सोमवार, 30 सितंबर 2013

SUICIDE BOMB : देश के खिलाफ


धर्मनिरपेक्षता को SUICIDE BOMB की तरह देश के खिलाफ सोनिया के सामंत उपयोग करेंगे इसकी कल्पना भी देश के लोगो ने नहीं की थी। आज गृह मंत्रालय ने जो सरकुलर जारी किया है जिसमे पुलिस को हिदायत दी गयी है कि मुसलमानों को दंगा के बाद या उसकी सम्भावना को देखकर गिरफ्तार तबतक नहीं किया जाए जबतक फुल प्रूफ प्रमाण नहीं हो। तो क्या किसी इसाई , सिख, बौद्ध, पारसी, जैन, वनवासी, दलित को पुलिस बेवजह गिरफ्तार कर सकती है? मै पुनः एक प्रसंग को दुहरा रहा हूँ .१९४७ के दिसंबर में अजमेर में ८०० दंगइयो को गिरफ्तार किया गया था तो नेहरु ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि
संतुलन बनाने के लिए हिन्दुओ को भी गिरफ्तार करना चाहिए। पटेल ने इसे नकार दिया था। आज सरकार के गृह मंत्री तो संतरी है. वे कैसे नकार सकते हैं? यह सरकुलर DAY LIGHT MURDER OF SECULARISM है। राज्य शांतिकाल के दंगइयो के सरंक्षण , संबल दे रही है।

केन्द्रीय गृहमंत्री का साम्प्रदायिक सोच उजागर



केन्द्रीय गृहमंत्री का साम्प्रदायिक सोच उजागर
कांग्रेस के नेतृत्व में केन्द्र सरकार का कितना भारी पतन हुआ है इसका उदाहरण यह समाचार है।
कोई भी गृहमंत्री किसी धर्म, सम्प्रदाय,पंथ या जाती को लेकर कोई आदेश नहीं दे सकता ।
संविधान भी यही कहता है।
मगर ये केन्द्रीय गृहमंत्री का आदेश है कि मुस्लिम युवकों को अवैध  हिरासत में मत रखो
मतलब कि अन्ययुवकों को पुलिस अवैध हिरासत में रख सकती है।
......
मुस्लिम युवकों को गलत तरीके से न रखें हिरासत मेंर - शिंदे
भाषा| 30,sep,2013,
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/23301712.cms?google_editors_picks=true&google_editors_picks=true
नई दिल्ली।। केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को सभी मुख्यमंत्रियों से यह तय करने को कहा कि कोई भी बेकसूर मुस्लिम युवक आतंक के नाम पर गलत तरीके से हिरासत में न लिया जाए।

मुख्यमंत्रियों को लिखी एक चिट्ठी में शिंदे ने कहा है कि कानून से जुड़ी एजेंसियों द्वारा बेकसूर मुस्लिम युवाओं को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के बारे में केंद्र सरकार को विभिन्न प्रतिनिधित्वों के जरिए बताया जा रहा है।

उन्होंने लिखा है, kuछ अल्पसंख्यक युवाओं को लग रहा है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया और उन्हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित किया गया।श् गृह मंत्री ने जोर दिया कि सरकार हर तरह के आतंकवाद से मुकाबला करने के अपने मुख्य सिद्धांत के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने मुख्यमंत्रियों को लिखा है, श्सरकार को यह तय करना है कि कोई भी बेकसूर व्यक्ति बेवजह परेशान न हो।श् शिंदे ने राज्य सरकारों से कहा कि वे आतंकवाद संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के परामर्श से विशेष अदालतें स्थापित करें, विशेष सरकारी वकीलों की नियुक्ति करें और अन्य लंबित मामलों की तुलना में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा, श्जहां अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य की गलत भावना से गिरफ्तारी हो, गलत तरीके से गिरफ्तारी हो वहां ऐसा करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कड़ी एवं शीघ्र कार्रवाई की जानी चाहिए। गिरफ्तार व्यक्ति को न केवल तत्काल रिहा किया जाए बल्कि उसे समुचित मुआवजा दिया जाना चाहिए और पुनर्वास किया जाना चाहिए ताकि वह मुख्यधारा से जुड़ सके।श्

मई में केंद्र सरकार ने आतंकवाद संबंधी मामलों के लिए एनआईए कानून के तहत 39 विशेष अदालतें स्थापित की थीं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान ने भी शिंदे को चिट्ठी लिखकर देश के अलग-अलग भागों में मुस्लिम युवकों की आतंकवाद संबंधी मामलों में गलत तरीके से गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई थी।

गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून के प्रावधानों को लेकर मुस्लिम निकायों की चिंता से गृह मंत्रालय को अवगत कराते हुए खान ने विशेष अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था, ताकि आतंकवाद संबंधी सभी मामलों की जल्द सुनवाई हो सके। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के सुझाव का समर्थन करते हुए शिंदे ने उन्हें लिखा, श्मैं आपको आश्वासन देता हूं कि ऐसा होगा।

चारा घोटाला: जानिए कब - कब, क्या हुआ


टीम डिजिटल,सोमवार, 30 सितंबर 2013
पटना, अमर उजाला
http://www.amarujala.com/news/states/bihar/fodder-scam-decision-today/
बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले आरसी 20 ए/96 पर सीबीआइ की विशेष अदालत ने लालू यादव समेत 45 लोगों को दोषी ठहरा दिया है। प्राथमिकी दर्ज होने के करीब 17 साल बाद इस मामले में फैसला सुनाया गया है।
संयुक्त बिहार का चारा घोटाला एक ऐसा मामला है, जिसमें छह राजनीतिज्ञ, चार आइएएस अधिकारी, एक आइआरएस अधिकारी, आठ पशुपालन व एक ट्रेजरी अफसर और 25 सप्लायरों ने न्यायिक प्रक्रिया का सामना किया है।

इस मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद, जगन्नाथ मिश्र सहित कुल 56 आरोपी बनाए गे थे। संयुक्त बिहार में पशुपालन विभाग में हुए करोड़ों रुपये के चारा घोटाला मामले में आरोपी लालू प्रसाद, जगन्नाथ मिश्र बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
सुनवाई के दौरान सात आरोपियों की मौत हो गई, दो वायदा माफ गवाह बन गए और एक ने आरोप स्वीकार कर लिया। वहीं एक को आरोप मुक्त करार दिया गया। सभी पर झारखंड के चाइबासा जिले के कोषागार से 37.70 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी करने का आरोप है।

इस घोटाले में आरोपी बनने के बाद लालू प्रसाद यादव को 1997 में मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। यह घोटाला 1996 में सामने आया था। घोटाले से संबंधित 61 में से 54 मामले वर्ष 2000 में पृथक राज्य के रूप में गठित होने के बाद झारखंड स्थानांतरित कर दिए गए।
सीबीआई की विभिन्न अदालतें 43 मामलों में अपना फैसला सुना चुकी हैं। लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र पांच मामलों में आरोपी हैं।

चारा घोटाले में आरोपी राजनेता और बड़े अधिकारी
आरोपी राजनेता में लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्र, जगदीश शर्मा, आरके राणा, ध्रुव भगत, विद्या सागर निषाद, भोला राम तूफानी ( सुनवाई के दौरान मौत), चंद्र वर्मा ( सुनवाई के दौरान मौत) है।

वहीं इस मामले में आरोपी बड़े अधिकारी हैं फूल चंद सिंह (तत्कालीन वित्त आयुक्त), महेश प्रसाद (तत्कालीन पशुपालन सचिव), बेक जूलियस (तत्कालीन पशुपालन सचिव), के अरुमुगम ( तत्कालीन पशुपालन सचिव), अधीक चंद्र दास (तत्कालीन आयकर आयुक्त, रांची)।

चारा घोटाले में लालू दोषी, जेल भेजा , राजनैतिक फायदा नितिश को .......





चारा घोटाले में लालू दोषी करार, बिरसा मुंडा जेल भेजा गया
आईबीएन-7 | Sep 30, 2013

http://khabar.ibnlive.in.com/news/108987/12
नई दिल्ली। रांची की सीबीआई कोर्ट ने चारा घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू यादव को दोषी करार दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने 44 और आरोपियों को भी दोषी करार दिया है। इस फैसले के तुरंत बाद लालू को हिरासत में ले लिया गया है। लालू सहित 38 दोषियों की सजा पर फैसला 3 अक्टूबर को होगी। सात दोषियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने कहा है कि फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। वहीं कोर्ट के फैसले के बाद लालू को बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया है।

कोर्ट में 7 आरोपियों के वकील को कहा गया कि इनकी सजा पर बहस आज ही शुरू की जाए। इसमें दो नेता विद्यासागर निषाद, ध्रुव भगत और के अमुगम (आईएएस अफसर) और चार सप्लाइर हैं। कोर्ट ने इन्हें तीन-तीन साल की सजा सुनाई। बाकी 38 दोषियों में लालू यादव, जगन्नाथ मिश्रा, जगदीश शर्मा शामिल हैं। इन्हें तीन अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए। इससे साफ है कि इन्हें तीन साल से ज्यादा की सजा होने वाली है।

आरोपियों के वकील सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि जिन-जिन को तीन साल से कम सजा मिली है उन्हें बेल मिलने की संभावना है। जिनकी सजा पर सुनवाई तीन अक्तूबर को है उनकी सजा का ऐलान उसी दिन वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए होगा। लव एंड ऑर्डर और लोगों की सहूलियत को देखते हुए ऐसा कदम उठाया गया है। दोषी जेल में ही रहेंगे, यहां नहीं लाया जायेगा। वहीं से वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए सजा सुनाई जाएगी।

दोषियों में पूर्व मंत्री जगन्नाथ मिश्र, जेडीयू सांसद जगदीश शर्मा भी शामिल हैं। इन सभी पर 37 करोड़ 68 लाख रुपए के चारा घोटाले का आरोप है। दागी नेताओं से जुड़े अध्यादेश के खिलाफ बने माहौल के बीच लालू के इस केस पर पूरे देश की नजर थी। फैसले के मद्देनजर बिहार के सभी जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, ताकि फैसले के बाद उनके समर्थक किसी तरह का हंगामा न कर सकें।

37 करोड़ रुपए निकालने का आरोप

चर्चित चारा घोटाले में 17 साल की लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार सीबीआई की विशेष अदालत आरजेडी प्रमुख लालू यादव पर अपना फैसला सुना दिया। लालू यादव पर चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 37 करोड़ 68 लाख रुपए निकालने का आरोप है। इस मामले में सीबीआई ने उनके खिलाफ 19 मार्च 1996 को एफआईआर दर्ज की थी। इसी मामले में लालू यादव को 30 जुलाई 1997 को गिरफ्तार किया गया था। करीब 6 महीने जेल में रहने के बाद लालू दिसंबर में जेल से बाहर आ पाए थे।

1996 में सीबीआई को सौंपा मामला

लेकिन इस बार संकट बड़ा हो सकता है। लालू की तरफ से 16 दिन तक बहस के बाद 17 सितंबर को कोर्ट ने अपना फैसला 30 तारीख के लिए सुरक्षित रख लिया था। लालू यादव के वकील चितरंजन सिन्हा का कहना है कि उन्नीस सौ छियानवे में इस मामले को सीबीआई को दिया गया था। सीबीआई ने कहा की इसमें ये लोग संलिप्त हैं।

7 साल की हो सकती है सजा

दागी नेताओं से जुड़े अध्यादेश के खिलाफ देश में बने माहौल के बीच लालू के इस केस पर सबका ध्यान था। लालू दोषी पाए गए हैं और उन्हें 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अगर उनकी सजा 2 साल से ज्यादा की हुई तो तुरंत ही संसद की सदस्यता खारिज हो जाएगी। सजा काटने के लिए बाद भी अगले 6 साल तक वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जेल जाने के बाद पार्टी और बिहार की जमीन पर उनकी रही-सही पकड़ भी कमजोर होनी तय है।

इस केस में बरी होने पर भी राहत नहीं

चाईबासा केस में लालू के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और जेडीयू सांसद जगदीश शर्मा पर भी घोटाले में शामिल रहने का आरोप थे। चाईबासा केस के अलावा लालू पर और भी आरोप हैं। लालू पर चारा घोटाले के दौरान रांची के डोरंडा से 184 करोड़ की अवैध निकासी, दुमका कोषागार से 3.47 करोड़ की अवैध निकासी, देवघर कोषागार से 97 लाख की अवैध निकासी के मामले चल रहे हैं। मुकदमा करने वाले सरयु राय ने बताया कि यह घोटाला पहले से चला आ रहा था। लेकिन लालू के सत्ता में आते ही इसका पैमाना और बढ़ गया।

लालू ने राबड़ी को बना दिया था सीएम

नब्बे के दशक में चारा घोटाला तब सुर्खियों में आया जब बिहार के पशुपालन विभाग में जानवरों के लिए चारे की खरीद और ढुलाई में तमाम गड़बड़ियां पाई गईं। जांच में ये तक सामने आया कि जानवरों के चारे की ढुलाई के लिए कागजों पर स्कूटर और मोटरसाइकिल तक का इस्तेमाल दिखाया गया। बवाल मचा तो लालू की गिरफ्तारी भी हुई। उस वक्त अपना दबदबा कायम रखने के लिए लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनवा दिया था।

बेहद कम पढ़ी-लिखी राबड़ी का मुख्यमंत्री बनना उस समय बहुतों को अखरा। लेकिन लालू अपनी जिद पर अड़े रहे। कहते हैं खुद राबड़ी भी सीएम बनने के लिए तैयार नहीं थीं। लेकिन लालू ने उन्हें सीएम बनाकर जेल से ही बिहार की सत्ता पर राज किया। अब 17 साल बाद इस केस में फैसले की घड़ी आई है। 17 साल पहले सुर्खियो में आये चारा घोटाले में तब पचास से भी ज्यादा लोगों का नाम सामने आया था। जिसमें किसी की मौत हो गयी तो कुछ लोग बरी भी हो गये। लेकिन इस चारा घोटाले के आरोप में राजनेता बचते रहे।
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चारा घोटाला केस में लालू समेत 45 आरोपी दोषी करार, 

3 से 7 साल की हो सकती है सजा

http://aajtak.intoday.in/story/fodder-scam-rjd-chief-lalu-prasad-found-guilty-1-743260.html
आज तक वेब ब्‍यूरो [Edited By: मलय ओझा] | नई दिल्‍ली/पटना/रांची, 30 सितम्बर 2013 |


बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और चारा घोटाले के प्रमुख आरोपी लालू प्रसाद यादव से सीधे जुड़े चाईबासा कोषागार से फर्जी ढंग से 37.7 करोड़ रुपये निकालने के मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. जज प्रभाष कुमार सिंह ने इस मामले में लालू यादव को दोषी करार दिया है. इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, सांसद जगदीश शर्मा और पूर्व सांसद आरके राणा समेत सभी 45 आरोपियों को भी दोषी ठहराया गया है.

उधर, लालू के बेटे तेजस्‍वी ने कहा, 'ये हमारे नेता के खिलाफ साजिश है. हम फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे. विरोधियों को चुनाव में जवाब देंगे, जनता की अदालत में जाएंगे.

फैसले के तुरंत बाद लालू को कोर्ट में ही हिरासत में ले लिया गया. उन्‍हें बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया है. जब वे कोर्ट से बाहर निकले तो लालू के साथ उनका बेटा तेजस्‍वी भी था और वे चारों ओर से अपने समर्थकों से घिरे हुए थे. जज प्रभाष कुमार सिंह के आदेश के बावजूद उनके समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की. आपको बता दें कि जज ने साफ तौर पर कहा था कि नारेबाजी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी क्‍योंकि ऐसा करना कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डालना है.

लालू समेत अन्य दोषियों को कितनी सजा होगी, इस पर मंगलवार को कोर्ट में बहस होगी और 3 अक्टूबर को सजा का ऐलान कर दिया जाएगा. लालू को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही सजा सुनाई जाएगी. जैसे ही उन्हें सजा मिलेगी, तभी उनकी संसद सदस्यता खत्म हो जाएगी.

इस फैसले से लालू का राजनीतिक सफर पर विराम लग गया है. क्योंकि अब वह चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. उनकी संसद सदस्यता खत्म हो सकती है. उन पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 437 ए और 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया था. भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत भी लालू पर केस दर्ज किया गया था.

950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले के इस मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने अपना फैसला 17 सितंबर को सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में लालू के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत 44 अन्य आरोपियों के भी भाग्य का फैसला हो गया है.

इससे पूर्व लालू प्रसाद अपने कुल देवताओं और बाबाओं का आशीर्वाद लेते हुए फैसला सुनने के लिए अपने लाव लश्कर के साथ रविवार शाम पटना से विमान के जरिए रांची पहुंचे. उनका छोटा बेटा तेजस्वी उनके साथ था. लालू फैसले को लेकर तनाव के चलते रविवार शाम से सोमवार सुबह तक पूरी तरह शांत दिखाई दिए.

चारा घोटाले में कुल 64 केस, जिसमें से 5 लालू पर
1996 में सामने आए चारा घोटाले के कुल 64 केस में से लालू यादव पर 5 केस चल रहे हैं. इनमें से 4 केस की सुनवाई रांची की सीबीआई अदालत में ही चल रही है. फरवरी 2002 से शरू हुए केस के ट्रायल में 19 अक्टूबर 2012 से अंतिम बहस शुरू हुई. इस साल 17 सितंबर को दोनों तरफ की बहस पूरी हो गई. सीबीआई के विशेष जज पी के सिंह ने फैसला सुनाने के लिए 30 सितंबर की तारीख मुकर्रर की थी.

बिहार की राजनीति में लालू यादव
बिहार पर 15 साल तक शासन करने के बाद लालू आज एक हारे हुए सेनापति की तरह जरूर हैं लेकिन बिहार की जमीन जिस राजनीति को पैदा करती है, लालू आज भी उसके लिए अहम खाद हैं.

सत्ता के समीकरण और वोट बैंक पॉलिटिक्स में लालू आज भी बहुत अहम हैं. भले ही बिहार की कुर्सी उनसे छिन गई हो पर वोट प्रतिशत की बात करें तो लगता है कि अब भी वो जनता की पसंद हैं.

जाहिर है अगर लालू चारा घोटाले के केस में दोषी करार हो गए तो विरोधियों के लिए खासकर नीतीश कुमार के लिए जैसे बैठे-बिठाए हाथों में लड्डू मिल जाने जैसा हो जाएगा.

पिछले दिनों जिस तरह से बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन टूटा है, साफ हो गया है कि लालू को तो इसका फायदा मिलेगा ही. ऐसे में चारा घोटाले का फैसला लालू के वोट बैंक की सियासत को भी असर कर सकता है. विरोधी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाएंगे और लालू जेल में रहकर उसका जवाब भी नहीं दे पाएंगे.

बीजेपी ने तो अभी से हल्लाबोल दिया है और दागी नेताओं को बचानेवाले अध्यादेश के बहाने कांग्रेस पर भी कीचड़ उछाला है. बड़ी बात तो ये है कि आज के फैसले के बाद भले ही लालू राजनीति ना कर पाएं लेकिन उन्हें लेकर राजनीति फिर भी चलती रहेगी.