षम पुरूषार्थी बनो।
इन्द्रेश कुमार ने कहा ‘‘ केवल कैरियरीस्ट होने वालों को कोई नहीं जानता, लेकिन जो राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे हमारे समाज जीवन के अनुकरणीय चरित्र होते हैं। उनके चरित्र से शिक्षा ली जाती है और दी जाती है। इसी कारण हमारी दीवारों पर नेताजी
सुभाष चन्द्र बोस, रानी लक्ष्मी बाई, चन्द्र शेखर आजाद, भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक के चित्र होते हैं। उन्होने कहा समाज जीवन में जो राष्ट्र के लिये जीता है , समाज के लिये जीता है, देश और समाज उसी को याद रखता है अपने लिये जीने वालों को कोई पहचानता तक नहीं है। जरूरत इस बात कि है कि अपने लिये जीते हुये भी देश और समाज के लिये भी साथ - साथ जियें।
    उन्होंने बेटीयों को बचाने का आव्हान करते हुए कहा कि बेटी होगी तो ही , बहन एवं मां होगी और तभी भगवान की बनाई यह सृष्टि चलेगी। इसलिए समाज को इस ओर अधिक से अधिक ध्यान देना चाहिए।
इन्द्रेश कुमार ने कहा पाश्चात्य सभ्यता में भोग विलास की अतिव्याप्त है, भौतिकवाद के कारण दुखः और तनाव भरा हुआ है इसलिये वह त्याज्य है । वहीं भारतीय संस्कृति में आर्दश समाज व्यवस्था और आत्म नियंत्रण की प्रवृति से संतोष की असीम अनुभूति है जो सभी सुखों की जननी है।
उन्होने कहा स्वामी विवेकानन्दजी ने कहा था विश्व में मानवता की हाॅनी होगी, अधर्म सिर उठायेगा, अनाचार - अत्याचार बढ़ेंगे और हिंसा तथा आराजकता भी फैलेगी तब उसे समाप्त करने का, नियंत्रण में लेंने का काम हमारी भारतीय सभ्यता के लोगों को ही करना होगा, सुसंस्कारों से असभ्यता को पराजित कर विश्व में सुसभ्य संस्कृति को स्थापित कर मानव सभ्यता का सुख सम्बर्द्धन करना होगा। यही भारतमाता को परम वैभव पर आरूण करना है।
उन्होने कहा कंजूस बनों मगर नफरत करने में कुजूस बनों और खूब लुटाओं मुस्कुराहटों को, खुद भी हंसो और दूसरों को भी हंसाओे, यही जीवन संगीत है।
इन्द्रेशजी ने कहा भारतीय संस्कृति देने में विश्वास करती है, जो देता है वह हमेशा सुखी और आत्म बल से लबालब रहता है। उन्होन सभी युवाओं से हाथ करके दो दान मांगे , गरीब से प्यार करो और देश से प्यार करो।

अपने उद्बोधन के अंत में युवाओं को दो संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रण ले कि हम इस दिपावली पर कम से कम एक गरीब परिवार के साथ उत्सव मनायेंगे। उसके घर मिठाई का डिब्बा, नये कपड़े, मोमबत्ती आतिशबाजी और नया बर्तन लेकर जायेंगे और उनके साथ त्योहार मनायेंगे। गरीब की मुस्कुराहट में ईश्वर का वास होता है। उन्होंने दूसरा संकल्प दिलाते हुए कहा कि हम प्रतिदिन सुबह उठते से ही मातृ भमि से प्रेम करेंगे और मातु भमि के लिए जीना सिखेंगे। हम मातृ भमि से अन्न-जल पाते हैं और जीवन जीते हैं, इस लिए अपने आप को इसके साथ आत्मसात करते हुए तेरा सम्मान-मेरा सम्मान, तेरा वैभव-मेरा वैभव की भावना से जुडेंगे। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी धार्मिक कार्यक्रम करें। मन्दिर में जाये ंतो अपनी मनौतीयों के साथ-साथ एक मनौती राष्ट्र हित की भी अवश्य मांगे।
    इन्द्रेश कुमार जी ने कहा ‘‘ लव फोर पुवर, लव फोर नेशन’’ और ‘‘नेशन इज फस्र्ट एण्ड नेशन इज लास्ट।’’ और उन्होंने अंत में युवाओं को आव्हान किया कि कुराज नहीं सुराज बनाओ।
   
कार्यक्रम संयोजक अमित सक्सेना ने मंचासीन अतिथियों का परिचय करवाया। मंच पर मुख्य अतिथी उद्योगपति सचिन झा, समीति के प्रांत सहसंयोजक जटा शंकर शर्मा तथा महानगर संयोजक महेश शर्मा भी थे। अतिथियों का स्वागत समिति के विभाग संयोजक त्रिलोकचन्द डूंगरवाल एवं महानगर सह संयोजक बसन्तीलाल शर्मा ने किया। मंच संचालन श्रीमती श्वेता जैन ने किया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में युवा, युवतीयों, छात्र-छात्राओं सहित बुद्धिजीवी वर्ग ने भाग लिया।

प्रेषक:-
अरविन्द सिसौदिया, साहित्य प्रमुख, 09414180151
स्वामी विवेकानन्द सार्द्ध शती समारोह समिति, कोटा महानगर।
पता - बेकरी के सामनें, राधाकृष्ण मंदिर रोड़,
डडवाडा, कोटा जं (राजस्थान)

संघ प्रमुख को फंसानें की कांग्रेसी साजिश बेनकाव



संघ प्रमुख को फंसानें की की कांग्रेसी साजिश बेनकाव
अपनी और पराई सरकार होने का यही फर्क होता है,ये साफ नजर आनें लगा कि सोनियां गांधी इस देश में ईसाईयत की स्थापना और उसे तेजी से फैलानें के लिये काम कर रहीं हैं और 
जो भी उनकी राह की बाधा है उसे फंसां कर जेल में डालने का काम कर रहीं हैं।, यह काम कोई विदेशी ही कर सकता है। स्वदेशी इस तरह के घ्रणित और गलत काम नहीं कर सकता । कांग्रेस अब परोक्ष रूप से विदेशियों के हित साधनें की पार्टी बन गई है। सच्चे देशवासियों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार कर रहीं है।

अजमेर ब्लास्ट: 'कांग्रेस नेताओं ने संघ का नाम लेने को कहा'
आईबीएन-7 | Sep 25, 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/108720/12

नई दिल्ली। अजमेर धमाके के आरोपी भावेश पटेल ने कांग्रेस के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सूत्रों की मानें तो भावेश पटेल ने एनआईए की स्पेशल कोर्ट को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में भावेश पटेल ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और कांग्रेस के चार नेताओं ने उस पर अजमेर धमाके के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ नेता इंद्रेश कुमार का नाम लेने के लिए दबाव डाला था।
भावेश ने कोर्ट को ये भी लिखा है कि उसने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से भी मुलाकात की थी। भावेश के इस आरोप को एनआईए ने सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं आईबीएन7 संवाददाता अरुण सिंह से बातचीत में कांग्रेस नेता दिग्विजय ने कहा है कि वो कभी अजमेर धमाके के आरोपी भावेश से नहीं मिले।
दिग्विजय ने कहा कि आश्चर्य है कि मीडिया एक ब्लास्ट केस के आरोपी के बयान को इतजा जोर दे रहा है। भावेश पटेल से मै कभी नहीं मिला, न जानता हूं। उसने स्वीकार किया है कि वो बम ब्लास्ट का आरोपी है। ये भी जांच का विषय है कि उसने पात्र लिखा है या किसी और ने। NIA को ये भी जांच करनी चाहिए के 164 के बयान के बाद वो किस-किस से मिला।
RSS का बयान
वहीं आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि हम शुरू से ही कह रहे हैं कि हिंदू संगठनों खास तौर पर आरएसएस और इसके नेताओं के खिलाफ साजिश रची जा रही है। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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शिंदे, दिग्विजय ने डाला था भागवत को फंसाने का दबाव: आरोपी
नवभारतटाइम्स.कॉम | Sep 25, 2013,
http://navbharattimes.indiatimes.com/india

नई दिल्ली।। सन् 2007 में अजमेर में हुए बम ब्लास्ट के मुख्य आरोपियों में से एक भावेश पटेल ने केंद्रीय मंत्रियों, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारियों पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। भावेश ने सीबीआई कोर्ट को चिट्ठी लिखकर बताया है कि गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह और दिग्विजय सिंह ने उस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत और आरएसएस के नेता इंद्रेश कुमार को अजमेर ब्लास्ट में फंसाने के लिए दबाव डाला था।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस साल मार्च में गिरफ्तार किए गए पटेल ने कोर्ट को दिए आवेदन में आरोप लगाया है, 'मुरादाबाद के आचार्य प्रमोद कृष्णन ने मेरी मुलाकात दिग्विजय सिंह, शिंदे, जायसवाल और आरपीएन सिंह से करवाई थी। ये सभी लोग चाहते थे कि मैं कोर्ट में आरएसएस के नेताओं को फंसाने वाला बयान दूं।' पटेल के वकील भूपेंद्र सिंह का कहना है कि उनका मुवक्किल गुरुवार को कोर्ट में भी यही बात दोहराएगा। एनआईए ने अपनी चार्जशीट में पटेल पर ब्लास्ट के लिए साजो-सामान उपलब्ध करवाने और बम दरगाह के भीतर ले जाने का आरोप लगाया है।

हालांकि, दिग्विजय सिंह, आचार्य कृष्णन और आरपीएन सिंह ने पटेल के आरोपों को खारिज कर दिया है। दोनों नेताओं का कहना है कि पटेल से मिलना तो दूर उन्होंने उसका नाम भी पहली बार सुन रहे हैं। शिंदे और जायसवाल ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं दी है।
पटेल ने कहा है, 'कृ्ष्णन ने मेरी मुलाकात नवंबर, 2012 में दिग्विजय सिंह से कराई थी। मैंने जब उन्हें अपने केस के बारे में बताया तो दिग्विजय ने मुझसे कहा कि तुम चिंता मत करो। समय आने पर हम जैसा कहें, वैसा करना।' पटेल के मुताबिक इसके बाद कृष्णन ने उसकी मुलाकात जायसवाल और आरपीएन सिंह से करवाई। उसका कहना है कि इन दोनों नेताओं ने बताया कि दिग्विजय सिंह ने उन्हें सारा मामला बता दिया है और अगर वह जैसा कहा गया है वैसा बयान देता है, तो उसे बचा लिया जाएगा।

अजमेर ब्लास्ट के आरोपी का दावा है कि कृष्णन बाद में उसे दिल्ली लेकर गए, जहां शिंदे मौजूद थे। पटेल का दावा है कि शिंदे ने कहा, 'तुम्हे कोर्ट में कहना होगा कि अजमेर ब्लास्ट की साजिश में भागवत और इंद्रेश कुमार शामिल थे और तुमने इनकी साजिश कि हिसाब से धमाके को अंजाम दिया।' पटेल का कहना है कि दबाव के बावजूद मैंने कोर्ट में भागवत या इंद्रेश कुमार का नाम नहीं लिया। इसके बाद एनआईए के ऑफिसरों ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

गौरतलब है कि पटेल अलवर की जेल में बाद था, वहां उसने एनआईए के ऑफिसरों के खिलाफ आमरण अनशन शुरू कर दिया था। तबीयत बिगड़ने के बाद उसे एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसने कोर्ट को चिट्ठी लिखी है।