शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

मोदी को मिलेगा मुसलमानों का समर्थन: संघ

 मोदी को मिलेगा मुसलमानों का समर्थन: संघ








मोदी को मिलेगा मुसलमानों का समर्थन: संघ
September 18, 2013,
http://zeenews.india.com/hindi/news
वाराणसी : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए गए नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 में होने वाले आम चुनाव में देश के मुसलमानों का जोरदार समर्थन मिलेगा, जिससे उनके सुनहरे भविष्य का सपना आसानी से साकार हो सकता है।

संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने बुधवार को वाराणसी में बातचीत के दौरान यह बात कही। वह दो दिवसीय प्रवास पर वाराणसी पहुंचे हुए हैं। उन्होंने कहा, `अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनिया भर की बड़ी ताकतों ने मोदी की छवि खराब करने के लिए पुरजोर कोशिश की, लेकिन उनकी लोकप्रियता व सुशासन छवि के कारण वे भी कुछ नहीं कर पाए।`

क्या मोदी को मुसलमानों का समर्थन मिलेगा, इस सवाल पर इंद्रेश ने कहा कि सच्चा मुसलमान ऐसा राज चाहता है जिसमें सुरक्षा व विकास हो, जाति-मजहब के नाम पर भेद-भाव न हो। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने पिछले 60 वर्षों से कांग्रेस व अन्य दलों को परखकर देखा है, लेकिन उन्हें शक के नजरिए से आज भी देखा जा रहा है। इसलिए देश भर में दर्जनों स्थानों पर रक्षाबंधन उत्सव पर मुस्लिम महिलाओं ने मोदी को राखी भेजी और पुरुषों ने विश्वास जताया।

इंद्रेश के मुताबिक वाराणसी में तो मुस्लिम महिलाओं ने मोदी के चित्र में अपने भैया का रूप मानकर उन्हें राखी बांधी। मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित होने पर गुजरात समेत देश के सैकड़ों स्थानों पर मुसलमानों ने खुशियां मनाई। संघ नेता ने कहा कि देशभर के मुसलमानों को नई रोशनी और एक नए पैगाम की तलाश है। देश का मुसलमान हिन्दुस्तान में अपना भविष्य खोज रहा है और उनके सुनहरे भविष्य का सपना नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पूरा हो सकता है। (एजेंसी)
First Published: Wednesday, September 18, 2013, 18:11

संघ ने मोदी पर कभी वीटो नहीं लगाया : इन्द्रेश कुमार

 RSS ने मोदी पर कभी वीटो नहीं लगाया : इंद्रेश








संघ ने मोदी पर कभी वीटो नहीं लगाया : इन्द्रेश कुमार
Saturday, September 14, 2013
http://zeenews.india.com/hindi/news
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ थिंक टैंक इंद्रेश कुमार से ज़ी रीज़नल चैनल्स के संपादक वासिंद्र मिश्र ने भाजपा-संघ के रिश्ते, हिन्दुत्व, नरेंद्र मोदी की पीएम पद की उम्मीदवारी आदि मुद्दों पर लंबी बातचीत की। पेश है सियासत की बात में उसके कुछ प्रमुख अंश।
RSS ने मोदी पर कभी वीटो नहीं लगाया : इंद्रेश
वासिंद्र मिश्र : नमस्कार, हमारे साथ हैं खास मेहमान इंद्रेश जी, इंद्रेश जी का सरोकार संघ परिवार से है, संघ के सीनियर मोस्ट अधिकारियों में से एक हैं। इनकी सबसे बड़ी पहचान है कि इन्होंने लगभग 10 वर्षों से अल्पसंख्यक समाज को संघ से जोड़ने के लिए बहुत बड़ा आंदोलन चला रखा है, इसमें काफी हद तक कामयाबी देखने को मिली है। आज हम इंद्रेश जी से ये जानने की कोशिश करेंगे, पिछले 10 सालों से इन्होंने जो आंदोलन चला रखा है, जिसको ये आगे बढ़ा रहे हैं, ये किस वजह से है? क्योंकि संघ के बारे में एक आम धारणा है संघ बहुसंख्यक समाज की बात करता है, हिन्दुत्व की बात करता है, तो ऐसे में अगर वो संगठन के जरिए अल्पसंख्यकों की बात करता है तो इसके पीछे क्या कारण हैं?

इंद्रेश कुमार : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूलत: ये मानना रहा है कि जो इस देश के तथाकथित अल्पसंख्यक माने जाते हैं, वो ईश्वर से पूर्वजों से, देश से, जाति-उपजाति से, भाषाओं से, पंराम्पराओं से 99 फीसदी मूल रूप से भारतीय हैं। बाहर से लोग आये लोगों ने उनमें कन्वर्जन किया, उसमें उन्होंने प्रवेश किया इसलिए केवल पूजा पद्धति बदली है, बाकी चीजें भारतीय रूप में ही हैं। दूसरी बात संघ का साफ चिंतन रहा है, जब आप हिन्दुत्व कहते हैं तो ये कोई पंथ या अवधारणा नहीं है, Religious conotation नहीं है, ये एक राष्ट्रीय और जीवन पद्धति की अवधारणा है। जैसे भारत से भारतीय है, हिन्दुस्तान से हिन्दु है। आज हिन्दु समाज के अंदर भी अनेक तरह की पूजा पद्धतियां हैं, जो हिन्दू समाज में हैं। कुछ पूजा पद्धतियां समय-समय पर बदलती रहती हैं। हमारी सोच धर्म से जुड़ी नहीं है, हमारी सोच एक मानवीय राष्ट्रीय अवधारणा है। इसलिए राष्ट्र के रूप में जब हम कहते हैं हिन्दु तो इसमें किसी को कोई संकोच नहीं लगता।

वासिंद्र मिश्र : संघ को शुरूआती दौर में समरसता, समन्वय बनाने में दिक्कतें आईं और इसमें कई साल लग गए। ऐसे में पिछले 10 साल से आप जो मुहिम चला रहे हैं, उस समाज के लोगों के बीच आपको दिक्कत नहीं हुई, अपनी बात पहुंचाने में....

इंद्रेश कुमार : मुझे कभी भी इस बात की कठिनाई महसूस नहीं हुई। इसका एक मूल कारण है, जब मैं जम्मू कश्मीर में संघ के प्रचारक के रूप में था, मेरा मुस्लिम लोगों से व्यक्तिगत और सामूहिक रूप में वार्ता और संवाद बहुत बड़े पैमाने पर हुआ। मैंने एक बार उनसे प्रश्न किया था कि इस मस्जिद, दरगाह में मैं इबादत करना चाहूं, इंद्रेश कुमार के नाते तो मैं कर सकता हूं या नहीं? अगर पंथीय विचार से देखें तो मैं सनातनी हूं, नाम से विचार करना है तो मैं भारतीय हूं, हिन्दु हूं और मेरी भाषा-बोली भी हिन्दुस्तानी है तो क्या मैं इबादत कर सकता हूं? मेरी प्रार्थना को प्रभु या खुदा स्वीकार करेगा या नहीं? इस चर्चा के दौरान में ये बात सामने आई कि कुरान पाक में भी लिखा है रब उल आलमी, रब उल मुस्मिल नहीं लिखा। ऐसे में जब वो आलमीन है तो मैं भी उसके आलम में आता हूं। दूसरा सवाल ये कि क्या मालिक एक दो ही जुबान जानता है? जवाब मिला कि मालिक उस बेजुबान की भी जुबान जानता है, कीट पंतग, पेड़ पौधों, और पत्थर की भी जुबान जानता है। उसका भी कल्याण करता है। ऐसे में वो एक जुबान सुनेगा और दूसरी नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है? जैसे इस्लाम में भी अरब वाला अरबी में बोलता है तुर्किस्तान वाला तुर्की में बोलता है, ईरान और इराक वाला फारसी में बोलता है, हिन्दुस्तान में उर्दु में बोलते है, ये सब जुबानों में बोलते है ये सब अलग-अलग हैं। उसी मालिक के लिए कोई अल्हा, कोई तारिक, कोई खुदा कहता है, कोई रब कहता है ऐसे ही हम उसे भगवान ईश्वर, परमेश्वर कहते हैं। उस वक्त जब ये संवाद हुआ तो उन्होंने बड़े विश्वास से कहा, जो आपकी मानवीय, राष्ट्रीय सोच है, इससे आप यहां इबादत भी कर सकते है और वो इसे स्वीकार भी करेगा क्योंकि आपके मन में मूल रूप से भारत की वो संस्कृति है सर्वे भवन्तु सुखिन..सर्वे संतु निरामया...जिसको इस्लाम के अंदर लाकुम दिनकुम वालेयकुम कहा गया है। अपने-अपने दीन पर चलो, एक दूसरे के दीन में दखल मत दो बल्कि अपने पर चलो और दूसरे का सम्मान करो तो भाईचारा है। भारतीय संस्कृति मूल रूप से यही है, इसलिए हम मानते हैं कि भारत एक ऐसा देश है, भारत एक समाज ऐसा है, भारतीयता एक ऐसी संस्कृति है जिसमें विश्व के सब मत, पंथों के लोग समानता के साथ जी सकते हैं। जिसके बारे में रसूल साहब ने कहा मुझे हिन्दुस्तान से सुकून की हवा आती है, इसलिए मैं मुस्लमानों के बीच जाकर कहता हूं जिस हिन्दुस्तान से जिस हिन्दुस्तान के लोगों से, कौम से, जिसकी संस्कृति से रसूल साहब को ठंडी हवा आती है, वो मुझे और आप को नफरत की हवा कैसे दे सकता है। इसलिए मुझे लगा कि ऐसी कोई कठिनाई नहीं है।

वासिंद्र मिश्र : आपके बयान अखबारों में पढ़े हैं कि मुसलमानों और अल्पसंख्यकों को महज वोट बैंक के रूप में नहीं देखना चाहिए, लेकिन ये जो धारणा है, ये सोच है, ये सिर्फ कांग्रेस और बाकी राजनैतिक दलों में ही नहीं है, ये भारतीय जनता पार्टी में भी देखने को मिला है। जब अटल जी प्राइम मिनिस्टर थे और उसके बाद चुनाव हुआ, तो रातों रात एक संगठन खड़ा किया गया और उस संगठन से पूरे देश में बस से कौमी एकता की यात्रा निकाली गई थी, उनमें कुछ चुनिंदा शायर और कुछ मौलवी भी थे। ये अलग बात है कि उस चुनाव में बीजेपी को कामयाबी नहीं मिली और कांग्रेस आ गई लेकिन ये काम भारतीय जनता पार्टी ने भी करने की कोशिश की थी दूसरा भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने संगठन के अंदर एक अल्पसंख्यक मोर्चा बना रखा है तो अगर वो मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में नहीं देखते तो सिर्फ चुनाव के वक्त मुसलमान क्यों याद आते हैं? चुनाव के समय ही ऐसे मोर्चे क्यों सक्रिय हो जाते हैं? जो आपका प्रयास है उसमें आपको नहीं लगता है कि इसका राजनैतिक लाभ भारतीय जनता पार्टी उठा सकती है?

इंद्रेश कुमार : हम तो समाज के अंदर एक अच्छे नागरिक की पहचान स्थापित करते हैं। लोकतंत्र के अंदर हर नागरिक अपने विचार, अपने नेता और दल को जानकर वोट करता है। इसका लाभ कौन उठाएगा, इसका फैसला तो राजनैतिक दलों को करना है। मुझसे कश्मीर में मिस्टर खांडेकर, जो पहले डीएम थे और बाद में प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे, उन्होंने पूछा था कि संघ का मुसलमान के बारे में नजरिया क्या है, मैंने कहा अगर मुझे गैर सियासी रूप से बोलना है तो संघ इस देश में मुसलमान को भारतीय हिन्दु नागरिक के रूप में मानता है और वो इंसान मानता है जिसे बेचे और खरीदे नहीं जा सकते है। ये कोई गुलामी की परंपरा और प्रथा का देश नहीं है। राजनैतिक दल मुस्लिमों को वोट मानते हैं, वोट की फिर खरीद-फरोख्त करते है, उसी का परिणाम है कि 60 वर्षों के बाद भी उनका पिछड़ापन, अनपढ़ता तमाम सुविधाएं मिलने के बाद भी दूर नहीं हुई हैं। इसलिए संघ का सुनिश्चित मत है और मैं इसे कहता भी हूं कि मुसलमानों को वोट बैंक के तौर पर ना लें, वो इस देश के ऐसे ही नागरिक हैं। सारा समाज इस देश का नागरिक है। एक बात और है कि वो मक्का मदीना जाते हैं, हज के लिए जातें हैं क्योंकि उससे जन्नत नसीब होगी लेकिन जब उन्हें जिंदाबाद बोलना होगा तो वो जिंदाबाद अरब नहीं बोलेंगे, वो जिंदाबाद हिंदुस्तान हीं बोलेंगे। जब उन्हें आजादी और इज्जत के लिए सर कटवाना होगा तो अरब के लिए नहीं हिन्दुस्तान के लिए कटवाएंगे। इसीलिए उन्हें सिर्फ वोट बैंक नहीं मानना चाहिए, वो हिन्दुस्तान की मूल ताकत हैं। लोकतंत्र में प्रजा राजा होती है और प्रजा जिनको चुनकर भेजती है और जो प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त होते हैं वो सेवक होते हैं। परन्तु डेमोक्रेसी के अंदर प्रजा सेवक हो गई और जो चुन के जाते हैं और जो नियुक्त होते हैं, नौकरियों के लिए, वो राजा बन गए हैं। लोकतंत्र में इस धारणा को बदलने की जरूरत है।
वासिंद्र मिश्र : संघ और संघ से जुड़े लाखों-करोड़ों कार्यकर्ता अपनी पूरी पूरी जिन्दगी समर्पित कर देते हैं, समाज को अच्छा बनाने में, समाज में एक अच्छा नागरिक बनाने में, लेकिन संघ के ही कुछ आनुवांशिक संगठन हैं, जो संघ से ही ऊर्जा लेते हैं, मार्गदर्शन लेते हैं लेकिन जब उनके पास सत्ता आती है तो संघ के सिद्धांतों को, उसूलों को भूल जाते हैं। इसके लिए आप लोग पुनर्विचार या कोई मंथन कर रहे हैं?

इंद्रेश कुमार : ऐसा है कि अभी तक हमारे ऐसे कोई अनुभव नहीं हैं । चाहे राजनीतिक क्षेत्र हो, मजदूरी का क्षेत्र हो, किसान हो, विद्यार्थी हो, धार्मिक क्षेत्र हो जहां संघ से ऊर्जा लिए हुए, सिद्धांतों से भटकते हुए बहुत नज़र आए हैं और सामान्यतया हमें ये लगता है कि जो वो ऊर्जा लेते हैं, उसके अनुरूप कभी सफल होते हैं और कभी असफल होते हैं। ये तो हो सकता है और जब आदमी मैदान में जाएगा, तब उसके अंदर इस तरह के परिणाम आएंगे। परन्तु अभी हमारे साथ ऐसा नहीं हुआ है कि ऊर्जा लेने के बाद वो रास्ते से भटक जाते हैं। अभी तक तो लगभग ऐसा दिखता है कि संगठन के हिसाब से सब लोग पथ से चल रहे हैं। बीच-बीच में किसी के मन में कोई प्रयोग आता होगा तो वो उसको करता है। प्रयोग करने के बाद आज एक बात जरूर है कि कहीं ना कहीं समाज में ऐसी राजनीतिक शक्तियां, प्रशासनिक शक्तियां हैं और उनको मीडिया के अंदर से भी लोग मिलते हैं जो ये चाहते हैं कि संघ के अंदर का टकराव, संघ के अंदर की दूरियों को अधिक से अधिक उछालने की कोशिश की जाए। बात का बतंगड़ बनाने का एक फैशन मैंने पिछले 40-50 सालों में देखा है।
RSS ने मोदी पर कभी वीटो नहीं लगाया : इंद्रेश

वासिंद्र मिश्र : नहीं, लेकिन इधर पिछले 10-12 वर्षों में आपको नहीं लगता है कि संघ कल्चरल कार्यों से ज्यादा राजनीतिक गतिविधियों की वजह से चर्चा में है?

इंद्रेश कुमार : ऐसा है कि आज मीडिया और बाकी सब लोगों को लगता है कि संघ की केवल पॉलिटिकल चर्चा करो। संघ जब अपने सेवाकार्य बताता है, तो उसके डेढ़ लाख सेवाकार्य हैं। संघ से प्रेरणा लेकर आज समाज के अंदर चलने वाले 30 हजार से ज्यादा शैक्षिक संस्थाएं हैं, संघ के लाखों कार्यकर्ता, करोड़ों लोगों के समाज से छुआछूत को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। संघ उन विदेशी लोगों के खिलाफ भी काम करता है जो मतांतरण के जरिए देश में अश्रद्धा निर्माण करने का काम करते हैं। मतान्तरण भगवान के विरुद्ध किया गया पाप और अपराध होता है, जो कुछ दिया भगवान ने दिया उसको बदलना और बदलवाना किसी भी रूप में ईश्वरीय नहीं हो सकता है। संघ राजनैतिक नहीं हुआ है। लगता है समाज के अंदर प्रस्तुत करने वाले जो नेता और मीडिया के लोग हैं उनका चश्मा केवल पॉलिटिकल रह गया है। मैं आपके जरिए नेताओं और मीडिया से प्रार्थना करूंगा कि संघ को बहुआयामी संगठन और विचार के रूप में देखें।

वासिंद्र मिश्र : साफतौर पर दिखाई दे रहा है कि संघ एक्स्ट्रा कॉन्स्टीट्यूशनल अथॉरिटी के रूप में भाजपा पर दवाब डाल रहा है, इसको आप कितना मुनासिब समझते हैं।

इंद्रेश कुमार : ऐसा है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ एक्स्ट्रा कॉन्स्टीच्यूशनल अथॉरिटी है ही नहीं, क्योंकि संघ एक कर्तव्य से ओतप्रोत संगठन है। अधिकारों से ओतप्रोत संस्था नहीं है। यहां अधिकार की चर्चा नहीं होती, कर्तव्य की होती है। इसलिए पहली बात तो आपके द्वारा मैं ये स्पष्ट करवाना चाहूंगा कि संघ राइट बेस्ड ऑर्गनाइजेशन नहीं है, ड्यूटी बेस्ड ऑर्गनाइजेशन है। दूसरी बात ये है कि आपके प्रश्न से एक बात बहुत अच्छी तरह से झलकती है, कि संघ के अंदर पूर्णतया लोकतंत्र है, इसलिए सहज सरल कमरे के अंदर या बाहर अगर कहीं ठीक या गलत की चर्चा हुई भी तो उसके कारण पार्टियां टूटती और बिखरती नहीं है। उसके कारण मतभेद आकर मनभेद नहीं बनते। बल्कि स्वस्थ आलोचना की वजह से सब सुधरते और संभलते हैं।

वासिंद्र मिश्र : लेकिन नरेन्द्र मोदी के नाम पर इतना वीटो क्यों लगाया गया संघ की तरफ से?

इंद्रेश कुमार : संघ ने कोई वीटो नहीं किया है, इसे वीटो के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है। सच तो ये है कि जनता लोकसभा चुनाव में 12-15 नाम लेकर आगे बढ़ रही है, उसमें राहुल गांधी भी हैं, सोनिया गांधी भी हैं, चिदंबरम भी हैं, मनमोहन सिंह भी हैं, उसमें नरेन्द्र मोदी भी हैं, आडवाणी जी भी हैं, उसमें नीतीश कुमार भी हैं, मुलायम सिंह भी हैं, सुषमा जी भी हैं। जनता ने ऐसे सब नामों को चुनने के बाद अपना मत व्यक्त करना शुरू किया है। मत व्यक्त क्या है? वो केवल बोल रही है उसके मत का आज मीडिया अध्ययन कर रहा है। और फिर वो बताता है कि फर्स्ट रनर मोदी है, तो ये जो फर्स्ट रनर मोदी हैं वो देश को बता कौन रहा है। मीडिया, इसका वोटिंग कौन कर रहा है, अज्ञात रूप से जनता कर रही है। हर दल की कर रही है, हर भाषा की कर रही है, हर जाति की कर रही है, हर धर्म पंथ की कर रही है। अब मैं ये सोचता हूं कि मीडिया गलत नहीं दिखा रहा है और जनता गलत वोट नहीं कर रही है।

वासिंद्र मिश्र : इंद्रेश जी एक और धारणा है, जो लोग संघ की कार्यप्रणाली से परिचित नहीं हैं उनके मन में यह बात ज्यादा आती है कि संघ 15-20 साल पहले से तैयारी करता है। अपने कार्ययोजना के मुताबिक व्यक्तित्व निर्माण करता है। आप जो दायित्व इस वक्त निभा रहे हैं, अल्पसंख्यकों को संघ से जोड़ने का और संघ के जरिये भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्थन जुटाने का, इसके पीछे कहीं नरेन्द्र मोदी के बारे में जो एक उनकी छवि बनी हुई है कि वो अल्पसंख्यक विरोधी हैं, उस छवि को खत्म करना...

इंद्रेश कुमार : ऐसा है कि आपका प्रश्न स्वयं में एक गलत अवधारणा का जन्म है। जब प्रश्न गलत होगा तो उसका सही उत्तर खोजने में कठिनाई होगी। इस देश के अंदर जाति, पंथ, भाषा और दलों के नाम पर वैमनस्य हो गया है। आज देश में भ्रष्टाचार, बलात्कार अपराध, प्रदूषण, बढ़ती महंगाई, असुरक्षा का प्रतीक हो गया है। समाज मूल रूप से समरस और एकात्म रहे, क्योंकि स्वामी विवेकानन्द ने 120 वर्ष पूर्व इस बात को स्थापित किया था कि अगर विश्व मंगल का, विश्व शांति का, विश्वबंधुत्व का कोई भी मार्ग है तो वो भारत से है, भारतीयों से है, भारतीय संस्कृति से है। इसे विश्व ने स्वीकार किया था। ऐसा हिन्दुस्तान बनाने के लिए हमारे ये प्रयत्न हैं। और इन प्रयत्नों में बहुत अच्छी सफलता मिल रही है। लाखों मुसलमानों ने भी ये बात बहुत साफ-साफ कहा है कि अब वो वाया मीडिया या वाया पॉलिटिकल लीडर संघ से संवाद नहीं करते। उनका कहना है सब तथाकथित सेकुलरिज्म के मॉडल हैं, पर सुपर सेकुलरिज्म, नेशनलिज्म और ह्यूमिनिज्म का मॉडल संघ है, इसलिए हम संघ से सीधा संवाद करते हैं।

वासिंद्र मिश्र : अभी तक कोई बड़ा मौलवी या कोई बड़ा नाम मुसलमानों की तरफ से कोई है जो.....

इंद्रेश कुमार : अखिल भारतीय इमाम ऑर्गनाईजेशन के प्रेसिडेंट थे मौलाना जमील इलियासी, अब उनके बेटे उमेर इलियासी हैं, ऐसे ही अजमेर शरीफ के खादिम हैं, कल्बे सादिक शिया मुसलमानों में से, बरेलवी संप्रदाय से अली मियां हैं, निजामुद्दीन के प्रमुख हैं मुफ्ती मुकर्रम, फतेहपुरी मस्जिद के इमामियत में एक बड़े श्रेष्ठ इमाम माने जाते हैं, इन सबसे संवाद होते हैं, मैं देवबंद भी गया था जब बड़े मौलाना मदनी साहब थे मेरी उनसे भी वार्ता हुई थी। वार्ता में मैंने कहा था कि इस हिंदुस्तान को आप एक चीज से मुक्त करवाने का काम करिए, मैं भी उसमें आपकी मदद करुंगा और वो ये कि आज कहीं भी कोई मुस्लिम मोहल्ला दिखता है तो लोग आते-जाते कह देते हैं कि ये मिनी पाकिस्तान है। इस हिंदुस्तान की हर ईंच हिंदुस्तान ही है, जब उसे मिनी पाकिस्तान कहता है तो आपको इसे स्वीकार नहीं करना चाहिए, पलटकर कहना चाहिए कि नहीं हमारा मोहल्ला हिंदुस्तान था, हिंदुस्तान है और हिंदुस्तान रहेगा, ये मिनी पाकिस्तान नहीं है। आप इसपर फतवा देकर करेंगे या भाषण देकर करेंगे या विचार फैलाकर करेंगे, परंतु ये बात स्थापित होनी चाहिए। इस देश के अंदर इन सब बातों के अंदर से मुझे ये लगता है कि एक सफल कथा लिखी जा रही है और मुझे लगता है कि आगे भी लिखी जाएगी।

वासिंद्र मिश्र : बहुत बहुत धन्यवाद हमारे चैनल से बात करने के लिए।
इंद्रेश कुमार : मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत बधाई।
First Published: Saturday, September 14, 2013, 23:18

Shaheed Bhagat Singh:Most prominent faces of Indian freedom



Shaheed Bhagat Singh Biography
Born: September 27, 1907 { Wikipedia September 28, 1907}
Martyrdom: March 23, 1931
http://www.iloveindia.com/indian-heroes/bhagat-singh.html
Achievements: Gave a new direction to revolutionary movement in India, formed 'Naujavan Bharat Sabha' to spread the message of revolution in Punjab, formed 'Hindustan Samajvadi Prajatantra Sangha' along with Chandrasekhar Azad to establish a republic in India, assassinated police official Saunders to avenge the death of Lala Lajpat Rai, dropped bomb in Central Legislative Assembly along with Batukeshwar Dutt.

Bhagat Singh was one of the most prominent faces of Indian freedom struggle. He was a revolutionary ahead of his times. By Revolution he meant that the present order of things, which is based on manifest injustice must change. Bhagat Singh studied the European revolutionary movement and was greatly attracted towards socialism. He realised that the overthrow of British rule should be accompanied by the socialist reconstruction of Indian society and for this political power must be seized by the workers.

Though portrayed as a terrorist by the British, Sardar Bhagat Singh was critical of the individual terrorism which was prevalent among the revolutionary youth of his time and called for mass mobilization. Bhagat Singh gave a new direction to the revolutionary movement in India. He differed from his predecessors on two counts. Firstly, he accepted the logic of atheism and publicly proclaimed it. Secondly, until then revolutionaries had no conception of post-independence society. Their immediate goal was destruction of the British Empire and they had no inclination to work out a political alternative. Bhagat Singh, because of his interest in studying and his keen sense of history gave revolutionary movement a goal beyond the elimination of the British. A clarity of vision and determination of purpose distinguished Bhagat Singh from other leaders of the National Movement. He emerged as the only alternative to Gandhi and the Indian National Congress, especially for the youth.

Bhagat Singh was born in a Sikh family in village Khatkar Kalan in Nawanshahar district of Punjab. The district has now been renamed as Shaheed Bhagat Singh Nagar in his memory. He was the third son of Sardar Kishan Singh and Vidyavati. Bhagat Singh's family was actively involved in freedom struggle. His father Kishan Singh and uncle Ajit Singh were members of Ghadr Party founded in the U.S to oust British rule from India. Family atmosphere had a great effect on the mind of young Bhagat Singh and patriotism flowed in his veins from childhood.

While studying at the local D.A.V. School in Lahore, in 1916, young Bhagat Singh came into contact with some well-known political leaders like Lala Lajpat Rai and Ras Bihari Bose. Punjab was politically very charged in those days. In 1919, when Jalianwala Bagh massacre took place, Bhagat Singh was only 12 years old. The massacre deeply disturbed him. On the next day of massacre Bhagat Singh went to Jalianwala Bagh and collected soil from the spot and kept it as a memento for the rest of his life. The massacre strengthened his resolve to drive British out from India.

In response to Mahatma Gandhi's call for non-cooperation against British rule in 1921, Bhagat Singh left his school and actively participated in the movement. In 1922, when Mahatma Gandhi suspended Non-cooperation movement against violence at Chauri-chaura in Gorakhpur, Bhagat was greatly disappointed. His faith in non violence weakened and he came to the conclusion that armed revolution was the only practical way of winning freedom. To continue his studies, Bhagat Singh joined the National College in Lahore, founded by Lala Lajpat Rai. At this college, which was a centre of revolutionary activities, he came into contact with revolutionaries such as Bhagwati Charan, Sukhdev and others.

To avoid early marriage, Bhagat Singh ran away from home and went to Kanpur. Here, he came into contact with a revolutionary named Ganesh Shankar Vidyarthi, and learnt his first lessons as revolutionary. On hearing that his grandmother was ill, Bhagat Singh returned home. He continued his revolutionary activities from his village. He went to Lahore and formed a union of revolutionaries by name 'Naujavan Bharat Sabha'. He started spreading the message of revolution in Punjab. In 1928 he attended a meeting of revolutionaries in Delhi and came into contact with Chandrasekhar Azad. The two formed 'Hindustan Samajvadi Prajatantra Sangha'. Its aim was to establish a republic in India by means of an armed revolution.

In February 1928, a committee from England, called Simon Commission visited India. The purpose of its visit was to decide how much freedom and responsibility could be given to the people of India. But there was no Indian on the committee. This angered Indians and they decided to boycott Simon Commission. While protesting against Simon Commission in Lahore, Lala Lajpat Rai was brutally Lathicharged and later on succumbed to injuries. Bhagat Singh was determined to avenge Lajpat Rai's death by shooting the British official responsible for the killing, Deputy Inspector General Scott. He shot down Assistant Superintendent Saunders instead, mistaking him for Scott. Bhagat Singh had to flee from Lahore to escape death punishment.

Instead of finding the root cause of discontent of Indians, the British government took to more repressive measures. Under the Defense of India Act, it gave more power to the police to arrest persons to stop processions with suspicious movements and actions. The Act brought in the Central Legislative Assembly was defeated by one vote. Even then it was to be passed in the form of an ordinance in the "interest of the public." Bhagat Singh who was in hiding all this while, volunteered to throw a bomb in the Central Legislative Assembly where the meeting to pass the ordinance was being held. It was a carefully laid out plot, not to cause death or injury but to draw the attention of the government, that the modes of its suppression could no more be tolerated. It was decided that Bhagat Singh and Batukeshwar Dutt would court arrest after throwing the bomb.

On April 8, 1929 Bhagat Singh and Batukeshwar Dutt threw bombs in the Central Assembly Hall while the Assembly was in session. The bombs did not hurt anyone. After throwing the bombs, Bhagat Singh and Batukeshwar Dutt, deliberately courted arrest by refusing to run away from the scene. During his trial, Bhagat Singh refused to employ any defence counsel. In jail, he went on hunger strike to protest the inhuman treatment of fellow-political prisoners by jail authorities. On October 7, 1930 Bhagat Singh, Sukh Dev and Raj Guru were awarded death sentence by a special tribunal. Despite great popular pressure and numerous appeals by political leaders of India, Bhagat Singh and his associates were hanged in the early hours of March 23, 1931.

देश में चल रही है भारतीय जनता पार्टी की आंधी : मोदी



देश में चल रही है भारतीय जनता पार्टी की आंधी : मोदी
भोपाल : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस को ललकारा और चेताया भी। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा की आंधी चल रही है, कांग्रेस ने अगर आपातकाल जैसा दमनचक्र चलाया तो देश की जनता उससे एक-एक कर हिसाब चुकता करेगी।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा के 'कार्यकर्ता महाकुंभ' में बुधवार को मोदी ने केंद्र की कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर जमकर हमले किए। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा व लेाकसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारने वाली है, बल्कि उसकी तरफ से तो सीबीआई चुनाव लड़ेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि की भाजपा की आंधी के आगे उसमें चुनाव लड़ने का साहस ही नहीं बचा है।

उन्होंने कांग्रेस को चेताया कि अगर उसने आपातकाल जैसा दमनचक्र चलाया तो उसके नतीजे भी भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि तब जनता ने हिसाब किया था और अब ऐसा हुआ तो देश की जनता चुन-चुनकर हिसाब चुकता करेगी।

केंद्र सरकार पर मोदी ने भाजपा या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से जुड़े दलों की प्रदेश सरकार को परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली सहित गरीबों की योजनाओं का लाभ भी भाजपा शासित राज्यों को नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस इन प्रदेश के लोगों को उनके हक से दूर कर रही है, कांग्रेस को इन प्रदेशों के लोगों के दर्द की चिंता नहीं है, साथ ही सवाल किया कि क्या इन प्रदेशों के लोग हिंदुस्तान के नहीं है? कांग्रेस को हर मामले में राजनीति दिखती है।

मोदी ने महात्मा गांधी की एक इच्छा पूरी न होने का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि हमें गांधी जी की इच्छा को पूरा करना है। उनकी इच्छा थी कि कांग्रेस खत्म हो जाए मगर कांग्रेस के लोगों ने ऐसा नहीं होने दिया है, उनकी इस इच्छा को हम पूरा करेंगे। मोदी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफ की।

भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पहली बार मोदी के साथ मंच पर आए पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सहज नहीं दिखे। उन्हें समाजवादियों से पार्टी के रिश्ते याद आ गए और राजग शासनकाल का जिक्र करने से वे नहीं हिचके।

आडवाणी ने भाजपा से पहले जनसंघ और पार्टी के विपक्षी दल से लेकर सत्ता तक पहुंचने की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाजपा लंबे समय तक विपक्ष में रही और लोगों को लगने लगा था कि यह दल विपक्षी दल के रूप में अच्छा काम करता है। पं दीनदयाल उपाध्याय के काल में भी कई राज्यों में सरकारें बनीं, आगे चलकर धीरे धीरे हमारा संपर्क अन्य लोगों से बढ़ा।

आडवाणी ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में समाजवादियों की चर्चा की और आगे कहा कि राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और मोराजी देसाई से संपर्क बढ़ा और पार्टी का धीरे धीरे देश में असर बढ़ा। दिल्ली तक में सरकार बनी। छह साल केंद्र में सत्ता में रहने के अलावा आज कई राज्यों में भी पार्टी की सरकारें हैं।

आडवाणी ने राजग को भी याद किया और कहा कि राजग का ट्रैक रिकार्ड कांग्रेस से कहीं बेहतर है। इसकी तुलना किसी अन्य दल से की ही नहीं जा सकती है। उन्होंने भाजपा शासित तीनों राज्यों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ के रमन सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सराहना करते हुए कहा कि इन तीनों राज्यों के लोगों को 24 घंटे बिजली मिलने लगी है। उन्होंने कहा कि अब चुनाव भाषण से नहीं काम के आधार पर जीते जा सकते हैं।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर भाजपा को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने बम धमाकों के आरोप में पकड़े गए भावेश पटेल के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस पत्र में पटेल ने कहा है कि उसने कांग्रेसी नेताओं के दबाव में भाजपा के नेताओं का नाम लिया था।

इसे मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर सीबीआई और आयकर विभाग के दुरुपयोग का आरोप लगाया और कहा कि धौंस दी जाती है। आयकर विभाग को छापा मारना है तो राबर्ट वाड्रा के यहां मारना चाहिए। मध्य प्रदेश और गुजरात में कांग्रेस इन दोनों संस्थाओं के दुरुपयोग करने की धौंस देती है।

इस कार्यकर्ता महाकुंभ को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली, वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी संबोधित किया। (एजेंसी)

आधार कार्ड से इतनी मौहब्बत क्यों ? क्या इसमें भी कोई बडा घोटाला है।


आधार कार्ड से इतनी मौहब्बत क्यों ? क्या इसमें भी कोई बडा घोटाला है।

नरेंद्र मोदी ने आधार के लिए खर्च धन पर उठाए सवाल
तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु) | आधार कार्ड परियोजना को लेकर संप्रग सरकार पर आज तीखा हमला बोलते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी ने इसके लिए बड़ा धन खर्च किये जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे भ्रष्टाचार की गंध आती है।

आधार कार्ड परियोजना को लेकर संप्रग सरकार के दावों का उपहास उड़ाते हुए उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस जन ऐसे नाच रहे हैं मानों यह सभी रोगों के इलाज की बूटी हो। उच्चतम न्यायालय द्वारा केन्द्र को आड़े हाथ लिये जाने के साथ लोग प्रधानमंत्री से जवाब मांग रहे हैं कि कितना धन खर्च किया गया, इसका खुलासा कौन करेगा।’ मध्य तमिलनाडु के इस शहर में भाजपा युवा रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए कि इस पर कितना धन खर्च किया गया, सारा धन कहां गया और उससे किसको लाभ पहुंचा।’

संप्रग पर हमला बोलते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘वे केवल वही चीज करना चाहते हैं जहां भ्रष्टाचार हो। जनहित की चीजों में उनकी कोई रूचि नहीं है।’ विभिन्न योजनाओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वह पिछले तीन साल से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में विशिष्ट पहचान पत्र के बारे में चर्चा का अनुरोध करते आ रहे हैं लेकिन उस बारे में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। (एजेंसी)


सरहद की रक्षा जरूरी या दुश्मन से बात ? - नरेंद्र मोदी


मोदी ने पूछा, सरहद की रक्षा जरूरी या दुश्मन के हुक्मरान से बात
नवभारतटाइम्स.कॉम | Sep 26, 2013
http://navbharattimes.indiatimes.com
तिरुचिरापल्ली।। बीजेपी के पीएम कैंडिडेट और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली की रैली में पाकिस्तान से बातचीत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ऐसी क्या मजबूरी है कि वह आतंकवाद के बढ़ावा देने वाले देश के हुक्मरान से बातचीत टालने तक की नहीं सोच पाते?

मोदी ने रैली में आए लोगों से सवाल करते हुए कहा कि पाक सैनिकों द्वारा हमारे जवानों और निर्दोष नागरिकों को मारा जाता है, आतंकवाद आए दिन परेशान करता रहता है, क्या ऐसे समय में भारत के प्रधानमंत्री को पाकिस्तानी पीएम से बातचीत करनी चाहिए? मोदी ने कहा, 'देश में ऐसी सरकार है, जिसके कारण न हमारी माताएं-बहनें सुरक्षित हैं, न सीमा पर तैनात हमारे जवान सुरक्षित हैं, न सीमा पर हमारी भूमि सलामत है, गुजरात हो या तमिलनाडु हो या केरल, न हमारे मछुआरे सुरक्षित हैं। इसलिए हमें ऐसी सरकार को उखाड़ कर फेंक देना चाहिए।'

नरेंद्र मोदी ने रैली की शुरुआत जम्मू आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देकर की। मोदी ने जम्मू में डबल टेररिस्ट अटैक की निंदा करते हुए केंद्र की यूपीए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पाक से बातचीत के मसले पर पीएम पर सीधा हमला करते हुए पूछा कि देश के प्रधानमंत्री की प्राथमिकता क्या है? देश की सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से हमले हो रहे हैं और प्रधानमंत्री न्यू यॉर्क में पाक प्रधानमंत्री से बातचीत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि देश जानना चाहता है कि देश की सरहद की रक्षा जरूरी है या दुश्मन देश के हुक्मरान से बातचीत जरूरी है।

मोदी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय मछुआरों की वोट पर पाक कब्जा कर लेता है और उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ साजिश के लिए करता है। नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि पाकिस्तान अपनी सरजमीं से आतंकी गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहा है, फिर भी हमारी ओर से उसे चिकन बिरयानी का भोज दिया जाता है। उन्होंने कहा, 'हिंदुस्तान के हर नागरिक के मन में सवाल है कि क्या हम इतने कमजोर हैं कि आए दिन हमारे पड़ोसी जो चाहें करते रहें और हम आंखें बंद कर, मुंह पर ताला लगा कर इन चीजों को झेलने पर मजबूर होते रहें।'

तिरची में भी मोदी की रैली के लिए लालकिले जैसा मंच बनाया गया है। इस रैली में शिरकत करने वालों से बतौर एंट्री फी 10-10 रुपये लिए गए हैं, बावजूद इसके रैली में लाखों की भीड़ दिखाई दी। मोदी तमिलनाडु के मछुआरों की समस्या को लेकर भी कांग्रेस पर बरसे। उन्होंने मछुआरों की दुर्दशा के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पड़ोसी देश हिंदुस्तान को टेकन फॉर ग्रांटेड मानते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पहली जिम्मेदारी बनती है कि दिल्ली में बैठी दुर्बल सरकार को उखाड़ फेंकें।

मोदी ने कहा, 'केंद्र सरकार इस देश की ऐसी दुर्दशा कर देगी कि हिंदु्स्तान की तरुणाई सड़कों पर भीख मांगती नजर आएगी। दिल्ली की सरकार की नीतियों के कारण हमारे देश के सारे उद्योग ठप होते जा रहे हैं और छोटे उद्योग पर ताले लग रहे हैं। अमीरों का भला करना और बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की केंद्र सरकार की नीति रही है।'

मोदी ने तमिलनाडु के लोगों को मेहनती बताते हुए कहा कि यहां के लोग रॉयल पीपल हैं। उन्‍होंने दावा किया कि गुजरात और तमिलनाडु कई मायनों में एक जैसा है। गुजरात और तमिलनाडु के बीच रिश्‍तों के बारे में बताते हुए मोदी ने कहा कि गुजरात सबसे ज्यादा कपास का उत्‍पादन करता है और इस कपास की सबसे ज्यादा खपत तमिलनाडु में होती है।
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दिल्ली की निकम्मी सरकार को उखाड़ फेंकने का वक्त : नरेंद्र मोदी
ज़ी मीडिया ब्यूरो
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त्रिची/तिरुवनंतपुरम : तमिलनाडु के त्रिची में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा के पीएम उम्‍मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पर सीधा हमला करते हुए सवाल किया कि देश के प्रधानमंत्री की प्राथमिकता क्या है? देश की सरहद पर पाकिस्तान की तरफ से हमले हो रहे हैं और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से बातचीत करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि देश जानना चाहता है कि देश की सरहद की रक्षा जरूरी है या दुश्मन देश के हुक्मरान से बातचीत जरूरी है। मोदी ने जनता से आह्वान किया कि दिल्ली की ऐसी सरकार देश को मंजूर नहीं और ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकने का वक्त आ गया है।

अपने भाषण की शुरुआत में मोदी ने जम्‍मू में हुए आतंकी हमले और केन्‍या के नैरोबी में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया और सभा में मौजूद लोगों से दो मिनट तक मौन रखने का आह्वान किया। मोदी ने हालांकि शुरू में अपना भाषण अंग्रेजी में दिया और फिर हिन्दी में बोला। लेकिन उनके भाषण को स्‍थानीय भाषा में एक अनुवादक के जरिये भी संबोधित किया जा रहा है। मोदी ने कुछ शब्‍द तमिल में भी कहा, जिसका वहां मौजूद लोगों ने जोरदार स्‍वागत किया।

मोदी ने तमिलनाडु के लोगों को मेहनती और लगनशील करार देते हुए कहा कि यहां के लोग `रॉयल पीपुल` हैं। उन्‍होंने दावा किया कि गुजरात और तमिलनाडु कई मायनों में एक जैसा है। गुजरात और तमिलनाडु के बीच रिश्‍ते का खुलासा करते हुए मोदी ने कहा कि गुजरात सबसे अधिक कपास का उत्‍पादन करता है जबकि इस कपास की सबसे अधिक खपत तमिलनाडु में होती है। मोदी ने भारतीय मछुआरों की समस्‍या के बहाने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

मोदी ने कहा कि युद्ध से ज्‍यादा जवान आतंकवादियों की गोली से मारे गए हैं। उन्‍होंने कहा, इटली के नौसैनिक हमारे मछुआरों की हत्‍या कर चले जाते हैं। पाकिस्‍तानी सैनिक हमारे जवानों के सिर काटकर ले जाते हैं। उन्‍होंने ऐसे माहौल में पाकिस्‍तान से बातचीत करने की जल्‍दबाजी पर भी सवाल उठाए। मोदी ने कहा, क्या आतंकी हमले पर हम चुप रह सकते हैं। ऐसे वक्त में पाकिस्‍तान से बातचीत में जल्दी क्यों।'

मोदी ने कमजोर आर्थिक नीति और नरम विदेश नीति के मसले पर केंद्र पर निशाना साधा। उन्‍होंने कहा, 'इस सरकार की वजह से न तो देश में माता-बहनें सलामत हैं, न तो सीमा पर तैनात जवान सलामत हैं, न तो चीन की सीमा पर हमारी जमीन सलामत है, गुजरात हो तमिलनाडु या केरल, कहीं भी हमारे मछुआरे सलामत नहीं है तो इस निकम्‍मी सरकार को उखाड़ फेंकना चाहिए।'

मोदी ने कहा, 'दिल्‍ली में बैठी सरकार ने रुपये को कमजोर कर दिया है। अगर यही हालत रही तो कल हमें रुपया सूक्ष्‍मदर्शी यंत्र से खोजना पड़ेगा। केंद्र सरकार बड़े पूंजीपतियों को अमीर बनाने का काम करती है लेकिन कर्ज चुकाने में असमर्थ छोटे कारोबारियों को खुदकुशी करने पर मजबूर करती है।'

मोदी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष राजनाथ सिंह भी मंच पर मौजूद हैं। इस मंच को दिल्‍ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले की शक्‍ल दिया गया है। राजनाथ सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि भाजपा युवाओं की समस्‍या के प्रति हमेशा से चिंतित रही है और एनडीए सरकार के कार्यकाल में इस दिशा में काफी काम किया गया। उन्‍होंने कहा, `एनडीए सरकार के दौरान महंगाई नहीं बढ़ी। हमारे मंत्री भ्रष्‍ट नहीं थे। आज जो कुछ हो रहा है, वह आपके सामने है।`

इससे पहले, अपने पहले केरल दौरे पर पहुंचे मोदी ने मशहूर पद्मनाभस्‍वामी मंदिर में दर्शन किए। मोदी त्रावणकोर राजघराने के महाराजा महेंद्र वर्मा के बुलावे पर उनसे मिलने भी गए। कवाडियार पैलेस में मुलाकात के दौरान महाराजा ने मोदी को पद्मनाभस्‍वामी मंदिर की पेंटिंग्‍स भेंट की। इसके बाद मोदी माता अमृतानंदमयी की 60वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम `अमृतावर्षम 60` में हिस्‍सा लेने कोल्‍लम के समीप अमृतापुरी पहुंचे। मोदी ने माता अमृतानंदमयी का आशीर्वाद लिया।
First Published: Thursday, September 26, 2013, 19:09